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एमपी टूरिज्म होटल में लकड़ी के चूल्हे जले:एलपीजी संकट के कारण भरहुत में पारंपरिक भाठा पर बन रहा भोजन

एमपी टूरिज्म होटल में लकड़ी के चूल्हे जले:एलपीजी संकट के कारण भरहुत में पारंपरिक भाठा पर बन रहा भोजन

सतना जिले में व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की कमी के कारण होटल कारोबार प्रभावित हो रहा है। आधुनिक रसोईघरों से लैस कई होटल अब पारंपरिक खाना पकाने के तरीकों पर लौटने को मजबूर हैं। गैस की अनियमित आपूर्ति के चलते कई होटल संचालक लकड़ी के चूल्हे पर भोजन बना रहे हैं। मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा संचालित होटल भरहुत भी इस संकट से जूझ रहा है। होटल में 11 मार्च से गैस की अनुपलब्धता के कारण लकड़ी के चूल्हे और भाठा में भोजन तैयार किया जा रहा है। यह स्थिति होटल के संचालन को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है। निजी होटल संचालक जहां एलपीजी की कुछ वैकल्पिक व्यवस्थाएं कर रहे हैं या घरेलू सिलेंडरों का उपयोग कर रहे हैं, वहीं सरकारी नियंत्रण वाले होटल भरहुत को 11 मार्च से व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति नहीं हुई है। इस कारण उन्हें पारंपरिक तरीके अपनाने पड़े हैं। गैस आधारित रसोई की तुलना में लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने में अधिक समय और श्रम लग रहा है। इससे ग्राहकों को समय पर सेवा प्रदान करना एक चुनौती बन गया है, जिससे होटल की कार्यप्रणाली पर सीधा असर पड़ रहा है। होटल भरहुत के असिस्टेंट मैनेजर सलिल सिंह ने बताया कि व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि बीते कई दिनों से रसोई में वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर लकड़ी के चूल्हे का उपयोग किया जा रहा है, जिससे कामकाज प्रभावित होने के साथ-साथ लागत और प्रबंधन संबंधी दिक्कतें भी बढ़ गई हैं। होटल भरहुत में चूल्हे के अलावा विंध्य का पारंपरिक भाठा भी तैयार किया गया है, जिसमें अधिकांश भोजन पकाया जा रहा है।

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एमपी टूरिज्म होटल में लकड़ी के चूल्हे जले:एलपीजी संकट के कारण भरहुत में पारंपरिक भाठा पर बन रहा भोजन

सतना जिले में व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की कमी के कारण होटल कारोबार प्रभावित हो रहा है। आधुनिक रसोईघरों से लैस कई होटल अब पारंपरिक खाना पकाने के तरीकों पर लौटने को मजबूर हैं। गैस की अनियमित आपूर्ति के चलते कई होटल संचालक लकड़ी के चूल्हे पर भोजन बना रहे हैं। मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा संचालित होटल भरहुत भी इस संकट से जूझ रहा है। होटल में 11 मार्च से गैस की अनुपलब्धता के कारण लकड़ी के चूल्हे और भाठा में भोजन तैयार किया जा रहा है। यह स्थिति होटल के संचालन को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है। निजी होटल संचालक जहां एलपीजी की कुछ वैकल्पिक व्यवस्थाएं कर रहे हैं या घरेलू सिलेंडरों का उपयोग कर रहे हैं, वहीं सरकारी नियंत्रण वाले होटल भरहुत को 11 मार्च से व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति नहीं हुई है। इस कारण उन्हें पारंपरिक तरीके अपनाने पड़े हैं। गैस आधारित रसोई की तुलना में लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने में अधिक समय और श्रम लग रहा है। इससे ग्राहकों को समय पर सेवा प्रदान करना एक चुनौती बन गया है, जिससे होटल की कार्यप्रणाली पर सीधा असर पड़ रहा है। होटल भरहुत के असिस्टेंट मैनेजर सलिल सिंह ने बताया कि व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि बीते कई दिनों से रसोई में वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर लकड़ी के चूल्हे का उपयोग किया जा रहा है, जिससे कामकाज प्रभावित होने के साथ-साथ लागत और प्रबंधन संबंधी दिक्कतें भी बढ़ गई हैं। होटल भरहुत में चूल्हे के अलावा विंध्य का पारंपरिक भाठा भी तैयार किया गया है, जिसमें अधिकांश भोजन पकाया जा रहा है।

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