बैतूल में पुलिया निर्माण से परेशान छात्रों का चक्काजाम:2 महीने से रास्ता बंद, डायवर्शन न होने से हो रही परेशानी, अफसरों ने दी समझाइश

बैतूल शहर के जेएच कॉलेज चौक पर निर्माणाधीन पुलिया को लेकर गुरुवार को छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। पुलिया निर्माण के कारण पिछले दो माह से कॉलेज की मुख्य सड़क बंद है, जिससे छात्रों, शिक्षकों और आम नागरिकों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी असुविधा के चलते छात्रों ने दोपहर में कॉलेज चौक पर चक्काजाम कर दिया, जिससे लगभग आधे घंटे तक यातायात बाधित रहा। डायवर्शन न होने से परेशानी छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिया निर्माण स्थल पर ठेकेदार और नगर पालिका द्वारा सुरक्षित डायवर्शन रोड की व्यवस्था नहीं की गई है। इस कारण परीक्षा देने और कॉलेज पहुंचने वाले छात्र-छात्राएं रोजाना देरी से पहुंच रहे हैं। उनका यह भी कहना था कि पुलिया निर्माण कार्य की गति बेहद धीमी है, जिससे असुविधा लगातार बढ़ती जा रही है। मौके पर पहुंचे टीआई को छात्रों ने एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि कॉलेज चौक पर निर्माणाधीन पुलिया में अनियमितताएं हो रही हैं। छात्रों के अनुसार, यहां साधारण पाइप पुलिया पर्याप्त होती, लेकिन जानबूझकर बॉक्स पुलिया का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे करोड़ों रुपये के शासकीय धन के दुरुपयोग की आशंका है। ठेकेदार से छात्रों की कहासुनी ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि सांसद/विधायक निधि से स्थापित बस स्टॉप को बिना किसी वैधानिक आदेश या अनुमति के हटा दिया गया है। छात्रों ने इसे शासकीय संपत्ति के दुरुपयोग और आपराधिक कृत्य की श्रेणी में रखा। प्रदर्शन के दौरान पुलिया निर्माण करवा रहे ठेकेदार और छात्र नेताओं के बीच कहासुनी भी हुई, जिसे पुलिस ने बीच-बचाव कर शांत कराया। बाद में मौके पर पहुंची ट्रैफिक पुलिस ने पास से डायवर्शन निकालकर यातायात सुचारू कराया और छात्रों को समझाइश देकर जाम खत्म करवाया। छात्रों ने मांग की है कि पुलिया निर्माण कार्य की तकनीकी और वित्तीय जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही, आवागमन के लिए सुरक्षित डायवर्शन रोड तुरंत बनाई जाए।
फिटनेस के चक्कर में न कर बैठें गलती! अचानक भारी वजन उठाना कितना खतरनाक? जानिए सब कुछ

आगरा. उत्तर प्रदेश के आगरा में युवाओं के बीच जिम का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. बदलती लाइफस्टाइल और भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट रहने के लिए लोग जिम को बेहतर विकल्प मान रहे हैं. सिर्फ युवा ही नहीं, बल्कि हर उम्र के लोग अब अपनी सेहत को लेकर सजग हो गए हैं. ऐसे में विशेषज्ञों की सलाह को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. अचानक हैवी वेट उठाना हो सकता है खतरनाकआगरा के वरिष्ठ चिकित्सक और फिटनेस एक्सपर्ट डॉ. आशीष मित्तल के अनुसार, जिम में शुरुआत करते समय अचानक भारी वजन उठाना खतरनाक साबित हो सकता है. ज्यादा वजन उठाने से जोड़ों (जॉइंट्स) में समस्या हो सकती है, जो लंबे समय तक परेशानी का कारण बनती है. उन्होंने सलाह दी कि एक्सरसाइज हमेशा जिम ट्रेनर के निर्देशानुसार ही करनी चाहिए. शुरुआत में हल्के वजन से अभ्यास करें और धीरे-धीरे शरीर की क्षमता के अनुसार वजन बढ़ाएं. बिना ट्रेनिंग और निगरानी के हैवी वर्कआउट करना जोखिम भरा हो सकता है. ज्यादा एक्सरसाइज भी बन सकती है समस्याडॉ. मित्तल ने बताया कि कई लोग कम समय में जल्दी रिजल्ट पाने के लिए जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज कर लेते हैं. इससे शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और हार्ट से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग होती है, इसलिए ट्रेनर की सलाह के अनुसार ही वर्कआउट करना चाहिए. हैवी वेट उठाते समय ट्रेनर की मदद जरूर लें, ताकि किसी तरह की चोट से बचा जा सके. जिम के साथ हेल्दी डाइट भी जरूरीफिटनेस सिर्फ एक्सरसाइज से नहीं, बल्कि सही खानपान से भी जुड़ी है. डॉ. आशीष मित्तल के अनुसार, जिम करने वालों को देशी और हेल्दी प्रोटीन युक्त भोजन अपनाना चाहिए. उन्होंने सलाह दी कि डाइट में अंडा, दाल, स्प्राउट्स, दूध, दही, हरी सब्जियां और खासकर पालक को शामिल करें. बाजार के सप्लीमेंट्स या प्रोसेस्ड प्रोडक्ट्स की बजाय घर का बना भोजन ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद होता है. घर पर भी बना सकते हैं हेल्दी प्रोटीन शेकएक्सपर्ट के मुताबिक, घर पर ही पौष्टिक प्रोटीन शेक तैयार किया जा सकता है. इसके लिए बादाम, काजू, किशमिश, अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट्स का पाउडर बनाकर दूध में मिलाकर पी सकते हैं. यह शरीर को प्राकृतिक रूप से प्रोटीन और ऊर्जा प्रदान करता है. जिम क्यों बन रहा है पहली पसंद?बदलते दौर में जहां पार्क या खुले मैदान की सुविधा हर जगह उपलब्ध नहीं है, वहां जिम एक बेहतर विकल्प बनकर उभरा है. एक ही स्थान पर सभी तरह की एक्सरसाइज की सुविधा मिलने से लोग जिम को प्राथमिकता दे रहे हैं. हालांकि, फिट रहने के लिए जिम अच्छा विकल्प है, लेकिन सही तरीके और संतुलित डाइट के साथ ही इसका पूरा लाभ लिया जा सकता है.
अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत का वादा किया, कहा- हर घुसपैठिये को बाहर निकालेंगे राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:26 फरवरी, 2026, 13:58 IST अमित शाह ने सुरक्षा और जनसांख्यिकीय चिंताओं का हवाला देते हुए कसम खाई कि भाजपा पश्चिम बंगाल चुनाव जीतेगी और बिहार के सीमांचल से घुसपैठियों को हटाने का वादा किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह. (एएनआई) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को विश्वास जताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव जीतेगी, और कहा कि सत्ता में आने पर पार्टी राज्य से “हर एक घुसपैठिये को बाहर निकालेगी”। पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे बिहार के सीमांचल क्षेत्र के अररिया जिले में सशस्त्र सीमा बल के एक समारोह को संबोधित करते हुए। समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से शाह ने कहा, “पश्चिम बंगाल में चुनाव नजदीक हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि बीजेपी जीतेगी। नई सरकार बनने पर हम हर एक घुसपैठिये को बाहर निकालेंगे।” केंद्रीय मंत्री ने घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया और आरोप लगाया कि इससे प्रभावित क्षेत्रों का जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि घुसपैठिये राशन और नागरिकों के लिए बनी अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार, खासकर सीमांचल क्षेत्र में घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी. शाह ने जोर देकर कहा कि “घुसपैठियों से मुक्ति का मतलब सिर्फ मतदाता सूची से उनके नाम हटाना नहीं है,” उन्होंने कहा कि सरकार “भारतीय धरती से हर एक घुसपैठिए को हटाने” के लिए एक कार्यक्रम लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। #घड़ी | अररिया, बिहार | केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कहते हैं, “…घुसपैठियों से मुक्ति का मतलब सिर्फ मतदाता सूची से उनका नाम हटाना नहीं है। हम भारत की धरती से हर एक घुसपैठिए को बाहर करने के लिए एक कार्यक्रम लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं…नरेंद्र मोदी सरकार… pic.twitter.com/glbvRo1QTk– एएनआई (@ANI) 26 फ़रवरी 2026 उन्होंने कहा, “बिहार में घुसपैठियों को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू होगी, खासकर सीमांचल क्षेत्र में। हमने इसी मुद्दे पर पिछले साल यहां विधानसभा चुनाव जीता था। और, विरोधियों के हमारे एजेंडे की आलोचना करने के बावजूद हमें जनादेश मिला।” शाह ने कहा, “बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम इस तरह की जनसांख्यिकीय गड़बड़ी के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं। नरेंद्र मोदी सरकार जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।” शाह ने स्वतंत्रता सेनानी और हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर को भी उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने सावरकर को एक निडर देशभक्त बताया, जिनके लेखन ने राष्ट्रवादी भावना को प्रेरित किया और उन्हें 1857 के विद्रोह के विचार को भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रूप में लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया। शाह ने कहा, “चाहे वह अस्पृश्यता उन्मूलन हो, भाषाओं का शुद्धिकरण हो या शुद्ध राष्ट्रवाद की दृष्टि हो, वीर सावरकर ने इन सभी के लिए अपार प्रयास किए।” पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव आने वाले महीनों में होने वाले हैं, जिसके चलते राज्य और पड़ोसी क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) जगह : अररिया, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 26 फरवरी, 2026, 13:58 IST समाचार राजनीति अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत का वादा किया, कहा- हर घुसपैठिए को बाहर निकालेंगे अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
एंजायटी और डिप्रेशन की दवाओं की लत क्यों लग जाती है? साइकेट्रिस्ट ने बताया इस बात में कितनी हकीकत

Last Updated:February 26, 2026, 13:42 IST Truth About Antidepressants: एंजायटी और डिप्रेशन की अधिकतर दवाएं सुरक्षित होती हैं, लेकिन ये दवाएं सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए. कुछ एंटी एंजायटी दवाएं गलत तरीके से या लंबे समय तक लेने पर डिपेंडेंसी पैदा कर सकती हैं. डॉक्टर की निगरानी में सही तरीके से लेने पर ये दवाएं प्रभावी और सुरक्षित रहती हैं. इनसे कोई नुकसान नहीं होता है. अगर सही तरीके से एंजायटी और डिप्रेशन की दवाएं ली जाएं, तो कोई नुकसान नहीं होता है. Anxiety & Depression Treatment: आजकल मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. अधिकतर लोग इन परेशानियों को नजरअंदाज करते रहते हैं, लेकिन कुछ लोग मेंटल हेल्थ को लेकर सीरियस हो रहे हैं. जितना मेंटल हेल्थ को लेकर अवरेयरनेस बढ़ी है, उतनी ही इसकी दवाओं से जुड़ी भ्रांतियां बढ़ गई हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो इस वक्त एंजायटी और डिप्रेशन सबसे ज्यादा लोगों को प्रभावित कर रहे हैं. इनका इलाज दवाओं से किया जाता है. अक्सर माना जाता है कि एंजायटी और डिप्रेशन की दवाएं लेने से लोगों को इनकी लत लग जाती है या शरीर इन दवाओं पर डिपेंडेंट हो जाता है. हालांकि डॉक्टर्स इन सभी बातों को खारिज करते हैं और इन्हें मेंटल डिजीज के इलाज में असरदार और सुरक्षित बताते हैं. नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर और सीनियर साइकेट्रिस्ट डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने News18 को बताया कि मेंटल डिजीज कई तरह की होती हैं और उनके इलाज में अलग-अलग दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है. डिप्रेशन और एंजायटी की दवाओं का असर होने में थोड़ा वक्त लगता है और लक्षणों से जल्द राहत दिलाने के लिए मरीजों को शुरुआत में बेंजोडायजेपाइन जैसी दवाएं दी जाती हैं. ये दवाएं जल्द असर दिखाती हैं और मरीजों को राहत मिलती है. हालांकि इन दवाओं को कम वक्त के लिए दिया जाता है और फिर ज्यादा सुरक्षित दवाएं लेने की सलाह दी जाती है. कई बार लोग अपनी मर्जी से बेंजोडायजेपाइन जैसी दवाएं लेते रहते हैं या गलत तरीके से यूज करते हैं, जिससे उनका ब्रेन इन पर डिपेंडेंट हो सकता है. अगर इन दवाओं का उपयोग सही तरीके और कम समय के लिए किया जाए, तो इनसे किसी तरह का नुकसान नहीं होता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर कुकरेती ने बताया कि एंजायटी और डिप्रेशन की दवाएं काफी सुरक्षित होती हैं और इनसे एडिक्शन जैसा कोई खतरा नहीं होता है. यह लोगों को सिर्फ भ्रम है कि ये दवाएं लेने से उन्हें आदत लग सकती है. जिस तरह डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए लोगों को दवा लेनी पड़ती है, वैसे ही कुछ मरीजों का इलाज लंबा चलता है और उन्हें ये दवाएं लंबे समय तक लेनी पड़ती हैं. इसे डिपेंडेंसी या एडिक्शन समझना गलत है. इन दवाओं को लेकर समस्या तब शुरू होती है, जब मरीज डॉक्टर की निगरानी के बिना खुद ही इन दवाओं की मात्रा बढ़ा देते हैं या इन्हें महीनों तक अपनी मर्जी से लेते रहते हैं. किसी भी दवा को गलत तरीके से लेंगे, तो उसके साइड इफेक्ट जरूर देखने को मिलेंगे. इसलिए दवाओं को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है. एक्सपर्ट की मानें तो कई बार मरीज अपनी मर्जी से अचानक दवाएं बंद कर देते हैं, जिसके बाद उन्हें घबराहट, पसीना आना या चक्कर आने जैसे लक्षण महसूस होते हैं. इसे एंटीडिप्रेसेंट डिस्कन्टिन्युएशन सिंड्रोम कहा जाता है. ये दवाएं ब्रेन फंक्शन में बदलाव लाती हैं, इसलिए इन्हें अचानक बंद नहीं करना चाहिए. जब इन्हें अचानक बंद किया जाता है, तो मस्तिष्क को सामंजस्य बिठाने में समय लगता है. इसे अक्सर लोग विड्रॉल मान लेते हैं और लत समझ बैठते हैं. साइकेट्रिस्ट हमेशा सलाह देते हैं कि दवाओं को कभी भी अचानक बंद न करें, बल्कि उनकी खुराक को धीरे-धीरे कम किया जाना चाहिए. अगर प्रॉपर ट्रीटमेंट लेंगे, तो किसी भी दवा की न तो लत लगेगी और न ही शरीर को किसी तरह का नुकसान होगा. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : February 26, 2026, 13:36 IST
राजस्थान के टोंक में पूर्व भाजपा सांसद द्वारा मुस्लिम महिलाओं को कंबल नहीं दिए जाने के विरोध में हिंदू पड़ोसियों ने रैली निकाली जयपुर समाचार

आखरी अपडेट:26 फरवरी, 2026, 13:29 IST राजस्थान के करेड़ा बुजुर्ग गांव में सुखबीर सिंह जौनापुरिया के कंबल अभियान के दौरान मुस्लिम महिलाओं को कंबल देने से इनकार करने पर आक्रोश फैल गया। 60 वर्षीय शकूरन बानो ने कहा कि धर्म के आधार पर पहचाने जाने के बाद उन्हें अपमानित महसूस हुआ और उन्होंने कंबल वापस करने को कहा। (न्यूज18 हिंदी) राजस्थान के टोंक जिले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया के कंबल वितरण अभियान के बाद करेड़ा बुजुर्ग गांव में आक्रोश फैल गया, जब एक 60 वर्षीय निवासी सहित कई मुस्लिम महिलाओं को कथित तौर पर कंबल देने से इनकार कर दिया गया और उन्हें पहले से दिए गए कंबल वापस करने के लिए कहा गया। यह घटना जौनापुरिया द्वारा आयोजित एक धर्मार्थ वितरण कार्यक्रम के दौरान हुई, जिन्होंने 2014 और 2019 में लोकसभा में टोंक-सवाई माधोपुर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। कार्यक्रम का एक वीडियो, जो तब से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें पूर्व सांसद महिलाओं से उनके नाम पूछते हैं और निर्देश देते हैं कि कुछ लाभार्थियों को मुस्लिम के रूप में पहचानने के बाद उनसे कंबल वापस ले लिए जाएं। फुटेज में, जौनापुरिया को यह कहते हुए सुना जाता है कि कंबल उन लोगों के लिए नहीं थे जो प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को “गाली” देते हैं, साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर किसी को उनके फैसले से ठेस पहुंची है तो इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। प्रभावित लोगों में 60 वर्षीय शकूरन बानो भी शामिल थीं, जिन्होंने कहा कि इनकार से उतना नुकसान नहीं हुआ जितना उनके साथ किए गए व्यवहार से हुआ। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर पहचाने जाने पर उन्हें अपमानित महसूस हुआ और उन्होंने कंबल वापस करने को कहा। उनके बेटे हनीफ, जो एक लोहार है, ने कहा कि भौतिक मदद की भरपाई की जा सकती है लेकिन सम्मान की हानि की भरपाई करना कठिन है। इस घटना से करेड़ा बुजुर्ग के निवासी नाराज हैं, हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि सांप्रदायिक संबंध शांतिपूर्ण बने हुए हैं। मुसलमानों की आबादी बमुश्किल 3% होने के कारण, निवासियों का कहना है कि दोनों समुदाय लंबे समय से सद्भाव में रहे हैं। एकजुटता दिखाने के लिए, हिंदू निवासियों ने शकूरन बानो के समर्थन में रैली की और घटना की निंदा की। गांव की सरपंच के पति हनुमान चौधरी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने अगले दिन विरोध प्रदर्शन किया और जौनापुरिया का पुतला जलाया। कई निवासियों ने आरोप लगाया कि पूर्व सांसद के कार्यों ने गांव की सांप्रदायिक सद्भाव की परंपरा को चोट पहुंचाई है। शकूरन बानो ने कहा कि घटना के बाद कई हिंदू युवक उनके घर आए और जो कुछ हुआ उस पर खेद व्यक्त किया और उन्हें बताया कि वे इस बात से व्यथित महसूस कर रहे हैं कि उनकी “चाची (चाची)” का अपमान किया गया था। इस विवाद ने राजनीतिक ध्यान आकर्षित किया है, राजस्थान कांग्रेस अल्पसंख्यक सेल के सदस्यों और स्थानीय नेताओं ने बानो के घर का दौरा किया और प्रतीकात्मक संकेत के रूप में कंबल प्रदान किए। टोंक जिला कांग्रेस अध्यक्ष सउद सईदी ने मांग की कि भाजपा जौनापुरिया के खिलाफ कार्रवाई करे और उन्हें पार्टी से बाहर निकाले. जौनापुरिया ने बाद में अपने कार्यों का बचाव करते हुए कहा कि कार्यक्रम एक व्यक्तिगत पहल थी और कंबल केवल लगभग 200 भाजपा महिला कार्यकर्ताओं के लिए थे जिनके नाम पहले से सूचीबद्ध थे। उनके अनुसार, उन्हें संदेह था कि उपस्थित महिलाओं में से कुछ पार्टी कार्यकर्ता नहीं थीं और उन्हें डर था कि अगर कंबल रखने की अनुमति दी गई तो वे बाद में “सांसद को बेवकूफ बनाने” का दावा कर सकती हैं। उन्होंने इस बात से इनकार किया कि उनकी हरकतें सांप्रदायिक प्रकृति की थीं और उन्होंने कहा कि चूंकि कार्यक्रम निजी तौर पर वित्त पोषित था, इसलिए लाभार्थियों का फैसला करने का अधिकार उनके पास था। जौनापुरिया, जो पहले अपनी परोपकारी गतिविधियों के लिए विख्यात रहे हैं, जिसमें वंचितों के लिए एक मुफ्त कैंटीन चलाना भी शामिल है, जिसकी पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में प्रशंसा की थी, उन्हें पहले भी आलोचना का सामना करना पड़ा है, जिसमें एक पुराना दावा भी शामिल है कि कीचड़ में स्नान करने से कोविड-19 को दूर रखने में मदद मिल सकती है। जगह : टोंक, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 26 फरवरी, 2026, 13:29 IST समाचार शहर जयपुर राजस्थान के टोंक में पूर्व भाजपा सांसद द्वारा मुस्लिम महिलाओं को कंबल नहीं दिए जाने के विरोध में हिंदू पड़ोसियों ने रैली निकाली अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
सेलिब्रिटी शेफ ने DM-SSP की पत्नी को खाना बनाना सिखाया:पहली नौकरी में होटल खाली रहता था; तभी से ट्रेनिंग देते हुए खाना-खजाना का सफर शुरू हुआ

इंडियन सेलिब्रिटी शेफ संजीव कपूर ने बताया कि जब बनारस के एक होटल में उनकी पहली नौकरी लगी थी, तब वहां के डीएम और एसएसपी की पत्नियों को खाना बनाना सिखाया। कपूर ने बताया कि डीएम और एसएसपी अपनी पत्नियों के साथ होटल में खाना खाने आए थे। उनकी पत्नियों ने खाना सिखाने की गुजारिश की। तब मैंने जीवन में पहली बार किसी को खाना बनाना सिखाया था। तभी लगा कि आगे भी लोगों को ट्रेनिंग देनी चाहिए। वहीं से करियर ने नया मोड़ लिया और आज वे दुनिया भर में मशहूर हैं। दरअसल, संजीव कपूर एक निजी कार्यक्रम को लेकर मंगलवार को उदयपुर आए थे, इस दौरान भास्कर ने उनसे बातचीत की। उन्होंने खाने के बदलते ट्रेंड्स और हेल्दी फूड पर अपने अनुभव साझा किए। सवाल: आपका उदयपुर कैसे आना हुआ? संजीव कपूर: पिछले कुछ सालों में उदयपुर में डेस्टिनेशन वेडिंग का ट्रेंड काफी बढ़ा है। हमें पता चलता रहता है कि कभी इसकी शादी है, उसकी शादी है। सारी बड़ी शादियां उदयपुर में हो रही हैं। इस समय भी एक शादी हो रही है, लेकिन मैं यहां आराम करने आया हूं। उदयपुर में वर्ल्ड क्लास होटल्स हैं, लोग भी बहुत अच्छे हैं। हर कोई यहां आने का बहाना ढूंढ़ता है। मेरा मानना है कि लोगों को विदेश घूमने से बेहतर इंडिया घूमना चाहिए। भारत का टूरिज्म हर स्तर पर बढ़ना चाहिए। दुनिया भर से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या कम हो गई है, लेकिन घरेलू टूरिज्म बढ़ा है। सवाल: आपने एक शेफ के तौर पर अपनी पहचान बनाई, फिर टीवी, किताबों और उद्योग की दुनिया में कदम रखा। इस सफर के पीछे क्या प्रेरणा रही? संजीव कपूर: खाना ऐसा फील्ड है जो मेरा बिजनेस है। जिसे मैं और आगे बढ़ाउंगा। जब मैंने होटल में शेफ के तौर पर काम शुरू किया, तो सीढ़ियां चढ़ता गया और धीरे-धीरे टॉप पर पहुंच गया। 28 साल की उम्र में मुझे बेस्ट एग्जीक्यूटिव शेफ ऑफ द कंट्री का अवॉर्ड मिला। समय के साथ कुछ न कुछ नया होता गया, पहले टीवी, फिर इंटरनेट, किताबें, प्रोडक्ट्स और रेस्टोरेंट। जीवन में आप कुछ भी करें, तो उसे अच्छे से करने की कोशिश करें। मैंने भी वही किया। सवाल: बीते कुछ सालों में इंडियन फूड का ट्रेंड बदला है। जेन जी की नई-नई पसंद है। हमारा किचन भी बदला है। इसको आप किस तरह से देखते हैं? संजीव कपूर: समय के साथ बदलाव जरूरी है और होगा भी, चाहे हम कितना भी विरोध करें। चेंज हमेशा होता है। लोग कितना भी कहें कि ये सही है या गलत, लेकिन हमें जजमेंटल नहीं होना चाहिए। ढाई अरब साल पहले डार्विन थ्योरी की बात करें, तो आज हम इंसान हैं, पहले बंदर थे। समय के साथ बदलाव आएगा। जिस समय में आप हैं, वही सबसे अच्छा समय है। सवाल: आपने बनारस में एक होटल से अपना कॅरियर शुरू किया। जहां से आप अपने खाना खजाना और ट्रेनिंग देने, सिखाने की शुरुआत कैसे मानते हैं? संजीव कपूर: जब बनारस में मेरी पहली जॉब लगी, तब गर्मियों में होटल की ऑक्यूपेंसी कम होती थी। हमारे होटल में उस वक्त के डीएम और एसएसपी अपनी पत्नियों के साथ खाना खाने आए थे। पत्नियों ने कहा कि हमारी नई शादी हुई है, हमें खाना बनाना नहीं आता। आप सिखा सकते हैं? मैंने सोचा होटल खाली है, तो कोई दिक्कत नहीं। वहां पहली बार किसी को खाना बनाना सिखाया। तभी सिखाने की ललक जागी। फिर धीरे-धीरे ट्रेनिंग देते हुए खाना खजाना का सफर शुरू हुआ। लोगों को खाना बनाना सिखाने की शुरुआत वहीं से हुई। बीज वहीं से पड़ा। सवाल: आपके अनुभव के अनुसार आज के दौर में एक सफल शेफ बनने के लिए कौन सी तीन बातें सबसे जरूरी है? संजीव कपूर: किसी भी फील्ड की स्किल सीखनी पड़ती हैं। चाहे म्यूजिक हो, क्रिकेट हो या कोई और। उसमें नियमित रियाज या ट्रेनिंग जरूरी है। दूसरा, उस फील्ड की गहरी जानकारी होनी चाहिए, ताकि और बेहतर कर सकें। तीसरा, सबसे जरूरी वैल्यू सिस्टम, जो घर में माता-पिता, स्कूल में टीचर या दोस्त सिखाते हैं: हार्ड वर्क करो, ईमानदारी से काम करो। ये तीन चीजें अगर करें, तो दुनिया का बेस्ट बनने से कोई नहीं रोक सकता। सवाल: पीएम मोदी भी ज्यादा ऑयल का सेवन नहीं करने का आह्वान कर चुके। आज की लाइफस्टाइल में कम तेल और मसालों के कैसे हेल्दी खाना बनाया जा सकता है? संजीव कपूर: हम नमक और चीनी बहुत ज्यादा खाते हैं। मसालों के साथ तेल भी कम करना चाहिए। घर का खाना सब्जी में ज्यादा तेल डालने से स्वादिष्ट नहीं बनता। गोल गप्पे के पानी में तेल कहां है, लेकिन स्वाद आता है। कभी-कभी ये चीजें ठीक हैं, लेकिन हमेशा कचौड़ी-समौसा या फ्रेंच फ्राइज खाना गलत है। अति कभी न करें। जंक फूड खाना है तो घर में बनाकर खाएं, बाजार से बेहतर होगा। घर में कम तेल में खाना बनाएं। आजकल ऐसे बर्तन हैं जिनमें तेल की जरूरत ही नहीं। सवाल: कई तरह की नई-नई डिशेज मार्केट में आती है जो लोगों को पसंद भी आती है। इनके डिजाइन और क्रिएशन के पीछे क्या विशेष होमवर्क होता है? संजीव कपूर: खाने में क्रिएटिविटी से पहले आप उसे विजुअलाइज करते हैं। आंख बंद करके सोचते हैं कि कैसा होगा। खाने में सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि दिखता कैसे है, खुशबू कैसी है, आवाज में क्रंची है या नहीं, सारे सेंस काम करते हैं। मैं एक शाम होटल के बाहर बैठा सूर्यास्त देख रहा था। उसके रंगों को सोचा कि प्लेट में कितने अच्छे लगेंगे। वो रंग टमाटर से नहीं आएंगे। लाल शिमला मिर्च भूनकर ग्रेवी बनाऊं तो वैसा रंग आएगा। ये विजुअलाइजेशन है। आप पेंटर है तो उसे ये स्किल आनी चाहिए कि पीला और नीला रंग मिलाएंगे तो हरा हो जाएगा। नमक डालो तो नमकीन, मीठी चीज में जरा सा नमक तो मिठास बढ़ जाती है। ये खाने का साइंस है। सवाल: भारतीय कुकिंग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने के लिए आप आने वाले वर्षों में किस दिशा में काम करना चाहेंगे? संजीव कपूर: मैं काफी सालों से इंडियन फूड का प्रचार कर रहा हूं। इसमें नई नई चीजें जोड़ी। इसमें मिलिट्स की बात शुरू हुई तो वर्ष 2017 में मिलिट्स की खिचड़ी
तेजी से झड़ रहे हैं बाल और गंजे होने का लगता है डर, दवाई भी नहीं कर रहा असर, क्या करें, डॉक्टर ने दी A-Z जानकारी

Doctor Advice For Hair Fall : झड़ते हुए बालों को रोकने के लिए आजकल सोशल मीडिया पर खूब प्रचार किया जाता है. तरह-तरह की गोलिया, स्प्रे, तेल और न जाने कितनी चीजों का प्रचार किया जाता है. हमेशा दावा किया जाता है कि इन चीजों से एक महीने में दोबारा बाल उग आएंगे. लोग इस झांसे में आकर कुछ इलाज आजमाते भी हैं लेकिन इससे कुछ होता नहीं है. हाथ में सिर्फ निराशा लगती है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब बाल तेजी से झड़ रहे हों, दवा का कोई असर न हो, तो क्या करना चाहिए. इसी सवालों का जबाव जानने के लिए न्यूज 18 ने हेयर ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट डॉ. अभिषेक पिलानी से बात की. क्या दवा काम करती हैहेयर ट्रांसप्लांट और स्किन एक्सपर्ट डॉ. अभिषेक पिलानी ने बताया कि अधिकांश बाल बढ़ाने वाली दवाएं दो तरीकों से काम करती हैं. कुछ दवाएं शरीर में हार्मोन की गतिविधि को प्रभावित करती हैं, जबकि कुछ बालों की जड़ों तक रक्त प्रवाह बढ़ाती हैं. इससे बालों की बढ़ने वाली अवस्था (ग्रोथ फेज) लंबी हो सकती है, जिससे बाल थोड़े घने होते हैं और जल्दी नहीं झड़ते. लेकिन ये दवाएं बाल झड़ने की असली वजह को ठीक नहीं करतीं. जैसे कि आनुवंशिक कारण (जेनेटिक्स), तनाव, पोषण की कमी, हार्मोन में बदलाव, बीमारी या गलत जीवनशैली. ये कारण अक्सर वैसे ही बने रहते हैं. दवा के साइड इफेक्ट्स क्या हैंइसी वजह से, जब दवा बंद कर दी जाती है, तो आमतौर पर बालों का झड़ना फिर से शुरू हो जाता है. दवाओं के दुष्प्रभाव भी एक अहम सच्चाई हैं. कई लोगों को बालों पर लगाने वाली दवाओं से सिर की त्वचा में जलन, खुजली, लालिमा, पपड़ी या सूखापन महसूस होता है. वहीं, खाने वाली दवाओं से कुछ लोगों को सिरदर्द, थकान, चक्कर आना, मूड में बदलाव या पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है. हर किसी को ये समस्याएं नहीं होतीं, लेकिन डॉक्टर मानते हैं कि साइड इफेक्ट्स सच में हो सकते हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. लंबे समय तक इन दवाओं का इस्तेमाल भी चिंता का कारण बन सकता है. कुछ बाल उगाने वाली दवाएं शरीर के हार्मोन संतुलन को प्रभावित करती हैं. हार्मोन हमारे मेटाबॉलिज्म, मूड, हृदय स्वास्थ्य और प्रजनन स्वास्थ्य जैसी कई जरूरी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं. क्योंकि कई लोग इन दवाओं का सालों तक उपयोग करते हैं, इसलिए शोधकर्ता अब भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि लंबे समय तक इनके इस्तेमाल का शरीर पर क्या असर पड़ता है. सच यह है कि इसके दीर्घकालिक प्रभाव अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं. मानसिक परेशानी बढ़ना लाजिमीएक और महत्वपूर्ण बात यह है कि हर व्यक्ति में इसका असर अलग-अलग होता है. कुछ लोगों को कुछ महीनों बाद बाल झड़ना कम होता दिखाई देता है, जबकि कुछ को बहुत कम या कोई खास फर्क नहीं दिखता. बाल धीरे-धीरे बढ़ते हैं और स्पष्ट बदलाव दिखने में छह महीने से एक साल तक लग सकता है. इससे लोगों में निराशा, मानसिक तनाव और अवास्तविक उम्मीदें पैदा हो सकती हैं. इसका एक मानसिक पक्ष भी होता है, जिसके बारे में लोग कम बात करते हैं. बार-बार नए बाल उग रहे हैं या नहीं, यह जांचना, दवा की खुराक छूट जाने की चिंता करना या फिर से बाल झड़ने का डर रखना चिंता बढ़ा सकता है. विडंबना यह है कि तनाव खुद बालों के झड़ने को और बढ़ा सकता है. इस तरह एक ऐसा कुचक्र बन जाता है, जिससे बाहर निकलना मुश्किल लगता है. फिर कैसे झड़ते बालों को रोकेंडॉक्टर अक्सर सलाह देते हैं कि दवा शुरू करने से पहले बुनियादी सेहत पर ध्यान देना चाहिए. बाल झड़ने के कई कारण है. अगर जीन और कुछ बीमारियां इसकी वजह नहीं हो तो तनाव और पोषक तत्वों की कमी सबसे बड़ी दो वजहें हैं. पोषण में सिर्फ किसी एक की जरूरत नहीं होती बल्कि संतुलित पोषण की जरूरत होती है. जैसे विटामिन, प्रोटीन, मिनिरल्स सबका संतुलन होना चाहिए. मुख्य तौर पर विटामिन बी 12, मैग्नीशियम और जिंक की ज्यादा जरूरत होती है. तो फिर क्या करना चाहिए, थोड़ी सी बातों से समझ लीजिए. पर्याप्त पोषण लें-पर्याप्त प्रोटीन, आयरन, जिंक, बायोटिन, विटामिन ई, ओमेगा 3 फैटी एसिड वाले फूड का सेवन करें. इसके लिए हरी पत्तीदार सब्जियां, बादाम, ड्राई फ्रूट्स, अलसी के बीज, तिल के लड्डू, पालक का साग, अंडा, तेल वाली मछली, संतरा, नींबू, चकोतरा, अंगूर आदि का खूब सेवन करें. तनाव को कम करें-बाल झड़ने का बड़ा कारण है तनाव. तनाव हर किसी के जीवन में होता है लेकिन जो इसका प्रबंधन सही से कर लेगा वही विजेता है. इसके लिए आप रोज वॉक कीजिए. कम से कम 3-4 किलोमीटर रोज चलिए. फिर योग तनाव भगाने का बड़ा साधन है. योग और मेडिटेशन से तनाव दूर होगा. घूमने से तनाव दूर होता है. दोस्तों और परिवार के साथ टूर पर जाते रहिए. समाज के साथ अच्छा रिश्ता भी तनाव से दूर रखता है. इसके लिए समाज में सबके साथ घुलमिल कर रहिए. उनके साथ बातें कीजिए. दोस्तों और परिवार के साथ खूब गप्पें कीजिए. सबसे अहम बात कभी मत सोचिए कि बाल झड़ जाएंगे तो हम गंजे हो जाएंगे. इससे तनाव और बढ़ेगा. जितना खुश रहेंगे बालों की तंदुरुस्ती उतनी हो होगी. पर्याप्त नींद-हमारे शरीर के पूर्जे-पूर्जे की मरम्मत नींद में होती है. पर्याप्त नींद नहीं लेंगे तो बालों को झड़ना नहीं रुकेगा. इसलिए 7-8 घंटे की सुकून भरी नींद लीजिए. कम से कम 6 घंटे की ऐसी नींद होनी चाहिए जिसमें नींद बीच में न खुले. यानी गहरी नींद की जरूरत होती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp,आपके सवालों का हम देंगे जवाब.
'फैमिली एंटरटेनमेंट के लिए सही समय':एकता कपूर ने धुरंधर 2 और टॉक्सिक के तीन हफ्तों बाद ‘भूत बंगला’ रिलीज करने पर प्रतिक्रिया दी

प्रोड्यूसर एकता कपूर ने बुधवार को अपनी फिल्म भूत बंगला की रिलीज टाइमिंग पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि फिल्म को ‘धुरंधर 2’ और ‘टॉक्सिक’ के कुछ हफ्तों बाद शेड्यूल करना फैमिली एंटरटेनमेंट और छुट्टियों के समय को ध्यान में रखकर किया गया है। गौरतलब है कि फिल्म धुरंधर ने दुनियाभर में 1300 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की है। अब फिल्म का दूसरा पार्ट 19 मार्च को रिलीज होगा, जो यश की फिल्म टॉक्सिक से बॉक्स ऑफिस पर क्लैश करेगा। वहीं, एकता कपूर की प्रोड्यूस की हुई फिल्म भूत बांग्ला 10 अप्रैल को रिलीज होगी। फिल्म की रिलीज डेट को लेकर एकता ने कहा, “हमारी फिल्म के रिलीज तक ‘धुरंधर 2’ और ‘टॉक्सिक’ अच्छा रन ले चुकी होंगी। उस समय कुछ स्कूलों के एग्जाम खत्म हो जाएंगे। हॉलिडे पीरियड भी रहेगा। मेरे बेटे के आईबी बोर्ड के एग्जाम मई में खत्म होंगे।” उन्होंने आगे कहा, “सबसे जरूरी बात यह है कि फैमिलीज ऐसी फिल्में देखना पसंद करती हैं। हमारा मकसद अलग तरह का एंटरटेनमेंट लाना है। दर्शकों के लिए अलग-अलग तरह की फिल्में बननी चाहिए।” ‘भूत बंगला’ के साथ प्रियदर्शन और अक्षय कुमार 14 साल बाद फिर साथ काम कर रहे हैं। फिल्म को बालाजी मोशन पिक्चर्स और केप ऑफ गुड फिल्म्स के साथ मिलकर प्रेजेंट किया जा रहा है। एकता कपूर ने इस जोड़ी को “सोलमेट्स” कहा। उन्होंने बताया, “यह विंटेज प्रियदर्शन और अक्षय सर वाली फिल्म है। जब हमने स्क्रिप्ट लिखी और अक्षय सर को सुनाई, उन्हें कहानी पसंद आई। हमने उनसे कहा कि हम चाहते हैं कि प्रियदर्शन ही इसे डायरेक्ट करें। उन्होंने तुरंत हामी भर दी।” उन्होंने कहा, “इसके बाद हम स्क्रिप्ट लेकर प्रियदर्शन सर के पास गए। उन्हें कहानी पसंद आई। उन्होंने कुछ बदलाव भी किए।” फिल्म में अक्षय कुमार के अलावा वामिका गब्बी, परेश रावल, तब्बू और राजपाल यादव नजर आएंगे। इसमें एक्टर असरानी भी होंगे, जिनका अक्टूबर 2025 में निधन हुआ था। एकता कपूर ने कहा, “राजपाल यादव, असरानी, परेश रावल, तब्बू और अक्षय सर प्रियदर्शन के साथ मजबूत कॉम्बिनेशन हैं।” फ्रेंचाइजी के सवाल पर उन्होंने कहा, “फ्रेंचाइजी पहले से प्लान नहीं होती। अगर फिल्म चलती है, तो खुद फ्रेंचाइजी बन जाती है।”
'फैमिली में कोई नेगेटिविटी नहीं है':हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र के निधन के बाद परिवार में तनाव की अफवाहों को किया खारिज

एक्टर धर्मेंद्र के निधन के बाद उनके परिवार में तनाव की चल रही अफवाहों को खारिज करते हुए एक्ट्रेस और उनकी पत्नी हेमा मालिनी ने कहा कि परिवार में किसी तरह की कोई नेगेटिविटी नहीं है। हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में हेमा मालिनी ने कहा, “पापा हैं ना। पापा के लिए हम सब कुछ करेंगे, चाहे ये बच्चे ईशा और अहाना हों या वो बच्चे सनी और बॉबी हों। सबको धरमजी से बहुत प्यार है और सब एक-दूसरे से भी बहुत प्यार करते हैं। परिवार में किसी तरह की कोई कड़वाहट नहीं है। जब धरमजी साथ हैं, तो नेगेटिविटी की कोई जगह ही नहीं है।” बता दें कि हाल ही में हेमा की दोनों बेटियां, ईशा और अहाना, सनी देओल की फिल्म बॉर्डर 2 की स्क्रीनिंग पर पहुंचीं और तीनों ने साथ में तस्वीरें भी क्लिक करवाईं। हालांकि, फिल्म की स्क्रीनिंग में हेमा मालिनी शामिल नहीं हुईं, जिस पर भी उन्होंने अब प्रतिक्रिया दी है। हेमा मालिनी ने इस पर कहा, “धरमजी हमेशा प्यार, हिम्मत और अच्छे संस्कार देने वाले रहे हैं। वही सब उन्होंने बच्चों को दिया है। मुझे भी बुलाया गया था, लेकिन मैं जा नहीं पाई। सब चाहते थे कि मैं आकर फिल्म देखूं। हम हर बात को पब्लिक में दिखाते नहीं हैं और दिखाएं भी क्यों? ये सब हमारे परिवार की बातें हैं। लोगों को समझना चाहिए, यूं इधर-उधर की बातें नहीं करनी चाहिए। हम सब ठीक हैं और इस कमी को मिलकर संभाल लेंगे।” BAFTA अवॉर्ड्स सेरेमनी में धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि दी गई बता दें कि 24 नवंबर 2025 को धर्मेंद्र का निधन हुआ था। पिछले रविवार लंदन में आयोजित 79वें BAFTA अवॉर्ड्स के ‘इन मेमोरियम’ सेक्शन में धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि दी गई। इस साल इस सेक्शन में शामिल होने वाले वे एकमात्र भारतीय एक्टर थे। इस सम्मान पर प्रतिक्रिया देते हुए हेमा ने कहा, “यह बहुत खूबसूरत पल था। वह इसके हकदार थे। यह सिर्फ हमारे लिए नहीं, पूरे देश के लिए गर्व की बात है। धर्मेंद्र के फैंस सिर्फ भारत में ही नहीं, पूरी दुनिया में थे।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अफसोस है कि वह धर्मेंद्र के साथ आखिरी बार स्क्रीन शेयर नहीं कर पाईं। उन्होंने कहा, “हमने जो काम साथ किया, वही अब दर्शकों की यादें हैं। यह मानना मुश्किल है कि वह अब नहीं हैं।”
उज्जैन में महाकाल लोक के सामने होटल में भीषण आग:यात्रियों को सुरक्षित निकाला, दो दमकल ने दो घंटे में पाया आग पर काबू

उज्जैन में बुधवार देर रात महाकाल लोक के सामने स्थित एक होटल में अचानक भीषण आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि समय रहते होटल में ठहरे सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। हालांकि आग से होटल में भारी नुकसान हुआ है। तीसरी मंजिल पर भड़की आग घटना जयसिंहपुरा क्षेत्र स्थित संतोष पैलेस होटल की है। बुधवार रात करीब 11:30 बजे होटल की तीसरी मंजिल पर आग लग गई। आग की लपटें और धुआं उठता देख क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही चार दमकल वाहन मौके पर पहुंचे। फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियों, महाकाल थाना पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आग बुझाने के लिए फायर एक्सटिंगुइशर का भी उपयोग किया गया। पुलिस कर रही जांच महाकाल थाना टीआई गगन बादल ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची थी। करीब दो घंटे में आग पर काबू पा लिया गया। आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल सका है। मामले में प्रकरण दर्ज कर जांच की जाएगी। फायर अधिकारी एलपी साहू ने बताया कि चार दमकल वाहन भेजे गए थे, लेकिन दो गाड़ियों से ही आग पर नियंत्रण पा लिया गया। युवाओं ने दिखाई बहादुरी आग लगने की घटना सबसे पहले कुछ स्थानीय मुस्लिम युवाओं ने देखी। उन्होंने तुरंत होटल प्रबंधन और क्षेत्रवासियों को सूचना दी। मोहम्मद अजान, मोहम्मद सलमान और मोईन खान ने सबसे पहले मौके पर पहुंचकर पानी और आग बुझाने के यंत्रों की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास किया। उनकी सतर्कता और साहस से बड़ा हादसा टल गया।









