गर्मी में गर्भवती महिलाएं इन बातों का रखें खास ख्याल! डाइटिशियन से जानें, क्या खाएं, क्या बचें और कैसे रहें स्वस्थ

जमशेदपुर: गर्मी का मौसम शुरू होते ही आम लोगों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का खास ख्याल रखने की जरूरत ज्यादा हो जाती है. इस दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन, कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. ऐसे में सही खान-पान और दिनचर्या बेहद जरूरी हो जाती है. आइये जानते हैं गर्भवती महिलाएं ऐसे में क्या करें. जमशेदपुर की डाइटिशियन बीवा रंजन ने बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान गर्मी में एक बार में ज्यादा खाना खाने के बजाय थोड़े-थोड़े अंतराल पर भोजन करना ज्यादा फायदेमंद होता है. हर 2 से 3 घंटे में हल्का भोजन लेने से पेट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता और शरीर को लगातार ऊर्जा मिलती रहती है. हाइड्रेशन का रखें खास ध्यान गर्मी में सबसे बड़ी समस्या पानी की कमी होती है. इसलिए दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है. इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और ताजे फलों का जूस जैसे तरबूज का जूस शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है. सुबह का नाश्ता हो हल्का और पौष्टिक सुबह के समय फल खाना सबसे अच्छा माना जाता है. तरबूज, खरबूजा, सेब, केला जैसे फल शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल्स देते हैं. साथ ही आप हल्का दलिया, ओट्स या दूध भी ले सकती हैं. दोपहर का भोजन संतुलित रखें दोपहर में रोटी, चावल और दाल का संतुलित सेवन करें. इसके साथ हरी सब्जियां और सलाद जरूर शामिल करें. सलाद में खीरा, टमाटर, गाजर जैसी चीजें शरीर को ठंडक देती हैं और पाचन को बेहतर बनाती हैं. शाम के समय हेल्दी स्नैक्स लें शाम को भारी तली-भुनी चीजों से बचें. इसके बजाय सॉटेड पनीर, चना (चिकपी) सलाद या स्प्राउट्स खा सकती हैं. ये प्रोटीन से भरपूर होते हैं और मां व बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद हैं. रात का खाना हल्का रखें रात में हल्का भोजन जैसे खिचड़ी, दाल-चावल या हल्की सब्जी के साथ रोटी लेना बेहतर होता है. ज्यादा भारी खाना पचने में दिक्कत दे सकता है और नींद भी खराब कर सकता है. लाइफस्टाइल का भी रखें ध्यान गर्मी में ज्यादा मेहनत या हार्ड वर्क से बचना चाहिए. हल्की-फुल्की वॉक करना शरीर के लिए अच्छा रहता है. ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें और तेज धूप में बाहर निकलने से बचें. जानें क्या न करें बहुत ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और बाहर का खाना अवॉयड करें. कैफीन और ज्यादा मीठे पेय पदार्थ भी कम लें. अंत में गर्मी के मौसम में प्रेग्नेंट महिलाओं को संतुलित डाइट, पर्याप्त पानी और आरामदायक दिनचर्या अपनाकर खुद को स्वस्थ रखना चाहिए. इससे मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है.
पीरियड में तेज दर्द होना भी बांझपन का संकेत:25% महिलाओं में इन्फर्टिलिटी के पीछे एंडोमेट्रियोसिस; हर 10 में से एक महिला पीड़ित, लेकिन है अनजान

पीरियड के दौरान दर्द को अक्सर सामान्य मान लिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि हर दर्द सामान्य नहीं होता। एंडोमेट्रियोसिस नाम की गंभीर बीमारी हर 10 में से एक किशोरी और महिला को प्रभावित कर रही है, लेकिन ज्यादातर महिलाएं इससे अनजान हैं। यही वजह है कि इसकी पहचान 4 से 11 साल की देरी से होती है। चिंता की बात यह है कि आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में बांझपन का कारण यही बीमारी बन रही है। समय रहते पहचान न होने पर यह किडनी, आंत और प्रजनन क्षमता तक को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। प्रजनन एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया भावे चित्तावर के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। पीरियड के दौरान यह टिशु भी सक्रिय होता है, जिससे शरीर में सूजन, दर्द, चॉकलेट सिस्ट और एडहीजन बनने लगते हैं। धीरे-धीरे यह बीमारी गंभीर रूप लेकर अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। राजधानी भोपाल से लेकर मध्यप्रदेश हो या देश से लेकर दुनिया हो, कहीं भी महिला इससे सुरक्षित नहीं हैं। केस स्टडी 1- दर्द से किडनी फेलियर तक 33 वर्षीय युवती को कई सालों से पीरियड के दौरान तेज दर्द होता था। वह इसे सामान्य समझकर दर्दनाशक दवाएं लेती रही और कभी जांच नहीं कराई। धीरे-धीरे दर्द बढ़ता गया, लेकिन उसने इसे नजरअंदाज किया। कुछ समय बाद पेट में सूजन और पेशाब में समस्या शुरू हुई। जांच में पता चला कि एंडोमेट्रियोसिस टिशु ट्यूमर जैसा बनकर यूटेरस ट्यूब पर दबाव डाल रहा है, जिससे किडनी पर असर पड़ा। हालत बिगड़ने पर दोनों किडनी फेल होने लगीं। डॉक्टरों ने बताया कि अगर समय पर जांच हो जाती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। केस स्टडी 2- आंतों तक पहुंचा रोग 39 वर्षीय महिला में एंडोमेट्रियोसिस लंबे समय तक अनदेखा रहा। बाद में यह टिशु आंतों तक फैल गया और गंभीर संक्रमण हो गया। डॉक्टरों को पहले आंत का प्रभावित हिस्सा हटाना पड़ा, फिर सर्जरी कर टिशु निकाला गया। यह केस दिखाता है कि बीमारी कितनी खतरनाक हो सकती है। केस स्टडी 3: बांझपन की वजह बना रोग एक 32 वर्षीय महिला कई सालों से गर्भधारण नहीं कर पा रही थी। जांच के दौरान एंडोमेट्रियोसिस सामने आया। डॉक्टरों के अनुसार, यही बीमारी उसकी इंफर्टिलिटी का कारण बनी थी। इस टिशु के कारण बॉडी का हार्मोनल बैलेंस बुरी तरह से प्रभावित होता है। जिससे बॉडी में एस्ट्रोजेन का लेवल कम हो जाता है। जो प्रेगनेंसी में समस्या पैदा करता है। 4 से 11 साल देरी से होती है पहचान यह बीमारी 4 से 11 साल की देरी से पकड़ में आती है, क्योंकि महिलाएं इसे सामान्य पीरियड दर्द समझ लेती हैं। डॉ. चित्तावर कहती हैं कि अगर दर्द इतना हो कि महिला रोजमर्रा के काम नहीं कर पाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस ही बांझपन का कारण बन रहा है। यह टिशु प्रजनन अंगों को प्रभावित कर गर्भधारण की क्षमता को धीरे-धीरे कम करता है। रोग का दो ही स्थितियों में पता चलता है- पीरियड के दर्द को ना समझें सामान्य एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण अक्सर सामान्य पीरियड दर्द से मिलते-जुलते होते हैं, यही कारण है कि महिलाएं इसे नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं, जिन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है। सबसे प्रमुख लक्षण है पीरियड के दौरान असहनीय दर्द, जो दवा लेने के बाद ही कम हो। कई महिलाओं को पीरियड के पहले और बाद में भी लगातार दर्द बना रहता है। इसके अलावा दर्द के कारण दैनिक कार्य न कर पाना, भारी ब्लीडिंग, पेट में सूजन, उल्टी या मतली, लंबे समय तक पेल्विक दर्द और थकान भी इसके संकेत हो सकते हैं। इसलिए यह रोग खतरनाक एक्सपर्ट के अनुसार, सबसे गंभीर असर प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। कई मामलों में यह बीमारी गर्भधारण को मुश्किल बना देती है। यदि समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह किडनी, आंत और अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। WHO ने इस क्रॉनिक बीमारी की कैटेगरी में रखा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस एक कॉमन लेकिन कम पहचानी जाने वाली बीमारी है। यह एक क्रॉनिक (दीर्घकालिक) कैटेगरी वाला रोग है, जिसमें गर्भाशय की लाइनिंग जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। इस बीमारी का असर सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई, नौकरी और रिश्तों पर भी पड़ता है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं लंबे समय तक सही इलाज से वंचित रह जाती हैं। देर से पहचान सबसे बड़ा खतरा WHO का कहना है कि एंडोमेट्रियोसिस की पहचान में औसतन 4 से 12 साल की देरी होती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इसके लक्षणों को अक्सर सामान्य पीरियड दर्द समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसका स्थायी इलाज अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन दर्द निवारक दवाएं, हार्मोनल थेरेपी और जरूरत पड़ने पर सर्जरी से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। WHO सलाह देता है कि यदि दर्द दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
पीरियड में तेज दर्द होना भी बांझपन का संकेत:25% महिलाओं में इन्फर्टिलिटी के पीछे एंडोमेट्रियोसिस; हर 10 में से एक महिला पीड़ित, लेकिन है अनजान

पीरियड के दौरान दर्द को अक्सर सामान्य मान लिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि हर दर्द सामान्य नहीं होता। एंडोमेट्रियोसिस नाम की गंभीर बीमारी हर 10 में से एक किशोरी और महिला को प्रभावित कर रही है, लेकिन ज्यादातर महिलाएं इससे अनजान हैं। यही वजह है कि इसकी पहचान 4 से 11 साल की देरी से होती है। चिंता की बात यह है कि आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में बांझपन का कारण यही बीमारी बन रही है। समय रहते पहचान न होने पर यह किडनी, आंत और प्रजनन क्षमता तक को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। प्रजनन एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया भावे चित्तावर के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। पीरियड के दौरान यह टिशु भी सक्रिय होता है, जिससे शरीर में सूजन, दर्द, चॉकलेट सिस्ट और एडहीजन बनने लगते हैं। धीरे-धीरे यह बीमारी गंभीर रूप लेकर अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। राजधानी भोपाल से लेकर मध्यप्रदेश हो या देश से लेकर दुनिया हो, कहीं भी महिला इससे सुरक्षित नहीं हैं। केस स्टडी 1- दर्द से किडनी फेलियर तक 33 वर्षीय युवती को कई सालों से पीरियड के दौरान तेज दर्द होता था। वह इसे सामान्य समझकर दर्दनाशक दवाएं लेती रही और कभी जांच नहीं कराई। धीरे-धीरे दर्द बढ़ता गया, लेकिन उसने इसे नजरअंदाज किया। कुछ समय बाद पेट में सूजन और पेशाब में समस्या शुरू हुई। जांच में पता चला कि एंडोमेट्रियोसिस टिशु ट्यूमर जैसा बनकर यूटेरस ट्यूब पर दबाव डाल रहा है, जिससे किडनी पर असर पड़ा। हालत बिगड़ने पर दोनों किडनी फेल होने लगीं। डॉक्टरों ने बताया कि अगर समय पर जांच हो जाती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। केस स्टडी 2- आंतों तक पहुंचा रोग 39 वर्षीय महिला में एंडोमेट्रियोसिस लंबे समय तक अनदेखा रहा। बाद में यह टिशु आंतों तक फैल गया और गंभीर संक्रमण हो गया। डॉक्टरों को पहले आंत का प्रभावित हिस्सा हटाना पड़ा, फिर सर्जरी कर टिशु निकाला गया। यह केस दिखाता है कि बीमारी कितनी खतरनाक हो सकती है। केस स्टडी 3: बांझपन की वजह बना रोग एक 32 वर्षीय महिला कई सालों से गर्भधारण नहीं कर पा रही थी। जांच के दौरान एंडोमेट्रियोसिस सामने आया। डॉक्टरों के अनुसार, यही बीमारी उसकी इंफर्टिलिटी का कारण बनी थी। इस टिशु के कारण बॉडी का हार्मोनल बैलेंस बुरी तरह से प्रभावित होता है। जिससे बॉडी में एस्ट्रोजेन का लेवल कम हो जाता है। जो प्रेगनेंसी में समस्या पैदा करता है। 4 से 11 साल देरी से होती है पहचान यह बीमारी 4 से 11 साल की देरी से पकड़ में आती है, क्योंकि महिलाएं इसे सामान्य पीरियड दर्द समझ लेती हैं। डॉ. चित्तावर कहती हैं कि अगर दर्द इतना हो कि महिला रोजमर्रा के काम नहीं कर पाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस ही बांझपन का कारण बन रहा है। यह टिशु प्रजनन अंगों को प्रभावित कर गर्भधारण की क्षमता को धीरे-धीरे कम करता है। रोग का दो ही स्थितियों में पता चलता है- पीरियड के दर्द को ना समझें सामान्य एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण अक्सर सामान्य पीरियड दर्द से मिलते-जुलते होते हैं, यही कारण है कि महिलाएं इसे नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं, जिन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है। सबसे प्रमुख लक्षण है पीरियड के दौरान असहनीय दर्द, जो दवा लेने के बाद ही कम हो। कई महिलाओं को पीरियड के पहले और बाद में भी लगातार दर्द बना रहता है। इसके अलावा दर्द के कारण दैनिक कार्य न कर पाना, भारी ब्लीडिंग, पेट में सूजन, उल्टी या मतली, लंबे समय तक पेल्विक दर्द और थकान भी इसके संकेत हो सकते हैं। इसलिए यह रोग खतरनाक एक्सपर्ट के अनुसार, सबसे गंभीर असर प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। कई मामलों में यह बीमारी गर्भधारण को मुश्किल बना देती है। यदि समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह किडनी, आंत और अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। WHO ने इस क्रॉनिक बीमारी की कैटेगरी में रखा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस एक कॉमन लेकिन कम पहचानी जाने वाली बीमारी है। यह एक क्रॉनिक (दीर्घकालिक) कैटेगरी वाला रोग है, जिसमें गर्भाशय की लाइनिंग जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। इस बीमारी का असर सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई, नौकरी और रिश्तों पर भी पड़ता है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं लंबे समय तक सही इलाज से वंचित रह जाती हैं। देर से पहचान सबसे बड़ा खतरा WHO का कहना है कि एंडोमेट्रियोसिस की पहचान में औसतन 4 से 12 साल की देरी होती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इसके लक्षणों को अक्सर सामान्य पीरियड दर्द समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसका स्थायी इलाज अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन दर्द निवारक दवाएं, हार्मोनल थेरेपी और जरूरत पड़ने पर सर्जरी से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। WHO सलाह देता है कि यदि दर्द दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
एमपी में विधायकों को सजा के 5 चर्चित मामले:सिर्फ एक महिला विधायक की सदस्यता हुई थी समाप्त, दतिया MLA का केस भी कोर्ट पर निर्भर

दतिया सीट से कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती को फर्जीवाडे़ के मामले में दिल्ली की राउज अवेन्यू कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने दतिया सीट रिक्त घोषित करने की सूचना चुनाव आयोग को भेजते हुए गजट नोटिफिकेशन भी कर दिया। अब राजेन्द्र भारती इस सजा और सदस्यता खत्म करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की तैयारी में हैं। सोमवार को उनकी याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हो सकती है। मध्य प्रदेश में विधायकों को आपराधिक मामलों में सजा के ऐसे पांच प्रमुख मामले हैं जिनमें न्यायालय से विधायकों को सजा हुई, विधानसभा सचिवालय ने सीट रिक्त घोषित की लेकिन, उच्च अदालतों से कुछ विधायकों को राहत मिल गई तो उनकी विधायकी बच गई। लेकिन, एक विधायक की सदस्यता चली गई थी। 1. आशा रानी सिंह (विधायक,बिजावर) छतरपुर जिले के बिजावर सीट से भाजपा विधायक आशा रानी सिंह को 2011 में एक नौकरानी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई थी। उनके पति पर नौकरानी उनकी सजा के बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त की और सीट रिक्त घोषित की थी। भाजपा की पूर्व विधायक आशारानी सिंह को उनकी घरेलू सहायिका (तिजिया बाई) को प्रताड़ित करने और उसे आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी पाया गया था। 10 साल की सजा के बाद गई थी विधायकी 31 जनवरी 2011 को छतरपुर की एक अदालत ने उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने के जुर्म में 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। सजा के तुरंत बाद उनकी सदस्यता खतरे में आ गई थी, लेकिन उस समय ‘लिली थॉमस’ फैसला लागू नहीं था। हालांकि, जेल जाने के कारण और सजा की अवधि लंबी होने के कारण 31 अक्टूबर 2013 को उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया था। आशारानी सिंह ने हाई कोर्ट में अपील की थी, लेकिन उन्हें सजा पर स्टे नहीं मिला, जिसके कारण उनकी सदस्यता नहीं बच सकी और 31 अक्टूबर 2013 को उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया था। 2. प्रहलाद लोधी (विधायक, पवई) भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी का मामला मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय और न्यायपालिका के बीच खींचतान का एक बड़ा उदाहरण बना। 31 अक्टूबर 2019 को भोपाल की विशेष अदालत (एमपी-एमएलए कोर्ट) ने लोधी को साल 2014 के एक मामले में 2 साल की जेल और सजा सुनाई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने अवैध रेत उत्खनन पर कार्रवाई करने गए पवई के तत्कालीन तहसीलदार के साथ मारपीट की थी। कोर्ट से मिला स्टे तो बच गई सदस्यता विधानसभा सचिवालय ने इस सजा के आधार पर 2 नवंबर 2019 को उनकी सदस्यता रद्द करने की अधिसूचना जारी कर दी थी। इसके बाद प्रहलाद लोधी हाई कोर्ट पहुंचे और 7 नवंबर 2019 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी सजा पर स्टे दे दिया। इस स्टे के आधार पर काफी कानूनी विवाद हुआ, लेकिन अंततः सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और हाई कोर्ट के आदेश के बाद उनकी सदस्यता बहाल हुई और वे विधायक बने रहे। कोर्ट से राहत मिलने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने तत्कालीन स्पीकर के फैसले पर सवाल उठाए थे सत्यमेव जयते! साथी विधायक प्रहलाद लोधी को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत मिली है। स्पीकर ने विधायक को असंवैधानिक तरीके से अयोग्य घोषित किया था। प्रदेश सरकार ने घटिया हरकत की और एक महीने तक क्षेत्र की जनता को अपने जनप्रतिनिधि से वंचित रखने का महापाप किया। #MP_मांगे_जवाब— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) December 6, 2019 3. खरगापुर विधायक का निर्वाचन हो गया था शून्य टीकमगढ़ जिले की खरगापुर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक राहुल सिंह लोधी ने 2018 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। उनके खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी चंदा सिंह गौर ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी। याचिका में दो मुख्य आरोप लगाए गए थे। जिनमें, राहुल सिंह लोधी ने अपने नामांकन पत्र (एफिडेविट) में यह जानकारी छिपाई थी कि उनकी फर्म ‘आरआर कंस्ट्रक्शन’ का सरकार के साथ अनुबंध था, जो कि लाभ के पद के अंतर्गत आता है। उन्होनें चुनाव प्रचार के दौरान निर्धारित सीमाओं और नियमों का उल्लंघन किया गया था। हाई कोर्ट का फैसला और तारीख मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच के जस्टिस नमिन्द्रा सिंह ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए राहुल सिंह लोधी के 2018 के निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया। कोर्ट ने माना कि नामांकन पत्र में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना ‘जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951’ की धारा 100 के तहत चुनाव रद्द करने का ठोस आधार है। विधानसभा सचिवालय की कार्रवाई हाई कोर्ट के आदेश की प्रति मिलने के बाद, नवंबर 2022 में मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी की। इसके तहत राहुल सिंह लोधी की सदस्यता समाप्त कर दी गई और खरगापुर विधानसभा सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया। इसकी सूचना तत्काल चुनाव आयोग को भेजी गई थी। सुप्रीम कोर्ट से ‘स्टे’ और सदस्यता की बहाली विधानसभा से सदस्यता रद्द होने के तुरंत बाद राहुल सिंह लोधी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद उनकी सदस्यता बहाल तो हो गई, लेकिन कोर्ट ने उन पर कुछ शर्तें लगाई थीं। वे सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सकते थे, लेकिन अंतिम फैसला आने तक उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं था और वे विधायक के रूप में मिलने वाले कुछ भत्तों के लिए भी पात्र नहीं थे। 4. मुकेश मल्होत्रा (विधायक, विजयपुर) विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा को मार्च 2026 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एक मामले में दोषी मानते हुए चुनाव को शून्य घोषित कर दिया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने नामांकन पत्र में अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई थी। कोर्ट ने माना कि मतदाता को उम्मीदवार के आपराधिक इतिहास को जानने का अधिकार है और इसे छिपाना ‘भ्रष्ट आचरण’ की श्रेणी में आता है। राज्यसभा चुनाव में नहीं दे पाएंगे वोट, विधायकी बची रहेगी मुकेश मल्होत्रा ने एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बैंच के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। जिसपर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए उन्हें विधायक
बड़ा गणपति फ्लायओवर:वर्कऑर्डर के बाद भी यूटिलिटी लाइनें हटाने का काम अब तक शुरू नहीं, एक साल इसी में लग जाएगा

बड़ा गणपति चौराहे पर फ्लायओवर बनाने का मामला दो साल से चल रहा है। वर्कऑर्डर के बाद भी अब तक यूटिलिटी लाइनों की शिफ्टिंग का काम ही शुरू नहीं हुआ है। लाइनों की शिफ्टिंग में ही एक साल लग जाएगा। उसके बाद कहीं फ्लायओवर निर्माण शुरू हो सकेगा। बड़ा गणपति के साथ ही चंदन नगर ब्रिज की समीक्षा के लिए शनिवार को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अफसरों की बैठक ली। मंत्री ने साफ कहा कि काम समयबद्ध तरीके से पूरा होना चाहिए, क्योंकि पुल को सिंहस्थ से पहले तैयार करना है। बड़ा गणपति फ्लायओवर को लेकर अफसरों ने कहा, ड्रेनेज और पानी की यूटिलिटी लाइनें चौराहे से गुजर रही हैं। इनमें एक लाइन अंतिम चौराहे की ओर से आ रही है। इन लाइनों को हटाकर नई लाइनें डालनी होंगी। 8 से 10 दिन में काम शुरू कर देंगे। पूरा काम अंडरग्राउंड तरीके से किया जाएगा। बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल, आईडीए के सीईओ परीक्षित झाड़े, एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर और मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अफसर मौजूद रहे। काम के दौरान ट्रैफिक की दिक्कत, वैकल्पिक मार्ग तैयार होंगे अफसरों ने बताया कि बड़ा गणपति चौराहे पर मेट्रो स्टेशन भी प्रस्तावित है। ऐसे में जब यहां ब्रिज और मेट्रो दोनों का काम चलेगा तो यातायात का दबाव काफी बढ़ेगा। इस पर पुलिस विभाग से वैकल्पिक ट्रैफिक प्लान तैयार करने को कहा गया। उन्होंने कहा कि कहां से ज्यादा ट्रैफिक इस रास्ते पर आता है तो बताया गया कि रामबाग और किला मैदान की तरफ से आने वाला भारी यातायात इसी मार्ग से गुजरता है। इसके लिए जिंसी और कंडीलपुरा को वैकल्पिक मार्ग के रूप में देखा गया, लेकिन दोनों ही सड़कें अभी संकरी हैं। इस पर विजयवर्गीय ने निर्देश दिए कि पहले इन मार्गों को दुरुस्त किया जाए, ताकि निर्माण के दौरान शहर को ट्रैफिक परेशानी न झेलनी पड़े। सुस्त एजेंसियों पर सख्ती काम में देरी करने वाली निर्माण एजेंसियों का मुद्दा भी उठा। एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने कहा सड़कें बनाने वाली एजेंसियां समय पर काम नहीं कर रही हैं। कई बार जवाब मिलता है कि लेबर नहीं मिल रही। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने भी माना कि कई बार निर्देश देने के बावजूद एजेंसियां समय सीमा में काम नहीं कर रही हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि सोमवार को सभी एजेंसियों को बुलाकर स्पष्ट बात करें और जवाबदेही तय करें। 1 एजेंसी के पास कई काम बैठक में बड़ा गणपति पर यूटिलिटी लाइन शिफ्टिंग का काम लेने वाली एजेंसी पर भी सवाल उठे। बैठक में कहा गया कि वरुण जैन की कंपनी ने इस काम के साथ कई अन्य प्रोजेक्ट भी ले रखे हैं, ऐसे में एक ही एजेंसी इतने काम समय पर पूरे नहीं कर पाएगी। एजेंसी की ओर से बैठक में मौजूद प्रतिनिधि ने दावा किया कि सभी काम तय समय सीमा में पूरे किए जाएंगे। चंदन नगर फ्लायओवर : 8 दिन में जारी होगा टेंडर चंदन नगर फ्लायओवर प्रोजेक्ट पर भी चर्चा हुई। आईडीए की ओर से बताया गया कि इस प्रोजेक्ट के टेंडर 8 दिन में जारी कर दिए जाएंगे। आईडीए सीईओ ने कहा कि अगले डेढ़ महीने में वर्क ऑर्डर और एक साल में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है। हालांकि यहां भी निगम की ड्रेनेज और पानी की लाइनें निर्माण में बाधा बन रही हैं। बैठक में चंदन नगर से नगीन नगर तक जाने वाली सड़क पर भी चर्चा हुई।
भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चे:देशभर में 14 साल तक के 45 हजार भिखारी; राजस्थान दूसरे नंबर पर

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की मानें तो देशभर में 14 साल से कम उम्र वाले सिर्फ 45 हजार 296 बच्चे ही ऐसे हैं, जो भिक्षावृत्ति में लिप्त पाए गए। उसमें भी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 10 हजार बच्चे भीख मांगते पाए गए, जबकि दूसरे नंबर पर राजस्थान है, जहां इन बच्चों की संख्या सात हजार से अधिक है। यह जानकारी 2011 की जनगणना के आधार पर दी गई है। राज्य सभा में एक अतारांकित सवाल के जवाब में यह जानकारी दी गई है। राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने बताया कि आंकड़े भारत के महारजिस्ट्रार की वेबसाइट की सूचना पर आधारित है। ऐसे बच्चों के पुनर्वास की योजना 23 अक्टूबर, 2023 में शुरू की गई थी और तब से अब तक 2653 बच्चों का पुनर्वास किया गया है। इनमें 1507 बच्चों को उनके माता-पिता अथवा परिवारों से मिलवाया गया। वहीं, 305 बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों से जोड़ा गया। 206 बच्चों को बाल कल्याण समिति को सौंपा गया है। साथ ही 625 बच्चों को स्कूलों में नामांकन की सुविधा प्रदान की गई है। सरकार ने कहा कि विभाग पहले से ही भिक्षावृत्ति के कार्य में लिप्त व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास के लिए योजना चला रहा है। जिसमें बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे में इस समय नए कानून अथवा योजना चलाने की आवश्यकता नहीं है। दो केंद्रशासित प्रदेशों में एक भी भिखारी नहीं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि केंद्र शासित प्रदेश दादरा-नगर हवेली और अंडमान निकोबार द्वीप समूह में एक भी बच्चा भिक्षावृत्ति में लिप्त नहीं पाया गया। वहीं, लक्ष्यद्वीप और सिक्किम में एक-एक, मिजोरम में छह, दमन और दीव में आठ और पुदुचेरी में नौ बच्चे ऐसे कार्यों में लिप्त पाए गए।
सलमान लाला से इंस्पायर्ड होकर आसिफ बना अपराधी:5 स्टार होटलों में रुकता, स्पोर्ट्स बाइक पर घूमा, पुलिस की मौजूदगी में पेशी की रील बनाई

भोपाल में विजय मेवाड़ा की बेरहमी से हत्या करने वाला आसिफ उर्फ बम इंदौर के डॉन सलमान लाला से इंस्पायर्ड था। सलमान की तर्ज पर महंगी कार-बाइक पर घूमता था। 5 स्टार होटलों में ठहरता और अवैध कारोबार से लाखों रुपए बना चुका था। आसिफ सोशल मीडियो प्लेटफॉर्म पर भी खासा एक्टिव रहता था। हर गतिविधि की रील बनाकर अपलोड करता था। सलमान की तरह आसिफ भी अपना एक बड़ा नेटवर्क बनाना चाहता था। यहां तक कि पुलिस की मौजूदगी में कोर्ट पेशी के दौरान कई रील बनाई और वायरल की हैं। उसके करीबियों की मानें तो नशे में आसिफ हैवान बन जाता था। साथ वालों तक को पीटता था। वह शराब पीने का बेहद शौकीन था। उसका बड़ा भाई शरीफ उर्फ बच्चा भी अपराधी है और भोपाल सेंट्रल जेल में बंद है। हत्या के बाद शॉर्ट एनकाउंटर में पकड़े गए आसिफ को न्यायालय ने 13 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेजा है। फिलहाल आरोपी हमीदिया अस्पताल में भर्ती है और उसका इलाज चल रहा है। पुलिस को गुमराह कर रहा आसिफ इलाजरत आसिफ से पुलिस फिलहाल कोई खास पूछताछ नहीं कर सकी है। जैसे फरारी काटने में उसकी मदद किसने की। तीन दिनों तक आरोपी कहां रहा। समसपुरा गांव तक कैसे पहुंचा। आरोपी लगातार बयान बदलकर पुलिस को गुमराह कर रहा है। उसने पुलिस को अपराध के बाद पैदल ही समसपुरा के जंगल तक पहुंचने की बात कही है। हालांकि उसकी बताई कहानी पुलिस के गले नहीं उतर रही है। अब रातीबड़ पुलिस उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। जुआ-सटटा और अड़ीबाजी के धंधे से जुड़ा शरीफ और आसिफ दोनों ही भाई जुआ, सट्टा और अड़ीबाजी के धंधे से जुड़े हैं। आसिफ के खिलाफ एक दर्जन से अधिक अपराध शहर के अलग-अलग थानों में दर्ज हैं। दोनों ही भाई शहर में अवैध कारोबार करने वालों से अड़ीबाजी कर रकम वसूलने का काम भी करते हैं। पर्शियन बिल्लियां पालने का शौकीन आसिफ बम पर्शियन कैट पालने का शौकीन है। उसके पास करीब 6 पर्शियन कैट हैं। इसी के साथ वह बकरा पालन का काम भी कर चुका है। प्रदेश सहित देश के अलग-अलग राज्यों में घूम चुका है। इसकी पुष्टि उसके इंस्टा अकाउंट से होती है। घेराबंदी देख पुलिस पर फायरिंग कर दी थी कारोबारी विजय मेवाड़ा हत्याकांड के मुख्य आरोपी कुख्यात बदमाश आसिफ उर्फ बम को पुलिस ने एक 1 अप्रैल को नाटकीय घेराबंदी के बाद दबोच लिया। 10 मिनट के भीतर दोनों ओर से तीन राउंड फायर किए गए। एक गोली आरोपी के दाहिने पैर के घुटने के करीब लगी। वह लड़खड़ाकर गिरा और उसे पकड़ लिया गया। 12 बजकर 15 मिनट पर पुलिस टीम आरोपी को लेकर सरकारी बोलेरो वाहन से समसपुरा गांव से हमीदिया अस्पताल के लिए रवाना हुई। फिलहाल आसिफ का इलाज जारी है। रातीबड़ थाना पुलिस ने अशोका गार्डन थाने के टीआई अनुराग लाल की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास का एक और मुकदमा दर्ज कर लिया है। जंगल में स्थित घटनास्थल से पुलिस ने लोडेड देसी पिस्टल सहित चले हुए कारतूस जब्त कर लिए हैं। सलमान लाला भी चला था दुर्लभ कश्यप की राह पर भले ही भोपाल का आसिफ इंदौर का बदमाश सलमान लाला से प्रेरित रहा हो, लेकिन खुद सलमान लाला उज्जैन के डॉन दुर्लभ कश्यप से प्रेरित था। दुर्लभ को सलमान अपना आइडल मानता था। दुर्लभ की तरह वह भी अपना नेटवर्क बढ़ाता था और युवा लड़कों को इस नेटवर्क से जोड़ता था। दुर्लभ कश्यप बेहद ही कम उम्र में बड़ा बदमाश बन गया था और एक दिन आपसी रंजिश के चलते गैंगवार में उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर आज तक दुर्लभ कश्यप के किस्से बताए जाते रहे हैं। दुर्लभ कश्यप उज्जैन के जीवाजीगंज के अब्दालपुरा का रहने वाला था। वही भी बिल्लयां पालने का शौकीन था। बताया जाता है कि दुर्लभ से प्रेरित होकर आसिफ भी बिल्लयां पालने लगा था। 15 साल की उम्र से उसने हथियारों के साथ सोशल मीडिया पर तस्वीरें डालनी शुरू कर दी थीं। लोगों धमकाता था। ये खबर भी पढ़ें… पुलिस को देखते ही जंगल में भागने लगा हत्यारा भोपाल के कारोबारी विजय मेवाड़ा हत्याकांड के मुख्य आरोपी कुख्यात बदमाश आसिफ उर्फ बम को पुलिस ने एक नाटकीय घेराबंदी के बाद दबोच लिया। 10 मिनट के भीतर दोनों ओर से तीन राउंड फायर किए गए। एक गोली आरोपी के दाहिने पैर के घुटने के करीब लगी। वह लड़खड़ाकर गिरा और उसे पकड़ लिया गया।पूरी खबर पढ़ें
PM मोदी आज बंगाल में चुनाव अभियान की शुरुआत करेंगे:स्टालिन का NDA को चैलेंज- हिम्मत है तो तमिलनाडु में 3-लैंग्वेज पॉलिसी का ऐलान करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को कूचबिहार में रैली के साथ पश्चिम बंगाल में भाजपा के चुनाव अभियान की शुरुआत करेंगे। वे दोपहर में रास मेला मैदान में आयोजित ‘बिजॉय संकल्प सभा’ को संबोधित करेंगे। रैली में मोदी ‘विकसित बंगाल’ का विजन पेश करेंगे और शासन, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर TMC सरकार को घेर सकते हैं। यह विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद राज्य में उनकी पहली चुनावी रैली होगी। मोदी ने आखिरी बार 14 मार्च को राज्य का दौरा किया था, जहां उन्होंने कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक रैली को संबोधित किया था और लगभग 18,680 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया था। इधर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एक चुनावी रैली के दौरान शनिवार को NDA को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान में हिम्मत है तो वह चुनाव प्रचार के दौरान राज्य में 3-भाषा नीति लागू करने की घोषणा करे। चुनाव से जुड़े अपडेट्स पांचों राज्यों में चुनाव के पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाएं…
हाईकोर्ट ने छुट्टी के दिन सुनवाई कर पुलिस को फटकारा:नाबालिग के अपहरण मामले में हाईकोर्ट ने कहा- 'बच्ची को हर हाल में पेश करो'

23 फरवरी को एक नाबालिग किशोरी का अपहरण हुआ था। पुलिस एफआईआर करने में नानुकुर करती रही। थाने पहुंचे पीड़िता के चाचा को पीट भी दिया। बाद में एफआईआर दर्ज हुई तो अपहरण के मामले में भी अज्ञात आरोपित बता दिए गए, जबकि किशोरी के परिवार वाले आरोपितों का नाम पुलिस को बताते रहे। बालिका के पिता ने हाई कोर्ट की शरण ली। मजदूर पिता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर शनिवार को छुट्टी के बाद भी सुनवाई की गई। हाई कोर्ट की डबल बेंच ने मामले की न केवल अवकाश के दिन सुनवाई की, बल्कि पुलिस को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने आदेश जारी किया कि पुलिस बालिका के साथ तमाम आरोपितों को भी कोर्ट में 6 अप्रैल को पेश करे। महू के बडगोंदा थाना क्षेत्र में अनुसूचित जाति की नाबालिग का दबंगों द्वारा अपहरण करने की शिकायत मजदूर पिता ने की है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज की, लेकिन पहले दबंगों का नाम गायब किया। महीनेभर में भी बालिका को तलाशने की कोई कोशिश नहीं की। पीड़िता के पिता के अनुसार पवन सिंह उसे उठाकर ले गया है। बालिका की उम्र 17 साल 3 माह है और वह पवन सिंह के कब्जे में है। एफआईआर में नाम न होने पर नाराजगी पीड़िता के पिता ने अभिभाषक शुभम मांडिल और गौरव गुप्ता के जरिए हाई कोर्ट के समक्ष बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। कोर्ट में इस दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी सरकार की ओर से उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नामजद एफआईआर नहीं करने को लेकर फटकार भी लगाई। साथ ही सरकार को निर्देश जारी किए कि सोमवार को पुलिस नाबालिग, जो कि पवन सिंह की अवैध हिरासत में है, उसे किसी भी हालत में कोर्ट के समक्ष पेश करे। कोर्ट के आदेश के बाद बदला पुलिस का रवैया डेढ़ माह पहले अपनी बेटी के अपहरण की एफआईआर कराने वाले पिता से पुलिस ने कोई जानकारी नहीं ली थी। वहीं शनिवार को हाई कोर्ट में सुनवाई होने और हाई कोर्ट से आदेश के तुरंत बाद पुलिस का रवैया बदल गया। 6 अप्रैल को बालिका को कोर्ट के समक्ष पेश करने के आदेश होने की बात सामने आते ही बडगोंदा पुलिस तुरंत पीड़िता के घर पहुंच गई और उसके परिवारजनों से घटना की जानकारी लेने की कोशिश करती रही।
ग्वालियर में हिस्ट्रीशीटर के घर ताबड़तोड़ फायरिंग, VIDEO:कार से आए थे हमलावर; नाम से बुलाते हुए गालियां दीं, फिर कट्टे से फायर किए

ग्वालियर में कार से आए बदमाशों ने एक हिस्ट्रीशीटर के घर पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। वारदात को अंजाम देकर हमलावर फरार हो गए। राहत की बात यह रही कि किसी को गोली नहीं लगी। हमलावरों ने पहले बदमाश लालू यादव का नाम लेकर गालियां दीं, इसके बाद कट्टे से फायरिंग शुरू कर दी। घटना बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के आनंद नगर की है। गोलीबारी के दौरान कोई भी सामने नहीं आया। शनिवार रात की इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें हमलावर फायरिंग करते दिख रहे हैं। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के आनंद नगर निवासी संजय उर्फ लालू यादव पुलिस रिकॉर्ड में गुंडा है। झांसी रोड, गोला का मंदिर, महाराजपुरा, ग्वालियर और क्राइम ब्रांच थानों में उसके खिलाफ नौ आपराधिक मामले दर्ज हैं। लालू यादव ने पुलिस को बताया कि शाम करीब पांच बजे कुछ हमलावर कार में सवार होकर आए और उसे ललकारते हुए गालियां दीं, इसके बाद फायरिंग कर फरार हो गए। उसने पुलिस को बताया कि हमला लक्ष्मणगढ़ निवासी अजीत गुर्जर उर्फ घोड़ा और उसके साथियों ने पुरानी रंजिश के चलते किया है। हालांकि पुलिस ने अभी आरोपियों के नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और पूरे मामले की जांच जारी है। यह भी सामने आया है कि लालू जमीन के कारोबार से जुड़ा है, ऐसे में रंजिश के एंगल से भी पड़ताल की जा रही है। दो वीडियो आए सामने शनिवार रात घटना के दो वीडियो सामने आए हैं। एक वीडियो में दो हमलावर लालू यादव का नाम लेकर गालियां देते हुए उसके घर की ओर कट्टे से फायरिंग करते नजर आ रहे हैं, जिसमें दो गोलियां चलाई गईं। दूसरे वीडियो में सीसीटीवी फुटेज में हमलावरों की कार साफ दिखाई दे रही है। बहोड़ापुर थाना प्रभारी आलोक परिहार ने बताया कि बदमाश के घर फायरिंग की घटना सामने आई है। वीडियो के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।









