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विधानसभा चुनाव 2026: महिलाओं के साथ, सत्ता की चाबी उनके पास, भागीदारी के सवालों के बीच महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ा

विधानसभा चुनाव 2026: महिलाओं के साथ, सत्ता की चाबी उनके पास, भागीदारी के सवालों के बीच महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ा

पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के एनोटेशन पोल अब गरमागरम तस्वीरों को आकार देने लगे हैं। हालांकि, इन आंकड़ों के बीच एक शेयर्ड और ट्रेंड ट्रेंड उभरकर सामने आया है, जहां महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज्यादा रही है। इस बार सत्ता का निर्णय क्या है? एकल सर्वेक्षण सर्वेक्षण में संकेत दिया गया है कि बंगाल में भाजपा को बढ़त मिल सकती है, हालांकि कुछ सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि बंगाल में भाजपा को बढ़त मिल सकती है। असम में भाजपा की रणनीति की संभावना मजबूत बनी हुई है, जबकि केरल में सत्ता परिवर्तन कर यूडीएफ की वापसी के संकेत हैं। तमिल में सबसे बड़ी मशीनरी सामने आई है, जहां अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके अपने पहले ही चुनाव में 98 से 120 के साथ बड़ा उलटफेर कर सकती है। पुडुचेरी में एनडीए के प्रवेश द्वार दिख रहे हैं। इन सबके बीच एक बात साफ है कि इस बार महिला किरदारों की केवल संख्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शक्ति उभर कर सामने आई हैं। ये भी पढ़ें: पिछली बार हुआ रद्द, अब और भी खास, अगले महीने यूरोप दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी, जानें क्या बन रहा है प्लान? महिलाओं की बढ़त: अर्थशास्त्र में बदलाव का संकेत पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में रिकॉर्ड 92.47 प्रतिशत मतदान की चर्चा के बीच सबसे अहम और प्रतिष्ठित महिलाओं की विशेष भागीदारी रही। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, दोनों चरण में महिलाओं ने न केवल बढ़त-चढ़ाकर मतदान किया, बल्कि प्रतिशत के अनुसार पुरुषों को भी पीछे छोड़ दिया। दूसरे चरण में महिला ओलंपिक का मतदान प्रतिशत 92.28 दर्ज किया गया, जबकि पुरुषों का यह आंकड़ा 91.07 प्रतिशत रहा। यानी महिलाओं ने लगभग 1.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ पुरुषों को पीछे छोड़ दिया। यह भले ही छोटा लगे, लेकिन तीन बड़े आधार वाले राज्य में इसका प्रभाव व्यापक और स्थिर हो सकता है। पहले चरण में भी यही रुझान देखने को मिला था. 23 अप्रैल को हुए मतदान में 92.69 प्रतिशत महिलाओं ने वोट डाले, जबकि पुरुषों की भागीदारी 90.92 प्रतिशत रही. यानि दोनों स्टेज में महिलाओं की भागीदारी लगातार अधिक रही। यह कोई संयोगवश नहीं, बल्कि एक स्थायी मनोनीत व्यवहार का संकेत है। इस रुझान का महत्व इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि पश्चिम बंगाल में कुल संख्या 6.81 करोड़ है। तीन बड़े वोटरों में अगर महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज्यादा हो, तो यह सीधे तौर पर असलम की दिशा तय करने की क्षमता है। अन्य राज्यों में भी महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान किया असम और पुडुचेरी ने भी अपना-अपना रिकॉर्ड तोड़ा। असम में 85.91 प्रतिशत और पुडुचेरी में करीब 90 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है, जो अब तक का सर्वोच्च पात्र है। असम विधानसभा चुनाव 2026 में रिकॉर्ड वोटिंग का मामला सामने आया है, जिसमें महिलाओं को एक बार फिर पुरुषों को पीछे छोड़ दिया गया। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कुल मतदान 85.91% आ रहा है, जो असम का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले 2016 में 84.67% और 2021 में 82.42% मतदान हुआ था। इस महिला बार की भागीदारी 86.50% रही, जो पुरुषों की 85.33% से अधिक है। दिलचस्प बात यह है कि 2021 में महिला मतदान 82.01% तक गिर गया था, लेकिन इस बार तेजी से उछाल देखने को मिला। तमिलनाडु में महिलाओं की भागीदारी अधिक तमिलनाडु में भी महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज्यादा रही, जहां 85.76 फीसदी महिलाओं ने वोट डाले, वहीं पुरुषों की हिस्सेदारी 83.57 फीसदी रही. 23 अप्रैल को तमिल में सभी 234 रिवार्ड्स की वोटिंग हुई, जहां कुल संख्या 5.73 करोड़ थी। उसी दिन पश्चिम बंगाल की 152 सीटों पर भी वोटिंग हुई, जहां गरीबों की संख्या 3.6 करोड़ थी। केरल विधानसभा चुनाव में औसत मतदान केरल विधानसभा चुनाव में औसत मतदान 78.23 प्रतिशत दर्ज किया गया है, वहीं चुनाव आयोग के आंकड़ों का गहन विश्लेषण बताता है कि इस चुनाव की असली कहानी महिलाओं के वोटों में कहां-कहां हुई है। केरल विधानसभा चुनाव 2026 में महिला झील ने इस बार लैंडस्केप एन्काउंटर कर डेक परिदृश्य को नया आयाम दिया है। चुनाव आयोग के मुताबिक, 80.86% महिलाओं ने मतदान किया, जबकि पुरुषों की भागीदारी 75.01% रही। लगभग 6 प्रतिशत का अंतर यह केवल अक्षर नहीं है, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संकेत है। कब घोषित किये जायेंगे चुनाव के नतीजे पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों तमिल, पुडुचेरी, केरल और असम के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किये जायेंगे। वोट पोल अपने-अपने दावे कर रहे हैं, लेकिन इस रिकॉर्ड पोल ने यह तय कर दिया है कि जनता अपने हक के लिए वोट जरूर करेगी। यह चुनाव केवल राजनीतिक सत्ता के लिए नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक भागीदारी के नए स्थापित करने के लिए भी याद किया जाएगा। विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत की राजनीति में अब एक नई शक्ति केंद्र आ गई है, जो केवल वोट नहीं डाल रही है, बल्कि सिद्धांतों की दिशा भी तय कर रही है। ये भी पढ़ें: विधानसभा चुनाव एग्जिट पोल: बैकलिट पोल में पिछड़ गया! केरल और बंगाल में भी गोदाम बनने के मिले संकेत, जानें पूरे आंकड़े

विधानसभा चुनाव एग्जिट पोल: बैकलिट पोल में पिछड़ गया! केरल और बंगाल में भी गोदाम बनने के मिले संकेत, जानें पूरे आंकड़े

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देश के 5 राज्यों के चुनाव के बाद एलेक्टिट पोल में वामपंथी छात्रों की स्थिति काफी खराब नजर आ रही है। जिन राज्यों में कभी वामपंथ की मजबूत पकड़ बनी रहती थी, वहां भी इस बार ताले दिख रहे थे। इन पांच राज्यों में वामपंथियों के लिए असल में सिर्फ दो ही जगहें अपेक्षित थीं केरल और पश्चिम बंगाल। केरल में लंबे समय से वामपंथ की सरकार बनी हुई है और पिनराई विजयन मुख्यमंत्री बने हुए हैं। पश्चिम बंगाल में लेफ्ट ने करीब 35 साल तक लगातार सरकार बनाई थी, इसलिए वहां भी एक ऐतिहासिक आधार बना हुआ है। इस बार के इकोनॉमिक पोल में पश्चिम बंगाल में लेफ्ट की स्थिति बेहद खराब दिख रही है। पोल ऑफ पोल्स के अनुसार वहां वामपंथियों को केवल 2 धार्मिक स्थलों के दर्शन हो रहे हैं। 2016 के बाद से ही बंगाल में लेफ्ट कॉन्स्टैंट का प्रदर्शन जारी है और इस बार भी वही ट्रेंड रिलीज हो रही है। ये भी पढ़ें: तमिलनाडु में टीवीके, केरल में बीजेपी और किस बंगाल में कांग्रेस का सूपड़ा साफ? एक्जालिट पोल में कहां-कहां जीरो का खतरा केरल में चुनौती के लिए छोड़ दिया केरल में भी लेफ्ट की तस्वीर अच्छी नहीं दिख रही है। जहां पहले लेफ्ट की सरकार बन रही थी, वहां अब एगलिट पोल के अनुसार कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन आगे नजर आ रहा है। अनुमान है कि केरल में लेफ्ट को करीब 59 जॉइंट मिल्स मिल सकते हैं, जबकि कांग्रेस गठबंधन को करीब 77 जॉइंट्स मिल्स दिख रहे हैं, सरकार जॉइन्ट्स के साइन मिल रहे हैं। हालाँकि, अगर ये एलेक्टिट पोल सही साबित होता है तो इसका सबसे बड़ा मतलब ये होगा कि अपने मजबूत गढ़ केरल में लेफ्ट प्ले भी सत्ता खो सकते हैं। पहले बंगाल और त्रिपुरा जैसे राज्यों में लेफ्ट की पकड़ खत्म हो गई है, और अब केरल में भी स्थिति खराब दिख रही है। अर्थशास्त्र पोल क्या संकेत कर रहे हैं? एक्जिट पोल यह संकेत कर रहे हैं कि देश में वामपंथ की राजनीति पहले की तुलना में काफी महत्वपूर्ण जा रही है। यदि यही प्रवृत्ति अंतिम वास्तुशिल्प में भी दिखती है, तो आने वाले समय में वामपंथियों के सामने अपनी जगह फिर से मजबूत करने की बड़ी चुनौती होगी। ये भी पढ़ें: डीआरडीओ और नौसेना की बड़ी फिल्म, नेवल एंटी-शिप मिसाइल का सफल परीक्षण, जानिए क्या है द्वीप?

पश्चिम बंगाल चुनाव: पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद रिकॉर्ड मतदान, पहली बार मतदान 92 फीसदी के पार

पश्चिम बंगाल चुनाव: पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद रिकॉर्ड मतदान, पहली बार मतदान 92 फीसदी के पार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार रिकॉर्ड मतदान ने इतिहास रच दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अनुसार, राज्य में पहले और दूसरे चरण के बाद पहली बार मतदान का आंकड़ा 92 प्रतिशत के पार है। पहले चरण में 23 अप्रैल को 91.78 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि दूसरे और अंतिम चरण में 29 अप्रैल को 91.71 प्रतिशत मतदान हुआ था। विद्युत आयोग के अनुसार, यह अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है, जो 2011 के 84.72 प्रतिशत के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ गया है। बंगाल चुनाव में बम्पर वोट इस चुनाव में खास बात यह रही कि महिला भागीदारी में पुरुषों से ज्यादा रही। महिलाओं ने करीब 93.24 प्रतिशत मतदान किया, जबकि पुरुषों का प्रतिशत 91.74 रहा. राज्य में मुख्य मुकाबला कैथोलिक कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच देखा गया। दोनों ने ही भारी मतदान को अपने पक्ष में सम्राट का संकेत बताया है। दक्षिण बंगाल के प्रमुख क्षेत्र कोलकाता, हावड़ा, हुगली, नादिया और उत्तर-दक्षिण 24 परगना में लंबी कतारें, राजनीतिक तनाव और चिटपुट हिंसा के बीच झड़प हुई। ये इलाक़ा पर्यटन स्थल से बेहद पुराने माने जाते हैं। नॉर्दर्न बनाम बीजेपी का मुकाबला वोटिंग के दौरान कुछ जगहों पर स्टॉकहाउस, स्टॉकहाउस, स्टॉकहोम और चार्ज-प्रत्यारोप की घटनाएं भी सामने आईं। ममता बनर्जी ने भाजपा पर केंद्रीय विचारधारा के समर्थकों का आरोप लगाया, जबकि नामांकन के नेता शुभेंदु अधिकारी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे “हतशा” बताया। कुल मिलाकर, रिकॉर्ड मतदान से यह साफ हो गया है कि इस बार का चुनाव बेहद कठिन और ठंडा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इतनी बड़ी हिस्सेदारी सत्ता परिवर्तन का संकेत बिंदु है या यूक्रेन कांग्रेस अपने शेयर बाजार में रहता है। ये भी पढ़ें: बंगाल के इन दो वोट पोल में भाजपा हुई साफ, ममता बनर्जी की फिर से बनी रही सरकार

पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल 2026 लाइव: एलेक्टिट पोल के सर्वे से पहले अभिषेक बनर्जी का बड़ा दावा, कहा- टीएमसी 2021 से भी ज्यादा दर्शक जीतेंगे

पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल 2026 लाइव: एलेक्टिट पोल के सर्वे से पहले अभिषेक बनर्जी का बड़ा दावा, कहा- टीएमसी 2021 से भी ज्यादा दर्शक जीतेंगे

पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल 2026 लाइव: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे शाम 6:30 बजे जारी होंगे। यानी कुछ घंटे बाद की तस्वीरें लगभग साफ हो जाएंगी कि इस बार राज्य में किसकी सरकार बनने की संभावना है। हालाँकि, यह एकॉजिट पोल सर्वे एक अनुमान है। वास्तविक नतीजे 4 मई को वोटों की गिनती के बाद ही साफ होगा। इस बार पश्चिम बंगाल में दो स्टेज में वोटिंग हुई थी. पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को हुआ था, जिसमें 152 चरण पर वोट डाले गए थे। इस चरण में रिकॉर्ड 93.2 प्रतिशत वोटिंग हुई, जिसमें लोगों की भारी भागीदारी शामिल है। इसके बाद दूसरे चरण का मतदान आज 29 अप्रैल 2026 को जारी है। एग्जिट पोल सिर्फ अनुमान, अंतिम नतीजे नहीं आते एग्जिट पोल में सिर्फ अनुमान होते हैं, असली नतीजे नहीं। कई बार ये सही अनुमान लगते हैं और कई बार गलत भी हो जाते हैं, इसलिए अंतिम और वास्तविक परिणाम 4 मई को पहली बार के दिन साफ ​​ही होंगे। इस तरह के एग्जिट पोल लोगों को चुनाव के बाद एक शुरुआती तस्वीर जरूर देते हैं, लेकिन असली फैसला तीसरी बार के बाद ही सामने आता है। कुल 294 विधानसभा के एकॉजिट पोलहोगेजारी अगर शुरुआत की बात करें तो पश्चिम बंगाल में कुल 294 शामिल हैं। किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए कम से कम 148 टिकट की जरूरत होती है। 2021 विधानसभा चुनाव में क्या रहे थे नतीजे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में कुल 294 सीटों पर मतदान हुआ। इस चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली लोकतांत्रिक कांग्रेस (टीएमसी) को शानदार जीत हासिल हुई। पार्टी ने लगातार तीसरी बार 213 मजबूत पकड़ बनाई और राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ दी। वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इस चुनाव में मुख्य विपक्षी पार्टी बनकर उभरी है. बीजेपी ने 77 वीं सदी की शुरुआत की, जो उनकी एक बड़ी उपलब्धि थी।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: बंगाल की जिस सीट से ममता बनर्जी की विधायकी मैदान में उतरी, वहां घंटों में हुआ खेल, जानें कितने पड़े वोट

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: बंगाल की जिस सीट से ममता बनर्जी की विधायकी मैदान में उतरी, वहां घंटों में हुआ खेल, जानें कितने पड़े वोट

पश्चिम बंगाल के 142 विधानसभा क्षेत्रों में दूसरे चरण की वोट चल रही है। सबसे बड़ी भवानीपुर सीट है, जहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही हैं, उस सीट पर बीजेपी के सहयोगी शुभेंदु अधिकारी से टक्कर मिल रही है। चुनाव आयोग ने सुबह 9 बजे तक वोटिंग का वोट जारी किया है, जिसके मुताबिक 17.08 बजे भवानीपुर सीट पर वोटिंग हो गई है और पोलिंग बूथों पर लंबी-लंबी लाइनें लग गई हैं। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर लगाया आरोप ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि पुलिस सुपरवाइजर उद्योगपति पर नाच रहे हैं. उन्होंने कहा कि वोट वाले पुलिस और सुरक्षा बल नहीं, बल्कि जनता है। बंगाल के सीएम ने कहा, ‘चुनाव आयोग मित्र हमें परेशान कर रहा है. हमारे यहां कोर्ट के खिलाड़ियों का नोटिस भेजा गया है, फिर भी अनगिनत बाहरी पर्यवेक्षकों को यहां लाया गया है. ये स्पष्ट रूप से भाजपा के समर्थकों पर नाच रहे हैं। चक्रबेरिया जाइए, आप खुद देखें कि हमारे सभी पोस्ट हटाए गए हैं। क्या चुनाव इसी तरह के उपकरण चलते हैं? वोट वाले पुलिस और सुरक्षा बल नहीं, बल्कि जनता है। ये लोग बाहर से कुछ लोगों को पसंद आते हैं, और ये लोग झील में डर और आतंक फैलाते हैं, इसके अलावा कुछ नहीं कर रहे हैं। ये जल्द ही चले जायेंगे.’ ये भी पढ़ें- ‘सब बीजेपी के गठन पर नाच रहे’, बंगाल में वोटों के बीच उग्र हुई ममता बनर्जी, जानें क्या लगाया आरोप किस सीट पर कितने प्रतिशत हिस्सेदारी है? चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, सुबह 9 बजे तक तेहट्टा में 18.20, टॉलीगंज में 17.42, उदयनारायणपुर में 17.35, उलुबेरिया दक्षिण में 17.60, उलुबेरिया पूर्व में 16.98, उलुबेरिया उत्तर में 17.70, उत्तरपाड़ा में 18.55, श्यामपुर में 17.48, सिंगूर में 20.10, सोनारपुर दक्षिण में 15.74, सोनारपुर उत्तर में 17.11, श्रीरामपुर में 19.72, स्वरूपनगर में 17.95, तारकेश्वर में 20.12, सागर में 19.51 प्रतिशत बढ़त हुई है। वहीं संदेशखाली में 16.68, संरानगर में 17.59, सप्तग्राम में 20.57, सतगछिया में 17.79, शिबपुर में 17.43 फीसदी वोटिंग हुई है। वहीं आरजी कर स्टार की मां जिस पानीहाट सीट से चुनावी मैदान में हैं, उस सीट पर 28.24 प्रतिशत वोटिंग हुई है। ये भी पढ़ें- ‘ठीक से काम नहीं कर रही ईवीएम’, बंगाल में बीजेपी के बीच वोट का दावा ममता का शुभेंदु अधिकारी से मुकाबला शुभेंदु अधिकारी वही नेता हैं, जो 2021 के चुनाव में सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे और उन्होंने नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को चुनाव में हरा दिया था। इस बार देश की नजरें भवानीपुर सीट पर हैं क्योंकि इस बार शुभेंदु दो दिवसीय चुनाव लड़ रहे हैं। नंदीग्राम और भवानीपुर. ममता बनर्जी पहले नंदीग्राम सीट से ही चुनाव लड़ती थीं, लेकिन पिछले चुनाव में हार के बाद उन्होंने सिर्फ भवानीपुर से ही चुनाव लड़ने का फैसला किया है। (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्रेकिंग न्यूज(टी)एबीपी न्यूज(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल(टी)सुवेंदु अधिकारी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)ममता बनर्जी न्यूज(टी)ममता बनर्जी वोटिंग(टी)भवानीपुर सीट वोटिंग(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)बंगाल भगत(टी)शुभेंदु अधिकारी(टी)भवानीपुर सीट वोटिंग

ED के आने से पहले, I-PAC का राजस्व 35% कम हो गया: भारत का चुनाव विघ्नकर्ता कैसे अलग हुआ | चुनाव समाचार

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आखरी अपडेट:28 अप्रैल, 2026, 08:00 IST अपने स्वयं के वित्तीय रिकॉर्ड के अनुसार, I-PAC ने एक तीव्र वित्तीय उलटफेर देखा क्योंकि इसकी पिछली वृद्धि 2025 में इसके कोलकाता कार्यालय में छापे से पहले ही गिरावट में आ गई थी। I-PAC की कहानी इस क्षण में किसी अभियान के साथ नहीं, बल्कि संख्याओं के एक समूह के साथ प्रवेश करती है जो कठिन प्रश्न खड़े करते हैं। (छवि: न्यूज18/फ़ाइल) पश्चिम बंगाल में शोर और दृश्यमान चुनावी मुकाबले से परे, पृष्ठभूमि में एक और महत्वपूर्ण कथा सामने आ रही है – वह जो उम्मीदवारों के बारे में कम और उस मशीनरी के बारे में अधिक बोलती है जिसने एक बार दावा किया था कि वह चुनावी नतीजों की पटकथा लिख ​​सकती है। I-PAC की कहानी इस क्षण में किसी अभियान के साथ नहीं, बल्कि संख्याओं के एक समूह के साथ प्रवेश करती है जो कठिन प्रश्न खड़े करते हैं। चूंकि प्रवर्तन निदेशालय ने I-PAC – या इंडियन PAC कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड की जांच जारी रखी है, क्योंकि यह 2015 में कंपनी रजिस्ट्रार, कोलकाता के साथ पंजीकृत है। न्यूज18 विशेष पहुंच प्राप्त की और कंपनी की नवीनतम वित्तीय स्थिति का विश्लेषण किया। रिकॉर्ड के अनुसार, इसमें तीव्र वित्तीय उलटफेर देखा गया क्योंकि इसके पहले विकास में 2025 में गिरावट आई थी, यहां तक ​​कि इसके कोलकाता कार्यालय में छापे से पहले भी। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के साथ दायर वित्त वर्ष 2024-25 के लिए I-PAC के ऑडिटेड लाभ और हानि विवरण के अनुसार, इसने 31 मार्च, 2025 को समाप्त वर्ष के लिए एक नाटकीय वित्तीय उलटफेर की सूचना दी है, जो 18.32 करोड़ रुपये के लाभ से 2.42 करोड़ रुपये के शुद्ध घाटे तक पहुंच गया है। इसके संचालन से राजस्व में 35 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई, जो वित्त वर्ष 2014 में 206.59 करोड़ रुपये से तेजी से गिरकर वित्त वर्ष 2015 में केवल 133.48 करोड़ रुपये रह गई – एक वित्तीय वर्ष के भीतर शीर्ष-पंक्ति आय में लगभग 73 करोड़ रुपये की गिरावट। टॉपलाइन ढह गई, लागत स्थिर रही कॉर्पोरेट मामलों के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गिरावट का पैमाना I-PAC के मुख्य व्यवसाय संचालन में गंभीर व्यवधान की ओर इशारा करता है। तनाव शीर्ष रेखा से अधिक गहरा होता है। अकेले वित्त लागत 62.28 करोड़ रुपये है, जो कुल राजस्व का लगभग 46 प्रतिशत है। भले ही आय में तेजी से गिरावट आई हो, खर्चों में केवल 27.5 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे लागत संरचना उजागर हो गई है जो संचालन के सिकुड़ते पैमाने के साथ तालमेल बिठाने में विफल रही है। जो कंपनी कभी अपनी कार्यकुशलता पर गर्व करती थी, अब वह अपनी ही वास्तुकला के कारण दब गई है। वित्त वर्ष 2015 में कर्मचारी लाभ व्यय बढ़कर 13.65 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह 4.61 करोड़ रुपये का नकारात्मक आंकड़ा था – यह पूर्व-वर्ष के महत्वपूर्ण उलटफेर को दर्शाता है जिसने वित्त वर्ष 2014 की पुस्तकों को कृत्रिम रूप से प्रभावित किया था। प्रति शेयर आय नकारात्मक (0.02) होने, शून्य कर देयता के कारण कोई वसूली योग्य लाभ नहीं होने और 5 सितंबर, 2025 को लेखा परीक्षकों के हस्ताक्षर करने के साथ, I-PAC को अब अपने ऋण का पुनर्गठन करने, राजस्व में गिरावट को रोकने और निवेशकों का विश्वास बहाल करने के लिए बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है। 31 मार्च, 2025 को समाप्त अवधि के लिए कंपनी के ऑडिट किए गए नकदी प्रवाह विवरण के अनुसार, कंपनी ने 2.21 करोड़ रुपये का शुद्ध परिचालन नकदी प्रवाह उत्पन्न किया – जो वित्त वर्ष 24 में 8.95 करोड़ रुपये से तेज गिरावट है। ऑपरेटिंग इंजन अभी भी चल रहा है, लेकिन मुश्किल से। निवेश के मोर्चे पर, कंपनी ने 1.03 करोड़ रुपये का शुद्ध बहिर्वाह दर्ज किया, जो मुख्य रूप से मौजूदा व्यापार निवेश में लगाए गए 2.05 करोड़ रुपये और लंबी अवधि के ऋण और अग्रिमों से प्राप्त 1.05 करोड़ रुपये की आंशिक भरपाई थी। अचल संपत्ति की खरीदारी न्यूनतम 0.04 करोड़ रुपये थी – जो पूंजीगत व्यय पर लगभग पूर्ण रोक का संकेत है, जो संकट में एक क्लासिक रक्षात्मक मुद्रा है। जांच के अधीन, फिर भी ज़मीन पर यह वित्तीय तनाव गहन जांच के साथ है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आईपीएसी से जुड़ी संस्थाओं में अपनी जांच जारी रखी है। कंपनी के तीन निदेशकों में से एक को एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया है, जबकि दूसरे पर प्रवर्तन छापे मारे गए हैं – ऐसे घटनाक्रम ने परिचालन में गिरावट के समय कानूनी और प्रतिष्ठित दबाव बढ़ा दिया है। और फिर भी, बैलेंस शीट कमजोर होने और निगरानी सख्त होने के बावजूद, I-PAC की छाप जमीन से पूरी तरह से फीकी नहीं हुई है, खासकर पश्चिम बंगाल में। आधिकारिक तौर पर, बंगाल में आईपीएसी से जुड़े ऑपरेशन रोक दिए गए हैं। अनौपचारिक रूप से, राजनीतिक हलकों के कई खातों से पता चलता है कि डेटा टीमें कम, कम दिखाई देने वाली क्षमता में सक्रिय रहती हैं। बूथ स्तर के इनपुट को ट्रैक किया जाना जारी है। मैसेजिंग को अभी भी परिष्कृत किया जा रहा है. जैसे-जैसे राज्य पहले चरण से इस निर्णायक चरण में आगे बढ़ता है, पिछले दशक में निर्मित बुनियादी ढांचा बिना किसी आरोप के, बिना दृश्यता के काम करता हुआ प्रतीत होता है, लेकिन प्रभाव के बिना भी नहीं। इस क्षण को समझने के लिए, इसे I-PAC के स्वयं के विकास के आर्क के सामने रखना आवश्यक है। व्यवधान से तनाव तक: I-PAC ARC 2014 में, प्रशांत किशोर के नेतृत्व में, I-PAC ने डेटा, स्केल और परिशुद्धता पर आधारित चुनाव प्रचार का एक नया व्याकरण पेश करके खुद को एक विघटनकारी के रूप में स्थापित किया। यह सिर्फ एक अभियान परामर्श नहीं था, यह एक दावा था कि राजनीति को व्यवस्थित किया जा सकता है। लेकिन उस दावे को विरोध का सामना करना पड़ा। राष्ट्रीय मंच से लेकर बिहार तक शुरुआती सफलताओं के बाद अन्य जगहों पर असमान नतीजे आए। पारंपरिक राजनीतिक संरचनाएँ बाहरी रणनीतिकारों को नियंत्रण देने में अनिच्छुक साबित हुईं। सत्ता तक पहुंचने के लिए एक मानकीकृत, डेटा-संचालित मार्ग का विचार क्षेत्रीय राजनीति, नेतृत्व अहंकार और मजबूत नेटवर्क की जटिलताओं के खिलाफ चला। हालाँकि,

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: बंगाल के जिन 5 में सबसे ज्यादा वोट, वहां मुस्लिम, जो बना-बिगाड़ हो सकता है ममता का खेल?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: बंगाल के जिन 5 में सबसे ज्यादा वोट, वहां मुस्लिम, जो बना-बिगाड़ हो सकता है ममता का खेल?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के बंपर वोट ने इतिहास रच दिया है। पहले चरण की वोटिंग में 16 अप्रैल को 152वें चरण में गुरुवार (23) को धुआंधार वोटिंग हुई। चुनाव आयोग ने बताया कि बंगाल में पहले चरण में 92.88 फीसदी वोटिंग हुई. देश की आजादी के बाद पहली बार बंगाल में इतनी वोटें हुई हैं। हम आपको बंगाल के उन 5 प्रतिद्वंद्वियों के बारे में बता रहे हैं, जिन पर सबसे ज्यादा वोटिंग हुई और उन 5 प्रतिद्वंद्वियों पर कितने मुस्लिम वोटर हैं। सीतालकुची सीट कुटज बिहार जिले में सीतालकुची सीट स्टेस्ट विट एससी के लिए स्थित है। इस सीट पर पहले चरण की सभी पोस्टों से अधिक वोट हुई है। यहां करीब 97.53 प्रतिशत लोगों ने अपने पोर्टफोलियो का इस्तेमाल किया है। सीतालकुची में ज्वालामुखीय जाति के बहुमत हैं, अनुपात संख्या 63.59 प्रतिशत है, जबकि मुस्लिम आबादी 26.10 प्रतिशत है। यहां पहले भी खूबसूरत मूर्तियां रहती हैं। भगवानगोला सीट भगवानगोला विधानसभा सीट मुर्शिदाबाद जिले में स्थित है, जोकी हमेशा से यहीं रहता है। भगवानगोला सीट पर इस बार 96.95 फीसदी वोटिंग हुई है। इस सीट पर 85 प्रतिशत के करीबी मतदाता मुस्लिम हैं, जबकि 14 प्रतिशत के करीबी हिंदू और अन्य समुदाय के मतदाता हैं। ये भी पढ़ें- बंगाल में 92% तो तमिलनाडु में 85% वोटिंग! बम्पर वोट के बारे में क्या, बेपरवाह मत के बारे में मत पूछो असर? रघुनाथगंज सीट रघुनाथगंज विधानसभा सीट मुर्शिदाबाद जिले के अंतर्गत आती है। इस सीट पर भारी वोटिंग हुई है. चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, यहां 96.90 फीसदी वोटिंग हुई है, जोकी 152 फीसदी में दूसरे नंबर पर है. चाणक के अनुसार, इस विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम आबादी करीब 80 प्रतिशत है। मेकलीगंज सीट कुटज बिहार जिले के मेकलीगंज सीट स्टॉक रेट के लिए कार्यालय है। इस सीट पर 96.87 प्रतिशत वोटिंग हुई है। यहां अगर मुस्लिम वोटर्स की बात करें तो उनकी संख्या 49,371 है यानी कुल वोटर्स का आंकड़ा 22.80 फीसदी के करीब है. यहां सबसे ज्यादा संख्या में एससी वोटर्स हैं, अनुपातिक संख्या एक लाख 41 हजार है, जोकी करीब 65 फीसदी हैं. ये भी पढ़ें- हाथ में DSLR कैमरा, आंखों पर काला चश्मा, बंगाल चुनाव के बीच नाव से मोदी नेगली में किया प्रदर्शन रानीनगर सीट रानीनगर विधानसभा सीट मुर्शिदाबाद जिले में स्थित है, जोकी सामान्य सीट है। पहले चरण की वोटिंग में इस सीट पर 96.81 फीसदी वोटिंग हुई है। रानीनगर सीट मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्र है। रानीनगर क्षेत्र में करीब 81 गरीब मुस्लिम वोटर हैं, जबकि गरीब जाति के लोग 7.90 प्रतिशत हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)ममता बनर्जी(टी)बंगाल पहले चरण का मतदान(टी)पश्चिम बंगाल मतदान प्रतिशत(टी)वोटिंग में शीर्ष 5 सीटें(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)बंगाल की 5 सबसे प्रमुख लोकप्रियता वाली लोकप्रियता(टी)बंगाल पहला चरण

पश्चिम बंगाल चुनाव: हाथ में डीएसएलआर कैमरा, आंखों पर काला चश्मा, बंगाल चुनाव के बीच नाव से मोदी ने हुगली में किया उद्घाटन

पश्चिम बंगाल चुनाव: हाथ में डीएसएलआर कैमरा, आंखों पर काला चश्मा, बंगाल चुनाव के बीच नाव से मोदी ने हुगली में किया उद्घाटन

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कोलकाता और वहां हुगली नदी के तट पर कुछ समय के लिए मतदान हुआ। इस दौरान उन्होंने मां गंगा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और बंगाल के लोगों के लिए अपना संदेश साझा किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा कि हर बैल के लिए गंगा का बहुत महत्व है। उन्होंने कहा कि गंगा सिर्फ एक नदी नहीं है, बल्कि यह बंगाल की आत्मा में बसती है। इसका पवित्र जल एक ऐसी सभ्यता की भावना को अपने में समेटे हुए है, जो सदैव जीवित रहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि आज सुबह जब उन्होंने हुगली नदी के तट पर शांति स्थापित की, तो उनके लिए मां गंगा का रथ धारण करने का एक खास मौका था। इस दौरान उन्हें नाविकों से मिलने का मौका मिला,प्रामाणिक श्रम और लग्न की उन्होंने जिम्मेदारी संभाली। साथ ही उन्होंने सुबह टहलने वाले लोगों से भी बातचीत की और उनके जीवन के बारे में जाना। प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल के विकास और वहां के लोगों की खुशहाली के लिए काम करने के अपने संकल्प को भी सुनिश्चित करने के लिए यह योजना बनाई। उन्होंने कहा कि राज्य के उज्जवल भविष्य के लिए सरकार लगातार प्रयास करती रहेगी। यह दौरा ऐसे समय पर हुआ जब जब राज्य में तानाशाही बनी। ऐसे में प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम में लोगों से जुड़ना और अपनी-अपनी बात को शामिल करना एक अहम हिस्सा माना जा रहा है। प्रत्येक बंगाली के लिए गंगा का बहुत विशेष स्थान है। कोई कह सकता है कि गंगा बंगाल की आत्मा से होकर बहती है। उसका दिव्य जल संपूर्ण सभ्यता की शाश्वत भावना को धारण करता है। आज सुबह कोलकाता में, मैंने हुगली नदी के तट पर कुछ समय बिताया, और… pic.twitter.com/I3Y0gsFl3E -नरेंद्र मोदी (@नरेंद्रमोदी) 24 अप्रैल 2026 ये भी पढ़ें: समझाया: बंगाल में 92% तो तमिल में 85% मतदान! बम्पर वोट के बारे में क्या, बेपरवाह मत के बारे में मत पूछो असर? पश्चिम बंगाल में पहले चरण के चुनाव में बम्पर वोट पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में इस बार कुछ ऐसा हुआ, जिसने सबका ध्यान खींच लिया। 152 पर करीब 92.6 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई है, जो अब तक सबसे ज्यादा बताई जा रही है। तीन बड़े स्तर पर लोगों के वोट के लिए अपने आप में एक अहम संकेत माना जा रहा है। इस स्थिति की तुलना पहले भी की जा रही है। साल 2011 में भी पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड 85.55 फीसदी मतदान हुआ था. उस समय के चुनाव में राज्य की राजनीति पूरी तरह से बदल गयी थी। 34 साल तक सत्ता में रही वामपंथी सरकार को हार का सामना करना पड़ा और ममता बनर्जी के नेतृत्व में कांग्रेस सत्ता में आई थी। ये भी पढ़ें: ‘मुस्लिम घरों और मस्जिदों को गिराने से क्या निकलेगा’, गुजरात में गरीबे सोलंकी ने कहा- बाबा साहेब के संविधान से हटे मुज़ाहिर (टैग्सटूट्रांसलेट)हुगली नदी(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)पीएम मोदी(टी)पीएम मोदी कोलकाता(टी)हुगली नदी(टी)बंगाल में गंगा का महत्व(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)मोदी का भाषण कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी) कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)के कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)के कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)को कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)को कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोल काटा(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोल काटा(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)कोलकाता(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)कोलकाता (टी)हुगली नदी(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी)कोलकाता(टी) पीएम मोदी(टी) पीएम मोदी कोलकाता(टी)हुगली नदी(टी)बंगाल में गंगा महत्वपूर्ण का(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)मोदी कोलकाता कोलकाता

बंगाल चुनाव को लेकर ECI की सख्ती, 20 साल में पहली बार चुनाव अधिकारी ने किया हवाई सर्वेक्षण

बंगाल चुनाव को लेकर ECI की सख्ती, 20 साल में पहली बार चुनाव अधिकारी ने किया हवाई सर्वेक्षण

पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर चुनाव आयोग (ईसीआई) ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। चुनाव आयोग के दस्तावेज़ के अनुसार सभी बूथों के प्रधान अधिकारी को यह सुनिश्चित करना है कि दस्तावेज़ पर सभी बूथों के बटन स्पष्ट रूप से दिखाई दें। किसी भी अभ्यर्थी के बटन को टेप, गोंद या किसी अन्य सामग्री से ढका नहीं जाना चाहिए। म्युचुअल से चुराया हुआ महंगा- इलेक्शन कमीशनचुनाव आयोग द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि बैलेट यूनिट के उम्मीदवार बटन पर वोट की गोपनीयता बनाए रखें और किसी भी तरह का कोई रंग, हिस्सेदारी, पर फोम या अन्य रासायनिक पदार्थ का उपयोग न करें। ऐसे किसी भी इवेंट पर प्रीसाइडिंग ऑफिसर, तत्काल सेक्टर ऑफिस या रिटर्निंग ऑफिसर को सूचित किया जाएगा। स्टॉक में आगे कहा गया है कि ऐसे सभी मामलों को स्टॉक से स्टॉक / हेस्टस्कैप की श्रेणी में माना जा सकता है, जो एक स्टॉकअप अपराध है। ऐसे किसी भी मामले में ई.सी.आई. पुनर्मतदान का आदेश दिया गया जिसमें आपराधिक कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। 20 साल में पहली बार चुनाव अधिकारी का हवाई सर्वेक्षणराज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने मालदा, उत्तर दिनाजपुर, कुश बिहार और मेदिनीपुर का हवाई सर्वेक्षण के लिए एयरफोर्स के हेलीकॉप्टरों का चुनाव किया। बता दें कि पिछले 20 सागरों में यह पहली बार है जब मुख्य चुनाव अधिकारी ने इस तरह का हवाई निरीक्षण किया है। मार्च कर रहे हैं अर्धसैनिक सेनाओं के जवानउन्होंने स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्वाचनों की समीक्षा की। चुनाव के दौरान पर्यवेक्षण को मजबूत करने के लिए फ्लाइंग स्क्वाड की तस्वीरों में कैमरे लगाए गए हैं, प्रोटोटाइप लाइव स्टूडियो सीधे नियंत्रण कक्ष में जारी किया जा रहा है। अर्धसैनिक आतंकवादियों के जवान बख्तरबंद टिकटें पूरे राज्य में टाइगर मार्च कर रहे हैं, इसलिए मतदान के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो सके। पश्चिम बंगाल की 152 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है, जबकि चुनाव प्रचार 21 अप्रैल को हुआ था। चुनाव आयोग के अनुसार राज्य में अधिसूचना पर प्रतिबंध लागू किया गया है। पहले चरण में 20 अप्रैल से ही राज्य में शराब की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। ये भी पढ़ें पहलगाम हमले की सालगिरह: ‘भारत आतंकवादियों के आगे कभी नहीं झुकेगा’, पहलगाम हमलों की घंटी पर पीएम मोदी ने पाकिस्तान को दिया अल्टीमेटम (टैग्सटूट्रांसलेट)ईसीआई(टी)दिशानिर्देश(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)मतदान(टी)विधानसभा सीटें(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)ई सीआई(टी)विधानसभा चुनाव(टी)मतदान(टी)मतदान(टी)हवाई सर्वेक्षण(टी) सुरक्षा

बंगाल में अगले कुछ दिन नहीं चले दोपहिया वाहन, डबलने पर भी अंकित; मतदान से पहले चुनाव आयोग के सख्त आदेश

बंगाल में अगले कुछ दिन नहीं चले दोपहिया वाहन, डबलने पर भी अंकित; मतदान से पहले चुनाव आयोग के सख्त आदेश

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में दोपहिया समाज पर प्रतिबंध लगाया है। इसके साथ ही इंडिपेंडेंट और प्लास्टिक वोटिंग के लिए बाइक रेल्स पर भी रोक लगा दी गई है। साथ ही रात के समय भी मूवी की लिमिट दी गई है। इसके साथ ही गाड़ियों पर डबल सीट भी लगाई गई है। चुनाव आयोग के यह सख्त निर्देश 21 अप्रैल मंगलवार से लागू कर दिये गये हैं। मतदान के दो दिन पहले यह फैसला लिया गया चुनाव आयोग ने पहले चरण के सभी 152 सीटों पर नामांकन को लागू कर दिया है. 23 अप्रैल को राज्य में पहले चरण का मतदान होना है। साथ ही आयोग ने अपने निर्दिष्ट में स्पष्ट किया है कि विषम परिस्थिति को ठीक करने के लिए शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक मोटरबाइक पर रोक रहेगी। बाइक रैली पर पूर्ण प्रतिबंध। इसके अलावा सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक पीछे बैठने पर भी प्रतिबंध रहेगा। इफ़ॉफ़ परिवार के साथ वोट करने वालों के लिए छूट बनी रहेगी। मुख्य इलेक्ट्रॉनिक्स अधिकारी के कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, वोटिंग से दो दिन पहले लेकर वोटिंग दिवस तक मोटरसाइकिल के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदियां दी गई हैं। आयोग का कहना है कि यह कदम पूरी तरह से वाणिज्यिक, मादक और बिना दवा या दबाव के लिए चुना गया है। प्रचार का शोर थमते ही ये पाबंदियां लागू होती हैं। दिन के समय के भी नियम लागू होते हैं सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक बाइक पर दो लोगों के बैठने की जगह (पिलियन राइडिंग) की लंबाई नहीं होगी। ताकि भीड़ टूट जाए और तनावग्रस्त हो जाए। हालाँकि, मेडिकल, फैमिली नीड या बच्चों को स्कूल कम्युनिकेशंस में शामिल होने की आवश्यकता को सीमित कर दिया गया है। मतदान के दिन भी नियम लागू नहीं. परिवार के साथ जरूरी काम या वोटिंग के लिए कुछ राहत दी गई है। आयोग ने साफ किया है कि यदि किसी को विशेष परिस्थिति में छूट मिलनी चाहिए तो स्थानीय पुलिस स्टेशन से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। प्रशासन और पुलिस की निगरानी में इन नियुक्तियों का निरीक्षण और हर स्तर पर निगरानी को कहा गया है। 16 आदर्श की 152 पर मतदान होना है बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को 16 अप्रैल को 152वें क्वार्टर पर होगा। इनमें उत्तर बंगाल के आठ, दक्षिण बंगाल के तीन और जंगलमहल क्षेत्र के पांच जिले शामिल हैं। मुर्शिदाबाद की 22, कुशबिहार की नौ, जलपाईगुड़ी की सात, अलीपुरद्वार की पांच, क्लिंपोंग की एक, दार्जिलिंग की पांच, उत्तर दिनाजपुर की नौ, दक्षिण दिनाजपुर की छह, मालदा की 12, बीरभूम की 11, पश्चिम बुद्धमान की नौ, पूर्व मेदिनीपुर की 16, पश्चिम मेदिनीपुर की 15, ओझाग्राम की चार, पुरुलिया की नौ और बांकुड़ा की 12 देवता शामिल हैं. पहले चरण में कुल आलीशान उम्मीदवार भाग्य आजमा रहे हैं पहले चरण में कुल 1,478 प्रतियोगिता मैदान हैं। फ्लोरिडा की कुल संख्या तीन करोड़ 60 लाख 77 हजार 171 है, जिसमें एक करोड़ 84 लाख 99 हजार 496 पुरुष, एक करोड़ 75 लाख 77 हजार 210 महिलाएं और 465 ट्रांसजेंडर शामिल हैं। यह भी पढ़ें: बंगाल चुनाव 2026: नंदीग्राम में बंटा पैसा! टीएमसी नेताओं की गिरफ्तारी पर बीजेपी की याचिका (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)ईसी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)पहले चरण का मतदान(टी)चुनाव आयोग ने बाइक चलाने पर प्रतिबंध लगाया(टी)बंगाल में देर रात बाइक चलाने पर प्रतिबंध(टी)बंगाल में बाइक रैली पर प्रतिबंध(टी)ताजा समाचार अपडेट(टी)हिंदी चुनाव अपडेट समाचार(टी)अपडेट समाचार(टी)बंगाल समाचार(टी)ईसी नोटिस(टी)बंगाल में कानून और व्यवस्था(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)ईसी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)पहले चरण की वोट(टी)चुनाव आयोग ने देर रात बाइक रैली पर रोक लगाई(टी)बंगाल में बाइक रैली पर रोक(टी)ताजा ख़बरें(टी)हिंदी चुनाव समाचार(टी)अपडेट न्यूज़(टी)बंगाल समाचार(टी)ईसी नोटिस(टी)बंगाल में कानून-व्यवस्था