NRI महिला बोली- लुटेरे रुकते तो टुकड़े-टुकड़े कर देती:लुधियाना में कार रोककर तलवार उठाई और दौड़ पड़ी; 10 सवाल-जवाब में पूरी कहानी

लुधियाना के डेहलों में NRI महिला हरजिंद कौर रात में सड़क पर तलवार लहराकर लुटेरों के पीछे दौड़ पड़ी। तलवार लेकर हरजिंद कौर लुटेरों को ललकारती रही और लुटेरे उसका रौद्र रूप देखकर फरार हो गए। हरजिंद कौर का कहना है कि अगर लुटेरे रूक जाते तो वो उनका गाटा लगा देती यानि टुकड़े-टुकड़े कर देती। गनीमत रही कि वो मौके से भाग गए। हरजिंद कौर का कहना है कि पहले उसने पुलिस को शिकायत नहीं दी। जब लोग इस घटना को स्क्रिप्टेड कहने लगे तो उन्हें लगा कि शिकायत दे देनी चाहिए। फिर उन्होंने पुलिस को इस मामले की शिकायत दी। डेहलों पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर दी। एनआरआई महिला ने बताया कि दिलेरी उनका खानदानी गुण है। उसके दादा दलीप सिंह पहलवान रहे हैं और उन्होंने उनके लिए घर में जिम भी बनाया था। आज भी उनके गांव राजगढ़ के घर में वो जिम है। अब 10 सवाल-जवाब में पढ़ें पूरी कहानी… हरजिंद कौर से सवाल जवाब में घटना और उसके बारे में जानिए… सवाल: आप कहां रहती हैं और क्या करती हैं? जवाब: मैं ऑस्ट्रेलिया में रहती हूं और वहां पर अपना कारोबार करती हूं। सवाल: लुधियाना में कहां रहती हैं और रात को कार में कहां जा रहे थे? कार में कौन-कौन सवार था? जवाब: मैं राजगढ़ गांव की हूं और ऑस्ट्रेलिया से कुछ दिन पहले यहां आई। रात को मैं अपनी सास व चाची के साथ डेहलों नहर वाली सड़क से जा रही थी। सवाल: आपको कैसे लगा कि वो लूटने का प्रयास कर रहे हैं और हुआ क्या था? जवाब: बाइक सवार काफी समय से हमारा पीछा कर रहा था। जब मैं स्पीड कम कर रही थी तो वो भी कम कर रहा था। उसे कई बार आगे जाने के लिए जगह दी। वो नहीं गया। मेरी चाची ने बताया कि ये लुटेरे हो सकते हैं। उन्होंने अपना मोबाइल ऑन कर दिया। उन्हाेंंने जब कार ओवरटेक की तो एकदम से अंडा कार के शीशे पर मार दिया। पहले मुझे लगा कि ऊपर से कुछ गिरा है। लेकिन जब देखा तो यह अंडा था। वो थोड़ी दूर जाकर रूक गए। सवाल: उसके बाद आपने क्या किया और गाड़ी में तलवार कहां से आई? जवाब: मैंने गाड़ी को ब्रेक लगाई और गाड़ी में पड़ी तलवार उठाई। हम सिख फैमिली से हैं तो गाड़ी में तलवार हमेशा रखते हैं। मैं तलवार लेकर बाहर निकलने लगी तो मेरी चाची ने मुझे रोकने की कोशिश की। उधर मेरी सास डर गई और घबराने लगी। मैं जबरदस्ती बाहर निकली। सवाल: आपको डर नहीं लगा कि वो हमला कर देंगे? जवाब: दो बातें हैं एक बुजदिल बनकर रोज मरते जाओ या फिर दिलेरी दिखाकर या तो लुटेरों से भिड़ जाओ या खुद मर जाओ। मैं बचपन से दिलेर हूं। मेरे दादा पहलवान थे। उन्होंने दिलेरी हमें विरासत में दी है। मैंने मन बना लिया था कि अगर वो रूके तो मैं उनके टुकड़े-टुकड़े कर दूंगी। सवाल : वहां पर उसके बाद क्या हुआ? जवाब: जब मैंने कार को ब्रेक लगाई तो उन्होंने बाइक बैक किया और हमारी तरफ आ रहे थे। उनकी योजना थी कि कार रूक गई अब उन्हें लूट लिया जाए। जब मैं तलवार लेकर बाहर निकली और जोर से चिल्लाई तो वो रूक गए। मैं फिर तलवार लेकर उनके पीछे भागी। इतने में पीछे से एक बाइक व कार आ गई। रोशनी हुई तो वो दोनों भाग गए। सवाल: लोगों ने आपकी मदद की? जवाब: जब मैं तलवार लेकर चिल्ला रही थी तो वहां से निकलने वाले और लोग भी रूक गए। एक बाइक सवार ने बताया कि दीदी वो दो ही नहीं थे बल्कि ज्यादा थे। लोगों ने कहा कि इस रूट पर ऐसा कई बार होता है। सवाल: आप फिर आगे गए या नहीं? जवाब: नहीं फिर हम वहां से वापस आ गए, क्योंकि मेरी सास बहुत घबरा गई थी। सवाल: सोसाइटी को क्या मैसेज देंगे? जवाब: लड़कियों को दिलेर बनाओ। उन्हें दिलेरी के किस्से सुनाओ। उनको महंगा मोबाइल दो या न दो पर उन्हें शस्त्र दो। गतका, जूडो कराटे व आत्मरक्षा के गुर सिखाओ ताकि ऐसी स्थिति में वो खुद की सुरक्षा कर सकें। मैं जब भी गांव आती हूं तो गांव की लड़कियों को सिमरन करवाती हैं और उन्हें दिलेर बनाती हूं। सवाल: आप में दिलेरी कहां से आई? जवाब: मेरे दादा पहलवान थे। मेरे पिताजी मुझे अकसर दिलेरी के किस्से सुनाते थे। मैं स्पोर्ट्स में रही हूं। निडर सीजन-2 की विनर रही, जिसमें एडवेंचर की एक्टिविटी होती थी और दिलेरी दिखाने वाले को जीत हासिल होती थी। मैं जेंडर में विश्वास नहीं करती हूं। मैं दिलेरी में विश्वास करती हूं। पुलिस कमिश्नर महिला को सम्मानित करेंगे थाना डेहलों की एसएचओ इंस्पेक्टर अवनीत कौर ने बताया कि NRI महिला जा रही थी, उसकी गाड़ी पर अंडे मारकर लूटने का प्रयास किया। वीडियो वायरल हुआ तो हमने महिला से संपर्क किया और उसके बाद एफआईआर दर्ज कr। उन्होंने बहुत बहादुरी से लुटेरों को भगाया। हमने 2 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में पुलिस के सीनियर अफसरों को जानकारी दी है। पुलिस कमिश्नर महिला को सम्मानित करेंगे।
एक्ट्रेस लाना क्लार्कसन का मर्डर अब भी मिस्ट्री:लाश कुर्सी पर, दांत जमीन पर बिखरे मिले; हत्यारे म्यूजिक प्रोड्यूसर की जेल में मौत

3 फरवरी 2003 की बात है फिल्मी करियर खत्म होने के बाद एक्ट्रेस और मॉडल लाना क्लार्कसन अपने घर चलाने के लिए वेस्ट हॉलीवुड के एक क्लब हाउस ऑफ ब्लूज में पार्ट-टाइम काम करने लगी थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात मशहूर म्यूजिक प्रोड्यूसर फिल स्पेक्टर से हुई। पहली ही मुलाकात में दोनों एक साथ फिल के घर चले गए। फिल स्पेक्टर का घर बहुत बड़ा और सुंदर था। वह म्यूजिक इंडस्ट्री में एक जाना माना नाम था। शायद लाना को उम्मीद थी कि यह मुलाकात उसके करियर को फिर से शुरू करने में मदद कर सकती है। लेकिन तभी, करीब सुबह 5:30 बजे फिल का ड्राइवर कार में बैठा रेडियो सुन रहा था कि अचानक उसे गोली चलने जैसी आवाज सुनाई दी। हैरान होकर जब वह देखने गया तो उसने देखा कि लाना क्लार्कसन की लाश फर्श पर पड़ी थी। तुरंत बाद ड्राइवर ने 911 पर कॉल किया और कहा, मुझे लगता है मेरे बॉस ने किसी को मार दिया है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर ड्राइवर ने सीधे क्यों फिल को हत्या का दोषी माना। क्या वह झूठ बोल रहा था या इसके पीछे कोई और कहानी थी? आज अनसुनी दास्तानें में पढ़िए एक्ट्रेस और मॉडल लाना क्लार्कसन की मौत की दर्दनाक कहानी… लाना क्लार्कसन का जन्म कैलिफोर्निया के लॉन्ग बीच में हुआ था। उनके माता-पिता का नाम डोना क्लार्कसन और जेम्स एम. क्लार्कसन था। उनके एक भाई जेसी जे. क्लार्कसन और एक बहन फॉन थीं। उनका बचपन कैलिफोर्निया के सोनोमा काउंटी की पहाड़ियों में बीता। वहां रहते हुए उन्होंने क्लोवरडेल हाई स्कूल और पैसिफिक यूनियन कॉलेज प्रिपरेटरी स्कूल में पढ़ाई की। 1978 में क्रिसमस के दौरान उनका परिवार वापस साउथ कैलिफोर्निया लौटा और लॉस एंजेलिस के सैन फर्नांडो वैली इलाके में बस गया। लॉस एंजेलिस आने के बाद लाना का मन धीरे-धीरे मनोरंजन जगत की ओर बढ़ने लगा। अपनी खूबसूरती और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने एक्टिंग और मॉडलिंग में करियर बनाने का फैसला किया। 1980 के शुरुआती सालों में लाना क्लार्कसन को फिल्मों और टेलीविजन में छोटे-छोटे रोल मिलने लगे। उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत निर्देशक एमी हेकरलिंग की कमिंग-ऑफ-एज कॉमेडी Fast Times at Ridgemont High (1982) से की और यह उनकी पहली बोलने वाली फिल्म थी। इसके बाद वह सरफेस (1983) में भी नजर आईं, जहां वह मिशेल फाइफर के पीछे बाबिलॉन क्लब के डांस फ्लोर पर दिखाई दीं। हालांकि, उनके करियर का पहला बड़ा मौका निको मस्टोराकिस की साइंस-फिक्शन थ्रिलर फिल्म Blind Date से मिला, जिसने उन्हें अधिक पहचान दिलाई। लाना क्लार्कसन को एक्ट्रेस के तौर पर सबसे ज्यादा पहचान निर्माता रोजर कॉर्मन की फैंटेसी फिल्म डेल्थस्टाल्कर (1983) से मिली। इसके बाद उन्हें लगातार फिल्मों में काम मिलने लगा। अब लाना सिर्फ फिल्मों तक ही सीमित नहीं थीं। उन्हें कई एड्स और मॉडलिंग के काम भी मिल रहे थे। इंडस्ट्री में उनकी एक अलग पहचान बन चुकी थी और उनका करियर लगातार बढ़ रहा था। लेकिन जैसे-जैसे लाना की उम्र बढ़ने लगी, उनका करियर धीमा पड़ने लगा। कहा जाता है कि 30 साल के बाद कई हीरोइन्स को बड़ी फिल्में कम मिलने लगती हैं, और कुछ ऐसा ही लाना के साथ भी होने लगा। उनके पास बड़े प्रोजेक्ट्स के ऑफर नहीं आए और एक समय ऐसा आया जब उन्हें कोई काम नहीं मिला। इसके बाद जनवरी 2003 में पैसों की जरूरत के चलते लाना ने वेस्ट हॉलीवुड, कैलिफोर्निया के हाउस ऑफ ब्लूज में पार्ट-टाइम होस्टेस की नौकरी शुरू की। यहां वह लोगों का स्वागत करती थीं। हाउस ऑफ ब्लूज वह जगह थी जो दशकों तक संगीत प्रेमियों और सेलिब्रिटीज की पसंदीदा रही, लेकिन 2015 में इसे तोड़ दिया गया। 3 फरवरी 2003 को लाना की पहली मुलाकात म्यूजिक प्रोड्यूसर फिल स्पेक्टर से हुई। करीब 1:45 बजे फिल हाउस ऑफ ब्लूज पहुंचे और सीधे फाउंडेशन रूम यानी क्लब के VIP सेक्शन में गए। वहां लाना होस्टेस के तौर पर खड़ी थीं और लोगों का स्वागत और चेक-इन कर रही थीं। यहीं उनकी पहली मुलाकात हुई। फिल ने महंगी शैंपेन मंगवाई और दोनों की बातचीत शुरू हुई। फिर करीब 2:30 बजे फिल और लाना एक साथ उनकी कार से अल्हाम्ब्रा स्थित फिल के घर चले गए। उस समय लाना फिल्मों में काम नहीं कर रही थीं और हाउस ऑफ ब्लूज में होस्टेस की नौकरी कर रही थीं। लोग उनके काम और करियर को लेकर कई तरह की बातें कर रहे थे, लेकिन असली सच क्या था यह स्पष्ट नहीं था। इतना जरूर है कि उसी रात उनकी फिल स्पेक्टर से मुलाकात हुई और वे उनके साथ उनके घर चली गईं। फिल स्पेक्टर का घर काफी बड़ा और सुंदर था। लगभग 10,000 वर्गफुट का, जिसमें 10 बेडरूम और 11 बाथरूम थे। फिल कोई आम इंसान नहीं थे। उन्हें रॉक एंड रोल हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया था और म्यूजिक इंडस्ट्री में उन्हें एक जीनियस माना जाता था। वह बेहद प्रतिभाशाली और मशहूर म्यूजिक प्रोड्यूसर थे। लेकिन उनका स्वभाव सही नहीं था। लोग कहते थे कि वह जल्दी गुस्सा हो जाते थे। खासकर जब उन्होंने शराब या ड्रग्स ली होती। उनके बारे में कई किस्से मशहूर थे कि वह अचानक बंदूक निकालकर लोगों को डराते थे। उनकी पत्नी रोनी स्पेक्टर ने बताया कि शादी की रात ही उन्होंने धमकी दी थी कि अगर वह उन्हें छोड़ देंगी तो उन्हें नुकसान पहुंचाएंगे। करीब सुबह 5:30 बजे फिल का ड्राइवर कार में बैठा रेडियो सुन रहा था कि अचानक उसे गोली चलने जैसी आवाज सुनाई दी। हैरान होकर जब वह देखने गया, तो उसने देखा कि लाना क्लार्कसन की लाश वहां पड़ी थी। तुरंत बाद ड्राइवर ने पहले फिल की सेक्रेटरी को फोन किया और फिर 911 पर कॉल किया। उसने कहा, मेरा नाम एड्रियाना है। मुझे लगता है कि मेरे बॉस ने किसी को मार दिया है। कुछ ही मिनटों में पुलिस वहां पहुंच गई। ड्राइवर से बात करने के बाद वे धीरे-धीरे मेन्शन की ओर बढ़े। घर जंगल जैसी जगह से घिरा हुआ था, इसलिए पुलिस को अंदाजा नहीं था कि अंदर क्या हालात होंगे। वे बहुत सावधानी से आगे बढ़ रहे थे। तभी दरवाजा खुला और फिल स्पेक्टर बाहर आए। वह उलझी-उलझी बातें कर रहे थे और साफ बोल नहीं पा रहे
नासा का मून मिशन अटका:रॉकेट के हीलियम फ्लो में दिक्कत आई; 50 साल बाद चांद की कक्षा में जाएंगे 4 इंसान

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का मून मिशन आर्टेमिस II टल सकता है। इस मिशन को 6 मार्च को लॉन्च किया जाना था। उससे पहले ही रॉकेट के हीलियम फ्लो में दिक्कत सामने आ गई। स्पेस एजेंसी ने बताया कि बीती रात रॉकेट के ऊपरी स्टेज में हीलियम का फ्लो रुक गया। लॉन्च के लिए सॉलिड हीलियम फ्लो की जरूरत होती है। NASA ने कहा कि वह सारे डेटा को रिव्यू कर रहा है और अगर जरूरी हुआ तो रॉकेट को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड से हैंगर ले जाया जाएगा। हालांकि इंजीनियर लॉन्च पैड पर ही दिक्कत ठीक करने की कोशिश करेंगे। स्पेस एजेंसी ने कहा कि इंजीनियर दोनों ऑप्शन की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि इसका असर लॉन्चिंग पर जरूर पड़ेगा। आर्टेमिस II मून मिशन के दौरान एस्ट्रोनॉट्स चांद पर कदम नहीं रखेंगे। ये एक फ्लाईबाई मिशन है जिसके तहत एस्ट्रोनॉट्स सिर्फ चांद के चक्कर लगाकर वापस आ जाएंगे। पिछले 50 सालों में यह पहली बार होगा जब इंसान चांद की कक्षा में जाएगा। अगर ये मिशन सफल होता है 2028 में आर्टेमिस-3 मिशन भेजा जाएगा, जिसमें जाने वाले एस्ट्रोनॉट्स चांद पर पैर रखेंगे। नासा 50 साल बाद चांद पर एस्ट्रोनॉट्स भेजने वाला है आर्टेमिस-2 मिशन के तहत चार एस्ट्रोनॉट्स चांद के चारों तरफ चक्कर लगाकर वापस धरती पर आएंगे। इस क्रू में पहली बार एक महिला और एक अफ्रीकन-अमेरिकन (अश्वेत) एस्ट्रोनॉट भी शामिल होगा। 10 दिन के इस मून मिशन के लिए क्रिस्टीना हैमॉक कोच को विशेषज्ञ के तौर पर चुना गया है। इससे पहले क्रिस्टीना सबसे ज्यादा समय तक अंतरिक्ष में रहने का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। उनके अलावा अमेरिकी नेवी के विक्टर ग्लोवर को भी बतौर पायलट चुना गया है। वो पहले ब्लैक एस्ट्रोनॉट होंगे जो मून मिशन पर स्पेस जाएंगे। 22 लाख किलोमीटर की यात्रा का टारगेट आर्टेमिस-2 मिशन के दौरान करीब 22 लाख किलोमीटर की यात्रा करेगा। इसका मकसद ये जांचना है कि ओरियन स्पेसशिप के सभी लाइफ-सपोर्ट सिस्टम ठीक से डिजाइन किए गए हैं। जिससे एस्ट्रोनॉट्स को डीप स्पेस में जाने और 2028 में मून लैंडिंग के दौरान परेशानी न हो। आर्टेमिस II वापस लौटने से पहले चंद्रमा के सुदूर भाग से कुछ 10,300 किलोमीटर दूर तक जाएगा। नासा ने 15 नवंबर, 2022 को तीसरी कोशिश में आर्टेमिस-1 मिशन लॉन्च किया था। ये 25 दिन बाद 14 लाख मील की यात्रा पूरी करके 10 दिसंबर को धरती पर लौट आया था। इससे पहले दिसंबर 1972 में अपोलो-17 मिशन ही चांद के इतने करीब पहुंचा था। 50 साल पुराने अपोलो मिशन से अलग है आर्टेमिस अपोलो मिशन की आखिरी और 17वीं फ्लाइट ने 1972 में उड़ान भरी थी। इस मिशन की परिकल्पना अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जे एफ केनेडी ने सोवियत संघ को मात देने के लिए की थी। उनका लक्ष्य अमेरिका को साइंस एंड टेक्नोलॉजी की फील्ड में दुनिया में पहले स्थान पर स्थापित करना था। हालांकि करीब 50 साल बाद माहौल अलग है। अब अमेरिका आर्टेमिस मिशन के जरिए रूस या चीन को मात नहीं देना चाहता। नासा का मकसद पृथ्वी के बाहर स्थित चीजों को अच्छी तरह एक्सप्लोर करना है। चांद पर जाकर वैज्ञानिक वहां की बर्फ और मिट्टी से ईंधन, खाना और इमारतें बनाने की कोशिश करना चाहते हैं। ——————– ये खबर भी पढ़ें… NASA ने माना- सुनीता का अंतरिक्ष में फंसना खतरनाक था: इसे कल्पना चावला के साथ हुए हादसे जैसा माना अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने माना कि सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष में फंसना खतरनाक था। नासा ने इस मिशन को दुर्घटना की टाइप ए कैटेगरी में रखा गया है। इसी कैटेगरी को दुर्घटना की सबसे गंभीर कैटेगरी माना जाता है। चैलेंजर और कोलंबिया शटल दुर्घटनाओं के लिए भी इसी कैटेगरी का इस्तेमाल किया गया था। पूरी खबर पढ़ें…
नासा का मून मिशन अटका:रॉकेट के हीलियम फ्लो में दिक्कत आई; 50 साल बाद चांद की कक्षा में जाएंगे 4 इंसान

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का मून मिशन आर्टेमिस II टल सकता है। इस मिशन को 6 मार्च को लॉन्च किया जाना था। उससे पहले ही रॉकेट के हीलियम फ्लो में दिक्कत सामने आ गई। स्पेस एजेंसी ने बताया कि बीती रात रॉकेट के ऊपरी स्टेज में हीलियम का फ्लो रुक गया। लॉन्च के लिए सॉलिड हीलियम फ्लो की जरूरत होती है। NASA ने कहा कि वह सारे डेटा को रिव्यू कर रहा है और अगर जरूरी हुआ तो रॉकेट को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड से हैंगर ले जाया जाएगा। हालांकि इंजीनियर लॉन्च पैड पर ही दिक्कत ठीक करने की कोशिश करेंगे। स्पेस एजेंसी ने कहा कि इंजीनियर दोनों ऑप्शन की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि इसका असर लॉन्चिंग पर जरूर पड़ेगा। आर्टेमिस II मून मिशन के दौरान एस्ट्रोनॉट्स चांद पर कदम नहीं रखेंगे। ये एक फ्लाईबाई मिशन है जिसके तहत एस्ट्रोनॉट्स सिर्फ चांद के चक्कर लगाकर वापस आ जाएंगे। पिछले 50 सालों में यह पहली बार होगा जब इंसान चांद की कक्षा में जाएगा। अगर ये मिशन सफल होता है 2028 में आर्टेमिस-3 मिशन भेजा जाएगा, जिसमें जाने वाले एस्ट्रोनॉट्स चांद पर पैर रखेंगे। नासा 50 साल बाद चांद पर एस्ट्रोनॉट्स भेजने वाला है आर्टेमिस-2 मिशन के तहत चार एस्ट्रोनॉट्स चांद के चारों तरफ चक्कर लगाकर वापस धरती पर आएंगे। इस क्रू में पहली बार एक महिला और एक अफ्रीकन-अमेरिकन (अश्वेत) एस्ट्रोनॉट भी शामिल होगा। 10 दिन के इस मून मिशन के लिए क्रिस्टीना हैमॉक कोच को विशेषज्ञ के तौर पर चुना गया है। इससे पहले क्रिस्टीना सबसे ज्यादा समय तक अंतरिक्ष में रहने का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। उनके अलावा अमेरिकी नेवी के विक्टर ग्लोवर को भी बतौर पायलट चुना गया है। वो पहले ब्लैक एस्ट्रोनॉट होंगे जो मून मिशन पर स्पेस जाएंगे। 22 लाख किलोमीटर की यात्रा का टारगेट आर्टेमिस-2 मिशन के दौरान करीब 22 लाख किलोमीटर की यात्रा करेगा। इसका मकसद ये जांचना है कि ओरियन स्पेसशिप के सभी लाइफ-सपोर्ट सिस्टम ठीक से डिजाइन किए गए हैं। जिससे एस्ट्रोनॉट्स को डीप स्पेस में जाने और 2028 में मून लैंडिंग के दौरान परेशानी न हो। आर्टेमिस II वापस लौटने से पहले चंद्रमा के सुदूर भाग से कुछ 10,300 किलोमीटर दूर तक जाएगा। नासा ने 15 नवंबर, 2022 को तीसरी कोशिश में आर्टेमिस-1 मिशन लॉन्च किया था। ये 25 दिन बाद 14 लाख मील की यात्रा पूरी करके 10 दिसंबर को धरती पर लौट आया था। इससे पहले दिसंबर 1972 में अपोलो-17 मिशन ही चांद के इतने करीब पहुंचा था। 50 साल पुराने अपोलो मिशन से अलग है आर्टेमिस अपोलो मिशन की आखिरी और 17वीं फ्लाइट ने 1972 में उड़ान भरी थी। इस मिशन की परिकल्पना अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जे एफ केनेडी ने सोवियत संघ को मात देने के लिए की थी। उनका लक्ष्य अमेरिका को साइंस एंड टेक्नोलॉजी की फील्ड में दुनिया में पहले स्थान पर स्थापित करना था। हालांकि करीब 50 साल बाद माहौल अलग है। अब अमेरिका आर्टेमिस मिशन के जरिए रूस या चीन को मात नहीं देना चाहता। नासा का मकसद पृथ्वी के बाहर स्थित चीजों को अच्छी तरह एक्सप्लोर करना है। चांद पर जाकर वैज्ञानिक वहां की बर्फ और मिट्टी से ईंधन, खाना और इमारतें बनाने की कोशिश करना चाहते हैं। ——————– ये खबर भी पढ़ें… NASA ने माना- सुनीता का अंतरिक्ष में फंसना खतरनाक था: इसे कल्पना चावला के साथ हुए हादसे जैसा माना अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने माना कि सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष में फंसना खतरनाक था। नासा ने इस मिशन को दुर्घटना की टाइप ए कैटेगरी में रखा गया है। इसी कैटेगरी को दुर्घटना की सबसे गंभीर कैटेगरी माना जाता है। चैलेंजर और कोलंबिया शटल दुर्घटनाओं के लिए भी इसी कैटेगरी का इस्तेमाल किया गया था। पूरी खबर पढ़ें…
जनजातीय संस्कृति के रंग में रंगा इंदौर:जात्रा–2026 में आदिवासी धुन 'अमू काका बाबा' और 'क्यों मारी रे' पर जमकर थिरके इंदौरी

गांधी हॉल परिसर में चल रहे तीन दिवसीय आदिवासी महोत्सव ‘जात्रा–2026’ ने दूसरे दिन ऐसा रंग जमाया कि पूरा इंदौर जनजातीय सुरों और तालों पर थिरकता नजर आया। शाम 7 से 10 बजे तक आयोजित लाइव म्यूजिकल नाइट में कलाकार आनंदीलाल भावेल और उनकी टीम की प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्सव में बदल दिया। झाबुआ और अलीराजपुर की लोक संस्कृति इंदौर में सजीव हो उठी। ‘अमू काका बाबा’, ‘चिलम तमाखू का डब्बा’, ‘क्यों मारी रे, क्यों पीटी रे’ और ‘छोटी-सी उमर में म्हारी शादी कराई दी’ जैसे लोकप्रिय लोकगीतों पर युवाओं से लेकर परिवारों तक ने उत्साहपूर्वक नृत्य किया। पारंपरिक वेशभूषा, मांदल की थाप और लोक धुनों की गूंज ने शहर और जनजातीय अंचलों के बीच की दूरी को मानो मिटा दिया। संस्कृति के साथ स्वास्थ्य और प्रकृति का संगम 20 से 22 फरवरी तक आयोजित ‘जात्रा-2026’ केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय जीवनदृष्टि का परिचायक बनकर उभरा है, जहां स्वास्थ्य और प्रकृति एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। जनजातीय सामाजिक सेवा समिति के तत्वावधान में धार, झाबुआ और अलीराजपुर की पारंपरिक औषधियां, वनोपज और हस्तशिल्प आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण बने हुए हैं। राजनीतिक व प्रशासनिक सहभागिता से बढ़ी गरिमा आयोजन में विधायक गोलू शुक्ला, भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री सावित्री ठाकुर की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। झाबुआ की कलेक्टर नेहा मीना ने भी आयोजन स्थल पर पहुंचकर कलाकारों और स्टॉल संचालकों से संवाद किया और व्यवस्थाओं की सराहना की। विधायक गोलू शुक्ला ने कहा कि होली से पहले शहर में ऐसा सांस्कृतिक उत्सव देखना सुखद है। पूरा झाबुआ-अलीराजपुर मानो इंदौर में बस गया हो। यह आयोजन हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। महामंडलेश्वर दे मां पवित्रानंद गिरी राजेंद्र आचार्य ने कहा कि जात्रा सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का जीवंत उदाहरण है। हम सब एक हैं, यह भाव इस आयोजन में स्पष्ट दिखाई देता है। आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति प्रस्तावित है। वनोपज और हस्तशिल्प बने खास पहचान ‘जात्रा–2026’ में बड़ी संख्या में कॉलेज के छात्र-छात्राएं आयोजन स्थल पर पहुंच रहे हैं। पारंपरिक सजावट और जनजातीय कला से सजे सेल्फी पॉइंट पर दिनभर युवाओं की भीड़ नजर आई। परिसर में गौसेवा का विशेष प्रबंध भी किया गया है, जिसने आयोजन को आध्यात्मिक स्पर्श दिया। शुगर फ्री हनी, पारंपरिक औषधियां और झाबुआ का प्रसिद्ध ‘गुड़ियाघर’ स्टॉल दर्शकों को खूब आकर्षित कर रहा है। हाथ से बने गुड्डे-गुड़िया और पारंपरिक तीर-कमान बच्चों के बीच खास लोकप्रिय रहे।
ग्वालियर में मेडिकल स्टूडेंट के लिए बनाया ग्रीन कॉरिडोर:एक दिन पहले आया था हार्ट अटैक, जान बचाने सड़क मार्ग से ले गए दिल्ली

ग्वालियर के गजरा राजा मेडिकल कॉलेज के एक स्टूडेंट को एक दिन पहले हार्ट अटैक आया था। छात्र वेंटिलेटर पर है। उसे शनिवार रात को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर सड़क मार्ग से दिल्ली के लिए ले जाया गया है। प्रशासन, पुलिस व स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त रूप से काम कर जयारोग्य अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग से मुरैना रोड के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया। सड़क पर ट्रैफिक को रोक दिया गया और मेडिकल स्टूडेंट को एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम से लैस एम्बुलेंस के जरिए दिल्ली ले जाया है। रात 11 बजे ग्वालियर की सीमा से एंबुलेंस बाहर निकल गई थी। इंटर्नशिप कर रहे छात्र को आया था अटैक शुक्रवार शाम 7 बजे के लगभग ग्वालियर के गजरा राजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) से इंटर्रशिप कर रहे दिल्ली निवासी मेडिकल स्टूडेंट शैलेंद्र पांडेय (25) को हार्ट अटैक आ गया था। तत्काल उसे जेएएच के कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती कराया था। छात्र की हालत शुक्रवार शाम से ही नाजुक बनी हुई थी और वह वेंटिलेटर पर था। शनिवार को उसकी हालत में कोई सुधार नहीं आया और हालत और बिगड़ी है, जिसके बाद मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ ने छात्र के परिजन से बातचीत कर उसे दिल्ली पहुंचाने की बातचीत आगे बढ़ाई। शनिवार को शहर में शादियों के कारण काफी जाम के हालात थे। छात्र को एम्बुलेंस से समय पर निकाला जा सके इसके लिए एसएसपी ग्वालियर धर्मवीर सिंह से मदद मांगी और ग्रीन कॉरिडोर बनाने के लिए कहा। एसएसपी ग्वालियर धर्मवीर सिंह ने तत्काल ट्रैफिक पुलिस से लेकर थाना पुलिस को अलर्ट किया। ग्रीन कॉरिडोर बनाकर इन रास्तों से निकाली गई एम्बुलेंस शनिवार रात को जेएएच के कार्डियोलॉजी विभाग से जीवाजी क्लब के सामने, एजी ऑफिस पुल, सिटी सेंटर, गोला का मंदिर से हजीरा, पुरानी छावनी होते हुए मुरैना-दिल्ली रोड के लिए निकाला गया है। मेडिकल स्टूडेंट के साथ उसके मां-पिता भी साथ में हैं। छात्र के साथ एम्बुलेंस में कार्डियोलॉजी एवं एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉक्टर को भी रवाना किया है। एयर एम्बुलेंस का इंतजाम नहीं हो सका पहले छात्र को एयर एम्बुलेंस के जरिए दिल्ली ले जाने का तय हुआ था। शनिवार दोपहर से इसकी कवायत भी शुरू कर दी गई थी, लेकिन तकनीकी कारणों के चलते एयर एम्बुलेंस से उसे ले जाना संभव नहीं हो सका। जिसके बाद शनिवार रात को सड़क मार्ग से दिल्ली ले जाने का फैसला लिया गया। जीआरएमसी के डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ ने कहा कि मेडिकल स्टूडेंट को हार्ट अटैक आया था उसके परिजन की मांग पर बेहत्तर इलाज के लिए एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम से लैस एम्बुलेंस के जरिए दिल्ली भेजा गया है। जिसके लिए ग्रीन कॉरिडोर भी बनाया गया था।
कांग्रेस कार्यालय के बाहर राहुल गांधी का पुतला दहन:छतरपुर में भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा का प्रदर्शन, पुलिस से धक्कामुक्की भी हुई

छतरपुर में शनिवार शाम भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा ने कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। एआई इम्पैक्ट समिट विवाद को लेकर युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यालय के बाहर राहुल गांधी का पुतला दहन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प भी हुई। युवा मोर्चा के कार्यकर्ता चौबे कॉलोनी से पैदल रैली निकालकर डाकखाना चौराहे पहुंचे। वहां उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए। इसके बाद रैली कांग्रेस कार्यालय की ओर बढ़ी, जहां कार्यकर्ताओं ने पुतला दहन करने का प्रयास किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी, लेकिन कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड तोड़ दिए। वे आगे बढ़े और राहुल गांधी का पुतला फूंक दिया। पुलिसकर्मियों ने जलते पुतले से ज्वलनशील पदार्थ हटाए और आग पर काबू पाया। स्थिति को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। कहा- कांग्रेस की देशविरोधी नीतियां बर्दाश्त नहीं युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष नीरज चतुर्वेदी ने इस दौरान कहा कि कांग्रेस की कथित देशविरोधी नीतियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसी गतिविधियां जारी रहती हैं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस प्रदर्शन में युवा मोर्चा के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। पुलिस ने पुतले को लेकर छीना-झपटी की पुतला दहन को लेकर भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष नीरज चतुर्वेदी की टीम जैसे ही पुतला दहन के लिए चौराहे पर पहुंची, पहले से तैनात पुलिस बल ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद मौके पर हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए पुतला जलाने पर अड़े रहे, जबकि पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन का हवाला देते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी। इसी दौरान पुतले को लेकर छीना-झपटी की स्थिति बनी और सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। पुलिस की सख्ती के बावजूद कार्यकर्ताओं का आक्रोश भारी पड़ा और वे पुतला दहन की मांग पर डटे रहे।
मलाई सी कोमल, रोगों में संजीवनी…कांडा की गडेरी के कहने ही क्या, क्यों पहाड़ी थाली की जान, जानें सीक्रेट – Uttarakhand News

Last Updated:February 21, 2026, 22:22 IST कांडा की गडेरी को गरमा-गरम मडुवे की रोटी के साथ खाना पहाड़ की सबसे पसंदीदा परंपरा है. मडुवा पहाड़ों का प्रमुख अनाज है और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. गडेरी की मलाईदार सब्जी और मडुवे की मोटी रोटी पौष्टिक भोजन में शामिल है. स्थानीय लोग इसकी तुलना मलाई या मक्खन से करते हैं, क्योंकि पकने के बाद यह बेहद मुलायम हो जाती है. इसके टुकड़े इतने नरम होते हैं कि मुंह में रखते ही घुल जाते हैं. कांडा क्षेत्र की उपजाऊ मिट्टी और ठंडी जलवायु गडेरी की गुणवत्ता को कई गुना बढ़ा देती है. शहरों में लोग इसका और ऊंचे दाम देने को तैयार रहते हैं. उत्तराखंड के बागेश्वर जिला का कांडा क्षेत्र अपनी खास गडेरी के लिए जाना जाता है. यह गडेरी साधारण अरबी नहीं, बल्कि स्वाद और बनावट में बिल्कुल अलग मानी जाती है. स्थानीय लोग इसकी तुलना मलाई या मक्खन से करते हैं, क्योंकि पकने के बाद यह बेहद मुलायम हो जाती है. कांडा की गडेरी सिर्फ एक सब्जी नहीं, बल्कि यहां की कृषि परंपरा और जीवनशैली का अहम हिस्सा है. सर्दियों में यह हर घर की थाली में नजर आती है. इसकी लोकप्रियता अब पहाड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मैदानी इलाकों तक इसकी मांग बढ़ रही है. वरिष्ठ पत्रकार व स्थानीय जानकार पंकज डसीला लोकल 18 से बताते हैं कि कांडा की गडेरी को मलाई जैसा कहे जाने के पीछे सबसे बड़ा कारण इसकी कोमलता है. जब इसे पकाया जाता है, तो यह बहुत जल्दी गल जाती है. इसके टुकड़े इतने नरम होते हैं कि मुंह में रखते ही घुल जाते हैं. यही गुण इसे आम अरबी से अलग बनाता है. स्वाद में हल्की प्राकृतिक मिठास और चिकनाहट इसे और खास बना देती है. पहाड़ों में जहां भोजन सादा लेकिन पौष्टिक होता है, वहां ऐसी मलाईदार सब्जी लोगों को खास लगती है. इसे बुजुर्ग और बच्चों दोनों के लिए बेहतर आहार माना जाता है. कांडा क्षेत्र की उपजाऊ मिट्टी और ठंडी जलवायु गडेरी की गुणवत्ता को कई गुना बढ़ा देती है. यहां दिन और रात के तापमान में अंतर रहता है, जिससे कंद का विकास बेहतर होता है. यही कारण है कि कांडा की गडेरी सामान्य अरबी से बड़ी हो जाती है. मिट्टी में मौजूद प्राकृतिक पोषक तत्व इसके स्वाद और बनावट को निखारते हैं. किसान पीढ़ियों से इसी क्षेत्र में गडेरी की खेती करते आ रहे हैं, अनुभव के आधार पर बीज का चयन करते हैं. यह प्राकृतिक संतुलन ही कांडा की गडेरी को खास और दुर्लभ बनाता है. Add News18 as Preferred Source on Google कांडा की गडेरी की एक बड़ी खासियत है, इसकी जैविक खेती. यहां के किसान रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करते है. गोबर की खाद और जंगल से मिलने वाली प्राकृतिक खाद का उपयोग किया जाता है. इससे गडेरी न सिर्फ स्वाद में बेहतर होती है, बल्कि सेहत के लिए भी सुरक्षित रहती है. आज के समय में जब लोग केमिकल युक्त सब्जियों से परेशान हैं, कांडा की गडेरी शुद्ध भोजन का उदाहरण बनती जा रही है. यही वजह है कि शहरों में भी लोग इसे खास तौर पर ढूंढते हैं और ऊंचे दाम देने को तैयार रहते हैं. पहाड़ी इलाकों में सर्दियां काफी कठोर होती हैं. ऐसे में कांडा की गडेरी को सर्दियों की खास डाइट माना जाता है. इसकी तासीर गर्म होती है, जिससे शरीर को अंदर से ऊर्जा मिलती है. यह ठंड से होने वाले जोड़ों के दर्द और कमजोरी में भी फायदेमंद है. खेतों में मेहनत करने वाले किसान इसे ताकत का स्रोत मानते हैं. सर्दियों के मौसम में गडेरी की सब्जी या भुजिया लगभग हर घर में बनती है, जिससे शरीर गर्म और सक्रिय बना रहता है. कांडा की गडेरी को बनाने का तरीका भी इसे खास बनाता है. इसे अक्सर लोहे की कड़ाही में पकाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और बढ़ जाता है. इसमें भांग के दानों का रस डाला जाता है, जो पहाड़ी खाने की पहचान है. भांग का हल्का स्वाद गडेरी की मलाईदार बनावट के साथ बेहतरीन मेल बनाता है. इसे धीमी आंच पर पकाया जाता है ताकि इसके पोषक तत्व सुरक्षित रहें. यही पारंपरिक तरीका पीढ़ियों से चला आ रहा है, आज भी लोग इसे उसी तरह बनाना पसंद करते हैं. कांडा की गडेरी को गरमा-गरम मडुवे की रोटी के साथ खाना यहां की सबसे पसंदीदा परंपरा है. मडुवा पहाड़ों का प्रमुख अनाज है और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. गडेरी की मलाईदार सब्जी और मडुवे की मोटी रोटी पौष्टिक भोजन में शामिल है. साथ में भांग की चटनी स्वाद को और बढ़ा देती है. यह भोजन सिर्फ पेट नहीं भरता, बल्कि पहाड़ की संस्कृति और परंपरा का स्वाद भी कराता है. कांडा क्षेत्र सिर्फ गडेरी के लिए ही नहीं, बल्कि अपने धार्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी जाना जाता है. यहां स्थित कालिका मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है. साथ ही क्षेत्र के चाय बागान पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. जो लोग यहां घूमने आते हैं, वे कांडा की गडेरी का स्वाद लेना नहीं भूलते. धीरे-धीरे यह सब्जी स्थानीय पर्यटन का भी हिस्सा बनती जा रही है. स्वाद, सेहत और संस्कृति-तीनों का संगम कांडा की गडेरी को सच में खास बनाता है. First Published : February 21, 2026, 22:22 IST
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में आंदोलन:तीन मंत्रियों के इस्तीफे की मांग; 24 फरवरी को विधानसभा घेराव करेगी कांग्रेस

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी 24 फरवरी 2026 को भोपाल में मध्य प्रदेश विधानसभा का घेराव करेगी। इस संबंध में शनिवार शाम मंदसौर जिला कांग्रेस कार्यालय पर प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी की अगुवाई में प्रेस वार्ता हुई। बताया गया कि यह आंदोलन प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध, प्रदेश के किसानों के हितों की रक्षा तथा राज्य सरकार के तीन मंत्रियों के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है। यह घेराव प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में होगा। प्रेस वार्ता के दौरान विधायक विपिन जैन, शहर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष इष्टा भाचावत सहित अन्य कांग्रेस पदाधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों और कार्यकर्ताओं से 24 फरवरी को भोपाल पहुंचकर विधानसभा घेराव में भाग लेने की अपील की है। ट्रेड डील से किसानों को नुकसान की आशंका प्रदेश कांग्रेस का मत है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते में कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क में संभावित कमी से मध्य प्रदेश के कपास, सोयाबीन और मक्का उत्पादक किसानों को गंभीर आर्थिक नुकसान हो सकता है। बताया गया कि अमेरिका में औसत कृषि जोत लगभग 170 हेक्टेयर है, जबकि भारत में यह औसतन 1 से 1.5 हेक्टेयर के बीच है। अमेरिकी किसानों को व्यापक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सब्सिडी मिलती है, जबकि भारतीय किसान पहले से ही बढ़ती लागत, मौसमी अस्थिरता और बाजार संकट का सामना कर रहे हैं। सोयाबीन उत्पादकों पर सीधा असर उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश देश का अग्रणी सोयाबीन उत्पादक राज्य है, जहां लगभग 50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की खेती होती है। यदि अमेरिकी सोयाबीन तेल या सोया खली का आयात बढ़ता है तो स्थानीय मंडियों में दाम गिरने की आशंका है। इससे किसानों के साथ-साथ स्थानीय प्रसंस्करण उद्योग पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। अमेरिका विश्व का सबसे बड़ा मक्का निर्यातक देश है। एथेनॉल उत्पादन के बाद बचने वाले डिस्टलर ड्राइड ग्रेन जैसे उत्पादों के आयात से पशु आहार बाजार प्रभावित हो सकता है, जिससे प्रदेश के मक्का उत्पादकों को नुकसान उठाना पड़ेगा। कपास किसानों के लिए चिंताजनक स्थिति कपास के संदर्भ में भी स्थिति चिंताजनक बताई गई। आयात शुल्क में कमी होने पर अमेरिकी कपास के आयात से निमाड़ और मालवा क्षेत्र के कपास किसानों को सीधा आर्थिक आघात लगेगा। पहले से लागत और मूल्य संकट झेल रहे किसानों की आय पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। प्रदेश कांग्रेस का मानना है कि इस प्रकार का व्यापार समझौता स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था, मंडी व्यवस्था और न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली पर दबाव डालेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नगदी संकट और रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। तीन मंत्रियों के इस्तीफे की मांग प्रदेश कांग्रेस ने नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए तीन मंत्रियों से इस्तीफे की मांग की है – कैलाश विजयवर्गीय – इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल प्रकरण में जवाबदेही के आधार पर। विजय शाह – कर्नल सोफिया को आतंकवादियों की बहन कहने तथा सार्वजनिक जीवन की गरिमा के विपरीत दिए गए बयानों के संदर्भ में। राजेंद्र शुक्ला – जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मृत्यु एवं स्वास्थ्य विभाग से जुड़े गंभीर मामलों में जवाबदेही के आधार पर। विधानसभा घेराव के जरिए रखी जाएंगी ये मांगें भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर विस्तृत श्वेतपत्र जारी किया जाए। मध्य प्रदेश के किसानों के हितों की संवैधानिक और नीतिगत सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। संबंधित मंत्रियों से नैतिक आधार पर तत्काल इस्तीफा लिया जाए। किसानों के लिए मूल्य सुरक्षा एवं आय संरक्षण की ठोस व्यवस्था लागू की जाए।
फिरोजाबाद में मौसम बदलने से बीमारियां बढ़ीं, डॉक्टर की सलाह जरूरी

Last Updated:February 21, 2026, 21:45 IST बदलते मौसम में अचानक सर्दी और गर्मी के असर से लोग बीमार हो रहे हैं. वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. मनोज कुमार ने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने और मौसम के अनुसार खान-पान व कपड़ों का ध्यान रखने की सलाह दी है. जानें कैसे बचें बीमारियों से. ख़बरें फटाफट फिरोजाबाद. जैसे-जैसे मौसम बदलता जा रहा है, वैसे ही लोग बीमार हो रहे हैं।. सर्दी के बाद गर्मी ने अपना तेवर दिखाना शुरू कर दिया है, जिसकी वजह से लोग बीमार हो रहे हैं. लोगों को सर्दी-जुकाम हो रहा है और इसके साथ ही पेट की भी बीमारियां देखने को मिल रही हैं. इसको लेकर डॉक्टर भी मरीजों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की सलाह दे रहे हैं. सर्दी–गर्मी से लोगों को हो रही दिक्कत फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. मनोज कुमार ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि अचानक मौसम बदल रहा है. रात में लोगों को सर्दी लगती है, तो वहीं दिन में तेज धूप से पसीना आ रहा है, इसलिए यह मौसम स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है. इस मौसम में कपड़े पहनने से लेकर खाने-पीने तक की चीजों का सही प्रयोग करना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस मौसम में लोग एकदम सारे गर्म कपड़े नहीं छोड़ें. इसके साथ ही खाने-पीने के लिए ठंडी चीजों से परहेज करें. डॉ. कुमार ने बताया कि अभी लोग इसी वजह से अधिक बीमार हो रहे हैं कि वे मौसम के हिसाब से चीजें नहीं खा रहे हैं. इस मौसम में अधिक ऑयली, भुनी और फास्ट फूड का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे पेट की बीमारियां भी हो सकती हैं. धीरे-धीरे करें बदलाव, वरना हो जाएंगे बीमार वरिष्ठ फिजिशियन ने बताया कि मौसम धीरे-धीरे बदल रहा है, लेकिन लोग एकदम से बदलाव कर देते हैं. इसकी वजह से हमारी बॉडी तापमान के अनुसार काम नहीं कर पाती, इसलिए आपको भी मौसम के हिसाब से रहना चाहिए. यदि कोई भी बीमारी हो, या जो डायबिटीज या हार्ट के मरीज हैं, वे इस मौसम में धीरे-धीरे बाहर निकलें. किसी भी तरह की बीमारी होने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाकर संपर्क करें. पानी अच्छे से पीएं और ज्यादा से ज्यादा खान पान का ख्याल रखें. About the Author Monali Paul Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें Location : Firozabad,Uttar Pradesh First Published : February 21, 2026, 21:45 IST








