रायसेन: 16 यात्री और 5 बाइक से लदी नाव पलटी:चार युवकों ने नर्मदा नदी में कूदकर सभी को बचाया; रमपुरा से रिछावर घाट जा रही थी नाव

रायसेन जिले के देवरी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रमपुरा घाट पर सोमवार को नर्मदा नदी में बड़ा हादसा टल गया। यहां 16 यात्रियों और 5 मोटरसाइकिलों से लदी एक नाव अचानक अनियंत्रित होकर नदी में पलट गई। नाव रमपुरा घाट से रिछावर घाट (जिला नरसिंहपुर) की ओर जा रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नाव में क्षमता से अधिक लोग और वाहन सवार थे, जिसके चलते यह हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि अधिक भार के कारण नाव संतुलन खोने लगी और उसमें धीरे-धीरे पानी भरने लगा। यात्रियों को स्थिति का अंदाजा होता, उससे पहले ही नाव डगमगाई और अचानक पलट गई। देखते ही देखते सभी यात्री और बाइक नदी में गिर गए, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। चार युवकों ने दिखाई बहादुरी, नदी में कूदकर बचाईं जानें हादसे के दौरान स्थानीय चार युवकों ने साहस का परिचय देते हुए बिना देर किए नर्मदा नदी में छलांग लगा दी। तेज बहाव के बीच उन्होंने एक-एक कर सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। नाव में सवार लोगों में बच्चे, महिलाएं और पुरुष शामिल थे। युवकों की तत्परता और सूझबूझ के चलते सभी 16 यात्रियों की जान बच गई और एक बड़ा हादसा टल गया। बाइक नदी में डूबीं, तीन निकाली गईं, बाकी की तलाश जारी हादसे में नाव पर रखी सभी 5 मोटरसाइकिलें नदी में डूब गईं। स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से अब तक 3 बाइक को बाहर निकाल लिया गया है, जबकि बाकी 2 की तलाश जारी है। नदी में सर्चिंग अभियान चलाया जा रहा है। घटना के तुरंत बाद सभी यात्रियों को देवरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार किया गया। डॉक्टरों के अनुसार सभी यात्री सुरक्षित हैं और किसी को गंभीर चोट नहीं आई है। बचाने वाले युवकों का होगा सम्मान प्रशासन ने हादसे के दौरान साहस दिखाने वाले चारों युवकों को सम्मानित करने की घोषणा की है। उनकी बहादुरी और तत्परता के चलते 16 जिंदगियां सुरक्षित बच सकीं। यह है 4 बहादुर युवक… प्रशासन मौके पर पहुंचा, लिया घटनास्थल का जायजा घटना की सूचना मिलते ही देवरी तहसीलदार जयपाल उइके और थाना प्रभारी जयदीप भदोरिया मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूरे घटनाक्रम का जायजा लिया और स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाई। प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। इस हादसे के बाद नदी में संचालित नावों की सुरक्षा व्यवस्था और ओवरलोडिंग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटों पर क्षमता से अधिक सवारी बैठाने पर कोई सख्ती नहीं होती, जिससे ऐसे हादसों का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि घाटों पर नाव संचालन के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
फेसबुक पर जर्सी गाय दिखाकर युवक के पैसे हड़पे:मैहर में पीड़ित ने थाने में की शिकायत, आरोपियों ने भरोसे में लेने फर्जी दस्तावेज भेजे

मैहर जिले में फेसबुक के जरिए गाय बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया है। ताला थाना क्षेत्र के आमीन गांव के एक युवक को सस्ती जर्सी गाय खरीदने के चक्कर में हजारों रुपए की चपत लग गई। ठगों ने गाड़ी के खर्चे और जीपीएस के नाम पर पैसे ऐंठ लिए। सोमवार को पीड़ित अक्लेन्द्र सिंह ने बताया कि उन्होंने फेसबुक पर गायों की सप्लाई से जुड़ा एक विज्ञापन देखा था। दिए गए नंबर पर बात करने पर सामने वाले व्यक्ति ने खुद को गायों का व्यापारी बताया और व्हाट्सएप पर कई फोटो भेज दीं। अक्लेन्द्र को एक जर्सी गाय पसंद आ गई। ठग ने उसकी कीमत 30 हजार रुपए बताई, लेकिन बाद में सौदा सिर्फ 15 हजार रुपए में तय हो गया। एडवांस और जीपीएस के नाम पर वसूली सौदा पक्का होते ही ठग ने गाय भेजने के लिए गाड़ी के इंतजाम के नाम पर 2,000 रुपए एडवांस मांग लिए। अक्लेन्द्र ने भरोसा करके पैसे ऑनलाइन भेज दिए। करीब चार घंटे बाद ठग का फिर फोन आया और उसने कहा कि अब जीपीएस लगाने के नाम पर 9,999 रुपए और भेजने होंगे। शक होते ही ठग ने बंद किया फोन जब ठग ने दोबारा करीब 10 हजार रुपए मांगे, तो अक्लेन्द्र को गड़बड़ी का अहसास हुआ। उन्होंने और पैसे देने से मना कर दिया। जैसे ही युवक ने इनकार किया, ठग ने फोन काट दिया और अपना नंबर बंद कर लिया। पीड़ित ने अब मुकुंदपुर चौकी में इसकी शिकायत दर्ज कराई है। चौकी प्रभारी नागेश्वर मिश्रा का कहना है कि शिकायत मिल गई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
ड्राई आई के लिए कौन सा ड्रॉप है बेस्ट? डॉक्टर पवन गुप्ता ने बताए कारण और सही ट्रीटमेंट, देखें वीडियो

Best Drops for Dry Eyes: आजकल ज्यादा स्क्रीम टाइम और खराब लाइफस्टाइल के कारण आई ड्राइनेस की समस्या बढ़ रही है. हर तीसरा शख्स इस परेशानी से जूझ रहा है. दिल्ली के जाने-माने आई स्पेशलिस्ट डॉक्टर पवन गुप्ता ने एक यूट्यूब वीडियो में बताया है कि डिजिटल स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग, प्रदूषण और पानी की कमी ड्राई आई के मुख्य कारण हैं. इससे आंखों में जलन और धुंधलापन हो सकता है. इसके समाधान के लिए बाजार में कई तरह के ड्रॉप्स उपलब्ध हैं. कई लोग इंटरनेट पर ड्रॉप देखकर खरीद लेते हैं, लेकिन पहले समस्या की वजह पता करनी चाहिए और फिर उसके आधार पर ड्रॉप्स लेने चाहिए. अपनी मर्जी से लोगों को आई ड्रॉप्स यूज नहीं करने चाहिए.
पेट गैस का इलाज: पेट की गैस का ‘इमरजेंसी’ इलाज, डॉक्टर ने दी सलाह, ये पेय पदार्थ ही मिनटों में लें आराम

30 मार्च 2026 को 20:29 IST पर अपडेट किया गया पेट गैस के उपाय: यहां देखें भागदौड़ भरी जिंदगी और खान-पान के कारण ब्लोटिंग या पेट में गैस रुकना एक आम समस्या बन गई है। कई बार ऐसा होता है कि गैस शरीर से बाहर नहीं निकल पाती, सीने में जलन, पेट में भारीपन और कमजोरी दिखाई देती है। अगर आप भी इस अटकी हुई गैस से परेशान हैं, तो ये कुछ घरेलू नुस्खे अपना सकते हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्लोटिंग(टी)पेट गैस उपचार(टी)गैस निकालने का सबसे तेज़ तरीका(टी)गर्म पानी पीने से गैस से राहत(टी)पेट में बहुत अधिक गैस का इलाज कैसे करें(टी)वयस्कों के लिए गैस से राहत(टी)पेट से गैस को तुरंत कैसे दूर करें दवा(टी)क्या गर्म पानी पीने से गैस से राहत मिलती है(टी)पेट गैस के लिए आपातकालीन उपचार
सिवनी में भूकंप से बचाव के लिए ट्रेनिंग:एसडीईआरएफ ने कहा- आपदा के वक्त झुकें, सुरक्षित स्थान लें, और पकड़कर रहें

सिवनी में सोमवार, 30 मार्च को जिला आपदा प्रबंधन की ओर से भूकंप से बचाव और तैयारी को लेकर एक दिन का ट्रेनिंग प्रोग्राम रखा गया। सरकारी कर्मचारियों, स्कूली बच्चों और एनसीसी कैडेट्स को मुसीबत के समय जान बचाने के तरीके सिखाए गए। होमगार्ड और एसडीईआरएफ की टीम ने बताया कि भूकंप आने पर घबराने के बजाय समझदारी से काम लेना चाहिए। ट्रेनिंग में मुख्य रूप से इन बातों पर जोर दिया गया। भूकंप के दौरान सुरक्षा कैसे करें इस दौरान “Drop, Cover, Hold” तकनीक सिखाई गई—झुकें, सुरक्षित स्थान लें, और पकड़कर रहें। भारी सामान को दीवार से सटाकर फिक्स रखना और टॉर्च, दवाइयां, सूखा खाना जैसी जरूरी चीजों की एक इमरजेंसी किट तैयार रखना। अगर आप घर से बाहर हैं, तो ऊंची इमारतों, बिजली के खंभों और पेड़ों से दूर किसी खुले मैदान में चले जाएं। घर बनाते समय ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करें जिससे वह भूकंप के झटके झेल सके। घायल लोगों को तुरंत प्राथमिक इलाज देने और मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के तरीके भी सिखाए गए। लाइव डेमो और प्रदर्शनी ट्रेनिंग के दौरान टीम ने एक नकली अभ्यास (मॉक ड्रिल) करके दिखाया। इसमें दिखाया गया कि ऊंची बिल्डिंग में फंसे घायल व्यक्ति को रस्सी और औजारों की मदद से सुरक्षित कैसे नीचे लाया जाता है। इसके अलावा आग बुझाने वाले सिलेंडर को चलाने का सही तरीका भी बताया गया। जागरूकता ही बचाव है कार्यक्रम के आखिर में आपदा के समय काम आने वाले मशीनों और औजारों की प्रदर्शनी लगाई गई। जानकारों ने बताया कि बिजली गिरने, सांप के काटने या आग लगने जैसी घटनाओं में तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए। इस पूरी ट्रेनिंग का मकसद लोगों और सरकारी स्टाफ को इतना तैयार करना है कि किसी भी मुसीबत के समय कम से कम नुकसान हो और लोगों की जान बचाई जा सके।
पन्ना की सकरिया हवाई पट्टी पर भीषण आग:आग बुझाते समय फायरमैन घायल; साथियों ने पहुंचाया अस्पताल

पन्ना में नेशनल हाईवे 39 स्थित सकरिया हवाई पट्टी के पास सोमवार शाम आग लग गई। आग इतनी विकराल थी कि लपटें और धुएं का गुबार दूर से दिखाई दे रहा था। सूचना मिलने पर नगर पालिका की दमकल टीमें आग बुझाने मौके पर पहुंचीं। आग पर काबू पाने का प्रयास जारी था। इसी दौरान, धाम मोहल्ला निवासी फायरमैन रविंद्र प्रताप सिंह (30) फायर ब्रिगेड की गाड़ी पर चढ़कर आग बुझाने में लगे थे। तभी अचानक एक तेज लपट उठी, जिससे उनका संतुलन बिगड़ गया और वे नीचे गिर गए। साथियों ने पहुंचाया अस्पताल इस हादसे में रविंद्र प्रताप सिंह के दोनों पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। उनके साथी जितेंद्र यादव (चालक), प्रमोद रैकवार (फायरमैन) और उत्तम सोनकर (चालक) ने तुरंत कार्रवाई करते हुए घायल रविंद्र को उसी फायर ब्रिगेड वाहन से पन्ना के जिला चिकित्सालय पहुंचाया। रविंद्र प्रताप सिंह, जो स्वर्गीय रणमत सिंह के पुत्र हैं, फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में हैं। समय पर उपचार मिलने से उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। घटना के बाद शहर में इस हादसे और फायरमैन के प्रयासों की चर्चा हो रही है।
रोज के खाने को हेल्दी कैसे बनाएं? पकाते वक्त क्या गलतियां न करें, एक्सपर्ट से जानें कुकिंग से जुड़ी 5 बातें

Healthy Cooking Hacks: अधिकतर लोग इस बात पर काफी ध्यान देते हैं कि वे क्या खा रहे हैं, लेकिन इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं कि उन चीजों को कैसे पका रहे हैं. खाने-पीने की चीजों को पकाने का तरीका सही होगा, तो शरीर को ज्यादा पोषक तत्व मिल सकेंगे. न्यूट्रिशनिस्ट का मानना है कि गलत तरीके से खाना पकाने से सब्जियों और अनाज के 50% से 70% तक पोषक तत्व नष्ट हो सकते हैं. एक हेल्दी मील का मतलब सिर्फ सलाद खाना नहीं है, बल्कि खाना पकाने की उन वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना है. कुकिंग से जुड़ी वे 5 बातें जानते हैं, जो आपके रोज के खाने को हेल्दी बना सकती हैं. यूपी के गाजियाबाद की डाइटिशियन रंजना सिंह ने News18 को बताया कि खाना पकाने में सबसे बड़ी गलती तेल को उसके स्मोकिंग पॉइंट से ज्यादा गर्म करना है. जब तेल से धुआं निकलने लगता है, तो वह जहरीले तत्व छोड़ने लगता है और उसके अच्छे फैट नष्ट हो जाते हैं. कुकिंग के लिए सरसों का तेल, मूंगफली का तेल या घी का उपयोग करें, क्योंकि इनका स्मोकिंग पॉइंट अधिक होता है. एक ही तेल को बार-बार गर्म करके इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि यह सेहत के लिए खतरनाक होता है. डाइटिशियन ने बताया कि अक्सर लोग सब्जियों को काटने के बाद धोते हैं, जो पोषण के लिहाज से एक बड़ी गलती है. सब्जियों में विटामिन B और विटामिन C जैसे वॉटर सॉल्यूबल विटामिन होते हैं. अगर आप काटने के बाद सब्जियां धोते हैं, तो ये जरूरी पोषक तत्व पानी के साथ बह जाते हैं. हमेशा सब्जियों को पहले अच्छी तरह धो लें और उसके बाद ही काटें. इसके अलावा सब्जियों को बहुत छोटे टुकड़ों में काटने से भी बचें, क्योंकि हवा के संपर्क में आने से उनके एंटीऑक्सीडेंट्स कम हो जाते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. एक्सपर्ट के मुताबिक तेज आंच पर खाना पकाने से खाने का स्वाद तो जल्दी आ जाता है, लेकिन उसके एंजाइम्स और विटामिन्स जल जाते हैं. हेल्दी कुकिंग के लिए स्टीमिंग, स्टिर-फ्राइंग या धीमी आंच पर ढंककर पकाना सबसे अच्छा माना जाता है. प्रेशर कुकर का उपयोग दालों और सख्त अनाज के लिए तो ठीक है, लेकिन हरी सब्जियों को खुले बर्तन में या हल्के भाप में पकाना बेहतर है ताकि उनका रंग और क्लोरोफिल बरकरार रहे. मसाले सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि औषधीय गुणों के लिए जाने जाते हैं. हल्दी में मौजूद करक्यूमिन और काली मिर्च के गुण तब सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं, जब उन्हें सही तापमान पर डाला जाए. मसालों को बहुत ज्यादा देर तक तेल में भूनने से उनके तेल उड़ जाते हैं. एक्सपर्ट का सुझाव है कि मसालों को खाना पकने के बीच में या अंत में डालें, ताकि उनके स्वास्थ्य लाभ शरीर को मिल सकें. नमक का इस्तेमाल भी अंत में करना बेहतर है, ताकि आयोडीन की मात्रा बनी रहे. आपको जानकर हैरानी होगी कि आधुनिक नॉन-स्टिक बर्तनों में इस्तेमाल होने वाली टेफ्लॉन कोटिंग अधिक गर्म होने पर सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है. इसकी जगह पारंपरिक लोहे की कढ़ाई या मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करें. लोहे के बर्तन में खाना पकाने से भोजन में आयरन की मात्रा प्राकृतिक रूप से बढ़ जाती है, जो एनीमिया से बचाता है. मिट्टी के बर्तन खाने के pH लेवल को बनाए रखते हैं और खाने की पौष्टिकता को 100% तक सुरक्षित रखते हैं. एल्युमिनियम के बर्तनों का उपयोग कम से कम करें, क्योंकि यह शरीर में जमा होकर नुकसान पहुंचा सकता है.
धुरंधर जैसी स्पाई थ्रिलर ट्रेंड में ‘डफर’ का टीजर-पोस्टर जारी:मुख्य किरदार का चेहरा छिपा, सस्पेंस और लीड रोल ने अटकलें बढ़ाईं

धुरंधर जैसी ग्रेट लेयर्ड स्पाई थ्रिलर फिल्मों के ट्रेंड के बाद, अब बॉलीवुड में एक नई थ्रिलर की लहर देखने को मिल रही है। इसी कड़ी में एलीफेंटा फिल्म्स ने अपनी पहली फिल्म ‘डफर’ का टीजर पोस्टर रिलीज किया है, जिसने रिलीज होते ही दर्शकों में उत्सुकता और सस्पेंस दोनों बढ़ा दिए हैं। पोस्टर में मुख्य किरदार का चेहरा पूरी तरह से छिपा हुआ है, जिससे फिल्म के रहस्य और बढ़ गए हैं। इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार, लीड रोल के लिए शाहिद कपूर और जॉन अब्राहम जैसे नाम चर्चा में हैं, हालांकि मेकर्स ने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। डफर को पारंपरिक स्पाई थ्रिलर से अलग बताते हुए मेकर्स ने इसे लेयर्ड और सस्पेंस से भरपूर कहानी के रूप में पेश किया है। शुरुआती संकेत बताते हैं कि किरदार की पहचान और उसकी परतें धीरे-धीरे सामने आएंगी, ठीक उसी तरह जैसे धुरंधर ने दर्शकों को हर मोड़ पर चौंकाया था। प्रोड्यूसर कोमल वर्मा का कहना है, “हमने इस स्तर पर सीमित जानकारी साझा करने का फैसला किया है। हमारा मकसद है कि दर्शक फिल्म के रहस्य के साथ खुद को जोड़ें। कई बार जो नहीं दिखाया जाता, वही ज्यादा प्रभाव छोड़ता है।” फिल्म का निर्देशन अवॉर्ड-विनिंग फिल्ममेकर नकुल देव कर रहे हैं, जो अपनी डिटेल्ड और लेयर्ड स्टोरीटेलिंग के लिए जाने जाते हैं। लेखन और क्रिएटिव डायरेक्शन सुमन दिव्या संभाल रही हैं। डफर का पोस्टर जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में लॉन्च किया गया, और मेकर्स ने बताया कि आने वाले समय में कास्ट और किरदारों से जुड़ी जानकारी चरणबद्ध तरीके से सामने आएगी। धुरंधर की तरह, ‘डफर’ का सबसे बड़ा हथियार इसका सस्पेंस है। मुख्य किरदार का चेहरा अब तक सामने नहीं आया है, और यही रहस्य फिल्म की चर्चा का केंद्र बना हुआ है। दर्शकों की निगाहें अब लीड एक्टर के आधिकारिक खुलासे पर टिकी हैं, जो इस प्रोजेक्ट की दिशा तय करेगा। एलीफेंटा फिल्म्स ने यह भी घोषणा की है कि ‘डफर’ के अलावा कंपनी पांच और प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है, जिसमें विभिन्न फॉर्मेट और विषयों की स्पाई और थ्रिलर शैली की फिल्मों को आगे बढ़ाया जाएगा।
शिवपुरी में गर्लफ्रेंड को भगाने पहुंचे प्रेमी की पीट-पीटकर हत्या:परिजनों ने घर में बंधक बनाकर रात भर मारा, आज होनी थी लड़की की सगाई

शिवपुरी के कोलारस कस्बे में अपनी गर्लफ्रेंड को घर से भगाकर ले जाने पहुंचे एक युवक की परिजनों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। सोमवार सुबह करीब 10 बजे उसका शव गांव के पास नाले में पड़ा मिला। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दोनों के बीच चल रहा था अफेयर रन्नौद थाना क्षेत्र के नेगमा गांव का रहने वाला 26 वर्षीय अर्जुन पाल का कोलारस की 20 वर्षीय युवती के साथ अफेयर चल रहा था। दोनों के परिवारों को इस संबंध की जानकारी थी। लेकिन अलग-अलग समाज के होने के कारण लड़की के परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे और शादी के लिए तैयार नहीं थे। आज ही होनी थी लड़की की सगाई बताया जा रहा है कि लड़की अपने प्रेमी अर्जुन से शादी करना चाहती थी और इस बात पर अड़ी हुई थी लेकिन परिवार ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी थी। सोमवार को उसकी सगाई होने वाली थी। इस बात की जानकारी लड़की ने फोन पर अर्जुन को दी थी। भागने की बनाई थी योजना जिसके बाद दोनों ने मिलकर घर से भाग जाने की योजना बनाई थी। इसी योजना के तहत अर्जुन रविवार देर शाम कोलारस पहुंचा। उसने अपने रिश्तेदार कल्ला पाल से मदद मांगी, जो कोलारस में एक फार्म हाउस पर रहकर खेती करता था। रविवार रात करीब 1 बजे अर्जुन और कल्ला, लड़की के घर के पास खेत और हाईवे किनारे पहुंच गए। लड़की को वहीं आना था, ताकि दोनों वहां से भाग सकें। लेकिन इस योजना की जानकारी लड़की के परिजनों को लग गई। लड़की के आने की जगह उसके परिजन मौके पर पहुंच गए और दोनों युवकों को पकड़ लिया। परिजनों ने कल्ला पाल को थप्पड़ मारे और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद कल्ला किसी तरह मौके से भाग निकला लेकिन अर्जुन को पकड़कर परिजन अपने घर ले गए। बंधक बनाकर बेरहमी से की मारपीट घर ले जाकर अर्जुन को बंधक बना लिया गया और उसके साथ जमकर मारपीट की गई। लगातार पिटाई के चलते अर्जुन की मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद परिजनों ने सबूत छिपाने के लिए अर्जुन के शव को खेत से करीब 100 मीटर दूर नाले में फेंक दिया। सुबह ग्रामीणों ने देखा शव सोमवार सुबह ग्रामीणों ने नाले में एक शव पड़ा देखा, जिसकी सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पहचान की, जिसमें मृतक अर्जुन पाल निकला। बताया गया है कि सुबह लड़की का दादा खुद थाने पहुंचा और अर्जुन के साथ मारपीट की जानकारी दी। इस मामले में कल्ला पाल की शिकायत पर पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर लिया है। पांच लोगों पर एफआईआर कोलारस थाना प्रभारी गब्बर सिंह गुर्जर के अनुसार, लड़की के पिता, दादा और तीन अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।
हिमाचल में CAG रिपोर्ट ने खोली वित्तीय गड़बड़ियों की पोल:HPU में अयोग्य टीचर भर्ती, रिसर्च-वर्क घटा; सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सोमवार को पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने राज्य के वित्तीय प्रबंधन, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। रिपोर्ट में फंड के उपयोग में गड़बड़ियां, परियोजनाओं में देरी, राजस्व वसूली में कमी, अव्यवस्थित वित्तीय नियंत्रण और कई विभागों में अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। खनन, सिंचाई, आपदा राहत, विश्वविद्यालय और वन विभाग तक फैली इन खामियों ने शासन-प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। खास बात यह है कि 2024-25 में खर्च की गई बड़ी धनराशि का पूरा हिसाब स्पष्ट नहीं है। कई विभागों ने यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट समय पर जमा नहीं किए। इसे पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से गंभीर चूक माना गया। CAG ने पाया कि कई विभागों ने आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहीं किया और कुछ मामलों में बिना स्वीकृति के खर्च किया गया। खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया का पालन न होने के मामले भी सामने आए हैं। इससे सरकारी खर्च की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं। CAG ने 2024-25 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) की वित्तीय स्थिति पर भी चिंता जताई है। राजस्व विभाग में गड़बड़ी जयराम सरकार में 2019-20 में आपदा फंड में भी गड़बड़ी SDRF और NDRF फंड के उपयोग में भी बड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं। 2019-20 में केंद्र सरकार ने ₹61.07 करोड़ रोक लिए थे, क्योंकि राज्य ने SDRF फंड का दुरुपयोग किया था। इसके बावजूद 2019-23 के दौरान भी यह स्थिति जारी रही। रिपोर्ट के अनुसार, ₹254.73 करोड़ की NDRF सहायता जारी ही नहीं हो सकी। क्योंकि राज्य के पास पहले से ही SDRF का बड़ा बैलेंस पड़ा था। इससे राहत कार्यों में 1 से 2 साल तक की देरी हुई। इसके अलावा ₹122.27 करोड़ राशि नियमों के अनुसार निवेश करने के बजाय सेविंग अकाउंट में पड़ी रही, जिससे ब्याज का नुकसान हुआ। कई जगह नियमों के खिलाफ ₹11.76 करोड़ के कार्य कर दिए गए, जैसे सामान्य मरम्मत और नए निर्माण, जो आपदा राहत के दायरे में नहीं आते। आपदा प्रबंधन सिस्टम कमजोर आपदा प्रबंधन सिस्टम भी कमजोर पाया गया। राज्य आपदा योजना अपडेट नहीं हुई, जिला योजनाओं को मंजूरी नहीं मिली और कई जगह आपदा प्रबंधन टीमें बनी ही नहीं। SDRF में स्टाफ की कमी भी सामने आई, जहां 326 पदों में से केवल 193 ही भरे गए। इसके अलावा 9,449 कार्यों (₹172.47 करोड़) का डेटा पोर्टल पर अपडेट नहीं किया गया और बड़ी संख्या में उपयोग प्रमाण पत्र लंबित पाए गए। वन विभाग में अनियमितताएं CAMPA फंड में ₹1.33 करोड़ की संभावित कमी वन विभाग की कार्यप्रणाली पर CAG की रिपोर्ट में सवाल उठे हैं। फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट (FCA) के तहत शिमला स्थित नोडल अधिकारी के रिकॉर्ड की जांच में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। इसके अलावा एक अन्य मामले में वन भूमि पर मौजूद पौधों को वन घनत्व की गणना में शामिल नहीं किया गया। इस वजह से CAMPA (कंपनसेटरी एफॉरस्टेशन फंड मैनेजमेंट एंड प्लानिंग ऑथोरिटी) फंड के आकलन में कमी की आशंका जताई गई है। इन गड़बड़ियों के कारण करीब ₹1.33 करोड़ की राशि की कम वसूली होने की संभावना है। CAG ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए वन विभाग की प्रक्रियाओं और आकलन प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत बताई है। खनन सेक्टर में बड़ी गड़बड़ियां CAG रिपोर्ट में उद्योग विभाग के तहत खनन सेक्टर की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई है। 2018-19 से 2022-23 के दौरान राज्य में 40 हजार से अधिक अवैध खनन के मामले सामने आए, जिनमें अकेले 2022-23 में ही 8,000 से ज्यादा केस दर्ज हुए। खनन विभाग ने 5 साल तक एक्शन प्लान नहीं बनाया ऑडिट में पाया गया कि खनन विभाग ने पांच साल तक वार्षिक कार्ययोजना ही तैयार नहीं की, जिससे निरीक्षण, रॉयल्टी वसूली और परियोजनाओं की निगरानी प्रभावित हुई। राजस्व वसूली में भी खामियां सामने आई हैं। जांच के दौरान 27 खदानों में ₹1.81 करोड़ की रॉयल्टी कम वसूली पाई गई। इसके अलावा, ₹74.81 लाख डेड रेंट और ₹7.27 लाख सरफेस रेंट भी समय पर वसूल नहीं किया गया। जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र बेहद कमजोर पाया गया। कई जिलों में GPS ट्रैकिंग सिस्टम, फ्लाइंग स्क्वॉड और टास्क फोर्स तक नहीं बनाई गई, जिससे अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो सका।








