Friday, 02 Oct 2026 | 06:57 AM

Trending :

Ayushmann Khurrana Success Story; RJ MTV VJ Indian Idol Rejection 'छठी मैया' गाने की शूटिंग में इमोशनल हुईं तमन्ना:बोलीं- 4 साल पहले रोल मिलता तो नहीं कर पाती; थिएटर्स के बाहर जूते-चप्पल उतारकर जा रहे लोग 'छठी मैया' गाने की शूटिंग में इमोशनल हुईं तमन्ना:बोलीं- 4 साल पहले रोल मिलता तो नहीं कर पाती; थिएटर्स के बाहर जूते-चप्पल उतारकर जा रहे लोग 'छठी मैया' गाने की शूटिंग में इमोशनल हुईं तमन्ना:बोलीं- 4 साल पहले रोल मिलता तो नहीं कर पाती; थिएटर्स के बाहर जूते-चप्पल उतारकर जा रहे लोग NCERT Class 9 History Syllabus Update जयपुर एयरपोर्ट पर साथ दिखे एक्ट्रेस पलक तिवारी-एक्टर इब्राहिम:एक गाड़ी में रणथंभौर के लिए हुए रवाना; फैन से मिलिंद सोमन बोले- 20 पुशअप करो
EXCLUSIVE

SC- प्राइवेट स्कूल EWS-कोटे में एडमिशन नहीं रोक सकते:स्टूडेंट को एडमिशन देने से इनकार करने की अपील को खारिज किया

SC- प्राइवेट स्कूल EWS-कोटे में एडमिशन नहीं रोक सकते:स्टूडेंट को एडमिशन देने से इनकार करने की अपील को खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने एक फैसले में कहा कि प्राइवेट (नॉन एडेड) स्कूल कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को EWS कोटे में एडमिशन देने से मना नहीं कर सकते। उन्हें एडमिशन से रोकना राइट टू एजुकेशन (RTE) का उल्लंघन है। ये बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार आर्टिकल 21A का सीधा उल्लंघन होगा। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने लखनऊ के एक प्राइवेट स्कूल ने छात्रा को एडमिशन देने से इनकार की अपील को खारिज करते ये फैसला सुनाया। लखनऊ पब्लिक स्कूल ने एडमिशन देने से मना किया था लखनऊ के एक प्राइवेट स्कूल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चैलेंज किया था, जिसमें इलाहाबाद कोर्ट ने स्कूल को EWS कोटे में बच्ची को एडमिशन देने का आदेश दिया था। दरअसल, लखनऊ पब्लिक स्कूल ने स्टेट की फाइनल लिस्ट में नाम होने के बावजूद एक छात्रा की एलिजिबिलिटी पर सवाल उठाते हुए एडमिशन देने से इनकार कर दिया था। जिसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी लगाई गई थी लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एडमिशन देने के आदेश को बरकरार रखा और स्कूल को एडमिशन देने को कहा था। इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ SC में हुई थी सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडमिशन देने के फैसले के खिलाफ स्कूल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। इस पर सुनवाई करते SC ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि ‘राइट ऑफ चिल्ड्रेन टू फ्री एंड कंप्लसरी एजुकेशन एक्ट 2009’ (RTE) सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि ‘राष्ट्रीय मिशन’ है। इसके तहत प्राइवेट स्कूलों में 25% सीटें कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना कंपल्सरी है। कोर्ट के मुताबिक, ये सिर्फ नियम नहीं, बल्कि बच्चों में समानता (इक्वॉलिटी), गरिमा (डिग्निटी) और समावेशिता (इंक्लुजन) को बढ़ावा देने के लिए है। इसके लिए ही RTE में ‘नेबरहुड स्कूल’ का कॉन्सेप्ट यानी आसपास के बच्चों को साथ पढ़ाना लाया गया है। इससे सामाजिक दूरी और भेदभाव खत्म होगा। कोर्ट ने साफ कहा कि एडमिशन में देरी या इनकार बच्चे की पढ़ाई को रोकता है। उसके मौलिक अधिकार को कमजोर करता है। इसलिए स्कूल पहले एडमिशन दें, फिर आपत्ति उठाएं। न कि इसका उल्टा करें। 25% सीटें EWS/DG/CWSN के लिए रिजर्व 2009 में राइट ऑफ चिल्ड्रेन टू फ्री एंड कंप्लसरी एजुकेशन (RTE) एक्ट पास हुआ। इसके सेक्शन 12(1)(c) में प्राइवेट नॉन-एडेड स्कूलों में कम से कम 25% सीटें माइनॉरिटी और रिजर्व्ड कैटेगरीज के लिए रिजर्व रखी गई। प्राइवेट और नॉन-एडेड स्कूलों में नए दाखिले यानी एंट्री लेवल क्लास जैसे क्लास 1, या प्री-प्राइमरी की कम से कम 25% सीटें रिजर्व्ड कैटेगरी के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। ये 25% सीटें आमतौर पर तीन तरह के बच्चों के बीच बांटी जाती हैं। EWS (इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन) में जिनकी इनकम और आर्थिक स्थिति के आधार पर केंद्र/राज्य सरकारें आर्थिक रूप से कमजोर घोषित करती हैं, वे बच्चे शामिल होते हैं। DG (डिस्एडवांटेज्ड ग्रुप्स) में आमतौर पर उन वर्गों के बच्चे शामिल होते हैं, जिन्हें सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा माना जाता है, जैसे कि SC/ST/OBC‌ (NCL – नॉन क्रिमी लेयर)। CWSN (चिल्ड्रेन विद स्पेशन नीड्स) में दिव्यांग या स्पेशल नीड्स वाले बच्चे शामिल हैं। EWS और DG, दोनों को मिलाकर 22% सीटें आरक्षित हैं। इसके अलावा CWSN के लिए 3% सीटें रिजर्व्ड हैं। इन बच्चों के स्कूल की फीस की व्यवस्था राज्य सरकारें करती हैं। 25% कोटे में एप्लीकेशन और सिलेक्शन प्रोसेस क्या है? 25% कोटा में अप्लाई करने के लिए पेरेंट्स को अपने बच्चे के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरना होता है। इस पूरे एडमिशन प्रोसेस में स्कूल किसी बच्चे को मना करने या किसी दूसरे को प्राथमिकता देने का अधिकार नहीं रखता। स्कूल स्टेट लिस्ट में लॉटरी से अलॉट हुए बच्चों को 25% कोटा में एडमिशन देने के लिए बाध्य है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… एग्जाम से 2 दिन पहले सब धुंधला दिख रहा था:दुनिया को सिर्फ 10% देखने वाली अनिष्का CBSE में 92% लाई, मैग्निफायर डिवाइस से पढ़ाई की अनिष्का गोयल दुनिया को सिर्फ 10% देख पाती हैं यानी वो 90% दृष्टिबाधित हैं। फिर भी उन्होंने CBSE में ज्यादातर स्टूडेंट्स से बेहतर प्रदर्शन किया है। उत्तर प्रदेश के हाथरस की अनिष्का ने इस साल CBSE 10वीं बोर्ड में 92.6% अंक हासिल किए हैं, वो भी किसी कोटे से नहीं, बल्कि जनरल कैटेगरी से। पूरी खबर पढ़ें…

SC- प्राइवेट स्कूल EWS-कोटे में एडमिशन नहीं रोक सकते:स्टूडेंट को एडमिशन देने से इनकार करने की अपील को खारिज किया

SC- प्राइवेट स्कूल EWS-कोटे में एडमिशन नहीं रोक सकते:स्टूडेंट को एडमिशन देने से इनकार करने की अपील को खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने एक फैसले में कहा कि प्राइवेट (नॉन एडेड) स्कूल कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को EWS कोटे में एडमिशन देने से मना नहीं कर सकते। उन्हें एडमिशन से रोकना राइट टू एजुकेशन (RTE) का उल्लंघन है। ये बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार आर्टिकल 21A का सीधा उल्लंघन होगा। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने लखनऊ के एक प्राइवेट स्कूल ने छात्रा को एडमिशन देने से इनकार की अपील को खारिज करते ये फैसला सुनाया। लखनऊ पब्लिक स्कूल ने एडमिशन देने से मना किया था लखनऊ के एक प्राइवेट स्कूल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चैलेंज किया था, जिसमें इलाहाबाद कोर्ट ने स्कूल को EWS कोटे में बच्ची को एडमिशन देने का आदेश दिया था। दरअसल, लखनऊ पब्लिक स्कूल ने स्टेट की फाइनल लिस्ट में नाम होने के बावजूद एक छात्रा की एलिजिबिलिटी पर सवाल उठाते हुए एडमिशन देने से इनकार कर दिया था। जिसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी लगाई गई थी लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एडमिशन देने के आदेश को बरकरार रखा और स्कूल को एडमिशन देने को कहा था। इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ SC में हुई थी सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडमिशन देने के फैसले के खिलाफ स्कूल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। इस पर सुनवाई करते SC ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि ‘राइट ऑफ चिल्ड्रेन टू फ्री एंड कंप्लसरी एजुकेशन एक्ट 2009’ (RTE) सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि ‘राष्ट्रीय मिशन’ है। इसके तहत प्राइवेट स्कूलों में 25% सीटें कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना कंपल्सरी है। कोर्ट के मुताबिक, ये सिर्फ नियम नहीं, बल्कि बच्चों में समानता (इक्वॉलिटी), गरिमा (डिग्निटी) और समावेशिता (इंक्लुजन) को बढ़ावा देने के लिए है। इसके लिए ही RTE में ‘नेबरहुड स्कूल’ का कॉन्सेप्ट यानी आसपास के बच्चों को साथ पढ़ाना लाया गया है। इससे सामाजिक दूरी और भेदभाव खत्म होगा। कोर्ट ने साफ कहा कि एडमिशन में देरी या इनकार बच्चे की पढ़ाई को रोकता है। उसके मौलिक अधिकार को कमजोर करता है। इसलिए स्कूल पहले एडमिशन दें, फिर आपत्ति उठाएं। न कि इसका उल्टा करें। 25% सीटें EWS/DG/CWSN के लिए रिजर्व 2009 में राइट ऑफ चिल्ड्रेन टू फ्री एंड कंप्लसरी एजुकेशन (RTE) एक्ट पास हुआ। इसके सेक्शन 12(1)(c) में प्राइवेट नॉन-एडेड स्कूलों में कम से कम 25% सीटें माइनॉरिटी और रिजर्व्ड कैटेगरीज के लिए रिजर्व रखी गई। प्राइवेट और नॉन-एडेड स्कूलों में नए दाखिले यानी एंट्री लेवल क्लास जैसे क्लास 1, या प्री-प्राइमरी की कम से कम 25% सीटें रिजर्व्ड कैटेगरी के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। ये 25% सीटें आमतौर पर तीन तरह के बच्चों के बीच बांटी जाती हैं। EWS (इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन) में जिनकी इनकम और आर्थिक स्थिति के आधार पर केंद्र/राज्य सरकारें आर्थिक रूप से कमजोर घोषित करती हैं, वे बच्चे शामिल होते हैं। DG (डिस्एडवांटेज्ड ग्रुप्स) में आमतौर पर उन वर्गों के बच्चे शामिल होते हैं, जिन्हें सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा माना जाता है, जैसे कि SC/ST/OBC‌ (NCL – नॉन क्रिमी लेयर)। CWSN (चिल्ड्रेन विद स्पेशन नीड्स) में दिव्यांग या स्पेशल नीड्स वाले बच्चे शामिल हैं। EWS और DG, दोनों को मिलाकर 22% सीटें आरक्षित हैं। इसके अलावा CWSN के लिए 3% सीटें रिजर्व्ड हैं। इन बच्चों के स्कूल की फीस की व्यवस्था राज्य सरकारें करती हैं। 25% कोटे में एप्लीकेशन और सिलेक्शन प्रोसेस क्या है? 25% कोटा में अप्लाई करने के लिए पेरेंट्स को अपने बच्चे के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरना होता है। इस पूरे एडमिशन प्रोसेस में स्कूल किसी बच्चे को मना करने या किसी दूसरे को प्राथमिकता देने का अधिकार नहीं रखता। स्कूल स्टेट लिस्ट में लॉटरी से अलॉट हुए बच्चों को 25% कोटा में एडमिशन देने के लिए बाध्य है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… एग्जाम से 2 दिन पहले सब धुंधला दिख रहा था:दुनिया को सिर्फ 10% देखने वाली अनिष्का CBSE में 92% लाई, मैग्निफायर डिवाइस से पढ़ाई की अनिष्का गोयल दुनिया को सिर्फ 10% देख पाती हैं यानी वो 90% दृष्टिबाधित हैं। फिर भी उन्होंने CBSE में ज्यादातर स्टूडेंट्स से बेहतर प्रदर्शन किया है। उत्तर प्रदेश के हाथरस की अनिष्का ने इस साल CBSE 10वीं बोर्ड में 92.6% अंक हासिल किए हैं, वो भी किसी कोटे से नहीं, बल्कि जनरल कैटेगरी से। पूरी खबर पढ़ें…

परेश रावल के विचारों से प्रेरित फिल्म ‘मर्सी’:सिनेमाघरों में रिलीज हुई, यूथेनेशिया के जटिल सवालों को उठाकर दर्शकों के बीच बहस छेड़ती है

परेश रावल के विचारों से प्रेरित फिल्म ‘मर्सी’:सिनेमाघरों में रिलीज हुई, यूथेनेशिया के जटिल सवालों को उठाकर दर्शकों के बीच बहस छेड़ती है

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म मर्सी 24 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में आई है और अपने संवेदनशील विषय के चलते चर्चा में बनी हुई है। मितुल पटेल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में राज वासुदेवा, निहारिका रायजादा, कुणाल भान और अपर्णा घोषाल अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में डायरेक्टर और कास्ट ने अपनी जर्नी, किरदारों और फिल्म के इमोशनल पहलुओं पर खुलकर बात की है। मितुल पटेल ने बताया कि इस कहानी की प्रेरणा उन्हें परेश रावल के एक इंटरव्यू से मिली, जिसमें जीवन और मृत्यु से जुड़े एक कठिन फैसले का जिक्र था। उनका कहना है कि यह फिल्म एक ऐसे विषय को सामने लाती है, जिस पर आमतौर पर लोग बात करने से बचते हैं। आपकी फिल्म अब सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और आप सबसे युवा डायरेक्टर के तौर पर सामने आए हैं इस पूरे सफर और रिलीज के बाद दर्शकों के रिस्पॉन्स को आप कैसे देखते हैं? मितुल पटेल- यह मेरे लिए अभी भी थोड़ा अवास्तविक सा महसूस होता है। तीन साल की मेहनत के बाद जब फिल्म रिलीज हुई और लोगों तक पहुंची, तो एक अलग ही सुकून मिला। इस पूरी जर्नी ने मुझे बहुत ग्राउंडेड और हंबल बना दिया है। फेस्टिवल्स में हमें पहले ही अच्छा रिस्पॉन्स मिल चुका था, लेकिन थिएटर में जब दर्शक फिल्म से जुड़ते हैं और इमोशनली रिएक्ट करते हैं, तो वो और भी खास होता है। मैं बस यही उम्मीद करता हूं कि ज्यादा से ज्यादा लोग फिल्म देखें और इससे कनेक्ट करें क्योंकि यही इस कहानी की सबसे बड़ी जीत होगी। इस फिल्म का विषय काफी संवेदनशील और ‘ग्रे’ एरिया वाला है आपको इस कहानी का विचार कहां से आया और आपने इसे फिल्म में बदलने का फैसला क्यों किया? मितुल पटेल- करीब साढ़े तीन साल पहले मैंने परेश रावल का एक इंटरव्यू देखा था। उसमें उन्होंने अपनी मां के कोमा में होने और उस मुश्किल फैसले के बारे में बात की थी कि क्या हम किसी की जिंदगी बढ़ा रहे हैं या उसकी मौत को लंबा कर रहे हैं। उनकी एक बात मेरे अंदर रह गई कि उनकी मां ने शायद खुद अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी ताकि उन्हें गिल्ट न रहे। मुझे लगा कि यह एक ऐसा विषय है जिसमें कोई एक सही जवाब नहीं है। हर इंसान अपने नजरिए से सही है। इसलिए मैंने सोचा कि इस फिल्म के जरिए अलग-अलग दृष्टिकोण दिखाए जाएं, ताकि दर्शक खुद को इन किरदारों में देखें और अपने जवाब खोजें। अपर्णा जी, आपने इस फिल्म में मां का किरदार निभाया है जो काफी इमोशनल और चुनौतीपूर्ण है इस रोल को निभाने का अनुभव कैसा रहा और इस विषय पर आपकी अपनी सोच क्या है? अपर्णा घोषाल- यह रोल सच में बहुत इमोशनल और अप-डाउन से भरा हुआ था। खासकर जब किरदार बेड पर है और उस स्थिति में है, तो उसमें खुद को डालना आसान नहीं था। यह एक ट्रॉमेटिक स्थिति है, और उसमें ढलने में थोड़ा समय लगा। जहां तक विषय की बात है, यह आज के समय में बहुत प्रासंगिक है। ‘मौत’ एक सार्वभौमिक सच है, लेकिन हम उसे कैसे फेस करते हैं या कब स्वीकार करते हैं यह बहुत बड़ा सवाल है। यूथेनेशिया जैसा विषय आज भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, और यही इस फिल्म की खूबसूरती है कि यह लोगों को सोचने पर मजबूर करती है। राज वासुदेवा, इस फिल्म से जुड़ने की आपकी यात्रा कैसे शुरू हुई और एक्टर व प्रोड्यूसर के तौर पर आपका अनुभव कैसा रहा? राज वासुदेवा- उस समय मैं हॉलैंड में था और मेरे परिवार में एक ऐसी घटना हुई थी जिससे मैं इस विषय से जुड़ पाया। मैं अच्छी स्क्रिप्ट्स की तलाश में था और तभी अजय ने मुझे इस फिल्म की एक लाइन भेजी। वह तुरंत मेरे दिल को छू गई क्योंकि मैं खुद उस स्थिति से जुड़ा हुआ था। फिर हम मिले और पहले इसे शॉर्ट फिल्म बनाने का सोचा, लेकिन कहानी इतनी बड़ी थी कि हमने इसे फीचर फिल्म में बदल दिया। एक्टर के तौर पर मेरे लिए सबसे बड़ा चैलेंज इमोशनल सीन थे उनमें घुसना आसान था क्योंकि माहौल बहुत रियल था, लेकिन बाहर निकलना मुश्किल हो जाता था। निहारिका रायजादा, आपका किरदार ‘जिया’ कई रिश्तों और भावनाओं के बीच फंसा हुआ है इस किरदार को निभाने की प्रक्रिया कैसी रही और क्या आप इस कहानी से पर्सनली जुड़ पाईं? निहारिका रायजादा- मुझे इस फिल्म के लिए ऑडिशन के जरिए चुना गया था। पर्सनल लेवल पर मैं इस विषय से जुड़ी हूं क्योंकि कोविड के दौरान मेरी नानी के साथ ऐसा अनुभव हुआ था। जब भी मैं इस फिल्म के बारे में बात करती हूं, वो यादें वापस आ जाती हैं। इसलिए यह फिल्म मेरे लिए सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव भी है। कुणाल भान, आपके किरदार में एक हल्की-फुल्की शरारत के साथ गहराई भी दिखाई देती है इस रोल को निभाने का अनुभव कैसा रहा और आप इससे कितना रिलेट कर पाए? कुणाल भान- जब मुझे इस फिल्म का ऑडिशन मिला, तभी मुझे लगा कि मुझे इसका हिस्सा बनना है क्योंकि यह एक बहुत जरूरी कहानी है, जिस पर लोग खुलकर बात नहीं करते। मेरा किरदार बाहर से थोड़ा शरारती और नटखट है, जैसा अक्सर छोटे भाई होते हैं, लेकिन उसके अंदर एक प्रैक्टिकल और इमोशनल साइड भी है। उसकी जर्नी काफी साइलेंट है, वो अपने भाव गानों और अपने तरीके से व्यक्त करता है। मैं पूरी तरह से इस स्थिति से रिलेट नहीं कर पाया, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते, मजाक और गलतफहमियां ये सब मेरे असली जीवन से काफी मिलती-जुलती हैं। हाल ही में देश में यूथेनेशिया से जुड़े फैसलों पर चर्चा बढ़ी है ऐसे समय में आपकी फिल्म का आना कितना मायने रखता है? मितुल पटेल- हमारी फिल्म तो पहले ही बन चुकी थी, लेकिन यह एक दिलचस्प संयोग है कि हाल ही में इस विषय पर चर्चा बढ़ी है। मुझे लगता है कि इससे लोगों में जिज्ञासा बढ़ेगी और वे इस विषय पर बात करने के लिए तैयार होंगे। हमारी कोशिश यही है कि लोग ‘डिग्निटी इन डाइंग’ और ‘एंड-ऑफ-लाइफ केयर’ जैसे मुद्दों पर खुलकर बातचीत करें।

परेश रावल के विचारों से प्रेरित फिल्म ‘मर्सी’:सिनेमाघरों में रिलीज हुई, यूथेनेशिया के जटिल सवालों को उठाकर दर्शकों के बीच बहस छेड़ती है

परेश रावल के विचारों से प्रेरित फिल्म ‘मर्सी’:सिनेमाघरों में रिलीज हुई, यूथेनेशिया के जटिल सवालों को उठाकर दर्शकों के बीच बहस छेड़ती है

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म मर्सी 24 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में आई है और अपने संवेदनशील विषय के चलते चर्चा में बनी हुई है। मितुल पटेल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में राज वासुदेवा, निहारिका रायजादा, कुणाल भान और अपर्णा घोषाल अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में डायरेक्टर और कास्ट ने अपनी जर्नी, किरदारों और फिल्म के इमोशनल पहलुओं पर खुलकर बात की है। मितुल पटेल ने बताया कि इस कहानी की प्रेरणा उन्हें परेश रावल के एक इंटरव्यू से मिली, जिसमें जीवन और मृत्यु से जुड़े एक कठिन फैसले का जिक्र था। उनका कहना है कि यह फिल्म एक ऐसे विषय को सामने लाती है, जिस पर आमतौर पर लोग बात करने से बचते हैं। आपकी फिल्म अब सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और आप सबसे युवा डायरेक्टर के तौर पर सामने आए हैं इस पूरे सफर और रिलीज के बाद दर्शकों के रिस्पॉन्स को आप कैसे देखते हैं? मितुल पटेल- यह मेरे लिए अभी भी थोड़ा अवास्तविक सा महसूस होता है। तीन साल की मेहनत के बाद जब फिल्म रिलीज हुई और लोगों तक पहुंची, तो एक अलग ही सुकून मिला। इस पूरी जर्नी ने मुझे बहुत ग्राउंडेड और हंबल बना दिया है। फेस्टिवल्स में हमें पहले ही अच्छा रिस्पॉन्स मिल चुका था, लेकिन थिएटर में जब दर्शक फिल्म से जुड़ते हैं और इमोशनली रिएक्ट करते हैं, तो वो और भी खास होता है। मैं बस यही उम्मीद करता हूं कि ज्यादा से ज्यादा लोग फिल्म देखें और इससे कनेक्ट करें क्योंकि यही इस कहानी की सबसे बड़ी जीत होगी। इस फिल्म का विषय काफी संवेदनशील और ‘ग्रे’ एरिया वाला है आपको इस कहानी का विचार कहां से आया और आपने इसे फिल्म में बदलने का फैसला क्यों किया? मितुल पटेल- करीब साढ़े तीन साल पहले मैंने परेश रावल का एक इंटरव्यू देखा था। उसमें उन्होंने अपनी मां के कोमा में होने और उस मुश्किल फैसले के बारे में बात की थी कि क्या हम किसी की जिंदगी बढ़ा रहे हैं या उसकी मौत को लंबा कर रहे हैं। उनकी एक बात मेरे अंदर रह गई कि उनकी मां ने शायद खुद अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी ताकि उन्हें गिल्ट न रहे। मुझे लगा कि यह एक ऐसा विषय है जिसमें कोई एक सही जवाब नहीं है। हर इंसान अपने नजरिए से सही है। इसलिए मैंने सोचा कि इस फिल्म के जरिए अलग-अलग दृष्टिकोण दिखाए जाएं, ताकि दर्शक खुद को इन किरदारों में देखें और अपने जवाब खोजें। अपर्णा जी, आपने इस फिल्म में मां का किरदार निभाया है जो काफी इमोशनल और चुनौतीपूर्ण है इस रोल को निभाने का अनुभव कैसा रहा और इस विषय पर आपकी अपनी सोच क्या है? अपर्णा घोषाल- यह रोल सच में बहुत इमोशनल और अप-डाउन से भरा हुआ था। खासकर जब किरदार बेड पर है और उस स्थिति में है, तो उसमें खुद को डालना आसान नहीं था। यह एक ट्रॉमेटिक स्थिति है, और उसमें ढलने में थोड़ा समय लगा। जहां तक विषय की बात है, यह आज के समय में बहुत प्रासंगिक है। ‘मौत’ एक सार्वभौमिक सच है, लेकिन हम उसे कैसे फेस करते हैं या कब स्वीकार करते हैं यह बहुत बड़ा सवाल है। यूथेनेशिया जैसा विषय आज भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, और यही इस फिल्म की खूबसूरती है कि यह लोगों को सोचने पर मजबूर करती है। राज वासुदेवा, इस फिल्म से जुड़ने की आपकी यात्रा कैसे शुरू हुई और एक्टर व प्रोड्यूसर के तौर पर आपका अनुभव कैसा रहा? राज वासुदेवा- उस समय मैं हॉलैंड में था और मेरे परिवार में एक ऐसी घटना हुई थी जिससे मैं इस विषय से जुड़ पाया। मैं अच्छी स्क्रिप्ट्स की तलाश में था और तभी अजय ने मुझे इस फिल्म की एक लाइन भेजी। वह तुरंत मेरे दिल को छू गई क्योंकि मैं खुद उस स्थिति से जुड़ा हुआ था। फिर हम मिले और पहले इसे शॉर्ट फिल्म बनाने का सोचा, लेकिन कहानी इतनी बड़ी थी कि हमने इसे फीचर फिल्म में बदल दिया। एक्टर के तौर पर मेरे लिए सबसे बड़ा चैलेंज इमोशनल सीन थे उनमें घुसना आसान था क्योंकि माहौल बहुत रियल था, लेकिन बाहर निकलना मुश्किल हो जाता था। निहारिका रायजादा, आपका किरदार ‘जिया’ कई रिश्तों और भावनाओं के बीच फंसा हुआ है इस किरदार को निभाने की प्रक्रिया कैसी रही और क्या आप इस कहानी से पर्सनली जुड़ पाईं? निहारिका रायजादा- मुझे इस फिल्म के लिए ऑडिशन के जरिए चुना गया था। पर्सनल लेवल पर मैं इस विषय से जुड़ी हूं क्योंकि कोविड के दौरान मेरी नानी के साथ ऐसा अनुभव हुआ था। जब भी मैं इस फिल्म के बारे में बात करती हूं, वो यादें वापस आ जाती हैं। इसलिए यह फिल्म मेरे लिए सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव भी है। कुणाल भान, आपके किरदार में एक हल्की-फुल्की शरारत के साथ गहराई भी दिखाई देती है इस रोल को निभाने का अनुभव कैसा रहा और आप इससे कितना रिलेट कर पाए? कुणाल भान- जब मुझे इस फिल्म का ऑडिशन मिला, तभी मुझे लगा कि मुझे इसका हिस्सा बनना है क्योंकि यह एक बहुत जरूरी कहानी है, जिस पर लोग खुलकर बात नहीं करते। मेरा किरदार बाहर से थोड़ा शरारती और नटखट है, जैसा अक्सर छोटे भाई होते हैं, लेकिन उसके अंदर एक प्रैक्टिकल और इमोशनल साइड भी है। उसकी जर्नी काफी साइलेंट है, वो अपने भाव गानों और अपने तरीके से व्यक्त करता है। मैं पूरी तरह से इस स्थिति से रिलेट नहीं कर पाया, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते, मजाक और गलतफहमियां ये सब मेरे असली जीवन से काफी मिलती-जुलती हैं। हाल ही में देश में यूथेनेशिया से जुड़े फैसलों पर चर्चा बढ़ी है ऐसे समय में आपकी फिल्म का आना कितना मायने रखता है? मितुल पटेल- हमारी फिल्म तो पहले ही बन चुकी थी, लेकिन यह एक दिलचस्प संयोग है कि हाल ही में इस विषय पर चर्चा बढ़ी है। मुझे लगता है कि इससे लोगों में जिज्ञासा बढ़ेगी और वे इस विषय पर बात करने के लिए तैयार होंगे। हमारी कोशिश यही है कि लोग ‘डिग्निटी इन डाइंग’ और ‘एंड-ऑफ-लाइफ केयर’ जैसे मुद्दों पर खुलकर बातचीत करें।

मझौली में ऑटो-ई-रिक्शा की आमने-सामने से टक्कर:10 घायल; दो की हालत गंभीर, पंचायच कार्यालय के सामने हुआ हादसा

मझौली में ऑटो-ई-रिक्शा की आमने-सामने से टक्कर:10 घायल; दो की हालत गंभीर, पंचायच कार्यालय के सामने हुआ हादसा

सीधी जिले के मझौली क्षेत्र में बुधवार शाम एक सड़क हादसे में 10 लोग घायल हो गए। जनपद पंचायत मझौली कार्यालय के सामने एक ऑटो और ई-रिक्शा की आमने-सामने की टक्कर में यह हादसा हुआ। घायलों में से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, एक ऑटो मझौली की ओर जा रहा था, जबकि सामने से एक ई-रिक्शा आ रहा था। दोनों वाहन तेज रफ्तार में थे और अनियंत्रित होकर आपस में भिड़ गए। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और उनमें सवार सभी यात्री घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया। स्थानीय निवासी महेंद्र साहू ने बताया कि तेज गति और साइड लेने के प्रयास में यह हादसा हुआ। ग्रामीणों ने मिलकर घायलों को तत्काल मझौली अस्पताल पहुंचाया, जिसके लिए निजी वाहनों और मोटरसाइकिलों का उपयोग किया गया। मझौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ डॉ. संदीप शुक्ला ने बताया कि अस्पताल में 10 घायलों को भर्ती किया गया है। उनकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि पहचान स्पष्ट होने पर जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। वहीं, थाना प्रभारी मझौली विशाल शर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह तेज रफ्तार और वाहन चालकों का नियंत्रण खोना सामने आया है। घायलों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। गंभीर रूप से घायल दो व्यक्तियों को जिला अस्पताल सीधी रेफर किया गया है।

दाद हो या फोड़े-फुंसी…तुरंत मिलेगा आराम, चुटकियों में हटेगा पुराने से पुराना मस्सा, आप भी नहीं जानते होंगे मदार के इतने फायदे

ask search icon

Last Updated:April 29, 2026, 19:48 IST Madar Benefits : हमारे गांवों और खेत-खलिहानों में आसानी से मिलने वाला मदार का पौधा (जिसे आक या अकौआ भी कहा जाता है) सिर्फ एक सामान्य झाड़ी नहीं. पुराने समय से ही आयुर्वेद में इसका उपयोग कई तरह की बीमारियों के इलाज में किया जाता रहा है. मदार का पौधा सूखी और बंजर जमीन पर भी उग जाता है. लोकल 18 से गोंडा के वैद्य (डॉ.) अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि मदार के पौधे में ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा संक्रमण को कम करने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, इसका रस तेज और जहरीला हो सकता है, इसलिए इसका इस्तेमाल बहुत सावधानी से ही करना चाहिए. मदार का पौधा त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं में लाभकारी है. आयुर्वेद में इसका उपयोग लंबे समय से दाद, खुजली और फोड़े-फुंसी जैसी समस्याओं के इलाज में किया जाता रहा है. लोकल 18 से गोंडा के वैद्य (डॉ.) अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि मदार के पौधे में ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा संक्रमण को कम करने में मदद कर सकते हैं. ग्रामीण इलाकों में लोग इसके पत्तों और दूध (सफेद रस) का इस्तेमाल घरेलू उपचार के रूप में करते हैं. खासतौर पर इसके दूध का उपयोग मस्से हटाने के लिए किया जाता है. अगर सही तरीके और सीमित मात्रा में इसका उपयोग किया जाए, तो यह धीरे-धीरे मस्सों को सुखा कर हटा देगा. हालांकि, इसका असर व्यक्ति की त्वचा और समस्या की गंभीरता पर भी निर्भर करता है. आयुर्वेद के अनुसार, मदार का पौधा जोड़ों के दर्द और सूजन में भी उपयोगी है. गांवों में लोग इसके पत्तों को हल्का गर्म करके दर्द वाली जगह पर बांधते हैं, जिससे दर्द और सूजन में राहत मिलती है. माना जाता है कि सही तरीके और सीमित मात्रा में इसका उपयोग करने से फायदा मिल सकता है. हालांकि, इसका रस तेज और जहरीला हो सकता है, इसलिए इसका इस्तेमाल बहुत सावधानी से और विशेषज्ञ की सलाह के साथ ही करना चाहिए. गांवों में आज भी लोग मदार के पत्तों का उपयोग जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत पाने के लिए करते हैं. इसके ताजे पत्तों को हल्का गर्म करके दर्द वाली जगह पर बांध दिया जाता है. इससे सूजन कम होती है और दर्द में आराम मिलता है. खासतौर पर बुजुर्ग लोग इस घरेलू उपाय को काफी प्रभावी मानते हैं. यह तरीका सस्ता और आसानी से उपलब्ध होने के कारण ग्रामीण इलाकों में ज्यादा प्रचलित है. हालांकि, इसका उपयोग करते समय सावधानी जरूरी है, क्योंकि कुछ लोगों की त्वचा पर जलन या एलर्जी हो सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google आयुर्वेद में मदार की जड़ और छाल का उपयोग पाचन तंत्र को सुधारने के लिए किया जाता है. माना जाता है कि सीमित मात्रा में इसका सही तरीके से इस्तेमाल गैस, कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में राहत दे सकता है. ग्रामीण इलाकों में कुछ लोग पारंपरिक ज्ञान के आधार पर इसका उपयोग करते हैं. हालांकि, यह एक शक्तिशाली पौधा है और इसका गलत सेवन नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए बिना किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए. मदार का पौधा सिर्फ औषधीय गुणों के लिए ही नहीं, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी काफी महत्त्वपूर्ण है. हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा में इसके फूल चढ़ाने की परंपरा है. मान्यता है कि मदार के फूल अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. गांवों में लोग इसे आस्था के साथ जोड़कर देखते हैं और इसके पौधे को सम्मान देते हैं. कुछ पारंपरिक उपचारों में मदार के फूल और पत्तों का उपयोग दमा (अस्थमा) और खांसी जैसी समस्याओं में किया जाता है. गांवों में लोग इसके सूखे फूलों का चूर्ण बनाकर सीमित मात्रा में इस्तेमाल करते हैं. माना जाता है कि यह श्वसन तंत्र को राहत देने और सांस लेने में आसानी पैदा करने में सहायक हो सकता है. हालांकि, यह उपाय पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है और हर व्यक्ति पर इसका असर अलग हो सकता है. डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि इसलिए इसका उपयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, ताकि किसी तरह के दुष्प्रभाव से बचा जा सके. मदार के पौधे का उपयोग छोटे-मोटे घावों को भरने के लिए भी किया जाता है.इसके औषधीय गुण घाव को जल्दी भरने और संक्रमण को कम करने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, मदार का रस तेज और संभावित रूप से जहरीला होता है, जिससे कुछ लोगों की त्वचा पर जलन या एलर्जी हो सकती है. इसलिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. डॉ. अभिषेक बताते हैं कि मदार के इतने फायदे होने के बावजूद इसका उपयोग बहुत सोच-समझकर करना चाहिए. इसके पौधे से निकलने वाला सफेद दूध जहरीला होता है, जो त्वचा पर जलन या एलर्जी पैदा कर सकता है. अगर यह आंखों में चला जाए तो गंभीर समस्या हो सकती है. इसलिए इसका इस्तेमाल करते समय हाथों में दस्ताने पहनना और आंखों से दूर रखना जरूरी है. First Published : April 29, 2026, 19:48 IST

भोपाल में तीसरी मंजिल से गिरी लिफ्ट, 7 लोग घायल:सागर प्लाजा में हुई घटना, दो के पांव में गंभीर चोटें

भोपाल में तीसरी मंजिल से गिरी लिफ्ट, 7 लोग घायल:सागर प्लाजा में हुई घटना, दो के पांव में गंभीर चोटें

भोपाल के एमपी नगर जोन-2 के सागर प्लाजा के लिफ्ट बुधवार की शाम को तीसरी मंजिल से गिर गई। इस हादसे में लिफ्ट में सवार सात लोगों को चोट आई हैं। सभी पत्रकार थे और अपने एक पत्रकार साथी से मिलकर लौट रहे थे। घायलों को नर्मदा और सेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे की सूचना एपमी नगर पुलिस को दे दी गई है। जानकारी के मुताबिक, पत्रकार रिजवान अहमद सिद्दीकी, सुशील त्रिपाठी, दिलीप भदोरिया, अनीता चौबे, प्रगति श्रीवास्तव, सादिया खान एक पत्रकार साथी से मिलने सागर प्लाजा स्थित ऑफिस में गए थे। वहां से लौटते समय तीसरी फ्लोर से लिफ्ट नीचे जा गिरी। हादसे में रिजवान अहमद सिद्दीकी और सुशील त्रिपाठी के पांव में गंभीर चोट है। सिद्दीकी का नर्मदा जबकि सुशील का सेज अस्पताल में इलाज चल रहा है।

भारतीय साड़ी में नजर आईं पॉप सिंगर रिहाना:मुंबई ट्रिप के बाद ग्रीन-पिंक साड़ी और हैवी ज्वेलरी में दिए पोज

भारतीय साड़ी में नजर आईं रिहाना:मुंबई ट्रिप के बाद ग्रीन-पिंक साड़ी और हैवी ज्वेलरी में दिए पोज

पॉप सिंगर रिहाना ने अपने मुंबई दौरे के बाद भारतीय साड़ी में फोटो शूट कराया है। रिहाना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वे ग्रीन और पिंक कलर की साड़ी पहनी हुई हैं। इस देसी लुक साथ उन्होंने डायमंड और एमराल्ड (पन्ना) की हैवी ज्वेलरी भी पहनी है। वीडियो में रिहाना साड़ी पहनकर खुशी से पोज देती नजर आ रही हैं। उन्होंने अपनी ज्वेलरी को भी वीडियो में खास तौर पर फ्लॉन्ट किया है। रिहाना के इस लुक पर फैंस सोशल मीडिया पर खूब कमेंट्स कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा पारंपरिक साड़ी और ज्वेलरी में रिहाना को देखना किसी सपने जैसा है, वे वाकई काफी सुंदर लग रही हैं। अंबानी के घर भी पहुंची थीं रिहाना रिहाना हाल ही में अपने ब्यूटी ब्रांड के एक प्रमोशनल इवेंट के सिलसिले में मुंबई आई थीं। यहां उन्होंने एक पॉप-अप स्टोर लॉन्च और एक प्राइवेट इवेंट में हिस्सा लिया। रिहाना प्राइवेट जेट से मुंबई पहुंचीं। इस दौरान वे रविवार को मुकेश अंबानी के घर ‘एंटीलिया’ भी गईं। अंबानी परिवार ने रिहाना का स्वागत बिल्कुल देसी अंदाज में किया। रिहाना ने परिवार के साथ खास लंच किया और घर के सदस्यों के साथ डांस करती भी नजर आईं। 2024 में पहली बार आई थीं भारत यह रिहाना का भारत का दूसरा दौरा था। इससे पहले वे साल 2024 में एक बड़ी शादी (अंबानी प्री-वेडिंग) में परफॉर्म करने के लिए जामनगर आई थीं। उस वक्त उन्होंने अपने पहले भारतीय परफॉर्मेंस से काफी सुर्खियां बटोरी थीं। उस दौरान रिहाना ने वादा किया था कि वे जल्द ही दोबारा भारत आएंगी और उन्होंने अपना यह वादा पूरा भी किया।

भारतीय साड़ी में नजर आईं रिहाना:मुंबई ट्रिप के बाद ग्रीन-पिंक साड़ी और हैवी ज्वेलरी में दिए पोज

भारतीय साड़ी में नजर आईं रिहाना:मुंबई ट्रिप के बाद ग्रीन-पिंक साड़ी और हैवी ज्वेलरी में दिए पोज

पॉप सिंगर रिहाना ने अपने मुंबई दौरे के बाद भारतीय साड़ी में फोटो शूट कराया है। रिहाना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वे ग्रीन और पिंक कलर की साड़ी पहनी हुई हैं। इस देसी लुक साथ उन्होंने डायमंड और एमराल्ड (पन्ना) की हैवी ज्वेलरी भी पहनी है। वीडियो में रिहाना साड़ी पहनकर खुशी से पोज देती नजर आ रही हैं। उन्होंने अपनी ज्वेलरी को भी वीडियो में खास तौर पर फ्लॉन्ट किया है। रिहाना के इस लुक पर फैंस सोशल मीडिया पर खूब कमेंट्स कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा पारंपरिक साड़ी और ज्वेलरी में रिहाना को देखना किसी सपने जैसा है, वे वाकई काफी सुंदर लग रही हैं। अंबानी के घर भी पहुंची थीं रिहाना रिहाना हाल ही में अपने ब्यूटी ब्रांड के एक प्रमोशनल इवेंट के सिलसिले में मुंबई आई थीं। यहां उन्होंने एक पॉप-अप स्टोर लॉन्च और एक प्राइवेट इवेंट में हिस्सा लिया। रिहाना प्राइवेट जेट से मुंबई पहुंचीं। इस दौरान वे रविवार को मुकेश अंबानी के घर ‘एंटीलिया’ भी गईं। अंबानी परिवार ने रिहाना का स्वागत बिल्कुल देसी अंदाज में किया। रिहाना ने परिवार के साथ खास लंच किया और घर के सदस्यों के साथ डांस करती भी नजर आईं। 2024 में पहली बार आई थीं भारत यह रिहाना का भारत का दूसरा दौरा था। इससे पहले वे साल 2024 में एक बड़ी शादी (अंबानी प्री-वेडिंग) में परफॉर्म करने के लिए जामनगर आई थीं। उस वक्त उन्होंने अपने पहले भारतीय परफॉर्मेंस से काफी सुर्खियां बटोरी थीं। उस दौरान रिहाना ने वादा किया था कि वे जल्द ही दोबारा भारत आएंगी और उन्होंने अपना यह वादा पूरा भी किया।

लंदन में दो यहूदियों पर चाकू से हमला:दोनों घायल, पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया, आतंकी लिंक की जांच शुरू

लंदन में दो यहूदियों पर चाकू से हमला:दोनों घायल, पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया, आतंकी लिंक की जांच शुरू

ब्रिटेन की राजधानी लंदन में दो यहूदी लोगों पर चाकू से हमला हुआ है। हमले में घायल दोनों लोगों को मौके पर प्राथमिक इलाज देने के बाद अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस के मुताबिक दोनों की हालत स्थिर है। हमला नॉर्थ लंदन के गोल्डर्स ग्रीन इलाके में हुआ, जहां बड़ी संख्या में यहूदी समुदाय के लोग रहते हैं। पुलिस ने घटना के कुछ समय बाद 45 साल के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने कहा है कि काउंटर टेरर यूनिट मामले की जांच कर रही है और आतंकी लिंक की भी पड़ताल हो रही है। मेट्रोपॉलिटन पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पुलिसकर्मियों पर भी चाकू से हमला करने की कोशिश की। इसके बाद उसे टेजर मारकर काबू किया गया। BBC ने स्थानीय लोगों को हवाले स बताया कि पहला हमला गोल्डर्स ग्रीन रोड पर दुकानों के बाहर हुआ, जबकि दूसरा पास की साइड रोड पर सिनेगॉग (यहूदी धार्मिक स्थल) के बाहर हुआ। पुलिस के आरोपी को पकड़ने का वीडियो… PM स्टार्मर बोले- यहूदी समुदाय पर हमला, ब्रिटेन पर हमला ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने यहूदी लोगों पर हुए हमले की निंदा की है। उन्होंने कहा कि यहूदी समुदाय पर हमला, ब्रिटेन पर हमला है। स्टार्मर ने कहा कि हमला बेहद चिंताजनक है और इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस घटना को यहूदी विरोधी बेहद भयावह हमला बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यहूदी समुदाय को निशाना बनाना पूरे ब्रिटेन पर हमला है। लंदन मेयर सादिक खान ने कहा कि इलाके में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घटना के बाद इलाके को कुछ समय के लिए सील कर दिया गया। सड़कों पर सशस्त्र पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई और कई जगह बैरिकेड लगाए गए। यहूदी समुदाय के अंतरराष्ट्रीय संगठन ने कार्रवाई की मांग की हमले के बाद यहूदी समुदाय के अंतरराष्ट्रीय संगठन वर्ल्ड जियोनिस्ट ऑर्गनाइजेशन ने PM कीर स्टार्मर और लंदन के मेयर सादिक खान से कार्रवाई की मांग की। संगठन के चेयरमैन याकोव हागोएल ने यहूदियों के खिलाफ बढ़ती नफरत पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। यहूदियों के खिलाफ भड़काऊ माहौल खतरनाक साबित हो सकता है। संगठन ने यहूदी इलाकों, उपासना स्थलों और सामुदायिक संस्थानों की सुरक्षा बढ़ाने की अपील की। इजराइल के अलियाह मंत्री ओफिर सोफर ने कहा कि ब्रिटेन में यहूदियों की सुरक्षा स्थिति लगातार बिगड़ रही है। उनके मुताबिक इजराइल यहूदियों को वहां से बसाने के लिए योजनाओं पर काम कर रहा है। यहूदियों पर हमले का CCTV वीडियो… लंदन के यहूदी इलाकों में लगातार हमले बढ़े लंदन के यहूदी बहुल इलाकों में हाल के हफ्तों में हमलों और आगजनी की घटनाएं बढ़ गई हैं। गोल्डर्स ग्रीन और आसपास के क्षेत्रों में लगातार वारदातों से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ी है। 23 मार्च को गोल्डर्स ग्रीन में यहूदी समुदाय की आपात सेवा हत्जोला की चार एम्बुलेंस जला दी गई थीं। 15 अप्रैल को फिंचली रिफॉर्म सिनेगॉग के बाहर ज्वलनशील बोतलें रखकर आग लगाने की कोशिश की गई थी। उसी दिन ईरान इंटरनेशनल के दफ्तर के कार पार्क में जलता कंटेनर फेंका गया था, हालांकि आग खुद बुझ गई। पिछले शुक्रवार एक ऐसी इमारत को निशाना बनाया गया, जहां पहले एक यहूदी संगठन का दफ्तर था। इजराइली दूतावास के पास अज्ञात पदार्थ से भरे जार भी मिले थे। पुलिस ने बाद में सामग्री को हानिरहित बताया। पिछले रविवार केंटन यूनाइटेड सिनेगॉग पर फायरबॉम्ब फेंका गया था। इससे एक कमरे में हल्का धुआं नुकसान हुआ, लेकिन कोई घायल नहीं हुआ।