Tuesday, 20 Oct 2026 | 08:09 PM

Trending :

EXCLUSIVE

शुगर कंट्रोल, खून की कमी दूर…बागेश्वर का लाल चावल सेहत के लिए वरदान, बना देगा जिम वाली बॉडी

authorimg

Last Updated:May 01, 2026, 15:42 IST Red Rice Benefits : बागेश्वर का लाल चावल कपकोट, शामा, रीमा और आसपास के पहाड़ी इलाकों में उगता है. इसे स्थानीय भाषा में जुमरिया धान कहते हैं. स्वाद, सुगंध और पोषण से भरपूर है. लोकल 18 से बागेश्वर के आयुष चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल बताते हैं कि लाल चावल सफेद वाले की तुलना में ज्यादा पौष्टिक माना जाता है. इसमें फाइबर, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं. यह शरीर को ताकत देने, खून की कमी दूर करने और पाचन तंत्र को मजबूत रखने में रामबाण है. बागेश्वर. उत्तराखंड के बागेश्वर में उगने वाला पारंपरिक लाल चावल अपनी खास खूबियों के लिए जाना जाता है. ये जिले के कपकोट, शामा, रीमा और आसपास के पहाड़ी इलाकों में उगता है. इस चावल को स्थानीय भाषा में ‘जुमरिया’ धान के नाम से जाना जाता है. स्वाद, सुगंध और पोषण से भरपूर यह चावल अब जिले की खास पहचान बनता जा रहा है. पहले यह चावल केवल स्थानीय घरों और पर्व-त्योहारों तक सीमित था, लेकिन अब इसकी मांग बाजारों तक पहुंच गई है. लोकल 18 से बागेश्वर के आयुष चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल बताते हैं कि लाल चावल सामान्य सफेद चावल की तुलना में ज्यादा पौष्टिक माना जाता है. इसमें फाइबर, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट तत्व अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. यह शरीर को ताकत देने, खून की कमी दूर करने और पाचन तंत्र को मजबूत रखने में मददगार है. डॉ. पटेल बताते हैं कि इस चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम माना जाता है, जिससे यह मधुमेह रोगियों के लिए भी सफेद चावल की तुलना में अच्छा विकल्प बन रहा है. इसके नियमित सेवन से शरीर को ऊर्जा मिलती है, लंबे समय तक पेट भरा रहने का अहसास होता है. यही वजह है कि फिटनेस पसंद करने वाले लोग भी इसे अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं. शादी और पूजा के लिए स्पेशल बागेश्वर की व्यापारी संतोषी देवी बताती हैं कि लाल चावल की खेती पारंपरिक तरीके से की जाती है. पहाड़ों के सीढ़ीदार खेतों में वर्षा जल और प्राकृतिक संसाधनों के सहारे इसकी खेती होती है. कई किसान रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग नहीं करते, जिससे यह चावल काफी हद तक जैविक माना जाता है. प्राकृतिक खेती से इसकी गुणवत्ता और स्वाद दोनों बेहतर बने रहते हैं. लाल चावल पकने के बाद हल्की सुगंध देता है, खाने में स्वादिष्ट होता है. इससे खीर, मीठे चावल, भात, पुलाव और कई पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन तैयार किए जाते हैं. शादी-विवाह, पूजा-पाठ और शुभ अवसरों पर भी इस चावल का उपयोग किया जाता है. ऑनलाइन बाजार ने बढ़ाई कीमत अब यह लाल चावल स्थानीय मंडियों के साथ ऑनलाइन बाजारों में भी जगह बना रहा है. बाहर से आने वाले पर्यटक भी इसे खरीदकर ले जा रहे हैं. इससे किसानों को अच्छी कीमत मिलने लगी है, उनकी आय बढ़ने की उम्मीद जगी है. यदि इस पारंपरिक धान को बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और सरकारी प्रोत्साहन मिले तो बागेश्वर का लाल चावल राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान बना सकता है. स्वाद, सेहत और परंपरा का अनोखा मेल होने के कारण यह चावल भविष्य में जिले की आर्थिक ताकत भी बन सकता है. About the Author Priyanshu Gupta प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bageshwar,Uttarakhand

पॉवेल की विदाई, कहा था-ईमानदारी की कोई कीमत नहीं होती:लेबल चिपकाने वाले युवक से वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे अहम चेहरा बनने तक की कहानी

पॉवेल की विदाई, कहा था-ईमानदारी की कोई कीमत नहीं होती:लेबल चिपकाने वाले युवक से वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे अहम चेहरा बनने तक की कहानी

आठ साल…तीन अमेरिकी राष्ट्रपति… 66 रेट सेटिंग मीटिंग…महामारी, महंगाई, राजनीतिक हमले आपराधिक जांच। इन सबके बीच जेरोम पॉवेल ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की कमान संभाली। 29 अप्रैल को उन्होंने फेड चेयर के तौर पर आखिरी पॉलिसी मीटिंग ली। उनकी कहानी भरोसे, दबाव और ईमानदारी की मिसाल बन गई। 15 मई को चेयरमैन के तौर पर कार्यकाल खत्म होने के बाद भी पॉवेल फेड के गवर्नर और रेट-सेटिंग कमेटी के सदस्य बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि न्याय विभाग की जांच पूरी पारदर्शिता और अंतिम नतीजे पर पहुंचने तक उनका बने रहना जरूरी है। यह फैसला असामान्य जरूर है, लेकिन शायद पॉवेल हमेशा से ऐसे ही रहे- नियमों से ज्यादा संस्थान की साख को अहमियत देने वाले। कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों में दुनिया की अर्थव्यवस्था जैसे अचानक थम गई थी। बाजार टूट रहे थे, सप्लाई चेन बिखर रही थी और करोड़ों लोग भविष्य को लेकर डरे हुए थे। मार्च 2020 में पॉवेल ने आपात बैठक बुलाकर ब्याज दरों में कटौती की। कुछ ही दिनों बाद रविवार को दूसरी इमरजेंसी बैठक बुलाई और दरें लगभग शून्य कर दी गईं। महामारी के बाद जब महंगाई 40 साल के ऊंचे स्तर पर पहुंची, तब भी पॉवेल आलोचनाओं के घेरे में रहे। फेड ने आक्रामक तरीके से ब्याज दरें बढ़ाईं। पॉवेल ने चेतावनी दी थी कि लोगों और कॉरपोरेट्स को कुछ दर्द झेलना पड़ेगा, लेकिन कीमतों को काबू में लाना जरूरी है। लेकिन शायद उनकी सबसे बड़ी लड़ाई राजनीति से रही। डोनाल्ड ट्रंप ने कभी उन्हें ‘स्मार्ट’ और मजबूत कहा था, लेकिन बाद में वही ट्रंप उन्हें ‘फूल’, ‘नंबस्कल’ और ‘मेजर लूजर’ जैसे शब्दों से निशाना बनाने लगे। इसके बावजूद पॉवेल ने शायद ही कभी सार्वजनिक जवाब दिया। जब फेड की स्वतंत्रता पर सवाल उठे, तब उन्होंने खुलकर कहा कि यह लड़ाई सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि इस बात की है कि अमेरिका में ब्याज दरें आंकड़ों से तय होंगी या राजनीतिक दबाव से। पॉवेल की निजी कहानी भी उतनी ही मानवीय है। वह शुरुआत में गोदाम में सामान पर लेबल लगाने का काम करते थे। उन्होंने कभी अर्थशास्त्र को उबाऊ समझकर छोड़ दिया था, पर वही व्यक्ति वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे अहम चेहरा बन गया। सिर्फ एक पद का अंत नहीं, संस्थागत भरोसे की पूरी दास्तान है पावेल का करिअर जेरोम पॉवेल ने 2024 में एक इंटरव्यू में कहा था, ‘ईमानदारी की कोई कीमत नहीं होती। आखिर में आपके पास सिर्फ वही बचती है।’ यही उनके पूरे कार्यकाल का सार बन गया। महामारी हो, महंगाई या राजनीतिक दबाव- पॉवेल ने कई फैसलों पर आलोचना झेली, पर फेड की स्वतंत्रता और अपनी साख से समझौता नहीं किया। उनकी विदाई सिर्फ एक पद का अंत नहीं, बल्कि संस्थागत भरोसे की कहानी बन गई।

ममता बनर्जी के ईवीएम स्ट्रांगरूम के औचक दौरे के बाद कोलकाता पुलिस ने सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया | भारत समाचार

US President Donald Trump said negotiations with Iran are progressing behind closed doors and insisted that only a small circle inside his administration knows the true status of the talks. (Reuters)

आखरी अपडेट:01 मई, 2026, 15:37 IST इससे एक दिन पहले सीएम ममता बनर्जी ने भवानीपुर स्ट्रॉन्गरूम का दौरा किया था और आरोप लगाया था कि बीजेपी और चुनाव आयोग ने मिलकर ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी गुरुवार को भवानीपुर स्ट्रॉन्ग रूम में। (पीटीआई) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हुए वोटों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है, जिसके बाद कोलकाता पुलिस ने कम से कम सात क्षेत्रों में सभी सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है, जहां हाई-वोल्टेज विधानसभा चुनाव के बाद वोटों की गिनती शुरू होने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने शहीद खुदीराम बोस रोड, जज कोर्ट रोड, जादवपुर, डायमंड हार्बर रोड, लॉर्ड सिन्हा हॉल, नरेश मित्रा सारणी (बेलताला रोड) और प्रमथेश बरुआ सारणी में निषेधाज्ञा आदेश जारी किए हैं। इससे पहले, ममता बनर्जी ने कोलकाता के भबनीपुर स्ट्रांगरूम का दौरा किया और वहां लगभग चार घंटे बिताए, उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और चुनाव आयोग ने मिलकर ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की है। उन्होंने आगे चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की ईवीएम अनियमितताएं, जैसे वोटिंग मशीनों या मतगणना प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़, का सामना “जीवन और मृत्यु” की लड़ाई से किया जाएगा। यह भी पढ़ें: ममता ने लगाया ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप, दी ‘जिंदगी और मौत’ की लड़ाई की चेतावनी, बीजेपी ने इसे ‘नाटकबाजी’ बताया एक वायरल वीडियो में मध्य कोलकाता में खुदीराम अनुशीलन केंद्र के अंदर संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने के बाद उन्होंने स्ट्रॉन्ग रूम का दौरा किया, जहां सभी सात उत्तरी कोलकाता विधानसभा सीटों की ईवीएम रखी गई हैं। इस बीच, भाजपा ने ममता बनर्जी के भबनीपुर के स्ट्रॉन्ग रूम के दौरे की आलोचना की और उनकी “आज शाम की नाटकीयता शायद पश्चिम बंगाल के लिए सबसे स्पष्ट एग्जिट पोल है”। 4 मई को मतदान के नतीजों से पहले राजनीतिक विवाद तब शुरू हुआ जब टीएमसी ने एक वीडियो प्रसारित किया जिसमें चुनाव सामग्री के प्रबंधन में बड़ी खामियों का आरोप लगाया गया। चुनाव आयोग ने मतदान में छेड़छाड़ के आरोपों से इनकार किया इस बीच, भारत के चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज कर दिया है और कहा है कि सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और स्ट्रांगरूम सुरक्षित रहे। इसमें कहा गया है कि मतदान के बाद उम्मीदवारों, उनके एजेंटों और सामान्य पर्यवेक्षक की उपस्थिति में खुदीराम अनुशीलन केंद्र के सभी सात स्ट्रांगरूम को सील कर दिया गया। यह भी पढ़ें: मोदी या ममता, बंगाल ने किसे वोट दिया? एग्जिट पोल, अमेरिकी सट्टेबाजी बोर्ड और गुलाल की बिक्री क्या संकेत दे रही है? पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने भी टीएमसी के दावों को खारिज करते हुए कहा, “बुधवार को मतदान समाप्त होने के बाद, सभी स्ट्रॉन्ग-रूम को संबंधित उम्मीदवारों/चुनाव एजेंटों और पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में उचित रूप से बंद कर दिया गया और सील कर दिया गया। आखिरी स्ट्रॉन्ग रूम गुरुवार सुबह 5.15 बजे बंद कर दिया गया।” पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि भबनीपुर में स्ट्रॉन्ग रूम पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। अधिकारी ने यह भी दावा किया कि किसी भी अनियमित गतिविधि को रोकने के लिए तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को “निगरानी में रखा गया है”। यह भी पढ़ें: ‘कड़ी निगरानी में’: सुवेंदु ने दावा किया कि चुनाव नतीजों से पहले सीएम ममता पर नजर रखी जा रही है चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ममता बनर्जी के ईवीएम स्ट्रांगरूम के औचक दौरे के बाद कोलकाता पुलिस ने सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कोलकाता पुलिस(टी)ममता बनर्जी ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोप(टी)कोलकाता वोट काउंटिंग(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)टीएमसी बनाम बीजेपी(टी)भारत का चुनाव आयोग(टी)ईवीएम हेरफेर के दावे(टी)भबानीपुर स्ट्रॉन्गरूम सुरक्षा(टी)खुदीराम अनुशीलन केंद्र(टी)ममता बनर्जी भवानीपुर

2025 में 4.4 करोड़ भारतीयों ने पहली बार लोन लिया:दक्षिण की महिलाएं गोल्ड तो उत्तर भारत की बिजनेस लोन ले रहीं

2025 में 4.4 करोड़ भारतीयों ने पहली बार लोन लिया:दक्षिण की महिलाएं गोल्ड तो उत्तर भारत की बिजनेस लोन ले रहीं

भारतीय लोन मार्केट का चेहरा बदल रहा है। पहली बार लोन लेने वालों (न्यू टू क्रेडिट) की दौड़ में महिलाएं पुरुषों को टक्कर दे रही हैं। क्रेडिट एजेंसी क्रिफ हाई मार्क की ‘ब्रिजिंग द गैप’ रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 तक 12 माह में महिलाओं की हिस्सेदारी 41% हो गई, जो फरवरी 2022 तक 33% थी। यानी 10 में से 4 नई कर्जदार महिलाएं हैं। खास बात यह है कि टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन बढ़ने के बीच यूपी, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में महिलाएं उद्यमी बनने के लिए बिजनेस लोन ले रही हैं, वहीं, दक्षिण में गोल्ड लोन का दबदबा है। पहले लोन में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का दबदबा पहली बार लोन लेने वालों में से 32% वॉशिंग मशीन, फ्रिज या टीवी खरीदने के लिए लोन लेते हैं। यही एंट्री पॉइंट बनता है। और एक बार जो रिश्ता बनता है, वह आगे भी बना रहता है। गोल्ड लोन लेने वालों में से 84.5% अगला लोन भी गोल्ड पर ही लेते हैं। पहली बार लोन लेन वाले लोगों की प्राथमिकता ? कंज्यूमर लोन – 31.6% गोल्ड लोन – 20.2% दो पहिया – 16.9% पर्सनल लोन -11.0% बिजनेस लोन – 9.5% एनबीएफसी नए लोगों को लोन का बड़ा सहारा आमतौर पर माना जाता है कि वित्तीय समावेशन का बोझ सरकारी बैंकों पर होता है, लेकिन डेटा इसके विपरीत कहानी कह रहा है। बैंक पहली बार कर्ज लेने वालों को लोन देने से बचते हैं। – एनबीएफसी का हिस्सा 50% से बढ़कर 61% हो गया – सरकारी बैंकों का हिस्सा 16% से घटकर 13.6% – निजी बैंकों का 22% से घटकर 15% यूपी, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में महिला कर्जदारों की संख्या सबसे ज्यादा महिलाओं की पसंद अब बदल रही है। वे केवल गहने गिरवी रखकर लोन नहीं ले रहीं, बल्कि अपना काम शुरू करने के लिए बिजनेस लोन भी ले रही हैं। शीर्ष 10 में से 5 राज्यों में महिलाओं के बीच बिजनेस लोन प्रमुख प्रोडक्ट बन गया है। महिलाओं की पहली पसंद 1. कंज्यूमर ड्यूरेबल 25.2% 2. गोल्ड लोन 21.8% 3. बिजनेस लोन 17.9% 4. पर्सनल लोन 8.3% यूपी, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में महिला कर्जदारों की संख्या सबसे ज्यादा है। दक्षिण भारत की महिलाएं गोल्ड लोन ज्यादा ले रही हैं, तो उत्तर और पूर्वी भारत (यूपी, बंगाल, बिहार) की महिलाएं बिजनेस लोन में आगे हैं। नए कर्जदार उम्मीद से ज्यादा सुरक्षित साबित हो रहे। इनकी सफलता दर बेहतर है। 67% ग्राहक एक साल में सुरक्षित रिस्क कैटेगरी में शामिल हुए। युवा – दोपहिया और पर्सनल लोन से शुरुआत 25 साल से कम उम्र के युवाओं के लिए ‘मोबिलिटी’ और ‘लिक्विडिटी’ सबसे अहम है, यही वजह है कि टू-व्हीलर और पर्सनल लोन सेगमेंट में इनका दबदबा है। वहीं, 26 से 35 साल के युवा कंज्यूमर ड्यूरेबल, गोल्ड लोन और बिजनेस लोन में दबदबा रखते हैं। 25 साल से कम के युवा दो पहिया लोग-33.1% पर्सनल लोन 50.3% 26-35 साल के युवा सीडी 35.4% गोल्ड लोन 29.4% बिजनेस लोन 30.7% कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, उस प्रोडक्ट में उस आयु वर्ग (12 माह, फरवरी 26 को खत्म) – कंज्यूमर ड्यूरेबल: 80.4% ग्राहकों का रिस्क प्रोफाइल बेहतर हुआ। – टू-व्हीलर: 75.3% ग्राहकों ने दिखाया बेहतरीन अनुशासन। – दो पहिया लोन में छोटे-मझोले शहरों की हिस्सेदारी 71 फीसदी और कंज्यूमेर ड्यूरेबल लोन में करीब 67 फीसदी है।

2025 में 4.4 करोड़ भारतीयों ने पहली बार लोन लिया:दक्षिण की महिलाएं गोल्ड तो उत्तर भारत की बिजनेस लोन ले रहीं

2025 में 4.4 करोड़ भारतीयों ने पहली बार लोन लिया:दक्षिण की महिलाएं गोल्ड तो उत्तर भारत की बिजनेस लोन ले रहीं

भारतीय लोन मार्केट का चेहरा बदल रहा है। पहली बार लोन लेने वालों (न्यू टू क्रेडिट) की दौड़ में महिलाएं पुरुषों को टक्कर दे रही हैं। क्रेडिट एजेंसी क्रिफ हाई मार्क की ‘ब्रिजिंग द गैप’ रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 तक 12 माह में महिलाओं की हिस्सेदारी 41% हो गई, जो फरवरी 2022 तक 33% थी। यानी 10 में से 4 नई कर्जदार महिलाएं हैं। खास बात यह है कि टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन बढ़ने के बीच यूपी, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में महिलाएं उद्यमी बनने के लिए बिजनेस लोन ले रही हैं, वहीं, दक्षिण में गोल्ड लोन का दबदबा है। पहले लोन में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का दबदबा पहली बार लोन लेने वालों में से 32% वॉशिंग मशीन, फ्रिज या टीवी खरीदने के लिए लोन लेते हैं। यही एंट्री पॉइंट बनता है। और एक बार जो रिश्ता बनता है, वह आगे भी बना रहता है। गोल्ड लोन लेने वालों में से 84.5% अगला लोन भी गोल्ड पर ही लेते हैं। पहली बार लोन लेन वाले लोगों की प्राथमिकता ? कंज्यूमर लोन – 31.6% गोल्ड लोन – 20.2% दो पहिया – 16.9% पर्सनल लोन -11.0% बिजनेस लोन – 9.5% एनबीएफसी नए लोगों को लोन का बड़ा सहारा आमतौर पर माना जाता है कि वित्तीय समावेशन का बोझ सरकारी बैंकों पर होता है, लेकिन डेटा इसके विपरीत कहानी कह रहा है। बैंक पहली बार कर्ज लेने वालों को लोन देने से बचते हैं। – एनबीएफसी का हिस्सा 50% से बढ़कर 61% हो गया – सरकारी बैंकों का हिस्सा 16% से घटकर 13.6% – निजी बैंकों का 22% से घटकर 15% यूपी, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में महिला कर्जदारों की संख्या सबसे ज्यादा महिलाओं की पसंद अब बदल रही है। वे केवल गहने गिरवी रखकर लोन नहीं ले रहीं, बल्कि अपना काम शुरू करने के लिए बिजनेस लोन भी ले रही हैं। शीर्ष 10 में से 5 राज्यों में महिलाओं के बीच बिजनेस लोन प्रमुख प्रोडक्ट बन गया है। महिलाओं की पहली पसंद 1. कंज्यूमर ड्यूरेबल 25.2% 2. गोल्ड लोन 21.8% 3. बिजनेस लोन 17.9% 4. पर्सनल लोन 8.3% यूपी, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में महिला कर्जदारों की संख्या सबसे ज्यादा है। दक्षिण भारत की महिलाएं गोल्ड लोन ज्यादा ले रही हैं, तो उत्तर और पूर्वी भारत (यूपी, बंगाल, बिहार) की महिलाएं बिजनेस लोन में आगे हैं। नए कर्जदार उम्मीद से ज्यादा सुरक्षित साबित हो रहे। इनकी सफलता दर बेहतर है। 67% ग्राहक एक साल में सुरक्षित रिस्क कैटेगरी में शामिल हुए। युवा – दोपहिया और पर्सनल लोन से शुरुआत 25 साल से कम उम्र के युवाओं के लिए ‘मोबिलिटी’ और ‘लिक्विडिटी’ सबसे अहम है, यही वजह है कि टू-व्हीलर और पर्सनल लोन सेगमेंट में इनका दबदबा है। वहीं, 26 से 35 साल के युवा कंज्यूमर ड्यूरेबल, गोल्ड लोन और बिजनेस लोन में दबदबा रखते हैं। 25 साल से कम के युवा दो पहिया लोग-33.1% पर्सनल लोन 50.3% 26-35 साल के युवा सीडी 35.4% गोल्ड लोन 29.4% बिजनेस लोन 30.7% कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, उस प्रोडक्ट में उस आयु वर्ग (12 माह, फरवरी 26 को खत्म) – कंज्यूमर ड्यूरेबल: 80.4% ग्राहकों का रिस्क प्रोफाइल बेहतर हुआ। – टू-व्हीलर: 75.3% ग्राहकों ने दिखाया बेहतरीन अनुशासन। – दो पहिया लोन में छोटे-मझोले शहरों की हिस्सेदारी 71 फीसदी और कंज्यूमेर ड्यूरेबल लोन में करीब 67 फीसदी है।

डॉ. मनोहर सिंह ठाकुर की पुण्यतिथि पर नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर:धार में दीनदयाल रसोई में जरूरतमंदों को भोजन वितरित किया गया

डॉ. मनोहर सिंह ठाकुर की पुण्यतिथि पर नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर:धार में दीनदयाल रसोई में जरूरतमंदों को भोजन वितरित किया गया

धार में स्वर्गीय डॉ. मनोहर सिंह ठाकुर की पुण्यतिथि और अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर शुक्रवार को सेवा और समर्पण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाया गया और दीनदयाल रसोई योजना के तहत जरूरतमंदों को भोजन वितरित किया गया। डॉ. मनोहर सिंह ठाकुर सेवालय ट्रस्ट द्वारा हटवाड़ा स्थित सेवालय क्लीनिक में नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। ट्रस्ट के चिकित्सक डॉ. मुकेश चौहान ने 55 मरीजों का परीक्षण कर उपचार दिया। शिविर में मरीजों की बीपी और शुगर की जांच भी नि:शुल्क की गई। एडवोकेट सुहेल निसार के सहयोग से दीनदयाल रसोई योजना में तिथि भोज आयोजित किया गया। ट्रस्ट सदस्यों ने स्वर्गीय डॉ. ठाकुर को श्रद्धांजलि अर्पित कर जरूरतमंदों को भोजन वितरित किया। कार्यक्रम की शुरुआत में ट्रस्ट संरक्षक डॉ. शरद विजयवर्गीय, एडवोकेट सुहेल निसार और अन्य अतिथियों ने स्वर्गीय डॉ. ठाकुर के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण किया। वक्ताओं ने उनके सेवा कार्यों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने जीवनभर गरीब और जरूरतमंदों की सेवा की। कोरोना काल में भी उन्होंने निस्वार्थ भाव से उपचार किया और इसी दौरान संक्रमित होकर प्राण त्याग दिए। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता, ट्रस्ट सदस्य और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने स्वर्गीय डॉ. ठाकुर के सेवा भाव को याद किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन ईश्वर सिंह ठाकुर ने किया, जबकि आभार अजय सिंह ठाकुर ने व्यक्त किया। आयोजकों ने बताया कि ट्रस्ट द्वारा भविष्य में भी ऐसे जनहित कार्य जारी रखे जाएंगे।

कुनिका सदानंद ने दरगाह वाले वीडियो पर रिएक्ट किया:भागवत कथा में जाने का वीडियो शेयर कर कहा- मजार, मंदिर, चर्च, गुरुद्वारे सभी जगह जाती हूं

कुनिका सदानंद ने दरगाह वाले वीडियो पर रिएक्ट किया:भागवत कथा में जाने का वीडियो शेयर कर कहा- मजार, मंदिर, चर्च, गुरुद्वारे सभी जगह जाती हूं

टीवी शो बिग बॉस 19 की कंटेस्टेंट और एक्ट्रेस कुनिका सदानंद ने हाल ही में वायरल हुए उनके दरगाह पर चादर चढ़ाने वाले एक वीडियो पर रिएक्शन दिया। दरअसल, कुनिका सदानंद की एक पोस्ट में एक यूजर ने X पर कमेंट करते हुए एक्ट्रेस का मजार में चादर चढ़ाने का वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि मजार जाने वालों को मंदिर जाने वालों से दिक्कत होगी… तुम बस एक गुलाम हो… हम तुम्हारा दर्द समझ सकते हैं… दूसरा दर्द ये है कि कुमार सानू बीजेपी में शामिल हो गए। जवाब में कुनिका ने वीडियो शेयर किया इसके जवाब में कुनिका सदानंद ने एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में वह भागवत कथा में शामिल होती और लोगों को खाना परोसती नजर आईं। साथ ही उन्होंने लिखा कि मैं मजार भी जाती हूं, मंदिर भी जाती हूं, चर्च और गुरुद्वारे भी जाती हूं और हां, भागवत कथा भी सुनती हूं।। इससे पहले कुनिका सदानंद ने पीएम मोदी के वीडियो पर रिएक्ट करते हुए कहा, यह बहुत ही बेकार बात है। मुझे शर्म आती है कि मेरे प्रधानमंत्री इन सब फालतू चीजों में व्यस्त हैं। मणिपुर के आसपास फुटबॉल खेलने का समय है, लेकिन मणिपुर जाने का समय नहीं है। उन्होंने आगे लिखा था, आप क्यों डर रहे हैं, प्रधानमंत्री जी? अब आपके पास अपना मुख्यमंत्री है, वो आपकी सुरक्षा कर सकता है। ओह, मैं भूल गई… अगर आप जाएंगे तो आपसे प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछे जाएंगे, जिनका शायद आपके पास जवाब नहीं होगा। शर्म की बात है सर… क्या यही बदलाव का वादा आपने 12 साल पहले किया था?

बेडू सिर्फ फल नहीं! पहाड़ों में इसे मानते हैं देसी दवा, मस्सों से लेकर पेट तक की परेशानी में करता है असर

बेडू सिर्फ फल नहीं! पहाड़ों में इसे मानते हैं देसी दवा, मस्सों से लेकर पेट तक की परेशानी में करता है असर

Last Updated:May 01, 2026, 15:08 IST Wild Fig Health Benefits: उत्तराखंड के पहाड़ों में पाया जाने वाला बेडू सिर्फ एक जंगली फल नहीं है, बल्कि यह अपने आप में एक चलती-फिरती औषधालय है. सदियों से पहाड़ी गांवों में लोग छोटी-मोटी बीमारियों और त्वचा की समस्याओं के लिए इसी पेड़ के ‘चोप’ (दूधिया रस) और फलों पर भरोसा करते आए हैं. चाहे जिद्दी मस्से हटाना हो या शरीर में चुभा बारीक कांटा बाहर निकालना, बेडू का यह रस हर मुश्किल का देसी समाधान माना जाता है. बेडू के चोप का सबसे ज्यादा यूज मस्सों को हटाने के लिए किया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे सावधानी से मस्से पर लगाते हैं, मान्यता है कि लगातार कुछ दिनों तक लगाने पर मस्सा सूखने लगता है, धीरे-धीरे गिर सकता है. हालांकि इसे त्वचा के सामान्य हिस्से पर लगाने से जलन हो सकती है, इसलिए बहुत सावधानी जरूरी है. डॉ ऐजल पटेल ने लोकल 18 को बताया कि यदि मस्सा बड़ा हो, दर्द करे या रंग बदल रहा हो तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए. फिर भी पहाड़ के गांवों में यह तरीका वर्षों से अपनाया जाता रहा है. यही कारण है कि बेडू को घरेलू देसी दवा के रूप में खास पहचान मिली हुई है. स्थानीय जानकार किशन मलड़ा बताते हैं कि बेडू का चोप छोटे कट, छिलने या हल्की चोट पर भी लगाया जाता है. इससे घाव जल्दी सूखता है, भरने में मदद मिलती है. कई बुजुर्ग कहते हैं कि यह दर्द कम करने में भी सहायक महसूस होता है. हालांकि खुले और गहरे घाव पर इसका प्रयोग बिना सलाह के नहीं करना चाहिए. यदि घाव में सूजन, पस या ज्यादा दर्द हो तो तुरंत चिकित्सा लेनी चाहिए. गांवों में पुराने समय से जब अस्पताल दूर होते थे, तब ऐसे घरेलू उपायों का सहारा लिया जाता था. आज भी कई लोग प्राथमिक उपचार के रूप में इसे जानते हैं. बेडू के चोप को कुछ लोग फोड़े-फुंसी, दाद, खुजली और हल्के त्वचा संक्रमण में भी उपयोगी मानते हैं. ग्रामीण इलाकों में इसे बहुत कम मात्रा में प्रभावित स्थान पर लगाया जाता है. इससे त्वचा सूखती है, आराम मिल सकता है. लेकिन हर त्वचा अलग होती है, इसलिए कई लोगों को जलन या एलर्जी भी हो सकती है. ऐसे में पहले थोड़ी मात्रा में जांच करना बेहतर माना जाता है. यदि त्वचा लाल हो जाए या तेज जलन हो तो तुरंत बंद करना चाहिए. त्वचा रोग बढ़ने पर डॉक्टर की सलाह सबसे जरूरी मानी जाती है. Add News18 as Preferred Source on Google बेडू फल में कई प्राकृतिक पोषक तत्व पाए जाने की बात कही जाती है. इसमें फाइबर, प्राकृतिक शर्करा, सूक्ष्म पोषक तत्व और ऊर्जा देने वाले तत्व मौजूद होते हैं. पहाड़ों में मेहनत करने वाले लोग इसे मौसमी फल के रूप में खाते रहे हैं. यह शरीर को ताकत देने और कमजोरी दूर करने में सहायक माना जाता है. बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी पका हुआ बेडू अच्छा विकल्प माना जाता है. स्थानीय लोग इसे प्रकृति का तोहफा बताते हैं. यदि इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जाए तो मौसमी फल के रूप में लाभ मिल सकता है. बेडू का पका फल खाने में स्वादिष्ट होने के साथ पाचन के लिए भी अच्छा माना जाता है. इसके सेवन से कब्ज, गैस और पेट भारी होने जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है. इसमें प्राकृतिक रेशा पाया जाता है, जो पेट साफ रखने में मदद करता है. पहाड़ों में लोग इसे सीजन के दौरान ताजा खाते हैं. कुछ लोग इसे सुखाकर भी उपयोग करते हैं. यदि सीमित मात्रा में खाया जाए तो यह शरीर को ऊर्जा भी देता है. हालांकि अधिक मात्रा में खाने से कुछ लोगों को पेट ढीला होने की परेशानी हो सकती है, इसलिए संतुलन जरूरी है. हालांकि बेडू फल और उसके चोप के कई पारंपरिक उपयोग बताए जाते हैं, लेकिन हर व्यक्ति पर असर अलग हो सकता है. चोप त्वचा पर तेज हो सकता है, इसलिए आंख, चेहरे या संवेदनशील हिस्सों से दूर रखना चाहिए. बच्चों और बुजुर्गों पर उपयोग से पहले सावधानी जरूरी है. यदि जलन, सूजन या एलर्जी हो तो तुरंत बंद कर देना चाहिए. किसी गंभीर बीमारी, बड़े घाव या लंबे समय की त्वचा समस्या में केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. सही जानकारी और सावधानी से ही लाभ लिया जा सकता है. बेडू सिर्फ फल नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति और लोकजीवन से भी जुड़ा है. कई लोकगीतों और कहावतों में इसका जिक्र मिलता है. गांवों में बच्चे पेड़ों से बेडू तोड़कर खाते थे, बुजुर्ग इसके गुण बताते थे. पहाड़ के पारंपरिक खानपान में यह फल खास स्थान रखता है. आज आधुनिक जीवनशैली के बीच कई लोग पुराने पौष्टिक फलों की ओर लौट रहे हैं. बेडू भी उन्हीं फलों में शामिल है, जिसकी पहचान अब फिर बढ़ रही है. बागेश्वर समेत कई क्षेत्रों में लोग इसे प्राकृतिक और देसी स्वास्थ्य विकल्प मानते हैं. पहाड़ के गांवों में बेडू के चोप का उपयोग शरीर में चुभे छोटे कांटे को बाहर निकालने के लिए भी किया जाता है. कांटा चुभने वाली जगह पर थोड़ा चोप लगाया जाता है, जिससे त्वचा नरम होती है, कांटा निकालना आसान हो जाता है. यह पारंपरिक तरीका आज भी कुछ गांवों में अपनाया जाता है. हालांकि यदि कांटा गहरा चला जाए, सूजन बढ़े या संक्रमण हो जाए तो डॉक्टर के पास जाना जरूरी है. बच्चों पर इसका उपयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए. पुराने समय में घरेलू उपचारों में बेडू का यह उपयोग काफी लोकप्रिय माना जाता था. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

सागर के शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया शुरू:4 मई से ऑनलाइन पंजीयन कर सकेंगे बच्चे, 30-31 मई को पंजीयन सुधार करा पाएंगे

सागर के शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया शुरू:4 मई से ऑनलाइन पंजीयन कर सकेंगे बच्चे, 30-31 मई को पंजीयन सुधार करा पाएंगे

वर्ष 2026-27 के लिए सागर के शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय में विभिन्न डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रथम चरण के तहत ऑनलाइन पंजीयन की प्रक्रिया 4 मई से शुरू होगी जो 29 मई तक चलेगी। इच्छुक विद्यार्थी इस अवधि में पंजीयन कर अपनी पसंद की संस्थाओं और पाठ्यक्रमों का चयन कर सकते हैं। पंजीयन में सुधार की सुविधा 30 से 31 मई तक उपलब्ध रहेगी। इसके बाद मेरिट सूची जारी होने और सीट आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित तिथियों के अनुसार की जाएगी। महाविद्यालय प्रशासन ने बताया कि संस्थान में आधुनिक लैब, अनुभवी संकाय और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को उत्कृष्ट तकनीकी शिक्षा प्रदान की जाती है। विद्यार्थियों के लिए समय-सीमा के अंदर आवेदन कर अपने प्रवेश लेने का मौका है। अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी तकनीकी शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट dte.mponline.gov.in पर जाकर विवरण प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही महाविद्यालय में आकर संपर्क कर सकते हैं। 9 से 18 जून तक चलेगा दूसरा चरण कॉलेज में फैशन टेक्नोलॉजी, मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन, कंप्यूटर साइंस व आर्किटेक्चर एवं इंटीरियर डिजाइनिंग में विद्यार्थी प्रवेश ले सकेंगे। दूसरे चरण की काउंसलिंग प्रक्रिया 9 जून से 18 जून तक आयोजित की जाएगी। जिसमें पुनः पंजीयन, संशोधन और चॉइस फिलिंग का अवसर दिया जाएगा। संस्थागत स्तर की काउंसलिंग के माध्यम से रिक्त सीटों पर प्रवेश 4 जुलाई से 12 अगस्त तक किया जाएगा।

छतरपुर में करंट से चार जानवरों की मौत:11 केवी लाइन टूटी, बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप

छतरपुर में करंट से चार जानवरों की मौत:11 केवी लाइन टूटी, बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप

छतरपुर के सागर रोड स्थित गणेश कॉलोनी में करंट लगने से चार जानवरों की मौत हो गई। मृतकों में तीन गाय और एक कुत्ता शामिल हैं। इस घटना से इलाके में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, कॉलोनी में बुलेट एजेंसी के पीछे देर रात 11 केवी बिजली लाइन टूटकर सड़क पर गिर गई थी। तार टूटने के बाद पूरे इलाके में करंट फैल गया, जिसकी चपेट में आकर ये जानवर मौके पर ही दम तोड़ गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि तार काफी देर तक सड़क पर पड़ा रहा। घटना के बाद आसपास के रहवासियों ने तत्काल बिजली विभाग (MPEB) और नगर पालिका को फोन कर सूचना दी। हालांकि, लोगों का आरोप है कि कई बार कॉल करने के बावजूद कोई भी अधिकारी या कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। इस लापरवाही को लेकर लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना के बाद भी काफी देर तक इलाके में करंट का खतरा बना रहा, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई थी। रहवासी घरों से बाहर निकलने से बचते रहे। घटना की सूचना मिलते ही गौ सेवा परिवार के सदस्य धर्मेंद्र गोस्वामी और रविराज सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और प्रशासन से जल्द कार्रवाई करने तथा मृत जानवरों के उचित निस्तारण की मांग की।इस घटना ने बिजली विभाग और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय पर कार्रवाई होती तो इन जानवरों की जान बचाई जा सकती थी। अब लोग दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।