पशुपालकों के लिए अलर्ट! अप्रैल-मई की गर्मी में ऐसे रखें पशुओं का ख्याल, नहीं तो होगा नुकसान

Last Updated:April 29, 2026, 15:28 IST गर्मियों का मौसम सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, पशुओं के लिए भी बड़ी चुनौती बनकर आता है. अप्रैल और मई की तेज धूप, लू और बढ़ते तापमान का सीधा असर पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन पर पड़ता है. कई बार सही देखभाल न होने पर पशु बीमार पड़ जाते हैं और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में पशुपालन करने वाले किसानों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि गर्मियों में पशुओं को कैसे सुरक्षित रखा जाए. एक्सपर्ट्स ने कुछ आसान उपाय बताए हैं, जिन्हें अपनाकर पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है और दूध उत्पादन भी बेहतर बनाए रखा जा सकता है. लखीमपुर खीरी. जिले में किसान अब पशुपालन पर अधिक जोर दे रहे हैं जिस कारण किसानों को अच्छा खासा मुनाफा होता है. वही पशुपालन विभाग की ओर से लगातार किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है. परंतु गर्मियों के मौसम में पशुओं की देखभाल करना बेहद जरूरी होता है. थोड़ी सी लापरवाही होने के कारण पशुओं की मौत भी हो जाती है. पशुपालन तो हर किसान करना चाहता है तो वही पशुपालन विभाग की ओर से किसानों को अनुदान भी दिया जा रहा है. परंतु जानकारी के अभाव के कारण सही तरीके से पशुओं की देखभाल नहीं कर पाते हैं ऐसे में अप्रैल और मई के महीने में पशुओं की देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है. इन दो महीने में सबसे अधिक हीट वेव भीषण गर्मी और लू के कारण पशुओं के दूध में कमी आती है. जिससे किसान बेहद परेशान हो जाते हैं. हीट स्ट्रोक (लू लगना), डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) और ब्लोट (पेट फूलना) जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं. Add News18 as Preferred Source on Google हीट स्ट्रोक की स्थिति में पशु को तेज बुखार आ सकता है, वह हांफने लगता है, आंखें लाल हो जाती हैं. शरीर बहुत गर्म महसूस होता है. वहीं पानी की कमी होने पर पशु कमजोर पड़ जाता है. लोकल 18 से बातचीत करते हुए डॉक्टर हेमंत सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अपनी आजीविका को चलाने के लिए पशुपालन पर अधिक जोर दे रहे हैं. लेकिन गर्मियों के मौसम में पशुओं को धूप से बचाना बेहद जरूरी होता है, थोड़ी सी लापरवाही होने के कारण पशुओं की मृत्यु भी हो सकती है. पशुओं को सीधे धूप और लू से बचने के लिए छायादार और हवादार स्थानों पर 11:00 से लेकर 4:00 तक सुरक्षित स्थान पर बांध कर रखें. गर्मियों के मौसम में पशुओं को दिन में तीन बार पर्याप्त मात्रा में ठंडा पानी दें. पशुओं को संतुलित आहार देते समय नमक और मिलर मिक्सर मिले. ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी ना हो. गर्मियों के मौसम में पशुओं को दिन में दो से तीन बार स्नान का ध्यान रखें. सुरक्षित छायादार स्थान का चयन कर वहीं पर ही पशुओं को स्नान कराए, धूप में पशुओं को स्नान न कराएं. First Published : April 29, 2026, 15:28 IST
समर्थन मूल्य पर चना खरीदी में अड़चनें:पंजीयन के बाद भी स्लॉट नहीं मिलने से किसान नाराज, भावांतर की भी मांग

प्रदेश में समर्थन मूल्य पर चना खरीदी को लेकर किसानों का कहना है कि खरीदी प्रक्रिया में लागू स्लॉट बुकिंग व्यवस्था उनके लिए सबसे बड़ी बाधा बन गई है। मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ तहसील के किसानों का चना पिपलियामंडी स्थित विपणन सहकारी समिति के माध्यम से खरीदा जा रहा है। किसानों का कहना है कि पंजीयन होने के बावजूद उन्हें स्लॉट बुकिंग नहीं मिल पा रही है, जिससे वे अपनी उपज बेचने के लिए भटकने को मजबूर हैं। कई बार प्रयास के बाद भी स्लॉट नहीं मिलने से बार-बार नई तारीख दी जा रही है, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पंजीयन के बाद भी क्यों नई प्रक्रिया? राजेश शर्मा दोबड़ा, रुपसिंह शक्तावत, कृपाल सिंह रिंच्छा, अनिल प्रजापत (खेड़ाखादान) सहित अन्य किसानों ने बताया कि कई कोशिशों के बाद भी स्लॉट बुकिंग नहीं हो पा रही है। अधिकारियों द्वारा 6 मई से स्लॉट बुकिंग शुरू होने की बात कही जा रही है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। किसानों का सवाल है कि जब पंजीयन पहले ही हो चुका है, तो स्लॉट बुकिंग जैसी अतिरिक्त प्रक्रिया क्यों लागू की गई है। जांच और सख्ती से बढ़ी देरी किसानों ने खरीदी केंद्रों पर अत्यधिक सख्ती और बार-बार जांच किए जाने पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि इससे खरीदी प्रक्रिया में देरी हो रही है और उन्हें कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे अतिरिक्त खर्च भी बढ़ रहा है। आर्थिक दबाव में बढ़ रही परेशानी किसानों का कहना है कि शादी-ब्याह, बच्चों की फीस और घरेलू खर्च जैसी जिम्मेदारियों के चलते उन्हें तत्काल पैसों की जरूरत होती है। ऐसे में स्लॉट बुकिंग जैसी जटिल प्रक्रिया उन्हें और अधिक परेशानी में डाल रही है, जिसका सीधा फायदा व्यापारी उठा रहे हैं। ओलावृष्टि से नुकसान का नहीं मिला मुआवजा किसानों ने हाल ही में हुई ओलावृष्टि और बारिश से फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि प्रभावित किसानों को अब तक न तो उचित मुआवजा मिला है और न ही बीमा राशि का भुगतान किया गया है। यह हैं किसानों की मांग चने की खरीदी समर्थन मूल्य के बजाय भावांतर योजना के तहत की जाए। स्लॉट बुकिंग प्रक्रिया को सरल बनाया जाए या समाप्त किया जाए। पंजीयन के बाद सीधे खरीदी की व्यवस्था लागू हो। ओलावृष्टि प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा और बीमा राशि दी जाए।
हरदा पॉलिटेक्निक में राल्सन टायर्स का कैंपस ड्राइव:डिप्लोमा, आईटीआई पास युवाओं को मिलेगा रोजगार का अवसर

हरदा में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में राल्सन टायर्स लिमिटेड कंपनी द्वारा कैंपस ड्राइव का आयोजन किया जा रहा है। यह ड्राइव 30 अप्रैल को सुबह 10 बजे से शुरू होगी। कॉलेज के प्राचार्य ने बताया कि यह कैंपस ड्राइव ‘डिप्लोमा अप्रेंटिस ट्रेनी’ और ‘स्टूडेंट ट्रेनी’ पदों के लिए आयोजित की जा रही है। इसमें डिप्लोमा और आईटीआई पास युवा भाग ले सकते हैं। डिप्लोमा अप्रेंटिस के लिए पात्रता ‘डिप्लोमा अप्रेंटिस ट्रेनी’ पद के लिए मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, टूल एंड डाई, ऑटोमोबाइल जैसी शाखाओं से वर्ष 2023, 2024 और 2025 में पासआउट हुए विद्यार्थी पात्र होंगे। इसके अलावा वर्ष 2026 के अंतिम वर्ष के छात्र भी इसमें शामिल हो सकते हैं। ‘स्टूडेंट ट्रेनी’ पद के लिए मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, टूल एंड डाई, ऑटोमोबाइल, फिटर, वेल्डर और डीजल शाखाओं से वर्ष 2024, 2025 और 2026 में पासआउट हुए विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। ये जरूरी दस्तावेज साथ लाएं इच्छुक विद्यार्थियों को अपने साथ अपडेटेड बायोडाटा, पासपोर्ट साइज फोटो, सभी शैक्षणिक मार्कशीट और सर्टिफिकेट (मूल एवं फोटोकॉपी) तथा आधार कार्ड लेकर उपस्थित होना होगा।
गैस से तुरंत राहत देगा नींबू का ये देसी नुस्खा, दवा की नहीं पड़ेगी जरूरत, 2 घंटे में दिखेगा असर

Last Updated:April 29, 2026, 14:42 IST Home Remedies for Gas: झारखंड की राजधानी रांची में खासतौर पर लोकल लोगों को जब गैस हो जाता है तो बाजार जाकर दवाइयां नहीं खरीदते हैं. साथ ही न दौड़ते हुए डॉक्टर के पास जाते हैं. वह अपने घर में ही 1-2 टोटके को अपनाते हैं, जिससे उनको जबरदस्त राहत मिलती है. इनमें से एक विकल्प नींबू वाला पानी है. जिसको आजमाते ही आपको दो से तीन घंटे में काफी राहत मिलना शुरू हो जाएगी. आयुर्वेदिक डॉक्टर भी इसे लोहा मानते हैं. आइये जानते हैं और भी घरेलू इलाज के बारे में. रांची के आयुर्वेदिक डॉक्टर वीके पांडे ( विनोबा भावे यूनिवर्सिटी से बीएएमएस, 20 सालों से अधिक का अनुभव) बताते हैं कि अगर पेट में गैस हो जाए तो सबसे पहले एक नींबू ले लें. उसको बीच से काट लें. वह जो आधा नींबू है, उसको चिमटे की मदद से सीधा गैस की बर्नर में रख दें और गर्म कर लें. मतलब अच्छा खासा गरम हो जाना चाहिए. जब ऐसा हो जाए तो उसको नीचे उतार लें और बस दो चीज और मिला लें. इसी नींबू में आपको ऊपर काला नमक और जीरा पाउडर थोड़ा सा डालकर इन दोनों को मिला लेना है. बस बहुत अधिक नहीं डालना है. एकदम एक-एक चुटकी और उसको मिलाना भी नहीं है और ना कहीं रगड़ना है. Add News18 as Preferred Source on Google अब आपको इसको सीधे अपने जीभ में इसका रस बढ़िया से गार लेना है और ऐसा करने के बाद ऐसा नहीं की तुरंत पी भी लेना है, अब इसे 2-3 मिनट तक जीभ में छोड़ दें. दो से तीन मिनट जब आप छोड़ेंगे तो यह आपके मुंह में अपने आप ही घुल जाएगा, थोड़ा सा अधिक खट्टा लगेगा, पर थोड़ा सब्र रखिये. इसके बाद आप देखेंगे आपके मुंह में पूरी तरह घुल चुका है और फिर थोड़ा गुनगुना पानी भी पी सकते हैं और आप देखेंगे दो-तीन घंटे में ही आपका पेट काफी हल्का लगने लगेगा व गैस प्राकृतिक रूप से खत्म हो जाएगी. आयुर्वैदिक डॉक्टर वीके पांडे बताते हैं कि जीरा पाउडर, नींबू और काला नमक जब भी तीनों मिलता है तो एक तो आपका मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है और आपके डाइजेस्टिव सिस्टम और गट हेल्थ को एक्टिव करता है व अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाता है. इससे आपका पेट काफी हल्का और काफी रिलैक्स महसूस होगा. First Published : April 29, 2026, 14:42 IST
लापता डीजे संचालक का कुंए में मिला शव:4 दिन से था गायब, बच्चियों ने देखा था शव; सोने की बात कहकर निकला था

अनूपपुर जिले के करनपठार थाना क्षेत्र के पडरीखार गांव में मंगलवार को एक कुएं में मिले शव की पहचान हो गई है। यह शव पडरीखार निवासी हेमंत कुमार सिंह (19) का है, जो 25 अप्रैल से लापता था। पुलिस ने शव का पंचनामा और पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया है। युवक के बड़े भाई लवकेश सिंह ने बताया कि हेमंत 25 अप्रैल को एक शादी समारोह में डीजे बजाने गया था। रात में वह सड़क किनारे बने अपने दूसरे घर में सोने की बात कहकर समारोह से निकला था। इसके बाद 26 अप्रैल की सुबह से वह दिखाई नहीं दिया। बच्चियों ने कुंए में देखा शव शुरुआत में परिजनों ने सोचा कि हेमंत डीजे के काम के सिलसिले में आसपास के गांव गया होगा। हालांकि, 28 अप्रैल को जिस घर में युवक ने डीजे बजाया था, उसी घर की कुछ किशोरियां सड़क से 100 मीटर दूर स्थित कुएं पर नहाने गईं। वहीं उन्होंने युवक का शव कुएं में देखा। थाना प्रभारी वीरेंद्र कुमार बड़करे ने बताया कि शव काफी सूज गया था, जिस कारण शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं दिख रहे थे। परिजनों ने युवक के किसी से विवाद होने की जानकारी से अनभिज्ञता जताई है। पुलिस फिलहाल मौत के कारणों की जांच कर रही है। शव को कुएं से बाहर निकाला स्थानीय ग्रामीण बहादुर सिंह ने मंगलवार शाम 6:30 बजे करनपठार थाना पुलिस को कुएं में शव दिखने की सूचना दी थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस रात 10 बजे गांव पहुंची और शव को कुएं से बाहर निकालकर बेनीबारी स्वास्थ्य केंद्र ले गई थी। ये खबर भी पढ़े… कुएं में मिला शख्स का शव:बच्चियों ने देखा, पुलिस ने रात में बाहर निकाला; पहचान नहीं हो पाई अनूपपुर जिले के करनपठार थाना क्षेत्र के पडरीखार गांव में मंगलवार दोपहर एक शख्स की लाश कुएं में मिली। गांव के बहादुर सिंह ने इसकी सूचना पुलिस को दी। थाना प्रभारी ने बताया कि गांव में एक शादी का कार्यक्रम था। दोपहर करीब 2-3 बजे कुछ लड़कियां नहाने के लिए गांव के सरकारी कुएं पर गई थीं। पढ़े पूरी खबर…
नरसिंहपुर में अधेड़ का फंदे पर मिला शव:लिवर की बीमारी से परेशान थे, बेटा बोले-लगातार खराब रहती थी तबीयत

नरसिंहपुर शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में 52 साल के व्यक्ति का शव फांसी के फंदे पर मिला। घटना बुधवार सुबह की है। मृतक की पहचान केवल सिंह विश्वकर्मा (52) के रुप में हुई है। दो सालों से लिवर की बीमारी से जूझ रहे थे जानकारी के अनुसार, केवल सिंह विश्वकर्मा (52) महारानी लक्ष्मी वार्ड भाटिया टोला के निवासी थे। वह पिछले लगभग दो सालों से लिवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। परिजनों ने बताया कि उनकी तबीयत लगातार खराब रहती थी और हाल ही में उनके पेट में सूजन भी बढ़ गई थी। बेटा बोला-बीमारी के कारण परेशान थे पिता मृतक के बेटे मनीष विश्वकर्मा ने बताया कि परिवार उनका इलाज करा रहा था। गुरुवार को उन्हें बेहतर इलाज के लिए भोपाल ले जाने की तैयारी भी की गई थी। हालांकि, बुधवार को ही उन्होंने अपने घर पर फांसी लगाकर यह कदम उठा लिया। परिजनों ने जब उन्हें देखा तो तत्काल मोहल्ले के लोगों को सूचना दी। इसके बाद कोतवाली पुलिस को जानकारी दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। परिजनों का कहना है कि केवल सिंह बीमारी के कारण मानसिक और शारीरिक रूप से अत्यधिक परेशान थे, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया होगा। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
एग्ज़िट पोल में ग़लती की गुंजाइश: 5% का स्विंग फ़्लिप परिणाम क्यों | भारत समाचार

आखरी अपडेट:29 अप्रैल, 2026, 13:48 IST एग्ज़िट पोल एक विशिष्ट क्षण में मतदाता की भावना को दर्शाते हैं, लेकिन बहु-चरणीय चुनावों में, प्रचार, गठबंधन या स्थानीय मुद्दों के कारण चरणों के बीच राय बदल सकती है। एग्जिट पोल एक नमूने पर निर्भर करते हैं, पूरे मतदाताओं पर नहीं। (फोटो: पीटीआई फाइल) विधानसभा चुनाव 2026: चार राज्यों, तमिलनाडु, केरल, असम और पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के लिए एग्जिट पोल के नतीजे आज शाम को घोषित किए जाएंगे, जहां इस महीने अपने नए विधायकों को चुनने के लिए चुनाव हुए थे। वोटों की गिनती 4 मई को होगी. भारतीय चुनावों के उच्च-दाव वाले क्षेत्र में, एक एग्ज़िट पोल विजेताओं और हारने वालों को दर्शाता है, लेकिन वोट शेयर में 3-5 प्रतिशत अंक की त्रुटि का एक मामूली अंतर 50-100 सीटों का नाटकीय उतार-चढ़ाव कर सकता है, जो अनुमानित भूस्खलन को त्रिशंकु घरों में बदल सकता है या आरामदायक बहुमत को कांटे की टक्कर में बदल सकता है। और पढ़ें | इसे सही कौन करता है? भारत के सबसे सटीक एग्ज़िट पोलस्टर्स पर एक नज़र एग्ज़िट पोल में ग़लती की गुंजाइश इसके मूल में, त्रुटि की संभावना एक सांख्यिकीय सहारा है। एग्जिट पोल एक नमूने पर निर्भर करते हैं, पूरे मतदाताओं पर नहीं। सावधानीपूर्वक डिज़ाइन के साथ भी, वह नमूना कभी भी लाखों मतदाताओं को पूरी तरह से प्रतिबिंबित नहीं कर सकता है। भारत में एक सामान्य एग्ज़िट पोल में त्रुटि की संभावना लगभग ±3% से ±5% तक हो सकती है। इसका मतलब है कि अगर किसी पार्टी को 45% वोट शेयर का अनुमान है, तो उसका वास्तविक समर्थन संभवतः 40% और 50% के बीच कहीं भी हो सकता है। कड़े मुकाबले वाले चुनावों में यह दायरा निर्णायक हो जाता है। एग्ज़िट पोल एक विशिष्ट क्षण में मतदाता की भावना को दर्शाते हैं, लेकिन बहु-चरणीय चुनावों में, प्रचार, गठबंधन या स्थानीय मुद्दों के कारण चरणों के बीच राय बदल सकती है। मौसम, मतदान में भिन्नता और अंतिम समय में लामबंदी के प्रयास तस्वीर को और जटिल बनाते हैं। यहां तक कि जब सैंपलिंग सही हो, तब भी वोट शेयर को सीटों में तब्दील करना एक और चुनौती है। मॉडल में क्षेत्रीय विविधताओं, पिछले मतदान पैटर्न और उम्मीदवार कारकों को ध्यान में रखना चाहिए। वोट शेयर में एक छोटी सी त्रुटि सीट अनुमानों में एक बड़ी त्रुटि का कारण बन सकती है। इसीलिए अनुभवी विश्लेषक एग्जिट पोल को फैसले नहीं, बल्कि संकेतक मानते हैं। वे एक स्नैपशॉट प्रदान करते हैं, पूरी तस्वीर नहीं। और पढ़ें | एग्ज़िट पोल कैसे काम करते हैं? कार्यप्रणाली, गणित और त्रुटि की संभावना पर संपूर्ण मार्गदर्शिका जब त्रुटि का मार्जिन फ़्लिप हो गया तो वास्तविक परिणाम 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान एग्जिट पोल की सीमाएं खुलकर सामने आईं। लगभग सभी प्रमुख सर्वेक्षणकर्ताओं ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को 350-400 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है। हालाँकि, वास्तविक परिणाम कहीं अधिक मामूली था, गठबंधन ने केवल 300 का आंकड़ा पार किया और भाजपा ने अपने दम पर 240 सीटें हासिल कीं। यह मतभेद राष्ट्रीय तस्वीर तक ही सीमित नहीं था। यह उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख राज्यों में विशेष रूप से स्पष्ट था, जहां वोट शेयर में मामूली बदलाव भी सीट परिणामों में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। यह कोई अलग मामला नहीं था. 2004 में, एग्जिट पोल ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाले एनडीए के लिए सत्ता में आरामदायक वापसी की भविष्यवाणी की थी। इसके बजाय, मतदाताओं ने एक आश्चर्यजनक फैसला सुनाया, जिससे यूपीए के लिए सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त हो गया, और एनडीए लगभग 181 सीटों पर सिमट गया। अभी हाल ही में, एग्जिट पोल ने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की व्यापक जीत को कम करके आंका था। इसी तरह की गलत गणनाएं 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों और 2024 के हरियाणा चुनावों में देखी गईं, जहां अनुमानों में कांग्रेस की जीत की ओर इशारा किया गया था, लेकिन अंततः भाजपा ने सरकार बनाई। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 29 अप्रैल, 2026, 13:47 IST न्यूज़ इंडिया क्यों एग्ज़िट पोल आपको गुमराह कर सकते हैं और कैसे 5% का मार्जिन सब कुछ बदल देता है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)एग्जिट पोल में त्रुटि का मार्जिन(टी)एग्जिट पोल में त्रुटि का मार्जिन(टी)एग्जिट पोल सटीकता(टी)एग्जिट पोल गलत क्यों होते हैं(टी)5 प्रतिशत स्विंग एग्जिट पोल(टी)एग्जिट पोल बनाम वास्तविक परिणाम(टी)सैंपलिंग त्रुटि एग्जिट पोल(टी)एग्जिट पोल समझाया(टी)एग्जिट पोल कैसे काम करते हैं(टी)एग्जिट पोल भविष्यवाणी त्रुटि(टी)मतदान में त्रुटि का मार्जिन भारत(टी)एग्जिट पोल सीट प्रक्षेपण त्रुटि
लॉकर रूम में बसती है टेनिस की अलग दुनिया:कभी आई कॉन्टैक्ट से बचते हैं, तो कभी साथ में हार का गम बांटते हैं प्रतिद्वंद्वी

खेल की दुनिया में टेनिस को सबसे ‘अकेला’ खेल माना जाता है। कोर्ट पर खिलाड़ी हर पॉइंट के बीच अपनी रणनीति और भावनाओं को संभालते हुए अक्सर खुद से बातें करते नजर आते हैं। लेकिन कोर्ट के बाहर लॉकर रूम का माहौल कहीं ज्यादा जटिल और दिलचस्प होता है। यहां वही खिलाड़ी एक साथ मौजूद होते हैं, जो कुछ देर में एक-दूसरे के खिलाफ मैदान पर उतरने वाले होते हैं और यही स्थिति कई बार खिलाड़ियों के लिए असहज हो जाती है। अमेरिकी स्टार कोको गॉफ लॉकर रूम का एक अनुभव साझा करते हुए बताती हैं कि ऑस्ट्रेलियन ओपन के दौरान उन्होंने एक खिलाड़ी को मैच के बाद मिठाई खाते देखा और मजाक में कह दिया कि शायद उसका मैच अच्छा गया होगा। लेकिन सामने से जवाब मिला, ‘यह डिप्रेशन कैंडी है।’ इस एक पल ने बता दिया कि लॉकर रूम में हर खिलाड़ी अलग भावनाओं से गुजर रहा होता है और किसी से भी बात करने से पहले सोचना पड़ता है। दरअसल, टेनिस में लॉकर रूम सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि भावनाओं का मिश्रण है। कोई खिलाड़ी जीत की खुशी में होता है, तो कोई हार के बाद निराशा में डूबा होता है। ऐसे में खिलाड़ी अक्सर आई कॉन्टैक्ट तक से बचते हैं। स्पेन की पाउला बाडोसा बताती हैं कि मैच के दिन वे दूसरे खिलाड़ियों को सिर्फ ‘हाय’ कहकर आगे बढ़ जाती हैं और बातचीत से बचती हैं। गॉफ कहती हैं, ‘समझ नहीं आता कि सामने वाले से बात करें या नहीं, और वह किस मूड में है।’ स्विट्जरलैंड की बेलिंडा बेनकिच के मुताबिक, कभी-कभी हालात और भी अजीब हो जाते हैं। जैसे कोर्ट तक जाने के लिए गोल्फ कार्ट शेयर करना या मैच से पहले तैयार होते समय प्रतिद्वंद्वी का पास में होना। तब समझ नहीं आता कि बातचीत करें या चुप रहें। इसी असहजता से बचने के लिए कई खिलाड़ी लॉकर रूम में कम से कम समय बिताने लगे हैं। इटली के स्टार यानिक सिनर कहते हैं कि अपने करियर की शुरुआत में वे ज्यादा समय वहीं बिताते थे, लेकिन अब वे जल्दी आते हैं और मैच खत्म होते ही निकल जाते हैं। हालांकि, इस माहौल का एक सकारात्मक पहलू भी है। अमेरिकी खिलाड़ी मैडिसन कीज कहती हैं कि यही जगह उन्हें मुश्किल समय में सहारा देती है। वे बताती हैं कि यहां ‘दोस्त’ भी होते हैं, जो हार के बाद आपको संभाल लेते हैं। डेनियल मेदवेदेव के अनुसार, पहले के मुकाबले अब लॉकर रूम का माहौल काफी शांत और बेहतर हो गया है। वहीं, ग्रीस के स्टीफानोस सितसिपास मानते हैं कि सफलता के साथ कुछ खिलाड़ियों का व्यवहार बदल जाता है, जो उन्हें पसंद नहीं है। वे कहते हैं, ‘मैं विनम्र लोगों को ज्यादा पसंद करता हूं।’ लॉकर रूम एक ऐसा साझा स्थान है, जहां जीत-हार, खुशी-गम सब एक साथ मौजूद होते हैं। ऐसे में खिलाड़ियों के लिए सबसे जरूरी चीज होती है, संवेदनशीलता, समझ और एक-दूसरे के प्रति सम्मान।
भोपाल में गड्ढे में मिली लापता कारोबारी की लाश:13 दिन से थे लापता, करीबी रिश्तेदार महिला सहित ताऊ के बेटों से हुई थी आखिरी बार बात

भोपाल के गुनगा इलाके में स्थित एक पानी के गड्ढे से पुलिस ने बुधवार को 13 दिन से लापता कारोबारी की बॉडी बरामद की है। मृतक की लास्ट लोकेशन उसके ताऊ के खेत में मिली थी। कॉल डिटेल में भी आखिरी तीन कॉल उसके करीबी रिश्तेदारों के हैं। जिसमें एक महिला व दो नंबर ताऊ के बेटों के हैं। मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। बुधवार दोपहर पीएम के बाद बॉडी परिजनों को सौंप दी गई है। मृतक देवेंद्र मेहरा पिता देवेश मेहरा (40) हर्ष ट्रांसपोर्ट के पीछे लांबाखेड़ा में रहता था। उसकी लेडीज पर्स की शॉप ललवानी प्रेस रोड कोतवाली में थी। वे 17 अप्रैल की सुबह 8:30 बजे घर से निकले थे। बताया था कि गुटखा लेकर लौट रहा हूं। इसके बाद से ही उनका कोई सुराग नहीं मिला। उनकी गुमशुदगी ईंटखेड़ी थाने में दर्ज थी। पुलस की जांच में उनकी लास्ट लोकेशन धमर्रा बैरसिया रोड पर मिली थी। जिस खेत में लास्ट लोकेशन मिली, वह मृतक के ताऊ का खेत है। परिजनों ने आज सुबह खेत में देवेंद्र की तलाश की। तब गड्ढे में उसका शव मिला। बॉडी डी कंपोज्ड हो चुकी है। कपड़ों, मोबाइल और चप्पलों से उसकी पहचान की जा सकी है। भाई-भाभी पर हत्या का संदेह परिजनों का दावा है कि लास्ट कॉल पर मनोज मेहरा ( ताऊ का बेटा), कालूराम (रिश्ते का भाई) और मीराबाई (रिश्ते की भाभी) से बात हुई थी। तीनों पर हत्या का संदेह है। तीनों रिश्तेदारों ने बताया कि हमारी आखिरी बार कॉल पर बात नहीं हुई है। तीनों मौत की सूचना के बाद नहीं आए। बड़े पिता के खेत में मिली है लाश मृतक के बड़े भाई नारायण ने बताया कि जिस खेत में लाश मिली है, वह बड़े पिता का खेत है। उनका बेटा मनोज मेहरा है, इससे ही आखिरी बार कॉल पर देवेंद्र की बात हुई है। इसकी पुष्टि कॉल डिटेल से हो रही है। जब मनोज से इस संबंध में बात की तो उसने साफ इनकार कर दिया कि उसकी देवेंद्र से बात ही नहीं हुई। लिहाजा शंका है कि मनोज व दोनों अन्य रिश्तेदारों ने ही भाई को मारा और गड्ढे में फेंक दिया।
शाजापुर में बदला मौसम, तापमान दो डिग्री गिरा:वेस्टर्न डिस्टरबेंस से गर्मी से राहत; आगामी 2 दिनों तक ऐसा ही रहेगा मौसम

शाजापुर में बुधवार को मौसम के तेवर नरम पड़े, जिससे तापमान में दो डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। पश्चिमी विक्षोभ के कारण आसपास के जिलों में हुई बारिश और हवाओं की दिशा में बदलाव से लोगों को गर्मी से तत्काल राहत मिली है। इससे पहले, शाजापुर के लोग 43 से 44 डिग्री की भीषण गर्मी का सामना कर रहे थे। दिन और रात दोनों समय असहनीय गर्मी थी, जिससे लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। रात में भी गर्म हवाओं के कारण उन्हें तपिश झेलनी पड़ रही थी। दो दिनों से बारिश के बाद गर्मी का असर सोमवार रात और मंगलवार को आसपास के जिलों में हुई बारिश के बाद गर्मी का असर कम हुआ। मंगलवार को अधिकतम तापमान 44 डिग्री से घटकर 42 डिग्री पर आ गया। हवाओं की दिशा भी उत्तर-पश्चिमी से बदलकर पश्चिमी हो गई, जिससे गर्मी का प्रभाव और कम हुआ। हालांकि, रात का तापमान बढ़कर 26 डिग्री दर्ज किया गया। अगले दो से तीन दिनों तक मौसम ऐसा ही रहेगा मौसम विशेषज्ञ सत्येंद्र धनोतिया ने बताया कि अगले दो से तीन दिनों तक मौसम ऐसा ही बना रहेगा। उन्होंने अनुमान लगाया कि गुरुवार को तापमान और गिरकर 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, और यह अगले कुछ दिनों तक इसी स्तर पर बना रहेगा। हालांकि, रात के तापमान में अधिक बदलाव की संभावना नहीं है।








