नाक से खून, कब्ज और पीसीओएस में मददगार, जानें आयुर्वेद में दूब का महत्व, कई बीमारियों में असरदार – Uttar Pradesh News

Last Updated:February 21, 2026, 21:41 IST सनन्दन उपाध्याय/बलिया: हर जगह दिखने वाली साधारण घास, जो खेत से लेकर आंगन और आयुर्वेद से लेकर आस्था तक अपनी अलग पहचान रखती है. जी हां आमतौर पर पैरों तले बिछी रहने वाली यह घास औषधीय गुणों का खजाना है. इसका सही तरीके से प्रयोग कर कई रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है. आगे विस्तार से जानिए… सेहत की दुनिया में दूब घास को प्राकृतिक उपचार के रूप में बेहद उपयोगी बताया गया है. इसे शीतल, रक्तस्तंभक और पाचन सुधारक भी कहा गया है. इसके अलावा, नकसीर यानी नाक से खून आने पर दूब का ताजा रस माथे पर लगाने और कुछ मात्रा में सेवन करने से राहत मिल सकती है. यहीं नहीं, गर्मियों में शरीर की आंतरिक गर्मी शांत करने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. दुर्वा यानी दूब महिलाओं के लिए भी फायदेमंद है. पीसीओएस जैसी हार्मोनल असंतुलन की स्थिति में भी दूब का रस दही के साथ लेने से अत्यधिक रक्तस्राव और दर्द में आराम मिल सकता है. ध्यान रखें कि, विशेषज्ञ सलाह के बिना किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाना उचित नहीं होता है. हालांकि, ग्रामीण परंपराओं में इसका प्रयोग आज भी किया जाता है. राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की सात साल अनुभवी आयुर्वेदाचार्य डॉ प्रियंका सिंह के अनुसार, दूब कब्ज से राहत दिलाने और पेट को साफ रखने में बेहद लाभकारी और गुणकारी साबित हो सकती है. इसका हल्का काढ़ा बनाकर पीने से गैस और अपच में आराम मिलने की बात कही जाती है. इसके अलावा, इसमें प्राकृतिक तत्व भी पाए जाते हैं, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मददगार हैं. Add News18 as Preferred Source on Google शुगर और खून की कमी जैसी समस्याओं में भी दूब का उल्लेख मिलता है। पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसके अर्क को ब्लड शुगर संतुलित करने में सहायक माना गया है. इसमें आयरन तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो खून की कमी दूर करने में उपयोगी सिद्ध हो सकती है. धार्मिक दृष्टिकोण से दूब का अत्यंत पवित्र स्थान है. हिंदू परंपरा में इसे भगवान गणेश जी को अर्पित किया जाता है और शुभ का प्रतीक माना जाता है. पूजा-पाठ में दूर्वा चढ़ाने की परंपरा केवल आस्था नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश भी देती है. इस छोटी सी घास को भारतीय संस्कृति से गहरा जुड़ाव है. खेती और पशुपालन में भी दूब का महत्त्व कम नहीं है. लमसम 10 से 12% प्रोटीन युक्त यह घास पशुओं के लिए पौष्टिक चारे का काम करती है. सूखे की स्थिति में भी तेजी से उगने की इसकी क्षमता रखने के कारण किसानों का भरोसेमंद साथी भी है. कई जगहों पर तो प्राकृतिक चारे के रूप में भी इसको प्राथमिकता दी जाती है. दूब का पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका होती है. इसकी जड़ें मिट्टी को मजबूती से पकड़ती हैं, जिससे कटाव रुक जाती है. यही कारण है कि इसे लॉन, पार्क और गोल्फ कोर्स में बड़े पैमाने पर लगाया जाता है. कम देखभाल में भी हरी-भरी रहने वाली यह घास सचमुच धरती की हरी और मजबूत ढाल है. First Published : February 21, 2026, 21:41 IST
बरगद के पत्तों के फायदे: पाचन, त्वचा व जोड़ों के दर्द में असरदार

Last Updated:February 21, 2026, 21:28 IST वट वृक्ष (बरगद) के पत्ते, छाल और कोपलें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और रोगाणुरोधी गुणों से भरपूर होती हैं. जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती प्रदान करते हैं. इन पत्तियों का काढ़ा या अर्क संक्रमण से लड़ने, त्वचा रोगों, मधुमेह और श्वसन संबंधी समस्याओं में कारगर माना जाता है. जिससे समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है। वट वृक्ष यानी के बरगद के पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. जो पाचन में सुधार, त्वचा रोगों, जोड़ों के दर्द, सूजन और डायबिटीज जैसी समस्याओं में बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इनके कोमल पत्तों का लेप घावों को भरने में सहायक है और इनका रस एंटी-इंफ्लेमेटरी के रूप में कार्य करता है. डॉक्टर रवि आर्य ने बताया कि बरगद के कोमल पत्ते (कूपल) और दूध दस्त, पेचिश और पाचन संबंधी समस्याओं के लिए आयुर्वेद में एक प्रभावी प्राकृतिक उपचार हैं. कसैले गुणों के कारण, यह आंतों की गति को नियंत्रित करते हैं और मल को बांधते हैं. इसके कूपलों को रात भर भिगोकर सुबह पानी पीने या दही के साथ सेवन करने से दस्त में तुरंत लाभ होता है. बरगद के पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजनरोधी) गुण होते हैं जो जोड़ों के दर्द, मोच और सूजन में कारगर हैं. सबसे असरदार उपाय में पत्तों पर घी/सरसों का तेल लगाकर गर्म करें और सूजन वाले स्थान पर बांधें. इसके ताजे पत्तों का लेप खुजली व लाल चकत्तों में आराम देता है. जो एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प है. Add News18 as Preferred Source on Google वट वृक्ष (बरगद) के पत्ते और अन्य भाग हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. इनमें कैल्शियम और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. जो हड्डियों को मजबूत बनाने, जोड़ों के दर्द, गठिया और सूजन को कम करने में सहायक हैं. यह दर्द से राहत और टूटी हड्डियों के उपचार में मदद करता है. बरगद के पत्ते औषधीय खजाना हैं. जिनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं. इनमें ट्राइटरपेन्स, फ्रीडेलिन, सिटोस्टेरॉल, और फ्लेवोनोइड्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. ये पत्ते मधुमेह नियंत्रण, त्वचा रोगों (दाग-धब्बे, खुजली), जोड़ों के दर्द, दस्त, और इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक होते हैं. बरगद के पत्ते जीवाणुरोधी और सूजनरोधी गुणों से भरपूर होते हैं. जो त्वचा की समस्याओं और शरीर के दर्द में राहत देते है. ताजे पत्तों का लेप खुजली, मुंहासे और घावों को जल्दी भरने में मदद करता है. जबकि पत्तों का गर्म काढ़ा जोड़ों के दर्द में उपयोगी है. First Published : February 21, 2026, 21:28 IST
शिखर धवन ने गर्लफ्रेंड सोफी शाइन से शादी की:युजवेंद्र चहल ने बारात में डांस किया; क्रिकेटर ने 2023 में पहली पत्नी से तलाक लिया था

पूर्व भारतीय क्रिकेटर शिखर धवन ने गर्लफ्रेंड सोफी शाइन के साथ शादी कर ली है। स्पिनर युजवेंद्र चहल ने शनिवार को एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें वे मौजा ही मौजा गाने पर डांस करते दिख रहे हैं। चहल ने कुछ फोटो भी पोस्ट किए। इनमें धवन और उनकी पत्नी सोफी शाइन स्टेज पर हैं। 40 साल के पूर्व भारतीय ओपनर ने एक महीने पहले 12 जनवरी को अपनी आयरिश गर्लफ्रेंड के साथ सगाई की थी। दोनों पिछले कुछ समय से रिलेशनशिप में थे और मई 2025 में अपने रिश्ते को सार्वजनिक किया था। इससे पहले धवन ने 2023 में अपनी पहली पत्नी आयशा मुखर्जी से तलाक ले लिया था। दोनों ने 2011 में शादी की थी। आयशा-धवन का एक बेटा भी है। धवन की शादी की फोटो देखिए चहल ने धवन की शादी में डांस की वीडियो भी पोस्ट किया, देखिए… पिछले महीने धवन ने सगाई की थी धवन ने 12 जनवरी को इंस्टाग्राम पर लिखा था- मुस्कान से लेकर सपनों तक, सब कुछ साझा करते हुए। हमारी सगाई के लिए मिले प्यार, आशीर्वाद और शुभकामनाओं के लिए आभारी हूं। हम हमेशा के लिए एक-दूसरे का साथ चुन रहे हैं। इससे पहले IPL में शिखर के पंजाब किंग्स के लिए खेलने के दौरान भी सोफी टीम को सपोर्ट करती नजर आई थीं। कौन हैं सोफी शाइन? सोफी शाइन आयरलैंड की रहने वाली हैं। जब वह धवन से मिली थी तब UAE में जॉब करती थी। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक वह अमेरिका की फाइनेंशियल सर्विस कंपनी नॉर्दर्न ट्रस्ट कॉरपोरेशन में सेकेंड वाइस प्रेसिडेंट (प्रोडक्ट कंसल्टेंट) के पद पर कार्यरत रही हैं। सोफी पिछले साल जुलाई से धवन की स्पोर्ट्स कंपनी डा वन स्पोर्ट्स की COO (चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर) हैं। उन्होंने आयरलैंड के लिमरिक इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मार्केटिंग और मैनेजमेंट की पढ़ाई की है। शुरुआती शिक्षा उन्होंने कैसलरॉय कॉलेज से पूरी की। सोफी, धवन के इंस्टाग्राम पर आने वाले कई मजेदार वीडियो में भी नजर आती रहती हैं। धवन तलाक के बाद मुश्किल दौर से गुजरे थे पिछले साल एक इंटरव्यू में धवन ने अपने तलाक के बाद के मुश्किल दौर को लेकर खुलकर बात की थी। उन्होंने बताया था कि वह लंबे समय से अपने बेटे जोरावर से नहीं मिल पाए हैं और संपर्क भी टूट गया है। धवन और उनकी पूर्व पत्नी आयशा मुखर्जी का अक्टूबर 2023 में आधिकारिक तौर पर तलाक हुआ था। दोनों की शादी 2011 में हुई थी और यह रिश्ता करीब 11 साल चला। आयशा की पहले की शादी से दो बेटियां हैं। धवन के साथ उन्होंने बेटे जोरावर को जन्म दिया। तलाक के फैसले के दौरान दिल्ली की अदालत ने कहा था कि धवन को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी और उन्हें कई सालों तक अपने इकलौते बेटे से दूर रखा गया। हालांकि कोर्ट ने धवन को स्थायी कस्टडी नहीं दी थी, बल्कि मिलने और वीडियो कॉल की सीमित अनुमति दी थी। धवन का कहना है कि बाद में उन्हें बेटे से वर्चुअल बातचीत से भी रोक दिया गया। घरवालों के मना करने के बावजूद शिखर ने पहली शादी की थी ऑस्ट्रेलियन नागरिक आयशा का जन्म हिंदुस्तान में हुआ था। उनके पिता भारतीय और उनकी मां ब्रिटिश मूल की हैं। शिखर से 10 साल बड़ी आयशा किक बॉक्सर हैं और नेशनल व इंटरनेशनल इवेंट में हिस्सा ले चुकी हैं। आयशा की पहली शादी एक ऑस्ट्रेलियाई बिजनेसमैन से हुई थी। इस शादी के बाद आयशा की दो बेटियां आलिया और रिया हुईं। शिखर ने आयशा को पहली बार फेसबुक पर देखा था और यहीं से प्यार की शुरुआत हुई थी। इस लव स्टोरी में हरभजन सिंह मीडिएटर थे। धवन के घरवाले आयशा से शादी के खिलाफ थे। वे नहीं चाहते थे कि तलाकशुदा और 10 साल बड़ी औरत जिसकी दो बेटियां हों, उससे वे शादी करें। हालांकि, बाद में परिवार ने इस रिश्ते को मंजूरी दे दी। 2012 में सिख परंपरा से शादी हुई। शिखर की बारात में विराट कोहली समेत कई क्रिकेटर्स शामिल हुए थे। शिखर ने 2022 में भारत के लिए आखिरी मैच खेला शिखर धवन ने 2010 में टी-20 और 2011 में भारत के लिए वनडे डेब्यू किया। हालांकि, टीम में जगह बनाने में उन्हें 3 साल लग गए। 2013 में उन्होंने टेस्ट डेब्यू किया, यहीं से वे तीनों फॉर्मेट में फिक्स हो गए। उन्होंने 10 दिसंबर 2022 तक भारत के लिए 167 वनडे, 68 टी-20 और 34 टेस्ट खेले। इनमें 24 शतक और 55 फिफ्टी शामिल रहीं। —————————————————— भारतीय क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… सूर्या बोले– अभिषेक के फॉर्म की चिंता न करें टी-20 वर्ल्ड कप के तीन मैचों में बिना खाता खोले आउट हुए टीम इंडिया के ओपनर अभिषेक शर्मा के सपोर्ट में कप्तान सूर्यकुमार यादव का बयान आया है। शनिवार को सूर्या ने कहा- ‘अभिषेक शर्मा का फॉर्म चिंता का विषय नहीं है। मुझे चिंता उन लोगों की है, जो अभिषेक की चिंता कर रहे हैं। मुझे फिक्र उन टीमों की है, जिनके खिलाफ अभिषेक का बल्ला चलेगा।’ पढ़ें पूरी खबर
मीनाक्षी शेषाद्री बोलीं- शास्त्रीय नृत्य गांव तक ले जाऊंगी:30 साल बाद खरगोन में दूसरी पारी का ऐलान; कहा- भविष्य को लेकर बहुत उत्सुक

फिल्म अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्री शनिवार शाम 5:30 बजे खरगोन पहुंची। वे नवग्रह मेले के समापन पर शास्त्रीय शास्त्री नृत्य प्रस्तुति में शामिल हो रही हैं। खरगोन पहुंचने पर 90 के दशक की मशहूर अभिनेत्री मीनाक्षी ने कहा कि वह बॉलीवुड में 30 साल के ब्रेक के बाद अपनी दूसरी पारी के लिए तैयार हैं। भरतनाट्यम थोड़ा मुश्किल जरूर है लेकिन इस विशेष तरीके से किया जाए तो गांव तक के लोग आसानी से समझ सकते हैं। वे लेवल 1 व लेवल 2 सिटी से लेकर हिंदुस्तान के गांव तक शास्त्रीय संगीत को पहुंचाना चाहती है। खरगोन से इसकी शुरुआत कह सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैं एक ऐसे परिवार में जन्मी जहां संगीत, नृत्य, अभिनय, शास्त्रीय ज्ञान व संस्कृत प्रचलित रहा। उसे वजह से मैं चलने से पहले नृत्य करना सीख लिया। मेरी मां ही मेरी गुरु थी भरतनाट्यम शैली में। शादी कर USA चली गईं थी पूर्व मिस इंडिया मीनाक्षी ने बताया दिल्ली में जब स्कूल की 12वीं कक्षा में थी तब मजाक में ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भाग ले लिया था आश्चर्य की बात थी कि मिस इंडिया भी चुन ली गई। उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। फौरन कई फिल्म भी ऑफर हो गई। मेरे पापा अंग्रेजी में समझाते थे सक्सेस इस एपीसी। ए मतलब एबिलिटी यानी योग्यता। बी यानी ब्रेक। यानी अपॉर्चुनिटी का सही दरवाजे से दस्तक देना। सी मतलब करेज यानी आत्म शक्ति, आत्मविश्वास व बड़ी शक्ति में विश्वास। मेरे सफर में यह तीन बातें सम्मिलित थी। 80-90 के दशक में 80 से 90 फिल्में की थी जिसमें हिंदी भाषा के अलावा तमिल तेलुगू की फिल्में भी शामिल हैं। उसके बाद शादी कर USA चली गई। 30 साल के गैप के बाद मैं भविष्य को लेकर उत्सुक हूं। दामिनी एक फिल्म है और मैंने उसमें दामिनी का पात्र किया। फिल्म में जो बताया गया आज भी हिंदुस्तान में वह हावी है। इसका दमन जरूरी है। महिलाओं को साहस दिखाने की आवश्यकता है और यह भारत है जहां शक्ति रूप से संसार रचा गया। शक्ति रूप से ही ठीक किया जा सकता है। मुझे अश्लीलता पसंद नहीं है। मैं वैसे ही पत्र निभाउं जो परिवार के साथ देख सकूं। शॉर्टकट से सक्सेस पर उन्होंने कहा, आज घोर कलयुग है। लक्ष्मी को शॉर्टकट से पा सकते हैं लेकिन सत्य की राह ही सही लक्ष्मी है। परिवर्तन का दौर है। सोशल मीडिया की वजह से बड़े भी फिल्में भी नहीं चल रही है।
झाबुआ में कृषि विज्ञान मेले का शुभारंभ:मंत्री निर्मला भूरिया ने जैविक खेती पर जोर दिया

झाबुआ के कृषि विज्ञान केंद्र प्रक्षेत्र में शनिवार को दो दिवसीय जिला स्तरीय कृषि विज्ञान मेले का शुभारंभ हुआ। इसका उद्देश्य कृषक कल्याण वर्ष के संकल्प को साकार करना है। महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया मुख्य अतिथि थीं, जबकि कलेक्टर नेहा मीना ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मेले का फोकस कृषि, उद्यानिकी तकनीक विस्तारण और तिलहन मिशन पर है, जिसका लक्ष्य किसानों को आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक खेती और उन्नत विपणन प्रणालियों से जोड़ना है। अपने संबोधन में मंत्री निर्मला भूरिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 को किसान कल्याण के लिए समर्पित किया गया है। मंत्री ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से स्वास्थ्य और भूमि पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के प्रति आगाह किया। उन्होंने कृषि सखियों और उपस्थित जनसमूह से मिश्रित खेती व जैविक पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया। कलेक्टर नेहा मीना ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की प्राथमिकता केवल मेले का आयोजन नहीं, बल्कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर के किसान तक पहुंचाना है। उन्होंने जिले की जैविक खेती के क्षेत्र में उपलब्धियों का जिक्र किया। मीना ने वैज्ञानिकों से अपील की कि वे किसानों को उनकी स्थानीय भाषा में तकनीकी प्रशिक्षण दें, ताकि ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग सुनिश्चित हो सके। कार्यक्रम के दौरान ग्राम खेड़ी के विमल भाभोर को बायो रिसोर्स सेंटर के लिए सहायता प्रदान की गई। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और फसल बीमा योजना के तहत कई हितग्राहियों को ड्रिप सिस्टम और बीमा पॉलिसी वितरित की गईं। उद्यानिकी और पशुपालन विभाग द्वारा भी ट्रैक्टर, सब्जी खेती और बकरी पालन के लिए लाखों रुपए की सहायता राशि के चेक प्रदान किए गए। मेले में लगाई गई प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों ने सूक्ष्म सिंचाई, नरवाई प्रबंधन और आधुनिक कृषि यंत्रों की बारीकियों को समझा। कार्यक्रम के समापन पर मंत्री भूरिया ने उपस्थित जनसमूह को नशामुक्ति की शपथ दिलाई। उन्होंने एक प्रश्नोत्तरी के माध्यम से कृषि सखी गंगा मेडा को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया। मेले की अन्य तस्वीरें…
सीहोर में 9 साल की बेटी की हत्या:मां और उसका प्रेमी गिरफ्तार; प्रेम प्रसंग में रोड़ा बन रही थी, इसलिए रची थी साजिश

सीहोर जिले के रेहटी थाना क्षेत्र के ग्राम बाबरी में 9 वर्षीय बालिका राधिका की गला घोंटकर हत्या करने के मामले में पुलिस ने उसकी मां और मां के प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों ने अपने प्रेम प्रसंग में बाधा बनने के कारण 17 फरवरी को साजिश रचकर इस वारदात को अंजाम दिया था। वर्तमान में पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के अनुसार, ग्राम बाबरी निवासी सुषमा यदुवंशी ने रेहटी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने अपनी शिकायत में बताया था कि उसकी 9 वर्षीय बेटी राधिका की किसी अज्ञात व्यक्ति ने गला घोंटकर हत्या कर दी है। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज कर अपनी जांच शुरू की थी। पुलिस की पूछताछ में प्रेमी ने कबूला जुर्म सीहोर के पुलिस अधीक्षक (SP) दीपक कुमार शुक्ला के निर्देश पर थाना प्रभारी रेहटी निरीक्षक राजेश कहारे के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित की गई। जांच के दौरान उपनिरीक्षक नंदराम अहिरवार और उनकी टीम ने ग्राम बाबरी पहुंचकर संदिग्ध आरोपी राहुल यदुवंशी (35) से पूछताछ की। पूछताछ में राहुल ने बताया कि उसका मृतका की मां सुषमा यदुवंशी के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था और राधिका उनके मिलने में बाधा बनती थी। साजिश के तहत मां गई काम पर, प्रेमी ने घोंटा गला आरोपी राहुल के अनुसार, उसने और सुषमा ने मिलकर राधिका की हत्या की साजिश रची थी। योजना के तहत सुषमा ने राहुल से कहा था कि वह 17 फरवरी को सुबह 9 बजे मजदूरी करने के लिए ढाबे पर चली जाएगी, तब राधिका घर पर अकेली होगी। इसी तय योजना के अनुसार, राहुल 17 फरवरी को दिन में 11:30 बजे सुषमा के घर में घुसा और वहां अकेली राधिका की लेगी (Legging) से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। दोनों आरोपी गिरफ्तार वारदात की पूरी साजिश का खुलासा होने के बाद पुलिस ने इस मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान राहुल यदुवंशी (36), पिता रामगोपाल यदुवंशी और सुषमा यदुवंशी (35), पति स्व. मेहताब सिंह यदुवंशी के रूप में हुई है। दोनों आरोपी सीहोर जिले के रेहटी थाना क्षेत्र के ग्राम बाबरी के निवासी हैं।
जिले में अब 9 लाख 97 हजार वोटर:सीहोर में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन; सबसे ज्यादा वोटर आष्टा में

सीहोर में शनिवार (21 फरवरी) को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर-2026) के बाद मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया है। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी बालागुरू के. के निर्देश पर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में यह सूची जारी की गई। अंतिम प्रकाशन के बाद जिले में अब कुल 9 लाख 97 हजार 846 मतदाता हो गए हैं, जिनके लिए मतदान सुविधाओं का विस्तार करते हुए जिले में 110 नए मतदान केंद्र भी बनाए गए हैं। 27 अक्टूबर की तुलना में घटे मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर-2026) से पहले, 27 अक्टूबर की स्थिति में जिले में कुल 10 लाख 26 हजार 574 मतदाता दर्ज थे। इसके बाद 23 दिसंबर 2025 को जब प्रारूप प्रकाशन (ड्राफ्ट लिस्ट) हुआ, तब यह संख्या घटकर 9 लाख 83 हजार 143 रह गई थी। अब 21 फरवरी को हुए अंतिम प्रकाशन में जिले में कुल 9 लाख 97 हजार 846 मतदाता सूचीबद्ध किए गए हैं। आष्टा में सबसे ज्यादा मतदाता जिले की चारों विधानसभा सीटों के अंतिम आंकड़ों के अनुसार आष्टा में सबसे ज्यादा और सीहोर में सबसे कम मतदाता हैं। विधानसभा क्षेत्रवार मतदाताओं की स्थिति इस प्रकार है: 43 हजार से ज्यादा वोटर मिले अनुपलब्ध पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान जिले में कुल 10 लाख 26 हजार 574 मतदाताओं में से 9 लाख 71 हजार 808 मतदाताओं की सफल मैपिंग की गई। जांच के दौरान 11 हजार 335 मतदाता नॉन-मैपिंग श्रेणी में पाए गए। वहीं, 43 हजार 431 मतदाता अनुपलब्ध या अप्राप्य रहे। इसी पुनरीक्षण के बाद तैयार की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल 9 लाख 83 हजार 143 मतदाता शामिल किए गए थे। जिले में अब कुल 1367 मतदान केंद्र मतदाताओं को बेहतर और सुगम सुविधाएं देने के लिए मतदान केंद्रों का युक्तियुक्तकरण कर इनका विस्तार किया गया है। पहले जिले में 1257 मतदान केंद्र संचालित थे, जिनमें अब 110 नए केंद्र जोड़ दिए गए हैं। अब जिले में कुल 1367 मतदान केंद्र स्थापित हो गए हैं। विधानसभा वार मतदान केंद्रों की संख्या इस प्रकार है: सीहोर विधानसभा का जेंडर रेशो सबसे बेहतर जनसंख्या एवं मतदाता अनुपात के आधार पर, अंतिम सूची के अनुसार जिले का कुल ईपी (इलेक्टोरल पॉपुलेशन) रेशियो 61.87 प्रतिशत दर्ज किया गया है। वहीं, जिले का कुल जेंडर रेशियो 927 रहा। कुल मतदाताओं में 5 लाख 17 हजार 850 पुरुष, 4 लाख 79 हजार 974 महिलाएं और 22 अन्य श्रेणी के मतदाता शामिल हैं। विधानसभा क्षेत्रवार जेंडर रेशियो देखें तो सीहोर का सबसे ज्यादा 946, आष्टा का 927, बुधनी का 922 और इछावर का 914 दर्ज किया गया है।
डिंडौरी मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन, 14 हजार नए नाम:कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में दी जानकारी

डिंडौरी में शनिवार को निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया है। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ स्टैंडिंग कमेटी की बैठक आयोजित की गई, जिसमें यह जानकारी दी गई। प्रकाशित सूची के अनुसार, जिले में लगभग 14 हजार नए मतदाता जोड़े गए हैं। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने बताया कि दोनों विधानसभा क्षेत्रों के नागरिक अंतिम प्रकाशन सूची की जांच संबंधित मतदान केंद्र, पंजीयन कार्यालय या अन्य निर्धारित स्थलों पर कर सकते हैं। मतदाता सूची मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की वेबसाइट पर भी सर्च सुविधा के साथ उपलब्ध है। 23 दिसंबर से 29 जनवरी 2026 के बीच एसआईआर (Special Intensive Revision) के दौरान 14,334 नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए और 1,652 नाम हटाए गए हैं। वोटर्स की वर्तमान स्थिति नवीनतम मतदाता सूची के अनुसार, जिले में कुल 5 लाख 19 हजार 881 मतदाता दर्ज हैं। इनमें 2 लाख 59 हजार 360 पुरुष मतदाता और 2 लाख 60 हजार 511 महिला मतदाता शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 10 थर्ड जेंडर के मतदाता भी सूची में दर्ज किए गए हैं। विधानसभा शहपुरा में 2 लाख 74 हजार 632 मतदाता और डिंडौरी विधानसभा में 2 लाख 48 हजार 249 मतदाता दर्ज हैं। जिले में कुल 701 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें शहपुरा में 364 और डिंडोरी में 337 मतदान केंद्र शामिल हैं। जिले की अनुमानित जनसंख्या 8 लाख 60 हजार 103 है। बैठक के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को अंतिम निर्वाचक नामावली की हार्ड कॉपी और एक सीडी भी उपलब्ध कराई गई। इस अवसर पर अपर कलेक्टर जेपी यादव, एसडीएम भारती मरावी, राकेश अवधिया सहित अन्य कर्मचारी और अधिकारी मौजूद रहे।
रायसेन में संतान सुख का झांसा देकर ठगी:पूजा के बहाने अफसर की पत्नी से लाखों के जेवर लेकर महिला फरार

रायसेन की शीतल सिटी कॉलोनी में शनिवार को ठगी की एक चौंकाने वाली वारदात सामने आई है। यहां संतान प्राप्ति का झांसा देकर एक बुजुर्ग महिला ने अधिकारी की पत्नी से लाखों रुपए के जेवर ठग लिए और फरार हो गई। घटना वित्त विभाग में पदस्थ असिस्टेंट डायरेक्टर ध्रुव पटेल के निवास की है। उनकी पत्नी मिथिलेश उस समय घर पर अकेली थीं। इसी दौरान एक बुजुर्ग महिला भिक्षा मांगने उनके घर पहुंची। गेट पर ही भिक्षा देने से इनकार करने पर महिला ने बाहर आकर देने या अंदर बुलाने की बात कही। सहज विश्वास में आकर मिथिलेश ने उसे घर के भीतर बुला लिया। संतान सुख और पूजा-पाठ का दिया लालच घर के अंदर पहुंचते ही आरोपी महिला ने संतान प्राप्ति और विशेष पूजा-पाठ का जिक्र शुरू किया। उसने दावा किया कि खास अनुष्ठान से घर में खुशियां आएंगी और इसी बहाने मिथिलेश को अपने भरोसे में ले लिया। पूजा के नाम पर पहले गले में पहना एक मंगलसूत्र उतरवाया, फिर दूसरा मंगलसूत्र और एक सोने की अंगूठी भी मंगवा ली। जैसे ही मौका मिला, बुजुर्ग महिला जेवर लेकर चुपचाप घर से निकल गई। कुछ देर बाद मिथिलेश को ठगी का एहसास हुआ, लेकिन तब तक आरोपी फरार हो चुकी थी। घटना की खबर फैलते ही कॉलोनी में हड़कंप मच गया। पुलिस जांच में जुटी, सीसीटीवी खंगाले जा रहे सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। हालांकि, पुलिस को यह भी पता चला है कि घर में लगे सीसीटीवी कैमरे पहले ही चोरी हो चुके हैं, जिससे आरोपी की पहचान में दिक्कत आ रही है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अजनबी को घर में प्रवेश देने से पहले सतर्क रहें। विशेष रूप से पूजा-पाठ, संतान सुख या किसी चमत्कार का लालच देने वाले लोगों से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
भारत में हर वर्ष 54 हजार करोड़ का दान:68% लोग किसी न किसी रूप से करते हैं मदद, सर्वाधिक 45.9% दान धार्मिक संस्थाओं को; हाउ इंडिया गिव्स 2025’ की रिपोर्ट

भारत में व्यक्तिगत दान का 45.9% हिस्सा धार्मिक संगठनों को जाता है। 41.8% दान सीधे बेहद गरीब, जरूरतमंद व भिक्षा मांगने वालों को मिलता है। गैर-धार्मिक संगठनों तक सिर्फ 14.9% दान पहुंचता है। यह बात ‘हाउ इंडिया गिव्स’ रिपोर्ट के तीसरे संस्करण में सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में दान का सबसे बड़ा आधार आम घर हैं। कुल घरेलू दान का अनुमान हर साल 54 हजार करोड़ रुपए है। रिपोर्ट के मुताबिक 68% लोगों ने किसी न किसी रूप में देने की बात कही। दान में दिया बहुत सा खाना मुफ्त सामुदायिक रसोइयों तक जाता है। सेवा का सबसे आम रूप धार्मिक संस्थानों में काम है। रिपोर्ट में भारत में घरों के रोजमर्रा के दान का पैमाना, पैटर्न, वजहें बताई गई हैं। बताया गया है कि भारतीय दुनिया के सबसे उदार लोगों में हैं। यह अध्ययन 20 राज्यों में सर्वे पर आधारित है। इसका मकसद यह समझना रहा कि आम लोग नकद, सामान के रूप में मदद, सामाजिक कामों में कैसे योगदान देते हैं। दान किस रूप में 48% खाना, कपड़े, जरूरी वस्तुएं 44% नकद दान 30% समय देकर सेवा ऊंची आय: दान 80%तक 4000–5000 रुपए महीना आय वाले आधे घर दान करते हैं ऊंची आय पर भागीदारी 70 से 80% तक बढ़ जाती है। दान की सबसे बड़ी वजह 90%+ इसे धार्मिक कर्तव्य मानते हैं नैतिक जिम्मेदारी आमने-सामने अपील सबसे असरदार कुल दान में नकद का हिस्सा 44 फीसदी रिपोर्ट में दान के तरीके भी बताए गए हैं। सामान के रूप में मदद का हिस्सा सबसे ज्यादा 46% है। नकद दान 44% है। करीब 30% लोगों ने वॉलंटियरिंग की बात कही। रिपोर्ट के मुताबिक यह दान के रिश्तों और समुदाय आधारित स्वरूप को दिखाता है। रिपोर्ट में दान के तरीके और पैटर्न पर भी हुआ विश्लेषण रिपोर्ट के मुताबिक भारत में रोजमर्रा के घरेलू दान का इकोसिस्टम सालाना करीब 54 हजार करोड़ रुपए का है। रिपोर्ट लॉन्च पर सीएसआईपी की डायरेक्टर और हेड जिनी उप्पल ने कहा कि ‘हाउ इंडिया गिव्स 2025-26’ की रिपोर्ट भारत की उस उदारता को सामने लाती है, जो हमेशा से रही है, पर कम आंकी गई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खपत आंकड़ों के आधार पर विश्लेषण करने से यह समझ आता है कि भारत कैसे दान देता है। यह भी पता चलता है कि देश के विकास की गति के साथ दान कैसे बदलता है। हर आय वर्ग के लोग रोजाना करते हैं दान रिपोर्ट के मुताबिक,रोजमर्रा का दान हर आय वर्ग में होता है। कम खपत स्तर 4 से 5 हजार रुपए महीना पर भी करीब आधे घर दान करते हैं। आय बढ़ने पर भागीदारी तेजी से बढ़ती है। रिपोर्ट ने दानदाताओं के चार प्रकार भी बताए हैं। ग्रासरूट, एस्पिरेशनल, प्रैक्टिकल, वेल-ऑफ गिवर्स। इनकी प्रेरणा, जागरूकता, जुड़ने की पसंद अलग-अलग बताई गई है।








