दतिया के 25 गांवों में ओले-बारिश से फसल चौपट:रविवार को भी दिनभर बादल छाए रहे, नुकसान के आकलन के लिए सर्वे टीम बनाई

दतिया के सेवढ़ा क्षेत्र में शनिवार शाम हुई तेज ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। शुरुआती आकलन में करीब 25 गांवों में फसलों को लगभग 100 प्रतिशत नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। सबसे ज्यादा असर गेहूं की तैयार खड़ी फसल पर पड़ा है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ना तय है। सेवढ़ा एसडीएम अशोक अवस्थी ने बताया कि, नुकसान के आकलन के लिए सर्वे दल गठित कर दिए गए हैं। टीमें मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रही हैं और तीन दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपी जाएगी। उधर, रविवार को भी दिनभर बादल छाए रहे और मौसम में नमी बनी रही, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार, रात में हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है। गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान कृषि विज्ञान केंद्र दतिया के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विश्वनाथ कंसाना ने बताया कि इस समय हो रही बारिश से अब फसलों को कोई फायदा नहीं है, बल्कि नुकसान ही बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि जहां केवल बारिश हुई है, वहां गेहूं की कटाई में देरी होगी, लेकिन जिन क्षेत्रों में ओलावृष्टि हुई है, वहां दाने झड़ने की स्थिति बन गई है। तेज हवा और पानी के कारण फसल जमीन पर लेट गई है, जिससे दानों की गुणवत्ता प्रभावित होगी। डॉ. कंसाना के अनुसार, लगातार नमी और धूप की कमी के कारण गेहूं के दाने कमजोर पड़ेंगे और उनकी चमक खत्म हो जाएगी। इसका सीधा असर मंडियों में मिलने वाले भाव पर पड़ेगा। अनुमान है कि गेहूं के दाम में करीब 100 रुपए प्रति क्विंटल तक की गिरावट आ सकती है। सेवढ़ा के यह गांव हुए प्रभावित जोरी, रामपुरा, नहला, दाबनी, सिरसा, अटरा, बड़ोखरी, मलियापुरा, खंजापुरा, बस्तुरी, चीना, दिगुवा, देभई, मंगरोल, कसेरुआ, रुहेरा, किटाना, बघावली, थरेट, भगुवापुरा, डिरोलीपार, ग्यारा एवं सेवढ़ा से लगे इलाके शामिल है।
क्या आपके शरीर का एक हिस्सा हो रहा सुन्न? बोलने में हो रही है दिक्कत… तो तुरंत हो जाएं सतर्क, यह ब्रेन स्ट्रोक का संकेत हो सकता है जानलेवा

Last Updated:April 05, 2026, 16:17 IST ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में न्यूरोसर्जरी प्रमुख डॉ. सुमित गोयल ने ब्रेन स्ट्रोक को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है. उन्होंने बताया कि शरीर के एक हिस्से में सुन्नपन, बोलने में दिक्कत और अचानक चक्कर आना स्ट्रोक के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में दिमाग की कोशिकाओं को ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता और कुछ ही मिनटों में स्थायी क्षति शुरू हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर लोग इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण इलाज में देरी होती है और स्थिति गंभीर हो जाती है. ग्रेटर नोएडा: क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर में होने वाली एक मामूली सी सुन्नपन या बोलने में हल्की सी लड़खड़ाहट किसी बड़े खतरे का संकेत हो सकती है? जिसे हम अक्सर थकान समझकर टाल देते हैं, वह असल में ‘ब्रेन स्ट्रोक’ जैसा जानलेवा हमला हो सकता है. चिकित्सा विज्ञान में इसे ऐसी इमरजेंसी माना जाता है जहाँ एक-एक सेकंड की कीमत मरीज की जिंदगी होती है. यथार्थ अस्पताल के न्यूरोसर्जरी प्रमुख डॉ. सुमित गोयल ने इस गंभीर बीमारी के प्रति आगाह करते हुए बताया है कि कैसे हमारी छोटी सी जागरूकता और समय पर लिया गया फैसला स्थायी विकलांगता और मौत के मुंह से किसी को बाहर निकाल सकता है. यथार्थ अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. सुमित गोयल ने बताया कि स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग तक खून का प्रवाह अचानक रुक जाता है या किसी रक्त वाहिका के फटने से दिमाग के हिस्से को नुकसान पहुंचता है. ऐसी स्थिति में दिमाग की कोशिकाओं को ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता और कुछ ही मिनटों में स्थायी क्षति शुरू हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर लोग इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण इलाज में देरी होती है और स्थिति गंभीर हो जाती है. ये हैं ब्रेन स्ट्रोक के शुरुआती संकेत1. शरीर के एक हिस्से में अचानक कमजोरी या सुन्नपन2. बोलने में दिक्कत या शब्दों का स्पष्ट उच्चारण न कर पाना3. अचानक चक्कर आना या संतुलन बिगड़ना4. आंखों से धुंधला दिखना समय पर इलाज क्यों जरूरी?उन्होंने बताया कि स्ट्रोक के मामलों में गोल्डन पीरियड बेहद अहम होता है. यदि मरीज को शुरुआती कुछ घंटों में इलाज मिल जाए, तो दिमाग को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है. वहीं, देरी होने पर न केवल जान का खतरा बढ़ जाता है, बल्कि मरीज को स्थायी विकलांगता का सामना भी करना पड़ सकता है. डॉ. सुमित गोयल ने बताया कि स्ट्रोक पूरी तरह समय पर निर्भर बीमारी है. मरीज जितनी जल्दी चिकित्सा सुविधा तक पहुंचता है, उसके ठीक होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है. शुरुआती लक्षणों को पहचानना और तुरंत इलाज शुरू करना बेहद जरूरी है, क्योंकि देरी होने पर दिमाग को होने वाला नुकसान स्थायी हो सकता है. उन्होंने कहा कि कई बार लोग हल्के लक्षणों को थकान या सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में गंभीर रूप ले लेते हैं. इसलिए किसी भी संदिग्ध लक्षण को हल्के में नहीं लेना चाहिए. युवाओं में भी बढ़ रहा खतराडॉ गोयल ने बताया कि पहले स्ट्रोक को बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब यह तेजी से युवाओं में भी देखने को मिल रहा है. इसके पीछे मुख्य कारण बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, धूम्रपान और अनियमित खानपान हैं. उन्होंने कहा कि हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं भी स्ट्रोक के खतरे को कई गुना बढ़ा देती हैं. यही वजह है कि कम उम्र के लोगों को भी नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहना चाहिए. कैसे करें बचाव?उन्होंने बताया कि स्ट्रोक से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है. इसके लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें, संतुलित और पौष्टिक आहार लें, धूम्रपान और अत्यधिक शराब से दूरी बनाएं,ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें. About the Author Rahul Goel राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें Location : Greater Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar Pradesh First Published : April 05, 2026, 16:17 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
महंगी क्रीम छोड़िए, चेहरे पर कुदरती निखार के लिए रोज खाएं गुलाब से बना गुलकंद, गर्मी में शरीर रखता है ठंढा

Last Updated:April 05, 2026, 16:16 IST डॉ. राजकुमार (आयुष) ने बताया कि गुलकंद का इस्तेमाल भारत में सदियों से होता आ रहा है, खासकर गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह स्किन के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है. गुलकंद में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन्स शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करते हैं. जब शरीर अंदर से साफ होता है, तो उसका असर सीधे चेहरे पर दिखता है. स्किन ज्यादा फ्रेश, क्लियर और ग्लो नजर आने लगती है. ख़बरें फटाफट ऋषिकेश: आज के दौर में जहां हर कोई इंस्टेंट ग्लो के लिए महंगी क्रीम्स और केमिकल से भरे ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर निर्भर हो गया है, वहीं धीरे-धीरे लोग फिर से पुराने और नेचुरल उपायों की तरफ लौट रहे हैं. बाहरी चमक से ज्यादा अब अंदर से हेल्दी स्किन की जरूरत समझ में आने लगी है. ऐसे में गुलाब से बना गुलकंद एक ऐसा देसी और असरदार उपाय बनकर सामने आया है, जो न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है बल्कि चेहरे पर कुदरती निखार भी लाता है. गर्मी में शरीर को ठंढा रखता है गुलकंद लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान डॉ. राजकुमार (आयुष) ने बताया कि गुलकंद का इस्तेमाल भारत में सदियों से होता आ रहा है, खासकर गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह स्किन के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है. गुलकंद में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन्स शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करते हैं. जब शरीर अंदर से साफ होता है, तो उसका असर सीधे चेहरे पर दिखता है. स्किन ज्यादा फ्रेश, क्लियर और ग्लोइंग नजर आने लगती है. खानपान से स्किन हो रही प्रभावित आजकल की लाइफस्टाइल में अनहेल्दी फूड, कम पानी पीना और स्ट्रेस जैसी समस्याएं आम हो गई हैं. इन सबका सबसे ज्यादा असर हमारी स्किन पर पड़ता है. पिंपल्स, डलनेस और ऑयली स्किन जैसी दिक्कतें बढ़ने लगती हैं. ऐसे में रोजाना सिर्फ एक चम्मच गुलकंद खाना एक छोटा लेकिन असरदार बदलाव साबित हो सकता है. यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है, जिससे पेट साफ रहता है और स्किन पर ब्रेकआउट्स कम होते हैं.गुलकंद की खास बात यह है कि यह नेचुरल कूलेंट की तरह काम करता है. गर्मियों में शरीर में बढ़ी हुई गर्मी कई बार स्किन प्रॉब्लम्स की वजह बनती है. गुलकंद इस गर्मी को संतुलित करता है और अंदर से ठंडक पहुंचाता है. इसका असर चेहरे पर एक सॉफ्ट और नैचुरल ग्लो के रूप में नजर आता है. यही वजह है कि आयुर्वेद में इसे काफी फायदेमंद माना गया है. नेचुरल तरीके से तैयार होता है गुलकंद इसके अलावा, गुलकंद का स्वाद भी इसे रोजाना खाने के लिए आसान बनाता है. आप इसे सीधे खा सकते हैं या दूध के साथ मिलाकर ले सकते हैं. कुछ लोग इसे रोटी या ब्रेड के साथ भी खाते हैं. यानी यह एक ऐसा उपाय है जो न सिर्फ हेल्दी है बल्कि खाने में भी टेस्टी है, इसलिए इसे अपनी डेली रूटीन में शामिल करना मुश्किल नहीं लगता. महंगी क्रीम्स और ब्यूटी प्रोडक्ट्स अक्सर तुरंत रिजल्ट देने का दावा करते हैं, लेकिन लंबे समय में वे स्किन को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं. वहीं गुलकंद पूरी तरह नेचुरल है और इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता. यह धीरे-धीरे काम करता है, लेकिन इसका असर लंबे समय तक बना रहता है. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें Location : Rishikesh,Dehradun,Uttarakhand First Published : April 05, 2026, 16:16 IST
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 4 माह के शावक की मौत:9 महीने में पांचवीं घटना; अफसर बोले- दो बाघों के दहाड़ने की आवाज सुनी

नर्मदापुरम जिले के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) में एक बार फिर बाघ की मौत का मामला सामने आया है। मटकुली रेंज के नयाखेड़ा क्षेत्र में 4 माह के शावक का शव मिलने से वन्यजीवों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। बीते 9 महीनों में यह बाघों की मौत का पांचवां मामला है। जानकारी के अनुसार, शनिवार देर शाम नयाखेड़ा बीट के कक्ष क्रमांक 460 में तैनात फॉरेस्ट गार्ड को दो बाघों की तेज दहाड़ सुनाई दी। इसके बाद वन विभाग की टीम ने क्षेत्र में गश्त की। रात के समय मौके पर एक शावक मृत अवस्था में मिला, जिसके बाद सुरक्षा के दृष्टिकोण से स्थल की निगरानी की गई। अफसरों को आपसी संघर्ष के स्पष्ट संकेत मिले रविवार सुबह अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया, जहां बाघों के आपसी संघर्ष के स्पष्ट संकेत मिले। घटनास्थल के आसपास नर और मादा बाघ के पदचिह्न भी पाए गए, जिससे शावक की मौत किसी अन्य बाघ के हमले में होने की आशंका जताई जा रही है। क्षेत्र संचालक, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, नर्मदापुरम; सहायक संचालक (पिपरिया एवं पचमढ़ी); तहसीलदार पिपरिया तथा NTCA के प्रतिनिधि की उपस्थिति में निर्धारित SOP के अनुसार समस्त आवश्यक कार्रवाई पूरी की गई। वन विभाग ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंचनामा और पोस्टमार्टम कराया। शव परीक्षण डॉ. गुरुदत्त शर्मा (सतपुड़ा टाइगर रिजर्व) और डॉ. अमित ओढ़ (रतापानी टाइगर रिजर्व) की टीम ने किया। इसके बाद शावक के शव का अंतिम संस्कार किया गया। फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कि प्रथम दृष्टया शावक के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले हैं और मौत किसी मांसाहारी वन्यजीव के हमले से हुई प्रतीत होती है। पदचिह्नों के आधार पर यह मामला बाघों के आपसी संघर्ष का माना जा रहा है। 9 महीनों में पांचवीं ऐसी घटना सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और नर्मदापुरम क्षेत्र में बाघों की मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पिछले 9 महीनों में यह पांचवीं घटना है। इससे पहले अगस्त में मढ़ई क्षेत्र में एक बाघ मृत मिला था, जिसे आपसी संघर्ष का मामला बताया गया था। वहीं चूरना क्षेत्र में एक अन्य बाघ का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला, जिसमें शिकार की आशंका जताई गई थी। जनवरी में तवा नगर के जंगल में एक बाघिन की बीमारी से मौत हुई थी। हाल ही में मार्च में छिंदवाड़ा क्षेत्र में एक बाघ का शव दफन अवस्था में मिला था, जिसमें करंट या जहर से मौत की आशंका जताई गई थी। लगातार सामने आ रहे इन मामलों से टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
धनिया का अधिक मात्रा में सेवन सेहत के लिए हो सकता नुकसानदायक, शरीर में दिख सकते हैं ये इफेक्ट

Last Updated:April 05, 2026, 15:54 IST धनिया के पत्ते स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद हैं, लेकिन इनका अत्यधिक सेवन (विशेषकर 200 ग्राम से ज्यादा) या कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों में ये नुकसानदेह हो सकते हैं. इससे लो ब्लड प्रेशर, पेट में दर्द, उल्टी, एलर्जी, त्वचा में जलन और सूर्य के प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता जैसी समस्याएं हो सकती हैं.धनिया के पत्ते कुछ लोगों में एलर्जी या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं. यह त्वचा पर पित्ती, खुजली, होंठों या मुंह में सूजन, पेट दर्द, दस्त और कभी-कभी सांस लेने में तकलीफ का कारण बन सकते हैं. धनिया के पत्ते आमतौर पर सुरक्षित हैं. लेकिन अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से पाचन में समस्या, लो ब्लड प्रेशर, त्वचा की एलर्जी और गर्भवती महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. यह शरीर में पित्त को भी बढ़ा सकता है. डॉक्टर विनीत शर्मा ने बताया कि धनिया के पत्ते (और बीज) का अत्यधिक सेवन लो ब्लड प्रेशर (निम्न रक्तचाप) वाले लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. यह शरीर में प्राकृतिक रूप से बीपी को और कम कर सकता है. जिससे चक्कर आना, कमजोरी या बेहोशी हो सकती है. धनिया के पत्ते कुछ लोगों में एलर्जी या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं. यह त्वचा पर पित्ती, खुजली, होंठों या मुंह में सूजन, पेट दर्द, दस्त और कभी-कभी सांस लेने में तकलीफ का कारण बन सकते हैं. अधिक मात्रा में सेवन से स्किन एलर्जी, लो ब्लड प्रेशर और धूप के प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google धनिया के पत्तों का अत्यधिक सेवन पेट से जुड़ी समस्याओं, जैसे कि पेट दर्द, दस्त, अपच, या एसिड रिफ्लक्स को बढ़ा सकता है. विशेष रूप से अगर किसी को पहले से ही ऐसी समस्या हो. यह आंतों में जलन पैदा कर सकता है और ज्यादा मात्रा में सेवन से पाचन क्रिया प्रभावित हो सकती है. गर्भवती महिलाओं को धनिया का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए. यह मासिक धर्म को प्रभावित कर सकता है और गर्भपात का खतरा बढ़ा सकता है. सीमित मात्रा में धनिया का सेवन करें और डॉक्टर से परामर्श लें. धनिया का अत्यधिक सेवन लिवर के लिए हानिकारक हो सकता है. यह लिवर की समस्याओं को बढ़ा सकता है और विषाक्तता का कारण बन सकता है. सीमित मात्रा में धनिया का सेवन करें और लिवर की समस्याएं होने पर डॉक्टर से संपर्क करें. अधिक धनिया खाने से त्वचा संवेदनशील हो सकती है. जिससे सनबर्न और एलर्जी का खतरा बढ़ता है. सीमित मात्रा में धनिया का सेवन करें और धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाएं. First Published : April 05, 2026, 15:54 IST
संगरूर के युवक की करंट लगने से मौत:एपमी में कंबाइन साफ करते समय हादसा, गांव में हुआ अंतिम संस्कार

संगरूर जिले के फग्गूवाला गांव के एक युवक की मध्य प्रदेश में करंट लगने से मौत हो गई। युवक मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में कंबाइन पर काम कर रहा था, जहां कंबाइन साफ करते समय उसे करंट लग गया। मृतक की पहचान फग्गूवाला निवासी राजविंदर सिंह पुत्र काका सिंह के रूप में हुई है। मृतक के छोटे भाई करमजीत सिंह ने बताया कि दोनों भाई करीब डेढ़ महीने पहले रोजी-रोटी कमाने के लिए मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के दौदी गांव गए थे।करमजीत सिंह के अनुसार, राजविंदर सिंह कंबाइन पर हेल्पर का काम करता था। गांव में हुआ अंतिम संस्कार कंबाइन साफ करते समय उसे अचानक तेज करंट लग गया। घटना के बाद उसे तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने राजविंदर सिंह को मृत घोषित कर दिया। मध्य प्रदेश में पुलिस कार्रवाई पूरी होने के बाद मृतक का शव फग्गूवाला गांव लाया गया, जहां परिवार ने उसका अंतिम संस्कार किया। राजविंदर सिंह अपने पीछे अपनी विधवा पत्नी और दो बेटों को छोड़ गए हैं। परिवार के सदस्यों ने बताया कि वह हर साल फसल कटाई के सीजन में कंबाइन पर काम करने के लिए मध्य प्रदेश जाते थे और सीजन खत्म होने पर घर लौट आते थे।
रात में सोने से पहले करें यह 5 मिनट का काम, रातभर चैन की नींद सोएंगे, थकान भी होगी छूमंतर !

Last Updated:April 05, 2026, 15:27 IST Summer Health Tips: गर्मी में रात को सोने से पहले नहाना एक आसान और असरदार उपाय है, जो शरीर को ठंडक देता है और मन को शांत करता है. इससे शरीर का तापमान संतुलित होता है, तनाव कम होता है और गहरी नींद आने में मदद मिलती है. यह आदत थकान दूर करके सुबह ताजगी का एहसास भी कराती है. रात में गहरी नींद के लिए सोने से पहले नहाना फायदेमंद माना जाता है. Benefits of Bathing Before Sleep: गर्मियों में कई लोग सोने में परेशानी महसूस करते हैं. गर्मी की वजह से कई बार नींद नहीं आती है और लोग करवटें बदलते रहते हैं. दिनभर की थकान, पसीना और चिपचिपाहट रात को सोते समय बेचैनी पैदा करते हैं, जिससे नींद पूरी नहीं हो पाती है. अगर गर्मियां शुरू होने के बाद आप भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं, तो इससे निजात पाने के लिए रोज रात को एक छोटा सा काम कर सकते हैं. आप सोने से पहले नहाना शुरू कर दीजिए. यह आसान उपाय न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि अच्छी नींद लाने में मदद करता है. इससे आपकी थकान भी मिनटों में दूर हो सकती है. दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और सीनियर फिजीशियन डॉ. अनिल बंसल ने News18 को बताया कि गर्मी के मौसम में दिनभर शरीर पसीने और धूल-मिट्टी के संपर्क में रहता है. जब आप बिना नहाए सोने जाते हैं, तो यह गंदगी और चिपचिपाहट नींद में खलल डालती है. सोने से पहले नहाने से शरीर साफ और फ्रेश महसूस करता है, जिससे बिस्तर पर जाते ही आराम का एहसास होता है. खासकर ठंडे या हल्के गुनगुने पानी से स्नान करने पर शरीर का तापमान संतुलित होता है, जो गहरी नींद लाने में मदद करता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. कई रिसर्च में पता चला है कि सोने से पहले नहाने से शरीर का कोर टेम्परेचर थोड़ा गिरता है, जो दिमाग को यह संकेत देता है कि अब सोने का समय है. इससे नींद जल्दी आती है और नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है. साथ ही यह प्रक्रिया तनाव और मानसिक थकान को कम करने में भी मदद करती है, जिससे आप अधिक रिलैक्स महसूस करते हैं. इसके अलावा रात में नहाना मांसपेशियों की थकान दूर करने में भी सहायक है. दिनभर की भागदौड़ के बाद शरीर में जकड़न और थकावट महसूस होती है, जिसे पानी का हल्का स्पर्श कम कर देता है. अगर आप चाहें तो नहाने के पानी में कुछ बूंदें लैवेंडर ऑयल जैसी सुगंधित चीजें भी मिला सकते हैं, जो मन को शांत करने में मदद करती हैं और नींद को और गहरा बनाती हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि यह ध्यान रखना जरूरी है कि बहुत ठंडे पानी से अचानक न नहाएं, खासकर अगर आप थके हुए हों या आपका शरीर ज्यादा गर्म हो. हल्के गुनगुने या सामान्य तापमान के पानी से स्नान करना सबसे सुरक्षित और फायदेमंद होता है. अगर आप रोज रात को सोने से पहले यह 5 मिनट की आदत अपना लेते हैं, तो न केवल आपकी नींद सुधरेगी बल्कि सुबह उठते समय आप खुद को अधिक ताजगी और ऊर्जा से भरा हुआ महसूस करेंगे. अगर आपकी तबीयत खराब है, तो आप रात में नहाने से बचें और इस बारे में हेल्थ एक्सपर्ट से कंसल्ट करें. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 05, 2026, 15:27 IST
चेक बाउंस केस में महिला को 6 माह की सजा:हरदा में मुख्यमंत्री आवास योजना के लोन भुगतान में हुई थी चूक

हरदा जिले के नांदरा गांव की एक महिला को चैक बाउंस मामले में छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई है। यह सजा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत लिए गए ऋण का भुगतान न करने और चैक बाउंस होने के कारण दी गई। न्यायालय ने शनिवार को यह फैसला सुनाया। अधिवक्ता शिव विलास सराफ ने बताया कि अभियुक्त सुनीता पति बृजलाल सोलंकी निवासी नांदरा ने शासकीय योजना मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 1 लाख रुपए का ऋण लिया था। महिला द्वारा ऋण राशि का भुगतान नहीं किया गया, जिसके कारण उनके खाते में 86 हजार 740 रुपए बकाया हो गए थे। सुनीता सोलंकी ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की अबगांवखुर्द शाखा के बचत खाते का एक हस्ताक्षरित चैक दिया था। खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण यह चैक बाउंस हो गया। इसके बाद बैंक ने महिला के खिलाफ धारा 138 के तहत प्रकरण दर्ज कराया था। पुलिस ने इस मामले में चालान कोर्ट में पेश किया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रेमदीप शाह ने अभियुक्त महिला को चैक बाउंस के अपराध में दोषी पाया। न्यायालय ने उन्हें 6 माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने सुनीता सोलंकी को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की हरदा शाखा को प्रतिकर के रूप में 93 हजार 865 रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया। यदि महिला यह राशि अदा नहीं करती है, तो उन्हें छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
ट्रम्प बोले- ईरान पर आफत टूटने वाली है:सेंसेक्स-निफ्टी में लगातार तीसरे दिन आएगी बढ़त या फिर गिरावट? 5 फैक्टर्स पर टिका मार्केट

6 अप्रैल से शुरू होने वाले हफ्ते में बाजार में भारी उतार-चढ़ाव दिख सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति की ईरान को धमकी, कच्चे तेल की अस्थिर कीमतें, विदेशी निवेशकों की एक्टिविटी और ग्लोबल मार्केट की चाल जैसे फैक्टर बाजार की दिशा तय करेंगे। पिछले दो कारोबारी सत्र यानी बुधवार और गुरुवार को शेयर बाजार बढ़कर बंद हुआ था। शुक्रवार को गुड फ्राइडे की वजह से ये बंद था। लगातार दो दिन की तेजी के बाद क्या बाजार इस बढ़त को बरकरार रख पाएगा। चलिए समझते हैं… सपोर्ट और रेजिस्टेंस सपोर्ट जोन: 22,637 | 22,556 | 22,504 | 22,408 सपोर्ट यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को नीचे गिरने से सहारा मिलता है। यहां खरीदारी बढ़ने से कीमत आसानी से नीचे नहीं जाती। यहां खरीदारी का मौका हो सकता है। रेजिस्टेंस जोन: 23,320 | 23,814 | 23,875 | 24,142 रेजिस्टेंस यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को ऊपर जाने में रुकावट आती है। ऐसा बिकवाली बढ़ने से होता है। रजिस्टेंस जोन पार करने पर तेजी की उम्मीद रहती है। नोट: सपोर्ट और रेजिस्टेंस के लेवल्स वेल्थ व्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार है। अब 5 फैक्टर्स जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं… 1. ट्रम्प की डेडलाइन: समझौता नहीं हुआ तो गिर सकता है बाजार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को शांति समझौते और होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए 6 अप्रैल की डेडलाइन दी थी। ऐसे में शनिवार को ट्रम्प ने कहा कि अब वक्त खत्म हो रहा है… उन पर आफत टूटने में सिर्फ 48 घंटे बचे हैं। सैन्य कार्रवाई की आशंका बाजार में तेज गिरावट ला सकती है। 2. RBI की मीटिंग: ब्याज दरों में बदलाव की संभावना नहीं RBI की मॉनेटरी पॉलिसी में ब्याज दरों पर लिए फैसलों और महंगाई के आउटलुक पर निवेशक करीबी नजर रखेंगे। नए वित्त वर्ष की पहली मीटिंग 6 अप्रैल को शुरू होगी। 8 अप्रैल को गवर्नर मीटिंग में लिए फैसले की जानकारी देंगे। इस बार ब्याज दरों में बदलाव की संभावना नहीं है। 3. विदेशी निवेशक: मार्च में ₹1.22 लाख करोड़ के शेयर बेचे FPIs ने मार्च महीने में भारतीय बाजार के कैश सेगमेंट में रिकॉर्ड 1.22 लाख करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। यह अब तक का सबसे बड़ा मासिक आउटफ्लो है। इस बिकवाली से भारतीय शेयरों के वैल्युएशन आकर्षक स्तरों पर आ गए हैं, लेकिन नई खरीदारी के लिए तनाव का कम होना जरूरी है। 4. रुपए की चाल: मुद्रा बाजार में स्थिरता से थोड़ी राहत की उम्मीद डॉलर के मुकाबले गिरते रुपए को बचाने के लिए रिजर्व बैंक ने सख्त कदम उठाए हैं। आरबीआई ने बैंकों को ऑफशोर डेरिवेटिव्स (NDF) में ट्रेडिंग से रोक दिया है। इस फैसले के बाद गुरुवार को रुपया 1.8% की छलांग लगाकर 93.10 के स्तर पर बंद हुआ, जो 12 साल में इसकी एक दिन की सबसे बड़ी बढ़त है। मुद्रा बाजार में स्थिरता आने से शेयर बाजार को थोड़ी राहत मिल सकती है। 5. टेक्निकल चार्ट: निफ्टी के लिए 21,930 का स्तर अहम निफ्टी 50: रेलीगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा का मानना है कि निफ्टी धीरे-धीरे अपने क्रिटिकल सपोर्ट लेवल की ओर बढ़ रहा है। लॉन्ग-टर्म वीकली मूविंग एवरेज (200 WEMA) के हिसाब से 21,930 और उसके बाद 21,750 (जो अप्रैल 2025 का निचला स्तर था) अहम सपोर्ट हैं। मिश्रा ने कहा कि मौजूदा स्तरों पर अनिश्चितता दिख रही है। ऊपर की तरफ 23,000–23,200 के जोन में रेजिस्टेंस है और 23,500 एक बड़ी बाधा है। अगर निफ्टी इस लेवल को पार कर लेता है, तो बाजार का रुख सकारात्मक हो सकता है और यह 24,000 की ओर बढ़ सकता है। सेंसेक्स: एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. के मुताबिक सेंसेक्स 73,300 के करीब संभलने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इसका ओवरऑल स्ट्रक्चर अभी भी कमजोर है। ऊपर की ओर 73,800–74,000 के स्तर पर तत्काल रेजिस्टेंस है। वहीं अगर सेंसेक्स 72,000 के नीचे फिसला तो यह 71,500–71,000 के स्तर तक जा सकता है। एक्सपर्ट की राय 1. पोनमुडी आर. के मुताबिक, इस हफ्ते शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका है। बाजार की चाल फंडामेंटल्स के बजाय ग्लोबल फैक्टर्स से ज्यादा प्रभावित होगी। निवेशकों का सेंटिमेंट काफी हद तक मिडिल ईस्ट के हालातों, करेंसी और विदेशी निवेशकों पर टिका रहेगा। 2. रेलीगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च एसवीपी अजीत मिश्रा का मानना है कि मौजूदा अनिश्चितता को देखते हुए निवेशकों को संभलकर चलना चाहिए। मिश्रा की राय है कि पोर्टफोलियो में उन मजबूत लार्ज-कैप शेयरों को प्राथमिकता देनी चाहिए, जिनकी कमाई की स्थिति और बैलेंस शीट बेहतर हो। गुरुवार को सेंसेक्स 185 अंक चढ़कर 73,320 पर बंद हुआ सेंसेक्स 2 अप्रैल को दिन के निचले स्तर से 1,773 अंक चढ़कर बंद हुआ। सुबह ये भारी दबाव के साथ खुला और गिरकर 71,545 के स्तर तक आ गया था। बाद में बाजार में खरीदारी आई और यह 185 अंक (0.25%) चढ़कर 73,320 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी में भी 22,182 का निचला स्तर बनाने के बाद 531 अंकों की रिकवरी दिखी। ये 34 अंक (0.15%) चढ़कर 22,713 के स्तर पर बंद हुआ। आज के कारोबार में निफ्टी के आईटी और रियल्टी इंडेक्स सबसे ज्यादा चढ़ें। इसमें 2.62% और 1.18% की तेजी रही।
फल है या चमत्कार? गांवों में इसे कहते ‘पेट का डॉक्टर’, गर्मी में जरूर करें सेवन, जानें चौंकाने वाले फायदे

शिवपुरी. गर्मी का मौसम आते ही पेट से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं. तेज धूप, गर्म हवाएं, दूषित पानी और खानपान में लापरवाही के कारण लोगों को पेट दर्द, अपच, गैस, दस्त और उल्टी जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. खासकर ग्रामीण अंचल में, जहां लोग खेतों और बाहर के कामों में अधिक समय बिताते हैं, वहां यह समस्याएं और भी आम हो जाती हैं. ऐसे में प्रकृति ने हमें एक ऐसा देसी और असरदार फल दिया है, जिसे आयुर्वेद में औषधि का दर्जा प्राप्त है. यह फल है बेल. बेल का पेड़ धार्मिक और औषधीय दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. हिंदू धर्म में इसकी पत्तियों को भगवान शिव पर चढ़ाया जाता है और इसे पवित्र वृक्ष माना जाता है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस पेड़ का फल पेट की समस्याओं के लिए किसी रामबाण से कम नहीं है. ग्रामीण इलाकों में लोग वर्षों से बेल के फल का सेवन पेट दर्द और दस्त की स्थिति में करते आ रहे हैं. बेल का फल ऊंचे पेड़ पर लगता है. ऊपर से यह काफी कठोर दिखाई देता है लेकिन अंदर से इसका गूदा मुलायम, सुगंधित और औषधीय गुणों से भरपूर होता है. गर्मी के मौसम में जब पेट बार-बार खराब हो जाता है, तब बेल का शरबत या गूदा खाया जाए, तो यह तुरंत राहत देता है. आयुर्वेद के अनुसार बेल में ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो आंतों को ठंडक पहुंचाते हैं और पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं. दस्त की समस्या में बेल का गूदा बहुत फायदेमंद माना जाता है. यह आंतों की सूजन को कम करता है और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता. यही कारण है कि गांवों में आज भी बुजुर्ग लोग बेल का सेवन करने की सलाह देते हैं. बेल का शरबत न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि शरीर को अंदर से ठंडक भी देता है. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगारबेल में फाइबर, विटामिन सी, कैल्शियम, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करता है. नियमित रूप से बेल का सेवन करने से गैस, कब्ज और अपच जैसी समस्याएं दूर रहती हैं. इसके अलावा यह लू से भी बचाव करता है. गर्मी में कई बार बच्चों और बुजुर्गों को पेट खराब होने की समस्या अधिक होती है. ऐसे में बेल का गूदा या बेल का शरबत देना एक सुरक्षित और घरेलू उपाय माना जाता है. इसमें किसी प्रकार का केमिकल नहीं होता, इसलिए यह पूरी तरह प्राकृतिक उपचार है. बेल को सुखाकर बनाते हैं चूर्णग्रामीण अंचल में बेल को सुखाकर उसका चूर्ण भी बनाया जाता है, जिसे जरूरत पड़ने पर पानी के साथ सेवन किया जाता है. यह चूर्ण पेट दर्द और दस्त में तुरंत असर दिखाता है. यही वजह है कि बेल को गांवों में ‘पेट का डॉक्टर’ भी कहा जाता है. अगर आप भी गर्मी के मौसम में पेट की समस्याओं से परेशान रहते हैं, तो बेल को अपने आहार में जरूर शामिल करें. यह सस्ता, सुलभ और अत्यंत लाभकारी फल है, जो प्रकृति की ओर से हमें एक अनमोल उपहार के रूप में मिला है. बेल को खाने के फायदेबेल का सेवन पेट के लिए अत्यंत लाभकारी है. यह दस्त, पेट दर्द, गैस और अपच में राहत देता है. बेल आंतों को ठंडक पहुंचाकर पाचन तंत्र को मजबूत करता है. इसमें मौजूद फाइबर कब्ज दूर करता है और विटामिन सी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. बेल का शरबत लू से बचाव करता है और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता. नियमित सेवन से पेट साफ रहता है और गर्मी में होने वाली पेट की परेशानियां दूर रहती हैं. यह एक प्राकृतिक, सुरक्षित और असरदार घरेलू उपाय है.









