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पहाड़ी लोगों की पसंदीदा सब्जी लिंगुड़ा, जिसके स्वाद में छुपा है नॉनवेज जैसा ट्विस्ट, जानिए इसके फायदे

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Last Updated:April 27, 2026, 18:14 IST पिथौरागढ़:  पहाड़ों के जंगलों में मिलने वाला लिंगुड़ा एक जंगली फर्न है, जिससे स्वादिष्ट सब्जी बनाई जाती है. इसे उबालकर मसालों के साथ पकाया जाता है. इसका स्वाद हल्का खट्टा और कुरकुरा होता है. लोग इसे दाल-चावल या रोटी के साथ खाते हैं. यह सेहत के लिए भी फायदेमंद और पहाड़ी संस्कृति का खास हिस्सा है. लिंगुड़ा असल में एक जंगली पौधा होता है, जिसे अंग्रेज़ी में फर्न कहा जाता है. इसका कोमल हिस्सा, जो घुमावदार होता है, वही खाने के काम आता है. यह पौधा पहाड़ों के जंगलों में खुद-ब-खुद उगता है, इसे उगाने के लिए किसी खास खेती की जरूरत नहीं होती. जब यह पौधा छोटा और नरम होता है, तब इसे तोड़ लिया जाता है. अगर यह ज्यादा बड़ा हो जाए, तो सख्त हो जाता है और खाने लायक नहीं रहता. लिंगुड़ा मुख्य रूप से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और अन्य पहाड़ी इलाकों के जंगलों में मिलता है. यह खासकर गर्मियों के मौसम में उगता है, जब बारिश शुरू होने वाली होती है. गांव के लोग सुबह-सुबह जंगल जाते हैं और ताजा लिंगुड़ा तोड़कर लाते हैं. यह काम थोड़ा मेहनत वाला जरूर है, लेकिन लोगों के लिए यह एक रोजमर्रा की आदत जैसा है. लिंगुड़ा को बनाने का तरीका बहुत आसान होता है, लेकिन इसमें थोड़ी सावधानी जरूरी है. सबसे पहले लिंगुड़ा को अच्छी तरह धोया जाता है, ताकि उसमें लगी मिट्टी साफ हो जाए. इसके बाद फिर कढ़ाई में तेल गर्म किया जाता है, उसमें जीरा, लहसुन और हरी मिर्च डाली जाती है. इसके बाद लिंगुड़ा डालकर हल्दी, नमक और धनिया पाउडर जैसे मसाले मिलाए जाते हैं. बस कुछ ही देर में तैयार हो जाती है ये पहाड़ी सब्जी. Add News18 as Preferred Source on Google लिंगुड़ा की सब्जी का स्वाद बहुत ही अलग और खास होता है. ये खाने में थोड़ा बहुत नॉनवेज जैसा टेस्ट करता है और खाने में कुरकुरापन भी महसूस होता है. जो लोग पहली बार इसे खाते हैं, उन्हें इसका स्वाद थोड़ा नया लग सकता है. लेकिन, धीरे-धीरे यह उनकी पसंद बन जाती है. पहाड़ों में तो लोग इसे दाल-चावल या रोटी के साथ बड़े मजे से खाते हैं. लिंगुड़ा स्वादिष्ट जरूर है, लेकिन इसे सही तरीके से खाना बहुत जरूरी है. कच्चा लिंगुड़ा सीधे नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इसमें हल्की कड़वाहट और कुछ प्राकृतिक तत्व होते हैं जो पाचन में दिक्कत दे सकते हैं. हमेशा इसे अच्छे से धोकर फिर ही इस्तेमाल करें. ज्यादा मात्रा में भी इसे एक साथ नहीं खाना चाहिए. अगर पहली बार खा रहे हैं, तो थोड़ा-थोड़ा खाकर देखें. लिंगुड़ा सिर्फ स्वाद में ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है. इसमें फाइबर अच्छी मात्रा में होता है, जो पाचन को बेहतर बनाता है, यह शरीर को ठंडक देने में मदद करता है, इसमें कई जरूरी विटामिन और मिनरल्स होते हैं. यह हल्का और आसानी से पचने वाला होता है . इसी वजह से पहाड़ों में इसे एक हेल्दी फूड माना जाता है. लिंगुड़ा की सब्जी सिर्फ खाने की चीज नहीं है, बल्कि यह पहाड़ी लोगों की यादों से भी जुड़ी होती है. बचपन में जब बच्चे अपने बुजुर्गों के साथ जंगल जाते थे, तो लिंगुड़ा तोड़ना उनके लिए एक मजेदार अनुभव होता था. घर आकर जब मां या दादी इसे बनाती थीं, तो पूरे घर में इसकी खुशबू फैल जाती थी. आज भी जब लोग इसे खाते हैं, तो उन्हें अपने गांव और बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं. आज के समय में भले ही बाजार में कई तरह की सब्जियां मिल जाती हैं, लेकिन लिंगुड़ा की अपनी अलग पहचान है. लेकिन ये पूरी तरह प्राकृतिक होता है, इसमें पहाड़ी स्वाद होता है,यह परंपरा और संस्कृति से जुड़ा हुआ है, और सबसे खास बात, यह हर जगह आसानी से नहीं मिलता. इसी वजह से पहाड़ों के लोग आज भी इसे बड़े चाव से खाते हैं और इसे अपनी पसंदीदा सब्जी मानते हैं. First Published : April 27, 2026, 18:14 IST

बिरयानी के बाद तरबूज खाने से क्या हो जाती है मौत? मुंबई में 4 लोगों के दर्दनाक अंत का सच क्या है? डॉक्टर ने कहा…

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Last Updated:April 27, 2026, 17:47 IST Food Poisoning After Eating Watermelon: मुंबई में एक ही परिवार में पति-पत्नी और उनकी 2 बेटियों की दर्दनाक मौत हो गई है. रिपोर्ट के मुताबिक यह परिवार रात में बिरयानी डिनर किया था और उसके बाद तरबूज खाया था. सुबह उठने में भयंकर उल्टी और दस्त लगा. अस्पताल ले जाने के कुछ समय बाद एक-एक कर परिवार के सभी चारों सदस्यों की मौत हो गई. कहा जा रहा है फूड प्वाइजनिंग हो सकता है. लेकिन यह खबर अपने आप में हिला देने वाली है. इस वाकये को लेकर हमने सी के बिड़ला अस्पताल में इंटरनल मेडिसीन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. तुषार तायल से बात की. मुंबई में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत. यह ऐसी हृदयविदारक कहानी है जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा पसीज सकता है. मुंबई में एक 40 साल का एक शख्स अपनी 35 वर्षीय पत्नी, 16 और 13 साल की दो मासूम बेटियों के साथ हंसी-खुशी रहता था. कल की रात वे सब डिनर में बिरयानी खाया. इसके बाद गर्मी को देखते हुए तरबूज का ऑर्डर किया. कुछ देर बाद सभी ने तरबूज खाया. फिर सब सो गए. लेकिन यह मनहूस रात इतनी काली निकली कि बाद में सभी को एक साथ दस्त लग गया और ताबड़तोड़ उल्टियां होने लगी. देर रात अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टरों की सारी मेहनत बेकार चली गई. कुछ घंटे के अंतराल पर परिवार के चारों सदस्यों की मौत हो गई. पुलिस मामले की जांच कर रही है लेकिन असली सवाल यह है कि यह क्या तरबूज या बिरयानी खाने से किसी की मौत हो सकती है. यही सवाल हमने हमने सी के बिड़ला अस्पताल में इंटरनल मेडिसीन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. तुषार तायल से किया. क्या तरबूज से फूड प्वाइजनिंग होता है डॉ. तुषार तायल ने बताया कि यह बेहद सन्न करने वाली घटना है. इस अवस्था में किसी का जाना दुखद है. जहां तक मेडिकल साइंस की बात है तो तरबूज अगर पुराना हो या काटकर छोड़ दिया जाए तो इससे इंफेक्शन का खतरा रहता है. वैसे तो किसी भी फूड को अगर खुले में छोड़ दिया जाए या वह बासी हो तो उससे इंफेक्शन या फूड प्वाइजनिंग का खतरा रहता है. लेकिन यह घटना अलग है. वास्तव में सटीक कारण क्या है यह तो जांच के बाद पता चलेगा लेकिन अगर मान लीजिए किसी फूड से फूड प्वाइजनिंग होता है तो फूड प्वाइजनिंग होने से लेकर मौत तक के रास्ते को तय करने में वक्त लगता है. यानी मौत तक पहुंचने में शरीर में कई चीजें होती है और इसमें वक्त लग सकता है. अगर व्यक्ति पहले से स्वस्थ है तो फूड प्वाइजनिंग होने के बाद शरीर खुद को उबारने के लिए कई तरह से जंग लड़ता है और इसमें वक्त लगता है. लेकिन इस घटना में मरीज की मौत 7-8 घंटे के बीच हो गई. इसलिए पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि मौत फूड प्वाइजनिंग से हुई होगी. क्या इतनी जल्दी मौत हो सकती है डॉ. तुषार तायल ने कहा कि बिरयानी और तरबूज से मौत का कोई सीधा कनेक्शन नहीं है, न ही तरबूज खाने से किसी की मौत हो सकती है और न ही बिरयानी खाने से. इसमें कोई संदेह नहीं कि तरबूज अगर बासी हो या ज्यादा पुरानी हो या सड़ा हुआ हो तो उससे फूड प्वाइजनिंग का खतरा है लेकिन इससे तुरंत में मौत हो जाना संभव नहीं है. ऐसा कोई अध्ययन नहीं है जिसमें यह साबित हुआ हो कि तरबूज खाने के बाद तुरंत मौत हो जाती है. इसलिए इसमें कुछ बाहरी कारण हो सकता है. हो सकता है कि तरबूज में ही कुछ मिला हो. इसलिए यह जांच का विषय है. जब जांच में कुछ सामने आएगा तभी कुछ पुख्ते तौर पर कहा जा सकता है. तरबूज को कैसे खाएं डॉ. तुषार तायल ने बताया कि तरबूज खाने का कोई रॉकेट साइंस नहीं है. जिस तरह आप खाते हैं उसी तरह खाएं लेकिन इसे सही तरीके से खाएं. हमेशा ताजा तरबूज खाएं. अगर तरबूज देखने में सही हो लेकिन स्वाद में थोड़ा सा भी गड़बड़ लगे तो इसे न खाएं. कभी भी तरबूज को काटकर न छोड़े. जैसे ही काटे वैसे ही इसका सेवन कर लें. अगर आपने तरबूज को काटकर फ्रिज में क्यों न रख दिया हो लेकिन अगर तरबूज का थोड़ा सा भी कलर अलग हो गया है तो इसे न खाएं या खाने में थोड़ा भी स्वादहीन लग रहा है तो न खाएं. तरबूज खरीदते समय यह जरूर देखें कि यह सड़ा तो नहीं है. अगर पिलपिला है या देखने में खराब हो तो इसे न खरीदे. बाकी तरबूज गर्मियों के लिए बहुत फायदेमंद है. इसलिए ताजा हो तो इसे जरूर खाएं. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 27, 2026, 17:47 IST

पार्क में बच्चियों से अश्लील हरकत करते पकड़ा शख्स:नीमच में परिजन ने पुलिस को सौंपा, पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज

पार्क में बच्चियों से अश्लील हरकत करते पकड़ा शख्स:नीमच में परिजन ने पुलिस को सौंपा, पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज

नीमच के इंदिरा नगर इलाके में एक धार्मिक स्थल के गार्डन में मासूम बच्चियों के साथ छेड़छाड़ करने वाले अधेड़ को लोगों ने रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी पिछले कई दिनों से बच्चियों को परेशान कर रहा था, जिसे परिजन ने योजना बनाकर पकड़ा और पुलिस के हवाले कर दिया। गार्डन में खेलने जाने वाली छोटी बच्चियों ने घर पर बताया था कि एक अंकल उनके साथ गंदी हरकतें करते हैं। बच्चियों की बात सुनकर परिजन ने आरोपी को पकड़ने की योजना बनाई। रविवार को जैसे ही आरोपी कुंज बिहारी वहां पहुंचा और अश्लील हरकतें शुरू कीं, पहले से छिपे हुए परिजन और रहवासियों ने उसे घेर लिया। वीडियो में बच्चियों ने सुनाई आपबीती इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें डरी हुई बच्चियां आरोपी के सामने ही उसकी करतूतें बता रही हैं। भीड़ के सामने घिरने पर आरोपी ने भी अपनी गलती मान ली। मौके पर पहुंची नीमच सिटी पुलिस उसे थाने ले गई। परिजन का कहना है कि वे बच्चियों की सुरक्षा को लेकर डरे हुए थे, इसलिए सतर्क होकर इसे पकड़ना जरूरी था। पुलिस ने दर्ज किया पॉक्सो एक्ट सब इंस्पेक्टर असलम पठान ने बताया कि आरोपी कुंज बिहारी के खिलाफ सोमवार को पॉक्सो एक्ट और छेड़छाड़ की गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की आगे की जांच की जा रही है।

बंगाल की चर्चित भवानीपुर सीट पर महामुकाबला:'मिनी इंडिया' के मन में ममता दीदी, मुकाबले में सुवेंदु दादा; सुरक्षा पर नाराजगी लेकिन योजनाओं में TMC भारी

बंगाल की चर्चित भवानीपुर सीट पर महामुकाबला:'मिनी इंडिया' के मन में ममता दीदी, मुकाबले में सुवेंदु दादा; सुरक्षा पर नाराजगी लेकिन योजनाओं में TMC भारी

दक्षिण कोलकाता के पद्दपुकुर रोड पर 140 साल पुरानी ‘बलराम मलिक एंड राधारमण मलिक’ मिठाई दुकान में एक ट्रे में सभी पार्टियों के सिंबल वाले पेड़े सजे हैं- ‘मिठास सबके लिए’, लेकिन जिस भवानीपुर में यह दुकान है, वहां सियासत में खटास साफ दिखती है। बंगाल की सबसे चर्चित सीट पर सीएम ममता बनर्जी ‘दीदी’ के सामने भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ‘दादा’ मैदान में हैं। यहां 15 साल की सत्ता बचाने उतरी ममता के सामने नंदीग्राम में उन्हें हरा चुके शुभेंदु वही दोहराने की कोशिश में हैं। 29 अप्रैल को वोटिंग है। यह सीट तृणमूल के लिए प्रतिष्ठा और भाजपा के लिए मनोवैज्ञानिक लड़ाई बन गई है। मिलीजुली आबादी इस सीट को और दिलचस्प बनाती है। यहां 42% बंगाली हिंदू, 34% गैर-बंगाली हिंदू और 24% मुस्लिम आबादी के साथ गुजराती, पंजाबी-सिख, मारवाड़ी-जैन और प्रवासी यहां रहते हैं। ‘मिनी इंडिया’ कहे जाने वाले इस इलाके में एक व्यापारी कहते हैं, ‘हम यहां दो पीढ़ी से व्यापार कर रहे हैं, पर ऐसा चुनाव कभी नहीं देखा। पहले सब खुलकर ‘ये पार्टी’ या ‘वो पार्टी’ बोलते थे, इस बार कोई बोलने को तैयार नहीं।’ ममता का कनेक्ट बनाम भाजपा की माइक्रो मैपिंग ममता पारिवारिक जुड़ाव और हाई-विजिबिलिटी प्रचार के आधार पर चुनाव लड़ी रही हैं, जबकि भाजपा शुभेंदु की आक्रामक छवि, हिंदुत्व और बूथ स्तर की माइक्रो-मैपिंग से मुकाबला तेज कर रही है।दो दिन पहले हुए रोड शो में ममता के भाई बाबुन बनर्जी और परिवार के कई सदस्य साथ निकले। दूसरी ओर, भाजपा के सुवेंदु अधिकारी की आक्रामक छवि और हिंदुत्व के मुद्दे पर प्रचार को धार दे रही है। पार्टी ने यहां ‘बूथ स्तर की मैपिंग’ की है और बाहरी राज्यों के बड़े नेताओं को उतार दिया है। पूर्व राज्यपाल और भाजपा नेता तथागत रॉय कहते हैं, ‘बंगाल को हिंदू बाहुल्य बनाए रखना है तो ममता को हटाना जरूरी है।’ कालीघाट मंदिर के पास पैतृक घर में ही सीएम आवास कालीघाट मंदिर के पास 100 मीटर दूरी पर ममता का पैतृक घर ही उनका निवास है। इस गली के दोनों सिरों पर हाई सक्योरिटी है। शनिवार रात प्रचार से लौटते समय उन्होंने ‘जय बांग्ला’ के नारों के बीच रुककर समर्थकों से मुलाकात की। सुरक्षा पर ‘दीदी’ से नाराजगी, पर योजनाओं में ‘ममता’ भारी भवानीपुर में जनमत बंटा है। यहां हरीश मुखर्जी रोड पर रहने वाली सूमोना नाथ कहती हैं, ‘आरजी कर जैसी घटना के बाद महिला सुरक्षा बड़ा सवाल है। 15 साल बहुत होते हैं, अब हमें बदलाव चाहिए।’ इसके उलट, कालीघाट मंदिर के पास पटुआपाड़ा (कुम्हारों की बस्ती) में एक बुजुर्ग कहते हैं, ‘ममता हमारे घर की बेटी हैं।’’ उनके घर से निकली महिला ने बताया- उसे लक्ष्मी भंडार और बेटी को कन्याश्री योजना के पैसे मलते हैं। दूसरी ओर, जेन-जी (युवा मतदाता) कहते हैं, ‘हमें शिक्षा और रोजगार चाहिए। जो दोनों देगा, उसे वोट देंगे।’ कालीघाट मंदिर के एक पुजारी ने कहा, ‘यहां दीदी को कोई हरा नहीं सकता।’ यानी मुकाबला एंटी-इनकंबेंसी और वेलफेयर सपोर्ट के बीच फंसा है।

जंगलों में फरवरी से अब तक आगजनी की 424 घटनाएं:कन्हारी-जिलंग में 3 दिनों से उठ रही लपटें, वन विभाग निगरानी कर रहा

जंगलों में फरवरी से अब तक आगजनी की 424 घटनाएं:कन्हारी-जिलंग में 3 दिनों से उठ रही लपटें, वन विभाग निगरानी कर रहा

डिंडौरी जिले में भीषण गर्मी के शुरू होते ही जंगलों में आग लगने का सिलसिला तेज हो गया है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी से अब तक आगजनी की 424 घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे प्रकृति और वन्यजीवों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। वन प्रेमी अरविंद बाबा ने बताया कि दक्षिण समनापुर के कन्हारी और जिलंग के जंगलों में पिछले तीन दिनों से आग धधक रही है। उनका आरोप है कि आग की वजह से कीमती औषधीय पौधे और छोटे जानवर जलकर मर रहे हैं। साथ ही, कटे हुए पेड़ों के ठूंठों में आग लगने से हरे-भरे पेड़ भी सूख रहे हैं। वन प्रेमियों का कहना है कि वन विभाग का अमला इस दिशा में उतनी मुस्तैदी नहीं दिखा रहा जितनी जरूरत है। तापमान का असर और विभाग की तैयारी एसडीओ सुरेंद्र जाटव ने बताया कि पारा बढ़ने के साथ ही जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने जानकारी दी कि विभाग ने इस पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम बनाए हैं। वन विभाग की टीमें स्थानीय समितियों के साथ मिलकर सूचना मिलते ही आग बुझाने का काम कर रही हैं। जनता से सहयोग की अपील वन अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे जंगल में कहीं भी आग लगते देखें, तो तुरंत कंट्रोल रूम को खबर करें। विभाग का कहना है कि जनता के सहयोग से ही इस प्राकृतिक संपदा को बचाया जा सकता है।

संजय कपूर के संपत्ति विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की सलाह:80 की उम्र लड़ने की नहीं, मामला आपस में सुलझाएं; प्रॉपर्टी पर मां-बहू और बच्चों में लड़ाई

संजय कपूर के संपत्ति विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की सलाह:80 की उम्र लड़ने की नहीं, मामला आपस में सुलझाएं; प्रॉपर्टी पर मां-बहू और बच्चों में लड़ाई

एक्ट्रेस करिश्मा कपूर के पूर्व पति और दिवंगत इंडस्ट्रियलिस्ट संजय कपूर की करीब 30 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति का विवाद सुप्रीम कोर्ट में है। सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने संजय की 80 साल की मां रानी कपूर को सलाह दी कि वे लंबी कानूनी लड़ाई के बजाय आपसी बातचीत (मिडिएशन) से मामला सुलझाएं। जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने टिप्पणी की, “यह मुकदमा 80 साल की उम्र में शुरू हुआ है… यह लड़ने की उम्र नहीं है।” कोर्ट ने कहा- लंबी चलेगी कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट ने रानी कपूर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस मामले में कई पक्ष और बड़ी संपत्ति शामिल है, इसलिए यह कानूनी लड़ाई काफी लंबी खिंच सकती है। बेंच ने सुझाव दिया कि सभी पक्षों के लिए यही बेहतर होगा कि वे मिडिएशन के जरिए शांति से कोई रास्ता निकालें। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि वे मामले को मेरिट के आधार पर भी सुनेंगे, लेकिन पहली प्राथमिकता आपसी समझौते को देंगे। इस मामले पर अगली सुनवाई अगले हफ्ते होगी। मां ने बहू पर लगाया धोखाधड़ी का आरोप रानी कपूर ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उन्हें अंतरिम सुरक्षा देने से मना कर दिया गया था। रानी का आरोप है कि उन्हें उनकी पूरी विरासत, घर और संपत्ति से बेदखल कर दिया गया है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि साल 2017 में ब्रेन स्ट्रोक आने के बाद उनके बेटे संजय कपूर और बहू प्रिया कपूर ने उनकी बीमारी का फायदा उठाया। आरोप है कि उनसे सादे कागजों पर साइन कराकर एक फैमिली ट्रस्ट बनाया गया और उनकी जानकारी के बिना संपत्ति ट्रस्ट के नाम कर दी गई। 2025 में हुई थी संजय कपूर की मौत यह पूरा विवाद पिछले साल जून में संजय कपूर की मौत के बाद और गहरा गया। 53 साल के संजय कपूर की इंग्लैंड में एक पोलो मैच के दौरान कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई थी। रानी कपूर का कहना है कि बेटे की मौत के बाद उनकी तीसरी पत्नी प्रिया कपूर ने पूरी ग्रुप कंपनियों पर नियंत्रण कर लिया और उन्हें संपत्ति में कोई हिस्सा नहीं दिया। रानी कपूर अब अपनी संपत्ति और घर को सुरक्षित करने के लिए कानूनी सुरक्षा मांग रही हैं। करिश्मा कपूर के बच्चों का भी है दावा संजय कपूर की विरासत को लेकर यह लड़ाई सिर्फ मां और बहू के बीच नहीं है। इसमें बॉलीवुड एक्ट्रेस करिश्मा कपूर के बच्चे – समायरा और कियान भी शामिल हैं। संजय और करिश्मा के बच्चों ने संजय की उस वसीयत (Will) को चुनौती दी है, जिसमें संपत्ति का बड़ा हिस्सा प्रिया कपूर और उनके बच्चों के नाम किया गया है। बच्चों का आरोप है कि यह वसीयत फर्जी हो सकती है और इसमें परिवार के अन्य नजदीकी रिश्तेदारों को जानबूझकर बाहर रखा गया है।

साल में सिर्फ 3 महीने मिलता है ये जंगली फल, खाने से आती है घोडे़ जैसी ताकत, इसके पत्ते से लेकर छाल तक फायदेमंद

मेरठ से विदेश तक पहुंच रहे छात्र, इन कॉलेजों में आखिर क्या है खास? देखें लिस्ट

Last Updated:April 27, 2026, 16:44 IST Tendu Fruit Benefits: कोरबा के घने जंगलों में मिलने वाला तेंदू फल मिलता है. गर्मी के दिनों में लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है.इस फल में विटामिन A, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. इसके नियमित सेवन से कमजोरी दूर होती है. शरीर में घोड़े जैसी एनर्जी आ सकती है. यह एक प्राकृतिक ऊर्जा स्रोत के रूप में काम करता है. छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के घने जंगलों में मिलने वाला तेंदू फल इन दिनों बाजारों में लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है. तेंदु न के नाम से पहचाना जाने वाला मौसमी फल न केवल स्वाद में बेहतरीन है. बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है. खास बात यह है कि केवल इसका फल ही नहीं, बल्कि इसका पेड़, पत्तियां और छाल भी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं.वनस्पति शास्त्र के जानकारों के अनुसार, तेंदू फल में विटामिन A, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं . यह फल सिर्फ गर्मी के मौसम में मिलता है. ये तत्व शरीर को कई प्रकार की बीमारियों से बचाने में सहायक होते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में तेंदू फल का उपयोग लंबे समय से पारंपरिक औषधि के रूप में किया जाता रहा है. इस फल का सबसे बड़ा लाभ पाचन तंत्र पर देखने को मिलता है. इसमें मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को दुरुस्त करता हैइससे कब्ज, गैस जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है. यही कारण है कि गर्मी के मौसम में इसे विशेष रूप से खाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह शरीर को ठंडक भी प्रदान करता है. शरीर को एनर्जी देने वाली खास फलइस पेड़ की पत्तियों का उपयोग भी बड़े पैमाने पर किया जाता है. खासकर बीड़ी बनाने में तेंदू पत्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो कई लोगों के रोजगार का साधन भी है. इसके पेड़ की छाल में भी औषधीय गुण पाए जाते हैं, जिनका उपयोग पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में किया जाता है. तेंदू फल शरीर को ऊर्जा देने में भी अहम भूमिका निभाता है. इसके नियमित सेवन से कमजोरी दूर होती है. शरीर में घोड़े जैसी एनर्जी आ सकती है. जो लोग जल्दी थकान महसूस करते हैं, उनके लिए यह एक प्राकृतिक ऊर्जा स्रोत के रूप में काम करता है. उनके अंदर घोड़े की तरह ताकत और एनर्जी आ सकती है. तेंदू फल और उससे जुड़ा पूरा वृक्ष न केवल प्रकृति का अनमोल उपहार है, बल्कि स्वास्थ्य और आजीविका दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Korba,Chhattisgarh First Published : April 27, 2026, 16:44 IST

आइजोल नगर निगम चुनाव में ज़ेडपीएम ने भारी जीत हासिल की | राजनीति समाचार

Deepti Sharma picked up her maiden five-wicket haul in the previous T20I (X/BCCI)

आखरी अपडेट:27 अप्रैल, 2026, 16:42 IST इस चुनाव में ZPM, MNF और कांग्रेस ने 19-19 उम्मीदवार उतारे। जेडपीएम ने सोमवार को आइजोल नगर निगम चुनाव में भारी जीत हासिल की। (प्रतीकात्मक छवि) सत्तारूढ़ ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) ने सोमवार को आइजोल नगर निगम (एएमसी) चुनावों में भारी जीत हासिल की और 19 सदस्यीय नागरिक निकाय में 17 सीटें हासिल कीं। एएमसी चुनावों की गिनती आइजोल के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में हुई और परिणाम मिजोरम राज्य चुनाव आयोग द्वारा घोषित किए गए। मुख्य विपक्षी दल मिज़ो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ), जिसने 2021 में पिछला चुनाव 11 सीटें हासिल करके जीता था, को इस बार केवल एक वार्ड से ही संतोष करना पड़ा। कांग्रेस पार्टी को भी सिर्फ एक सीट मिली. इस बीच, ZPM ने 2021 में अपनी सीट संख्या पिछली छह सीटों से बढ़ा दी। इस चुनाव में ZPM, MNF और कांग्रेस ने 19-19 उम्मीदवार उतारे। 11 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली। आइजोल नगर निगम की स्थापना 2010 में मिजोरम नगर पालिका अधिनियम, 2007 के तहत की गई थी। नागरिक निकाय में 19 वार्ड हैं, जिनमें से छह महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। सभी आरक्षित सीटें ZPM को मिलीं। 2010 में हुए पहले एएमसी चुनावों में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी, जबकि एमएनएफ ने 2015 और 2021 के बाद के दो चुनावों में जीत हासिल की थी। 21 अप्रैल को हुए निकाय चुनाव में 2.39 लाख मतदाताओं में से कुल 62.77 प्रतिशत मतदान हुआ था। (एजेंसी इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : आइजोल, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 27 अप्रैल, 2026, 16:41 IST समाचार राजनीति आइजोल नगर निगम चुनाव में ज़ेडपीएम ने भारी जीत हासिल की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

अभिनेता सुनील शेट्टी ने की उत्तराखंड पुलिस की तारीफ:चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं की सराहना की, दिव्य परमार्थ गंगा आरती में हुए शामिल

अभिनेता सुनील शेट्टी ने की उत्तराखंड पुलिस की तारीफ:चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं की सराहना की, दिव्य परमार्थ गंगा आरती में हुए शामिल

अभिनेता सुनील शेट्टी तीन दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर रहे। उन्होंने चारधाम यात्रा के दौरान उत्तराखंड पुलिस की व्यवस्थाओं की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से एसएसपी श्वेता चौबे की निगरानी और बेहतर यातायात प्रबंधन को उल्लेखनीय बताते हुए कहा कि भारी संख्या में श्रद्धालुओं के बावजूद व्यवस्था सुचारु बनी हुई है। मुनिकीरेती क्षेत्र से गुजरते हुए सुनील शेट्टी ने पुलिस की सक्रियता, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और यात्रियों के प्रति सहयोगात्मक रवैये की तारीफ की। ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी, संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल और यात्रियों को लगातार मार्गदर्शन देना, इन सभी प्रयासों को उन्होंने सराहनीय बताया। इससे पहले सुनील शेट्टी और उनकी पत्नी माना शेट्टी ने पावन गंगा तट पर आयोजित दिव्य परमार्थ गंगा आरती में भाग लेकर मां गंगा का आशीर्वाद लिया। परमार्थ निकेतन में आयोजित इस आरती के दौरान आचार्यों और ऋषिकुमारों ने वैदिक मंत्रोच्चार एवं पुष्पमालाओं से उनका स्वागत किया। सुनील शेट्टी ने की उत्तराखंड पुलिस की तारीफ अभिनेता सुनील शेट्टी ने वीडियो जारी कर कहा कि अभी में ऋषिकेश में हूं। चारधाम की यात्रा शुरू हो चुकी है। हम हमेशा सुनते आ रहे हैं कि ट्रैफिक बहुत होता है और भीड़-भाड़ बहुत होता है, वैसा कुछ नहीं है। थाना मुनिकीरेती की पुलिस ने बहुत ही अच्छा बंदोबस्त किया है। एसएसपी श्वेता चौबे स्वयं मौके पर रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी कर रही हैं। पुलिस द्वारा आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है, जिसमें ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी शामिल है। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। अगले साल चारधाम यात्रा पर आएंगे सुनील शेट्टी उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुविधा के लिए पुलिसकर्मी मार्गदर्शन और सहायता के लिए हर समय उपलब्ध हैं। उत्तराखंड पुलिस ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना के साथ यात्रियों को सुरक्षित और सहज यात्रा अनुभव प्रदान करने का प्रयास कर रही है। पुलिस प्रशासन ने आमजन और यात्रियों से यातायात नियमों का पालन करने और पुलिस का सहयोग करने की अपील की है। सुनील शेट्टी ने इन व्यवस्थाओं की प्रशंसा की और कहा कि वह अगले साल चारधाम यात्रा पर आएंगे। भारतीय संस्कृति पर दिया संदेश दौरे के पहले दिन सुनील शेट्टी परमार्थ गंगा आरती में भाग लिया। सुनील शेट्टी ने कहा कि मां गंगा भारत की आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक है। उन्होंने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और प्रकृति संरक्षण के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त करते हुए युवाओं से अपनी जड़ों और मूल्यों से जुड़े रहने का आह्वान किया।

कन्नौज में कपूर से बना अनोखा इत्र, कीमत 1.20 लाख रुपये किलो, खुशबू के साथ सेहत को भी फायदा

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Last Updated:April 27, 2026, 16:22 IST इत्र नगरी कन्नौज एक बार फिर अपनी अनोखी कला और पारंपरिक हुनर के कारण चर्चा में है. यहां के कारीगरों ने कपूर जैसी साधारण दिखने वाली चीज को खास रूप देते हुए उसका इत्र तैयार किया है, जो अब तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. चंदन तेल के मिश्रण से बना यह इत्र न केवल अपनी मनमोहक खुशबू के लिए पसंद किया जा रहा है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद उपयोगी माना जा रहा है. यही वजह है कि इसकी कीमत लाखों रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है और देश-विदेश में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. इत्र नगरी कन्नौज एक बार फिर अपनी पारंपरिक कला के लिए चर्चा में है, यहां के कारीगरों ने कपूर को एक नए और अनोखे रूप में प्रस्तुत करते हुए उसका इत्र तैयार किया है, जो न केवल अपनी मनमोहक खुशबू के लिए प्रसिद्ध हो रहा है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद लाभकारी माना जा रहा है. पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों में कपूर का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इसकी सुगंध वातावरण को शुद्ध और सकारात्मक बनाती है. इसी गुण को ध्यान में रखते हुए कारीगरों ने कपूर के इत्र का निर्माण किया है. इस विशेष कपूर इत्र में चंदन के तेल का मिश्रण किया गया है, जो इसकी खुशबू और गुणवत्ता को कई गुना बढ़ा देता है. चंदन का उपयोग इत्र निर्माण में सदियों से होता आया है, और इसके साथ कपूर का संयोजन इसे और भी खास बना देता है. Add News18 as Preferred Source on Google यही कारण है कि इस इत्र की कीमत लगभग 1,20,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है. कारीगरों का कहना है कि इस इत्र को बनाने में पारंपरिक तकनीकों के साथ-साथ विशेष सावधानी बरती जाती है, जिससे इसकी शुद्धता बनी रहती है. यह कपूर इत्र केवल सुगंध तक सीमित नहीं है, बल्कि आयुर्वेदिक दृष्टि से भी काफी उपयोगी माना जा रहा है. आयुर्वेद में कपूर का उपयोग कई औषधियों में किया जाता है. यह सिरदर्द, सर्दी-जुकाम और मानसिक तनाव को कम करने में सहायक होता है. इसकी खुशबू मन को शांति देती है और वातावरण को तरोताजा बनाती है. यही वजह है कि लोग अब इसे एक प्राकृतिक औषधि के रूप में भी देखने लगे हैं. कन्नौज के कारीगरों के लिए यह इत्र नई संभावनाएं लेकर आया है. देश-विदेश में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे स्थानीय कारीगरों को अच्छा बाजार मिल रहा है. यह पहल न केवल पारंपरिक इत्र उद्योग को मजबूती दे रही है, बल्कि नई पीढ़ी को भी इस कला से जोड़ने का काम कर रही है. इत्र व्यापारी निशीष तिवारी बताते है कि कपूर इत्र एक ऐसा उत्पाद बनकर उभरा है, जिसमें खुशबू और स्वास्थ्य दोनों का अनोखा संगम देखने को मिलता है. कन्नौज की यह नई पेशकश यह साबित करती है कि परंपरा और नवाचार के मेल से कैसे एक साधारण चीज को भी खास बनाया जा सकता है. आने वाले समय में यह इत्र और भी लोकप्रिय होगा, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है. First Published : April 27, 2026, 16:22 IST