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विधानसभा चुनाव 2026: महिलाओं के साथ, सत्ता की चाबी उनके पास, भागीदारी के सवालों के बीच महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ा

विधानसभा चुनाव 2026: महिलाओं के साथ, सत्ता की चाबी उनके पास, भागीदारी के सवालों के बीच महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ा

पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के एनोटेशन पोल अब गरमागरम तस्वीरों को आकार देने लगे हैं। हालांकि, इन आंकड़ों के बीच एक शेयर्ड और ट्रेंड ट्रेंड उभरकर सामने आया है, जहां महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज्यादा रही है। इस बार सत्ता का निर्णय क्या है?

एकल सर्वेक्षण सर्वेक्षण में संकेत दिया गया है कि बंगाल में भाजपा को बढ़त मिल सकती है, हालांकि कुछ सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि बंगाल में भाजपा को बढ़त मिल सकती है। असम में भाजपा की रणनीति की संभावना मजबूत बनी हुई है, जबकि केरल में सत्ता परिवर्तन कर यूडीएफ की वापसी के संकेत हैं। तमिल में सबसे बड़ी मशीनरी सामने आई है, जहां अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके अपने पहले ही चुनाव में 98 से 120 के साथ बड़ा उलटफेर कर सकती है। पुडुचेरी में एनडीए के प्रवेश द्वार दिख रहे हैं। इन सबके बीच एक बात साफ है कि इस बार महिला किरदारों की केवल संख्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शक्ति उभर कर सामने आई हैं।

ये भी पढ़ें: पिछली बार हुआ रद्द, अब और भी खास, अगले महीने यूरोप दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी, जानें क्या बन रहा है प्लान?

महिलाओं की बढ़त: अर्थशास्त्र में बदलाव का संकेत

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में रिकॉर्ड 92.47 प्रतिशत मतदान की चर्चा के बीच सबसे अहम और प्रतिष्ठित महिलाओं की विशेष भागीदारी रही। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, दोनों चरण में महिलाओं ने न केवल बढ़त-चढ़ाकर मतदान किया, बल्कि प्रतिशत के अनुसार पुरुषों को भी पीछे छोड़ दिया। दूसरे चरण में महिला ओलंपिक का मतदान प्रतिशत 92.28 दर्ज किया गया, जबकि पुरुषों का यह आंकड़ा 91.07 प्रतिशत रहा। यानी महिलाओं ने लगभग 1.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ पुरुषों को पीछे छोड़ दिया। यह भले ही छोटा लगे, लेकिन तीन बड़े आधार वाले राज्य में इसका प्रभाव व्यापक और स्थिर हो सकता है।

पहले चरण में भी यही रुझान देखने को मिला था. 23 अप्रैल को हुए मतदान में 92.69 प्रतिशत महिलाओं ने वोट डाले, जबकि पुरुषों की भागीदारी 90.92 प्रतिशत रही. यानि दोनों स्टेज में महिलाओं की भागीदारी लगातार अधिक रही। यह कोई संयोगवश नहीं, बल्कि एक स्थायी मनोनीत व्यवहार का संकेत है। इस रुझान का महत्व इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि पश्चिम बंगाल में कुल संख्या 6.81 करोड़ है। तीन बड़े वोटरों में अगर महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज्यादा हो, तो यह सीधे तौर पर असलम की दिशा तय करने की क्षमता है।

अन्य राज्यों में भी महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान किया

असम और पुडुचेरी ने भी अपना-अपना रिकॉर्ड तोड़ा। असम में 85.91 प्रतिशत और पुडुचेरी में करीब 90 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है, जो अब तक का सर्वोच्च पात्र है। असम विधानसभा चुनाव 2026 में रिकॉर्ड वोटिंग का मामला सामने आया है, जिसमें महिलाओं को एक बार फिर पुरुषों को पीछे छोड़ दिया गया। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कुल मतदान 85.91% आ रहा है, जो असम का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले 2016 में 84.67% और 2021 में 82.42% मतदान हुआ था। इस महिला बार की भागीदारी 86.50% रही, जो पुरुषों की 85.33% से अधिक है। दिलचस्प बात यह है कि 2021 में महिला मतदान 82.01% तक गिर गया था, लेकिन इस बार तेजी से उछाल देखने को मिला।

तमिलनाडु में महिलाओं की भागीदारी अधिक

तमिलनाडु में भी महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज्यादा रही, जहां 85.76 फीसदी महिलाओं ने वोट डाले, वहीं पुरुषों की हिस्सेदारी 83.57 फीसदी रही. 23 अप्रैल को तमिल में सभी 234 रिवार्ड्स की वोटिंग हुई, जहां कुल संख्या 5.73 करोड़ थी। उसी दिन पश्चिम बंगाल की 152 सीटों पर भी वोटिंग हुई, जहां गरीबों की संख्या 3.6 करोड़ थी।

केरल विधानसभा चुनाव में औसत मतदान

केरल विधानसभा चुनाव में औसत मतदान 78.23 प्रतिशत दर्ज किया गया है, वहीं चुनाव आयोग के आंकड़ों का गहन विश्लेषण बताता है कि इस चुनाव की असली कहानी महिलाओं के वोटों में कहां-कहां हुई है। केरल विधानसभा चुनाव 2026 में महिला झील ने इस बार लैंडस्केप एन्काउंटर कर डेक परिदृश्य को नया आयाम दिया है। चुनाव आयोग के मुताबिक, 80.86% महिलाओं ने मतदान किया, जबकि पुरुषों की भागीदारी 75.01% रही। लगभग 6 प्रतिशत का अंतर यह केवल अक्षर नहीं है, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संकेत है।

कब घोषित किये जायेंगे चुनाव के नतीजे

पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों तमिल, पुडुचेरी, केरल और असम के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किये जायेंगे। वोट पोल अपने-अपने दावे कर रहे हैं, लेकिन इस रिकॉर्ड पोल ने यह तय कर दिया है कि जनता अपने हक के लिए वोट जरूर करेगी। यह चुनाव केवल राजनीतिक सत्ता के लिए नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक भागीदारी के नए स्थापित करने के लिए भी याद किया जाएगा। विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत की राजनीति में अब एक नई शक्ति केंद्र आ गई है, जो केवल वोट नहीं डाल रही है, बल्कि सिद्धांतों की दिशा भी तय कर रही है।

ये भी पढ़ें: विधानसभा चुनाव एग्जिट पोल: बैकलिट पोल में पिछड़ गया! केरल और बंगाल में भी गोदाम बनने के मिले संकेत, जानें पूरे आंकड़े

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विधानसभा चुनाव 2026: महिलाओं के साथ, सत्ता की चाबी उनके पास, भागीदारी के सवालों के बीच महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ा

विधानसभा चुनाव 2026: महिलाओं के साथ, सत्ता की चाबी उनके पास, भागीदारी के सवालों के बीच महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ा

पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के एनोटेशन पोल अब गरमागरम तस्वीरों को आकार देने लगे हैं। हालांकि, इन आंकड़ों के बीच एक शेयर्ड और ट्रेंड ट्रेंड उभरकर सामने आया है, जहां महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज्यादा रही है। इस बार सत्ता का निर्णय क्या है?

एकल सर्वेक्षण सर्वेक्षण में संकेत दिया गया है कि बंगाल में भाजपा को बढ़त मिल सकती है, हालांकि कुछ सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि बंगाल में भाजपा को बढ़त मिल सकती है। असम में भाजपा की रणनीति की संभावना मजबूत बनी हुई है, जबकि केरल में सत्ता परिवर्तन कर यूडीएफ की वापसी के संकेत हैं। तमिल में सबसे बड़ी मशीनरी सामने आई है, जहां अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके अपने पहले ही चुनाव में 98 से 120 के साथ बड़ा उलटफेर कर सकती है। पुडुचेरी में एनडीए के प्रवेश द्वार दिख रहे हैं। इन सबके बीच एक बात साफ है कि इस बार महिला किरदारों की केवल संख्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शक्ति उभर कर सामने आई हैं।

ये भी पढ़ें: पिछली बार हुआ रद्द, अब और भी खास, अगले महीने यूरोप दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी, जानें क्या बन रहा है प्लान?

महिलाओं की बढ़त: अर्थशास्त्र में बदलाव का संकेत

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में रिकॉर्ड 92.47 प्रतिशत मतदान की चर्चा के बीच सबसे अहम और प्रतिष्ठित महिलाओं की विशेष भागीदारी रही। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, दोनों चरण में महिलाओं ने न केवल बढ़त-चढ़ाकर मतदान किया, बल्कि प्रतिशत के अनुसार पुरुषों को भी पीछे छोड़ दिया। दूसरे चरण में महिला ओलंपिक का मतदान प्रतिशत 92.28 दर्ज किया गया, जबकि पुरुषों का यह आंकड़ा 91.07 प्रतिशत रहा। यानी महिलाओं ने लगभग 1.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ पुरुषों को पीछे छोड़ दिया। यह भले ही छोटा लगे, लेकिन तीन बड़े आधार वाले राज्य में इसका प्रभाव व्यापक और स्थिर हो सकता है।

पहले चरण में भी यही रुझान देखने को मिला था. 23 अप्रैल को हुए मतदान में 92.69 प्रतिशत महिलाओं ने वोट डाले, जबकि पुरुषों की भागीदारी 90.92 प्रतिशत रही. यानि दोनों स्टेज में महिलाओं की भागीदारी लगातार अधिक रही। यह कोई संयोगवश नहीं, बल्कि एक स्थायी मनोनीत व्यवहार का संकेत है। इस रुझान का महत्व इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि पश्चिम बंगाल में कुल संख्या 6.81 करोड़ है। तीन बड़े वोटरों में अगर महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज्यादा हो, तो यह सीधे तौर पर असलम की दिशा तय करने की क्षमता है।

अन्य राज्यों में भी महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान किया

असम और पुडुचेरी ने भी अपना-अपना रिकॉर्ड तोड़ा। असम में 85.91 प्रतिशत और पुडुचेरी में करीब 90 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है, जो अब तक का सर्वोच्च पात्र है। असम विधानसभा चुनाव 2026 में रिकॉर्ड वोटिंग का मामला सामने आया है, जिसमें महिलाओं को एक बार फिर पुरुषों को पीछे छोड़ दिया गया। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कुल मतदान 85.91% आ रहा है, जो असम का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले 2016 में 84.67% और 2021 में 82.42% मतदान हुआ था। इस महिला बार की भागीदारी 86.50% रही, जो पुरुषों की 85.33% से अधिक है। दिलचस्प बात यह है कि 2021 में महिला मतदान 82.01% तक गिर गया था, लेकिन इस बार तेजी से उछाल देखने को मिला।

तमिलनाडु में महिलाओं की भागीदारी अधिक

तमिलनाडु में भी महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज्यादा रही, जहां 85.76 फीसदी महिलाओं ने वोट डाले, वहीं पुरुषों की हिस्सेदारी 83.57 फीसदी रही. 23 अप्रैल को तमिल में सभी 234 रिवार्ड्स की वोटिंग हुई, जहां कुल संख्या 5.73 करोड़ थी। उसी दिन पश्चिम बंगाल की 152 सीटों पर भी वोटिंग हुई, जहां गरीबों की संख्या 3.6 करोड़ थी।

केरल विधानसभा चुनाव में औसत मतदान

केरल विधानसभा चुनाव में औसत मतदान 78.23 प्रतिशत दर्ज किया गया है, वहीं चुनाव आयोग के आंकड़ों का गहन विश्लेषण बताता है कि इस चुनाव की असली कहानी महिलाओं के वोटों में कहां-कहां हुई है। केरल विधानसभा चुनाव 2026 में महिला झील ने इस बार लैंडस्केप एन्काउंटर कर डेक परिदृश्य को नया आयाम दिया है। चुनाव आयोग के मुताबिक, 80.86% महिलाओं ने मतदान किया, जबकि पुरुषों की भागीदारी 75.01% रही। लगभग 6 प्रतिशत का अंतर यह केवल अक्षर नहीं है, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संकेत है।

कब घोषित किये जायेंगे चुनाव के नतीजे

पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों तमिल, पुडुचेरी, केरल और असम के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किये जायेंगे। वोट पोल अपने-अपने दावे कर रहे हैं, लेकिन इस रिकॉर्ड पोल ने यह तय कर दिया है कि जनता अपने हक के लिए वोट जरूर करेगी। यह चुनाव केवल राजनीतिक सत्ता के लिए नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक भागीदारी के नए स्थापित करने के लिए भी याद किया जाएगा। विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत की राजनीति में अब एक नई शक्ति केंद्र आ गई है, जो केवल वोट नहीं डाल रही है, बल्कि सिद्धांतों की दिशा भी तय कर रही है।

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