लंबी कतारों से मिलेगा छुटकारा, सीकर के इस अस्पताल में लगा एक्सरे, दो मिनट में होगी आंखों की जांच

Last Updated:April 05, 2026, 09:01 IST Sikar SK Hospital New Facility: सीकर के एसके अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए नई व्यवस्था शुरू की जा रही है. ट्रोमा सेंटर में एक्स-रे जांच की सुविधा शुरू होने से इमरजेंसी मरीजों को तुरंत राहत मिलेगी और रेडियोलॉजी विभाग पर दबाव कम होगा. साथ ही नेत्र विभाग में नई ऑटो रिफ्रेक्टोमीटर मशीन लगाई जाएगी, जिससे दो मिनट में आंखों की जांच संभव होगी. इन सुविधाओं से मरीजों का समय बचेगा और उन्हें प्राइवेट अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. ख़बरें फटाफट एसके अस्पताल में एक्स-रे और आंखों की जांच सुविधा शुरू सीकर: शेखावाटी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल श्री कल्याण (एसके) हॉस्पिटल में अब मरीजों को और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने जा रही है. अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की बढ़ती संख्या और लंबी कतारों को देखते हुए नई व्यवस्थाएं लागू करने का फैसला लिया है. इसी कड़ी में ट्रोमा सेंटर में एक्स-रे जांच की सुविधा शुरू की जा रही है, जिससे खासतौर पर इमरजेंसी मरीजों को तुरंत राहत मिल सकेगी. अब मरीजों को अलग-अलग विभागों में भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और एक ही छत के नीचे उन्हें आवश्यक जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी. अस्पताल अधीक्षक डॉ. प्रियंका अमन ने बताया कि फिलहाल एक्स-रे जांच की सुविधा केवल एक ही स्थान पर उपलब्ध है, जिससे रेडियोलॉजी विभाग में मरीजों की लंबी कतारें लग जाती है. इस समस्या को ध्यान में रखते हुए ट्रोमा यूनिट में एक्स-रे जांच शुरू की जा रही है. इससे न केवल रेडियोलॉजी कक्ष का दबाव कम होगा, बल्कि दुर्घटना या अन्य आपात स्थिति में आने वाले मरीजों को तुरंत जांच की सुविधा मिल सकेगी. इससे इलाज की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी हो पाएगी और मरीजों को समय पर उपचार मिलना आसान होगा. दो मिनट में आंखों की हो सकेगी जांच अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में भी बड़ी राहत देने की तैयारी की गई है. वर्तमान में चश्मे का नंबर जांचने की सुविधा केवल एक ही जगह होने के कारण मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है. इसे देखते हुए आई डिपार्टमेंट में एक अतिरिक्त ऑटो रिफ्रेक्टोमीटर मशीन लगाने का निर्णय लिया गया है. यह मशीन महज दो मिनट में आंखों की जांच कर सटीक नंबर बता देती है. इससे मरीजों का समय और पैसे दिनों बचेंगे. दो मशीन लगने से उन्हें लाइनों में भी नहीं लगाना पड़ेगा. डॉ. प्रियंका अमन ने बताया कि अस्पताल प्रशासन लगातार मरीजों को अधिक से अधिक सुविधाएं देने के लिए कई नाचार भी किए जा रहे हैं. नई मशीन और ट्रोमा सेंटर में एक्स-रे सुविधा शुरू होने से मरीजों को काफी सहूलियत मिलेगी. खासकर उन मरीजों के लिए यह व्यवस्था बेहद लाभकारी होगी, जिन्हें तुरंत जांच की आवश्यकता होती है. प्राइवेट हॉस्पिटल में जाने की नहीं पड़ेंगी जरूरत सीकर के एसके अस्पताल में एक्स-रे जांच अधिक आसान होने के बाद अब मरीजों को प्राइवेट हॉस्पिटलों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे पहले मरीज को सराय और आंखों की जांच के लिए प्राइवेट हॉस्पिटलों पर निर्भर रहना पड़ता था. इसमें सबसे अधिक परेशानी गरीब और मिडिल क्लास लोगों को आ रही थी. ऐसे में इस समस्या का समाधान निकलते हुए अस्पताल प्रशासन ने दोनों मशीनों की संख्या में बढ़ोतरी की है. About the Author deep ranjan दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें Location : Sikar,Rajasthan First Published : April 05, 2026, 09:01 IST
बाघ के शिकारी अपने बयान से पलटे:बोले- यूरिया से नहीं, बिजली करंट से मारा, खेत में अफीम बचाने बिछाए थे तार

छिंदवाड़ा जिले के तामिया क्षेत्र स्थित छातीआम गांव में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) के रेडियो कॉलर वाले बाघ के शिकार मामले में नया खुलासा हुआ है। अफीम की खेती के मामले में जांच के दौरान गिरफ्तार 5 आरोपियों ने अपने बयान बदलते हुए बताया है कि बाघ की मौत मरे हुए बैल के मांस पर डाले गए यूरिया को खाने से नहीं, बल्कि खेत के चारों तरफ अफीम की खेती बचाने के लिए बिछाए गए तारों के करंट से हुई थी। फिलहाल, वन विभाग को बाघ की मौत का स्पष्ट कारण जानने के लिए लैब रिपोर्ट का इंतजार है और मामले की जांच जारी है। 3 मार्च को मिली थी आखिरी लोकेशन, 23 दिन बाद पहुंची टीम सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के रेडियो कॉलर लगे बाघ की आखिरी लोकेशन 3 मार्च को तामिया के सांगाखेड़ा रेंज के छातीआम गांव में मिली थी। बाघ की कोई हलचल न होने पर 23 दिन बाद एसटीआर के देनवा बफर की टीम गांव पहुंची। वहां बाघ तो नहीं मिला, लेकिन शिकार किया हुआ एक मरा बैल मिला, जिससे टीम को शिकार का संदेह हुआ। टीम ने डॉग स्क्वॉड और रेस्क्यू टीम बुलाकर खोजबीन की तो खेत में अफीम की फसल लगी मिली। इसके बाद वन विभाग और एसटीआर ने 27 मार्च को छातीआम निवासी उदेसिंग, उसके बेटे मनक सिंह सहित 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पहले यूरिया डालकर मारने की बात मानी, अब पलटे प्रारंभिक जांच में आरोपियों ने बताया था कि उन्होंने मृत बैल के शरीर पर यूरिया डाल दिया था, जिसे खाने से बाघ की मौत हुई। वन अधिकारियों ने भी इसे मान लिया था और पोस्टमार्टम के बाद प्रेस नोट में यही बात दोहराई थी। 28 मार्च को एसटीआर फील्ड डायरेक्टर ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) को यही रिपोर्ट भेजी थी। लेकिन अब तामिया एसडीओ सीमा ठाकुर द्वारा दर्ज किए गए धारा 50 के बयानों में आरोपियों ने बताया कि बाघ की मौत यूरिया से नहीं, बल्कि अफीम की खेती के चारों तरफ तार से फैलाए गए करंट की चपेट में आने से हुई है। 23 दिन की देरी पर उठे सवाल, मॉनिटरिंग लॉग ऑडिट की मांग बाघ के शिकार मामले में वन विभाग की टीम की मॉनिटरिंग पर सवाल उठ रहे हैं। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने कहा कि बाघिन के रेडियो कॉलर से तीन मार्च से कोई हलचल नहीं हो रही थी। सवाल यह है कि 23 दिनों तक मॉनिटरिंग टीम ने इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने मांग की है कि एनटीसीए द्वारा पिछले 30 दिनों के मॉनिटरिंग लॉग का ऑडिट किया जाए। अफसर बोले- लैब रिपोर्ट से स्पष्ट होगा मौत का कारण एसटीआर फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया, “बाघ के शिकारियों ने पहले मरे हुए बैल के मांस पर यूरिया डालने की बात कहीं थी। जिसे खाने से बाघ की मौत हुई। बाघ की मौत कैसे हुई, यह लैब से रिपोर्ट आने के बाद ही क्लियर होगी। डॉक्टर ने पोस्टमार्टम के दौरान सैंपल लिए गए। यूरिया खाने, इलेक्ट्रिक करंट या अन्य कारणों से मौत हुई। वो लैब रिपोर्ट स्पष्ट होगा।” वहीं, पश्चिम छिंदवाड़ा वन मंडल के डीएफओ साहिल गर्ग ने कहा, “आरोपितों के बयान लिए गए हैं। आरोपितों ने यह स्वीकार किया है कि करंट लगने से बाघ की मौत हुई। अभी इस मामले की जांच जारी है।”
पुरुषों को 30 की उम्र से ही हार्ट डिजीज का खतरा ! युवा बिल्कुल नजरअंदाज न करें ये 5 सबसे बड़े कारण

Last Updated:April 05, 2026, 08:15 IST Heart Disease Risk in Men: एक नई रिसर्च में पता चला है कि पुरुषों में दिल की बीमारी का खतरा 35 साल की उम्र के आसपास तेजी से बढ़ने लगता है. यह समस्या बिना लक्षण के शुरू होती है, इसलिए साइलेंट किलर का काम कर सकती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि पुरुषों को 30 की उम्र से ही नियमित हार्ट चेकअप कराना चाहिए. युवाओं में हार्ट डिजीज की समस्या तेजी से बढ़ रही है. Heart Disease in Young Age: अधिकतर लोगों को लगता है कि हार्ट डिजीज का खतरा 40-50 की उम्र के बाद ज्यादा होता है, लेकिन एक नई स्टडी के अनुसार बड़ी संख्या में पुरुषों में 30 की उम्र से ही हार्ट डिजीज डेवलप होने लगती है. धीरे-धीरे यह बीमारी बढ़ती रहती है और लोग इसे नजरअंदाज करते रहते हैं. जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में प्रकाशित रिसर्च की मानें तो पुरुषों में दिल की बीमारी का खतरा 35 साल की उम्र के आसपास तेजी से बढ़ने लगता है. यह खतरा बिना लक्षण के पैदा हो जाता है, जिससे समय रहते इसकी पहचान नहीं हो पाती है. इसकी वजह से तमाम लोग अपनी जान गंवा देते हैं. इस स्टडी में 5000 से अधिक वयस्कों को 30 साल से ज्यादा समय तक ट्रैक किया गया. शोधकर्ताओं ने पाया कि 35 साल के बाद पुरुषों और महिलाओं के बीच दिल की बीमारी के रिस्क में साफ अंतर दिखने लगता है. पुरुषों में यह रिस्क तेजी से बढ़ता है और मिडिल एज तक महिलाओं की तुलना में अधिक बना रहता है. पुरुषों में हार्ट डिजीज का खतरा महिलाओं की तुलना में लगभग 7 साल पहले 5% तक पहुंच जाता है. कोरोनरी हार्ट डिजीज के मामले में यह अंतर और भी ज्यादा गंभीर पाया गया. पुरुषों में इसका खतरा महिलाओं की तुलना में 10 साल पहले दिखाई देने लगता है, जो इस बात का संकेत है कि उनकी ब्लड वेसल्स में नुकसान जल्दी शुरू हो जाता है. यह अंतर ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, स्मोकिंग, मोटापा और शारीरिक गतिविधि जैसे फैक्टर्स को ध्यान में रखने के बाद भी बना रहता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. भारतीय एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह स्थिति भारत में अत्यधिक गंभीर हो सकती है. AIIMS के कार्डियोलॉजी प्रोफेसर डॉ. अंबुज रॉय ने TOI को बताया कि अब दिल की बीमारी को केवल मिडिल एज की समस्या मानना गलत है. भारत में रिस्क फैक्टर्स 30 की उम्र में ही दिखने लगते हैं, इसलिए डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की जांच जल्दी शुरू करना जरूरी है. दक्षिण एशियाई लोगों में दिल की बीमारी का खतरा पश्चिमी देशों की तुलना में पहले सामने आता है. वहीं महिलाओं में यह जोखिम मेनोपॉज के बाद तेजी से बढ़ता है, लेकिन अक्सर इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है. इसलिए जरूरी है कि 30 की उम्र से ही नियमित जांच, सही जीवनशैली और जागरूकता पर ध्यान दिया जाए, ताकि दिल की बीमारियों से समय रहते बचाव किया जा सके. डॉक्टर्स साफ कहते हैं कि युवाओं को हार्ट डिजीज से बचने के लिए अपनी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना चाहिए. रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम या कोई फिजिकल एक्टिविटी करें, संतुलित और हेल्दी आहार लें जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और हेल्दी फैट शामिल हों. जंक फूड, ज्यादा नमक और शुगर से दूरी बनाए रखें. धूम्रपान और शराब जैसी आदतों से बचें, क्योंकि ये दिल के लिए बेहद नुकसानदायक हैं. साथ ही तनाव को मैनेज करना, पर्याप्त नींद लेना और समय-समय पर ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना भी जरूरी है. छोटी-छोटी अच्छी आदतें अपनाकर युवा लंबे समय तक दिल को स्वस्थ रख सकते हैं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 05, 2026, 08:15 IST
कानपुर किडनी कांड का मास्टरमाइंड बोला- करोड़ों फेंक देते हैं:एजेंट से बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली; कन्नौज का डॉक्टर पकड़ाया

कानपुर के चर्चित किडनी कांड के मास्टरमाइंड शिवम अग्रवाल के मोबाइल से पुलिस को कॉल रिकॉर्डिंग मिली है। डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक, यह रिकॉर्डिंग उसने गिरोह में शामिल प्रयागराज के रहने वाले नवीन पांडेय को भेजी थी। ऑडियो में नवीन, शिवम से प्रयागराज के ही दलाल साहिल का जिक्र कर रहा है। वह कहता है कि साहिल ने तुम्हारा नाम लेकर 22 लाख रुपए ले लिए हैं। इस पर शिवम कहता है- उसे नहीं पता कि शिवम और डॉ. रोहित क्या चीज हैं, हम लोग करोड़ों रुपए ऐसे ही फेंक देते हैं। इस बीच पुलिस टीम शनिवार शाम नवीन पांडेय के प्रयागराज स्थित घर पहुंची, लेकिन वह नहीं मिला। इधर, पुलिस ने शिवम की पत्नी को रावपुर थाने पूछताछ के लिए बुलाया। उसने बताया कि नवीन गाजियाबाद के रहने वाले डॉ. रोहित के साथ 4-5 साल से काम कर रहा है। शिवम तो एक साल से ही डॉ. रोहित से जुड़ा था। पुलिस सोमवार को जिला कोर्ट में अप्लीकेशन देकर शिवम की रिमांड मांगेगी। पुलिस के मुताबिक, यह रिकॉर्डिंग पिछले साल दिसंबर महीने की है। हालांकि, पुलिस ने इसे सार्वजनिक नहीं किया है। किडनी कांड में अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। कन्नौज के डॉक्टर को पुलिस ने हिरासत में लिया पुलिस के अनुसार, रिकॉर्डिंग में शिवम एक महिला का जिक्र कर रहा है। वह कहता है कि जिस महिला को हम दिल्ली लेकर आए थे, उसे द्वारका के मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया था, वह मर गई। इस पर नवीन कहता है कि महिला को एंबुलेंस से लेकर जाना चाहिए था, तुम लोग उसे स्कॉर्पियो से लेकर चले गए। स्कॉर्पियो में कोई मेडिकल व्यवस्था होती है क्या? पुलिस के मुताबिक, ऑडियो में जिस महिला का जिक्र है, उसका दिसंबर महीने में मेडिलाइफ हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे आनन-फानन में दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पुलिस ने महिला की मौत के मामले में कन्नौज के रहने वाले डॉ. रोहन को शनिवार को हिरासत में ले लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है। हॉस्पिटल के दो अन्य पार्टनर औरैया निवासी डॉ. नरेंद्र और कन्नौज के डॉ. संदीप अभी फरार हैं। साहिल ने किडनी के नाम पर 20 लाख ठगे पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि शिवम अग्रवाल की तरह साहिल भी डॉ. रोहित के लिए काम करता था। जांच में सामने आया कि एक महिला को किडनी की जरूरत थी। साहिल ने उससे संपर्क कर कहा कि डॉ. रोहित ट्रांसप्लांट के लिए 40 लाख लेते हैं, लेकिन वह 20 लाख रुपए में किडनी ट्रांसप्लांट करा देगा। इसके बाद वह महिला से 20 लाख रुपए लेकर फरार हो गया। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि साहिल की तलाश में चित्रकूट और प्रयागराज में छापेमारी की जा रही है। अब तक गिरोह में जिन डॉक्टरों के नाम सामने आए हैं, उनमें कोई भी सर्जन नहीं है। गिरोह में शामिल डॉ. रोहित एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, डॉ. वैभव डेंटिस्ट, डॉ. अनुराग अल्फा हॉस्पिटल संचालक, डॉ. अफजल फिजिशियन और डॉ. अली ओटी टेक्नीशियन हैं। बीए पास भूपेंद्र बना डॉक्टर ऑफ मेडिसिन डीसीपी ने बताया कि शुक्रवार को शिवम की पत्नी से करीब 6 घंटे तक पूछताछ की गई। इस दौरान उसने हैलट के सामने स्थित रमाशिव हॉस्पिटल के मैनेजर भूपेंद्र सिंह का नाम लिया। भूपेंद्र सिंह डॉ. रोहित के संपर्क में था। पुलिस ने जब उससे पूछताछ की तो उसने बताया कि उसने लखनऊ में एसजीपीजीआई के सामने एक निजी अस्पताल बनवाया है। डीसीपी वेस्ट के अनुसार, भूपेंद्र के विजिटिंग कार्ड पर एमडी (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन) लिखा था। पूछने पर उसने बताया कि एमडी का मतलब मैनेजिंग डायरेक्टर है। वह डॉ. रोहित के संपर्क में था। डॉ. रोहित ने उससे अपने अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट कराने को कहा था, लेकिन उसने ट्रांसप्लांट नहीं कराया। मेडिलाइफ के संचालक रोहन, नरेंद्र और अजय से भी पूछताछ की जा रही है। मेरठ का ट्रैवल एजेंट फर्जी नाम से बुक करता था कारें डॉ. अनुराग उर्फ अमित ने की थीं दो शादियां स्कैंडल से जुड़े डॉ. अनुराग की तलाश में पुलिस टीम मेरठ पहुंची। जांच में सामने आया कि मेरठ का अल्फा हॉस्पिटल डॉ. अनुराग के नाम पर है। वह फिजियोथेरेपिस्ट है और उसने दो शादियां की हैं। पुलिस टीम उसकी पहली पत्नी के घर पहुंची, लेकिन वह वहां नहीं मिला। पुलिस उसकी दूसरी पत्नी की लोकेशन तलाश रही है। अब जानिए मेडिलाइफ हॉस्पिटल से कैसे जुड़े तार डीसीपी आबिदी ने बताया कि ओटी टेक्नीशियन राजेश कुमार और कुलदीप सिंह राघव ने पूछताछ में कहा था कि उन्होंने सभी ऑपरेशन आहूजा हॉस्पिटल में किए थे, लेकिन दोनों के मोबाइल की जांच में शहर के कई अन्य अस्पतालों के नंबर मिले। इनमें मसवानपुर स्थित मेडिलाइफ हॉस्पिटल भी शामिल है। ————————– अब भास्कर के सबसे बड़े सर्वे में हिस्सा लीजिए… यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए… ———————— ये खबर भी पढ़ें… OT टेक्नीशियन ने निकाली थी MBA स्टूडेंट की किडनी:कानपुर में ट्रांसप्लांट किया; मेरठ के 3 डॉक्टरों के भी नाम सामने आए कानपुर में MBA स्टूडेंट आयुष की किडनी किसी डॉक्टर ने नहीं, बल्कि एक ओटी टेक्नीशियन ने निकाली थी। उसी ने पारुल तोमर को किडनी ट्रांसप्लांट भी किया था। डीसीपी एसएम कासिम आबिदी ने यह जानकारी दैनिक भास्कर को दी। उन्होंने बताया- आरोपी ओटी टेक्नीशियन मुदस्सर अली सिद्दीकी दिल्ली के उत्तम नगर का रहने वाला है। उसके घर पर दबिश दी गई, लेकिन वह फरार मिला। जिस मेडिलाइफ हॉस्पिटल में वह काम करता था, उसके तीनों मालिक भी फरार हैं। पढ़ें पूरी खबर
विदिशा में आज 3 घंटे बिजली कटौती:मुखर्जीनगर फीडर पर मेंटेनेंस से; विवेकानंद चौराहा, सांई श्रद्धा कॉलोनी सहित कई इलाके प्रभावित होंगे

विदिशा में आज रविवार को बिजली उपभोक्ताओं को तीन घंटे की विद्युत कटौती का सामना करना पड़ेगा। 11 केवी मुखर्जीनगर फीडर पर आवश्यक मेंटेनेंस कार्य के कारण सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक बिजली आपूर्ति बंद रहेगी, जिससे शहर के कई इलाके प्रभावित होंगे। बिजली कंपनी के जोन-1 के अधिकारियों ने बताया कि यह कटौती निर्धारित समय पर की जाएगी। मेंटेनेंस कार्य के दौरान विद्युत सप्लाई पूरी तरह बंद रखी जाएगी ताकि सुरक्षा और कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। इस विद्युत कटौती से विवेकानंद चौराहा, सांई श्रद्धा कॉलोनी, अनुपम मेगा सिटी, शास्त्री नगर, सांची रोड, नाना का बाग और भगत सिंह कॉलोनी सहित आसपास के क्षेत्र प्रभावित होंगे। बिजली कंपनी के अनुसार, यह कार्य लाइन की मरम्मत और विद्युत आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है। अधिकारियों ने उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील की है और बताया है कि आवश्यकतानुसार समय में परिवर्तन भी किया जा सकता है।
सिवनी में जेबकतरा गिरफ्तार:मंदिर से श्रद्धालु का उड़ाया था पर्स, 17 हजार लेकर हुआ था फरार

सिवनी जिले में सक्रिय जेबकतरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत कोतवाली पुलिस ने शनिवार की रात एक शातिर चोर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के पास से चोरी की नकदी और पर्स बरामद किया। कोतवाली थाना प्रभारी सतीश तिवारी ने बताया कि 2 अप्रैल 2026 को सिवनी निवासी अमित राजपूत (42) ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि हनुमान प्रकटोत्सव के दौरान बालस्वरूप हनुमान मंदिर में पूजा करते समय रात करीब 8 बजे किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी जेब से लगभग 17 हजार रुपए चुरा लिए थे। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना स्तर पर एक टीम गठित की गई। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास पूछताछ, संदिग्धों की गतिविधियों का विश्लेषण और तकनीकी साक्ष्यों का उपयोग किया। इसके आधार पर सिवनी के टिग्गा मोहल्ला निवासी इस्लाम खान (30) की पहचान संदिग्ध के रूप में हुई। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने चोरी की वारदात को अंजाम देना स्वीकार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने चोरी की गई राशि में से कुछ पैसे खर्च कर दिए थे। उसके पास से 7,250 रुपये नकद और एक पर्स बरामद किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी इस्लाम खान के खिलाफ पहले भी कोतवाली थाने में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज है। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी सतीश तिवारी के नेतृत्व में प्रधान आरक्षक संजय यादव, मनोज पाल, मुकेश चौरिया और राजेंद्र राजपूत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे भीड़भाड़ वाले आयोजनों में सतर्क रहें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
गर्मी में भूलकर भी नहीं रखें फ्रिज में ये चीजें, फायदे की जगह हो जाएगा नुकसान, हेल्थ एक्सपर्ट से जानें

Last Updated:April 05, 2026, 07:03 IST Health tips: गर्मी का मौसम शुरू होते ही लोग ठंडी चीजें ज्यादा खाने लगते हैं. घर में रखा फ्रिज इस मौसम में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीज बन जाता है. कई लोग खाने-पीने की लगभग हर चीज फ्रिज में रख देते हैं, ताकि वह ज्यादा समय तक ताजा रहे. लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि कुछ चीजें फ्रिज में रखना नुकसानदायक हो सकता है. खरगोन हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. संतोष मौर्य (आयुर्वेद विशेषज्ञ) बताते हैं कि हर चीज को ठंडा रखना जरूरी नहीं होता. कई फल और सब्जियां फ्रिज में रखने से उनके पोषक तत्व कम हो जाते हैं. इससे शरीर को फायदा मिलने की जगह नुकसान हो सकता है. इसलिए गर्मी में खाने की चीजों को सही तरीके से रखना जरूरी है. ब्रेड को भी अक्सर लोग फ्रिज में रख देते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं माना जाता. फ्रिज में रखने से ब्रेड जल्दी सूख जाती है और उसका स्वाद भी खराब हो जाता है. लंबे समय तक ऐसी ब्रेड खाने से पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है. टमाटर को फ्रिज में रखने से उसका स्वाद और प्राकृतिक गुण कम हो जाते हैं. ठंडे तापमान में टमाटर जल्दी खराब भी हो सकता है. इसलिए टमाटर को सामान्य तापमान पर खुले स्थान पर रखना ज्यादा सही माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google केले, आम और पपीता जैसे फलों को भी फ्रिज में रखने से बचना चाहिए. फ्रिज में रखने से ये फल जल्दी काले पड़ जाते हैं और इनमें मौजूद पोषक तत्व कम हो जाते हैं. ऐसे फल सामान्य जगह पर रखने से ज्यादा समय तक अच्छे रहते हैं. तरबूज को भी पूरा का पूरा फ्रिज में रखना सही नहीं माना जाता. इससे उसका स्वाद बदल सकता है. तरबूज काटने के बाद ही फ्रिज में रखें और जल्दी उपयोग करें. इससे शरीर को सही पोषण मिलता है और पेट की समस्या से बचाव होता है. लहसुन, प्याज और आलू जैसी चीजों को भी फ्रिज में रखने से नुकसान हो सकता है. फ्रिज में रखने से इनका स्वाद बदल जाता है और इनमें नमी बढ़ जाती है. इससे ये जल्दी खराब हो सकते हैं और स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है. तेल को भी फ्रिज में रखना सही नहीं माना जाता. ठंडे तापमान में तेल गाढ़ा हो जाता है और उसकी गुणवत्ता बदल सकती है. इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि गर्मी में भी कुछ चीजों को सामान्य तापमान पर ही रखना चाहिए, ताकि शरीर स्वस्थ बना रहे. First Published : April 05, 2026, 07:03 IST
जोधपुर में रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत, 8 करोड़ की मशीन से कैंसर ऑपरेशन अब शहर में संभव – News18 हिंदी

X जोधपुर में शुरू हुई रोबोटिक सर्जरी, 8 करोड़ की मशीन से कैंसर ऑपरेशन अब संभव Jodhpur Cancer Robotic Surgery: जोधपुर के विनायका अस्पताल में स्वदेशी रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत से स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव आया है. 8 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित इस तकनीक से अब कैंसर सहित कई जटिल ऑपरेशन शहर में ही संभव हो गए हैं. डेढ़ महीने में 13 सफल सर्जरी इसके बेहतर परिणाम का संकेत हैं. अस्पताल ने 8 डॉक्टरों और 12 स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण देकर इस सुविधा को मजबूत बनाया है. डॉ. प्रदीप शर्मा के नेतृत्व में टीम पहले ही 5000 से अधिक कैंसर ऑपरेशन कर चुकी है. अब रोबोटिक तकनीक से मरीजों को कम दर्द, जल्दी रिकवरी और कम खर्च का लाभ मिल रहा है. RGHS योजना से जुड़ने के कारण आम लोगों की पहुंच भी बढ़ी है. इस पहल से मारवाड़ के मरीजों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
क्रिकेट खेलते-खेलते 3 दोस्तों ने साफ कर दी नदी:पॉकेट मनी से ग्लव्स-जूते खरीदे, लोग मजाक उड़ाते तो भी जुटे रहते, अब देश–दुनिया में चर्चा

भोपाल से 119 किलोमीटर दूर ब्यावरा के 3 दोस्तों की इन दिनों देश-दुनिया में चर्चा है। 20 और 18-18 साल के तीनों दोस्त एक ही मोहल्ले में रहते हैं। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर, जब लोग ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान कर रहे थे, तब इन्होंने अजनार नदी की सफाई का संकल्प लिया। तीनों को तैरना नहीं आता, फिर भी नदी में उतर गए। रोजमर्रा के काम की रील बनाकर अपलोड करने लगे। लोग ट्रोल करते और मजाक बनाते रहे, लेकिन ये हर दिन क्रिकेट खेलने का कहकर निकलते और नदी से गंदगी निकालते रहे। फरवरी-मार्च में परीक्षा के दौरान भी ये रोज सफाई करते रहे। नदी के एक घाट पर, जहां पहले कचरे का पहाड़ था, वहां अब इन्होंने पुताई कर दी है। वहां लोग घूमने आने लगे हैं। बीते दिनों मशहूर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने इनके काम को सराहा, तो देश-दुनिया की नजर इन पर पड़ी। कुछ लोगों ने कहा कि ये सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए ऐसा कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ब्यावरा पहुंचा और असली तस्वीर समझी। बिट्टू ने दिया नदी सफाई का आइडिया भास्कर की टीम जब ब्यावरा पहुंची तो तीनों दोस्त एक स्कूटी पर सवार होकर नदी के घाट जाने की तैयारी कर रहे थे। अब ये शहर में फेमस चेहरे हो गए हैं। सबसे मुख्य किरदार है बिट्टू तबाही उर्फ सुरेंद्र चौधरी। दो अन्य किरदार हैं कृष्णा वर्मा और कृष्णा अग्रवाल। बातचीत की शुरूआत करते हुए कृष्णा ने बताया कि ये आयडिया बिट्टू का था। 26 जनवरी को बिट्टू ने कहा कि क्यों न हम कुछ ऐसा करें कि लोगों को लगे कि हमने कुछ बदलाव लाया है। हम यहां क्रिकेट खेलने आते थे। कई बार घाट पर बैठने का मन करता था लेकिन इतनी गंदगी होती थी कि बैठ नहीं पाते थे। उसके बाद से हम लोग अबतक 3 घाटों की सफाई कर चुके हैं। लोग मजाक उड़ाते थे लेकिन हम जुटे रहे कृष्णा की बात को आगे बढ़ाते हुए बिट्टू ने कहा कि हमने नदी सफाई की बात सोच तो ली, लेकिन दिक्कत ये थी हम तीनों को तैरना नहीं आता था। फिर भी हम पीछे नहीं हटे। हमने ग्लव्स, जूते और एक जाल का इंतजाम किया। फिर कचरा खींचने के लिए एक टूल बनवाया। 26 जनवरी के बाद एक दिन ऐसा नहीं गुजरा कि हम घाट पर न आएं हों। एक बार नदी में काम करते हुए मेरे पैरों पर सांप आ गया था। मेरे दोस्त कृष्णा ने मुझे बताया। वो तो अच्छा हुआ कि मैं बड़े जूते पहना हुआ था। पैसों का इंतजाम कैसे करते हो? इस सवाल पर बिट्टू ने कहा कि पॉकेट मनी को बचाकर अपने लिए हाथ में पहनने वाले दस्ताने, जूते और जाल खरीदते हैं। कई बार सोशल मीडिया पर भी हमें थोड़ी मदद मिली है। अब तक हम सफाई में अपने करीब 30 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। हमें जब कोई काम करना है तो हम 15 दिन से उसके लिए पैसे जोड़ते हैं। ड्रम, पेंट और बाकी टूल पर अब तक 30 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। स्किन इंफेक्शन हुआ, कई बार बुखार भी आया गंदगी के कारण तीनों लड़कों को हाथ-पैरों में स्किन इंफेक्शन भी हो गया है। वे कहते हैं कि कई बार बुखार भी आ जाता है। हमें भी पता है कि ये सब गंदे पानी में ज्यादा समय तक रहने के कारण ही हो रहा है। लेकिन एक बार यदि हम इसे साफ करने में आगे बढ़ गए तो शहर के लिए ये बहुत बड़ा काम हो जाएगा। बिट्टू कहता है नदी से जो कचरा निकला है, वो हमने फेंका नहीं है। घाट के पास ही इसे दबाकर रखा है। हम चाहते हैं कि इस कचरे को रीसाइकिल करके कहीं इस्तेमाल किया जा सके। आजकल तो सड़क बनाने में भी प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल हो रहा है। परीक्षाओं के दौरान भी काम करते रहे बिट्टू के दूसरे साथी कृष्णा वर्मा और कृष्णा अग्रवाल दोनों बारहवीं क्लास में पढ़ रहे थे। फरवरी-मार्च में उनकी परीक्षाएं भी थीं। हमने पूछा परीक्षाओं के दौरान कैसे काम किया? तो जवाब मिला कि इस दौरान भी रोजाना शाम को घाट पर आते थे। एक भी दिन हम इस काम से गैरहाजिर नहीं रहे। घर वालों को भी कभी नहीं बताया। घर वाले जब भी पूछते तो यही कहते कि थोड़ा रिलेक्स होने के लिए खेलने जा रहे हैं। मां-पिता से कहकर निकलते-क्रिकेट खेलने जा रहे हैं बिट्टू और कृष्णा कहते हैं कि वो बीते दो ढाई महीने से नदी की सफाई के रील सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अपलोड कर रहे हैं। लेकिन उनके माता–पिता सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करते। उन्हें कभी ये पता नहीं लगा कि वे क्या करते हैं? हम तो घर से यही कहकर निकलते हैं कि हम क्रिकेट खेलने जा रहे हैं। हां, बीते कुछ दिनों से जब से महिंद्रा जी ने हमारे काम की सोशल मीडिया पर तारीफ की है, तब से कई लोग हमसे अच्छे से बात करते हैं। कलेक्टर ने भी हमें बुलाकर सम्मान किया। स्थानीय विधायक ने भी हमें बुलाया है। प्रशासन भी अब इन घाटों पर जेसीबी से कचरा हटवाने में जुट गया है। 15 नाले, पूरे शहर का सीवरेज और कचरा भी इसी नदी में ब्यावरा शहर के बीचों बीच से बहने वाली ये नदी प्लास्टिक कचरे से अटी पड़ी है। जहां नजर डालो वहीं से सीवरेज मिलता दिख रहा है। इन लड़कों ने बीते दो महीने में नदी के 3 घाटों पर तस्वीर बदलने की कोशिश की है। इन्होंने घाट की सीढ़ियों की सफाई करके यहां पुताई की। घाटों पर कचरा न फेंके के पोस्टर लगाए वहीं घाट पर कचरा फेंकने के लिए दो ड्रम रखे। तीनों दोस्त रोज ड्रम का कचरा खाली करते हैं, लोगों से कहते हैं कचरा बाहर न फेंके। इनकी कोशिश के बाद अब सरकारी अमला भी एक्टिव होता दिख रहा है। नगर पालिका ब्यावरा के सीएमओ इकरार अहमद अपनी टीम के साथ ऐसे ही एक घाट पर पहुंचे थे। अहमद कहते हैं कि अजनार नदी का उद्गम स्थल यहां से 15 किलोमीटर दूर है। पूरे शहर का सीवरेज और छोटे-बड़े नालों की गंदगी नदी में मिलती है। सीवरेज को इसमें मिलने से रोकने
गर्मी में गर्भवती महिलाएं इन बातों का रखें खास ख्याल! डाइटिशियन से जानें, क्या खाएं, क्या बचें और कैसे रहें स्वस्थ

जमशेदपुर: गर्मी का मौसम शुरू होते ही आम लोगों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का खास ख्याल रखने की जरूरत ज्यादा हो जाती है. इस दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन, कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. ऐसे में सही खान-पान और दिनचर्या बेहद जरूरी हो जाती है. आइये जानते हैं गर्भवती महिलाएं ऐसे में क्या करें. जमशेदपुर की डाइटिशियन बीवा रंजन ने बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान गर्मी में एक बार में ज्यादा खाना खाने के बजाय थोड़े-थोड़े अंतराल पर भोजन करना ज्यादा फायदेमंद होता है. हर 2 से 3 घंटे में हल्का भोजन लेने से पेट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता और शरीर को लगातार ऊर्जा मिलती रहती है. हाइड्रेशन का रखें खास ध्यान गर्मी में सबसे बड़ी समस्या पानी की कमी होती है. इसलिए दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है. इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और ताजे फलों का जूस जैसे तरबूज का जूस शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है. सुबह का नाश्ता हो हल्का और पौष्टिक सुबह के समय फल खाना सबसे अच्छा माना जाता है. तरबूज, खरबूजा, सेब, केला जैसे फल शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल्स देते हैं. साथ ही आप हल्का दलिया, ओट्स या दूध भी ले सकती हैं. दोपहर का भोजन संतुलित रखें दोपहर में रोटी, चावल और दाल का संतुलित सेवन करें. इसके साथ हरी सब्जियां और सलाद जरूर शामिल करें. सलाद में खीरा, टमाटर, गाजर जैसी चीजें शरीर को ठंडक देती हैं और पाचन को बेहतर बनाती हैं. शाम के समय हेल्दी स्नैक्स लें शाम को भारी तली-भुनी चीजों से बचें. इसके बजाय सॉटेड पनीर, चना (चिकपी) सलाद या स्प्राउट्स खा सकती हैं. ये प्रोटीन से भरपूर होते हैं और मां व बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद हैं. रात का खाना हल्का रखें रात में हल्का भोजन जैसे खिचड़ी, दाल-चावल या हल्की सब्जी के साथ रोटी लेना बेहतर होता है. ज्यादा भारी खाना पचने में दिक्कत दे सकता है और नींद भी खराब कर सकता है. लाइफस्टाइल का भी रखें ध्यान गर्मी में ज्यादा मेहनत या हार्ड वर्क से बचना चाहिए. हल्की-फुल्की वॉक करना शरीर के लिए अच्छा रहता है. ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें और तेज धूप में बाहर निकलने से बचें. जानें क्या न करें बहुत ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और बाहर का खाना अवॉयड करें. कैफीन और ज्यादा मीठे पेय पदार्थ भी कम लें. अंत में गर्मी के मौसम में प्रेग्नेंट महिलाओं को संतुलित डाइट, पर्याप्त पानी और आरामदायक दिनचर्या अपनाकर खुद को स्वस्थ रखना चाहिए. इससे मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है.








