11 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी
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26/11 के हमले ने मुंबई को दहला दिया था, गोलियां थमीं, लेकिन इंसाफ की जंग जारी रही। आतंक के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई अदालत में लड़ी गई।
‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ इसी कानूनी संघर्ष की कहानी है, जहां हथियारों की जगह दलीलें हैं और हर सबूत की अहमियत। राजकुमार राव और ललित प्रभाकर का दमदार अभिनय फिल्म को खास बनाता है।
अदालत में इंसाफ की लड़ाई के साथ यह कहानी एक वकील की निजी जिंदगी में झांकती है, जहां देश की जिम्मेदारी और परिवार के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं।
अविनाश अरुण के निर्देशन में बनी 2 घंटे 20 मिनट की इस फिल्म को दैनिक भास्कर ने 4 स्टार रेटिंग दी है।

कहानी: अदालत में मुकदमा, घर में रिश्तों का इम्तिहान
फिल्म में उज्ज्वल निकम (राजकुमार राव) की कहानी दिखाई गई है, जो देश के जाने-माने सरकारी वकील हैं और 26/11 हमले के आरोपी अजमल कसाब को सजा दिलाने की कानूनी लड़ाई लड़ते हैं। कसाब (ललित प्रभाकर) के मुकदमे के साथ फिल्म उज्ज्वल की पत्नी ज्योति निकम (वामिका गब्बी) और बेटे अनिकेत के साथ उनके रिश्तों को भी दिखाती है। दूसरों को इंसाफ दिलाने की जिद में वह अपनी निजी जिंदगी को कितना वक्त दे पाते हैं, कहानी का भावनात्मक पहलू यही है।

एक्टिंग: राजकुमार का ठहराव, ललित का दमदार अंदाज
राजकुमार राव ने उज्ज्वल निकम के किरदार को गंभीरता और सहजता से निभाया है। उनके चेहरे के भाव और संवादों का ठहराव किरदार को विश्वसनीय बनाते हैं। वहीं, ललित प्रभाकर ने अजमल कसाब के किरदार में बेचैनी और असहजता पैदा की है। खासकर अंतिम हिस्से में उनका अभिनय ध्यान खींचता है। जयदीप अहलावत, सिकंदर खेर और आशीष विद्यार्थी अपने किरदारों को मजबूती देते हैं, जबकि वामिका गब्बी कहानी में भावनात्मक जुड़ाव लाती हैं।

डायरेक्शन और सिनेमैटोग्राफी: गंभीर कहानी, कहीं धीमी रफ्तार
अविनाश अरुण का निर्देशन कहानी को बेवजह के फिल्मी ड्रामे से दूर रखता है। अदालत की कार्यवाही और उज्ज्वल की निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश अच्छी है। सिनेमैटोग्राफी भी फिल्म के गंभीर माहौल के अनुकूल है। हालांकि, कुछ हिस्सों में स्क्रीनप्ले धीमा पड़ता है। चर्चित घटनाओं से परिचित दर्शकों के लिए कुछ दृश्यों में और रोमांच पैदा किया जा सकता था। म्यूजिक: ‘मेरे रहते’ छोड़ता है असर
फिल्म में एक ही गाना ‘मेरे रहते’ है, जो अंत में आता है और फिल्म खत्म होने के बाद भी भावनात्मक असर छोड़ता है। बैकग्राउंड स्कोर अदालत के तनाव को बढ़ाता है और कहानी की गंभीरता के साथ चलता है।

फाइनल वर्डिक्ट
‘प्रहार’ की सबसे बड़ी ताकत राजकुमार राव और ललित प्रभाकर का अभिनय है। कुछ जगह धीमी रफ्तार के बावजूद फिल्म कोर्टरूम ड्रामा और वास्तविक घटनाओं पर आधारित कहानियां पसंद करने वालों को बांधे रखती है। यह याद दिलाती है कि गोलियां थमने के बाद भी इंसाफ की लड़ाई खत्म नहीं होती।
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