Saturday, 31 Oct 2026 | 12:40 PM

Trending :

EXCLUSIVE

अंजुम शर्मा बोले- ‘कप्तान’ का मुन्ना जमीनी और रॉ किरदार:‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला से बिल्कुल अलग अंदाज में दिखे एक्टर

Google Preferred Source CTA

एक्टर अंजुम शर्मा इन दिनों अपनी वेब सीरीज ‘कप्तान’ को लेकर चर्चा में हैं। इस थ्रिलर में अंजुम ने ‘मुन्ना’ का किरदार निभाया है। दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में अंजुम शर्मा ने ‘कप्तान’ के मुन्ना, ‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला, OTT के बदलते दौर, मास सिनेमा और एक्टिंग के अपने सफर पर बात की। “कप्तान” एक इंटेंस कॉप-क्राइम ड्रामा है, जिसे जतिन वागले ने डायरेक्ट किया है। इसमें साकिब सलीम, सिद्धार्थ निगम और कविता कौशिक भी हैं। यह सीरीज अमेजन MX प्लेयर पर फ्री स्ट्रीम हो रही है। सवाल: ‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला और ‘कप्तान’ के मुन्ना, दोनों किरदार बिल्कुल अलग हैं। मुन्ना को लेकर क्या सोच थी?
जवाब: सबसे पहले तो नाम सुनते ही लोग ‘मिर्जापुर’ वाले मुन्ना तक पहुंच जाते हैं। मुझे भी लगा था कि यार, फिर से मुन्ना? लेकिन फिर लगा कि ठीक है, देखते हैं इसे ‘मिर्जापुर’ के मुन्ना के किरदार से अलग कैसे बनाया जाए। सबसे बड़ा फर्क उसकी बेल्ट और बोली में था। ‘मिर्जापुर’ पूर्वांचल में सेट थी और ‘कप्तान’ वेस्टर्न यूपी में सेट है। ‘कप्तान’ का मुन्ना बहुत ज्यादा जमीनी इंसान है। वो हंसते-हंसते कुछ भी कर देता है। किसी बड़ी घटना को अंजाम देने से पहले बहुत सोचता नहीं है। उसके अंदर एक मस्ती है, एक रॉनेस है। सवाल: इस किरदार के लिए सबसे बड़ी तैयारी क्या थी?
जवाब: सबसे बड़ी तैयारी इस रोल की डायलेक्ट की थी। हरियाणा और वेस्टर्न यूपी की बोली में बहुत हल्का फर्क होता है, लेकिन वही फर्क सही पकड़ना जरूरी था। शो में बाकी लोग बाहर से आए हुए हैं, लेकिन मेरा किरदार वहीं का है। इसलिए उसका पूरी तरह उसी मिट्टी का लगना बहुत जरूरी था। सवाल: क्या ‘मिर्जापुर’ के बाद कुछ बिल्कुल अलग करने की चाह थी?
जवाब: बिल्कुल। शरद शुक्ला बहुत अच्छा किरदार था, लोगों ने बहुत प्यार दिया, लेकिन वो थोड़ा संयमित था, सोच-समझकर चलने वाला आदमी था। उसके बाद मन था कि कुछ ऐसा किया जाए जहां मैं पूरी तरह खुल सकूं। मुन्ना ने मुझे वो मौका दिया। मैंने अपने सारे औजार निकाल दिए और कहा कि चलो, इस बार कुछ अलग करते हैं। सवाल: मुन्ना को आपने बहुत ‘ह्यूमन’ बनाया है। उसमें एक अपनापन महसूस होता है।
जवाब: मेरे लिए किसी भी कैरेक्टर का इंसान होना बहुत जरूरी है। आप उस इंसान से कनेक्ट कर पाओ, ये जरूरी है। हो सकता है कहानी खत्म होने के बाद वो आपको पसंद आए या न आए, लेकिन आपको लगे कि हां, ये असली इंसान है। जैसे एक सीन में वो खेत खाली करवाने जाता है और बहुत आराम से कहता है, ‘भैया कर दीजिए, नहीं करेंगे तो फिर मुझे कुछ करना पड़ेगा।’ वहां आपको लगता है कि यार, इसकी भी अपनी मजबूरी है। सवाल: सोशल मीडिया पर ‘मुन्ना’ के रोल की रील्स काफी वायरल हो रही हैं। क्या इस रिस्पॉन्स की उम्मीद थी?
जवाब: सच कहूं तो मैं खुद थोड़ा सरप्राइज था। मिलियंस में व्यूज आ रहे हैं। लोगों ने बहुत प्यार दिया। कुछ लोगों ने तो ये तक कहा कि उन्हें ‘मिर्जापुर’ से ज्यादा ‘कप्तान’ में मेरा काम पसंद आया। ये सुनकर अच्छा भी लगा और थोड़ा शॉक भी हुआ। सवाल: कविता कौशिक के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
जवाब: शो में हमारे बीच कुछ ऐसे सीन थे जहां हल्की नोकझोंक, सेंशुअलिटी और मस्ती थी, लेकिन हमने बहुत थिन लाइन रखी। उसे ओवर नहीं किया। एक सीन में थोड़ी फिजिकल मैन-हैंडलिंग भी थी, तो मैं बहुत ध्यान रख रहा था कि कविता को चोट न लगे, लेकिन दो-तीन टेक के बाद उन्होंने खुद कहा, ‘अंजुम, थोड़ा और जोर से पकड़ सकते हो।’ फिर वो सीन बहुत अच्छे से निकला। सवाल: आज के समय में ‘मास’ कंटेंट की परिभाषा कैसे बदल रही है? जवाब: मेरे लिए मास का मतलब सिर्फ शोर-शराबा नहीं है। मास का मतलब है ज्यादा से ज्यादा लोगों की भावनाओं से जुड़ना। अगर अलग-अलग उम्र, बैकग्राउंड और सोच वाले लोग किसी चीज से जुड़ते हैं, तो उसमें पक्का क्रेडिबिलिटी होती है। आज के समय में सिर्फ हवा में कोई चीज मास नहीं हो सकती। कहानी, परफॉर्मेंस, एंटरटेनमेंट और एंगेजमेंट सब होना जरूरी है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
भास्कर इन्वेस्टिगेशनखोया प्यार लौटाने से ‘मौत दिलाने’ तक का सौदा:भास्कर रिपोर्टर से तांत्रिक बोला- एक लाख में प्रेमिका आएगी, 5 लाख में मां का काम तमाम

March 17, 2026/
5:25 am

. यह भास्कर रिपोर्टर और खुद को नागा साधु बताने वाले एक तांत्रिक के बीच हुई बातचीत का हिस्सा है।...

HPCL Revenue Up 4.4% | ₹19.25 Dividend Announced

May 13, 2026/
2:49 pm

मुंबई25 मिनट पहले कॉपी लिंक हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में ₹6,065 करोड़...

श्वेता तिवारी को मराठी यूजर्स ने दीं भद्दी गालियां:एक्ट्रेस ने राज ठाकरे से पूछा- क्या आपके सपोर्टर्स ऐसे हैं, क्या ये जायज; जानिए पूरा विवाद

August 21, 2026/
12:15 pm

एक्ट्रेस श्वेता तिवारी सोशल मीडिया पर मिल रहीं भद्दी गालियों पर भड़क गई हैं। उन्होंने गाली देने वाले यूजर्स की...

विधानसभा चुनाव 2026 लाइव: केरल में स्टंट से पहले ही सीएम पद को लेकर कांग्रेस में बड़ी गुटबाजी! सरकार बनीं तो कौन होगा मुख्यमंत्री

April 17, 2026/
6:39 am

23 और 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान होगा जबकि 23 अप्रैल को सभी विधानसभा सीटों...

वर्ल्ड अपडेट्स:दक्षिण चीन सागर को लेकर 14 देशों के बयान पर भड़का चीन, जापानी राजनयिक को तलब किया

July 13, 2026/
10:50 am

दक्षिण चीन सागर पर 2016 के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता फैसले की 10वीं वर्षगांठ पर जापान समेत 14 देशों द्वारा चीन के...

इंग्लैंड महिला टीम ने टी-20 में भारत को हराया:सीरीज 2-1 से जीती, कैपसे-नाइट के बीच 137 रन की पार्टनरशिप

June 3, 2026/
7:43 am

इंग्लैंड की महिला टीम ने तीसरे और आखिरी टी-20 इंटरनेशनल में भारत को 6 विकेट से हराया। इसके साथ ही...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

अंजुम शर्मा बोले- ‘कप्तान’ का मुन्ना जमीनी और रॉ किरदार:‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला से बिल्कुल अलग अंदाज में दिखे एक्टर

Google Preferred Source CTA

एक्टर अंजुम शर्मा इन दिनों अपनी वेब सीरीज ‘कप्तान’ को लेकर चर्चा में हैं। इस थ्रिलर में अंजुम ने ‘मुन्ना’ का किरदार निभाया है। दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में अंजुम शर्मा ने ‘कप्तान’ के मुन्ना, ‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला, OTT के बदलते दौर, मास सिनेमा और एक्टिंग के अपने सफर पर बात की। “कप्तान” एक इंटेंस कॉप-क्राइम ड्रामा है, जिसे जतिन वागले ने डायरेक्ट किया है। इसमें साकिब सलीम, सिद्धार्थ निगम और कविता कौशिक भी हैं। यह सीरीज अमेजन MX प्लेयर पर फ्री स्ट्रीम हो रही है। सवाल: ‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला और ‘कप्तान’ के मुन्ना, दोनों किरदार बिल्कुल अलग हैं। मुन्ना को लेकर क्या सोच थी?
जवाब: सबसे पहले तो नाम सुनते ही लोग ‘मिर्जापुर’ वाले मुन्ना तक पहुंच जाते हैं। मुझे भी लगा था कि यार, फिर से मुन्ना? लेकिन फिर लगा कि ठीक है, देखते हैं इसे ‘मिर्जापुर’ के मुन्ना के किरदार से अलग कैसे बनाया जाए। सबसे बड़ा फर्क उसकी बेल्ट और बोली में था। ‘मिर्जापुर’ पूर्वांचल में सेट थी और ‘कप्तान’ वेस्टर्न यूपी में सेट है। ‘कप्तान’ का मुन्ना बहुत ज्यादा जमीनी इंसान है। वो हंसते-हंसते कुछ भी कर देता है। किसी बड़ी घटना को अंजाम देने से पहले बहुत सोचता नहीं है। उसके अंदर एक मस्ती है, एक रॉनेस है। सवाल: इस किरदार के लिए सबसे बड़ी तैयारी क्या थी?
जवाब: सबसे बड़ी तैयारी इस रोल की डायलेक्ट की थी। हरियाणा और वेस्टर्न यूपी की बोली में बहुत हल्का फर्क होता है, लेकिन वही फर्क सही पकड़ना जरूरी था। शो में बाकी लोग बाहर से आए हुए हैं, लेकिन मेरा किरदार वहीं का है। इसलिए उसका पूरी तरह उसी मिट्टी का लगना बहुत जरूरी था। सवाल: क्या ‘मिर्जापुर’ के बाद कुछ बिल्कुल अलग करने की चाह थी?
जवाब: बिल्कुल। शरद शुक्ला बहुत अच्छा किरदार था, लोगों ने बहुत प्यार दिया, लेकिन वो थोड़ा संयमित था, सोच-समझकर चलने वाला आदमी था। उसके बाद मन था कि कुछ ऐसा किया जाए जहां मैं पूरी तरह खुल सकूं। मुन्ना ने मुझे वो मौका दिया। मैंने अपने सारे औजार निकाल दिए और कहा कि चलो, इस बार कुछ अलग करते हैं। सवाल: मुन्ना को आपने बहुत ‘ह्यूमन’ बनाया है। उसमें एक अपनापन महसूस होता है।
जवाब: मेरे लिए किसी भी कैरेक्टर का इंसान होना बहुत जरूरी है। आप उस इंसान से कनेक्ट कर पाओ, ये जरूरी है। हो सकता है कहानी खत्म होने के बाद वो आपको पसंद आए या न आए, लेकिन आपको लगे कि हां, ये असली इंसान है। जैसे एक सीन में वो खेत खाली करवाने जाता है और बहुत आराम से कहता है, ‘भैया कर दीजिए, नहीं करेंगे तो फिर मुझे कुछ करना पड़ेगा।’ वहां आपको लगता है कि यार, इसकी भी अपनी मजबूरी है। सवाल: सोशल मीडिया पर ‘मुन्ना’ के रोल की रील्स काफी वायरल हो रही हैं। क्या इस रिस्पॉन्स की उम्मीद थी?
जवाब: सच कहूं तो मैं खुद थोड़ा सरप्राइज था। मिलियंस में व्यूज आ रहे हैं। लोगों ने बहुत प्यार दिया। कुछ लोगों ने तो ये तक कहा कि उन्हें ‘मिर्जापुर’ से ज्यादा ‘कप्तान’ में मेरा काम पसंद आया। ये सुनकर अच्छा भी लगा और थोड़ा शॉक भी हुआ। सवाल: कविता कौशिक के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
जवाब: शो में हमारे बीच कुछ ऐसे सीन थे जहां हल्की नोकझोंक, सेंशुअलिटी और मस्ती थी, लेकिन हमने बहुत थिन लाइन रखी। उसे ओवर नहीं किया। एक सीन में थोड़ी फिजिकल मैन-हैंडलिंग भी थी, तो मैं बहुत ध्यान रख रहा था कि कविता को चोट न लगे, लेकिन दो-तीन टेक के बाद उन्होंने खुद कहा, ‘अंजुम, थोड़ा और जोर से पकड़ सकते हो।’ फिर वो सीन बहुत अच्छे से निकला। सवाल: आज के समय में ‘मास’ कंटेंट की परिभाषा कैसे बदल रही है? जवाब: मेरे लिए मास का मतलब सिर्फ शोर-शराबा नहीं है। मास का मतलब है ज्यादा से ज्यादा लोगों की भावनाओं से जुड़ना। अगर अलग-अलग उम्र, बैकग्राउंड और सोच वाले लोग किसी चीज से जुड़ते हैं, तो उसमें पक्का क्रेडिबिलिटी होती है। आज के समय में सिर्फ हवा में कोई चीज मास नहीं हो सकती। कहानी, परफॉर्मेंस, एंटरटेनमेंट और एंगेजमेंट सब होना जरूरी है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.