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दिखने में एक जैसे संतरा और किन्नू, लेकिन सेहत पर असर बिल्कुल अलग! जानें कौन है ज्यादा फायदेमंद

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Last Updated:March 16, 2026, 22:20 IST बाजार में अक्सर संतरा और किन्नू साथ-साथ नजर आते हैं और कई लोग इन्हें एक जैसा समझ लेते हैं. हालांकि दोनों फल दिखने में भले ही मिलते-जुलते हों, लेकिन इनके स्वाद, गुण और पोषण में फर्क होता है. जानिए सेहत के लिए संतरा बेहतर है या किन्नू और दोनों में असली अंतर क्या है. सिट्रस फलों में संतरा और किन्नू एक जैसे लगते है दिखने में. बाजार में मिलने वाले सिट्रस फलों में संतरा और किन्नू काफी लोकप्रिय माने जाते हैं. देखने में दोनों का रंग और आकार लगभग एक जैसा होता है, इसलिए लोग अक्सर इन्हें एक ही समझ लेते हैं. लेकिन असल में ये दोनों अलग-अलग किस्म के फल हैं. इनके स्वाद, बनावट और पोषण में थोड़ा अंतर होता है. दोनों ही फल विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होते हैं और शरीर को कई तरह के फायदे देने के लिए जाने जाते हैं. संतरा क्या होता है?संतरा एक क्लासिक सिट्रस फल माना जाता है, जिसे लोग लंबे समय से खाते आ रहे हैं. इसका स्वाद हल्का मीठा और थोड़ा खट्टा होता है, जो इसे काफी ताजगी भरा बनाता है. संतरे में विटामिन-सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर की इम्यूनिटी मजबूत करने में मदद करता है. इसके अलावा इसमें फाइबर, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं. ये तत्व शरीर को कई तरह के संक्रमण से बचाने और त्वचा को हेल्दी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. किन्नू क्या होता है?किन्नू भी सिट्रस परिवार का ही फल है, लेकिन यह एक हाइब्रिड किस्म माना जाता है. यानी इसे दो अलग-अलग किस्मों को मिलाकर तैयार किया गया है. किन्नू आकार में थोड़ा बड़ा और ज्यादा जूसी माना जाता है. इसका स्वाद मीठा होने के साथ हल्की खटास लिए होता है. यही वजह है कि बहुत से लोगों को इसका रस काफी पसंद आता है. किन्नू में भी विटामिन-सी, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. पोषण के मामले में कौन बेहतर?पोषण के लिहाज से देखा जाए तो संतरा और किन्नू दोनों ही काफी फायदेमंद माने जाते हैं. दोनों में विटामिन-सी अच्छी मात्रा में मौजूद होता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है. इसके अलावा दोनों में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद कर सकते हैं. फाइबर की मौजूदगी पाचन को बेहतर बनाने में भी सहायक मानी जाती है. स्वाद और बनावट में अंतरसंतरे और किन्नू के स्वाद में थोड़ा फर्क महसूस किया जा सकता है. संतरा आमतौर पर हल्का मीठा और संतुलित स्वाद वाला होता है. वहीं किन्नू का स्वाद थोड़ा ज्यादा रसदार और हल्की खटास लिए होता है. किन्नू का छिलका अक्सर थोड़ा मोटा और फल से चिपका हुआ होता है, जबकि संतरे को छीलना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है. किसे चुनना ज्यादा सही?अगर सेहत की बात करें तो दोनों ही फल पोषण से भरपूर होते हैं. संतरा और किन्नू दोनों शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल्स देने में मदद कर सकते हैं. इसलिए इनमें से किसी एक को बेहतर या कमतर कहना पूरी तरह सही नहीं होगा. बेहतर यही है कि इन दोनों फलों को संतुलित मात्रा में अपनी डाइट का हिस्सा बनाया जाए. इससे शरीर को जरूरी पोषण मिल सकता है और स्वास्थ्य भी बेहतर बना रह सकता है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : March 16, 2026, 22:20 IST

राज्यसभा चुनाव: बिहार में एनडीए की जीत से नीतीश कुमार विजयी; ओडिशा में बीजेपी और सहयोगी दल ने जीती 3 सीटें | चुनाव समाचार

US President Donald Trump (AFP)

आखरी अपडेट:मार्च 16, 2026, 21:58 IST ओडिशा में, भाजपा समर्थित 3 उम्मीदवारों – मनमोहन सामल, सुजीत कुमार और भाजपा समर्थित निर्दलीय दिलीप रे – ने चार में से तीन सीटें जीतीं। 16 मार्च को पटना में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और अन्य के साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। ओडिशा और बिहार में राज्यसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित किए गए, जिसमें भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। ओडिशा में, भाजपा समर्थित तीन उम्मीदवारों – मनमोहन सामल, सुजीत कुमार और भाजपा समर्थित निर्दलीय दिलीप रे ने चार में से तीन सीटें जीतीं। शेष सीट बीजू जनता दल (बीजद) के उम्मीदवार संतरूप मिश्रा के खाते में गई। 12 साल के अंतराल के बाद चुनाव हुआ क्योंकि 2 अप्रैल को आने वाली चार रिक्तियों के लिए पांच उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे। बीजद के सदस्य निरंजन बिशी और मुन्ना खान और भाजपा के सुजीत कुमार और ममता मोहंता का कार्यकाल उस तारीख को समाप्त हो रहा है। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने परिणाम को राज्य के लिए “यादगार दिन” बताया। उन्होंने कहा, “हमारे द्वारा मैदान में उतारे गए तीन उम्मीदवार आज राज्यसभा चुनाव में जीत गए… सभी विधायकों ने, चाहे वह कांग्रेस पार्टी के हों या बीजद के, ओडिशा के विकास को आगे बढ़ाने के लिए तीनों उम्मीदवारों को भारी मतों से वोट दिया।” हालाँकि, मतदान के दिन विधानसभा में तनाव देखा गया क्योंकि बीजद और भाजपा विधायकों के बीच झड़प हो गई। बीजद प्रमुख और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने भाजपा पर “खरीद-फरोख्त” का आरोप लगाया और मतदान प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया, उन्होंने दावा किया कि एक विधायक को मानदंडों का उल्लंघन करके दूसरा मतपत्र जारी किया गया था। बिहार: एनडीए ने सभी पांच सीटों पर जीत हासिल की बिहार में, नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए ने सभी पांच राज्यसभा सीटों पर कब्जा कर लिया। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री जद (यू) के रामनाथ ठाकुर, भाजपा नेता शिवेश कुमार और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को विजेता घोषित किया गया। बिहार विधानसभा की सचिव और राज्यसभा चुनाव की रिटर्निंग ऑफिसर ख्याति सिंह ने नतीजों की पुष्टि की। 243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए को 202 सीटों के साथ अच्छा बहुमत प्राप्त है। बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने नतीजों की सराहना करते हुए कहा, “एनडीए के सभी पांच उम्मीदवार जीत गए हैं और मैं सभी को बधाई देता हूं… जिस तरह से एनडीए अब तक जीतता रहा है, वह भविष्य में भी इसी तरह जीतता रहेगा।” वरिष्ठ भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने नतीजों को गठबंधन की “चट्टान जैसी एकता” का प्रमाण बताया। हालाँकि, राजद नेता तेजस्वी यादव ने विपक्षी खेमे के भीतर विश्वासघात का आरोप लगाया और भाजपा पर चुनाव के दौरान “धन बल और प्रशासन के दुरुपयोग” का आरोप लगाया। यादव ने आरोप लगाया, “धोखाधड़ी, धोखाधड़ी, धनबल और प्रशासन का दुरुपयोग भाजपा की आदत है। सिर्फ बिहार राज्य में ही नहीं। हमने सुना है कि कई राज्यों में जहां आज चुनाव हुए, ऐसी ही चीजें सामने आई हैं।” हरियाणा में मतगणना में देरी इस बीच, भाजपा और कांग्रेस द्वारा मतदान की गोपनीयता के उल्लंघन का आरोप लगाने की शिकायतों के बाद हरियाणा में दो राज्यसभा सीटों के लिए वोटों की गिनती में देरी हुई। शाम 5 बजे शुरू होने वाली मतगणना स्थगित कर दी गई क्योंकि चुनाव आयोग ने दावों की जांच की। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के दो विधायकों ने अपने मतपत्र ठीक से नहीं मोड़े, जबकि कांग्रेस ने वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल विज पर वोट गोपनीयता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर चुनाव की अखंडता की रक्षा के लिए हस्तक्षेप की मांग की और परिणाम घोषित होने से पहले एक प्रतिनिधिमंडल से मिलने का अनुरोध किया। इससे पहले दिन में मतदान हुआ, जिसमें इंडियन नेशनल लोकदल ने मतदान में भाग नहीं लिया। मतदान से पहले हिमाचल प्रदेश चले गए कांग्रेस विधायक वोट डालने के लिए चंडीगढ़ लौट आए। भाजपा विधायकों द्वारा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल और पार्टी उम्मीदवार संजय भाटिया (भाजपा) और करमवीर सिंह बौद्ध (कांग्रेस) मैदान में हैं। आयोग से अनुमति मिलते ही परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) पहले प्रकाशित: मार्च 16, 2026, 21:43 IST समाचार चुनाव राज्यसभा चुनाव: बिहार में एनडीए की जीत से नीतीश कुमार विजयी; ओडिशा में बीजेपी और सहयोगी दलों ने जीती 3 सीटें अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

बालाघाट में मिला छत्तीसगढ़ के युवक का शव:पांढरीपाठ मंदिर में काम करता था; शरीर पर नहीं मिले चोट के निशान

बालाघाट में मिला छत्तीसगढ़ के युवक का शव:पांढरीपाठ मंदिर में काम करता था; शरीर पर नहीं मिले चोट के निशान

बालाघाट जिले के लांजी क्षेत्र के प्रसिद्ध पांढरीपाठ मंदिर के पीछे जंगल में सोमवार को एक युवक का शव मिला। बहेला पुलिस ने कोटवार की सूचना पर मौके पर पहुंचकर शव बरामद किया। मृतक की पहचान छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिला निवासी 33 वर्षीय चरणगिर जोगी के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया कि चरणगिर जोगी पहले पांढरीपाठ मंदिर में ही काम करता था, लेकिन अगस्त माह में काम छोड़कर घर चला गया था। वह तीन-चार दिन पहले ही वापस मंदिर आया था। सोमवार देर शाम उसका शव जंगल में संदिग्ध परिस्थितियों में पड़ा मिला। शरीर पर नहीं मिले चोट के निशान बहेला थाना प्रभारी रामकुमार रघुवंशी ने बताया कि प्रथम दृष्टया मृतक के शरीर पर चोट के कोई बाहरी निशान नहीं पाए गए हैं। शव की स्थिति को देखते हुए मौत कुछ समय पहले होने का अनुमान है। पुलिस ने शव को लांजी सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है। शराब के अत्यधिक सेवन की आशंका प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, युवक शराब का अत्यधिक सेवन करता था। आशंका जताई जा रही है कि जंगल में शराब पीने के बाद वह सो गया होगा और धूप या निर्जलीकरण के कारण उसकी जान चली गई। पुलिस का कहना है कि मंगलवार को परिजनों की मौजूदगी में होने वाले पोस्टमार्टम के बाद ही मौत की असल वजह सामने आएगी।

कलेक्टर बोलीं, 'मैंने खुद लगवाई एचपीवी वैक्सीन':मंदसौर में जागरूकता रथ रवाना, बताया- इससे साइड इफेक्ट नहीं होता

कलेक्टर बोलीं, 'मैंने खुद लगवाई एचपीवी वैक्सीन':मंदसौर में जागरूकता रथ रवाना, बताया- इससे साइड इफेक्ट नहीं होता

मंदसौर जिले में एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीनेशन के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर से एचपीवी वैक्सीन जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कलेक्टर अदिती गर्ग ने रथ को रवाना करते हुए कहा कि यह रथ जिले के विभिन्न गांवों में पहुंचकर लोगों को एचपीवी वैक्सीन के महत्व और इसके फायदे के बारे में जागरूक करेगा। इस अवसर पर कलेक्टर अदिती गर्ग ने कहा कि उन्होंने स्वयं एचपीवी वैक्सीन लगवाई है और इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि यह पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी टीका है, जो महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कलेक्टर ने अभिभावकों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रम में न आएं और अपनी बेटियों को यह टीका अवश्य लगवाएं। गांव-गांव जाकर जागरूक करेंगी “एचपीवी टीका मित्र” जिले में एचपीवी वैक्सीन के प्रचार-प्रसार के लिए “एचपीवी टीका मित्र” बनाए गए हैं। ये नर्सिंग कॉलेज की छात्राएं हैं, जो गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क करेंगी और उन्हें इस वैक्सीन के प्रति जागरूक करेंगी। उन्होंने कहा कि इस टीके को लेकर समाज में सही जानकारी पहुंचाना बेहद जरूरी है, ताकि अधिक से अधिक बालिकाएं इसका लाभ ले सकें। 14 से 15 वर्ष की बालिकाओं को लगाया जा रहा टीका कलेक्टर ने बताया कि जिले में 14 से 15 वर्ष की आयु वर्ग की बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन लगाई जा रही है। इसके लिए जिले में 10 वैक्सीनेशन केंद्र बनाए गए हैं, जहां नियमित रूप से टीकाकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टीका लगने के बाद केवल हल्का दर्द हो सकता है, जो अन्य टीकों की तरह सामान्य प्रक्रिया है। अधिकारियों को दिए जागरूकता बढ़ाने के निर्देश कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और अन्य माध्यमों से अभिभावकों तक एचपीवी वैक्सीन की सही जानकारी पहुंचाई जाए। साथ ही सभी फील्ड अधिकारी अपने-अपने कार्यालयों में एचपीवी वैक्सीन से संबंधित प्रचार सामग्री भी प्रदर्शित करें। अधिकारी अपने स्तर पर पात्र बालिकाओं को चिन्हित कर उनका वैक्सीनेशन सुनिश्चित करें, ताकि कम समय में अधिक से अधिक बच्चियों को इस टीके का लाभ मिल सके। इस दौरान सीईओ जिला पंचायत अनुकूल जैन, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, नर्सिंग कॉलेज का स्टाफ, एचपीवी टीका मित्र मौजूद रहे।

मार्च में साइन होने वाली भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील टली:अब नया टैरिफ स्ट्रक्चर तैयार होने के बाद होगी; अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प टैरिफ रद्द किए

मार्च में साइन होने वाली भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील टली:अब नया टैरिफ स्ट्रक्चर तैयार होने के बाद होगी; अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प टैरिफ रद्द किए

भारत और अमेरिका के बीच होने वाली अंतरिम ट्रेड डील अब कुछ समय के लिए टल गई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह डील अब तभी साइन होगी, जब अमेरिका अपना नया ग्लोबल टैरिफ स्ट्रक्चर तैयार कर लेगा। दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हालिया फैसले में डोनाल्ड ट्रम्प की उन शक्तियों को खत्म कर दिया है। जिसके तहत वे इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल कर भारी टैरिफ लगा देते थे। मार्च में साइन होनी थी डील, कोर्ट के फैसले से टली भारत और अमेरिका के बीच यह ट्रेड डील पहले इसी महीने यानी मार्च में साइन होने वाली थी। हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने पुराने रेसिप्रोकल टैरिफ को अमान्य कर दिया है। इस वजह से ट्रम्प प्रशासन को अब ग्लोबल ट्रेड के लिए एक नया फ्रेमवर्क तैयार करना पड़ रहा है। जब तक नया स्ट्रक्चर नहीं आता, तब तक अमेरिका ने ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत सभी देशों पर अस्थायी रूप से 10% टैरिफ लगा दिया है। यह व्यवस्था अगले 5 महीनों तक लागू रह सकती है। तुलनात्मक फायदे देखकर ही डील साइन करेंगे एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘हम डील की बारीकियों पर काम कर रहे हैं, लेकिन साइन तभी होगा जब उनका नया टैरिफ आर्किटेक्चर तैयार हो जाएगा। कोई भी देश समझौता तभी करता है जब उसे दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले मार्केट में कोई एडवांटेज मिले।’ भारत ने पहले कुछ खास प्रोडक्ट्स के लिए 18% की रेसिप्रोकल टैरिफ दर तय की थी। अधिकारी ने कहा कि अगर अमेरिका का नया स्ट्रक्चर पुराने जैसा ही रहता है, तो दरें वही रहेंगी, वरना इनमें बदलाव संभव है। मलेशिया जैसा हाल नहीं होगा, भारत की स्थिति अलग हाल ही में मलेशिया ने अमेरिका के साथ अपने व्यापार समझौते से हाथ पीछे खींच लिए हैं। इस पर सफाई देते हुए अधिकारी ने कहा कि भारत की स्थिति मलेशिया से अलग है। मलेशिया ने एक कानूनी समझौते पर साइन कर दिए थे, जो अमेरिकी कोर्ट के फैसले के बाद बेकार हो गया। वहीं भारत ने अभी तक केवल एक ‘फ्रेमवर्क डील’ पर बात की है, किसी कानूनी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसलिए भारत के पास परिस्थितियों के हिसाब से बदलाव करने की गुंजाइश है। नॉन-टैरिफ बाधाओं पर भी चल रही है चर्चा टैरिफ के अलावा दोनों देश नॉन-टैरिफ बैरियर्स और सेक्शन 232 के तहत लगाए गए सेक्टोरल टैरिफ को सुलझाने के लिए भी लगातार बातचीत कर रहे हैं। अधिकारी ने बताया, ‘हम इस समय का रचनात्मक उपयोग कर रहे हैं ताकि जब साइन करने का सही समय आए, तो तकनीकी मुद्दों की वजह से देरी न हो। अमेरिका द्वारा की जा रही ‘सेक्शन 301′ जांच पर भी सरकार कानूनी पहलुओं पर गौर कर रही है।’ कॉमर्स सेक्रेटरी बोले- एक्सपोर्ट का लक्ष्य 860 बिलियन डॉलर कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पुराने टैरिफ प्रभावी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका एक-दूसरे के फायदे वाली डील के लिए बातचीत में जुटे हैं। वहीं पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव पर उन्होंने कहा कि इससे लॉजिस्टिक्स और शिपिंग में कुछ चुनौतियां आई हैं। इससे भारत के एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन सरकार को उम्मीद है कि इस वित्त वर्ष में भारत का कुल गुड्स और सर्विसेज एक्सपोर्ट 860 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। क्या है सेक्शन 122 और सेक्शन 301? सेक्शन 122: इसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट्स) में बड़ी कमी आने पर 150 दिनों के लिए अस्थायी टैरिफ लगा सकते हैं। सेक्शन 301: यह अमेरिका को उन देशों के खिलाफ कार्रवाई करने की शक्ति देता है, जिनकी व्यापार नीतियां अमेरिकी हितों के खिलाफ या अनुचित होती हैं। ट्रम्प ने 49 साल पुराने कानून का इस्तेमाल कर टैरिफ लगाया था

मार्च में साइन होने वाली भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील टली:अब नया टैरिफ स्ट्रक्चर तैयार होने के बाद होगी; अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प टैरिफ रद्द किए

मार्च में साइन होने वाली भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील टली:अब नया टैरिफ स्ट्रक्चर तैयार होने के बाद होगी; अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प टैरिफ रद्द किए

भारत और अमेरिका के बीच होने वाली अंतरिम ट्रेड डील अब कुछ समय के लिए टल गई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह डील अब तभी साइन होगी, जब अमेरिका अपना नया ग्लोबल टैरिफ स्ट्रक्चर तैयार कर लेगा। दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हालिया फैसले में डोनाल्ड ट्रम्प की उन शक्तियों को खत्म कर दिया है। जिसके तहत वे इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल कर भारी टैरिफ लगा देते थे। मार्च में साइन होनी थी डील, कोर्ट के फैसले से टली भारत और अमेरिका के बीच यह ट्रेड डील पहले इसी महीने यानी मार्च में साइन होने वाली थी। हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने पुराने रेसिप्रोकल टैरिफ को अमान्य कर दिया है। इस वजह से ट्रम्प प्रशासन को अब ग्लोबल ट्रेड के लिए एक नया फ्रेमवर्क तैयार करना पड़ रहा है। जब तक नया स्ट्रक्चर नहीं आता, तब तक अमेरिका ने ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत सभी देशों पर अस्थायी रूप से 10% टैरिफ लगा दिया है। यह व्यवस्था अगले 5 महीनों तक लागू रह सकती है। तुलनात्मक फायदे देखकर ही डील साइन करेंगे एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘हम डील की बारीकियों पर काम कर रहे हैं, लेकिन साइन तभी होगा जब उनका नया टैरिफ आर्किटेक्चर तैयार हो जाएगा। कोई भी देश समझौता तभी करता है जब उसे दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले मार्केट में कोई एडवांटेज मिले।’ भारत ने पहले कुछ खास प्रोडक्ट्स के लिए 18% की रेसिप्रोकल टैरिफ दर तय की थी। अधिकारी ने कहा कि अगर अमेरिका का नया स्ट्रक्चर पुराने जैसा ही रहता है, तो दरें वही रहेंगी, वरना इनमें बदलाव संभव है। मलेशिया जैसा हाल नहीं होगा, भारत की स्थिति अलग हाल ही में मलेशिया ने अमेरिका के साथ अपने व्यापार समझौते से हाथ पीछे खींच लिए हैं। इस पर सफाई देते हुए अधिकारी ने कहा कि भारत की स्थिति मलेशिया से अलग है। मलेशिया ने एक कानूनी समझौते पर साइन कर दिए थे, जो अमेरिकी कोर्ट के फैसले के बाद बेकार हो गया। वहीं भारत ने अभी तक केवल एक ‘फ्रेमवर्क डील’ पर बात की है, किसी कानूनी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसलिए भारत के पास परिस्थितियों के हिसाब से बदलाव करने की गुंजाइश है। नॉन-टैरिफ बाधाओं पर भी चल रही है चर्चा टैरिफ के अलावा दोनों देश नॉन-टैरिफ बैरियर्स और सेक्शन 232 के तहत लगाए गए सेक्टोरल टैरिफ को सुलझाने के लिए भी लगातार बातचीत कर रहे हैं। अधिकारी ने बताया, ‘हम इस समय का रचनात्मक उपयोग कर रहे हैं ताकि जब साइन करने का सही समय आए, तो तकनीकी मुद्दों की वजह से देरी न हो। अमेरिका द्वारा की जा रही ‘सेक्शन 301′ जांच पर भी सरकार कानूनी पहलुओं पर गौर कर रही है।’ कॉमर्स सेक्रेटरी बोले- एक्सपोर्ट का लक्ष्य 860 बिलियन डॉलर कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पुराने टैरिफ प्रभावी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका एक-दूसरे के फायदे वाली डील के लिए बातचीत में जुटे हैं। वहीं पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव पर उन्होंने कहा कि इससे लॉजिस्टिक्स और शिपिंग में कुछ चुनौतियां आई हैं। इससे भारत के एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन सरकार को उम्मीद है कि इस वित्त वर्ष में भारत का कुल गुड्स और सर्विसेज एक्सपोर्ट 860 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। क्या है सेक्शन 122 और सेक्शन 301? सेक्शन 122: इसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट्स) में बड़ी कमी आने पर 150 दिनों के लिए अस्थायी टैरिफ लगा सकते हैं। सेक्शन 301: यह अमेरिका को उन देशों के खिलाफ कार्रवाई करने की शक्ति देता है, जिनकी व्यापार नीतियां अमेरिकी हितों के खिलाफ या अनुचित होती हैं। ट्रम्प ने 49 साल पुराने कानून का इस्तेमाल कर टैरिफ लगाया था

सिर्फ 1 चम्मच पीनट बटर से शरीर में होते हैं कई बड़े बदलाव! न्यूट्रिशन एक्सपर्ट ने बताए चौंकाने वाले फायदे

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Last Updated:March 16, 2026, 20:00 IST पीनट बटर को अक्सर फिटनेस और हेल्दी स्नैक के रूप में देखा जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोज सिर्फ एक चम्मच पीनट बटर भी शरीर पर कई सकारात्मक असर डाल सकता है. न्यूट्रिशन एक्सपर्ट के मुताबिक, सही मात्रा में लिया जाए तो यह एनर्जी, हार्ट हेल्थ और मसल्स के लिए फायदेमंद हो सकता है. पीनट बटर में प्रोटीन, विटामिन और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं. (AI image) आजकल हेल्दी डाइट की बात होती है तो पीनट बटर का नाम अक्सर सामने आता है. जिम जाने वाले लोग, फिटनेस फॉलो करने वाले और हेल्दी स्नैक की तलाश करने वाले लोग इसे अपनी डाइट में शामिल करते हैं. दरअसल पीनट बटर मूंगफली से बनाया जाता है और इसमें हेल्दी फैट, प्रोटीन, विटामिन और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं. दिल्ली स्थित फेलिक्स ग्लोबल की वरिष्ठ क्लिनिकल पोषण विशेषज्ञ डॉ. राधिका मेहता का कहना है कि अगर इसे सीमित मात्रा में खाया जाए तो रोज सिर्फ एक चम्मच पीनट बटर भी शरीर को कई फायदे दे सकता है. सबसे पहले बात करते हैं एनर्जी की. पीनट बटर में हेल्दी फैट, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का संतुलित मिश्रण होता है. यही वजह है कि यह शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देने में मदद करता है. कई बार मीठे स्नैक्स खाने से शरीर में अचानक एनर्जी आती है और फिर जल्दी गिर जाती है, लेकिन पीनट बटर धीरे-धीरे एनर्जी रिलीज करता है जिससे शरीर लंबे समय तक एक्टिव बना रहता है. पीनट बटर हार्ट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसमें मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट पाए जाते हैं जो दिल के लिए अच्छे माने जाते हैं. ये फैट शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं. कुछ रिसर्च में यह भी पाया गया है कि मूंगफली से बने खाद्य पदार्थों का सीमित सेवन हार्ट डिजीज के खतरे को कम करने में सहायक हो सकता है. इसके अलावा पीनट बटर मसल्स हेल्थ के लिए भी अच्छा माना जाता है. इसमें मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों की मरम्मत और मजबूती के लिए जरूरी होता है. इसलिए जिम जाने वाले लोग या एक्टिव लाइफस्टाइल रखने वाले लोग अक्सर इसे अपने ब्रेकफास्ट या स्नैक में शामिल करते हैं. एक चम्मच पीनट बटर भी शरीर को जरूरी प्रोटीन देने में मदद कर सकता है. पीनट बटर का एक और फायदा यह है कि यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद करता है. इसमें मौजूद प्रोटीन और फाइबर पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं, जिससे भूख जल्दी नहीं लगती. यही कारण है कि कई डाइट एक्सपर्ट इसे वेट मैनेजमेंट के लिए भी अच्छा स्नैक मानते हैं. साथ ही पीनट बटर में विटामिन ई, मैग्नीशियम, पोटैशियम और बी-विटामिन जैसे कई जरूरी पोषक तत्व भी पाए जाते हैं. ये सभी शरीर की इम्यूनिटी, नर्व हेल्थ और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं. इन पोषक तत्वों की वजह से यह दिमाग के लिए भी फायदेमंद माना जाता है और शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद कर सकता है. पीनट बटर ब्लड शुगर को स्थिर रखने में भी मदद कर सकता है. इसमें मौजूद हेल्दी फैट और प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा करते हैं, जिससे ब्लड शुगर अचानक तेजी से नहीं बढ़ता. इसी कारण इसे संतुलित डाइट का हिस्सा माना जाता है. हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि पीनट बटर कैलोरी में काफी ज्यादा होता है. इसलिए इसका सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि नैचुरल पीनट बटर चुनें जिसमें ज्यादा चीनी, नमक या प्रोसेस्ड ऑयल न मिला हो. सही मात्रा में लिया गया पीनट बटर स्वाद के साथ-साथ शरीर को कई पोषण लाभ भी दे सकता है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : March 16, 2026, 20:00 IST

एक केंद्रीय मंत्री, दो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और चार ईसाई…केरल में बीजेपी ने पहली सूची जारी की, कैसे मिला गुणांक?

एक केंद्रीय मंत्री, दो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और चार ईसाई...केरल में बीजेपी ने पहली सूची जारी की, कैसे मिला गुणांक?

केरल विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सोमवार (16 मार्च) को 47 जनवरी को अपनी पहली सूची जारी कर दी। बीजेपी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चन्द्रशेखर को नेमम विधानसभा सीट और वी मुरलीधरन को कजाकुट्टम विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। इन दो बड़े नेताओं के साथ पार्टी ने पहली लिस्ट में इंटरमीडिएट और जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है। बीजेपी ने किसने दिये टिकट? केरल में बीजेपी की संयुक्त राज्य अमेरिका की सूची में एक प्रांतीय केंद्रीय मंत्री, दो पूर्व मंत्री, पार्टी के दो पूर्व राष्ट्रपति, केरल जाति समुदाय के सात सदस्य और ईसाई समुदाय के चार दावेदार शामिल हैं। पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री कूरियन को कांजीरापल्ली जॉर्ज से मैदान में उतारा है, जबकि पी सी जॉर्ज पूनजर विधानसभा सीट से आराम से बैठेंगे। आर श्रीलेखा वट्टियोरकावु और पद्मजा वेणुगोपाल त्रिशुर सीट से संबंधित। आर रशीम कोट्टारक्करा से लड़ेंगे चुनाव इसके अलावा, रॉयल कुन्नथुर सीट से ऑर्केस्ट्रा मैदान में उतरेंगी, जबकि आर रश्मि कोट्टारक्करा से चुनावी मैदान में उतरेंगी। पार्टी ने शोभा सुंदरन को पल्लाक्क से, नव्या हरिदास को उत्तर से और कविता केस को सुल्तान बथेरी (आरक्षित) सीट से उम्मीदवार बनाया है। केरल में नौ अप्रैल को मतदान होगा, जबकि चार मई को फ्लोरिडा की गिनती होगी। क्या बोले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राजीव चन्द्रशेखर? नेमम विधानसभा सीट से दावेदारी बनाए रखने के बाद केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव शेखर शेखर ने कहा, ‘आज घोषित 47 सीटों की पहली सूची से पता चलता है कि हम इस चुनाव को कितना गंभीर मानते हैं। इस सूची में एक कट्टरपंथी केंद्रीय मंत्री, दो पूर्व मंत्री, पार्टी के दो पूर्व अध्यक्ष, कट्टर जाति समुदाय के सात सदस्य ईसाई समुदाय के चार उम्मीदवार शामिल हैं। यह बुज़ुर्ग की एक बहुत ही सुव्यवस्थित सूची है। केरल के राजनीतिक इतिहास में यह सबसे पुराना चुनाव है। मुझे चुनाव लड़ने का अवसर वास्तव में गर्व महसूस हो रहा है। मैं आज अपने अभियान की शुरुआत रोड शो और दर्शनार्थियों के साथ कर रहा हूं।’ नेमोम, मत्तम थुडांगम! आगामी केरलम विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक नेमोम निर्वाचन क्षेत्र के लिए भाजपा/एनडीए उम्मीदवार के रूप में नामित होने पर बेहद सम्मानित और विनम्र महसूस कर रहा हूं। पीएम के प्रति मेरी हार्दिक कृतज्ञता @नरेंद्र मोदी जी, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष @नितिनबिन जी, गृह मंत्री @अमितशाह… pic.twitter.com/E4NSEVRC8U – राजीव चन्द्रशेखर 🇮🇳 (@RajeevRC_X) 16 मार्च 2026 बीजेपी जेडीयू की पूरी लिस्ट कम्बलर से सी.रघुनाथ, उदमा से मनुलाल मेलोथ, नंदापुरम से दीपक चंद्रन, पेरम्बा से एम मोहनन मास्टर को प्रतियोगी बनाया गया है। इसके अलावा पलक्कड़ से सोहरा सुंदरन, अज़ोकोड से के विनोद कुमार, कम्बलर से सी रघुनाथ, मनंतवाडी से पी श्याम राज, सुल्तानबथेरी से कविता ए। एस, वडकारा से एडवोकेट के दिलीप, कुट्टियाडी से रामदास मनालेरी, नादापुरम से सीपी मिर्जा चंद्रन, कोइलांडी से सीआर फुल कृष्णन को टिकट दिया गया है। इसके अलावा बालूसेरी से सीपी शृंखला, एलथुर से टी देवदास, कोझिकोड उत्तर से नव्या हरिदास, कोझिकोड दक्षिण से टी रनीश, बेपोर से केपी प्रकाश बाबू, कुन्नमंगलम से वीके संजीवन, शोरानूर शाइनी टी दास, ओट्टापलम से मेजर रवि, मालमपूजा से सी कृष्णकुमार के, चेल्ककारा से बालकृष्णन, त्रिशूर पद्माजा वेणुगोपाल, इरिंजलाकुडा से संतोष चेराकुलम, देवीकुलम के एस.आर.रबेंन, पाला से जॉर्ज सीन, वैकोम के अजित, कांजीरापल्ली से जॉर्ज कुरियन, पुंजूर से पीसी जॉर्ज को टिकट दिए गए हैं। अम्बलपुझा से अरुण अनिरुद्धन, हरिपद से संदीप वाचस्पति, चेंग वैलडर से एमवी गोपकुमार, कृवल्ला से ओप एंटनी जोसेफ, कुन्नथुर से कुंथुर प्रसाद, कोट्टाराक्कारा से आर रशीम, छठ बबीनर से बी.बी. गोपकुमार, अट्टंगल से पी. जं., कजाकुट्टम से वी. मुरीधरन, परसाला से बी नेय्यर, कत्थकड़ा से पीके हरिदास को मिलाया गया है।

देवास में घरेलू गैस सिलेंडर के दुरुपयोग पर कार्रवाई:खाद्य विभाग ने चार प्रतिष्ठानों से 8 सिलेंडर जब्त किए

देवास में घरेलू गैस सिलेंडर के दुरुपयोग पर कार्रवाई:खाद्य विभाग ने चार प्रतिष्ठानों से 8 सिलेंडर जब्त किए

देवास में खाद्य विभाग ने सोमवार को घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक दुरुपयोग के खिलाफ कार्रवाई की है। विभाग ने शहर के चार प्रतिष्ठानों से कुल 8 घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किए हैं। इन प्रतिष्ठानों के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। जिला आपूर्ति अधिकारी दिनेश अहिरवार ने बताया कि विभाग ने देवास नगर में संचालित होटल और रेस्टोरेंट की जांच की। जांच दल ने लगभग 15 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इनमें से चार प्रतिष्ठानों में घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग पाया गया, जिसके बाद उनके खिलाफ प्रकरण तैयार किए गए। जब्त किए गए सिलेंडरों में जोधपुर स्वीट्स विकास नगर से 1, श्याम चाट भंडार जवाहर चौक से 2, संतुष्टि रेस्टोरेंट से 3 और रवि भोजनालय से 2 गैस सिलेंडर शामिल हैं। दिनेश अहिरवार ने आगे बताया कि इन प्रतिष्ठानों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इन मामलों को कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा। इस जांच कार्रवाई में सहायक आपूर्ति अधिकारी भानसिंह राय और धर्मेन्द्र वर्मा भी शामिल थे।

woolly blue curls plant benefits | medicinal plants in uttarakhand | वूली ब्लू कर्ल्स पौधे के फायदे | पहाड़ों में मिलने वाले औषधीय पौधे |

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Last Updated:March 16, 2026, 19:35 IST Woolly Blue Curls Plant Benefits: उत्तराखंड के बागेश्वर जैसे पहाड़ी इलाकों में कई अनोखी जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं. इन्हीं में से एक खास पौधा वूली ब्लू कर्ल्स है, जो अपने बैंगनी रंग के मुलायम फूलों और औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है. स्थानीय लोग इसके पत्तों और फूलों से काढ़ा बनाकर बदन दर्द, सिरदर्द, गठिया और सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं में राहत पाने के लिए उपयोग करते हैं. कम देखभाल में उगने वाला यह पौधा बगीचों की सुंदरता बढ़ाने के साथ स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी माना जाता है. उत्तराखंड के बागेश्वर जैसे पहाड़ी इलाकों में कई अनोखी जड़ी-बूटियां पाई जाती है. इन्हीं में से एक खास पौधा वूली ब्लू कर्ल्स है. जो अपनी सुंदरता और औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है. इस पौधे की पहचान इसके बैंगनी रंग के घने और मुलायम फूलों से होती है, जो देखने में बेहद खूबसूरत लगते हैं. पारंपरिक रूप से स्थानीय लोग इस पौधे का उपयोग घरेलू उपचार के रूप में करते हैं. खास बात यह है कि यह पौधा कम देखभाल में भी आसानी से उग जाता है, बगीचों की शोभा बढ़ाने के साथ-साथ सेहत के लिए भी उपयोगी माना जाता है. डॉ. ऐजल पटेल ने लोकल 18 को बताया कि इस पौधे की पत्तियों और फूलों से तैयार काढ़ा बदन दर्द, सिरदर्द और गठिया जैसी समस्याओं में राहत देता है. ठंड के मौसम में इसके काढ़े का सेवन शरीर को गर्माहट देता है, जोड़ों की जकड़न कम करने में मदद करता है. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग इसे प्राकृतिक दर्द निवारक के तौर पर अपनाते हैं, इसे सुरक्षित घरेलू नुस्खों में शामिल करते हैं. इस पौधे में सूजन-रोधी गुण होने की बात भी पारंपरिक ज्ञान में कही जाती है. शरीर के किसी हिस्से में सूजन या अंदरूनी इंफ्लेमेशन की समस्या होने पर लोग इसके पत्तों का लेप या काढ़ा उपयोग में लाते हैं. नियमित और सीमित यूज से शरीर का सूजन निमंत्रित रहता है. पहाड़ों में लंबे समय तक मेहनत करने वाले लोग इसे थकान और सूजन कम करने के लिए भी अपनाते हैं. प्राकृतिक उपचारों की बढ़ती लोकप्रियता के कारण अब युवा पीढ़ी भी ऐसे पौधों के बारे में जानकारी लेने में रुचि दिखा रही है. Add News18 as Preferred Source on Google ग्रामीण क्षेत्रों में इस पौधे का उपयोग पाचन सुधारने के लिए भी किया जाता रहा है. पुराने समय में भारी भोजन या पेट में गैस-अपच की समस्या होने पर इसके पत्तों से बना हल्का काढ़ा पिया जाता था. इससे पेट को आराम मिलता है, भूख भी बेहतर लगती है. आजकल आयुर्वेद और प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने वाले लोग भी ऐसे पौधों के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं. ताकि भविष्य में इनका इस्तेमाल किया जा सके. ठंड के मौसम में सर्दी-जुकाम और खांसी आम समस्या बन जाती है। ऐसे में इस पौधे की पत्तियों से बनी चाय पीने की परंपरा कई इलाकों में रही है. इससे गले को आराम मिलता है, सांस संबंधी परेशानी में राहत महसूस होती है. कुछ लोग इसकी सूखी पत्तियों का पाउडर बनाकर सूंघते हैं, जिससे नाक खुलने में मदद मिलती है. लोक उपचारों में इसकी खास जगह बनी हुई है, लोग इसे प्राकृतिक विकल्प के रूप में देखते हैं. औषधीय गुणों के अलावा यह पौधा सजावटी पौधे के रूप में भी काफी लोकप्रिय है. इसके चमकीले बैंगनी फूल और मुलायम बनावट बगीचे को बेहद आकर्षक बना देते हैं. कम पानी और धूप में भी यह अच्छी तरह बढ़ता है, इसलिए इसे घरों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों में लगाया जाता है. कई लोग अपने किचन गार्डन में भी इसे जगह दे रहे हैं. प्राकृतिक सुंदरता पसंद करने वाले लोगों के लिए यह पौधा एक बेहतरीन विकल्प है, जो स्वास्थ्य और सौंदर्य दोनों का ख्याल रखता है. पर्यावरण के लिहाज से भी यह पौधा महत्वपूर्ण माना जाता है. इसके फूलों की खुशबू और रंग मधुमक्खियों, तितलियों और हमिंगबर्ड जैसे परागण करने वाले जीवों को अपनी ओर खींचते हैं. इससे बगीचे का इकोसिस्टम बेहतर बनता है, अन्य पौधों के विकास में भी मदद मिलती है. जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए ऐसे पौधों को लगाना फायदेमंद माना जाता है. घरों और गांवों में ऐसे पौधों की संख्या बढ़ने से प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है. पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलता है. पारंपरिक रूप से इस पौधे का उपयोग कई घरेलू उपचारों में किया जाता रहा है, लेकिन किसी भी जड़ी-बूटी का सेवन करने से पहले सावधानी बरतना बेहद जरूरी है. हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है, इसलिए बिना विशेषज्ञ सलाह के इसका अधिक उपयोग नुकसान भी पहुंचा सकता है. गर्भवती महिलाओं, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सतर्कता रखनी चाहिए. सही जानकारी और संतुलित उपयोग से ही प्राकृतिक पौधों का लाभ लिया जा सकता है. जागरूकता बढ़ने के साथ अब लोग भी सुरक्षित तरीके से औषधीय पौधों को अपनाने पर ध्यान दे ये बेहद जरूरी है. First Published : March 16, 2026, 19:35 IST