Tuesday, 22 Sep 2026 | 05:06 PM

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गर्मियों में कूलिंग टिप्स: घर में नहीं है एसी या लैपटॉप? भारी गर्मी में मसाला को ठंडी बनायेगी ये एक चीज, पोछे के पानी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है

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अगर आपके घर में भी एसी या लैपटॉप नहीं है तो एक चीज आपकी मदद कर सकती है, वो है फिटकरी। पोछा बनाने वाले पानी में फिटकरी मिलाने से लेकर देर तक ठंडा एहसास होता है। साथ ही घर में ताजगी भी रहती है। छवि: फ्रीपिक एक बाल्टी ठंडा या सामान्य पानी लें। इसमें फिटकरी का छोटा टुकड़ा दाल या छोटा फिटकरी पाउडर मिला लें। फ़्लोरिडा तो कुछ बल्बें नींबू या गुलाब जल की भी डाल सकते हैं। अब इस पानी से पूरे घर में पोछा क्षेत्र। छवि: एआई फिटकरी वाले पानी के सामान को जल्दी ठंडा करने में मदद मिलती है और मछली को भी थोड़ा कम लगता है। छवि: फ्रीपिक फिटकरी में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो सुपरमार्केट की कुछ समय तक बनाए रखने में मदद करते हैं। विशेष रूप से मिश्रित और टाइल्स वाले एसएएम पर प्रभाव अधिक महसूस होता है। छवि: एआई जब आलमारी ठंडी रहती है तो का तापमान भी असुंदर आरामदायक महसूस होता है। इससे संबंधित कम जानकारी है। छवि: फ्रीपिक फिटकरी वाला पानी को कम करने में मदद करता है। यह घर का ताज़ा ताज़ा लगता है। फिटकरी में व्हीस विरोधी-सतत् गुण होते हैं, जिससे ई-सफ़ाई की सफाई बेहतर होती है। छवि: एआई बहुत ज्यादा फिटकरी का इस्तेमाल नहीं किया जाता। संगमरमर या लकड़ी के टुकड़े पर पहले थोड़ा परीक्षण कर लें। बच्चों और सामान की पहुंच से फिटकरी दूर। छवि: मेटा एआई दिन में ऑर्थोडॉक्स पर मोटोरोला स्कर्ट रहता है। शाम के समय खोले गए सामान ताकि हवा सुरक्षित रहे। कमरे में पानी से भरी बाल्टी या औषधियों का उपयोग करें। छवि: एआई अगर आप भी बिना एसी और पावर के घर को थोड़ा ठंडा और आरामदायक रखना चाहते हैं, तो फिटकरी वाला ये आसान घरेलू उपाय जरूर आजमाएं। कम खर्च में यह उपाय गर्मी और मित्र दोनों को राहत से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)समर फ्लोर कूलिंग टिप्स(टी)फ्लोर क्लीनिंग DIY(टी)फिटकरी का उपयोग(टी)फिटकारी का पोचा लगाने के फायदे(टी)फर्श सफाई टिप्स(टी)होम कूलिंग टिप्स(टी)समर होम कूलिंग टिप्स

महिलाओं में क्यों बढ़ रहा मर्दों वाला हार्मोन? कानपुर में ये कैसी आफत, इस मुसीबत की जड़ 6 गलतियां

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Last Updated:May 21, 2026, 19:17 IST Women health tips : कानपुर में सामने आया है कि बड़ी संख्या में महिलाओं और युवा लड़कियों में पुरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) का स्तर तेजी से बढ़ रहा है. देर रात तक जागना, घंटों मोबाइल और लैपटॉप पर समय बिताना, जंक फूड खाना, शारीरिक मेहनत कम होना और लगातार तनाव से उनका हार्मोन बैलेंस बिगड़ रहा है. इसका असर अब कम उम्र की लड़कियों में भी दिखाई देने लगा है. लोकल 18 से कानपुर की चिकित्सक डॉ. सीमा द्विवेदी बताती हैं कि हार्मोन असंतुलन के कारण महिलाओं में अंडे बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है. कानपुर. कानपुर के GSVM Medical College और LLR अस्पताल में सामने आए मामलों ने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है. अस्पताल की ओपीडी और रिसर्च के दौरान यह सामने आया कि बड़ी संख्या में महिलाओं और युवा लड़कियों में पुरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) का स्तर तेजी से बढ़ रहा है. मेडिकल भाषा में इसे ‘हाइपरएंड्रोजेनिज्म’ कहा जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि खराब लाइफस्टाइल, तनाव और अनियमित दिनचर्या इसकी सबसे बड़ी वजह बन रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक, देर रात तक जागना, घंटों मोबाइल और लैपटॉप पर समय बिताना, जंक फूड खाना, शारीरिक मेहनत कम होना और लगातार तनाव में रहना महिलाओं के शरीर का हार्मोन बैलेंस बिगाड़ रहा है. इसका असर अब कम उम्र की लड़कियों में भी दिखाई देने लगा है. कई महिलाओं में चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल उगना, बाल झड़ना, मुंहासे बढ़ना और पीरियड्स गड़बड़ होना जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. आगे चलकर ये दिक्कत कानपुर के एलएलआर अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में जब ऐसे मामले पहुंचे तो डॉक्टर भी एक पल के लिए हैरान रह गए. जांच में महिलाओं के शरीर में पुरुष हार्मोन सामान्य से ज्यादा मिला. विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सीमा द्विवेदी ने बताया कि पहले इस बीमारी को पीसीओएस कहा जाता था, लेकिन अब इसे पीएमओएस यानी “पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम” के रूप में देखा जा रहा है. उन्होंने बताया कि हार्मोन असंतुलन के कारण महिलाओं में अंडे बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है. इससे माहवारी अनियमित होने लगती है और आगे चलकर गर्भधारण में भी परेशानी आती है. कई मामलों में बांझपन जैसी गंभीर स्थिति भी सामने आ रही है. मोटापा से कैंसर तक की दिक्कत डॉक्टरों के मुताबिक, हार्मोन गड़बड़ी केवल पीरियड्स तक सीमित नहीं रहती. शरीर में एस्ट्रोजन और इंसुलिन का स्तर बढ़ने से डायबिटीज, मोटापा, बच्चेदानी का कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. प्रो. सीमा द्विवेदी के अनुसार तनाव, प्रदूषण और केमिकल्सयुक्त खानपान इस बीमारी की बड़ी वजह बन चुके हैं. महिलाओं को नियमित व्यायाम करने, वजन नियंत्रित रखने, संतुलित भोजन अपनाने और तनाव से दूर रहने की सलाह दी है. दवाओं से ज्यादा जरूरी ये चीज विशेषज्ञों का कहना है कि केवल दवाओं से इस समस्या पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सकता. समय पर सोना, रोजाना व्यायाम करना, जंक फूड से दूरी बनाना और मानसिक तनाव कम करना ही सबसे बड़ा बचाव है. डॉक्टरों के मुताबिक, अगर समय रहते महिलाएं अपनी लाइफस्टाइल सुधार लें तो इस बढ़ती समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है. About the Author Priyanshu Gupta प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kanpur Nagar,Uttar Pradesh

बादाम केसर ठंडाई ड्रिंक रेसिपी: गरमा गरम घर पर पहले से तैयार बाजार में जैसी बादाम-केसर वाली ठंडी, बनाएं ही हो जाएं कूल-कूल

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सामग्री: 1 किलो दूध, 20 बादाम, 1 बड़ा चम्मच खरबूजे के बीज, 1 बड़ा चम्मच, 1 छोटा चम्मच खसखस, 4 काली मिर्च, 5 इलायची, 10 केसर के टुकड़े, 5 बड़ा चम्मच चीनी, 1 बड़ा चम्मच गुलाब जल, बर्फ के टुकड़े, बादाम-पिस्ता छवि: फ्रीपिक सबसे पहले बादाम को 2-3 घंटे पानी में डुबोएं। इसके बाद बादाम का छिलका हटा दिया गया। पिस्सू में बादाम, खरबुजे के बीज, सौंफ, खसखस, काली मिर्च और इलायची के टुकड़े, पानी के टुकड़े और स्टॉक पेस्ट तैयार कर लें। छवि: एआई अब एक पोटैशियम में दूध और सम्मिलित पेस्ट मिलाप तैयार करें। इसके बाद चीनी, केसर और गुलाब जल स्मारक से मिश्रण करें। अगर आप ज्यादा ठंडा स्वाद चाहते हैं तो इसमें बर्फ के टुकड़े भी डाल सकते हैं. छवि: एआई अब ठंडी को 20-30 मिनट के लिए फ़्रिज़ में रखें ताकि इसका स्वाद और भी बढ़ जाए। बिना सोचे-समझे ठंडा बादाम-केसर ठंडाई के गिलास में और ऊपर से कटे हुए बादाम-केसर ठंडाई सर्व करें। छवि: एआई इसका स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को बेहद पसंद आता है। यह शरीर को गर्मी और लू से बचने में मदद करता है। बादाम से शरीर को ताकत और ऊर्जा मिलती है। छवि: फ्रीपिक सौंफ और इलायची पेट को ठंडा रखने में मदद मिलती है। केसर का स्वाद और शुभकामनाएँ दोनों पुनर्प्राप्त हैं। छवि: फ्रीपिक इस हीट होम पर बनी इस बादाम-केसर कूलाई को जरूर ट्राई करें और इसके साथ ठंडक भरा स्वाद का आनंद लें। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)बादाम-केसर वाली ठंडीई(टी)बादाम-केसर वाली ठंडीई रेसिपी(टी)बादाम ठंडाई(टी)केसर ठंडाई(टी)समर ड्रिंक(टी)कूलिंग ड्रिंक(टी)ठंडाई रेसिपी

चेहरा चमकाने के लिए स्किन में इंजेक्शन घुसेड़ा तो खैर नहीं, ब्यूटी क्लिनिकों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश, लड़कियां भी ध्यान दें

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CDSCO Warn against Injectable Cosmetic Products: शहरों में ब्यूटी क्लिनिकों की कोई कमी नहीं है. ऐसे कई ब्यूटी क्लिनिक मिल जाएंगे जहां दावा किया जाएगा कि हमारे पास प्रतिष्ठित संस्थानों से ट्रेंड डर्मेटोलॉजिस्ट है. कुछ क्लिनिकों में चेहरे काया पलट करने के लिए खास सलाह दी जाती है. इसमें कहा जाता है कि जो क्रीम आप चेहरे पर लगाते हैं वह जल्दी असर नहीं करती, इसलिए इसका इंजेक्शन लगा लीजिए. कुछ लोग इस झांसे में आ जाते हैं और झट से इस इंजेक्शन को लगा लेते हैं. इस प्रैक्टिस पर सख्त नराजगी जताते हुए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी CDSCO ने एक नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में कहा गया है कि किसी भी हाल में कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को इंजेक्शन के रूप में मंजूरी नहीं है. इसलिए यदि कोई ब्यूटी क्लीनिक ऐसा करता है तो उसके खिलाफ सख्स से सख्त कार्रवाई की जाएगी. कॉस्मेटिक का इस्तेमाल इंजेक्शन के लिए नहीं दरअसल, कई ऐसी शिकायतें आ रही थी जिनमें किसी व्यक्ति ने चेहरे में इंजेक्शन लगाया और उसे कई तरह की परेशानियां हो गईं. इसी के बाद CDSCO ने यह नोटिस जारी की. केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी सीडीएससीओ ने साफ किया है कि किसी भी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है. सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर कोई कंपनी, क्लीनिक या विक्रेता कॉस्मेटिक उत्पादों को इंजेक्शन के जरिए इस्तेमाल करने का दावा करता है या उसका प्रचार करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. भारत के औषधि महानियंत्रक डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि कॉस्मेटिक कंपनियां ऐसे दावे नहीं कर सकतीं जो लोगों को गुमराह करें. किसी भी उत्पाद के लेबल, पैकेजिंग या विज्ञापन में झूठे, बढ़ा-चढ़ाकर या इलाज जैसे दावे करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा. कॉस्मेटिक्स को इलाज के रूप में पेश करना कानूनन अपराध सरकार ने स्पष्ट किया है कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत कॉस्मेटिक वे उत्पाद हैं, जो शरीर पर लगाने, छिड़कने या बाहरी इस्तेमाल के लिए होते हैं. इनका उद्देश्य केवल सफाई, सुंदरता बढ़ाना और आकर्षक दिखाना है. इन्हें इलाज या इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. नोटिस में यह भी कहा गया है कि असुरक्षित या प्रतिबंधित सामग्री वाले कॉस्मेटिक उत्पादों का इस्तेमाल और कॉस्मेटिक्स को इलाज के रूप में पेश करना कानूनन अपराध है. सीडीएससीओ ने लोगों से अपील की है कि अगर कहीं कॉस्मेटिक उत्पादों का गलत इस्तेमाल, भ्रामक प्रचार या इंजेक्शन के जरिए उपयोग होता दिखे, तो इसकी जानकारी तुरंत नियामक एजेंसियों या राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण को दें. अधिकारियों के मुताबिक यह चेतावनी खास तौर पर एस्थेटिक, ब्यूटी और वेलनेस क्लीनिकों के लिए अहम है, जहां स्किन ग्लो, एंटी-एजिंग और ब्यूटी ट्रीटमेंट के नाम पर इंजेक्शन आधारित प्रक्रियाएं की जा रही हैं. सीडीएससीओ के पास हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए थे, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया है. क्यों खतरनाक हैं ये ब्यूटी इंजेक्शन  हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो किसी भी तरह के कॉस्मेटिक प्रोडेक्ट में कई तरह के केमिकल होते हैं. इसलिए कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स को इस तरह से बनाया जाता है कि इसमें मौजूद खतरनाक भारी मेटल स्किन के अंदर न घुसे. अगर स्किन की सतह पर लगाए जाने वाले कॉस्मेटिक्स को सीधे इंजेक्शन के जरिए स्किन की भीतरी परतों में डाल दिया जाए, तो यह एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी बन सकती है. यह कोशिकाओं के स्तर पर विनाशकारी साबित हो सकता है. इसके कई कारण है. इन कॉस्मेटिक प्रोडक्ट में पैराबेंस, फेथलेट्स, फॉर्मलडिहाइड, मर्करी, पारा, लेड, सीसा जैसे अत्यंत हानिकारक तत्व होते हैं. इसलिए इसमें सिलिकॉन और मिनिरल ऑयल मिले होते हैं तो त्वचा में लगाने के साथ तुरंत एक सिंथेटिक परत बना लें लेकिन जब ये भारी टॉक्सिक तत्व स्किन के अंदर घुस जाएंगे तो खून में पहुंचकर किडनी और लिवर को नुकसान पहुंचाने लगते है. मर्करी, लेड जैसे तत्व सीधे नर्वस सिस्टम को अटैक करते हैं. फॉर्मेल्डिहाइड जैसे तत्व कैंसर का कारण भी बन सकता है. कभी-कभी गलत डोज के कारण चेहरा संवारने के बजाय चेहरा बदसूरत होने लगता है. गलत डोज या गलत तरीके से सुई लगाने से चेहरे पर परमानेंट निशान, सूजन या पैरालिसिस तक हो सकता है. लड़कियां खास ध्यान दें  इन ब्यूटी क्लिनिकों में अधिकांश लड़कियां जाती हैं. उन्हें इस बात पर खास ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि उन्हें नहीं पता होता है कि कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को इंजेक्शन के रूप में लेने के बाद इसका क्या अंजाम होता है. अगर कोई इंजेक्शन या लेजर ट्रीटमेंट का सुझाव दे रहा है, तो पहले सुनिश्चित करें कि वह डर्मेटोलॉजिस्ट है या नहीं. उसका लाइसेंस देखें, उस क्लिनिक के पास हेल्थ डिपार्टमेंट से सर्जिकल या कॉस्मेटिक प्रक्रिया का लाइसेंस है या नहीं यह भी देखना चाहिए. आप किस डॉक्टर से इलाज करा रहे हैं, उसके बारे में सब कुछ पहले पता करें. सबसे बेहतर यही है कि नेचुरल पर भरोसा करें. इंस्टेंट निखार के बजाय अच्छी डाइट, पर्याप्त पानी, नींद और तनाव रहित जीवन को अपनाएं.

गर्मियों में दादी-नानी के ये देसी नुस्खे हैं रामबाण! डॉक्टर बोले…शरीर रहेगा कूल-कूल, नहीं होगी पानी की कमी

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Last Updated:May 21, 2026, 17:44 IST Summer Health Tips: गर्मियों के मौसम में आसमान से बरसती आग और भयंकर लू ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. ऐसे में डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और कमजोरी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. रामपुर के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल ने इस भीषण गर्मी से बचने के लिए आयुर्वेद के कुछ बेहद आसान और असरदार घरेलू नुस्खे बताए हैं. आखिर बिना ज्यादा पैसे खर्च किए आप अपने शरीर को अंदर से कैसे ठंडा और तरोताजा रख सकते हैं, आइए जानते हैं. रामपुर: उत्तर प्रदेश में इस समय रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है. तेज धूप, बढ़ते तापमान और उमस ने लोगों की दिनचर्या को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है. हालात ऐसे हैं कि दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है और लोग घरों से बाहर निकलने में भी कतरा रहे हैं. इस मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है जिन्हें काम के सिलसिले में लगातार धूप में बाहर रहना पड़ता है. तेज धूप में ज्यादा पसीना निकलने के कारण शरीर बहुत जल्दी थक जाता है और बॉडी में पानी की कमी होने लगती है. जिसकी वजह से लू, डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और थकान जैसी परेशानियां सामने आ रही हैं. खासकर बच्चे, बुजुर्ग और कामकाजी लोग इसकी चपेट में ज्यादा आ रहे हैं. ऐसे में रामपुर के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल ने कुछ ऐसे पुराने घरेलू नुस्खे बताए हैं जो आपको इस गर्मी में एकदम फिट रखेंगे. फ्रिज के ठंडे पानी से बेहतर हैं ये देसी पेय डॉक्टर मोहम्मद इकबाल के मुताबिक, गर्मी के इस मौसम में सबसे ज्यादा जरूरी अपने शरीर को अंदर से ठंडा रखना है. आजकल लोग गर्मी से तुरंत राहत पाने के लिए बाजार में मिलने वाली ज्यादा ठंडी चीजें या कोल्ड ड्रिंक पी लेते हैं. इससे कुछ देर के लिए तो राहत मिलती है, लेकिन यह शरीर को असली फायदा नहीं पहुंचाती. इसके बजाय हमारे घरों में बनने वाले पारंपरिक और देसी पेय सबसे ज्यादा असरदार होते हैं. बेल का शरबत, सत्तू, छाछ और नींबू पानी जैसी चीजें न सिर्फ शरीर को अंदरूनी ठंडक देती हैं, बल्कि दिनभर काम करने के लिए जरूरी एनर्जी भी बनाए रखती हैं. यह भी पढ़ें: पार्क-मैदानों में दिखने वाली इस मामूली हरी घास में छिपा है सेहत का बड़ा राज, इसके फायदे जान चौंक जाएंगे पानी पीने में कभी न करें ये बड़ी गलतीअक्सर लोग इस मौसम में सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि वे पानी बहुत कम पीते हैं. डॉक्टर इकबाल ने बताया कि कई बार हमें प्यास का अहसास नहीं होता, लेकिन शरीर के अंदर पानी की कमी लगातार होती रहती है. यही कारण है कि लोगों को अचानक चक्कर आने लगते हैं, सिर भारी हो जाता है और कमजोरी महसूस होने लगती है. इससे बचने के लिए जरूरी है कि आप थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें. इसके अलावा जब भी घर से बाहर निकलें, तो कभी भी खाली पेट न जाएं. धूप में निकलने से पहले अपने सिर को किसी हल्के कपड़े से जरूर ढक लें. मिट्टी के घड़े का पानी है वरदानआयुर्वेद भी मानता है कि गर्मियों के दिनों में हमारा खानपान बेहद हल्का होना चाहिए. ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और गर्म तासीर वाला भोजन शरीर की गर्मी को और ज्यादा बढ़ा देता है. इसकी जगह अपने दैनिक आहार में दही, खीरा, तरबूज, ककड़ी और मौसमी फलों को शामिल करना चाहिए. ये चीजें शरीर को ठंडक और तरोताजा बनाए रखती हैं. इसके साथ ही गांवों में आज भी लोग मिट्टी के घड़े का पानी पीते हैं, जिसे आयुर्वेद में सबसे उत्तम माना गया है. घड़े का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है और इसका शरीर पर कोई भी गलत असर नहीं पड़ता. दोपहर 12 से 3 बजे की धूप से बचेंडॉक्टर इकबाल ने खास तौर पर सलाह दी है कि दोपहर 12 बजे से लेकर 3 बजे तक की धूप सबसे ज्यादा खतरनाक होती है. इस दौरान बहुत जरूरी काम होने पर ही घर या ऑफिस से बाहर निकलें. धूप में जाते समय हमेशा हल्के और सूती (कॉटन) कपड़े ही पहनें, क्योंकि सूती कपड़ों में हवा का प्रवाह अच्छा रहता है और पसीना आसानी से सूख जाता है. इस मौसम में सूखे और गर्म वातावरण के कारण सेहत बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए इन छोटे-छोटे घरेलू उपायों को अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करें. About the Author Seema Nath सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Rampur,Uttar Pradesh

लौकी हरे प्याज के पकौड़े रेसिपी: लौकी हरे प्याज के पकौड़े, कम तेल में होंगे तैयार; बड़ी चाय का स्वाद

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सामग्री: 1 लोकी, 1 हरा प्याज, 1 कप बेसन, 2 हरी मिर्च , 1 छोटा बड़ा अदरक, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1/2 छोटा प्याज हल्दी, 1/2 छोटा प्याज हल्दी, नमक, हरा धनिया, आवश्यक पानी, तेल छवि: फ्रीपिक सबसे पहले कद्दू की हुई लौकी को हाथ से पानी निकाल लें। अब एक बड़ा नमक में लोकी, हरा प्याज, प्याज, हरी मिर्च, अदरक, हल्दी, लाल मिर्च, अजवायन, नमक और हरा धनिया धनिया अच्छी तरह मिला लें। छवि: एआई अगर मिश्रण ज्यादा सूखा लगे तो थोड़ा-थोड़ा पानी डाले हुए टेस्ला बैटर तैयार करें। ध्यान दें कि बातर बहुत हल्का न हो। छवि: एआई अब तवा या पैन पर गैस गर्म करें और तेल का इस्तेमाल करें। छोटे-छोटे होने वाले पकौड़े दोनों तरफ से सुनहरे और कुरकुरे तक सेक लें। ‍ड्रामा तो कृप्या कम तेल में शैलो फ्राई भी कर सकते हैं। छवि: एआई स्वाद बढ़ाने के लिए बैटर में छोटे चावल का आटा मिलाने से पकौड़े ज्यादातर कुरकुरे बनते हैं. अगर तीखा पसंद है तो हरी मिर्च की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। इन पकौड़ों को हरी चटनी या टमाटर सॉस के साथ सर्व करें. छवि: एआई लोकी बॉडी को ठंडक देने में मदद करता है और हरे प्याज के स्वाद के साथ लौकी कुरकुराहट भी देता है। ऐसे में यह मूलभूत स्वाद और स्वास्थ्य दोनों का अच्छा संयोजन बन गया है। छवि: फ्रीपिक कम तेल में बनने की वजह से इसे बिना ज्यादा से ज्यादा खाया जा सकता है। छवि: एआई

तरबूज-खरबूज से ज्यादा ताकतवर, दिखने में जेली और शरीर रखता है बर्फ सा ठंडा, जानें आइस एप्पल के फायदे

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आइस एप्पल जिसे ताड़गोला भी कहा जाता है, पोषक तत्वों से भरा गर्मी का सुपरफ्रूट है. वैसे तो इस मौसम में मार्केट में हर तरफ तरबूज और खरबूज का बोलबाला होता है. लेकिन इस बीच ताड़गोला कहीं दब सा जाता है, जबकि इसके फायदे दोनों से ज्यादा हैं. यदि आप सिर्फ ताड़गोल खा लें तो आपको तरबूज और खरबूज दोनों के न्यूट्रिएंट्स एक साथ एक ही बार में मिल जाते हैं. ताड़गोला पाम की एक प्रजाति ताड़ के पेड़ पर लगने वाला फल है. बिहार, बंगाल और झारखंड में इसे आप सड़कों के किनारे और खेतों में आसानी से देख सकते हैं. लेकिन चौंकाने वाली बात है कि इसके फायदों के बारे में लोग कम ही जानते हैं. यदि आप भी इसमें से एक हैं, तो लेख आपके लिए है. क्योंकि इस साल गर्मी से बचने के लिए सिर्फ कूलर और एसी काम नहीं आएंगे. सेहत को बनाए रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा ऐसे फलों और सब्जियों को खाने की जरूरत है, जो आपको अंदर से ठंडा और हाइड्रेट रखे. ताड़गोला के फायदेआइस एप्पल यानी ताड़गोला शरीर को ठंडक देने वाला फल है. इसमें 90 प्रतिशत पानी होता है, जो इसे तरबूज को कड़ी टक्कर देने वाला फल बनाता है. इसलिए गर्मियों में यह शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है. इसे खाने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी पूरी होती है. यह थकान, सिरदर्द और शरीर में सूखापन जैसी समस्याओं से बचाने में सहायक होता है. आइस एप्पल में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं. इससे हार्ट डिजीज, डायबिटीज और अन्य बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. यह शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता को मजबूत बनाता है और लंबे समय तक स्वस्थ रहने में मदद करता है. इस फल में फाइबर अच्छी मात्रा में होता है, जो पाचन क्रिया को सही रखता है. यह कब्ज की समस्या को कम करने और पेट को साफ रखने में मदद करता है. आइस एप्पल पेट की जलन, गैस और अपच जैसी परेशानियों में भी राहत देता है. इसे खाने से आंतों में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ते हैं, जिससे पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है. आइस एप्पल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, इसलिए यह ब्लड शुगर को तेजी से नहीं बढ़ाता. इसमें मौजूद प्राकृतिक शुगर धीरे-धीरे ऊर्जा देती है. फाइबर की वजह से शरीर में शुगर धीरे अवशोषित होती है, जिससे डायबिटीज के मरीजों को लाभ मिल सकता है. इसके विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को चमकदार और मुलायम बनाते हैं. यह त्वचा की नमी बनाए रखता है और झुर्रियों को कम करने में सहायक होता है. आइस एप्पल में विटामिन C और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. यह शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है और संक्रमण से बचाव करता है. नियमित सेवन से शरीर मजबूत और स्वस्थ बना रहता है. इस बात का रखें ध्यानइसमें कोई दोराय नहीं कि ताड़गोला गर्मी के मौसम का सुपरफ्रूट है, लेकिन यदि आप इसे ज्यादा मात्रा में खाते हैं, तो ये नुकसान भी कर सकता है. इसलिए रोजाना थोड़ी मात्रा में सेवन करना सेहतमंद माना जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

तमिलनाडु और बंगाल में वंदे मातरम विवाद: भारत की ‘राजनीतिक प्लेलिस्ट’ पर पार्टियां क्यों लड़ रही हैं | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:21 मई, 2026, 16:41 IST प्रोटोकॉल के अनुसार, जब कई राष्ट्रगान गाए जाते हैं, तो राष्ट्रीय गीत या राष्ट्रगान को आधिकारिक अनुक्रम में शामिल किया जाना चाहिए एक साधारण ऑडियो ट्रैक एक बड़े राजनीतिक तूफान को जन्म दे सकता है, इसका कारण भारतीय संघवाद की नाजुक बनावट है। (प्रतीकात्मक छवि) भारत की सांस्कृतिक और संघीय राजनीति राष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रतीकों के क्रम, क्रम और प्रवर्तन को लेकर एक नाटकीय मोड़ पर पहुंच गई है। पश्चिम बंगाल में, नई भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के तहत मदरसा शिक्षा निदेशालय ने एक व्यापक निर्देश जारी किया है, जिसमें सुबह की सभाओं के दौरान वंदे मातरम गाना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे इन संस्थानों को सभी राज्य स्कूलों के लिए पहले से अनिवार्य समान कोड के तहत लाया गया है। इसके साथ ही तमिलनाडु में एक हाई-प्रोफाइल शपथ ग्रहण समारोह के दौरान भयंकर प्रोटोकॉल युद्ध छिड़ गया है। कई दिनों में दूसरी बार, अभिनेता-राजनेता जोसेफ सी विजय के नेतृत्व वाली नवगठित सरकार से जुड़े लोक भवन कार्यक्रम में राज्य के आह्वान गीत, तमिल थाई वाज़्थु से पहले वंदे मातरम का प्रदर्शन किया गया। इस संरचनात्मक पुनर्व्यवस्था ने क्षेत्रीय दलों की उग्र प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है, जिसने भारत की देशभक्ति की धुनों को नियंत्रित करने वाले जटिल कानूनी पदानुक्रम पर ध्यान केंद्रित किया है। भारतीय कानून के तहत वंदे मातरम की आधिकारिक कानूनी स्थिति क्या है? वर्तमान बहु-राज्य संवैधानिक बहस को समझने के लिए, किसी को 24 जनवरी, 1950 को भारत की संविधान सभा द्वारा पारित ऐतिहासिक फैसले को देखना चाहिए। सत्र की अध्यक्षता करते हुए, भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने एक निश्चित वक्तव्य दिया, जिसने देश के देशभक्ति संगीत के लिए कानूनी ढांचा स्थापित किया। उन्होंने घोषणा की कि जहां रवींद्रनाथ टैगोर का जन गण मन आधिकारिक राष्ट्रगान के रूप में काम करेगा, वहीं बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के ऐतिहासिक स्वतंत्रता गान, वंदे मातरम, जिसने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, को समान रूप से सम्मानित किया जाना चाहिए और राष्ट्रगान के बराबर दर्जा दिया जाना चाहिए। इस राष्ट्रपति के आदेश ने वंदे मातरम को भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय गीत के रूप में स्थापित किया, जिससे इसे मानक क्षेत्रीय या राज्य गीतों से अलग एक अद्वितीय, पवित्र संवैधानिक स्थान प्राप्त हुआ। प्रोटोकॉल पदानुक्रम राष्ट्रीय और राज्य गीतों के अनुक्रम को कैसे व्यवस्थित करता है? चेन्नई में चल रहा टकराव लंबे समय से चले आ रहे क्षेत्रीय सम्मेलन और संघीय सलाहकार प्रोटोकॉल के बीच सीधे टकराव से उत्पन्न हुआ है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी स्पष्ट दिशानिर्देशों और ऐतिहासिक राज्य प्रोटोकॉल के अनुसार, सभी औपचारिक संवैधानिक और राज्य कार्यों में राष्ट्रीय प्रतीकों को पूर्ण प्राथमिकता दी जाती है। जब एक से अधिक गान गाए जाते हैं, तो राष्ट्रीय गीत या राष्ट्रगान को आधिकारिक अनुक्रम का आधार बनाना चाहिए। पारंपरिक राज्य प्रोटोकॉल तय करता है कि एक राज्य मंगलाचरण गीत, जैसे कि तमिल थाई वाज़्थु, एक स्थानीय सांस्कृतिक आह्वान के रूप में कार्य करता है और इसलिए यदि इसे शुरुआत में बजाया जाता है या अनिवार्य समापन कोड के लिए रास्ता दिया जाता है, तो इसे व्यापक राष्ट्रीय प्रतीकों से पहले होना चाहिए। शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रीय गीत के पीछे राज्य गान को शामिल करने को संघीय समर्थकों द्वारा राष्ट्रीय मिसाल के सख्त पालन के रूप में देखा जाता है, जबकि क्षेत्रीय दल इस पुनर्व्यवस्था को राज्य की पहचान के प्रत्यक्ष क्षरण के रूप में व्याख्या करते हैं। क्या कोई सरकार कानूनी तौर पर संस्थानों को राष्ट्रीय गीत गाने के लिए बाध्य कर सकती है? पश्चिम बंगाल का शासनादेश मदरसों को वंदे मातरम के अनिवार्य गायन को लागू करने के लिए बाध्य करता है, जो सीधे तौर पर अत्यधिक जटिल संवैधानिक ग्रे जोन में आता है। जबकि राज्य सरकार शैक्षिक एकरूपता सुनिश्चित करने के उपाय के रूप में आदेश का बचाव करती है, उसे बिजो इमैनुएल बनाम केरल राज्य मामले में 1986 के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक उदाहरण द्वारा स्थापित एक महत्वपूर्ण न्यायिक बाधा का सामना करना पड़ता है। उस ऐतिहासिक फैसले में, शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया कि किसी छात्र को उनकी कर्तव्यनिष्ठ धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ सक्रिय रूप से राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर करना संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रदत्त अंतरात्मा और धर्म की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है, बशर्ते वे खड़े होकर उचित सम्मान दिखाएं। इसके अलावा, कानूनी परिदृश्य 1937 के ऐतिहासिक समझौते से जटिल है, जो धर्मनिरपेक्ष सद्भाव बनाए रखने के लिए वंदे मातरम के केवल पहले दो छंदों को गाने की सिफारिश करता है, क्योंकि बाद के छंदों में जटिल प्रतीकात्मक संदर्भ होते हैं जो अल्पसंख्यक समुदायों के बीच धार्मिक बहस को भड़काते हैं। क्षेत्रीय पहचान के लिए गानों का क्रम शून्य-काल का फ्लैशप्वाइंट क्यों बन गया है? एक साधारण ऑडियो ट्रैक एक बड़े राजनीतिक तूफान को जन्म दे सकता है, इसका कारण भारतीय संघवाद की नाजुक बनावट है। तमिलनाडु जैसे भाषा-आधारित पहचान की राजनीति के गहरे इतिहास वाले राज्यों में, तमिल थाई वाज़थु – जिसे आधिकारिक तौर पर 2021 में राज्य गीत घोषित किया गया है – को केवल एक संगीत विकल्प के रूप में नहीं माना जाता है; इसे क्षेत्रीय संप्रभुता और सांस्कृतिक गौरव के एक महत्वपूर्ण प्रतीक के रूप में देखा जाता है। जब जोसेफ सी विजय की नवगठित सरकार वंदे मातरम को औपचारिक कार्यक्रम के शीर्ष पर रखकर संघीय सलाह को समायोजित करती है, तो यह एक तीव्र राजनीतिक दुविधा पैदा करती है। प्रशासनिक ढांचे के लिए, यह राष्ट्रीय प्रोटोकॉल के साथ एक संरेखण का प्रतिनिधित्व करता है; क्षेत्रीय गठबंधनों के लिए, यह एक प्रतीकात्मक वापसी का प्रतिनिधित्व करता है, जो यह साबित करता है कि आधुनिक भारतीय राजनीति में, एक गीत का क्रम राजनीतिक अधिकार का एक उच्च-स्तरीय दावा है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया तमिलनाडु और बंगाल में वंदे मातरम विवाद: भारत की ‘राजनीतिक प्लेलिस्ट’ पर पार्टियां क्यों लड़ रही हैं? 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खमन ढोकला रेसिपी: बिना तेल-भुने मिनट में तैयार करें नरम और मसालेदार खमन ढोकला, गर्मी की शाम के लिए परफेक्ट बस्ट

तस्वीर का विवरण

खमन ढोलकला बनाने की सामग्री: 1 कप बेसन, 1/2 कप दही, 1/2 कप पानी, 1 मोटी अदरक-हरी मिर्च का पेस्ट, 1 चीनी चीनी, 1 मसाले का रस, स्वाद नमक, 1 मीठा ईनो नमक छवि: फ्रीपिक धन्यवाद के लिए: 1 ओरिजनल तेल, 1/2 क्वायन राई, 7-8 कैरी पत्ते, 2 हरी मिर्च लंबी कटी हुई, 1/2 कप पानी, 1 क्वारी चीनी। बबूल वाला मीठा पानी डाला से ढोलकला नर और रसदार बनता है। छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले एक बड़े पोज़िशन में बेसन गुड लें ताकि शामिल न रहें। अब इसमें दही, पानी, नमक, चीनी, नींबू का रस और अदरक-हरी मिर्च का पेस्ट डॉलेक से पक्के हैं। छवि: एआई बैटर ना मैक्सिमम सोलोमन हो और ना मैक्सिमम सोलोमन। अब एक स्टीमर या प्लेट में पानी गर्म होने के लिए रख लें। जिस प्लेट या ट्रे में ढोलकला बनाई जाती है, उसे चित्र सा ग्रेव कर लें। छवि: एआई बैटर ने फाइनल में इनो डाला और ऊपर से थोड़ा सा पानी डाला ही बैटर को हाथ से पकड़ लिया। बैटर तुरंत फूलने जगह। अब बिना देर किए इसे ग्रीक की हुई प्लेट में डाल दिया गया। छवि: फ्रीपिक प्लेट को स्टीमर में लगभग 15 से 20 मिनट तक मध्यम गति पर ब्रेक लगाना। डोलकला पैक किया गया है या नहीं, इसमें चाकू शामिल करने के लिए चेक करें। अगर ढोलकला साफा बाहर आया है, तो समझ लें कि ढोलकला तैयार है। छवि: फ्रीपिक अब तड़का तैयार करें। एक छोटे पैन में तेल गर्म करें और इसमें राई, कैरी के पत्ते और हरी मिर्च डालें। फिर इसमें पानी और चीनी स्मारक एक स्मारक का आगमन हुआ। इस बैसाखी को तैयार करें ढोलकले के ऊपर की ओर। छवि: फ्रीपिक कुछ मिनट बाद ढोलकले को कुचलने में काट लें और हरी चटनी के साथ सर्व करें। इनोडोएड के बाद बैटर को बहुत देर तक न रखने के लिए डोकला मेन स्पॅली बनाई गई। छवि: एआई नारियल तो ऊपर से हरा धनियां और कद्दूकस किया हुआ नारियल भी डाल सकते हैं. प्रभाव, कलाकार और स्वाद से भरपूर खमन ढोलकला बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आती है। एक बार घर में यह आसान रेसिपी जरूर ट्राई करें। छवि: फ्रीपिक

knee pain at 30| knee problems in youth|30 की उम्र में युवाओं को म‍िल रहा दर्द और धोखा, अपने नहीं घुटने हैं धोखेबाज, क्या है वजह? टॉप सर्जन ने बता दी

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आखिर क्यों कमजोर हो रहे हैं युवाओं के घुटने?घुटना शरीर के सबसे महत्वपूर्ण और सबसे ज्यादा दबाव सहने वाले जोड़ों में से एक है. चलना, बैठना, दौड़ना, सीढ़ियां चढ़ना, वजन उठाना. लगभग हर गतिविधि में घुटनों की भूमिका होती है. लेकिन जब शरीर को पर्याप्त मूवमेंट नहीं मिलता और आसपास की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, तो घुटनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. धीरे-धीरे यह दबाव कार्टिलेज को नुकसान पहुंचाने लगता है और दर्द की शुरुआत हो जाती है. आज का शहरी जीवन इस समस्या को और बढ़ा रहा है. सुबह से रात तक लैपटॉप के सामने बैठकर काम करना, घंटों मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताना और दिनभर बहुत कम चलना-फिरना शरीर की प्राकृतिक कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहा है. लगातार बैठने से क्वाड्रिसेप्स और हिप मसल्स कमजोर होने लगती हैं, जो घुटनों को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाती हैं. जब ये मांसपेशियां कमजोर होती हैं, तो पूरा दबाव सीधे घुटनों के कार्टिलेज पर पड़ता है और घिसाव तेजी से बढ़ने लगता है. कम उम्र में घुटनों के दर्द के पीछे छिपे बड़े कारण 1. लंबे समय तक बैठकर काम करनाडेस्क जॉब आज घुटनों की समस्याओं की सबसे बड़ी वजह बन चुकी है. लगातार कई घंटों तक बैठने से घुटनों की मूवमेंट कम हो जाती है और ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है. यही कारण है कि कई युवा मीटिंग के बाद उठते समय जकड़न महसूस करते हैं या लंबे समय तक ड्राइव करने के बाद घुटनों में दर्द महसूस करते हैं. शुरुआती संकेतों में शामिल हैं- 2. तेजी से बढ़ता वजन और मोटापामोटापा घुटनों के लिए सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है. शरीर का अतिरिक्त वजन सीधे घुटनों पर दबाव बढ़ाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, चलने के दौरान शरीर का हर अतिरिक्त किलो वजन घुटनों पर कई गुना अधिक दबाव डालता है.रिसर्च के मुताबिक, मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा लगभग 4 गुना तक बढ़ जाता है, जबकि पुरुषों में यह खतरा लगभग 5 गुना तक हो सकता है. यही कारण है कि कम उम्र में बढ़ता वजन अब घुटनों की बीमारी का प्रमुख कारण बनता जा रहा है. 3. “वीकेंड वॉरियर” फिटनेस कल्चरआजकल कई लोग पूरे सप्ताह शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहते हैं और फिर वीकेंड पर अचानक भारी वर्कआउट, रनिंग, ट्रेकिंग या खेलकूद शुरू कर देते हैं. बिना सही तैयारी, बिना स्ट्रेचिंग और गलत तकनीक के साथ किया गया हाई-इम्पैक्ट वर्कआउट घुटनों पर अचानक अत्यधिक दबाव डालता है.कंक्रीट सतह पर दौड़ना, गलत फुटवियर पहनना और जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करना भी सूजन और माइक्रो-इंजरी का कारण बन सकता है. लंबे समय तक ऐसा होने पर घुटनों की संरचना प्रभावित होने लगती है. 4. कार्टिलेज का शुरुआती घिसावघुटनों में होने वाला नुकसान हमेशा तुरंत दर्द के रूप में सामने नहीं आता. कई बार कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसना शुरू हो जाता है और व्यक्ति को लंबे समय तक इसका एहसास तक नहीं होता. डॉक्टरों के मुताबिक, 30 की उम्र तक कई लोगों में शुरुआती कार्टिलेज डैमेज और बोन स्पर्स बनने लगते हैं.अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यही शुरुआती बदलाव आगे चलकर ऑस्टियोआर्थराइटिस में बदल सकते हैं. 5. पोषण की कमी और लगातार तनावघुटनों की मजबूती केवल एक्सरसाइज पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सही पोषण भी उतना ही जरूरी है. विटामिन D, कैल्शियम, मैग्नीशियम और प्रोटीन की कमी हड्डियों और मांसपेशियों को कमजोर बनाती है. इसके अलावा, लगातार तनाव और खराब नींद शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं, जिससे रिकवरी धीमी हो जाती है.फास्ट फूड, प्रोसेस्ड डाइट और अनियमित खानपान भी जोड़ों की सेहत पर नकारात्मक असर डालते हैं. किन संकेतों को भूलकर भी नजरअंदाज न करेंअगर कम उम्र में ये लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो उन्हें हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए: क्या कम उम्र में घुटनों की समस्या को रोका जा सकता है?विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती चरण में घुटनों की अधिकांश समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है और कई मामलों में स्थिति को सुधारा भी जा सकता है. इसके लिए कुछ आसान लेकिन जरूरी बदलाव अपनाने की जरूरत है. घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आदतें जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव30 की उम्र में घुटनों का दर्द अब दुर्लभ नहीं रहा, लेकिन इसे सामान्य समझना बड़ी गलती हो सकती है. शरीर समय रहते संकेत देना शुरू कर देता है, लेकिन ज्यादातर लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. यही लापरवाही आगे चलकर क्रॉनिक ऑस्टियोआर्थराइटिस, लगातार दर्द और चलने-फिरने में गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन नियंत्रण, मजबूत मांसपेशियां और सही जीवनशैली लंबे समय तक जोड़ों को स्वस्थ रखने की सबसे प्रभावी रणनीति हैं. छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके कम उम्र में होने वाले घुटनों के दर्द से काफी हद तक बचा जा सकता है.शरीर हमेशा समय रहते चेतावनी देता है. जरूरत सिर्फ उसे समझने और सही समय पर कदम उठाने की है.