Tuesday, 15 Sep 2026 | 02:25 PM

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60 साल में पहली बार अल-अक्सा मस्जिद ईद में बंद:ईरान में बाजार वीरान; UAE, कतर और कुवैत में खुले मैदान में नमाज पर रोक

60 साल में पहली बार अल-अक्सा मस्जिद ईद में बंद:ईरान में बाजार वीरान; UAE, कतर और कुवैत में खुले मैदान में नमाज पर रोक

दुनियाभर में ईद का जश्न शुरू हो चुका है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच पिछले 22 दिनों से जंग चल रही है। ऐसे में 60 साल में पहली बार इजराइल के यरुशलम में अल-अक्सा मस्जिद को ईद की नमाज के लिए बंद कर दिया गया है। 1967 के अरब-इजराइल युद्ध के बाद पहली बार है, जब अल-अक्सा को पूरी तरह बंद किया गया है। यह मुसलमानों के लिए मक्का और मदीना के बाद तीसरा सबसे पवित्र स्थल है। ईरान में ईद बाजार वीरान नजर आए। वहीं कतर, UAE और कुवैत जैसे देशों में खुले मैदानों में नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी गई है। खाड़ी देशों में शुक्रवार को ईद मनाई गई ईरान के अलावा लगभग सभी खाड़ी देशों में शुक्रवार को ईद मनाई गई। ईरान में आमतौर पर फारसी नव वर्ष और ईद-उल-फितर से पहले के दिनों में ये बाजार काफी रौनक भरे होते थे। लोग गिफ्ट, कपड़े और खाने-पीने का सामान खरीदने के लिए बड़ी संख्या में यहां पहुंचते थे। लेकिन इस बार हालात बदले हुए हैं। बाजारों में न तो पहले जैसी भीड़ है और न ही त्योहारों वाली चहल-पहल। कम लोग ही खरीदारी के लिए बाहर निकल रहे हैं, जिससे त्योहार की रौनक फीकी पड़ती नजर आ रही है। UAE- ईद के मौके पर चहल-पहल में कमी दिखी गाजा- खरीदारी करती दिखीं महिलाएं ईराक- लोगों ने खामेनेई को याद किया लेबनान- शेल्टर के पास घूमते दिखे लोग तुर्किये- ईद की नमाज अदा करते लोग ब्रिटेन- बड़ी संख्या में नमाज अदा करते लोग ईद पर पाक-अफगान युद्ध 4 दिन के लिए रुका पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने ईद-उल-फितर के अवसर पर जंग में अस्थायी विराम की घोषणा की। जंग को 5 दिनों के लिए रोक दिया गया है। यह कदम सऊदी अरब, तुर्किए और कतर की अपीलों के बाद उठाया गया है। सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार नेप कहा कि यह सीजफायर 18/19 मार्च की रात से 23/24 मार्च की रात तक लागू रहेगा। हालांकि, किसी भी सीमा पार हमले, ड्रोन हमले या पाकिस्तान में आतंकवादी घटना होने पर ऑपरेशन तुरंत फिर से शुरू कर दिया जाएगा। ईद पर विशेष उड़ानें जानकारी के मुताबिक एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और ओमान के लिए नियमित और विशेष उड़ानें संचालित करेंगी। एयरलाइनों के मुताबिक, कुछ उड़ानें फिलहाल अस्थायी रूप से बंद हैं, लेकिन यात्रियों की सुविधा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। दोनों एयरलाइनों ने यह भी बताया कि जेद्दा (सऊदी अरब) और मस्कट (ओमान) के लिए नियमित उड़ानें जारी रहेंगी। इसमें भारत और जेद्दा के बीच करीब 16 उड़ानें शामिल हैं। एयरलाइनों का कहना है कि हालात को देखते हुए आगे की योजना में जरूरत के अनुसार बदलाव किया जा सकता है।

हिमाचल बजट: 75 हजार अस्थायी कर्मियों का मानदेय बढ़ेगा:20 हजार नौकरियां-किसान आयोग की घोषणा संभव, हेल्थ, एजुकेशन व टूरिज्म पर फोकस

हिमाचल बजट: 75 हजार अस्थायी कर्मियों का मानदेय बढ़ेगा:20 हजार नौकरियां-किसान आयोग की घोषणा संभव, हेल्थ, एजुकेशन व टूरिज्म पर फोकस

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आज सुबह 11 बजे अपने कार्यकाल का चौथा बजट पेश करेंगे। सीएम सुक्खू से हर वर्ग को बहुत ज्यादा उम्मीदें हैं। मगर केंद्र सरकार द्वारा रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद करने की वजह से बजट के लोक-लुभावन होने के कम आसार हैं। राज्य की कम इनकम, बढ़ता कर्ज व सीमित लोन लिमिट के बीच सरकार को विकास और वित्तीय अनुशासन में संतुलन साधना होगा। लिहाजा सीएम सुक्खू खर्चे कम करने और इनकम बढ़ाने के लिए कई कड़े फैसले ले सकते हैं। शराब के दाम में बढ़ौतरी, पेट्रोल-डीजल पर सेस, एंट्री टैक्स में इजाफा जैसे ऐलान बजट में हो सकते हैं। केंद्र ने RDG बंद करके राज्य को सालाना 10 हजार करोड़ का झटका दिया है। बावजूद इसके बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सोशल सिक्योरिटी सेक्टर, ग्रीन एनर्जी और रोजगार पर फोकस रहेगा।

युद्धों से सबक-भारत नॉन कॉन्टैक्ट वॉरफेयर की तैयारी कर रहा:6th जेनरेशन फाइटर जेट्स पर भी काम; संसद में पेश हुई रक्षा समिति की रिपोर्ट

युद्धों से सबक-भारत नॉन कॉन्टैक्ट वॉरफेयर की तैयारी कर रहा:6th जेनरेशन फाइटर जेट्स पर भी काम; संसद में पेश हुई रक्षा समिति की रिपोर्ट

ईरान जंग के बीच भारत अब ‘नॉन-कंटैक्ट वारफेयर’ यानी बिना आमने-सामने आए लड़ी जाने वाली जंग के लिए खुद को तैयार कर रहा है। सरकार अपनी सैन्य शक्ति को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक ढालने के लिए सबसे बेहतर रक्षा तकनीकों पर तेजी से काम कर रही है। भारत ने न केवल 5th जेनरेशन(AMCA), बल्कि अब आधिकारिक तौर पर 6th जेनरेशन के फाइटर जेट्स के डिजाइन पर भी काम शुरू कर दिया है। साथ ही स्वदेशी एस-400 (LRSAM) जैसी लंबी दूरी की मिसाइल सिक्योरिटी सिस्टम, ड्रोन को तबाह करने वाले ‘अनंत शस्त्र’ (QRSAM) पर भी युद्धस्तर पर काम शुरू हो चुका है। संसद में पेश की गई रक्षा समिति की रिपोर्ट्स में इसका खुलासा हुआ है। भारत फाइटर जेट्स के लिए शक्तिशाली स्वदेशी इंजन, नौसेना के लिए अभेद सुरक्षा कवच और AI व साइबर डिफेंस जैसे प्रोजेक्ट्स डेवलप कर रहा है। इसके अलावा अस्त्र, नाग और ध्रुवास्त्र जैसी मिसाइलों के मार्क-II वेरिएंट पर काम हो रहा है। उड़ते हुए कमांड सेंटर की तरह काम कर सकेगा ‘सिक्स्थ जेन’ विमान देश का रक्षा दृष्टिकोण अब ‘नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर’ की चुनौतियों को देखते हुए आक्रामक और रक्षात्मक प्रौद्योगिकियों के बीच एक सटीक संतुलन बनाने पर केंद्रित है। भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अपनी क्षमताओं को साबित किया था। अब 5th जेनरेशन के विमानों और 6th जेनरेशन की सोच (जैसे हाइपरसोनिक स्पीड और सी4आईएसआर सिस्टम) के साथ भविष्य के युद्धक्षेत्र के लिए पूरी तरह तैयार है। ये खूबियां होंगी… हाइपरसोनिक गति: सिक्स्थ जेन प्लेन में ध्वनि की गति से 5 गुना तक तेज उड़ने की क्षमता हो सकती है अडैप्टिव शेप: विमान के विंग्स जरूरत के हिसाब से हवा में ही बनावट बदलने में सक्षम होंगे फ्लाइंग सी4आईएसआर: यह एक उड़ते हुए ‘कमांड सेंटर’ की तरह काम कर सकेगा डुअल मोड इंजन: इसमें एक उन्नत इंजन होगा जो न केवल विमान को शक्ति देगा बल्कि एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को ठंडा रखने और बिजली देने में मदद करेगा। डिफेंस इन्वेस्टेमेंट के लिए 2 लाख करोड़ से ज्यादा आवंटित देश को मॉडर्न वॉरफेयर में सक्षम बनाने के लिए सरकार ने इसके लिए भारी-भरकम बजट का प्रावधान किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए डिफेंस इन्वेस्टमेंट में खर्च के लिए में 2,19,306.47 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। यह पिछले वर्ष के बजट अनुमान से 21.84% अधिक है। इसका बड़ा हिस्सा केवल सशस्त्र बलों के मॉडर्नाइजेशन और नए हथियारों की खरीद के लिए सुरक्षित रखा गया है। ये टारगेट्स प्राइयॉरिटी पर… रक्षा बजट में 10 साल में सबसे बड़ा इजाफा, फाइटर जेट्स और इंजनों के लिए 64 हजार करोड़ 1 फरवरी को पेश हुए बजट पर ऑपरेशन सिंदूर का साफ असर दिखा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा बजट में पिछले 10 सालों का सबसे बड़ा इजाफा किया है। उन्होंने तीनों सेनाओं के लिए कुल 7.84 लाख करोड़ रुपए दिए हैं। यह 2025-26 के मुकाबले करीब 1 लाख करोड़ रुपए ज्यादा है। यानी कुल 15% की बढ़ोतरी हुई है। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। सरकार के मुताबिक 6 मई से शुरू हुआ यह ऑपरेशन आज भी चल रहा है। माना जा रहा है कि इसी के चलते डिफेंस बजट में बढोतरी की गई है। सेना को मिलने वाले बजट में मुख्य रूप से 4 पार्ट होते हैं : 1. कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी हथियार खरीद के बजट में 22% की बढ़त इस बार तीनों सेनाओं के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर 2.19 लाख करोड़ रुपए मिले हैं, जो पिछले साल से 21.84% ज्यादा है। पिछले साल यह 1.80 लाख करोड़ रुपए था। इस बजट के ज्यादातर हिस्से का इस्तेमाल हथियार खरीद और मॉडर्नाइजेशन पर होता है। 2. रेवेन्यू खर्च यानी सैलरी भी बढ़ सकती है इसमें सेना के वेतन, भत्ते और दैनिक संचालन का खर्च शामिल है। इसमें लगातार वृद्धि हुई है। 3.रिटायर्ड सैनिकों के लिए पेंशन बजट डिफेंस पेंशन का बजट एक बड़ा हिस्सा है, जो पूर्व सैनिकों के लिए है, जिसमें लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 4. सिविल डिफेंस बजट में मामूली कटौती इसमें रक्षा मंत्रालय के नागरिक प्रशासनिक खर्च और कोस्ट गार्ड के खर्चे शामिल होते हैं, जिनमें समय-समय पर मामूली बदलाव होते रहते हैं। डिफेंस बजट पर ऑपरेशन सिंदूर का असर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह बजट देश की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इससे सेना की तैयारियां और ज्यादा मजबूत होंगी।’ 114 राफेल की डील, नए एयरक्राफ्ट और इंजन पर खर्च रक्षा बजट में सबसे ज्यादा ध्यान लड़ाकू विमान और एयरो इंजन पर दिया गया है। इसके लिए 63,733 करोड़ रुपए रखे गए हैं। वहीं, नेवी बेड़े के लिए 25,024 करोड़ रुपए दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत-फ्रांस के बीच 114 राफेल जेट की डील होने वाली है। रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए 17 हजार करोड़ रुपए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए रिसर्च और डेवलपमेंट पर भी खर्च बढ़ाया गया है। इसके लिए 17,250 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। इस रकम से नई तकनीक, स्वदेशी हथियार और आधुनिक सिस्टम विकसित किए जाएंगे। सरकार चाहती है कि भारत सिर्फ हथियार खरीदे नहीं, बल्कि बनाए भी। कस्टम ड्यूटी हटाने से डिफेंस इंडस्ट्री को फायदा वित्त मंत्री ने बजट में विमान और रक्षा उपकरण बनाने में इस्तेमाल होने वाले इम्पोर्टेड कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी हटा दी है। इससे फैसले से देश की डिफेंस और एयरोस्पेस इंडस्ट्री को सीधा फायदा मिलेगा। उत्पादन सस्ता होगा और निजी कंपनियों का निवेश बढ़ेगा। डिफेंस बजट में भारत, चीन से पीछे लेकिन पाकिस्तान से आगे पिछले साल चीन का रक्षा बजट करीब 247 बिलियन डॉलर यानी 22.6 लाख करोड़ रुपए रहा। अनुमान है कि इस साल 2026 में ये 300 बिलियन डॉलर यानी 27 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकता है। वहीं पाकिस्तान ने भी रक्षा बजट में तेज बढ़ोतरी की है। पिछले साल उसने ऑपरेशन सिंदूर के बाद 81 हजार करोड़ का डिफेंस बजट पेश किया, जो 2024 से 20% ज्यादा था। हालांकि, 2025 में रक्षा बजट में बढ़ोतरी के लिए पाकिस्तान को अपने कुल बजट में 7% की कटौती करनी पड़ी थी। जबकि भारत ने कुल बजट को पिछले साल से लगभग 8% बढ़ाते हुए

सीटों पर एक्सट्रा-चार्ज ना लगाने पर विमान कंपनियों का विरोध:कहा-हमें हवाई किराया बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ेगा; मंत्रालय से फैसला वापस लेने को कहा

सीटों पर एक्सट्रा-चार्ज ना लगाने पर विमान कंपनियों का विरोध:कहा-हमें हवाई किराया बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ेगा; मंत्रालय से फैसला वापस लेने को कहा

भारत की बड़ी विमान कंपनियां इंडिगो, एअर इंडिया और स्पाइस जेट ने 60 % सीटों पर एक्सट्रा चार्ज ना वसूलने का सरकार के फैसले विरोध किया है। एयरलाइंस का कहना है कि इस कदम से उन्हें अपनी खोई हुई कमाई की भरपाई के लिए हवाई किराया बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ेगा। तीनों एयरलाइंस का प्रतिनिधित्व करने वाली फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने सिविल एविएशन मिनिस्ट्री से इस फैसले को वापस लेने का आग्रह किया है। फेडरेशन ने कहा… इस निर्देश का एयरलाइंस पर वित्तीय प्रभाव काफी अधिक होगा। इसके परिणामस्वरूप, सभी यात्रियों को, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जो शायद पहले से सीटें नहीं चुनना चाहते, उन्हें भी अधिक किराया देना पड़ेगा। दरअसल, मिनिस्ट्री ने बुधवार को भारत में हवाई यात्रा को ज्यादा सुविधाजनक बनाने के लिए नए नियम जारी किए थे। नए आदेश के मुताबिक एयरलाइंस की हर फ्लाइट में कम से कम 60% सीटें बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के बुक होंगी। ये निर्देश घरेलू फ्लाइट्स पर लागू होंगे। FIA ने और क्या कहा… अभी 20% सीटें ही बिना चार्ज बुक होती हैं मौजूदा नियमों में पैसेंजर्स के लिए 20% सीटें ही बिना एक्स्ट्रा चार्ज दिए बुक की जा सकती हैं, जबकि बाकी सीटों के लिए भुगतान करना पड़ता है। ये कदम इसलिए उठाए गए हैं क्योंकि एयरलाइंस सीट चुनने समेत कई सर्विसेस के लिए बहुता ज्यादा शुल्क वसूल रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी एयरलाइंस पंसद की सीटें चुनने पर 500 से 3000 रुपए तक एक्स्ट्रा चार्ज करती हैं। इसके अलावा एक ही PNR (बुकिंग रेफरेंस) पर यात्रा करने वाले यात्रियों को एक साथ बिठाया जाएगा या उन्हें आस-पास की सीटें दी जाएंगी। एडिशनल चार्जेस को सवाल-जवाब में समझिए सवाल: क्या अब सीट चुनने के लिए ज्यादा पैसे देने होंगे? जवाब: नहीं, अब फ्लाइट की कम से कम 60% सीटें फ्री होंगी, यानी आपको हर बार सीट के लिए अतिरिक्त पैसे नहीं देने पड़ेंगे। सवाल: क्या परिवार या साथ यात्रा करने वाले लोग अलग-अलग बैठेंगे? जवाब: नहीं, अगर आपकी बुकिंग एक ही PNR पर है, तो आपको साथ या पास-पास सीट दी जाएगी। सवाल: क्या खेल का सामान या म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट ले जाना आसान होगा? जवाब: हां, अब इसके लिए स्पष्ट और आसान नियम बनाए जाएंगे, जिससे आपको पहले से पता रहेगा क्या करना है। सवाल: क्या पालतू जानवर (pet) साथ ले जा सकते हैं? जवाब: हां, लेकिन नियम के साथ। एयरलाइंस को इसके लिए साफ पॉलिसी बतानी होगी, ताकि कोई कन्फ्यूजन न रहे। सवाल: अगर फ्लाइट लेट या कैंसिल हो जाए तो क्या मिलेगा? जवाब: आपको अधिकार मिलेंगे, जैसे- रिफंड, दूसरी फ्लाइट या वेटिंग रूम, जो नियम में तय है। सवाल: मुझे अपने अधिकार कैसे पता चलेंगे? जवाब: अब आसानी से एयरलाइंस को वेबसाइट, एप और एयरपोर्ट पर स्पष्ट जानकारी दिखानी होगी। ‘प्रेफर्ड सीट’ के नाम पर एक्स्ट्रा चार्ज नहीं ले सकेंगी एयरलाइंस अक्सर देखा जाता है कि टिकट बुकिंग के बाद जब यात्री वेब चेक-इन करते हैं, तो उन्हें फ्री सीट के नाम पर केवल 20% ऑप्शन ही मिलते थे। बाकी सीटों के लिए कंपनियां ‘प्रेफर्ड सीट’ के नाम पर भारी वसूली करती थीं। DGCA के नए आदेश के मुताबिक, अब हर फ्लाइट में 60% सीटें ऐसी होनी चाहिए, जिन्हें यात्री बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के चुन सकें। ————– ये खबर भी पढ़ें… एयर टिकट बुकिंग 48 घंटे में कैंसिल की तो फुल-रिफंड:फ्लाइट से 7 दिन पहले बुकिंग जरूरी, DGCA के नए नियम; जानें बदलाव नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने 26 फरवरी को हवाई यात्रा के टिकट रिफंड और कैंसिल करने से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के मुताबिक, अब टिकट बुक करने के 48 घंटे के भीतर कैंसिल या बदलाव करने पर एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगेगा, यानी टिकट का पूरा अमाउंट रिफंड किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

सीटों पर एक्सट्रा-चार्ज न लगाने पर विमान कंपनियों का विरोध:कहा-हमें हवाई किराया बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ेगा; मंत्रालय से फैसला वापस लेने को कहा

सीटों पर एक्सट्रा-चार्ज न लगाने पर विमान कंपनियों का विरोध:कहा-हमें हवाई किराया बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ेगा; मंत्रालय से फैसला वापस लेने को कहा

भारत की बड़ी विमान कंपनियां इंडिगो, एअर इंडिया और स्पाइस जेट ने 60 % सीटों पर एक्सट्रा चार्ज ना वसूलने का सरकार के फैसले विरोध किया है। एयरलाइंस का कहना है कि इस कदम से उन्हें अपनी खोई हुई कमाई की भरपाई के लिए हवाई किराया बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ेगा। तीनों एयरलाइंस का प्रतिनिधित्व करने वाली फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने सिविल एविएशन मिनिस्ट्री से इस फैसले को वापस लेने का आग्रह किया है। फेडरेशन ने कहा… इस निर्देश का एयरलाइंस पर वित्तीय प्रभाव काफी अधिक होगा। इसके परिणामस्वरूप, सभी यात्रियों को, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जो शायद पहले से सीटें नहीं चुनना चाहते, उन्हें भी अधिक किराया देना पड़ेगा। दरअसल, मिनिस्ट्री ने बुधवार को भारत में हवाई यात्रा को ज्यादा सुविधाजनक बनाने के लिए नए नियम जारी किए थे। नए आदेश के मुताबिक एयरलाइंस की हर फ्लाइट में कम से कम 60% सीटें बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के बुक होंगी। ये निर्देश घरेलू फ्लाइट्स पर लागू होंगे। FIA ने और क्या कहा… अभी 20% सीटें ही बिना चार्ज बुक होती हैं मौजूदा नियमों में पैसेंजर्स के लिए 20% सीटें ही बिना एक्स्ट्रा चार्ज दिए बुक की जा सकती हैं, जबकि बाकी सीटों के लिए भुगतान करना पड़ता है। ये कदम इसलिए उठाए गए हैं क्योंकि एयरलाइंस सीट चुनने समेत कई सर्विसेस के लिए बहुता ज्यादा शुल्क वसूल रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी एयरलाइंस पंसद की सीटें चुनने पर 500 से 3000 रुपए तक एक्स्ट्रा चार्ज करती हैं। इसके अलावा एक ही PNR (बुकिंग रेफरेंस) पर यात्रा करने वाले यात्रियों को एक साथ बिठाया जाएगा या उन्हें आस-पास की सीटें दी जाएंगी। एडिशनल चार्जेस को सवाल-जवाब में समझिए सवाल: क्या अब सीट चुनने के लिए ज्यादा पैसे देने होंगे? जवाब: नहीं, अब फ्लाइट की कम से कम 60% सीटें फ्री होंगी, यानी आपको हर बार सीट के लिए अतिरिक्त पैसे नहीं देने पड़ेंगे। सवाल: क्या परिवार या साथ यात्रा करने वाले लोग अलग-अलग बैठेंगे? जवाब: नहीं, अगर आपकी बुकिंग एक ही PNR पर है, तो आपको साथ या पास-पास सीट दी जाएगी। सवाल: क्या खेल का सामान या म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट ले जाना आसान होगा? जवाब: हां, अब इसके लिए स्पष्ट और आसान नियम बनाए जाएंगे, जिससे आपको पहले से पता रहेगा क्या करना है। सवाल: क्या पालतू जानवर (pet) साथ ले जा सकते हैं? जवाब: हां, लेकिन नियम के साथ। एयरलाइंस को इसके लिए साफ पॉलिसी बतानी होगी, ताकि कोई कन्फ्यूजन न रहे। सवाल: अगर फ्लाइट लेट या कैंसिल हो जाए तो क्या मिलेगा? जवाब: आपको अधिकार मिलेंगे, जैसे- रिफंड, दूसरी फ्लाइट या वेटिंग रूम, जो नियम में तय है। सवाल: मुझे अपने अधिकार कैसे पता चलेंगे? जवाब: अब आसानी से एयरलाइंस को वेबसाइट, एप और एयरपोर्ट पर स्पष्ट जानकारी दिखानी होगी। ‘प्रेफर्ड सीट’ के नाम पर एक्स्ट्रा चार्ज नहीं ले सकेंगी एयरलाइंस अक्सर देखा जाता है कि टिकट बुकिंग के बाद जब यात्री वेब चेक-इन करते हैं, तो उन्हें फ्री सीट के नाम पर केवल 20% ऑप्शन ही मिलते थे। बाकी सीटों के लिए कंपनियां ‘प्रेफर्ड सीट’ के नाम पर भारी वसूली करती थीं। DGCA के नए आदेश के मुताबिक, अब हर फ्लाइट में 60% सीटें ऐसी होनी चाहिए, जिन्हें यात्री बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के चुन सकें। ————– ये खबर भी पढ़ें… एयर टिकट बुकिंग 48 घंटे में कैंसिल की तो फुल-रिफंड:फ्लाइट से 7 दिन पहले बुकिंग जरूरी, DGCA के नए नियम; जानें बदलाव नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने 26 फरवरी को हवाई यात्रा के टिकट रिफंड और कैंसिल करने से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के मुताबिक, अब टिकट बुक करने के 48 घंटे के भीतर कैंसिल या बदलाव करने पर एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगेगा, यानी टिकट का पूरा अमाउंट रिफंड किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

गलत व्यक्ति पर हुई अवैध परिवहन की कार्रवाई:हाईकोर्ट में याचिका दायर,दोषियों पर 50 हजार का जुर्माना;छिंदवाड़ा कलेक्टर के आदेश को चुनौती

गलत व्यक्ति पर हुई अवैध परिवहन की कार्रवाई:हाईकोर्ट में याचिका दायर,दोषियों पर 50 हजार का जुर्माना;छिंदवाड़ा कलेक्टर के आदेश को चुनौती

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने छिंदवाड़ा कलेक्टर द्वारा पारित दंड आदेश अनुचित पाते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कलेक्टर ने तथ्यों की जाँच किए बिना ही खनन अधिकारी की रिपोर्ट को आँख मूंद करके स्वीकार कर लिया और असंबंधित व्यक्ति पर गलत तरीके से दोष मढ़ दिय . छिंदवाड़ा निवासी सारंग रघुवंशी ने छिंदवाड़ा कलेक्टर के जुर्माने के आदेश को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि राजस्व कार्यालय ने वैधानिक प्राधिकरण या आवश्यक दस्तावेज़ों के बिना अवैध रूप से सामग्री परिवहन कर रहे एक ट्रक को जब्त किया। खनन निरीक्षक द्वारा अंतिम रिपोर्ट के साथ एक पंचनामा तैयार किया गया और अभियोग के लिए दस्तावेज कलेक्टर को सौंप दिए गए। याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस प्राप्त हुआ और उसने जवाब दाखिल करते हुए कहा कि वह ट्रक का मालिक नहीं है। याचिकाकर्ता के जवाब पर विचार नहीं किया गया और 27 जनवरी, 2025 को ट्रक को जब्त करने का निर्देश पारित किया गया। न्यायालय ने पाया कि खनन अधिकारी ने ट्रक के मालिक का पता लगाने और उसके बयान दर्ज करने का कोई प्रयास नहीं किया, बल्कि ट्रक चालक राजेश के बयान पर भरोसा किया। जस्टिस विवेक रुसिया की कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता को गलत तरीके से वाहन का मालिक माना गया और उस पर दायित्व थोपा गया।

अपने ही विभाग को खोखला कर रहा था एकाउंटेंट:शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला,सैलरी के नाम पर निकाल लिए 1 करोड़ 11 लाख;14 पर एफआईआर दर्ज

अपने ही विभाग को खोखला कर रहा था एकाउंटेंट:शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला,सैलरी के नाम पर निकाल लिए 1 करोड़ 11 लाख;14 पर एफआईआर दर्ज

जबलपुर में शिक्षा विभाग के पनागर विकासखंड में पदस्थ एकाउंटेंट ने शासन को करोड़ों रुपए का चूना लगाकर ना सिर्फ अपने और परिवार की जेब भरी, रिटायर हो चुके कर्मचारियों को कई सालों तक हर माह वेतन भी दिया। खुलासा होने के बाद पनागर थाने में तीन शिक्षा अधिकार . ऐसे हुआ घोटाला उजागर दरअसल कोष लेखा विभाग भोपाल से जबलपुर कलेक्टर को इनपुट मिला कि स्कूल शिक्षा विभाग के पनागर ब्लाक में करोड़ों रुपए का घोटाला हुआ है, जिसमें कि अतिथि शिक्षकों के नाम पर 2018 से वेतन निकाला जा रहा है, जो कि उन लोगों को दिया जा रहा है, जो कि या तो रिटायर हो गए हैं, या फिर कभी नौकरी ही नहीं की हो। यह राशि एकाउंटेंट विजय कुमार भलावी ने लागइन-पासवर्ड से निकाली और फिर अलग-अलग खातों में जमा करवाई। कलेक्टर के निर्देश पर शिक्षा और लेखा विभाग की टीम गठित की और जब विजय कुमार सहित अन्य लोगों के बैंक खाते चेक किए, तो सभी के खातों में लाखों रुपए निकले। शिक्षा विभाग में पदस्थ विजय कुमार के साथ-साथ उनकी पत्नी दो बेटी के खातों में कई लाख रुपए मिले। तीन पूर्व शिक्षा अधिकारी शैलबाला डोंगरे,त्रयंबक गणेश खरे और नरेंद्र तिवारी शामिल के नाम भी इस घोटाले मे सामने आए हैं, इसके अलावा जयंती भलावी, माधुरी भलावी, रागिनी भलावी, रानू भलावी, समीर कोष्ठा, माला कोष्ठा, अंकुश नेमा एवं पूर्व अतिथि शिक्षक सुचित्रा पटेल के बैंक खातों में राशि भेजी गई है, जो कि करीब 1 करोड़ 11 लाख रुपए हैं। मास्टरमाइंड था एकाउंटेंट जांच के दौरान यह भी पता चला कि विजय कुमार भलावी 2016 से पनागर ब्लाक में पदस्थ था। तभी से उसने यह घोटाला हर माह करना शुरू कर दिया था। 2018 से 2026 के बीच तीन शिक्षा अधिकारी पदस्थ रहे, जिनकी लागइन-पासवर्ड से यह राशि निकाली गई और बाद में फिर अलग-अलग 16 खातों में ट्रांसफर की गई। बीईओ कार्यालय पनागर में पदस्थ अकाउंटेंट विजय कुमार भलावी ब्लॉक के शिक्षकों की सूची में फर्जी तरीके से ऐसे नाम जोड़ देता था, जो कि कहीं शिक्षक हैं ही नहीं। इसके बाद उनके नाम की सैलरी जब आती थी, तो उसे निकालकर अपने और पत्नी, दो बेटियों सहित अन्य साथियों के खातों में डाल लेता था। यह पूरा कारनामा वह बेहद शातिर तरीके से किया गया था, जिसकी विभाग में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारी को भनक ही नहीं लगी। हाल ही में जब कोषलेखा विभाग भोपाल में राशि का मिलान नहीं हुआ तब मामला सामने आया और शिकायत कलेक्टर तक पहुंची। बड़े अधिकारी भी शक के घेरे में शिक्षा विभाग से लेकर जिला कोषालय भी शक के दायरे में बताया जाता है कि इस मामले में जहां स्कूल शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों पर भी शंका जाहिर की जा रही है, वहीं जिला कोषालय के अधिकारी और कर्मचारी भी निशाने पर हैं। इतना बड़ा मामला बिना सहभागिता के संभव नहीं है। शिक्षा विभाग के पास भी शिक्षकों की सूची होती है और उनमें नए नाम शामिल होने की जानकारी अधिकारियों को नहीं मिल पाई यह चौंकाने वाली बात है। वहीं जिला कोषालय ने भी बिना सत्यापन लगातार सैलरी निकाली, इस पर भी संदेह जताया जा रहा है। बैंक खातों पर रोक लगाई बताया जाता है कि घपले की सूचना मिलने के बाद कलेक्टर ने बीईओ कार्यालय के बैंक खातों पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही वर्ष 2016 से अभी तक के रिकॉर्ड भी बीईओ कार्यालय से मांगे गए हैं। विकासखंड शिक्षा अधिकारी सोनम कटारे ने पनागर थाने में प्रतिवेदन देते हुए बताया कि विकासखंड की पूर्व शिक्षा अधिकारी शैलबाला डोंगरे, त्रयंबक गणेश खरे,नरेंद्र कुमार तिवारी, सहायक ग्रेड विजय कुमार भलावी, शिक्षक गणेश प्रसाद शुक्ला,अनिल कुमार ने 2018 से 2025 के बीच कई फर्जी नाम जोड़े और बकायदा उनके खाते में वेतन का भुगतान भी किया गया। 16 खातों में रुपए हुए ट्रांसफर जांच के दौरान यह भी सामने आया कि एकाउंटेंट विजय कुमार भलावी कई सालों से शिक्षकों की सूची में गड़बड़ी कर रहा था। वह शिक्षकों की सूची में किसी का भी नाम जोड़कर उन्हें शिक्षक बना देता था, और फिर उसके नाम की सैलरी ना सिर्फ अपने खाते बल्कि पत्नी और बेटियों के नाम पर ट्रांसफर करता था। अभी तक 16 खातों की पहचान हो गई है, जिसमें 1 करोड़ से अधिक शासकीय राशि भेजी गई है। विजय कुमार के 4, पत्नी और दो बेटियों के 1-1 खाते के अलावा रिटायर हो चुके शिक्षकों के खाते भी सामने आए हैं। इन पर हुई एफआईआर विकासखंड शिक्षा अधिकारी की शिकायत पर पनागर थाना पुलिस ने मास्टरमाइंड विजय कुमार भलावी सहित शैलबाला डोंगरे,त्रयंबक गणेश खरे, नरेंद्र तिवारी,जयंती भलावी, माधुरी भलावी, रागिनी भलावी, रानू भलावी, समीर कोष्ठा, माला कोष्ठा, अंकुश नेमा, पूर्व अतिथि शिक्षक सुचित्रा पटेल के बैंक खातों में रुपए ट्रांसफर किए गए हैं, जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पनागर थाना प्रभारी विपिन ताम्रकार का कहना है कि विजय कुमार ने बड़ी ही चालाकी से यह फर्जीवाड़ा किया है। विजय कुमार ने ऐसे लोगों के नाम पर भी वेतन निकाला था, जो कि या तो रिटायर हो चुके थे, या फिर कभी नौकरी ही नहीं की थी।

छतरपुर में कुएं में मिला तेंदुए का शव:बंसिया हार गांव में बदबू फैलने पर पता चला; शनिवार को होगा पोस्टमार्टम

छतरपुर में कुएं में मिला तेंदुए का शव:बंसिया हार गांव में बदबू फैलने पर पता चला; शनिवार को होगा पोस्टमार्टम

छतरपुर जिले के चंदला थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत बंसिया हार में एक बिना मुंडेर के कुएं में तेंदुए का शव मिलने से हड़कंप मच गया। शुक्रवार को बदबू आने के बाद इस घटना का पता चला। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, तेंदुए की मौत 5 से 7 दिन पहले हुई होगी। सूचना मिलते ही वन मंडल अधिकारी ऋषि मिश्र के नेतृत्व में वन विभाग का अमला तत्काल मौके पर पहुंचा। वन विभाग ने शिकार की आशंका को देखते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। रात होने के कारण शुक्रवार को तेंदुए के शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका, जिसे अब शनिवार को किया जाएगा। कुएं से बदबू आने पर पता चला जानकारी के अनुसार, बंसिया हार में स्थित यह कुआं बिना मुंडेर का है और इससे लगभग आधा किलोमीटर दूर अग्निहोत्री परिवार रहता है। शुक्रवार को जब उन्हें तेज बदबू महसूस हुई, तो उन्होंने खेत स्थित कुएं में झांककर देखा, जहां तेंदुए का शव दिखाई दिया। इसके बाद उन्होंने पुलिस और वन विभाग को सूचित किया। वन मंडल अधिकारी मिश्रा के साथ एसडीओ स्वामी कार्तिक नायक और रेंजर नीलेश प्रजापति भी वन अमले के साथ मौके पर पहुंचे और जांच की। तेंदुए के शव को कुएं से बाहर निकालने के लिए खटिया का उपयोग किया गया। पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र से पहुंची चिकित्सकों की टीम ने रात होने के कारण शव को पैक करके रख दिया है। शनिवार को उसका पोस्टमार्टम किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पन्ना टाइगर रिजर्व से डॉग स्क्वायड की टीम भी घटनास्थल पर पहुंचकर विस्तृत जांच करेगी।

फल खाना या जूस पीना, कौन सबसे ज्यादा फायदेमंद? डॉक्टर का जवाब पूरी गर्मी रखेगा आपको फिट, ट्राई करें

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Last Updated:March 20, 2026, 21:00 IST Fruit Vs Juice: मौसम के अनुसार शरीर को फिट रखने के लिए लोग खानपान पर खास ध्यान देने लगते हैं. इस दौरान डॉक्टर भी सलाह देते हैं कि ज्यादा से ज्यादा मौसमी फलों का सेवन किया जाए. लेकिन, अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि फल जूस बनाकर पीना ज्यादा सही है या सीधे चबाकर खाना बेहतर होता है. Health Tips: बदलते मौसम के साथ लोग अपने खान-पान में भी बदलाव करते हैं. खासकर गर्मी में विशेष ध्यान दिया जाता है. शरीर को ठंडा रखने और पानी की कमी से बचने के लिए लोग फलों का सेवन अधिक करते हैं. हालांकि, डॉक्टर भी मौसम के अनुसार फलों का सेवन करने की सलाह देते हैं. अभी गर्मी का मौसम चल रहा है और सीजनल तरबूज, खरबूजा, संतरा, मौसंबी, अंगूर, संतरा, ककड़ी, खीरा और केला जैसे फल खूब मिल रहे हैं. डॉक्टरों का मानना है कि ये फल शरीर को ठंडक देने के साथ ही जरूरी पोषक तत्व भी देते हैं. हालांकि, लोग भी इन फलों का सेवन खूब कर रहे हैं. लेकिन, कुछ लोग इन फलों को काटकर खाना पसंद करते हैं, जबकि कई लोग इनका जूस बनाकर पीते हैं. अब ऐसे में कई बार लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि फल का जूस बनाकर पीना ज्यादा फायदेमंद है या सीधे चबाकर खाना बेहतर होता है. स्वास्थ्य पर इसका क्या असर पड़ता है? और यही कारण है कि दोनों तरीकों को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन बना रहता है. जानें असल में क्या है सही तरीका… एक्सपर्ट ने बताया क्या है सही तरीकाइस सवाल का जवाब जानने के लिए लोकल 18 की टीम ने खरगोन के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. संतोष मौर्य से बात की. उन्होंने बताया कि फल किसी भी रूप में खाए जाएं, शरीर को फायदा जरूर मिलता है. लेकिन, अगर सही तरीके की बात करें तो फलों को चबाकर खाना ज्यादा अच्छा होता जाता है. उनका मानना है कि विशेष रूप से गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी होता है. मौसमी फल इस काम में सबसे ज्यादा मदद करते हैं. ये न सिर्फ पानी की कमी को पूरा करते हैं, बल्कि शरीर को ठंडा भी रखते हैं और लू से बचाव करते हैं. चबाकर खाने से ज्यादा फायदेजब हम फल को अच्छे से चबाकर खाते हैं तो उसमें मौजूद फाइबर शरीर को पूरा मिलता है. फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत करता है और पेट साफ रखने में मदद करता है. इससे कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याएं कम होती हैं. वहीं, चबाने की प्रक्रिया के दौरान मुंह में लार बनती है. यह लार खाने को नरम बनाकर उसे पचाने में मदद करती है. इससे शरीर को फल के पोषक तत्व सही तरीके से मिल पाते हैं. यही कारण है कि डॉक्टर भी हमेशा धीरे-धीरे चबाकर खाने की सलाह देते हैं. जूस पीने में क्या दिक्कत?वहीं, अगर बात करें जूस की तो यह जल्दी तैयार हो जाता है और पीने में भी आसान होता है. लेकिन, सबसे बड़ी कमी ये कि इसमें फाइबर की मात्रा बहुत कम रह जाती है. क्योंकि जूस बनाते समय गूदा अलग हो जाता है. जूस सीधे पेट में चला जाता है और इसमें चबाने की प्रक्रिया नहीं होती. इससे मुंह में लार नहीं बनती और पाचन सही तरीके से नहीं हो पाता. कई बार लोग जूस में स्वाद बढ़ाने के लिए चीनी भी मिला देते हैं, जो शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है. कब पी सकते हैं जूसडॉक्टर बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को फल चबाने में दिक्कत होती है या वह जल्दी में है तो जूस भी पी सकता है. लेकिन कोशिश यही करनी चाहिए कि जूस में अतिरिक्त चीनी न मिलाई जाए और उसे ताजा ही पिया जाए. साथ ही पैकेट वाले जूस से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें प्रिजर्वेटिव और ज्यादा शुगर होती है. ये शरीर को फायदा कम और नुकसान ज्यादा पहुंचा सकते हैं, इसलिए हमेशा ताजे फल या घर पर बने जूस को ही प्राथमिकता देनी चाहिए. About the Author Rishi mishra एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें Location : Khargone,Madhya Pradesh First Published : March 20, 2026, 21:00 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

एक्ट्रेस राम्या ‘धुरंधर 2’ पर भड़कीं:रणवीर सिंह के बालों का उड़ाया मजाक; कहा- फिल्म देखने के बजाय पैसे बचाएं, OTT का इंतजार करें

एक्ट्रेस राम्या ‘धुरंधर 2’ पर भड़कीं:रणवीर सिंह के बालों का उड़ाया मजाक; कहा- फिल्म देखने के बजाय पैसे बचाएं, OTT का इंतजार करें

रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई कर रही है, लेकिन पूर्व लोकसभा सांसद और कन्नड़ एक्ट्रेस राम्या ने फिल्म की कड़ी आलोचना की है। 19 मार्च को रिलीज हुई इस फिल्म को देखने के बाद राम्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर एक लंबा पोस्ट शेयर किया। उन्होंने दर्शकों को सलाह दी है कि वे सिनेमाघरों में जाकर अपना समय और पैसा बर्बाद न करें, बल्कि इसके ओटीटी (OTT) पर आने का इंतजार करें। राम्या ने यह भी लिखा की लोग कह रहे हैं कि रणवीर ने फिल्म को अपने कंधों पर उठाया है, लेकिन मुझे तो सिर्फ उनके बाल दिखाई दिए। डायरेक्शन और डायलॉग्स को बताया बेकार राम्या ने फिल्म के हर विभाग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने फिल्म के डायरेक्शन, डायलॉग्स, एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर को बहुत ही खराब (Subpar) बताया। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि ऐसा लगता है जैसे मेकर्स ने डेडलाइन के दबाव में बिना सोचे-समझे फिल्म रिलीज कर दी। राम्या के मुताबिक, फिल्म को देखकर ऐसा महसूस होता है जैसे मेकर्स ने बस यह कह दिया हो कि “हां परफेक्ट है, भेज दो”, जबकि फिल्म में बारीकियों पर ध्यान नहीं दिया गया। रणवीर सिंह के बालों पर कसा तंज फिल्म में रणवीर सिंह के परफॉर्मेंस पर कमेंट करते हुए राम्या ने काफी मजाकिया लहजे में निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “लोग कह रहे हैं कि रणवीर ने फिल्म को अपने कंधों पर उठाया है, लेकिन मुझे तो सिर्फ उनके बाल दिखाई दिए। फिल्म के पहले पार्ट में उनके बालों की एक पर्सनैलिटी थी, लेकिन इस पार्ट में वे सिर्फ दृश्यों (Scenes) को ब्लॉक कर रहे हैं। उनके बालों को तो ‘बेस्ट सपोर्टिंग रोल’ के लिए नॉमिनेट कर देना चाहिए।” फिल्म की हिंसा और लॉजिक पर उठाए सवाल राम्या ने फिल्म में दिखाई गई अत्यधिक हिंसा की भी आलोचना की। उन्होंने फिल्म को ‘हथियारों का विजुअल हैंडबुक’ बताया, जिसमें सिरिंज और स्पैनर जैसी साधारण चीजों को भी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने फिल्म के लॉजिक पर सवाल उठाते हुए कहा, “दोनों पैर कटने और शरीर पर केरोसिन डालने के बाद भी किरदार ऐसे डायलॉग बोल रहा है जैसे वह किसी ‘टेड टॉक’ में हो। इसके लिए ऑस्कर नहीं बल्कि नोबेल प्राइज मिलना चाहिए। मेडिकल साइंस की जय हो।” जिंगोइज्म और प्रोपेगैंडा से बाहर निकलने की सलाह राम्या ने फिल्म को ‘बहुत बड़ी निराशा’ और ‘उबाऊ’ करार दिया। उन्होंने डायरेक्टर आदित्य धर को सलाह दी कि अब जिंगोइज्म (अंधराष्ट्रवाद) और प्रोपेगैंडा का जमाना पुराना हो गया है, इससे बाहर निकलना चाहिए। उन्होंने रणवीर सिंह से भी कहा कि वे इस तरह की फिल्मों से कहीं बेहतर एक्टर हैं।