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युद्धों से सबक-भारत नॉन कॉन्टैक्ट वॉरफेयर की तैयारी कर रहा:6th जेनरेशन फाइटर जेट्स पर भी काम; संसद में पेश हुई रक्षा समिति की रिपोर्ट

युद्धों से सबक-भारत नॉन कॉन्टैक्ट वॉरफेयर की तैयारी कर रहा:6th जेनरेशन फाइटर जेट्स पर भी काम; संसद में पेश हुई रक्षा समिति की रिपोर्ट

ईरान जंग के बीच भारत अब ‘नॉन-कंटैक्ट वारफेयर’ यानी बिना आमने-सामने आए लड़ी जाने वाली जंग के लिए खुद को तैयार कर रहा है। सरकार अपनी सैन्य शक्ति को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक ढालने के लिए सबसे बेहतर रक्षा तकनीकों पर तेजी से काम कर रही है। भारत ने न केवल 5th जेनरेशन(AMCA), बल्कि अब आधिकारिक तौर पर 6th जेनरेशन के फाइटर जेट्स के डिजाइन पर भी काम शुरू कर दिया है। साथ ही स्वदेशी एस-400 (LRSAM) जैसी लंबी दूरी की मिसाइल सिक्योरिटी सिस्टम, ड्रोन को तबाह करने वाले ‘अनंत शस्त्र’ (QRSAM) पर भी युद्धस्तर पर काम शुरू हो चुका है। संसद में पेश की गई रक्षा समिति की रिपोर्ट्स में इसका खुलासा हुआ है। भारत फाइटर जेट्स के लिए शक्तिशाली स्वदेशी इंजन, नौसेना के लिए अभेद सुरक्षा कवच और AI व साइबर डिफेंस जैसे प्रोजेक्ट्स डेवलप कर रहा है। इसके अलावा अस्त्र, नाग और ध्रुवास्त्र जैसी मिसाइलों के मार्क-II वेरिएंट पर काम हो रहा है। उड़ते हुए कमांड सेंटर की तरह काम कर सकेगा ‘सिक्स्थ जेन’ विमान देश का रक्षा दृष्टिकोण अब ‘नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर’ की चुनौतियों को देखते हुए आक्रामक और रक्षात्मक प्रौद्योगिकियों के बीच एक सटीक संतुलन बनाने पर केंद्रित है। भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अपनी क्षमताओं को साबित किया था। अब 5th जेनरेशन के विमानों और 6th जेनरेशन की सोच (जैसे हाइपरसोनिक स्पीड और सी4आईएसआर सिस्टम) के साथ भविष्य के युद्धक्षेत्र के लिए पूरी तरह तैयार है। ये खूबियां होंगी… हाइपरसोनिक गति: सिक्स्थ जेन प्लेन में ध्वनि की गति से 5 गुना तक तेज उड़ने की क्षमता हो सकती है अडैप्टिव शेप: विमान के विंग्स जरूरत के हिसाब से हवा में ही बनावट बदलने में सक्षम होंगे फ्लाइंग सी4आईएसआर: यह एक उड़ते हुए ‘कमांड सेंटर’ की तरह काम कर सकेगा डुअल मोड इंजन: इसमें एक उन्नत इंजन होगा जो न केवल विमान को शक्ति देगा बल्कि एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को ठंडा रखने और बिजली देने में मदद करेगा। डिफेंस इन्वेस्टेमेंट के लिए 2 लाख करोड़ से ज्यादा आवंटित देश को मॉडर्न वॉरफेयर में सक्षम बनाने के लिए सरकार ने इसके लिए भारी-भरकम बजट का प्रावधान किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए डिफेंस इन्वेस्टमेंट में खर्च के लिए में 2,19,306.47 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। यह पिछले वर्ष के बजट अनुमान से 21.84% अधिक है। इसका बड़ा हिस्सा केवल सशस्त्र बलों के मॉडर्नाइजेशन और नए हथियारों की खरीद के लिए सुरक्षित रखा गया है। ये टारगेट्स प्राइयॉरिटी पर… रक्षा बजट में 10 साल में सबसे बड़ा इजाफा, फाइटर जेट्स और इंजनों के लिए 64 हजार करोड़ 1 फरवरी को पेश हुए बजट पर ऑपरेशन सिंदूर का साफ असर दिखा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा बजट में पिछले 10 सालों का सबसे बड़ा इजाफा किया है। उन्होंने तीनों सेनाओं के लिए कुल 7.84 लाख करोड़ रुपए दिए हैं। यह 2025-26 के मुकाबले करीब 1 लाख करोड़ रुपए ज्यादा है। यानी कुल 15% की बढ़ोतरी हुई है। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। सरकार के मुताबिक 6 मई से शुरू हुआ यह ऑपरेशन आज भी चल रहा है। माना जा रहा है कि इसी के चलते डिफेंस बजट में बढोतरी की गई है। सेना को मिलने वाले बजट में मुख्य रूप से 4 पार्ट होते हैं : 1. कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी हथियार खरीद के बजट में 22% की बढ़त इस बार तीनों सेनाओं के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर 2.19 लाख करोड़ रुपए मिले हैं, जो पिछले साल से 21.84% ज्यादा है। पिछले साल यह 1.80 लाख करोड़ रुपए था। इस बजट के ज्यादातर हिस्से का इस्तेमाल हथियार खरीद और मॉडर्नाइजेशन पर होता है। 2. रेवेन्यू खर्च यानी सैलरी भी बढ़ सकती है इसमें सेना के वेतन, भत्ते और दैनिक संचालन का खर्च शामिल है। इसमें लगातार वृद्धि हुई है। 3.रिटायर्ड सैनिकों के लिए पेंशन बजट डिफेंस पेंशन का बजट एक बड़ा हिस्सा है, जो पूर्व सैनिकों के लिए है, जिसमें लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 4. सिविल डिफेंस बजट में मामूली कटौती इसमें रक्षा मंत्रालय के नागरिक प्रशासनिक खर्च और कोस्ट गार्ड के खर्चे शामिल होते हैं, जिनमें समय-समय पर मामूली बदलाव होते रहते हैं। डिफेंस बजट पर ऑपरेशन सिंदूर का असर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह बजट देश की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इससे सेना की तैयारियां और ज्यादा मजबूत होंगी।’ 114 राफेल की डील, नए एयरक्राफ्ट और इंजन पर खर्च रक्षा बजट में सबसे ज्यादा ध्यान लड़ाकू विमान और एयरो इंजन पर दिया गया है। इसके लिए 63,733 करोड़ रुपए रखे गए हैं। वहीं, नेवी बेड़े के लिए 25,024 करोड़ रुपए दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत-फ्रांस के बीच 114 राफेल जेट की डील होने वाली है। रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए 17 हजार करोड़ रुपए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए रिसर्च और डेवलपमेंट पर भी खर्च बढ़ाया गया है। इसके लिए 17,250 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। इस रकम से नई तकनीक, स्वदेशी हथियार और आधुनिक सिस्टम विकसित किए जाएंगे। सरकार चाहती है कि भारत सिर्फ हथियार खरीदे नहीं, बल्कि बनाए भी। कस्टम ड्यूटी हटाने से डिफेंस इंडस्ट्री को फायदा वित्त मंत्री ने बजट में विमान और रक्षा उपकरण बनाने में इस्तेमाल होने वाले इम्पोर्टेड कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी हटा दी है। इससे फैसले से देश की डिफेंस और एयरोस्पेस इंडस्ट्री को सीधा फायदा मिलेगा। उत्पादन सस्ता होगा और निजी कंपनियों का निवेश बढ़ेगा। डिफेंस बजट में भारत, चीन से पीछे लेकिन पाकिस्तान से आगे पिछले साल चीन का रक्षा बजट करीब 247 बिलियन डॉलर यानी 22.6 लाख करोड़ रुपए रहा। अनुमान है कि इस साल 2026 में ये 300 बिलियन डॉलर यानी 27 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकता है। वहीं पाकिस्तान ने भी रक्षा बजट में तेज बढ़ोतरी की है। पिछले साल उसने ऑपरेशन सिंदूर के बाद 81 हजार करोड़ का डिफेंस बजट पेश किया, जो 2024 से 20% ज्यादा था। हालांकि, 2025 में रक्षा बजट में बढ़ोतरी के लिए पाकिस्तान को अपने कुल बजट में 7% की कटौती करनी पड़ी थी। जबकि भारत ने कुल बजट को पिछले साल से लगभग 8% बढ़ाते हुए रक्षा बजट को 15% बढ़ाया है। ———— ये खबर भी पढ़ें… 5वीं पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमान के मॉडल को मंजूरी:बनाने में निजी कंपनियां मदद करेंगी भारत में बनने वाले 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के प्रोडक्शन मॉडल को मंजूरी मिल गई है। केंद्र सरकार ने पिछले साल 27 मई को यह जानकारी दी थी। रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि एयरक्राफ्ट को बनाने के लिए सरकारी के साथ निजी कंपनियों को भी बोली लगाने का मौका दिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

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ईरान जंग के बीच भारत अब ‘नॉन-कंटैक्ट वारफेयर’ यानी बिना आमने-सामने आए लड़ी जाने वाली जंग के लिए खुद को तैयार कर रहा है। सरकार अपनी सैन्य शक्ति को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक ढालने के लिए सबसे बेहतर रक्षा तकनीकों पर तेजी से काम कर रही है। भारत ने न केवल 5th जेनरेशन(AMCA), बल्कि अब आधिकारिक तौर पर 6th जेनरेशन के फाइटर जेट्स के डिजाइन पर भी काम शुरू कर दिया है। साथ ही स्वदेशी एस-400 (LRSAM) जैसी लंबी दूरी की मिसाइल सिक्योरिटी सिस्टम, ड्रोन को तबाह करने वाले ‘अनंत शस्त्र’ (QRSAM) पर भी युद्धस्तर पर काम शुरू हो चुका है। संसद में पेश की गई रक्षा समिति की रिपोर्ट्स में इसका खुलासा हुआ है। भारत फाइटर जेट्स के लिए शक्तिशाली स्वदेशी इंजन, नौसेना के लिए अभेद सुरक्षा कवच और AI व साइबर डिफेंस जैसे प्रोजेक्ट्स डेवलप कर रहा है। इसके अलावा अस्त्र, नाग और ध्रुवास्त्र जैसी मिसाइलों के मार्क-II वेरिएंट पर काम हो रहा है। उड़ते हुए कमांड सेंटर की तरह काम कर सकेगा ‘सिक्स्थ जेन’ विमान देश का रक्षा दृष्टिकोण अब ‘नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर’ की चुनौतियों को देखते हुए आक्रामक और रक्षात्मक प्रौद्योगिकियों के बीच एक सटीक संतुलन बनाने पर केंद्रित है। भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अपनी क्षमताओं को साबित किया था। अब 5th जेनरेशन के विमानों और 6th जेनरेशन की सोच (जैसे हाइपरसोनिक स्पीड और सी4आईएसआर सिस्टम) के साथ भविष्य के युद्धक्षेत्र के लिए पूरी तरह तैयार है। ये खूबियां होंगी… हाइपरसोनिक गति: सिक्स्थ जेन प्लेन में ध्वनि की गति से 5 गुना तक तेज उड़ने की क्षमता हो सकती है अडैप्टिव शेप: विमान के विंग्स जरूरत के हिसाब से हवा में ही बनावट बदलने में सक्षम होंगे फ्लाइंग सी4आईएसआर: यह एक उड़ते हुए ‘कमांड सेंटर’ की तरह काम कर सकेगा डुअल मोड इंजन: इसमें एक उन्नत इंजन होगा जो न केवल विमान को शक्ति देगा बल्कि एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को ठंडा रखने और बिजली देने में मदद करेगा। डिफेंस इन्वेस्टेमेंट के लिए 2 लाख करोड़ से ज्यादा आवंटित देश को मॉडर्न वॉरफेयर में सक्षम बनाने के लिए सरकार ने इसके लिए भारी-भरकम बजट का प्रावधान किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए डिफेंस इन्वेस्टमेंट में खर्च के लिए में 2,19,306.47 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। यह पिछले वर्ष के बजट अनुमान से 21.84% अधिक है। इसका बड़ा हिस्सा केवल सशस्त्र बलों के मॉडर्नाइजेशन और नए हथियारों की खरीद के लिए सुरक्षित रखा गया है। ये टारगेट्स प्राइयॉरिटी पर… रक्षा बजट में 10 साल में सबसे बड़ा इजाफा, फाइटर जेट्स और इंजनों के लिए 64 हजार करोड़ 1 फरवरी को पेश हुए बजट पर ऑपरेशन सिंदूर का साफ असर दिखा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा बजट में पिछले 10 सालों का सबसे बड़ा इजाफा किया है। उन्होंने तीनों सेनाओं के लिए कुल 7.84 लाख करोड़ रुपए दिए हैं। यह 2025-26 के मुकाबले करीब 1 लाख करोड़ रुपए ज्यादा है। यानी कुल 15% की बढ़ोतरी हुई है। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। सरकार के मुताबिक 6 मई से शुरू हुआ यह ऑपरेशन आज भी चल रहा है। माना जा रहा है कि इसी के चलते डिफेंस बजट में बढोतरी की गई है। सेना को मिलने वाले बजट में मुख्य रूप से 4 पार्ट होते हैं : 1. कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी हथियार खरीद के बजट में 22% की बढ़त इस बार तीनों सेनाओं के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर 2.19 लाख करोड़ रुपए मिले हैं, जो पिछले साल से 21.84% ज्यादा है। पिछले साल यह 1.80 लाख करोड़ रुपए था। इस बजट के ज्यादातर हिस्से का इस्तेमाल हथियार खरीद और मॉडर्नाइजेशन पर होता है। 2. रेवेन्यू खर्च यानी सैलरी भी बढ़ सकती है इसमें सेना के वेतन, भत्ते और दैनिक संचालन का खर्च शामिल है। इसमें लगातार वृद्धि हुई है। 3.रिटायर्ड सैनिकों के लिए पेंशन बजट डिफेंस पेंशन का बजट एक बड़ा हिस्सा है, जो पूर्व सैनिकों के लिए है, जिसमें लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 4. सिविल डिफेंस बजट में मामूली कटौती इसमें रक्षा मंत्रालय के नागरिक प्रशासनिक खर्च और कोस्ट गार्ड के खर्चे शामिल होते हैं, जिनमें समय-समय पर मामूली बदलाव होते रहते हैं। डिफेंस बजट पर ऑपरेशन सिंदूर का असर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह बजट देश की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इससे सेना की तैयारियां और ज्यादा मजबूत होंगी।’ 114 राफेल की डील, नए एयरक्राफ्ट और इंजन पर खर्च रक्षा बजट में सबसे ज्यादा ध्यान लड़ाकू विमान और एयरो इंजन पर दिया गया है। इसके लिए 63,733 करोड़ रुपए रखे गए हैं। वहीं, नेवी बेड़े के लिए 25,024 करोड़ रुपए दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत-फ्रांस के बीच 114 राफेल जेट की डील होने वाली है। रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए 17 हजार करोड़ रुपए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए रिसर्च और डेवलपमेंट पर भी खर्च बढ़ाया गया है। इसके लिए 17,250 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। इस रकम से नई तकनीक, स्वदेशी हथियार और आधुनिक सिस्टम विकसित किए जाएंगे। सरकार चाहती है कि भारत सिर्फ हथियार खरीदे नहीं, बल्कि बनाए भी। कस्टम ड्यूटी हटाने से डिफेंस इंडस्ट्री को फायदा वित्त मंत्री ने बजट में विमान और रक्षा उपकरण बनाने में इस्तेमाल होने वाले इम्पोर्टेड कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी हटा दी है। इससे फैसले से देश की डिफेंस और एयरोस्पेस इंडस्ट्री को सीधा फायदा मिलेगा। उत्पादन सस्ता होगा और निजी कंपनियों का निवेश बढ़ेगा। डिफेंस बजट में भारत, चीन से पीछे लेकिन पाकिस्तान से आगे पिछले साल चीन का रक्षा बजट करीब 247 बिलियन डॉलर यानी 22.6 लाख करोड़ रुपए रहा। अनुमान है कि इस साल 2026 में ये 300 बिलियन डॉलर यानी 27 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकता है। वहीं पाकिस्तान ने भी रक्षा बजट में तेज बढ़ोतरी की है। पिछले साल उसने ऑपरेशन सिंदूर के बाद 81 हजार करोड़ का डिफेंस बजट पेश किया, जो 2024 से 20% ज्यादा था। हालांकि, 2025 में रक्षा बजट में बढ़ोतरी के लिए पाकिस्तान को अपने कुल बजट में 7% की कटौती करनी पड़ी थी। जबकि भारत ने कुल बजट को पिछले साल से लगभग 8% बढ़ाते हुए रक्षा बजट को 15% बढ़ाया है। ———— ये खबर भी पढ़ें… 5वीं पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमान के मॉडल को मंजूरी:बनाने में निजी कंपनियां मदद करेंगी भारत में बनने वाले 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के प्रोडक्शन मॉडल को मंजूरी मिल गई है। केंद्र सरकार ने पिछले साल 27 मई को यह जानकारी दी थी। रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि एयरक्राफ्ट को बनाने के लिए सरकारी के साथ निजी कंपनियों को भी बोली लगाने का मौका दिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

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