अल्लू अर्जुन की प्रॉपर्टी कहे जाने पर भड़कीं एक्ट्रेस:प्राइवेट जेट की फोटो पर आए कमेंट्स, फटकार लगाकर बोलीं- महिला किसी की प्रॉपर्टी नहीं

साउथ एक्ट्रेस सीरत कपूर हाल ही में उन पर भद्दा कमेंट करने वाले एक शख्स पर भड़क गईं और फटकार लगा दी। दरअसल, 8 मार्च को साउथ सुपरस्टार अल्लू अर्जुन ने 44वां जन्मदिन मनाया है। इस मौके पर सीरत ने उनके साथ एक्टर के ही प्राइवेट जेट में बैठे हुए एक तस्वीर शेयर कर कैप्शन में उन्हें बर्थडे विश किया। सीरत ने अल्लू को टैग भी किया था। प्राइवेट जेट की वो तस्वीरें सुर्खियों में रहीं थीं। अब हाल ही में सीरत ने अपनी सिंगल तस्वीर शेयर की, जिसमें वो बोल्ड लुक में दिखी हैं। जहां कई सोशल मीडिया यूजर्स तस्वीर की तारीफ कर रहे थे, वहीं एक शख्स ने लिखा, अल्लू अर्जुन की प्रॉपर्टी। इस भद्दे कमेंट के साथ उस शक्स ने एक इमोजी भी कमेंट किया, जिसमें आंखों में दिल बना हुआ था। आमतौर पर सेलेब्स इस तरह के कमेंट नजरअंदाज करते हैं, लेकिन सीरत ने कमेंट पर भड़ककर जवाब देते हुए लिखा, सिर्फ कोई इमोजी जोड़ देने से बात सम्मानजनक नहीं हो जाती सर। कोई भी महिला किसी की प्रॉपर्टी नहीं होती। उसकी अपनी पहचान, अपने सपने और अपनी आवाज होती है। तारीफ कीजिए, लेकिन मालिकाना हक जताकर नहीं। भगवान आपका भला करे।” बता दें कि साउथ एक्ट्रेस सीरत कपूर अक्सर अन्य सेलेब्स के साथ तस्वीरें पोस्ट करती रहती हैं। बर्थडे के अलावा भी उन्होंने अल्लू अर्जुन के साथ कुछ तस्वीरें पोस्ट की थीं। कौन हैं सीरत कपूर सीरत कपूर एक इंडियन एक्ट्रेस, कोरियोग्राफर और मॉडल हैं। उन्होंने 2014 की तेलुगु फिल्म रन राजा रन से एक्टिंग डेब्यू किया था। जिसेक बाद वो बॉलीवुड फिल्म जिद में नजर आई थीं। सीरत को 2023 की सीरीज सेव द टाइगर्स और 2024 की फिल्म भामाकल्पम 2 में देखा जा चुका है।
केवल 4,649 वोटों से विजय की टीवीके को तमिलनाडु में अपने दम पर बहुमत मिल जाता | भारत समाचार

आखरी अपडेट:12 मई, 2026, 12:56 IST अकेले बहुमत के बिना भी, विजय के पहले चुनाव ने लंबे समय से चले आ रहे DMK-AIADMK के प्रभुत्व को तोड़कर तमिलनाडु की राजनीति को बदल दिया। टीवीके प्रमुख विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. (पीटीआई छवि) एक शानदार चुनावी शुरुआत में, विजय की तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) ने 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में 108 सीटों पर कब्जा कर लिया। 118 सीटों वाले बहुमत के जादुई आंकड़े से सिर्फ 10 सीटें कम रह जाने के कारण पार्टी अपने दम पर सरकार बनाने में असमर्थ रही। टीवीके को सीपीआई (एम), सीपीआई, वीसीके और आईयूएमएल के बाहरी समर्थन के साथ-साथ कांग्रेस और एमएनएम जैसी पार्टियों से समर्थन प्राप्त करने के लिए गठबंधन पर निर्भर रहना पड़ा है। डेटा पर करीब से नज़र डालने से एक दिलचस्प वास्तविकता का पता चलता है: रणनीतिक रूप से 10 विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्रों में रखे गए मात्र 4,649 अतिरिक्त वोट, चुनाव के बाद गठबंधन की आवश्यकता के बिना टीवीके के लिए पूर्ण बहुमत हासिल कर सकते थे। महत्वपूर्ण 10 युद्धक्षेत्र ये 10 निर्वाचन क्षेत्र टीवीके की सबसे कम हार का प्रतिनिधित्व करते हैं। फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली में, यदि टीवीके ने इन विशिष्ट सीटों पर जीत के अंतर के आधे से केवल एक वोट अधिक हासिल किया होता (प्रभावी रूप से उन वोटों को विजेता से टीवीके की ओर पलट दिया होता), तो चुनाव परिणाम पूरी तरह से उनके पक्ष में स्थानांतरित हो जाता। हार के सबसे कम अंतर वाली 10 सीटें थीं तिरुक्कोयिलुर (285 वोट), कुलिथलाई (579 वोट), पलानी (693 वोट), कोविलपट्टी (843 वोट), विक्रवंडी (910 वोट), उधगमंडलम (976 वोट), पापनासम (1065 वोट), डिंडीगुल (1131 वोट), किल्लियूर (1311 वोट), और थिरुमायम (1492 वोट)। वोट)। गणित एक त्वरित गणना से पता चलता है कि इन 10 सीटों पर टीवीके के पक्ष में पलड़ा झुकाने के लिए आवश्यक स्विंग वोटों की न्यूनतम संख्या बिल्कुल 4,649 है (तालिका देखें)। वे सीटें कहां गईं? टीवीके की उंगलियों से फिसलने वाले 10 निर्वाचन क्षेत्रों पर प्रतिद्वंद्वियों और वर्तमान सहयोगियों के मिश्रण ने दावा किया था: डीएमके चार, एआईएडीएमके दो, बीजेपी एक, कांग्रेस एक, आईयूएमएल एक और पीएमके एक। विजय और उनके पहले ही प्रयास में ऐतिहासिक, एकल-दलीय बहुमत के बीच 5,000 से भी कम वोटों का अविश्वसनीय रूप से कम अंतर था। अकेले बहुमत के बिना भी, विजय के पहले चुनाव ने लंबे समय से चले आ रहे डीएमके-एआईएडीएमके प्रभुत्व को तोड़कर और टीवीके को सीधे सरकार गठन की बातचीत में शामिल करके तमिलनाडु की राजनीति को बदल दिया। लेकिन बेहद कम अंतर इस बात को रेखांकित करता है कि अभिनेता से नेता बने अभिनेता और भी बड़ी उपलब्धि के कितने करीब आ गए: दशकों में पहली बार तमिलनाडु में एकल-पार्टी बहुमत हासिल करने वाले पहले नवागंतुक बन गए। अंत में, लाखों की संख्या वाले राज्य में फैले 5,000 से भी कम वोट, विजय और पूर्ण राजनीतिक नियंत्रण के बीच खड़े थे। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया केवल 4,649 वोटों से विजय की टीवीके को तमिलनाडु में अपने दम पर बहुमत मिल जाता अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलगा वेट्री कड़गम चुनाव(टी)विजय तमिलनाडु की राजनीति(टी)टीवीके विधानसभा सीटें(टी)तमिलनाडु चुनाव परिणाम(टी)संकीर्ण जीत का अंतर(टी)गठबंधन सरकार तमिलनाडु(टी)डीएमके एआईएडीएमके प्रभुत्व(टी)स्विंग वोट निर्वाचन क्षेत्र
आर्थिक फैसलों में महिलाओं की बढ़ी भागीदारी:महिला मुखिया वाले घरों में कम हुई दिहाड़ी; पक्की नौकरियां बढ़ीं- रिपोर्ट

देश में महिलाओं की आर्थिक भूमिका सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं रह गई। एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट में सामने आया है कि महिला मुखिया वाले परिवारों में रोजगार की गुणवत्ता तेजी से सुधर रही है। जब घर में महिला की चलती है, तो परिवार की निर्भरता असुरक्षित दिहाड़ी मजदूरी से हटकर सम्मानजनक नियमित वेतन वाली नौकरियों की ओर बढ़ जाती है। ऐसी महिलाओं में नियमित रोजगार की संभावना 4.4% बढ़ी है, जबकि दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भरता 4.2% घटी है। यह संकेत है कि महिलाएं संरक्षित रोजगार की ओर बढ़ रही हैं। देशभर के 2.70 लाख परिवारों और 11.48 लाख से अधिक लोगों के आंकड़ों पर आधारित सर्वे शहर – सुरक्षित नौकरियों की ओर बड़ी छलांग शहरी क्षेत्रों में जिन घरों की मुखिया महिला है, वहां नियमित वेतन वाली नौकरियों की संभावना 10 फीसदी तक बढ़ गई है। यह डेटा चौंकाने वाला है क्योंकि यह दर्शाता है कि महिलाएं अनिश्चित छोटे-मोटे व्यवसायों के बजाय स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा वाले कॉर्पोरेट या संस्थागत काम को प्राथमिकता दे रही हैं। ग्रामीण भारत – दिहाड़ी मजदूरी में 5% तक की कमी आई महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण घरों में दिहाड़ी में शामिल होने की संभावना 5% घटी। इसकी जगह परिवार अब खुद के छोटे उद्यमों या नियमित काम की ओर बढ़ रहे हैं, जो उनकी बढ़ती बार्गेनिंग पावर को दर्शाता है। महिला शिक्षित होती हैं तो तेजी से उन्नति अध्ययन में शिक्षा को भी महिलाओं के रोजगार बदलाव का बड़ा कारण बताया गया है। अशिक्षित महिलाओं में दिहाड़ी मजदूरी की संभावना सबसे ज्यादा है, लेकिन शिक्षा बढ़ने के साथ यह तेजी से घटती है। उच्च माध्यमिक और उससे ऊपर की पढ़ाई करने वाली महिलाओं में नियमित वेतन वाली नौकरी की संभावना सबसे अधिक पाई गई। श्रम में हिस्सेदारी रिकॉर्ड 40 फीसदी पहुंची देश में महिला श्रम भागीदारी दर 40% तक पहुंच चुकी है। ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी दर 45.9% और शहरों में महज 27.7% है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं में स्वरोजगार की संभावना बढ़ी है। यदि प्रशिक्षण, रोजगार योजनाओं का विस्तार किया जाए तो महिलाओं को बेहतर रोजगार मिल सकता है। यहां दी मात-परिवहन में महिलाओं की नौकरी पुरुषों से ज्यादा रिपोर्ट में सबसे दिलचस्प बदलाव परिवहन क्षेत्र में दिखा। यहां नियमित वेतन वाली नौकरियों में महिलाओं की हिस्सेदारी पुरुषों से ज्यादा पाई गई। लंबे समय तक पुरुष प्रधान माने जाने वाले इस क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती मौजूदगी नए रोजगार रुझान का संकेत मानी जा रही है। दूसरी ओर खनन और औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं की नियमित नौकरी हिस्सेदारी अब भी काफी कम बनी हुई है।
संजय कपूर प्रॉपर्टी विवाद केस:करिश्मा के बच्चों के पक्ष में हुई सुनवाई के बाद मां ने दायर करवाई याचिका, बोर्ड मीटिंग पर रोक लगाने की मांग

करिश्मा कपूर के पूर्व पति और इंडस्ट्रियलिस्ट संजय कपूर का प्रॉपर्टी विवाद कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। जून 2025 में हुए संजय कपूर के निधन के बाद करिश्मा कपूर के बच्चों कियान और समायरा ने सौतेली मां प्रिया कपूर पर फर्जी वसीयत बनवाने के आरोप में शिकायत दर्ज करवाई थी। कोर्ट ने सुनावई के दौरान वसीयत पर शक होने पर प्रिया द्वारा संजय कपूर की प्रॉपर्टी बेचने पर रोक लगा दी थी। अब संजय कपूर की मां सीमा कपूर ने नई याचिका दायर कर कंपनी की बोर्ड मीटिंग रोके जाने की मांग की है। संजय की मां रानी कपूर ने सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल कर मांग की है कि प्रिया कपूर और कुछ अन्य लोग आरके फैमिली ट्रस्ट के कामकाज में दखल न दें। याचिका के अनुसार, 18 मई को एक बोर्ड मीटिंग रखी गई है, जो 8 मई को जारी कोर्ट के नोटिस के बाद बुलाई गई थी। इस बोर्ड मीटिंग का लक्ष्य कंपनी का नया डायरेक्टर नियुक्त करना है। रानी कपूर ने याचिका में 18 मई के लिए शेड्यूल इस बोर्ड मीटिंग पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा है कि जब तक मध्यस्त्था की प्रोसेस पूरी नहीं होती, तब तक कोई ट्रस्ट के काम में दखल न दे। रानी कपूर की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायधीश जे.बी.पर्दीवाला ने कहा, ‘अब हम एक ऐसे विवाद में आ चुके हैं, जिसके सामने महाभारत भी अब छोटी लगेगी। हम इस मामले को देखेंगे।’ रानी कपूर के केस को लिस्ट कर लिया गया है। केस की सुनवाई 14 मई गुरुवार को होगी। कोर्ट ने करिश्मा के बच्चों को दी राहत हाल ही में हुई मामले की सुनवाई में कोर्ट ने संजय कपूर की संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए प्रिया कपूर पर इन्हें बेचने की रोक लगा दी है। करिश्मा कपूर के बच्चों कियान और समायरा ने कोर्ट में दावा किया है कि प्रिया सचदेवा ने उनके पिता की एक फर्जी वसीयत तैयार की है। बच्चों का आरोप है कि प्रिया ने कोर्ट में संपत्तियों की जो लिस्ट पेश की है, वह अधूरी है। उनके मुताबिक, इस लिस्ट में संजय की कई महंगी रोलेक्स घड़ियां, पोलो खेलने वाले कीमती घोड़े और करोड़ों की पेंटिंग्स का जिक्र नहीं किया गया है। बच्चों का कहना है कि संजय कपूर की कई अचल संपत्तियां भी इस सूची से बाहर रखी गई हैं। याचिका में बच्चों ने कहा था कि उनके पिता उन्हें वसीयत से अलग नहीं कर सकते थे, क्योंकि वो उनसे बेहद क्लोज थे। उनके निधन के बाद प्रिया कपूर ने उन्हें एक वसीयत दिखाई, जिसमें उनका नाम नहीं था। सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि संजय कपूर की संपत्ति को सुरक्षित रखा जाना जरूरी है ताकि उसे नष्ट न किया जा सके। कोर्ट ने प्रिया सचदेवा को किसी भी संपत्ति को बेचने से रोक दिया है और संजय के बैंक खातों के संचालन पर भी फिलहाल पाबंदी लगा दी है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अब यह साबित करने की जिम्मेदारी प्रिया की है कि वसीयत असली है। अगर अभी कार्रवाई नहीं की गई और बाद में वसीयत फर्जी निकली, तो यह बच्चों के साथ बड़ा अन्याय होगा। लंदन में पोलो खेलते समय हुई थी मौत जून 2025 में 53 साल के संजय कपूर की इंग्लैंड में एक पोलो मैच के दौरान कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई थी। रानी कपूर का कहना है कि बेटे की मौत के बाद उनकी तीसरी पत्नी प्रिया कपूर ने पूरी ग्रुप कंपनियों पर नियंत्रण कर लिया और उन्हें संपत्ति में कोई हिस्सा नहीं दिया।
संजय कपूर प्रॉपर्टी विवाद केस:करिश्मा के बच्चों के पक्ष में हुई सुनवाई के बाद मां ने दायर करवाई याचिका, बोर्ड मीटिंग पर रोक लगाने की मांग

करिश्मा कपूर के पूर्व पति और इंडस्ट्रियलिस्ट संजय कपूर का प्रॉपर्टी विवाद कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। जून 2025 में हुए संजय कपूर के निधन के बाद करिश्मा कपूर के बच्चों कियान और समायरा ने सौतेली मां प्रिया कपूर पर फर्जी वसीयत बनवाने के आरोप में शिकायत दर्ज करवाई थी। कोर्ट ने सुनावई के दौरान वसीयत पर शक होने पर प्रिया द्वारा संजय कपूर की प्रॉपर्टी बेचने पर रोक लगा दी थी। अब संजय कपूर की मां सीमा कपूर ने नई याचिका दायर कर कंपनी की बोर्ड मीटिंग रोके जाने की मांग की है। संजय की मां रानी कपूर ने सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल कर मांग की है कि प्रिया कपूर और कुछ अन्य लोग आरके फैमिली ट्रस्ट के कामकाज में दखल न दें। याचिका के अनुसार, 18 मई को एक बोर्ड मीटिंग रखी गई है, जो 8 मई को जारी कोर्ट के नोटिस के बाद बुलाई गई थी। इस बोर्ड मीटिंग का लक्ष्य कंपनी का नया डायरेक्टर नियुक्त करना है। रानी कपूर ने याचिका में 18 मई के लिए शेड्यूल इस बोर्ड मीटिंग पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा है कि जब तक मध्यस्त्था की प्रोसेस पूरी नहीं होती, तब तक कोई ट्रस्ट के काम में दखल न दे। रानी कपूर की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायधीश जे.बी.पर्दीवाला ने कहा, ‘अब हम एक ऐसे विवाद में आ चुके हैं, जिसके सामने महाभारत भी अब छोटी लगेगी। हम इस मामले को देखेंगे।’ रानी कपूर के केस को लिस्ट कर लिया गया है। केस की सुनवाई 14 मई गुरुवार को होगी। कोर्ट ने करिश्मा के बच्चों को दी राहत हाल ही में हुई मामले की सुनवाई में कोर्ट ने संजय कपूर की संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए प्रिया कपूर पर इन्हें बेचने की रोक लगा दी है। करिश्मा कपूर के बच्चों कियान और समायरा ने कोर्ट में दावा किया है कि प्रिया सचदेवा ने उनके पिता की एक फर्जी वसीयत तैयार की है। बच्चों का आरोप है कि प्रिया ने कोर्ट में संपत्तियों की जो लिस्ट पेश की है, वह अधूरी है। उनके मुताबिक, इस लिस्ट में संजय की कई महंगी रोलेक्स घड़ियां, पोलो खेलने वाले कीमती घोड़े और करोड़ों की पेंटिंग्स का जिक्र नहीं किया गया है। बच्चों का कहना है कि संजय कपूर की कई अचल संपत्तियां भी इस सूची से बाहर रखी गई हैं। याचिका में बच्चों ने कहा था कि उनके पिता उन्हें वसीयत से अलग नहीं कर सकते थे, क्योंकि वो उनसे बेहद क्लोज थे। उनके निधन के बाद प्रिया कपूर ने उन्हें एक वसीयत दिखाई, जिसमें उनका नाम नहीं था। सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि संजय कपूर की संपत्ति को सुरक्षित रखा जाना जरूरी है ताकि उसे नष्ट न किया जा सके। कोर्ट ने प्रिया सचदेवा को किसी भी संपत्ति को बेचने से रोक दिया है और संजय के बैंक खातों के संचालन पर भी फिलहाल पाबंदी लगा दी है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अब यह साबित करने की जिम्मेदारी प्रिया की है कि वसीयत असली है। अगर अभी कार्रवाई नहीं की गई और बाद में वसीयत फर्जी निकली, तो यह बच्चों के साथ बड़ा अन्याय होगा। लंदन में पोलो खेलते समय हुई थी मौत जून 2025 में 53 साल के संजय कपूर की इंग्लैंड में एक पोलो मैच के दौरान कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई थी। रानी कपूर का कहना है कि बेटे की मौत के बाद उनकी तीसरी पत्नी प्रिया कपूर ने पूरी ग्रुप कंपनियों पर नियंत्रण कर लिया और उन्हें संपत्ति में कोई हिस्सा नहीं दिया।
कोच फ्लिक ने बदली बार्सिलोना की तकदीर:97 साल बाद मैड्रिड को हराकर बार्सिलोना बना सरताज, फ्लिक की युवा ब्रिगेड का दबदबा

स्पेनिश फुटबॉल में इस साल खिताबी जंग किसी ड्रामे या आखिरी पलों के उलटफेर वाली नहीं थी। बार्सिलोना ने रियल मैड्रिड के खिलाफ 2-0 की जीत दर्ज की और पॉइंट टेबल में 14 अंकों के भारी अंतर के साथ ला लिगा का खिताब अपने नाम किया। ‘एल क्लासिको’ पिछले 97 वर्षों में पहला ऐसा मैच बना, जिसने आधिकारिक तौर पर लीग का विजेता तय किया। कोच हेंसी फ्लिक के दो साल के कार्यकाल में यह उनका दूसरा लगातार खिताब है। बार्सिलोना ने 29वीं बार ला लिगा का टाइटल जीता। जर्मनी के फ्लिक पिता के निधन के बावजूद मैच के दौरान टीम के साथ मौजूद थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में बार्सिलोना को ऐसी टीम बनाया, जिसने लीग पर दबदबा कायम किया। फ्लिक की टीम बार्सिलोना फरवरी से ही अविश्वसनीय फॉर्म में रही है और उसने लगातार पिछले 11 मैच जीते हैं। इस पूरे सीजन में बार्सिलोना ने केवल चार लीग मैच गंवाए और होम ग्राउंड पर उनका जीत का रिकॉर्ड 100% रहा। हालांकि, टीम चैम्पियंस लीग और कोपा डेल रे से बाहर हो गई, लेकिन ला लिगा की रेस पर उनका नियंत्रण कभी कम नहीं हुआ। इस सत्र के 53 मैचों में से बार्सिलोना ने 42 जीते हैं- यानी 79% जीत की दर, जो यूरोप की टॉप-5 लीग में केवल बायर्न म्यूनिख (83%) से कम है। फ्लिक के आने के बाद बार्सिलोना की पहचान बदल गई है। उनके आने के बाद टीम ज्यादा अनुशासनात्मक हुई। उन्होंने डायरेक्ट अटैकिंग खेल की रणनीति अपनाई। इस बदलाव के केंद्र में नई पीढ़ी रही, जिसका नेतृत्व लामिने यमाल कर रहे हैं। 18 वर्षीय यमाल ने इस सीजन में 45 खेलों में 24 गोल किए हैं। फ्लिक ने उन पर भरोसा जताते हुए ऐसे टैक्टिकल पैटर्न बनाए जो उनकी ड्रिबलिंग और रचनात्मकता को निखारते हैं। यमाल के साथ-साथ पाउ कुबार्सी और फर्मिन लोपेज जैसे अन्य युवा खिलाड़ियों को भी सिस्टम में बखूबी शामिल किया। फ्लिक की कोचिंग में मार्कस रेशफोर्ड ने अपनी उपयोगिता साबित की है। भले ही वह हर मैच में शुरुआती इलेवन का हिस्सा न रहे हों, लेकिन बेंच से आकर उन्होंने महत्वपूर्ण गोल किए हैं। रियल के खिलाफ क्लासिको में रेशफोर्ड की शानदार फ्री-किक ने जीत की नींव रखी। मैनेजर के तौर पर फ्लिक की संवेदनशीलता की भी प्रशंसा हुई है। दिसंबर में उन्होंने डिफेंडर रोनाल्ड अराउजो को उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए छुट्टी दे दी थी।
हिमंत बिस्वा सरमा 2.0: हिमंत बिस्वा सरमा दूसरी बार असम के सीएम बने, शपथ से पहले मां कामाख्या और शंकरदेव को नमन

हिमंत बिस्वा सरमा 2.0: असम में नई सरकार का गठन हो चुका है और हिमंत बिस्वा सरमा (हिमंत बिस्वा सरमा) दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बन गए हैं। हिमंत बिस्वा सरमा ने आज गुवाहाटी में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री की शपथ ली। इसी तरह असम में लगातार तीसरी बार बीजेपी-एनडीए की सरकार बनी है. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा को अपमानित किया। शपथ ग्रहण समारोह (असम सीएम शपथ) से पहले हिमंता बिस्वा सरमा ने मीडिया से बातचीत की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मां कामाख्या (कामाख्या मंदिर) और श्रीमंत शंकरदेव शंकरदेव (श्रीमंत शंकरदेव) का भी मजाक उड़ाया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हिमंता बिस्वा सरमा ने लिखा- ‘मां कामाख्या और महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव के आशीर्वाद से असम के लोगों का जीवन सुख, शांति और समृद्धि की ओर आगे बढ़े।’ उन्होंने कहा कि उनके आशीर्वाद से असम आने वाले दिनों में विकास की नई बात को चूमेगा। मुख्यमंत्री पद की शपथ से पहले जिस तरह से हिमंत बिस्वा सरमा ने मां कामाख्या और शंकरदेव को याद किया यह राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों नजरियों से अहम है। माँ कामाख्या और महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव का आशीर्वाद असम में सभी के जीवन को रोशन करे और शांति, प्रगति और समृद्धि के नए रास्ते खोले। उनके आशीर्वाद से आने वाले दिनों में असम विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा। 12.05.2026 pic.twitter.com/ocEPHSo9g1 – हिमंत बिस्वा सरमा (@himantabiswa) 12 मई 2026 हिटलर में हिमंत बिस्वा सरमा के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष समेत कई नेता भी मौजूद हैं. बता दें कि असम में हिमंत बिस्वा सरमा वर्तमान में मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख अध्यक्ष भी हैं। अब दूसरी बार वे राज्य के मुख्यमंत्री बन रहे हैं। असम चुनाव बहुमत से बहुमत था असम की 126 विधानसभा सीटों पर प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए कुल 102 सीटों पर जीत दर्ज की गई थी। बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) को 82 सीटें मिलीं, जबकि सहयोगी दल एजीपी और बीपीएफ ने 10-10 सीटें अपने नाम की रखीं. दूसरी ओर, कांग्रेस अलायंस 19 डेमोक्रेट्स पर आधारित था। जहां रायजोर पार्टी और एआईयूडीएफ को 2-2 से बढ़त मिली, वहीं टीएमसी को 1 सीट हासिल हुई। असम जाति परिषद (एजेपी) का खाता भी नहीं खुला। ये भी पढ़ें: असम चुनाव परिणाम 2026: असम में हिमंता बिस्वा सरमा की जीत, कुंडली के ग्रह दे रहे शक्ति और स्थिरता का संकेतअस्वीकरण: यहां चार्टर्ड सूचना सिर्फ अभ्यर्थियों और विद्वानों पर आधारित है। यहां यह जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह के सिद्धांत, जानकारी की पुष्टि नहीं होती है। किसी भी जानकारी या सिद्धांत को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें। (टैग्सटूट्रांसलेट)हिमंत बिस्वा सरमा 2.0(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)असम सीएम शपथ(टी)असम राजनीति(टी)मां कामाख्या(टी)असम सीएम शपथ लाइव(टी)बीजेपी(टी)कामाख्या मंदिर(टी)श्रीमंत शंकरदेव(टी)बीजेपी असम(टी)हिमंत शपथ समारोह(टी)हिमंत बिस्वा सरमा 2.0(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)असम सीएम शपथ(टी)असम राजनीति(टी)मां कामाख्या(टी)असम सीएम शपथ लाइव(टी)बीजेपी(टी)कामाख्या मंदिर(टी)श्रीमंत शंकरदेव(टी)बीजेपी असम(टी)हिमंत शपथ शपथ
रिपोर्ट-पाकिस्तान ने ईरान के सैन्य विमान छिपाने में मदद की:अमेरिकी हमलों से बचाने नूर खान एयरबेस पर रखा, PAK ने आरोपों को नकारा

पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर जगह दी। यह दावा CBS न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में किया है। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि अप्रैल में सीजफायर के ऐलान के कुछ दिन बाद ईरान ने कई विमान पाकिस्तान एयरफोर्स के नूर खान एयरबेस भेजे। यह एयरबेस रावलपिंडी के पास स्थित पाकिस्तान का अहम सैन्य ठिकाना माना जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भेजे गए विमानों में ईरानी एयरफोर्स का RC-130 विमान भी शामिल था। यह लॉकहीड C-130 हरक्यूलिस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का खुफिया और निगरानी मिशन वाला वर्जन माना जाता है। पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रिपोर्ट में किए गए दावों को खारिज किया। CBS न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि नूर खान एयरबेस शहर के बीच में स्थित है और वहां बड़ी संख्या में विमान छिपाना संभव नहीं है। दावा- ईरान ने कुछ प्लेन अफगानिस्तान भी भेजे रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने कुछ नागरिक विमान अफगानिस्तान भी भेजे। एक अफगान सिविल एविएशन अधिकारी ने दावा किया कि माहान एयर का एक विमान युद्ध शुरू होने से पहले काबुल पहुंचा था। ईरानी एयरस्पेस बंद होने के बाद वह विमान काबुल एयरपोर्ट पर ही रुका रहा। मार्च में पाकिस्तान और तालिबान सरकार के बीच तनाव बढ़ने पर काबुल एयरपोर्ट पर हमले की आशंका बनी। इसके बाद तालिबान के सिविल एविएशन अधिकारियों ने माहान एयर के विमान को सुरक्षा कारणों से ईरान सीमा के पास हेरात एयरपोर्ट भेज दिया। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने अफगानिस्तान में ईरानी विमानों की मौजूदगी से इनकार किया। ईरान और चीन को नाराज नहीं करना चाहता पाकिस्तान पाकिस्तान एक तरफ खुद को अमेरिका के सामने मध्यस्थ और स्थिरता लाने वाले देश के रूप में पेश कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ वह ईरान और चीन को नाराज करने से बचने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले दशक में पाकिस्तान की चीन पर सैन्य निर्भरता काफी बढ़ी है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक स्टडी के मुताबिक 2020 से 2024 के बीच पाकिस्तान के 80% बड़े हथियार चीन ने सप्लाई किए। पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में पहले दौर की बातचीत हुई थी। 21 घंटे तक यह वार्ता चलने के बावजूद नाकाम हो गई थी। दोनों के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल और न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी। ईरान ने रविवार को पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक प्रस्ताव सौंपा था, जिसे ट्रम्प ने पूरी तरह खारिज कर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव में युद्ध खत्म करने, फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने, प्रतिबंध हटाने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की बात कही गई थी। अमेरिका ने एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने की शर्त रखी अमेरिका ने इस हफ्ते ईरान को 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा था। इसके तहत ईरान को कम से कम 12 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकना होगा और अपने पास मौजूद करीब 440 किलो 60% एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंपना होगा। इसके बदले अमेरिका प्रतिबंधों में ढील देगा, ईरान की फ्रीज की गईं अरबों डॉलर की संपत्तियां छोड़ेगा, साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और हाईली एनरिच्ड यूरेनियम पर पूरी तरह समझौता करने को तैयार नहीं है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… नेतन्याहू बोले- ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई जिंदा:बंकर में छिपे, सत्ता पर पिता जैसी पकड़ नहीं, जनता के विद्रोह का डर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई जिंदा हैं, लेकिन उनकी सत्ता पर पकड़ उनके पिता अली खामेनेई जैसी मजबूत नहीं है। CBS न्यूज के शो ‘60 मिनट्स’ को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि मुजतबा किसी बंकर या गुप्त जगह पर छिपे हुए हैं और वहीं से सत्ता संभालने की कोशिश कर रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
रिपोर्ट-पाकिस्तान ने ईरान के सैन्य विमान छिपाने में मदद की:अमेरिकी हमलों से बचाने नूर खान एयरबेस पर रखा, PAK ने आरोपों को नकारा

पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर जगह दी। यह दावा CBS न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में किया है। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि अप्रैल में सीजफायर के ऐलान के कुछ दिन बाद ईरान ने कई विमान पाकिस्तान एयरफोर्स के नूर खान एयरबेस भेजे। यह एयरबेस रावलपिंडी के पास स्थित पाकिस्तान का अहम सैन्य ठिकाना माना जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भेजे गए विमानों में ईरानी एयरफोर्स का RC-130 विमान भी शामिल था। यह लॉकहीड C-130 हरक्यूलिस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का खुफिया और निगरानी मिशन वाला वर्जन माना जाता है। पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रिपोर्ट में किए गए दावों को खारिज किया। CBS न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि नूर खान एयरबेस शहर के बीच में स्थित है और वहां बड़ी संख्या में विमान छिपाना संभव नहीं है। दावा- ईरान ने कुछ प्लेन अफगानिस्तान भी भेजे रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने कुछ नागरिक विमान अफगानिस्तान भी भेजे। एक अफगान सिविल एविएशन अधिकारी ने दावा किया कि माहान एयर का एक विमान युद्ध शुरू होने से पहले काबुल पहुंचा था। ईरानी एयरस्पेस बंद होने के बाद वह विमान काबुल एयरपोर्ट पर ही रुका रहा। मार्च में पाकिस्तान और तालिबान सरकार के बीच तनाव बढ़ने पर काबुल एयरपोर्ट पर हमले की आशंका बनी। इसके बाद तालिबान के सिविल एविएशन अधिकारियों ने माहान एयर के विमान को सुरक्षा कारणों से ईरान सीमा के पास हेरात एयरपोर्ट भेज दिया। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने अफगानिस्तान में ईरानी विमानों की मौजूदगी से इनकार किया। ईरान और चीन को नाराज नहीं करना चाहता पाकिस्तान पाकिस्तान एक तरफ खुद को अमेरिका के सामने मध्यस्थ और स्थिरता लाने वाले देश के रूप में पेश कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ वह ईरान और चीन को नाराज करने से बचने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले दशक में पाकिस्तान की चीन पर सैन्य निर्भरता काफी बढ़ी है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक स्टडी के मुताबिक 2020 से 2024 के बीच पाकिस्तान के 80% बड़े हथियार चीन ने सप्लाई किए। पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में पहले दौर की बातचीत हुई थी। 21 घंटे तक यह वार्ता चलने के बावजूद नाकाम हो गई थी। दोनों के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल और न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी। ईरान ने रविवार को पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक प्रस्ताव सौंपा था, जिसे ट्रम्प ने पूरी तरह खारिज कर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव में युद्ध खत्म करने, फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने, प्रतिबंध हटाने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की बात कही गई थी। अमेरिका ने एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने की शर्त रखी अमेरिका ने इस हफ्ते ईरान को 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा था। इसके तहत ईरान को कम से कम 12 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकना होगा और अपने पास मौजूद करीब 440 किलो 60% एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंपना होगा। इसके बदले अमेरिका प्रतिबंधों में ढील देगा, ईरान की फ्रीज की गईं अरबों डॉलर की संपत्तियां छोड़ेगा, साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और हाईली एनरिच्ड यूरेनियम पर पूरी तरह समझौता करने को तैयार नहीं है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… नेतन्याहू बोले- ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई जिंदा:बंकर में छिपे, सत्ता पर पिता जैसी पकड़ नहीं, जनता के विद्रोह का डर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई जिंदा हैं, लेकिन उनकी सत्ता पर पकड़ उनके पिता अली खामेनेई जैसी मजबूत नहीं है। CBS न्यूज के शो ‘60 मिनट्स’ को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि मुजतबा किसी बंकर या गुप्त जगह पर छिपे हुए हैं और वहीं से सत्ता संभालने की कोशिश कर रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
दिल्ली के इन गुरुद्वारों को लोग कहते हैं ‘सस्ता हॉस्पिटल’, जांच से लेकर इलाज तक है सस्ता, जानें लोकेशन

Last Updated:May 12, 2026, 11:19 IST देश की राजधानी दिल्ली में कई गुरुद्वारा ऐसे हैं. जहां पर महंगी से महंगी जांच भी बेहद कम कीमतों पर होती है. इन गुरुद्वारों को लोग धार्मिक स्थान कम और सस्ते अस्पताल के नाम से ज्यादा जानते हैं. यहां ओपीडी भी होती है. मरीजों की जांच इलाज के साथ-साथ में दवाएं भी दी जाती है. आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए यह गुरुद्वारा किसी वरदान से कम नहीं है. दिल्ली का एक गुरुद्वारा है, जहां पर गुरुद्वारा बाला साहिब (सराय काले खां के पास) में फ्री किडनी डायलिसिस और जांच की सुविधा उपलब्ध है. यहां गुरु हरकिशन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च के तहत अत्याधुनिक अस्पताल चलता है, जो बिना किसी बिल काउंटर के पूरी तरह से नि:शुल्क इलाज मरीजों को देता है. अगर नि:शुल्क सेवा की बात करें तो यहां पर डायलिसिस, जरूरी जांच और दवाएं पूरी तरह से फ्री हैं. यह भारत का सबसे बड़ा किडनी डायलिसिस अस्पताल है, जिसमें 100 से अधिक बेड हैं. यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ ओपीडी सेवाएं, ऑपरेशन थिएटर और वार्ड भी उपलब्ध है. इसके अलावा दिल्ली के रकाब गंज साहिब (संसद भवन) में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति की ओर से संचालित स्वास्थ्य केंद्र में मुफ्त या बहुत कम दरों पर जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध है. यहां पर ‘बाला प्रीतम दवाखाना’ के माध्यम से रियायती दरों पर जांच और दवाएं दी जाती हैं. यहां पर मरीजों के लिए चिकित्सा केंद्र, जांच और दवाओं की सुविधा भी दी जाती है. दिल्ली के राजौरी गार्डन के ब्लॉक जे-3 में स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह साहब में साल 2022 में खालसा कैंसर केयर कीमोथेरेपी केंद्र की स्थापना की गई थी. यहां पर आर्थिक रूप से कमजोर और सभी तरह के मरीजों के लिए कैंसर की कीमोथेरेपी और ब्रेस्ट स्क्रीनिंग होती है. आज जब कैंसर की कीमोथेरेपी प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में लाखों में हो रही है, तो वहीं दिल्ली में एक जगह ऐसी भी है. जहां पर मात्र 5000 रुपए में कीमोथेरेपी सभी तरह के कैंसर मरीजों की की जा रही है. यही नहीं, डायलिसिस मात्र 750 रुपए में यहां पर होती है. यह जगह कैंसर और किडनी के मरीजों के लिए वरदान है. Add News18 as Preferred Source on Google इन गुरुद्वारों में सबसे ऊंचा नाम देश भर में मशहूर राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली का बंगला साहिब गुरुद्वारा है. यहां परमहंगा एमआरआई टेस्ट मात्र 50 रुपए में होता है. आमतौर पर एमआरआई टेस्ट की कीमत 6000 से 8000 रुपए के बीच होती है, लेकिन यहां पर सिर्फ 50 रुपए इसकी कीमत रखी गई है. इसके अलावा यहां पर मरीजों को महज 50 रुपए में सीटी स्कैन, अल्ट्रसाउंड, एक्स-रे तक कराने का सुविधा मिलती है. गुरुद्वारा और सिख समुदाय का नाम जब भी आता है तो देश प्रेम, देश भाव और सेवा भाव अपने आप ही जुबां पर आ जाता है, क्योंकि गुरुद्वारों में लोगों को हमेशा निशुल्क खाना खिलाया जाता है. कोविड-19 के वक्त भी गुरुद्वारों ने लोगों की काफी मदद की थी, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि सिखों का यह पवित्र स्थान न सिर्फ लोगों की सेवा खाना खिलाकर या लंगर लगाकर करता है. बल्कि देश प्रेम में और देश सेवा में मरीजों को सस्ती जांच और इलाज की सुविधा भी देता है. देश की राजधानी दिल्ली में पांच ऐसे बड़े गुरुद्वारे हैं, जहां पर यह सुविधा दी जाती है. दिल्ली के चांदनी चौक स्थित गुरुद्वारा शीश गंज साहिब में भी मरीजों को सस्ते में दवाएं दी जाती है. यहां मुख्य रूप से फ्री डिस्पेंसरी और दवाखाना की सेवा उपलब्ध है. यहां पर सामान्य बीमारियों के लिए मुफ्त परामर्श और दवाएं दी जाती हैं. यही नहीं, यहां पर मरीजों के लिए मुफ्त चेकअप और उसकी दवाएं भी दी जाती हैं. आपातकालीन चिकित्सा भी यहां पर उपलब्ध है. जैसे गंभीर स्थिति में प्राथमिक उपचार भी दिया जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।







