Wednesday, 14 Oct 2026 | 08:26 AM

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ब्यूटी+पर्सनल केयर का खर्च 10 साल में 5 गुना बढ़ा:ड्रेसिंग टेबल में काजल, पाउडर, लिपस्टिक ही नहीं; एसपीएफ फाउंडेशन, मॉइश्चराइजर-प्राइमर कॉम्बो जैसे प्रोडक्ट भी

ब्यूटी+पर्सनल केयर का खर्च 10 साल में 5 गुना बढ़ा:ड्रेसिंग टेबल में काजल, पाउडर, लिपस्टिक ही नहीं; एसपीएफ फाउंडेशन, मॉइश्चराइजर-प्राइमर कॉम्बो जैसे प्रोडक्ट भी

भारत में महिलाएं प्राचीन काल से ही सजने-संवरने और सौंदर्य देखभाल के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करती रही हैं। कभी उबटन, चंदन, गुलाबजल, काजल, मेहंदी और प्राकृतिक तेलों तक सीमित रहने वाला ब्यूटी कल्चर आज अरबों रुपए के विशाल बाजार में बदल चुका है। पहले सौंदर्य देखभाल का मतलब केवल पारंपरिक घरेलू नुस्खे और सामाजिक अवसरों पर सजना-संवरना होता था, लेकिन अब यह आत्मविश्वास, लाइफस्टाइल, सेल्फ-केयर, सोशल मीडिया उपस्थिति और व्यक्तिगत पहचान का हिस्सा बन गया है। भारतीय महिलाओं की ड्रेसिंग टेबल अब सिर्फ काजल, पाउडर और एक लिपस्टिक तक सीमित नहीं रही। बीते दो दशकों में भारत का ब्यूटी कल्चर तेजी से बदला है। पहले जहां ‘गोरा दिखाना’ ब्यूटी इंडस्ट्री का सबसे बड़ा वादा था, वहीं अब ‘स्किन हेल्थ’, ‘ग्लो’, ‘सन प्रोटेक्शन’, ‘हाइड्रेशन’ और ‘एंटी-एजिंग’ जैसे शब्द आम हो चुके हैं। महिलाएं अब यह जानना चाहती हैं कि किसी प्रोडक्ट में कौन-सा सक्रिय तत्व है और वह त्वचा पर क्या असर डालेगा। कोविड के बाद ‘स्किन-फर्स्ट” और ‘स्किन मिनिमलिज्म’ का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। यानी कम लेकिन असरदार उत्पादों का इस्तेमाल। ग्लोबल डेटा, वोग इंडिया जैसे प्रकाशनों के मुताबिक अब ‘हाइब्रिड ब्यूटी’ तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यानी ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल जो मेकअप और स्किनकेयर दोनों का काम करें। जैसे- एसपीएफ वाला फाउंडेशन, सीरम युक्त कंसीलर या मॉइश्चराइजर-प्राइमर कॉम्बो। ब्यूटी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक बीते एक दशक में परिवारों के मासिक खर्च में स्किनकेयर, हेयरकेयर और कॉस्मेटिक्स का हिस्सा लगातार बढ़ा है। प्रति महिला ब्यूटी और पर्सनल केयर मासिक खर्च पांच गुना तक बढ़ गया है। बदलता ट्रेंड: फेयर स्किन, ग्लास स्किन, मैट स्किन… हाइब्रिड 1950-60 और पहले – घरेलू नुस्खों और सादगी का दौर ब्यूटी केयर मतलब बेसन, मलाई, हल्दी, गुलाबजल और नारियल तेल। ड्रेसिंग टेबल पर टैल्कम पाउडर, काजल और सिंदूर ही मुख्य उत्पाद होते थे। मेकअप शादी या विशेष अवसरों तक सीमित था। 1960-80- फिल्मों का असर, गोरापन सुंदरता का प्रतीक हीरोइनों की हेयरस्टाइल और चटक मेकअप का असर बढ़ा। रंगीन लिपस्टिक, नेल पॉलिश, कॉम्पैक्ट पाउडर लोकप्रिय हुए। गोरी त्वचा सुंदरता का प्रतीक बनी। फेयरनेस क्रीम का बाजार तेजी से बढ़ा। 1990 का दशक – उदारीकरण और विदेशी ब्रांड्स का प्रवेश अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भारत आए। अलग-अलग शेड्स की लिपस्टिक, फाउंडेशन और हेयर कलर के विकल्प मिले। फैशन मैगजीन और टीवी विज्ञापनों ने ‘ग्लैमरस लुक’ को लोकप्रिय बनाया। 2000 का दशक – सलून संस्कृति का उदय छोटे शहरों में भी फेशियल, हेयर स्पा, स्किन ट्रीटमेंट आम होने लगे। युवा लड़कियां भी नियमित ब्यूटी प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने लगीं। 2010 के बाद – इन्फ्लुएंसर्स ने बदला ट्रेंड ‘नो-मेकअप मेकअप’, ‘कोरियन स्किनकेयर’, ‘सनस्क्रीन’, ‘रेटिनॉल’, ‘नियासिनामाइड’ और ‘क्लीन ब्यूटी’ जैसे शब्द आम हो गए। (स्रोत- इंस्टीट्यूटो मारांगोनी, वोग) अब ब्यूटी यानी स्किन हेल्थ ब्यूटी काउंसलर लवीना मनवानी कहती हैं, भारतीय महिलाओं की सोच में सबसे बड़ा बदलाव ‘स्किन हेल्थ’ को लेकर आया है। सोशल मीडिया, कोरियन ब्यूटी ट्रेंड्स ने भी पसंद बदली है। पहले ड्रेसिंग टेबल पर 4-5 उत्पाद होते थे, अब 20-30 होना सामान्य है। 10 साल में ब्यूटी केयर खर्च 5 गुना बढ़ गया है। तेजी से बढ़ रहा ब्यूटी बाजार रेडसीर, रिसर्च एंड मार्केट्स जैसी कंपनियों की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारतीय ब्यूटी और पर्सनल केयर (बीपीसी) बाजार का आकार करीब 2 लाख करोड़ रुपए था, जो 2030 तक 4 लाख करोड़ रुपए से ऊपर पहुंचने का अनुमान है। 3-4 वर्षों में भारत चौथा सबसे बड़ा बीपीसी मार्केट होगा। बदल रहा है ब्यूटी प्रोडक्ट की खरीदारी का तरीका 85% उपभोक्ता अब ब्यूटी प्रोडक्ट्स के इंग्रेडिएंट्स पर ध्यान देते हैं। 48% लोग सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से प्रभावित होकर खरीदारी करते हैं। 55% उपभोक्ताओं को कोलेजन आधारित उत्पाद आकर्षक लगते हैं। 46% लोग हायल्यूरोनिक एसिड वाले उत्पाद पसंद कर रहे हैं। (स्रोत- ग्लोबल डेटा)

तलाक पर बोले मौनी के पति सूरज:हमारे बीच कोई विवाद या एलिमनी का लेनदेन नहीं; अफवाहें फैलाना बंद करे

तलाक पर बोले मौनी के पति सूरज:हमारे बीच कोई विवाद या एलिमनी का लेनदेन नहीं; अफवाहें फैलाना बंद करे

एक्ट्रेस मौनी रॉय और उनके पति सूरज नांबियार ने पिछले गुरुवार को अलग होने का फैसला किया था। अब इस मामले पर बिजनेसमैन सूरज नांबियार का स्टेटमेंट सामने आया है। सोमवार को जारी किए गए इस बयान में सूरज ने मीडिया में चल रही अफवाहों पर नाराजगी जताई है। उन्होंने साफ किया है कि उनके अलग होने के फैसले में कोई विवाद, एलिमनी (गुजारा भत्ता) या कोई तीसरा शख्स शामिल नहीं है। दोनों ने आपसी सहमति और सम्मान के साथ अलग होने का फैसला किया है। मौनी रॉय ने भी इस पोस्ट को दोबारा शेयर किया है। अफवाहों को बताया बेबुनियाद और गलत सूरज नांबियार ने अपने ऑफिशियल बयान में कहा कि मीडिया के कुछ हिस्सों की तरफ से हमारी पर्सनल लाइफ में जरूरत से ज्यादा दखल दिया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से हमारे अलग होने को लेकर जो भी खबरें चलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद हैं। सूरज ने कहा कि हम दोनों आपसी सहमति से अलग हो रहे हैं और इस मामले को निजी तौर पर सुलझाने के लिए समय ले रहे हैं। सोशल मीडिया पर चल रही मनगढ़ंत बातें सिर्फ लोगों को बदनाम करने की कोशिश हैं। गुरुवार को अलग होने की घोषणा की थी गुरुवार को मौनी और सूरज ने इंस्टाग्राम पर एक जॉइंट नोट जारी कर बताया था कि वे अपनी शादी खत्म कर रहे हैं। मौनी और सूरज ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा था, हमें दुख है कि मीडिया के कुछ लोगों ने हमारी निजी जिंदगी में बेवजह और जरूरत से ज्यादा दखल दिया है। हम यह कहना चाहते हैं कि हमने अलग होने का फैसला किया है और इस समय को शांति और समझदारी के साथ निजी तौर पर संभाल रहे हैं। हमारी निजी जिंदगी को लेकर कई झूठी कहानियां और गलत बातें फैलाई गई हैं, जो हमारे रिश्ते की सच्चाई नहीं दिखातीं। काफी सोच-विचार के बाद हमने आपसी सम्मान और समझदारी के साथ अलग-अलग रास्तों पर आगे बढ़ने का फैसला किया है। न कोई विवाद है और न ही एलिमनी का मामला सूरज ने सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को खारिज करते हुए लिखा कि मैं कुछ बातें बिल्कुल साफ कर देना चाहता हूं। हमारे बीच कोई एलिमनी का लेनदेन नहीं हो रहा है। हमारे बीच किसी तरह का कोई झगड़ा या विवाद नहीं है। इस अलगाव के पीछे कोई तीसरा शख्स भी नहीं है। मौनी और मैंने एक-दूसरे की भलाई को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया है। यही सच है और इसके अलावा जो कुछ भी मीडिया में दिखाया जा रहा है, वह सिर्फ काल्पनिक है। चुप रहना सही नहीं समझा सूरज ने आगे लिखा कि इस मुश्किल समय में मौनी और मैंने हमेशा गरिमा बनाए रखी है। हम मीडिया से भी इसी सम्मान की उम्मीद करते हैं। मैं इन अफवाहों का जवाब सीधे तौर पर इसलिए दे रहा हूं क्योंकि जानबूझकर फैलाई जा रही झूठी खबरों पर चुप रहना मुझे सही नहीं लगा। गलत जानकारी के खिलाफ बोलना बेहद जरूरी था। इस पूरे बयान को एक्ट्रेस मौनी रॉय ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर री-शेयर किया है। साल 2022 में हुई थी दोनों की शादी मौनी रॉय और सूरज नांबियार की शादी जनवरी 2022 में गोवा में हुई थी। दोनों की शादी बंगाली और साउथ इंडियन रीति-रिवाजों से हुई थी, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थीं। दोनों की मुलाकात साल 2018 में दुबई के एक क्लब में हुई थी, जिसके बाद उन्होंने करीब तीन साल तक एक-दूसरे को डेट किया। शादी के चार साल पूरे होने से पहले ही दोनों ने पिछले हफ्ते एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी कर तलाक का ऐलान किया था।

अंजुम शर्मा बोले- ‘कप्तान’ का मुन्ना जमीनी और रॉ किरदार:‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला से बिल्कुल अलग अंदाज में दिखे एक्टर

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एक्टर अंजुम शर्मा इन दिनों अपनी वेब सीरीज ‘कप्तान’ को लेकर चर्चा में हैं। इस थ्रिलर में अंजुम ने ‘मुन्ना’ का किरदार निभाया है। दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में अंजुम शर्मा ने ‘कप्तान’ के मुन्ना, ‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला, OTT के बदलते दौर, मास सिनेमा और एक्टिंग के अपने सफर पर बात की। “कप्तान” एक इंटेंस कॉप-क्राइम ड्रामा है, जिसे जतिन वागले ने डायरेक्ट किया है। इसमें साकिब सलीम, सिद्धार्थ निगम और कविता कौशिक भी हैं। यह सीरीज अमेजन MX प्लेयर पर फ्री स्ट्रीम हो रही है। सवाल: ‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला और ‘कप्तान’ के मुन्ना, दोनों किरदार बिल्कुल अलग हैं। मुन्ना को लेकर क्या सोच थी? जवाब: सबसे पहले तो नाम सुनते ही लोग ‘मिर्जापुर’ वाले मुन्ना तक पहुंच जाते हैं। मुझे भी लगा था कि यार, फिर से मुन्ना? लेकिन फिर लगा कि ठीक है, देखते हैं इसे ‘मिर्जापुर’ के मुन्ना के किरदार से अलग कैसे बनाया जाए। सबसे बड़ा फर्क उसकी बेल्ट और बोली में था। ‘मिर्जापुर’ पूर्वांचल में सेट थी और ‘कप्तान’ वेस्टर्न यूपी में सेट है। ‘कप्तान’ का मुन्ना बहुत ज्यादा जमीनी इंसान है। वो हंसते-हंसते कुछ भी कर देता है। किसी बड़ी घटना को अंजाम देने से पहले बहुत सोचता नहीं है। उसके अंदर एक मस्ती है, एक रॉनेस है। सवाल: इस किरदार के लिए सबसे बड़ी तैयारी क्या थी? जवाब: सबसे बड़ी तैयारी इस रोल की डायलेक्ट की थी। हरियाणा और वेस्टर्न यूपी की बोली में बहुत हल्का फर्क होता है, लेकिन वही फर्क सही पकड़ना जरूरी था। शो में बाकी लोग बाहर से आए हुए हैं, लेकिन मेरा किरदार वहीं का है। इसलिए उसका पूरी तरह उसी मिट्टी का लगना बहुत जरूरी था। सवाल: क्या ‘मिर्जापुर’ के बाद कुछ बिल्कुल अलग करने की चाह थी? जवाब: बिल्कुल। शरद शुक्ला बहुत अच्छा किरदार था, लोगों ने बहुत प्यार दिया, लेकिन वो थोड़ा संयमित था, सोच-समझकर चलने वाला आदमी था। उसके बाद मन था कि कुछ ऐसा किया जाए जहां मैं पूरी तरह खुल सकूं। मुन्ना ने मुझे वो मौका दिया। मैंने अपने सारे औजार निकाल दिए और कहा कि चलो, इस बार कुछ अलग करते हैं। सवाल: मुन्ना को आपने बहुत ‘ह्यूमन’ बनाया है। उसमें एक अपनापन महसूस होता है। जवाब: मेरे लिए किसी भी कैरेक्टर का इंसान होना बहुत जरूरी है। आप उस इंसान से कनेक्ट कर पाओ, ये जरूरी है। हो सकता है कहानी खत्म होने के बाद वो आपको पसंद आए या न आए, लेकिन आपको लगे कि हां, ये असली इंसान है। जैसे एक सीन में वो खेत खाली करवाने जाता है और बहुत आराम से कहता है, ‘भैया कर दीजिए, नहीं करेंगे तो फिर मुझे कुछ करना पड़ेगा।’ वहां आपको लगता है कि यार, इसकी भी अपनी मजबूरी है। सवाल: सोशल मीडिया पर ‘मुन्ना’ के रोल की रील्स काफी वायरल हो रही हैं। क्या इस रिस्पॉन्स की उम्मीद थी? जवाब: सच कहूं तो मैं खुद थोड़ा सरप्राइज था। मिलियंस में व्यूज आ रहे हैं। लोगों ने बहुत प्यार दिया। कुछ लोगों ने तो ये तक कहा कि उन्हें ‘मिर्जापुर’ से ज्यादा ‘कप्तान’ में मेरा काम पसंद आया। ये सुनकर अच्छा भी लगा और थोड़ा शॉक भी हुआ। सवाल: कविता कौशिक के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: शो में हमारे बीच कुछ ऐसे सीन थे जहां हल्की नोकझोंक, सेंशुअलिटी और मस्ती थी, लेकिन हमने बहुत थिन लाइन रखी। उसे ओवर नहीं किया। एक सीन में थोड़ी फिजिकल मैन-हैंडलिंग भी थी, तो मैं बहुत ध्यान रख रहा था कि कविता को चोट न लगे, लेकिन दो-तीन टेक के बाद उन्होंने खुद कहा, ‘अंजुम, थोड़ा और जोर से पकड़ सकते हो।’ फिर वो सीन बहुत अच्छे से निकला। सवाल: आज के समय में ‘मास’ कंटेंट की परिभाषा कैसे बदल रही है? जवाब: मेरे लिए मास का मतलब सिर्फ शोर-शराबा नहीं है। मास का मतलब है ज्यादा से ज्यादा लोगों की भावनाओं से जुड़ना। अगर अलग-अलग उम्र, बैकग्राउंड और सोच वाले लोग किसी चीज से जुड़ते हैं, तो उसमें पक्का क्रेडिबिलिटी होती है। आज के समय में सिर्फ हवा में कोई चीज मास नहीं हो सकती। कहानी, परफॉर्मेंस, एंटरटेनमेंट और एंगेजमेंट सब होना जरूरी है।

अंजुम शर्मा बोले- ‘कप्तान’ का मुन्ना जमीनी और रॉ किरदार:‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला से बिल्कुल अलग अंदाज में दिखे एक्टर

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एक्टर अंजुम शर्मा इन दिनों अपनी वेब सीरीज ‘कप्तान’ को लेकर चर्चा में हैं। इस थ्रिलर में अंजुम ने ‘मुन्ना’ का किरदार निभाया है। दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में अंजुम शर्मा ने ‘कप्तान’ के मुन्ना, ‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला, OTT के बदलते दौर, मास सिनेमा और एक्टिंग के अपने सफर पर बात की। “कप्तान” एक इंटेंस कॉप-क्राइम ड्रामा है, जिसे जतिन वागले ने डायरेक्ट किया है। इसमें साकिब सलीम, सिद्धार्थ निगम और कविता कौशिक भी हैं। यह सीरीज अमेजन MX प्लेयर पर फ्री स्ट्रीम हो रही है। सवाल: ‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला और ‘कप्तान’ के मुन्ना, दोनों किरदार बिल्कुल अलग हैं। मुन्ना को लेकर क्या सोच थी? जवाब: सबसे पहले तो नाम सुनते ही लोग ‘मिर्जापुर’ वाले मुन्ना तक पहुंच जाते हैं। मुझे भी लगा था कि यार, फिर से मुन्ना? लेकिन फिर लगा कि ठीक है, देखते हैं इसे ‘मिर्जापुर’ के मुन्ना के किरदार से अलग कैसे बनाया जाए। सबसे बड़ा फर्क उसकी बेल्ट और बोली में था। ‘मिर्जापुर’ पूर्वांचल में सेट थी और ‘कप्तान’ वेस्टर्न यूपी में सेट है। ‘कप्तान’ का मुन्ना बहुत ज्यादा जमीनी इंसान है। वो हंसते-हंसते कुछ भी कर देता है। किसी बड़ी घटना को अंजाम देने से पहले बहुत सोचता नहीं है। उसके अंदर एक मस्ती है, एक रॉनेस है। सवाल: इस किरदार के लिए सबसे बड़ी तैयारी क्या थी? जवाब: सबसे बड़ी तैयारी इस रोल की डायलेक्ट की थी। हरियाणा और वेस्टर्न यूपी की बोली में बहुत हल्का फर्क होता है, लेकिन वही फर्क सही पकड़ना जरूरी था। शो में बाकी लोग बाहर से आए हुए हैं, लेकिन मेरा किरदार वहीं का है। इसलिए उसका पूरी तरह उसी मिट्टी का लगना बहुत जरूरी था। सवाल: क्या ‘मिर्जापुर’ के बाद कुछ बिल्कुल अलग करने की चाह थी? जवाब: बिल्कुल। शरद शुक्ला बहुत अच्छा किरदार था, लोगों ने बहुत प्यार दिया, लेकिन वो थोड़ा संयमित था, सोच-समझकर चलने वाला आदमी था। उसके बाद मन था कि कुछ ऐसा किया जाए जहां मैं पूरी तरह खुल सकूं। मुन्ना ने मुझे वो मौका दिया। मैंने अपने सारे औजार निकाल दिए और कहा कि चलो, इस बार कुछ अलग करते हैं। सवाल: मुन्ना को आपने बहुत ‘ह्यूमन’ बनाया है। उसमें एक अपनापन महसूस होता है। जवाब: मेरे लिए किसी भी कैरेक्टर का इंसान होना बहुत जरूरी है। आप उस इंसान से कनेक्ट कर पाओ, ये जरूरी है। हो सकता है कहानी खत्म होने के बाद वो आपको पसंद आए या न आए, लेकिन आपको लगे कि हां, ये असली इंसान है। जैसे एक सीन में वो खेत खाली करवाने जाता है और बहुत आराम से कहता है, ‘भैया कर दीजिए, नहीं करेंगे तो फिर मुझे कुछ करना पड़ेगा।’ वहां आपको लगता है कि यार, इसकी भी अपनी मजबूरी है। सवाल: सोशल मीडिया पर ‘मुन्ना’ के रोल की रील्स काफी वायरल हो रही हैं। क्या इस रिस्पॉन्स की उम्मीद थी? जवाब: सच कहूं तो मैं खुद थोड़ा सरप्राइज था। मिलियंस में व्यूज आ रहे हैं। लोगों ने बहुत प्यार दिया। कुछ लोगों ने तो ये तक कहा कि उन्हें ‘मिर्जापुर’ से ज्यादा ‘कप्तान’ में मेरा काम पसंद आया। ये सुनकर अच्छा भी लगा और थोड़ा शॉक भी हुआ। सवाल: कविता कौशिक के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: शो में हमारे बीच कुछ ऐसे सीन थे जहां हल्की नोकझोंक, सेंशुअलिटी और मस्ती थी, लेकिन हमने बहुत थिन लाइन रखी। उसे ओवर नहीं किया। एक सीन में थोड़ी फिजिकल मैन-हैंडलिंग भी थी, तो मैं बहुत ध्यान रख रहा था कि कविता को चोट न लगे, लेकिन दो-तीन टेक के बाद उन्होंने खुद कहा, ‘अंजुम, थोड़ा और जोर से पकड़ सकते हो।’ फिर वो सीन बहुत अच्छे से निकला। सवाल: आज के समय में ‘मास’ कंटेंट की परिभाषा कैसे बदल रही है? जवाब: मेरे लिए मास का मतलब सिर्फ शोर-शराबा नहीं है। मास का मतलब है ज्यादा से ज्यादा लोगों की भावनाओं से जुड़ना। अगर अलग-अलग उम्र, बैकग्राउंड और सोच वाले लोग किसी चीज से जुड़ते हैं, तो उसमें पक्का क्रेडिबिलिटी होती है। आज के समय में सिर्फ हवा में कोई चीज मास नहीं हो सकती। कहानी, परफॉर्मेंस, एंटरटेनमेंट और एंगेजमेंट सब होना जरूरी है।

LLB छात्रा से रेप के आरोपी ने जुलूस निकाला:गाजियाबाद जेल से छूटने पर समर्थकों ने फूल बरसाए, हिंदू युवा वाहिनी का नगर अध्यक्ष रहा

LLB छात्रा से रेप के आरोपी ने जुलूस निकाला:गाजियाबाद जेल से छूटने पर समर्थकों ने फूल बरसाए, हिंदू युवा वाहिनी का नगर अध्यक्ष रहा

गाजियाबाद में रविवार को LLB छात्रा से रेप का आरोपी जमानत पर जेल से बाहर आया। हिंदू युवा वाहिनी का नगर अध्यक्ष रह चुका है। 8 महीने बाद डासना जेल से निकलते ही उसके समर्थकों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इसके बाद उसे कंधे पर बैठाकर जेल परिसर से सड़क तक ले गए। फिर गाड़ियों का काफिला निकालकर जुलूस निकाला गया। समर्थकों ने इसका वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया। 8 अगस्त 2025 को आरोपी सुशील प्रजापति ने LLB की एक छात्रा के साथ रेप किया था। इसके बाद उसे किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। देर रात करीब 11 बजे छात्रा मुरादनगर थाने पहुंची। उसके समर्थन में बजरंग दल के लोग भी पहुंचे और हंगामा किया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। 11 अगस्त 2025 को उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। 17 मई को सुशील प्रजापति जेल से बाहर आया। देखिए 3 तस्वीरें… अब जानिए पूरा मामला… 2021 में हुई थी मुलाकात पुलिस के मुताबिक, नवंबर 2021 में गाजियाबाद निवासी सुशील प्रजापति की मुलाकात LLB की एक छात्रा से हुई थी। इसके बाद सुशील उसे लगातार फोन कर हालचाल लेने लगा। छात्रा ने उससे बताया कि वह लॉ की पढ़ाई के साथ मेरठ कोर्ट में एक सीनियर वकील के पास प्रैक्टिस भी करती है। इस पर सुशील ने उससे कहा कि वह गाजियाबाद कोर्ट में बैठना शुरू कर दे। उसने दावा किया कि उसके जानकार वहां सीनियर एडवोकेट हैं, जो उसे हर महीने पैसे भी दिलवा देंगे। साथ ही, उसके जानने वाले लोग भी छात्रा के पास केस लेकर आएंगे। सुशील ने यह भी कहा कि गाजियाबाद, मोदीनगर के ज्यादा करीब है। इस पर छात्रा ने उससे गाजियाबाद कोर्ट में बैठने की व्यवस्था कराने को कहा। थार में बैठाकर ले गया था सुशील 8 अगस्त 2025 की सुबह करीब 11 बजे सुशील ने छात्रा को फोन कर कहा कि उसकी गाजियाबाद के एक सीनियर वकील से बात हो गई है और वह उसी दिन मुलाकात करा देगा। इसके बाद छात्रा मेरठ से बस के जरिए गाजियाबाद के मुरादनगर पहुंची। वहां सुशील पहले से थार गाड़ी लेकर खड़ा था। उसने कहा, “जल्दी बैठो, वकील साहब इंतजार कर रहे हैं। अभी उनसे मिलना है। इसके बाद वह छात्रा को एक फ्लैट पर ले गया। वहां उसने उसे कोल्ड ड्रिंक पीने के लिए दी और कहा कि वकील साहब आने वाले हैं। आरोप है कि कोल्ड ड्रिंक पीते ही छात्रा को नींद आने लगी। इसी दौरान सुशील प्रजापति ने उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद सुशील ने उसे धमकी दी कि अगर उसने किसी को इस बारे में बताया तो उसकी हत्या करवा देगा। उसने कहा कि उसके बड़े-बड़े लोगों से संबंध हैं और वह हिंदू युवा वाहिनी संगठन से जुड़ा हुआ है। इसके बाद वह छात्रा को अपनी कार से सड़क पर छोड़कर चला गया और कहा कि यहां से चुपचाप मेरठ लौट जाओ। छात्रा के पक्ष में जुटे कई संगठन होश आने के बाद छात्रा रात करीब 11 बजे मुरादनगर थाने पहुंची। सूचना मिलते ही उसके समर्थन में गोरक्षक दल और बजरंग दल के कार्यकर्ता भी थाने पहुंच गए। उन्होंने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की मांग को लेकर हंगामा किया। इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी सुशील को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। करीब 8 महीने तक डासना जेल में रहने के बाद वह रविवार को जमानत पर जेल से बाहर आया। —————- यह खबर भी पढ़िए… लखनऊ में ढाबा संचालक की हत्या:झगड़े का वीडियो बनाने पर दबंगों ने सिर में मारी गोली, 3 संदिग्ध हिरासत में लखनऊ में दबंगों ने एक ढाबा संचालक के सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। उसने ढाबे के सामने रोड पर लड़ाई कर रहे युवकों का वीडियो बनाया था। इससे नाराज होकर दबंग युवकों ने घटना को अंजाम दिया। ढाबा संचालक को गंभीर हालत में ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी ऑपेरशन के दौरान मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें

फीफा कप 2026; ‘परफेक्ट’ घास तैयार:47 करोड़ खर्च कर वैज्ञानिकों की टीम लगाई गई, 8 साल में 170 से ज्यादा प्रयोग

फीफा कप 2026; ‘परफेक्ट’ घास तैयार:47 करोड़ खर्च कर वैज्ञानिकों की टीम लगाई गई, 8 साल में 170 से ज्यादा प्रयोग

फीफा वर्ल्ड कप 2026 शुरू होने में अब कुछ ही हफ्ते बचे हैं। टूर्नामेंट के 104 मैचों के लिए इस बार ऐसी प्राकृतिक घास तैयार की जा रही है, जो अलग-अलग मौसम और स्टेडियम की परिस्थितियों में भी एक जैसी खेले। इसके लिए फीफा ने करीब 47 करोड़ रुपए खर्च कर वैज्ञानिकों की टीम लगाई है। टीम ने पिछले 8 साल में 170 से ज्यादा प्रयोग किए हैं, ताकि खिलाड़ियों की चोट का खतरा घटे और ट्रैक्शन व बॉल बाउंस बेहतर रहे। 2024 के कोपा अमेरिका टूर्नामेंट में अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने अटलांटा स्टेडियम की अस्थाई प्राकृतिक घास की शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि पिच ‘डिजास्टर’ (बेहद खराब) है और गेंद ‘स्प्रिंगबोर्ड’ की तरह अजीब ढंग से उछल रही है। साल 2026 के वर्ल्ड कप में मेजबान अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको ऐसी बदनामी से बचना चाहते हैं। 5 मिलीमीटर का अंतर भी बदल सकता है खेल का मिजाज टेनेसी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन सोरोचन और मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ट्रे रोजर्स की देखरेख में वर्ल्ड कप के 16 स्टेडियमों के लिए पिच तैयार हो रही हैं। सोरोचन के मुताबिक घास की ऊंचाई में सिर्फ 5 मिलीमीटर का फर्क भी खेल का मिजाज बदल देता है। इसे परखने के लिए लैब के छोटे मैदानों पर चमकदार लाल रंग की मशीनों से फुटबॉल को शूट किया गया। इससे बॉल की स्पीड तक मापा गया।

लू में ज्यादा बाहर न निकलें, आंखों की इन 3 समस्याओं का हो जाएंगे शिकार, डॉक्टर से समझें खतरे

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Last Updated:May 18, 2026, 14:04 IST Eye Problems in Summer Heat: तेज गर्मी और लू का असर आंखों पर भी बुरी तरह पड़ता है. अगर आप भीषण गर्मी में आंखों को खयाल नहीं रखेंगे, तो इससे ड्राई आई, एलर्जी और इंफेक्शन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. डॉक्टर्स की मानें तो आंखों को धूप से बचाना जरूरी होता है. इसके लिए घर से निकलते वक्त सनग्लासेस जरूर इस्तेमाल करने चाहिए. गर्मी में आंखों को हेल्दी रखने के लिए धूप में बाहर जाने से बचें. How Summer Heat Affect Eyes: देश के कई हिस्सों में इस वक्त भीषण गर्मी का प्रकोप देखने को मिल रहा है. दिल्ली-एनसीआर में पारा 45 के पार हो गया है. मौसम विभाग की मानें तो अगले एक सप्ताह तक इसी तरह आसमान से आग बरसेगी. गर्मी में तेज धूप और गर्म हवाएं आंखों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं. लू के दौरान लंबे समय तक बाहर रहने से आंखों में ड्राइनेस, जलन, लालिमा और संक्रमण जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं. डॉक्टर्स के अनुसार तेज धूप में मौजूद अल्ट्रावायलेट किरणें और गर्म हवाएं आंखों की संवेदनशील परत को प्रभावित करती हैं. नई दिल्ली के विजन आई सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर और रिफ्रेक्टिव सर्जन डॉ. तुषार ग्रोवर ने News18 को बताया गर्मी और लू की वजह से आंखों की नमी तेजी से कम होने लगती है. जब आंखों में पर्याप्त आंसू नहीं बनते या जल्दी सूख जाते हैं, तो ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या हो सकती है. लंबे समय तक धूप में रहना, कम पानी पीना, लगातार स्क्रीन देखना और AC में ज्यादा समय बिताना इस समस्या को बढ़ा सकता है. इस कंडीशन में लोगों को आंखों में जलन, चुभन, खुजली, धुंधला दिखना और लालिमा जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. कई बार आंखों से बार-बार पानी भी आने लगता है. अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो आंखों में इंफेक्शन और कॉर्निया से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं. डॉक्टर ग्रोवर के मुताबिक गर्मियों में धूल, पसीना और प्रदूषण बढ़ने से आंखों में एलर्जी और संक्रमण का खतरा काफी ज्यादा हो जाता है. तेज गर्मी और नमी में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं, जिससे कंजंक्टिवाइटिस यानी आई फ्लू जैसी समस्या हो सकती है. आई फ्लू होने पर लोगों को आंखों में रेडनेस, खुजली, सूजन, पानी आना और चिपचिपा पदार्थ निकलने जैसी परेशानियां देखने को मिल सकती हैं. कुछ लोगों को तेज रोशनी में आंखें खोलने में भी परेशानी होती है. अगर गंदे हाथों से आंखों को बार-बार छुआ जाए, तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है. एक्सपर्ट ने बताया कि तेज धूप में मौजूद अल्ट्रावायलेट यानी UV किरणें आंखों के लिए काफी नुकसानदायक मानी जाती हैं. बिना सनग्लासेस के लंबे समय तक धूप में रहने से आंखों की बाहरी सतह प्रभावित हो सकती है. लगातार UV एक्सपोजर से भविष्य में मोतियाबिंद और रेटिना से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है. धूप में ज्यादा काम करने वाले लोग, बाइक चलाने वाले, बच्चे और बुजुर्ग इस खतरे की चपेट में जल्दी आ सकते हैं. इसलिए आंखों को सीधी धूप से बचाना बेहद जरूरी है. अब सवाल है कि गर्मी में आंखों को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें? डॉक्टर ग्रोवर ने बताया कि गर्मियों में आंखों को सुरक्षित रखने के लिए बाहर निकलते समय हमेशा UV प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस पहनें. दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच तेज धूप में बाहर निकलने से बचें. शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त पानी पिएं और आंखों को बार-बार हाथ लगाने से बचें. बाहर से आने के बाद आंखों को साफ पानी से धोना फायदेमंद हो सकता है. लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन देखने से भी आंखों पर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए बीच-बीच में आंखों को आराम देना जरूरी है. अगर आंखों में तेज दर्द, लगातार रेडनेस, सूजन, धुंधला दिखना या रोशनी से ज्यादा परेशानी हो रही हो, तो तुरंत आंखों के डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

Cherry benefits I चेरी खाने के फायदे

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Last Updated:May 18, 2026, 14:00 IST चेरी सिर्फ एक स्वादिष्ट फल नहीं, बल्कि सेहत का खजाना भी है. इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट दिल को स्वस्थ रखने, ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित करने के साथ-साथ अच्छी नींद में भी मदद करते हैं. नियमित रूप से सीमित मात्रा में चेरी का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कई बीमारियों से बचाव में सहायक माना जाता है. सुल्तानपुर. फलों का महत्व प्राचीन समय से ही चला आ रहा है, उन्हीं में एक फल है चेरी. जो स्वादिष्ट और गुणों से भरपूर फल माना जाता है. इसका रंग काफी आकर्षक होता है और मीठा स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है, वहीं स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह काफी लाभकारी होती है. चेरी में बहुत सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं. इस, में विटामिन, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है. इसमें मौजूद विटामिन-सी, विटामिन-ए, पोटैशियम, आयरन और मैग्नीशियम शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ त्वचा की चमक और पाचन बेहतर बनाता है. इन बीमारियों में है रामबाण फिजीशियन डॉ. एस बी सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि चेरी का सेवन हृदय रोग के खतरे को कम करने में सहायक होता है, क्योंकि इसमें पाए जाने वाले एंथोसाइनिन और फ्लेवोनोइड्स खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाकर दिल को स्वस्थ रखते हैं. इसमें मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करता है. चेरी खाने से ब्लड शुगर लेवल भी संतुलित रहता है, इसलिए यह मधुमेह रोगियों के लिए भी लाभकारी मानी जाती है. इसमें मिलती है राहतचेरी का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह नींद से जुड़ी समस्याओं में राहत देती है. दरअसल, चेरी में मेलाटोनिन पाया जाता है, जो नींद के चक्र को नियंत्रित करता है और अच्छी नींद लाने में मदद करता है. यही कारण है कि इसे रात के खाने के बाद और सोने से कुछ समय पहले सेवन करने की सलाह देते हैं.इसके अलावा चेरी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण गठिया और जोड़ों के दर्द में भी राहत पहुंचाते हैं. ऐसे करें सेवन अगर बात करें सेवन के तरीके की, तो चेरी को सुबह खाली पेट खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. इसे सीधे फल के रूप में खाया जा सकता है या फिर सलाद, स्मूदी और जूस में भी शामिल किया जा सकता है. दिन में 8 से 10 चेरी खाना पर्याप्त होता है.हालांकि, जिन लोगों को पेट से जुड़ी दिक्कतें रहती हैं, उन्हें इसे अधिक मात्रा में खाने से बचना चाहिए. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sultanpur,Uttar Pradesh

गर्मी में अमृत है मऊ का तरबूज! मिठास ऐसी कि विदेश तक है डिमांड, स्वाद के साथ मिलेगी जबरदस्त ठंडक

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Last Updated:May 18, 2026, 13:42 IST गर्मी के मौसम में तरबूज लोगों की पहली पसंद माना जाता है, लेकिन मऊ का देसी तरबूज अपनी खास मिठास और स्वाद की वजह से अलग पहचान बना चुका है. नदी किनारे उगाया जाने वाला यह तरबूज न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि पानी की कमी दूर करने और ताजगी बनाए रखने में भी मदद करता है. यही वजह है कि इसकी मांग उत्तर प्रदेश से लेकर बड़े शहरों और विदेशों तक बनी रहती है. गर्मियों का सीजन आते ही लोग तरबूज और खरबूजा खाना खूब पसंद करते हैं, लेकिन इन दिनों मऊ का तरबूज लोगों के बीच खास पहचान बना रहा है. माना जाता है कि यहां का तरबूज खाते ही शरीर को ठंडक महसूस होती है और यह शरीर में खून बढ़ाने में भी मददगार माना जाता है. यही वजह है कि लोग इस तरबूज को बड़े चाव से खाते हैं. इसकी मिठास और स्वाद लोगों को इतना पसंद आता है कि सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में जाने वाले लोग भी इसे अपने साथ लेकर जाते हैं. इस खास तरबूज की खेती के लिए जनवरी से फरवरी के बीच बीजों की बुवाई की जाती है. इसके बाद फसल धीरे-धीरे तैयार होती है और अप्रैल के अंतिम दिनों से लेकर मई की शुरुआत में बाजार में आना शुरू हो जाती है. इस तरबूज को तैयार होने में काफी समय और मेहनत लगती है, इसलिए किसान इसकी खेती में विशेष ध्यान रखते हैं. तरबूज की अच्छी पैदावार और मिठास के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. ऐसी मिट्टी में उगाए गए तरबूज में ज्यादा मिठास आती है, जिसकी वजह से इसका स्वाद लोगों को बेहद पसंद आता है. मऊ में उगाए जाने वाले इस खास तरबूज की मांग सिर्फ उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों तक भी इसकी सप्लाई की जाती है. इतना ही नहीं, यहां आने वाले कई लोग इस तरबूज को अपने साथ विदेश तक लेकर जाते हैं. लोगों का मानना है कि मऊ के तरबूज जैसी मिठास प्रदेश में दूसरी जगह आसानी से नहीं मिलती. यही वजह है कि इसकी डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है. खास बात यह भी है कि खेतों से निकलने के बाद यह तरबूज कई दिनों तक खराब नहीं होता, इसलिए लोग इसे आसानी से लंबी दूरी तक लेकर जा सकते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google अगर मऊ में मिलने वाले तरबूज की कीमत की बात करें, तो यह खेतों से काफी सस्ते दामों में आसानी से मिल जाता है. जहां बाजारों में इसकी कीमत ज्यादा होती है, वहीं सीधे खेतों से खरीदने पर यह करीब 20 रुपये प्रति किलो तक मिल जाता है. यही तरबूज बाद में बाजारों में अधिक दामों पर बेचा जाता है. मऊ में बड़े पैमाने पर तरबूज की खेती होने की वजह से यहां इसकी कीमत अपेक्षाकृत कम रहती है. यही कारण है कि लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों से यहां पहुंचकर बड़ी मात्रा में तरबूज खरीदकर दूसरे जिलों और शहरों तक ले जाते हैं. तरबूज बाहर से हरे रंग का दिखाई देता है, लेकिन काटने पर अंदर से इसका गूदा गहरे लाल रंग का होता है. यही लाल रंग वाला तरबूज अपने बेहद मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है. गर्मियों में लोग इसे बड़े चाव से खाना पसंद करते हैं. तरबूज खाने का सबसे अच्छा तरीका यह माना जाता है कि बाजार से लाने के बाद इसे कुछ देर तक ठंडे पानी में रखा जाए. इसके बाद इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर छिलके अलग कर दिए जाएं और फिर इसका सेवन किया जाए. इसकी मिठास शरीर को अंदर से ताजगी देने का काम करती है और यह शरीर में खून बढ़ाने में भी मददगार माना जाता है. यही वजह है कि गर्मी के मौसम में तरबूज लोगों की पहली पसंद बना रहता है. अगर मऊ जनपद के सबसे फेमस तरबूज की बात करें, तो भातकोल बाजार का तरबूज सबसे ज्यादा मशहूर माना जाता है. यहां नदी किनारे बड़े पैमाने पर तरबूज की खेती की जाती है, जिससे फल में खास मिठास आती है. किसान खेतों से ताजा तरबूज सीधे बाजार में लेकर आते हैं, इसलिए यहां मिलने वाला तरबूज पूरी तरह ताजा और स्वादिष्ट माना जाता है. लोगों का कहना है कि भातकोल बाजार के तरबूज जैसी मिठास पूरे मऊ जिले में कहीं और नहीं मिलती. यही वजह है कि इस बाजार के तरबूज की मांग दूर-दूर तक रहती है और लोग खास तौर पर यहां से तरबूज खरीदने पहुंचते हैं. गर्मी के मौसम में तरबूज को शरीर में पानी की कमी दूर करने और खून बढ़ाने के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. यही वजह है कि लोग गर्मियों में इसका सेवन सबसे ज्यादा करते हैं. तरबूज शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ ताजगी बनाए रखने में भी मदद करता है. मऊ में खास तौर पर नदी किनारे तरबूज की खेती की जाती है, जिससे इसमें प्राकृतिक मिठास अधिक आती है. यही खास स्वाद और मिठास लोगों को बेहद पसंद आती है, जिसके कारण यहां का तरबूज दूर-दूर तक भेजा जाता है और इसकी मांग लगातार बनी रहती है. अगर तरबूज को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर ऊपर से हल्का काला नमक छिड़क कर खाया जाए, तो इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. गर्मियों में लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं, क्योंकि यह शरीर को ठंडक और ताजगी देने का काम करता है. तरबूज में पानी की मात्रा काफी अधिक होती है, इसलिए इसे शरीर में पानी की कमी दूर करने और खून बढ़ाने के लिए फायदेमंद माना जाता है. खास बात यह है कि मऊ जनपद का तरबूज अपनी जबरदस्त मिठास और देसी स्वाद की वजह से काफी मशहूर है. यही कारण है कि इसकी मांग सिर्फ आसपास के इलाकों में ही नहीं, बल्कि दूर-दराज और विदेशों तक भी बनी रहती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

क्या हाई ब्लड प्रेशर में एक्सरसाइज करना सेफ है? जानें एक्सपर्ट्स की राय – News18 हिंदी

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X क्या हाई ब्लड प्रेशर में एक्सरसाइज करना सेफ है? जानें एक्सपर्ट्स की राय   Health Tips: फिट और हेल्दी रहने के लिए रोजाना कम से कम 40 मिनट एक्सरसाइज करने की सलाह हर डॉक्टर देता है, लेकिन हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट पेशेंट्स के लिए ये सवाल और भी बड़ा बन जाता है. क्या एक्सरसाइज करना उनके लिए सुरक्षित है या खतरनाक? इस वीडियो में हम आसान भाषा में समझेंगे कि हाई BP वाले लोगों को जिम या घर पर वर्कआउट करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, कौन-सी एक्सरसाइज़ से बचना चाहिए और कौन-सी उनके लिए फायदेमंद हो सकती है. साथ ही हम यह भी जानेंगे कि डाइट में क्या शामिल करें, और क्या प्रोटीन सप्लीमेंट्स लेना उनके लिए सुरक्षित है या नहीं? न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।