Saturday, 16 May 2026 | 12:50 PM

Trending :

आर्थिक फैसलों में महिलाओं की बढ़ी भागीदारी:महिला मुखिया वाले घरों में कम हुई दिहाड़ी; पक्की नौकरियां बढ़ीं- रिपोर्ट

आर्थिक फैसलों में महिलाओं की बढ़ी भागीदारी:महिला मुखिया वाले घरों में कम हुई दिहाड़ी; पक्की नौकरियां बढ़ीं- रिपोर्ट

देश में महिलाओं की आर्थिक भूमिका सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं रह गई। एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट में सामने आया है कि महिला मुखिया वाले परिवारों में रोजगार की गुणवत्ता तेजी से सुधर रही है। जब घर में महिला की चलती है, तो परिवार की निर्भरता असुरक्षित दिहाड़ी मजदूरी से हटकर सम्मानजनक नियमित वेतन वाली नौकरियों की ओर बढ़ जाती है। ऐसी महिलाओं में नियमित रोजगार की संभावना 4.4% बढ़ी है, जबकि दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भरता 4.2% घटी है। यह संकेत है कि महिलाएं संरक्षित रोजगार की ओर बढ़ रही हैं। देशभर के 2.70 लाख परिवारों और 11.48 लाख से अधिक लोगों के आंकड़ों पर आधारित सर्वे शहर – सुरक्षित नौकरियों की ओर बड़ी छलांग शहरी क्षेत्रों में जिन घरों की मुखिया महिला है, वहां नियमित वेतन वाली नौकरियों की संभावना 10 फीसदी तक बढ़ गई है। यह डेटा चौंकाने वाला है क्योंकि यह दर्शाता है कि महिलाएं अनिश्चित छोटे-मोटे व्यवसायों के बजाय स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा वाले कॉर्पोरेट या संस्थागत काम को प्राथमिकता दे रही हैं। ग्रामीण भारत – दिहाड़ी मजदूरी में 5% तक की कमी आई महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण घरों में दिहाड़ी में शामिल होने की संभावना 5% घटी। इसकी जगह परिवार अब खुद के छोटे उद्यमों या नियमित काम की ओर बढ़ रहे हैं, जो उनकी बढ़ती बार्गेनिंग पावर को दर्शाता है। महिला शिक्षित होती हैं तो तेजी से उन्नति अध्ययन में शिक्षा को भी महिलाओं के रोजगार बदलाव का बड़ा कारण बताया गया है। अशिक्षित महिलाओं में दिहाड़ी मजदूरी की संभावना सबसे ज्यादा है, लेकिन शिक्षा बढ़ने के साथ यह तेजी से घटती है। उच्च माध्यमिक और उससे ऊपर की पढ़ाई करने वाली महिलाओं में नियमित वेतन वाली नौकरी की संभावना सबसे अधिक पाई गई। श्रम में हिस्सेदारी रिकॉर्ड 40 फीसदी पहुंची देश में महिला श्रम भागीदारी दर 40% तक पहुंच चुकी है। ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी दर 45.9% और शहरों में महज 27.7% है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं में स्वरोजगार की संभावना बढ़ी है। यदि प्रशिक्षण, रोजगार योजनाओं का विस्तार किया जाए तो महिलाओं को बेहतर रोजगार मिल सकता है। यहां दी मात-परिवहन में महिलाओं की नौकरी पुरुषों से ज्यादा रिपोर्ट में सबसे दिलचस्प बदलाव परिवहन क्षेत्र में दिखा। यहां नियमित वेतन वाली नौकरियों में महिलाओं की हिस्सेदारी पुरुषों से ज्यादा पाई गई। लंबे समय तक पुरुष प्रधान माने जाने वाले इस क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती मौजूदगी नए रोजगार रुझान का संकेत मानी जा रही है। दूसरी ओर खनन और औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं की नियमित नौकरी हिस्सेदारी अब भी काफी कम बनी हुई है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Iran's Supreme Leader Mojtaba Khamenei and US President Donald Trump. (File)

May 14, 2026/
1:51 pm

आखरी अपडेट:14 मई, 2026, 13:51 IST कई दिनों के गहन विचार-विमर्श के बाद, केरल विधानसभा चुनाव में यूडीएफ की प्रचंड...

कनाडा में कपिल शर्मा के कैफे के पास फिर फायरिंग:सोशल मीडिया पर मिली धमकी के बाद एजेंसियां अलर्ट; फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य

May 3, 2026/
5:19 am

कनाडा के सरे शहर में बॉलीवुड कॉमेडियन कपिल शर्मा से जुड़े एक कैफे के पास एक बार फिर फायरिंग की...

Leander Paes (X)

March 31, 2026/
12:48 pm

आखरी अपडेट:मार्च 31, 2026, 12:48 IST असम में विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल, 2026 को एक ही चरण में होने वाले...

भोपाल पुलिस ने रेलकर्मियों को पीटा...VIDEO:सड़क पर घूंसे-थप्पड़ मारे, कॉलर पकड़कर खींचते ले गए; बस रोकने पर झूमाझटकी; 30 मिनट ट्रैफिक जाम रहा

March 15, 2026/
11:34 pm

भोपाल में डी मार्ट के सामने रविवार शाम बस रोकने को लेकर ट्रैफिक पुलिस और रेलकर्मियों के बीच विवाद हो...

राजनीति

आर्थिक फैसलों में महिलाओं की बढ़ी भागीदारी:महिला मुखिया वाले घरों में कम हुई दिहाड़ी; पक्की नौकरियां बढ़ीं- रिपोर्ट

आर्थिक फैसलों में महिलाओं की बढ़ी भागीदारी:महिला मुखिया वाले घरों में कम हुई दिहाड़ी; पक्की नौकरियां बढ़ीं- रिपोर्ट

देश में महिलाओं की आर्थिक भूमिका सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं रह गई। एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट में सामने आया है कि महिला मुखिया वाले परिवारों में रोजगार की गुणवत्ता तेजी से सुधर रही है। जब घर में महिला की चलती है, तो परिवार की निर्भरता असुरक्षित दिहाड़ी मजदूरी से हटकर सम्मानजनक नियमित वेतन वाली नौकरियों की ओर बढ़ जाती है। ऐसी महिलाओं में नियमित रोजगार की संभावना 4.4% बढ़ी है, जबकि दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भरता 4.2% घटी है। यह संकेत है कि महिलाएं संरक्षित रोजगार की ओर बढ़ रही हैं। देशभर के 2.70 लाख परिवारों और 11.48 लाख से अधिक लोगों के आंकड़ों पर आधारित सर्वे शहर – सुरक्षित नौकरियों की ओर बड़ी छलांग शहरी क्षेत्रों में जिन घरों की मुखिया महिला है, वहां नियमित वेतन वाली नौकरियों की संभावना 10 फीसदी तक बढ़ गई है। यह डेटा चौंकाने वाला है क्योंकि यह दर्शाता है कि महिलाएं अनिश्चित छोटे-मोटे व्यवसायों के बजाय स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा वाले कॉर्पोरेट या संस्थागत काम को प्राथमिकता दे रही हैं। ग्रामीण भारत – दिहाड़ी मजदूरी में 5% तक की कमी आई महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण घरों में दिहाड़ी में शामिल होने की संभावना 5% घटी। इसकी जगह परिवार अब खुद के छोटे उद्यमों या नियमित काम की ओर बढ़ रहे हैं, जो उनकी बढ़ती बार्गेनिंग पावर को दर्शाता है। महिला शिक्षित होती हैं तो तेजी से उन्नति अध्ययन में शिक्षा को भी महिलाओं के रोजगार बदलाव का बड़ा कारण बताया गया है। अशिक्षित महिलाओं में दिहाड़ी मजदूरी की संभावना सबसे ज्यादा है, लेकिन शिक्षा बढ़ने के साथ यह तेजी से घटती है। उच्च माध्यमिक और उससे ऊपर की पढ़ाई करने वाली महिलाओं में नियमित वेतन वाली नौकरी की संभावना सबसे अधिक पाई गई। श्रम में हिस्सेदारी रिकॉर्ड 40 फीसदी पहुंची देश में महिला श्रम भागीदारी दर 40% तक पहुंच चुकी है। ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी दर 45.9% और शहरों में महज 27.7% है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं में स्वरोजगार की संभावना बढ़ी है। यदि प्रशिक्षण, रोजगार योजनाओं का विस्तार किया जाए तो महिलाओं को बेहतर रोजगार मिल सकता है। यहां दी मात-परिवहन में महिलाओं की नौकरी पुरुषों से ज्यादा रिपोर्ट में सबसे दिलचस्प बदलाव परिवहन क्षेत्र में दिखा। यहां नियमित वेतन वाली नौकरियों में महिलाओं की हिस्सेदारी पुरुषों से ज्यादा पाई गई। लंबे समय तक पुरुष प्रधान माने जाने वाले इस क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती मौजूदगी नए रोजगार रुझान का संकेत मानी जा रही है। दूसरी ओर खनन और औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं की नियमित नौकरी हिस्सेदारी अब भी काफी कम बनी हुई है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.