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पुरुषों को 30 की उम्र से ही हार्ट डिजीज का खतरा ! युवा बिल्कुल नजरअंदाज न करें ये 5 सबसे बड़े कारण

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Heart Disease Risk in Men: एक नई रिसर्च में पता चला है कि पुरुषों में दिल की बीमारी का खतरा 35 साल की उम्र के आसपास तेजी से बढ़ने लगता है. यह समस्या बिना लक्षण के शुरू होती है, इसलिए साइलेंट किलर का काम कर सकती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि पुरुषों को 30 की उम्र से ही नियमित हार्ट चेकअप कराना चाहिए.

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युवाओं में हार्ट डिजीज की समस्या तेजी से बढ़ रही है.

Heart Disease in Young Age: अधिकतर लोगों को लगता है कि हार्ट डिजीज का खतरा 40-50 की उम्र के बाद ज्यादा होता है, लेकिन एक नई स्टडी के अनुसार बड़ी संख्या में पुरुषों में 30 की उम्र से ही हार्ट डिजीज डेवलप होने लगती है. धीरे-धीरे यह बीमारी बढ़ती रहती है और लोग इसे नजरअंदाज करते रहते हैं. जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में प्रकाशित रिसर्च की मानें तो पुरुषों में दिल की बीमारी का खतरा 35 साल की उम्र के आसपास तेजी से बढ़ने लगता है. यह खतरा बिना लक्षण के पैदा हो जाता है, जिससे समय रहते इसकी पहचान नहीं हो पाती है. इसकी वजह से तमाम लोग अपनी जान गंवा देते हैं.

इस स्टडी में 5000 से अधिक वयस्कों को 30 साल से ज्यादा समय तक ट्रैक किया गया. शोधकर्ताओं ने पाया कि 35 साल के बाद पुरुषों और महिलाओं के बीच दिल की बीमारी के रिस्क में साफ अंतर दिखने लगता है. पुरुषों में यह रिस्क तेजी से बढ़ता है और मिडिल एज तक महिलाओं की तुलना में अधिक बना रहता है. पुरुषों में हार्ट डिजीज का खतरा महिलाओं की तुलना में लगभग 7 साल पहले 5% तक पहुंच जाता है. कोरोनरी हार्ट डिजीज के मामले में यह अंतर और भी ज्यादा गंभीर पाया गया. पुरुषों में इसका खतरा महिलाओं की तुलना में 10 साल पहले दिखाई देने लगता है, जो इस बात का संकेत है कि उनकी ब्लड वेसल्स में नुकसान जल्दी शुरू हो जाता है. यह अंतर ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, स्मोकिंग, मोटापा और शारीरिक गतिविधि जैसे फैक्टर्स को ध्यान में रखने के बाद भी बना रहता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

भारतीय एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह स्थिति भारत में अत्यधिक गंभीर हो सकती है. AIIMS के कार्डियोलॉजी प्रोफेसर डॉ. अंबुज रॉय ने TOI को बताया कि अब दिल की बीमारी को केवल मिडिल एज की समस्या मानना गलत है. भारत में रिस्क फैक्टर्स 30 की उम्र में ही दिखने लगते हैं, इसलिए डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की जांच जल्दी शुरू करना जरूरी है. दक्षिण एशियाई लोगों में दिल की बीमारी का खतरा पश्चिमी देशों की तुलना में पहले सामने आता है. वहीं महिलाओं में यह जोखिम मेनोपॉज के बाद तेजी से बढ़ता है, लेकिन अक्सर इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है. इसलिए जरूरी है कि 30 की उम्र से ही नियमित जांच, सही जीवनशैली और जागरूकता पर ध्यान दिया जाए, ताकि दिल की बीमारियों से समय रहते बचाव किया जा सके.

डॉक्टर्स साफ कहते हैं कि युवाओं को हार्ट डिजीज से बचने के लिए अपनी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना चाहिए. रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम या कोई फिजिकल एक्टिविटी करें, संतुलित और हेल्दी आहार लें जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और हेल्दी फैट शामिल हों. जंक फूड, ज्यादा नमक और शुगर से दूरी बनाए रखें. धूम्रपान और शराब जैसी आदतों से बचें, क्योंकि ये दिल के लिए बेहद नुकसानदायक हैं. साथ ही तनाव को मैनेज करना, पर्याप्त नींद लेना और समय-समय पर ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना भी जरूरी है. छोटी-छोटी अच्छी आदतें अपनाकर युवा लंबे समय तक दिल को स्वस्थ रख सकते हैं.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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Heart Disease Risk in Men: एक नई रिसर्च में पता चला है कि पुरुषों में दिल की बीमारी का खतरा 35 साल की उम्र के आसपास तेजी से बढ़ने लगता है. यह समस्या बिना लक्षण के शुरू होती है, इसलिए साइलेंट किलर का काम कर सकती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि पुरुषों को 30 की उम्र से ही नियमित हार्ट चेकअप कराना चाहिए.

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युवाओं में हार्ट डिजीज की समस्या तेजी से बढ़ रही है.

Heart Disease in Young Age: अधिकतर लोगों को लगता है कि हार्ट डिजीज का खतरा 40-50 की उम्र के बाद ज्यादा होता है, लेकिन एक नई स्टडी के अनुसार बड़ी संख्या में पुरुषों में 30 की उम्र से ही हार्ट डिजीज डेवलप होने लगती है. धीरे-धीरे यह बीमारी बढ़ती रहती है और लोग इसे नजरअंदाज करते रहते हैं. जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में प्रकाशित रिसर्च की मानें तो पुरुषों में दिल की बीमारी का खतरा 35 साल की उम्र के आसपास तेजी से बढ़ने लगता है. यह खतरा बिना लक्षण के पैदा हो जाता है, जिससे समय रहते इसकी पहचान नहीं हो पाती है. इसकी वजह से तमाम लोग अपनी जान गंवा देते हैं.

इस स्टडी में 5000 से अधिक वयस्कों को 30 साल से ज्यादा समय तक ट्रैक किया गया. शोधकर्ताओं ने पाया कि 35 साल के बाद पुरुषों और महिलाओं के बीच दिल की बीमारी के रिस्क में साफ अंतर दिखने लगता है. पुरुषों में यह रिस्क तेजी से बढ़ता है और मिडिल एज तक महिलाओं की तुलना में अधिक बना रहता है. पुरुषों में हार्ट डिजीज का खतरा महिलाओं की तुलना में लगभग 7 साल पहले 5% तक पहुंच जाता है. कोरोनरी हार्ट डिजीज के मामले में यह अंतर और भी ज्यादा गंभीर पाया गया. पुरुषों में इसका खतरा महिलाओं की तुलना में 10 साल पहले दिखाई देने लगता है, जो इस बात का संकेत है कि उनकी ब्लड वेसल्स में नुकसान जल्दी शुरू हो जाता है. यह अंतर ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, स्मोकिंग, मोटापा और शारीरिक गतिविधि जैसे फैक्टर्स को ध्यान में रखने के बाद भी बना रहता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

भारतीय एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह स्थिति भारत में अत्यधिक गंभीर हो सकती है. AIIMS के कार्डियोलॉजी प्रोफेसर डॉ. अंबुज रॉय ने TOI को बताया कि अब दिल की बीमारी को केवल मिडिल एज की समस्या मानना गलत है. भारत में रिस्क फैक्टर्स 30 की उम्र में ही दिखने लगते हैं, इसलिए डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की जांच जल्दी शुरू करना जरूरी है. दक्षिण एशियाई लोगों में दिल की बीमारी का खतरा पश्चिमी देशों की तुलना में पहले सामने आता है. वहीं महिलाओं में यह जोखिम मेनोपॉज के बाद तेजी से बढ़ता है, लेकिन अक्सर इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है. इसलिए जरूरी है कि 30 की उम्र से ही नियमित जांच, सही जीवनशैली और जागरूकता पर ध्यान दिया जाए, ताकि दिल की बीमारियों से समय रहते बचाव किया जा सके.

डॉक्टर्स साफ कहते हैं कि युवाओं को हार्ट डिजीज से बचने के लिए अपनी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना चाहिए. रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम या कोई फिजिकल एक्टिविटी करें, संतुलित और हेल्दी आहार लें जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और हेल्दी फैट शामिल हों. जंक फूड, ज्यादा नमक और शुगर से दूरी बनाए रखें. धूम्रपान और शराब जैसी आदतों से बचें, क्योंकि ये दिल के लिए बेहद नुकसानदायक हैं. साथ ही तनाव को मैनेज करना, पर्याप्त नींद लेना और समय-समय पर ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना भी जरूरी है. छोटी-छोटी अच्छी आदतें अपनाकर युवा लंबे समय तक दिल को स्वस्थ रख सकते हैं.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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