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बाघ के शिकारी अपने बयान से पलटे:बोले- यूरिया से नहीं, बिजली करंट से मारा, खेत में अफीम बचाने बिछाए थे तार

बाघ के शिकारी अपने बयान से पलटे:बोले- यूरिया से नहीं, बिजली करंट से मारा, खेत में अफीम बचाने बिछाए थे तार

छिंदवाड़ा जिले के तामिया क्षेत्र स्थित छातीआम गांव में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) के रेडियो कॉलर वाले बाघ के शिकार मामले में नया खुलासा हुआ है। अफीम की खेती के मामले में जांच के दौरान गिरफ्तार 5 आरोपियों ने अपने बयान बदलते हुए बताया है कि बाघ की मौत मरे हुए बैल के मांस पर डाले गए यूरिया को खाने से नहीं, बल्कि खेत के चारों तरफ अफीम की खेती बचाने के लिए बिछाए गए तारों के करंट से हुई थी। फिलहाल, वन विभाग को बाघ की मौत का स्पष्ट कारण जानने के लिए लैब रिपोर्ट का इंतजार है और मामले की जांच जारी है। 3 मार्च को मिली थी आखिरी लोकेशन, 23 दिन बाद पहुंची टीम सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के रेडियो कॉलर लगे बाघ की आखिरी लोकेशन 3 मार्च को तामिया के सांगाखेड़ा रेंज के छातीआम गांव में मिली थी। बाघ की कोई हलचल न होने पर 23 दिन बाद एसटीआर के देनवा बफर की टीम गांव पहुंची। वहां बाघ तो नहीं मिला, लेकिन शिकार किया हुआ एक मरा बैल मिला, जिससे टीम को शिकार का संदेह हुआ। टीम ने डॉग स्क्वॉड और रेस्क्यू टीम बुलाकर खोजबीन की तो खेत में अफीम की फसल लगी मिली। इसके बाद वन विभाग और एसटीआर ने 27 मार्च को छातीआम निवासी उदेसिंग, उसके बेटे मनक सिंह सहित 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पहले यूरिया डालकर मारने की बात मानी, अब पलटे प्रारंभिक जांच में आरोपियों ने बताया था कि उन्होंने मृत बैल के शरीर पर यूरिया डाल दिया था, जिसे खाने से बाघ की मौत हुई। वन अधिकारियों ने भी इसे मान लिया था और पोस्टमार्टम के बाद प्रेस नोट में यही बात दोहराई थी। 28 मार्च को एसटीआर फील्ड डायरेक्टर ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) को यही रिपोर्ट भेजी थी। लेकिन अब तामिया एसडीओ सीमा ठाकुर द्वारा दर्ज किए गए धारा 50 के बयानों में आरोपियों ने बताया कि बाघ की मौत यूरिया से नहीं, बल्कि अफीम की खेती के चारों तरफ तार से फैलाए गए करंट की चपेट में आने से हुई है। 23 दिन की देरी पर उठे सवाल, मॉनिटरिंग लॉग ऑडिट की मांग बाघ के शिकार मामले में वन विभाग की टीम की मॉनिटरिंग पर सवाल उठ रहे हैं। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने कहा कि बाघिन के रेडियो कॉलर से तीन मार्च से कोई हलचल नहीं हो रही थी। सवाल यह है कि 23 दिनों तक मॉनिटरिंग टीम ने इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने मांग की है कि एनटीसीए द्वारा पिछले 30 दिनों के मॉनिटरिंग लॉग का ऑडिट किया जाए। अफसर बोले- लैब रिपोर्ट से स्पष्ट होगा मौत का कारण एसटीआर फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया, “बाघ के शिकारियों ने पहले मरे हुए बैल के मांस पर यूरिया डालने की बात कहीं थी। जिसे खाने से बाघ की मौत हुई। बाघ की मौत कैसे हुई, यह लैब से रिपोर्ट आने के बाद ही क्लियर होगी। डॉक्टर ने पोस्टमार्टम के दौरान सैंपल लिए गए। यूरिया खाने, इलेक्ट्रिक करंट या अन्य कारणों से मौत हुई। वो लैब रिपोर्ट स्पष्ट होगा।” वहीं, पश्चिम छिंदवाड़ा वन मंडल के डीएफओ साहिल गर्ग ने कहा, “आरोपितों के बयान लिए गए हैं। आरोपितों ने यह स्वीकार किया है कि करंट लगने से बाघ की मौत हुई। अभी इस मामले की जांच जारी है।”

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छिंदवाड़ा जिले के तामिया क्षेत्र स्थित छातीआम गांव में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) के रेडियो कॉलर वाले बाघ के शिकार मामले में नया खुलासा हुआ है। अफीम की खेती के मामले में जांच के दौरान गिरफ्तार 5 आरोपियों ने अपने बयान बदलते हुए बताया है कि बाघ की मौत मरे हुए बैल के मांस पर डाले गए यूरिया को खाने से नहीं, बल्कि खेत के चारों तरफ अफीम की खेती बचाने के लिए बिछाए गए तारों के करंट से हुई थी। फिलहाल, वन विभाग को बाघ की मौत का स्पष्ट कारण जानने के लिए लैब रिपोर्ट का इंतजार है और मामले की जांच जारी है। 3 मार्च को मिली थी आखिरी लोकेशन, 23 दिन बाद पहुंची टीम सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के रेडियो कॉलर लगे बाघ की आखिरी लोकेशन 3 मार्च को तामिया के सांगाखेड़ा रेंज के छातीआम गांव में मिली थी। बाघ की कोई हलचल न होने पर 23 दिन बाद एसटीआर के देनवा बफर की टीम गांव पहुंची। वहां बाघ तो नहीं मिला, लेकिन शिकार किया हुआ एक मरा बैल मिला, जिससे टीम को शिकार का संदेह हुआ। टीम ने डॉग स्क्वॉड और रेस्क्यू टीम बुलाकर खोजबीन की तो खेत में अफीम की फसल लगी मिली। इसके बाद वन विभाग और एसटीआर ने 27 मार्च को छातीआम निवासी उदेसिंग, उसके बेटे मनक सिंह सहित 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पहले यूरिया डालकर मारने की बात मानी, अब पलटे प्रारंभिक जांच में आरोपियों ने बताया था कि उन्होंने मृत बैल के शरीर पर यूरिया डाल दिया था, जिसे खाने से बाघ की मौत हुई। वन अधिकारियों ने भी इसे मान लिया था और पोस्टमार्टम के बाद प्रेस नोट में यही बात दोहराई थी। 28 मार्च को एसटीआर फील्ड डायरेक्टर ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) को यही रिपोर्ट भेजी थी। लेकिन अब तामिया एसडीओ सीमा ठाकुर द्वारा दर्ज किए गए धारा 50 के बयानों में आरोपियों ने बताया कि बाघ की मौत यूरिया से नहीं, बल्कि अफीम की खेती के चारों तरफ तार से फैलाए गए करंट की चपेट में आने से हुई है। 23 दिन की देरी पर उठे सवाल, मॉनिटरिंग लॉग ऑडिट की मांग बाघ के शिकार मामले में वन विभाग की टीम की मॉनिटरिंग पर सवाल उठ रहे हैं। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने कहा कि बाघिन के रेडियो कॉलर से तीन मार्च से कोई हलचल नहीं हो रही थी। सवाल यह है कि 23 दिनों तक मॉनिटरिंग टीम ने इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने मांग की है कि एनटीसीए द्वारा पिछले 30 दिनों के मॉनिटरिंग लॉग का ऑडिट किया जाए। अफसर बोले- लैब रिपोर्ट से स्पष्ट होगा मौत का कारण एसटीआर फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया, “बाघ के शिकारियों ने पहले मरे हुए बैल के मांस पर यूरिया डालने की बात कहीं थी। जिसे खाने से बाघ की मौत हुई। बाघ की मौत कैसे हुई, यह लैब से रिपोर्ट आने के बाद ही क्लियर होगी। डॉक्टर ने पोस्टमार्टम के दौरान सैंपल लिए गए। यूरिया खाने, इलेक्ट्रिक करंट या अन्य कारणों से मौत हुई। वो लैब रिपोर्ट स्पष्ट होगा।” वहीं, पश्चिम छिंदवाड़ा वन मंडल के डीएफओ साहिल गर्ग ने कहा, “आरोपितों के बयान लिए गए हैं। आरोपितों ने यह स्वीकार किया है कि करंट लगने से बाघ की मौत हुई। अभी इस मामले की जांच जारी है।”

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