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कोई ‘दक्षिण की अयोध्या’ नहीं: कैसे टीवीके के सीटीआर निर्मल कुमार थिरुपरनकुंद्रम रेत में एक रेखा खींच रहे हैं | विशेष | चुनाव समाचार

RCB vs CSK Live Cricket Score, IPL 2026: Stay updated with Ball by Ball Match Updates and Live Scorecard from Bengaluru. (Picture Credit: X/@ChennaiIPL)

आखरी अपडेट:05 अप्रैल, 2026, 19:15 IST निर्मल कुमार ने कहा कि इस चुनाव में तमिलनाडु में लड़ाई टीवीके और डीएमके के बीच है, जिसमें एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले एनडीए ब्लॉक के पास कोई मौका नहीं है। कुमार का दावा है कि भाजपा तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में धार्मिक ध्रुवीकरण लाने का प्रयास कर रही है। फ़ाइल तस्वीर/एएनआई भाजपा और द्रमुक के बीच महत्वपूर्ण राजनीतिक टकराव देखने वाले मंदिरों के शहर थिरुपरनकुंड्रम के लिए लड़ाई चुनावी मौसम गर्म होने के साथ तेज होती जा रही है। “थलापति” जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) के मैदान में उतरने और उसके उम्मीदवार और वरिष्ठ नेता सीटीआर निर्मल कुमार के वहां से चुनाव लड़ने के साथ, निर्वाचन क्षेत्र तेजी से एक प्रमुख राजनीतिक फ्लैशप्वाइंट में बदल रहा है। तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) एक सावधानीपूर्वक संतुलन बनाने का प्रयास कर रही है – खुद को शांति के लिए एक ताकत के रूप में पेश कर रही है, जबकि भाजपा और डीएमके दोनों पर मंदिर शहर के आसपास तनाव बढ़ाने का आरोप लगा रही है। टीवीके के उप महासचिव और थिरुपरनकुंड्रम से पार्टी के उम्मीदवार सीटीआर निर्मल कुमार अपने संदेश में स्पष्ट हैं। वे कहते हैं, ”थिरुपरनकुंड्रम पर टीवीके बहुत स्पष्ट है – हम शांति चाहते हैं। हम उत्तर के लोगों के साथ-साथ द्रमुक को भी बताना चाहते हैं, हम उन्हें यहां एक और अयोध्या बनाने की अनुमति नहीं देंगे।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा निर्वाचन क्षेत्र में ”एक और अयोध्या मुद्दा पैदा करने” की कोशिश कर रही है। कुमार ने कहा, ”वे इसे एक और अयोध्या बनाने की कोशिश कर रहे हैं और हम इसका पुरजोर विरोध करेंगे।” उन्होंने दावा किया कि द्रमुक इसे साजिश रचने और राजनीति करने की इजाजत दे रही है। “टीवीके में हम इसकी अनुमति नहीं देंगे। हम चाहते हैं कि दशकों से चली आ रही परंपराएं और प्रथाएं जारी रहें। मैंने अपने बचपन से थिरुपरनकुंड्रम देखा है और जानता हूं कि इसका क्या मतलब है। हम इसकी जगह को बाधित नहीं होने देंगे। डीएमके इसे रोक सकती थी; उन्होंने इसका राजनीतिकरण कर दिया।” उन्होंने कहा कि इस चुनाव में तमिलनाडु में लड़ाई टीवीके और डीएमके के बीच है, जिसमें एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले एनडीए ब्लॉक को कोई मौका नहीं मिलेगा, क्योंकि “उन्होंने जो किया है उसके लिए लोग उन्हें माफ नहीं करेंगे”। टीवीके की मूल बात थिरुपरनकुंद्रम विवाद को एक धार्मिक लामबंदी के रूप में नहीं, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक संतुलन में व्यवधान के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास है। मंदिर शहर में अपने बचपन को याद करते हुए कुमार कहते हैं, ”हमने थिरुपरनकुंड्रम में ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी।” “हम वहां कोई विवाद नहीं चाहते। वह स्थान एक पवित्र स्थान है और अत्यधिक सम्मानित है।” पार्टी की राजनीतिक दिशा भी दोनों द्रविड़ प्रतिद्वंद्वियों की आलोचना पर बहुत अधिक निर्भर करती है। कुमार ने द्रमुक पर महत्वपूर्ण क्षणों में आंखें मूंदने का आरोप लगाया। “डीएमके ने इसकी अनुमति तब दी जब उन्होंने रामनाथपुरम के सांसद को रोका और इसे एक मुद्दा बना दिया। वह पहली घटना थी,” वे कहते हैं, जब तनाव पैदा होना शुरू हुआ तो सत्तारूढ़ दल “मूक दर्शक बने रहे”। इस बीच, भाजपा तीखे हमले के लिए आती है। कुमार का दावा है कि पार्टी तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में धार्मिक ध्रुवीकरण लाने का प्रयास कर रही है। वे कहते हैं, “वे इसे ‘दक्षिण की अयोध्या’ कहते थे। भाजपा इसे दूसरी अयोध्या बनाकर राजनीति करना चाहती थी और हम इसकी इजाजत नहीं देंगे।” भले ही बयानबाज़ी तेज़ हो रही हो, टीवीके सचेत रूप से प्रत्यक्ष तनाव से बच रहा है। कुमार बताते हैं कि विजय ने अब तक इस मुद्दे पर आक्रामक बयान क्यों नहीं दिया है। “हम कोई स्थिति पैदा नहीं करना चाहते हैं। हम शांति और दशकों से चली आ रही परंपराओं को बनाए रखना चाहते हैं। हम भावनात्मक या धार्मिक मुद्दों के साथ खेलना नहीं चाहते हैं,” वे कहते हैं, “आप जानते हैं कि विजय कौन है – वह बिना किसी भेदभाव के सभी धर्मों, सभी लोगों, सभी जातियों में विश्वास करता है।” यह स्थिति टीवीके के बड़े राजनीतिक आख्यान से जुड़ी है – जो विजय की व्यापक अपील को व्यापक सत्ता-विरोधी लहर में परिवर्तित करना चाहती है। कुमार इस विचार को खारिज करते हैं कि तमिलनाडु त्रिकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ रहा है। वे कहते हैं, ”मैं इसे बिल्कुल भी त्रिकोणीय मुकाबले के रूप में नहीं देखता। एआईएडीएमके के नेतृत्व वाला एनडीए मुकाबले में ही नहीं है। पूरे तमिलनाडु में उनका प्रभुत्व कम हो गया है।” इसके बजाय, वह इस क्षण को राजनीतिक मंथन के रूप में प्रस्तुत करता है। वे कहते हैं, ”लोग एक गंभीर बदलाव चाहते हैं। तमिलनाडु इस बात का उदाहरण होगा कि कैसे गंभीर परिवर्तन एक राज्य में प्रतिबिंबित हो सकता है और बदलाव ला सकता है।” उन्होंने दावा किया कि टीवीके पहले ही महत्वपूर्ण प्रगति कर चुका है। “हमने पूरे तमिलनाडु में 40 प्रतिशत प्रभाव को पार कर लिया है। अगले कुछ दिनों में, हम उल्लेखनीय वृद्धि करेंगे।” उस विश्वास का केंद्र वह है जिसे पार्टी राजनीतिक भागीदारी में स्वाभाविक उछाल कहती है। कुमार कहते हैं, ”पिछले कुछ सालों से राजनीति से दूर रहने वाले अस्सी से नब्बे फीसदी लोग अब टीवीके के आने के बाद राजनीति के बारे में बोलने लगे हैं।” “वे मोदी, द्रमुक और अन्नाद्रमुक से तंग आ चुके हैं। उनके पास कोई विकल्प नहीं है। अब, थलपति विजय के साथ, बच्चे और बुजुर्ग भी राजनीति के बारे में बोल रहे हैं और चाहते हैं कि वह बदलाव लाएं।” पार्टी प्रशासनिक पक्षपात का भी आरोप लगाती है, खासकर पुलिस की ओर से। कुमार का दावा है कि “डीएमके समर्थित पुलिस अधिकारी” टीवीके कार्यक्रमों में बाधाएं पैदा कर रहे हैं। “कोल्लूर में, हमने बैरिकेड्स बनाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने हमें अनुमति नहीं दी। आखिरी मिनट तक, हमें मंजूरी नहीं दी गई,” वह चुनाव आयोग से हस्तक्षेप करने का आह्वान करते हुए कहते हैं। “यदि पश्चिम बंगाल में वे 600 अधिकारियों को बदल सकते हैं, तो तमिलनाडु में क्यों नहीं?” टीवीके के लिए, थिरुपरनकुंड्रम मुद्दा सिर्फ एक स्थानीय फ्लैशप्वाइंट नहीं है, बल्कि एक परीक्षण मामला है कि क्या वह एक ऐसी पार्टी के रूप में अपनी

रीवा के बेला बायपास पर 3 घंटे तक जाम:कई किलोमीटर रेंगते रहे वाहन, गर्मी में यात्री परेशान हुए; चोरहटा पुलिस नदारद रही

रीवा के बेला बायपास पर 3 घंटे तक जाम:कई किलोमीटर रेंगते रहे वाहन, गर्मी में यात्री परेशान हुए; चोरहटा पुलिस नदारद रही

रीवा के बेला बायपास पर रविवार को जाम की समस्या ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। करीब 3 घंटे तक सड़क पर जाम और स्लो मूविंग ट्रैफिक की स्थिति बनी रही, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान छोटे-बड़े सभी वाहन लंबी कतारों में फंसे नजर आए और कई जगहों पर वाहन रेंग-रेंग कर चलते रहे। जानकारी के अनुसार, बायपास पर अचानक बढ़े ट्रैफिक दबाव और अव्यवस्थित डायवर्शन के कारण हालात बिगड़ गए। पुलिया निर्माण कार्य के चलते रास्ता संकरा हो गया है, लेकिन वहां ट्रैफिक को व्यवस्थित करने के लिए कोई ठोस इंतजाम नजर नहीं आया। नतीजतन, कुछ ही देर में जाम की स्थिति बन गई और देखते ही देखते वाहनों की कतार कई किलोमीटर तक पहुंच गई। तेज गर्मी से ज्यादा तकलीफ हुई स्थानीय लोगों का कहना है कि बेला बायपास पर यह समस्या नई नहीं है, लेकिन रविवार को हालात ज्यादा खराब रहे। कई वाहन चालकों ने जल्दी निकलने के चक्कर में गलत दिशा से गाड़ियां निकालनी शुरू कर दीं, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। जाम में फंसे यात्रियों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे, जिन्हें तेज गर्मी और देरी के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ट्रक चालक राजेश पटेल ने बताया कि डायवर्शन काफी संकरा है, जिससे बड़े वाहनों को निकालने में दिक्कत होती है। उन्होंने कहा कि आगे-पीछे से वाहन घुस जाते हैं, जिससे रास्ता पूरी तरह ब्लॉक हो जाता है। उनके अनुसार, मौके पर पुलिस की मौजूदगी नहीं होने से ट्रैफिक कंट्रोल नहीं हो पाता और जाम लंबा खिंच जाता है। कोई पुलिसकर्मी नजर नहीं आया हैरानी की बात यह रही कि चोरहटा थाना की दूरी महज कुछ ही मीटर होने के बावजूद मौके पर कोई पुलिसकर्मी नजर नहीं आया। लोगों का आरोप है कि घंटों तक जाम लगा रहा, लेकिन थाने का कोई भी जवान स्थिति संभालने नहीं पहुंचा। करीब तीन घंटे बाद किसी तरह ट्रैफिक धीरे-धीरे सामान्य हो सका, लेकिन तब तक सैकड़ों लोग परेशान हो चुके थे। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि बेला बायपास पर स्थायी ट्रैफिक प्रबंधन की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या से राहत मिल सके।

कौन से मशरूम और चीज़ में होता है सबसे अधिक विटामिन-D? शाकाहारी हैं तो मिलेगा खूब बेनिफिट्स

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Last Updated:April 05, 2026, 18:53 IST विटामिन D शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है, लेकिन शाकाहारी लोगों के लिए इसकी कमी पूरी करना अक्सर मुश्किल हो जाता है. ऐसे में कुछ खास मशरूम और चीज़ ऐसे विकल्प बनकर सामने आते हैं, जो प्राकृतिक रूप से विटामिन D देने में मदद कर सकते हैं और हड्डियों के साथ-साथ इम्युनिटी को भी मजबूत बनाते हैं. विटामिन D शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने, इम्युनिटी बढ़ाने और कैल्शियम के सही अवशोषण में अहम भूमिका निभाता है. आमतौर पर इसे “सनशाइन विटामिन” कहा जाता है क्योंकि यह धूप से मिलता है, लेकिन खानपान के जरिए भी इसकी पूर्ति की जा सकती है. खासकर शाकाहारी लोगों के लिए यह जानना जरूरी हो जाता है कि किन फूड्स से विटामिन D मिल सकता है. ऐसे में कुछ खास मशरूम और चीज़ ऐसे विकल्प हैं, जो इस कमी को पूरा करने में मदद कर सकते हैं. मशरूम शाकाहारी लोगों के लिए विटामिन D का बेहतरीन स्रोत माने जाते हैं, खासकर बटन मशरूम और पोर्टोबेलो मशरूम. इनकी खास बात यह है कि जब इन्हें धूप या UV लाइट के संपर्क में रखा जाता है, तो इनमें विटामिन D2 की मात्रा काफी बढ़ जाती है. रिसर्च के अनुसार, UV एक्सपोज़्ड मशरूम में सामान्य मशरूम की तुलना में कई गुना ज्यादा विटामिन D पाया जा सकता है. यह शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को बेहतर बनाता है और हड्डियों को मजबूत करता है. यही कारण है कि डॉक्टर भी सीमित मात्रा में मशरूम को डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं. दूसरी ओर, चीज़ यानी पनीर और अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स में भी कुछ मात्रा में विटामिन D पाया जाता है, लेकिन यह मशरूम जितना अधिक नहीं होता. Cheddar Cheese और Swiss Cheese जैसे चीज़ में विटामिन D के साथ-साथ कैल्शियम और प्रोटीन भी अच्छी मात्रा में मिलते हैं, जो हड्डियों और मांसपेशियों के लिए फायदेमंद होते हैं. हालांकि, चीज़ में फैट की मात्रा भी अधिक होती है, इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. शाकाहारी लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि केवल एक ही फूड पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार अपनाना ज्यादा फायदेमंद होता है. मशरूम और चीज़ के साथ-साथ फोर्टिफाइड दूध, दही और अनाज भी विटामिन D के अच्छे स्रोत हो सकते हैं. इसके अलावा, रोजाना कुछ समय धूप में बैठना भी जरूरी है, ताकि शरीर प्राकृतिक रूप से विटामिन D बना सके. अगर आप शाकाहारी हैं और विटामिन D की कमी से बचना चाहते हैं, तो UV एक्सपोज़्ड मशरूम आपके लिए सबसे बेहतर विकल्प हो सकते हैं, जबकि चीज़ सपोर्टिंग सोर्स के रूप में काम करता है. सही डाइट और लाइफस्टाइल अपनाकर आप आसानी से इस जरूरी विटामिन की कमी को पूरा कर सकते हैं और अपनी हड्डियों व इम्युनिटी को मजबूत बनाए रख सकते हैं. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 05, 2026, 18:53 IST

बकस्वाहा में अधूरा डिवाइडर बना हादसों की वजह:4 महीने से NH पर निर्माण अधूरा; डिवाइडर से टकराकर फंस रहे वाहन

बकस्वाहा में अधूरा डिवाइडर बना हादसों की वजह:4 महीने से NH पर निर्माण अधूरा; डिवाइडर से टकराकर फंस रहे वाहन

छतरपुर जिले के बकस्वाहा में छतरपुर-दमोह नेशनल हाईवे पर बन रहा डिवाइडर हादसों का कारण बन रहा है। नगर परिषद द्वारा यातायात सुधार के लिए शुरू किया गया यह निर्माण कार्य अधूरा है और सुरक्षा इंतजामों की कमी के चलते लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। छोटी पुलिया से पुराने बस स्टैंड तक लाखों की लागत से बन रहे इस डिवाइडर के कारण अब तक 8 से 10 वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। रविवार सुबह आगरा से जबलपुर जा रहा एक पत्थर से लदा ट्रक डिवाइडर में घुस गया और क्षतिग्रस्त हो गया। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन ट्रक को भारी नुकसान पहुंचा। ट्रक चालक गोविंद कुशवाहा ने बताया कि रात के समय रोशनी की कमी के कारण डिवाइडर स्पष्ट दिखाई नहीं देता। उन्होंने कहा कि वे सड़क समझकर आगे बढ़ रहे थे, तभी अचानक ट्रक डिवाइडर से टकराकर फंस गया। न तो रेडियम, न ही रिफ्लेक्टर स्थानीय निवासियों के अनुसार, डिवाइडर पर न तो रेडियम, न ही रिफ्लेक्टर और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है। सड़क का निर्माण भी पूरी तरह से अधूरा है, जिससे वाहन चालकों को आगे डिवाइडर होने का अनुमान नहीं लग पाता। कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष संजय दुबे ने इस स्थिति को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक डिवाइडर आ जाने से दुर्घटनाएं हो रही हैं। दुबे ने इसे ‘मौत का डिवाइडर’ करार देते हुए चेतावनी दी कि किसी भी बड़ी दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी नगर परिषद की होगी। इंजीनियर बोले- ठेकेदार को नोटिस जारी करेंगे इस संबंध में तहसीलदार भरत पांडे ने बताया कि डिवाइडर का निर्माण पिछले चार महीनों से अधूरा पड़ा है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर काम पूरा नहीं हुआ या इससे यातायात बाधित होता रहा, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं नगर परिषद के सब इंजीनियर श्रीकांत खरे ने बताया कि ठेकेदार को नोटिस जारी कर जल्द कार्य पूर्ण करने, साइन बोर्ड लगाने और सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। लगातार हो रहे हादसों के बाद नगरवासियों में आक्रोश है और उन्होंने जल्द समाधान की मांग की है।

दो बाइकों की आमने-सामने भिड़ंत, एएसआई समेत दो घायल:गंभीर हालत में हायर सेंटर रेफर, बालाघाट में लिंगा मजार के पास हादसा

दो बाइकों की आमने-सामने भिड़ंत, एएसआई समेत दो घायल:गंभीर हालत में हायर सेंटर रेफर, बालाघाट में लिंगा मजार के पास हादसा

बालाघाट में रविवार को ग्रामीण थाना क्षेत्र अंतर्गत लिंगा मजार के पास हट्टा रोड पर दो बाइकों की आमने-सामने की भिड़ंत हो गई। इस दुर्घटना में एक सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) और एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। बालाघाट में जिला अस्पताल में एडमिट घायलों में हट्टा थाना में पदस्थ एएसआई रवनसिंह उईके (51) और लोहारा निवासी राहुल पिता जयचंद राहंगडाले (25) शामिल हैं। सूचना मिलने पर डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल बालाघाट में भर्ती कराया गया। हट्टा थाना से बालाघाट की ओर आ रहे थे बताया गया कि एएसआई रवनसिंह उईके अपने कार्य से हट्टा थाना से बालाघाट की ओर आ रहे थे। वहीं, राहुल राहंगडाले लिंगा से अपना काम निपटाकर अपने घर लोहारा जा रहे थे। लिंगा मजार के पास दोनों की बाइकें आपस में टकरा गईं। हादसे में एएसआई रवनसिंह उईके और राहुल राहंगडाले दोनों को गंभीर चोटें आई हैं। जिला अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है।

गर्मियों में हर दिन पिएं 1 गिलास सत्तू का शरबत, शरीर को होंगे ये अद्भुत फायदे

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Last Updated:April 05, 2026, 17:55 IST Benefits of drinking Sattu drink in summer: गर्मियों में मौसम में सत्तू का सेवन सेहत के लिए वरदान से कम नहीं होता है. काले चने को भूनकर और फिर इसे पीसकर सत्तू तैयार होता है. सत्तू में ढेरों पोषक तत्व मौजूद होते हैं. यह शरीर को भरपूर एनर्जी देने के साथ ही शरीर को अंदर से ठंडा रखता है. एक ग्लास सत्तू का शरबत पीने से आपका पेट ठंडा होगा. आप लू से बचे रहेंगे. गर्मियों में भरपूर एनर्जी मिलेगी. डिहाइड्रेशन से बचाव होगा. जानिए सत्तू का ड्रिंक पीने से सेहत को क्या-क्या फायदे होते हैं. सत्तू का शरबत शरीर के आंतरिक तापमान को कंट्रोल करता है. ये नेचुरल रूप से ही शीतलक होता है. सत्तू का शरबत पीने से शरीर अंदर से ठंडा रहता है. पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है. गर्मी से होने वाली थकावट से बचाव होता है. शरीर के अंग ठंडे रहते हैं. ये गर्म हवाओं, लू से शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है. सत्तू का सेवन पाचन तंत्र के लिए बहुत ही हेल्दी माना गया है. ये नुचरल तरीके से पाचन क्रिया में सुधार करता है.सत्तू में अघुलनशील फाइबर काफी होता है, जिससे कब्ज की शिकायत नहीं होती है. जब आप इसे खाली पेट सुबह में पीकर घर से निकलते हैं तो दिन भर एनर्जेटिक तो रहते ही हैं, पेट और आंतों में जमा गंदगी भी अगली सुबह अच्छी तरह से साफ हो जाती है. सत्तू ड्रिंक प्राकृतिक रूप से मल त्याग को नियमित करता है. पेट संबंधित सभी समस्याओं से गर्मियों में बचाए रखता है. मांसपेशियों को रिपेयर करने में भी सत्तू ड्रिंक बेहद कारगर है. सत्तू प्लांट बेस्ड प्रोटीन का एक शक्तिशाली स्रोत है. जो लोग नॉनवेज नहीं खाते हैं, वे इसे अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं. प्रतिदिन एक गिलास सत्तू मांसपेशियों के रख-रखाव और टिशू की मरम्मत के लिए आवश्यक अमीनो एसिड प्रदान करता है. इससेये वर्कआउट के बाद एक बेहतर रिकवरी पेय पदार्थ बन जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google जिन लोगों को डायबिटीज है, उनके लिए भी सत्तू या इससे तैयार ड्रिंक बहुत ही फायदेमंद होती है. ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता है सत्तू. इसमें मौजूद हाई फाइबर और लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) के कारण यह इंसुलिन लेवल में अचानक होने वाली बढ़ोतरी को रोकता है. इससे आप लॉन्ग-टर्म ब्लड शुगर लेवल को आसानी से मैनेज कर सकते हैं. यदि आपका वजन लगातार बढ़ रहा है तो आप सत्तू का सेवन कर सकते हैं. सत्तू के ड्रिंक को पी सकते हैं, इसमें फाइबर होने के कारण ये पेट को भरा रखता है देर तक, जिससे आप कुछ भी उल्टा-सीधा खाने से बचे रहते हैं. आपको जल्दी-जल्दी भूख नहीं लगती है. इसमें मौजूद विशेष प्रकार का फाइबर, तृप्ति (satiety)हार्मोन को एक्टिव करता है. यह ब्रेन को संकेत देता है कि आपका पेट भरा हुआ है. प्रतिदिन एक गिलास सत्तू पीने से जंक फूड खाने या भोजन के दौरान अधिक खाने की इच्छा स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है. इससे आप अधिक कैलोरी इनटेक से बचते हैं, स्थायी रूप से वजन कम करना भी आसान हो जाता है. सत्तू का शरबत हार्ट को हेल्दी रखता है. कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करता है. जिन फूड्स में हाई फाइबर मौजूद होते हैं, वे पेट के साथ ही हृदय के लिए भी फायदेमंद होते है. सत्तू बैड कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) के स्तर को कम करने में मदद करता है. इसमें मौजूद पोटैशियम और मैग्नीशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करते हैं, जिससे आप हार्ट डिजीज से बचे रह सकते हैं. दमकती त्वचा और मजबूत बालों के लिए भी सत्तू शरबत पी सकते हैं. इसमें आयरन और मैंगनीज काफी होते हैं. आयरन रक्त में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ाता है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है. एनीमिया के कारण होने वाली रूखेपन से बचाव होता है. इसमें मौजूद प्रोटीन और मिनरल्स बालों के फॉलिकल्स को अंदर से मजबूत बनाते हैं. इससे बालों का झड़ना कम हो जाता है. भुने हुए चने से बना सत्तू का शरबत बनाना बहुत ही आसान है. आप इसे सुबह घर से बाहर निकलने से पहले पिएं. बॉटल में भी रख सकते हैं. ये ड्रिंक एनर्जी बूस्टर की तरह काम करती है. इसे बनाने के लिए एक गिलास पानी में 2-3 चम्मच सत्तू पाउडर, चुटकीभर काला नमक, नींबू, भुना हुआ जीरा पाउडर मिला सकते हैं. कुछ लोग हरी मिर्ची, प्याज, टमाटर, धनिया और पुदीने की पत्तियां भी काटकर डालते हैं. इससे इसका स्वाद और पौष्टिक तत्व दोनों ही बढ़ जाते हैं. इसे पीकर आप दिन भर फ्रेश और कूल महसूस कर सकते हैं. First Published : April 05, 2026, 17:47 IST

अंडर-20 एथलेटिक्स मीट में देहरादून के आहिल और दीपांशु चैंपियन:प्रतियोगिता का हुआ समापन; नेशनल के लिए कर्नाटक जाएंगे होनहार एथलीट्स

अंडर-20 एथलेटिक्स मीट में देहरादून के आहिल और दीपांशु चैंपियन:प्रतियोगिता का हुआ समापन; नेशनल के लिए कर्नाटक जाएंगे होनहार एथलीट्स

महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के एथलेटिक्स ट्रैक पर चल रही दो दिवसीय उत्तराखंड स्टेट जूनियर अंडर-20 एथलेटिक्स प्रतियोगिता का रविवार को समापन हो गया। प्रतियोगिता के दूसरे और अंतिम दिन 18 इवेंट्स आयोजित किए गए। समापन समारोह में स्पोर्ट्स कॉलेज के प्रधानाचार्य राजेश ममगाई (मुख्य अतिथि) और ओलंपियन मनीष रावत (विशिष्ट अतिथि) ने विजेता एथलीट्स को मेडल और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया और उनका हौसला बढ़ाया। इस प्रतियोगिता में उत्तराखंड के सभी जिलों से कुल 134 होनहार एथलीट्स (92 बालक और 42 बालिकाओं) ने अपना दम-खम दिखाया। प्रतियोगिता की प्रमुख बातें दूसरे दिन के स्वर्ण पदक विजेता एथलीट्स अंतिम दिन ट्रैक और फील्ड में कई शानदार मुकाबले देखने को मिले। यहां देखें बालक और बालिका वर्ग में प्रथम स्थान (गोल्ड मेडल) प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों की सूची: कार्यक्रम में इनकी रही विशेष उपस्थिति: आयोजन को सफल बनाने में उत्तराखंड एथलेटिक संघ के अध्यक्ष संदीप शर्मा, संयुक्त सचिव भारत भूषण, कोषाध्यक्ष एम.सी. शाह, जिला फुटबाल संघ देहरादून के सचिव मोहम्मद उस्मान समेत मधुसूदन जोशी, गुलशन अली और सुनील शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।

अटल बस्ती में 25 लाख से बनी सीसी रोड:नपा अध्यक्ष ने किया निरीक्षण, बोलीं- अब पट्टे देकर पक्के मकान बनवाएंगे

अटल बस्ती में 25 लाख से बनी सीसी रोड:नपा अध्यक्ष ने किया निरीक्षण, बोलीं- अब पट्टे देकर पक्के मकान बनवाएंगे

नीमच के किलेश्वर मंदिर रोड स्थित अटल बस्ती की सूरत अब बदलने लगी है। नगर पालिका ने यहां सालों से फैली कीचड़ और गंदगी की समस्या को खत्म करते हुए लगभग 25.50 लाख की लागत से 480 मीटर लंबी सीसी रोड का निर्माण करा दिया है। रविवार को नगरपालिका अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा ने पार्षदों के साथ मिलकर नई बनी सड़क का जायजा लिया। उन्होंने ठेकेदार को सख्त हिदायत दी कि सड़क की क्वालिटी में कोई कमी नहीं होनी चाहिए, वरना कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बस्ती की हालत देख भावुक हुईं अध्यक्ष निरीक्षण के दौरान स्वाति चोपड़ा पुरानी यादें साझा करते हुए भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि जब वह पहली बार यहां आई थीं, तो बच्चों को कीचड़ में खेलते देख उन्हें बहुत दुख हुआ था। तभी उन्होंने ठान लिया था कि इस बस्ती का विकास करना ही है। अब यहां न सिर्फ सड़कें बन गई हैं, बल्कि 700 मीटर लंबी नाली का काम भी चल रहा है। पक्के मकान और पट्टों की जगी उम्मीद बस्ती के लोगों ने पानी और बिजली की समस्या भी बताई, जिस पर अध्यक्ष ने जल्द समाधान का भरोसा दिया। उन्होंने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि जल्द ही पात्र परिवारों को जमीन के पट्टे दिए जाएंगे। इन पट्टों की मदद से लोग प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ ले सकेंगे। अब झुग्गी-झोपड़ियों की जगह लोग अपने पक्के मकानों में सम्मान के साथ रह पाएंगे। अध्यक्ष ने साफ किया कि अटल बस्ती की तरह शहर की अन्य पिछड़ी बस्तियों में भी इसी तरह बारी-बारी से विकास कार्य किए जाएंगे ताकि कोई भी इलाका सुविधाओं से पीछे न रहे।

सीहोर मंडी में 6 घंटे अघोषित कटौती पर चक्काजाम:नागरिक-व्यापारी सड़क पर उतरे; बोले- नए सब-स्टेशन के बाद भी नहीं सुधरी हालत

सीहोर मंडी में 6 घंटे अघोषित कटौती पर चक्काजाम:नागरिक-व्यापारी सड़क पर उतरे; बोले- नए सब-स्टेशन के बाद भी नहीं सुधरी हालत

सीहोर जिले के मंडी क्षेत्र में अघोषित बिजली कटौती से परेशान नागरिकों और व्यापारियों ने आज (रविवार) सीहोर-श्यामपुर मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका आरोप है कि कंपनी क्षेत्र में अत्यधिक बिजली कटौती कर रही है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। मंडी क्षेत्र में पिछले कई दिनों से लगातार घोषित और अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। गर्मी के इस दौर में दिन और रात में कई-कई घंटों तक बिजली गुल रहती है। आज अघोषित कटौती का समय 6 घंटे से अधिक हो गया, जिससे लोगों का सब्र टूट गया। नागरिकों का कहना है कि बिजली विभाग से बार-बार आग्रह करने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। नए सब-स्टेशन से भी हालत में सुधार नहीं यह उल्लेखनीय है कि प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर ने 26 मार्च को मंडी में 2 करोड़ 79 लाख रुपए की लागत से 33/11 केवी विद्युत सब-स्टेशन का लोकार्पण किया था। तब उन्होंने कहा था कि इस सब-स्टेशन से क्षेत्र के नागरिकों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलेगी और गर्मी में राहत मिलेगी। हालांकि, इसके विपरीत, मंडी क्षेत्र में बिजली का संकट और कटौती और बढ़ गई है।

करणी सेना परिवार ने किया 120 यूनिट रक्तदान:शाजापुर में कैंप लगाया, पिछले साल से 3 यूनिट अधिक ब्लड जमा

करणी सेना परिवार ने किया 120 यूनिट रक्तदान:शाजापुर में कैंप लगाया, पिछले साल से 3 यूनिट अधिक ब्लड जमा

शाजापुर जिला अस्पताल में रविवार को करणी सेना परिवार की ओर से रक्तदान कैंप लगाया गया। दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक चले कैंप में कई लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कुल 120 यूनिट रक्त जमा हुआ। मीडिया प्रभारी रोहित सिंह राजपूत ने बताया कि यह कैंप संगठन के प्रदेश मंत्री अजीत सिंह खड़ी डोडिया के जन्मदिन के मौके पर लगाया गया था। जिला अध्यक्ष सोनू बना सापखेड़ा के नेतृत्व में हुए इस आयोजन में पिछले साल का रिकॉर्ड भी टूट गया। पिछले वर्ष जहां 117 यूनिट खून इकट्ठा हुआ था, वहीं इस बार यह आंकड़ा 120 तक पहुंच गया। एसपी और एडिशनल एसपी ने बढ़ाया उत्साह शिविर की शुरुआत शाजापुर एसपी यशपाल सिंह राजपूत ने फीता काटकर की। इस दौरान एडिशनल एसपी घनश्याम मालवीय भी मौजूद रहे, जिन्होंने रक्तदाताओं की सराहना करते हुए इसे सबसे बड़ी मानव सेवा बताया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने पूरी व्यवस्था संभाली और आने वाले लोगों का मार्गदर्शन किया। एसपी का हुआ सम्मान इस मौके पर करणी सेना परिवार ने शाजापुर एसपी यशपाल सिंह राजपूत का विशेष सम्मान भी किया। उनके कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे होने की खुशी में उन्हें साफा बांधा गया, मिठाई खिलाई गई और उन पर पुष्पवर्षा की गई। शिविर में युवाओं का जोश देखने लायक था।