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तेल कंपनियों ने 2025-26 में रोजाना ₹116 करोड़ मुनाफा कमाया:पिछले वित्त-वर्ष में कच्चे तेल की कीमत कोविड के बाद सबसे कम रही

तेल कंपनियों ने 2025-26 में रोजाना ₹116 करोड़ मुनाफा कमाया:पिछले वित्त-वर्ष में कच्चे तेल की कीमत कोविड के बाद सबसे कम रही
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  • Oil Companies Earned A Daily Profit Of ₹116 Crore In 2025–26, As Crude Oil Prices Remained At Their Lowest Levels Since The COVID 19 Pandemic During The Previous Financial Year

मुंबई27 मिनट पहलेलेखक: गुरुदत्त तिवारी

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ईरान-अमेरिका जंग के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड गुरुवार को 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जो 4 साल का उच्चतम स्तर है। हालांकि, बाद में दाम 116 डॉलर तक ​आ गए। ऐसे में एजेंसियों के हवाले से बताया जा रहा है कि ईरान युद्ध की वजह से महंगे कच्चे तेल से देश की तेल कंपनियों को रोजाना 2,400 करोड़ का नुकसान हो रहा है।

पेट्रोल पर प्रति लीटर 14 रुपए और डीजल पर 18 रुपए का नुकसान झेलना पड़ रहा है। इससे तेल कंपनियां पेट्रो मूल्य बढ़ाने का दबाव बना रही हैं। जबकि, हकीकत ये है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कच्चे तेल के औसत दाम महज 71 डॉलर प्रति बैरल रहे, जो कोविड वर्ष 2020-21 के बाद सबसे कम हैं।

युद्ध 28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ था और 27 फरवरी तक दाम 76 डॉलर प्रति बैरल थे। ऐसे में महज 2 महीने में ही क्रूड की कीमतें चढ़ी हैं। जबकि, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 के शुरुआती 9 महीनों में देश की चार अग्रणी तेल कंपनियों ने कुल 1.37 लाख करोड़ रु. यानी हर रोज 116 करोड़ रुपए का लाभ कमाया।

हमारे लिए क्रूड का भाव $50 घट चुका

1. ईरान सीजफायर के बाद क्रूड के भाव?

ईरान-अमेरिका युद्धबंदी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। इंडियन बास्केट में कच्चे तेल के दाम, जो 150 डॉलर पहुंच गए थे, अब 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गए हैं।

2. सरकार ने क्या किया?

सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रु. की कटौती की थी। इससे प्रति माह लगभग 12,000 करोड़ के राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया है।

3. सरकार घाटे की भरपाई कैसे कर रही?

सरकार ने डीजल के निर्यात पर लगने वाले ‘विंडफाल टैक्स’ का सहारा लिया है। 11 अप्रैल को सरकार ने डीजल निर्यात पर लगने वाले इस टैक्स को 21.50 रु. प्रति लीटर से बढ़ाकर सीधे 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया।

4. विंडफाल टैक्स से कितनी आय हो रही है?

भारत से हर महीने औसतन 191 करोड़ लीटर डीजल का निर्यात होता है। विंडफाल टैक्स बढ़ाने के बाद सरकार को केवल डीजल निर्यात से ही करीब 10,500 करोड़ रु. की मासिक आय हो रही है, जो एक्साइज ड्यूटी से हुए नुकसान की काफी हद तक भरपाई कर देती है।

5. तेल कंपनियों ने क्या पाबंदियां लगाईं?

कंपनियां घाटा कम करने ‘राशनिंग’ का सहारा ले रही हैं। पंप संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पिछले वर्ष की बिक्री के बराबर ही स्टॉक बेचें। एक बार में किसी भी ग्राहक को 200 लीटर से अधिक डीजल न देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उद्योगों को होने वाली बल्क सप्लाई को रोका जा सके।

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