ग्वालियर में मौसम बदला, गर्मी से राहत:बूंदाबांदी से फीकी पड़ रही गेहूं की चमक,न्यूनतम तापमान 21.1 डिग्री पर पहुंचा, आज बारिश का येलो अलर्ट

ग्वालियर में जम्मू-कश्मीर से सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का असर दिखाई दे रहा है। शुक्रवार सुबह हल्की बूंदाबांदी हुई और दिनभर बादल छाए रहे, जिससे गर्मी से राहत मिली। अधिकतम तापमान गिरकर 36.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं शनिवार का न्यूनतम तापमान 21.1 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है। मौसम विभाग ने 4 अप्रैल के लिए बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार 7 अप्रैल तक मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। हालांकि, बदला हुआ मौसम किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है। लगातार नमी और बूंदाबांदी के कारण गेहूं की फसल प्रभावित हो रही है। बालियां भीगने से फीकी पड़ रही गेहूं की चमक खेतों में खड़ी गेहूं की बालियां भीगने से दाने काले पड़ने लगे हैं और उनकी चमक कम हो रही है। इससे बाजार में गेहूं की कीमतों पर असर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि मौसम इसी तरह बदलता रहा, तो फसल को और अधिक नुकसान हो सकता है। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम में फिर से जल्द ही बदलाव होने वाला है, वैज्ञानिकों ने अगले 24 घंटे में बूंदाबांदी के साथ तेज बारिश आंधी चलने की संभावना जताई है। एक दिन पहले गर्मी से बेहाल थे लोग अगर पिछले दो दिनों की बात करें तो शहर में तेज धूप और गर्मी से लोग बेहाल हो रहे थे, लोग घर से निकलने से पहले चेहरा, हाथ और पैरों को पूरे कपड़े से ढंककर निकल रहे थे। सूर्य की तपिश इतनी तेज थी कि लोग इनसे बचने के लिए पेड़ों की छांव ढूंढ रहे थे, लेकिन बीते रात हुई हल्की बनाई और तेज हवाओं के चलते लोगों को बड़ी राहत मिली है।
उच्च मतदान प्रतिशत: क्यों केरल में लगातार राष्ट्रीय औसत से ऊपर मतदान हो रहा है | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:04 अप्रैल, 2026, 10:36 IST उच्च साक्षरता, मजबूत जमीनी स्तर की राजनीति और करीबी एलडीएफ यूडीएफ प्रतियोगिताओं के कारण केरल में 70 से 80 के बीच मतदान हुआ, जो 2024 के राष्ट्रीय 65.79 से कहीं अधिक है। केरल में एक चरण में विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को मतदान होगा। वोटों की गिनती 4 मई को होगी. (फोटो: पीटीआई फाइल) केरल में उच्च मतदान प्रतिशत: केरल में नियमित रूप से राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक मतदान प्रतिशत दर्ज किया जा रहा है। जबकि 2024 के लोकसभा चुनावों में भारत का कुल मतदान 65.79% था, केरल में ऐतिहासिक रूप से चुनावों में भागीदारी का स्तर 70% से लगभग 80% के बीच देखा गया है। यह सुसंगत पैटर्न आकस्मिक नहीं है – यह उन सामाजिक, राजनीतिक और संस्थागत कारकों के संयोजन का परिणाम है जिन्होंने दशकों से राज्य की लोकतांत्रिक संस्कृति को आकार दिया है। केरल में ऐतिहासिक रूप से हर पांच साल में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के बीच सत्ता का आदान-प्रदान देखा गया है। हालाँकि, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने 2021 के विधानसभा चुनावों में एलडीएफ को लगातार जीत दिलाकर इतिहास रचते हुए लंबे समय से चली आ रही इस प्रवृत्ति को तोड़ दिया। अब यह देखना बाकी है कि क्या विजयन इस चुनाव में एक बार फिर राज्य की मजबूत सत्ता विरोधी लहर पर काबू पा पाते हैं या नहीं। केरल में एक चरण में विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को मतदान होगा। वोटों की गिनती 4 मई को होगी. राजनीतिक रूप से जागरूक एवं शिक्षित मतदाता 96.2% की साक्षरता दर के साथ, केरल भारत के सबसे शिक्षित राज्यों में से एक है। शिक्षा के अलावा, यहां के लोग राजनीतिक रूप से गहराई से जागरूक हैं- यह प्रमुख कारणों में से एक है कि राज्य चुनावों में लगातार उच्च मतदान दर्ज करता है। विश्लेषकों का कहना है कि केरल में, मतदान को एक निष्क्रिय कार्य के बजाय एक नागरिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाता है, जहां नागरिक राजनीतिक बहस, सार्वजनिक मुद्दों और चुनावी प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से शामिल होते हैं। मजबूत जमीनी स्तर की राजनीतिक लामबंदी केरल की राजनीति जमीनी स्तर पर गहरी जड़ें जमा चुकी है। स्थानीय स्व-सरकारी संस्थानों से लेकर वार्ड-स्तरीय अभियानों तक, राजनीतिक दल मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क बनाए रखते हैं जो मतदाताओं को सक्रिय रूप से संगठित करते हैं। स्थानीय निकाय चुनावों में अक्सर 70% से अधिक मतदान दर्ज किया जाता है, जो दर्शाता है कि राजनीतिक भागीदारी सामुदायिक स्तर पर कैसे शुरू होती है। द्विध्रुवीय राजनीतिक प्रतियोगिता मतदाताओं को जोड़े रखती है खंडित राजनीतिक परिदृश्य वाले कई राज्यों के विपरीत, केरल में दो प्रमुख गठबंधनों- लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के बीच बड़े पैमाने पर द्विध्रुवीय मुकाबला है। यह करीबी प्रतिस्पर्धा यह सुनिश्चित करती है कि चुनाव में जोरदार मुकाबला हो, जिससे मतदाताओं को यह मजबूत एहसास हो कि उनका वोट परिणाम को प्रभावित कर सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि केरल में उच्च मतदान अक्सर कड़े मुकाबले वाले चुनावों से मेल खाता है। हालाँकि, भाजपा त्रिकोणीय मुकाबले को मजबूर करने के लिए तटीय राज्य में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। हालाँकि, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों पर शासन करने वाली पार्टी अब तक अपने प्रयासों में विफल रही है। सामाजिक विकास और समावेशिता उच्च साक्षरता, बेहतर स्वास्थ्य सेवा और अपेक्षाकृत कम असमानता वाले केरल के सामाजिक विकास मॉडल ने अधिक समावेशी राजनीतिक संस्कृति बनाने में मदद की है। लिंग और समुदायों के बीच भागीदारी में कटौती होती है। कई चुनावों में, महिला मतदाताओं ने पुरुष मतदान के बराबर या उससे भी अधिक मतदान किया है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में व्यापक सामाजिक समावेशन को दर्शाता है। एक सामाजिक मानदंड के रूप में मतदान संस्कृति केरल में मतदान केवल एक व्यक्तिगत कार्य नहीं बल्कि एक सामूहिक सामाजिक व्यवहार है। परिवार और समुदाय अक्सर मतदान दिवस को एक महत्वपूर्ण नागरिक अवसर के रूप में मानते हैं। मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारें आम हैं और मतदाताओं की भागीदारी को अक्सर राजनीतिक जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रतिबिंब के रूप में देखा जाता है। निष्कर्ष उच्च साक्षरता और राजनीतिक जागरूकता से लेकर प्रतिस्पर्धी चुनावों और मजबूत जमीनी स्तर के नेटवर्क तक, कई कारक मिलकर केरल को भारत का सबसे अधिक मतदान वाला राज्य बनाते हैं। यहां तक कि जब मतदान थोड़ा कम हो जाता है – जैसा कि 2024 के चुनावों के कुछ हिस्सों में देखा गया है – तब भी यह राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर रहता है, जो राज्य की गहरी जड़ें जमा चुकी लोकतांत्रिक संस्कृति को रेखांकित करता है। केरल के मतदान पैटर्न से पता चलता है कि सूचित नागरिक, प्रतिस्पर्धी राजनीति और मजबूत संस्थान मिलकर उच्च चुनावी भागीदारी को आगे बढ़ा सकते हैं – जो शेष भारत के लिए एक मॉडल पेश कर सकता है। जगह : तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम), भारत, भारत पहले प्रकाशित: 04 अप्रैल, 2026, 10:36 IST समाचार चुनाव उच्च मतदान प्रतिशत: केरल में लगातार राष्ट्रीय औसत से ऊपर मतदान क्यों हो रहा है? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
सुनंदा शर्मा के पैरों में गिरा फैन:डरकर चिल्लाई सिंगर, स्टेज छोड़ा, बाउंसरों ने युवक को स्टेज से नीचे फेंका; शो बीच में ही कैंसिल

पंजाबी सिंगर सुनंदा शर्मा ने गाजियाबाद में बीच में ही लाइव शो कैसिंल कर दिया और परफॉर्मेंस छोड़कर चली गईं। 3 अप्रैल की रात आरकेजीआईटी कॉलेज में चल रहे शो के दौरान अचानक एक युवक स्टेज पर चढ़ गया और उन्हें छूने की कोशिश करने लगा और उनके पैरों में गिर पड़ा। अचानक हुई इस घटना से सुनंदा घबरा गईं। जैसे ही युवक ने उन्हें छुआ, वह जोर से चीखीं और भागकर स्टेज के पीछे चली गईं। माइक ऑन होने की वजह से उनकी चीख साफ सुनाई दी, जिससे माहौल अफरा-तफरी में बदल गया। युवक करीब 2 मिनट तक स्टेज पर रहा और शाहरुख खान के सिग्नेजर स्टाइल में वाहें फैलाकर स्टूडेंट्स की तरफ देखने लगा। आवाज सुनते ही पुलिस तुरंत स्टेज पर पहुंची और युवक को वहां से हटाया। बाउंसरों ने भी उसे पकड़कर स्टेज से नीचे उतारा और बाद में पुलिस के हवाले कर दिया। फिलहाल गाजियाबाद पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि युवक उसी कॉलेज का छात्र है। इस घटना के बाद सुनंदा इतनी डर गईं कि दोबारा स्टेज पर नहीं लौटीं। नीचे मौजूद लोग उन्हें वापस बुलाते रहे, लेकिन उनकी टीम ने शो को बीच में ही कैंसिल करने का फैसला लिया। शो रद्द होने की घोषणा के बाद छात्र निराश होकर वापस लौट गए। स्टेज पर सुनंदा के साथ क्या हुआ… शो को नेक्सट लेवल का बनाने की जानकारी की थी साझा शो शुरु होने से पहले सुनंदा काफी एक्साइटेड दिखीं। उन्होंने खुद वीडियो शेयर कर कहा कि मेरा आज गाजिबाद में शो है। इसके बाद वह स्टेज पर आने के बाद कहने लगीं कि आज मैं गाजियाबाद में आई हूं और ऐसा कैसे हो सकता है कि गाजियाबाद वाले मेरे साथ न गुनगुनाएं। सुनंदा ने कहा कि आज का शो नेक्सट लेवल का होने वाला है।
9.90 लाख साइबर फ्रॉड मामले में दो आरोपी गिरफ्तारी:महाराष्ट्र पुलिस ने मैहर से दोनों को पकड़ा; धोखाधड़ी से खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए

महाराष्ट्र की ठाणे पुलिस ने 9.90 लाख रुपए के साइबर फ्रॉड के मामले में मैहर के रामनगर कस्बे से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुक्रवार को हुई इस कार्रवाई में आशू खरे और अमित पटेल को महाराष्ट्र ले जाया गया। पुलिस के अनुसार, यह साइबर फ्रॉड 26 फरवरी को महाराष्ट्र के ठाणे पुलिस स्टेशन क्षेत्र में हुआ था। फरियादी की शिकायत के बाद 27 फरवरी को मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने दो आरोपियों किया गिरफ्तार 28 फरवरी को ठाणे में बीएनएस की धारा 318(4), 319 (2), 336 (2), 336(3), 340(2), 3(5) समेत साइबर फ्रॉड की अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई। जांच के दौरान इन दोनों आरोपियों के नाम सामने आए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि 9.90 लाख रुपए की धोखाधड़ी की रकम का पहला ट्रांजेक्शन 1.65 लाख रुपए आरोपी आशू खरे के खाते में हुआ था। दूसरे ट्रांजेक्शन में 60 हजार रुपए अमित पटेल के खाते में आए थे। पुलिस ने यह भी बताया कि अन्य खातों में भी रकम ट्रांसफर की गई थी और पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।
तेज हवाओं के साथ बारिश, आकाशीय बिजली से 2 मौतें:सिवनी में आंधी से पेड़-पोल गिरे; ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान

सिवनी जिले में पिछले तीन दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है। शनिवार सुबह से हल्की रिमझिम बारिश जारी है, जिससे तापमान में गिरावट आई है। हालांकि, इस मौसमी बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार को जिले के कई हिस्सों में तेज आंधी और बारिश के साथ कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हुई। आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत इस मौसमी गतिविधि के दौरान दो अलग-अलग घटनाओं में आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। बरघाट क्षेत्र के मंडी गांव में छह वर्षीय प्रांशू मरकाम की घर के बाहर खेलते समय बिजली गिरने से मौके पर ही मौत हो गई। दूसरी घटना डूंडासिवनी क्षेत्र के उड़ेपानी और बंजारी गांव के पास हुई, जहां रमजान खान खेत से लौटते समय आकाशीय बिजली की चपेट में आ गए और उनकी भी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। तेज आंधी से पेड़-पोल गिरे, कई गांवों में बिजली गुल शुक्रवार शाम को बरघाट क्षेत्र में तेज आंधी चली, जिससे कई स्थानों पर पेड़ और बिजली पोल गिर गए। सिवनी-बालाघाट मार्ग पर पेड़ गिरने से यातायात कुछ समय के लिए बाधित रहा। धारना, आष्टा, बोरी, जेवनारा और खारी सहित कई गांवों में बिजली के तार टूटने और पोल गिरने के कारण विद्युत आपूर्ति ठप हो गई। तेज हवाओं से कई दुकानों और मकानों के शेड भी उड़ गए। धूमा थाना क्षेत्र के धनककड़ी गांव में चने के आकार के ओले गिरने की सूचना मिली है। ओलावृष्टि और तेज बारिश से गेहूं सहित अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है, जिससे किसानों में चिंता है। हालांकि, फसलों के वास्तविक नुकसान का आकलन अभी किया जाना बाकी है। मौसम विभाग ने बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी दी मौसम विभाग ने जिले में बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी पहले ही जारी कर दी थी। शुक्रवार रात भर तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश होती रही। शनिवार सुबह से जारी हल्की बारिश ने मौसम को ठंडा और सुहावना बनाया है, लेकिन किसानों के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे मौसम को देखते हुए कलेक्टर शीतला पटले ने लोगो से कहा है कि सावधानी बरतें। बारिश के समय जो किसान खेत मे काम कर रहे हैं वह सुरक्षित स्थान में चले जाएं, क्योकि आसमानी बिजली गिरने का खतरा बना रहता है।
बाजार से खीरा खरीदते वक्त खा जाते हैं धोखा, तो इन तरीकों से पहचानें मीठा और ताजा खीरा

Last Updated:April 04, 2026, 09:14 IST गर्मी में ठंडक देने वाला खीरा अगर कड़वा निकल जाए, तो सारा मजा खराब हो जाता है. बाहर से ताजा दिखने वाला खीरा अंदर से कड़वा हो सकता है, लेकिन कुछ आसान तरीकों से आप मीठे और स्वादिष्ट खीरे की सही पहचान कर सकते हैं. आइए जानते हैं खीरा खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. आजकल तो बाजार में खीरा सालभर मिल रहा है, लेकिन इसका असली स्वाद गर्मी और बरसात में ही आता है. फिलहाल गर्मी चल रही है और बाजार में खीरा खूब मिल रहा है, इस समय खीरा खाने का अलग ही मजा है. आधुनिक खेती ने इसकी उपलब्धता भी बढ़ा दी है, फिर भी सही मौसम का खीरा ज्यादा ताजा और स्वादिष्ट होता है. सही समय पर खरीदा गया खीरा खाने का मजा भी दोगुना कर देता है. खीरा न केवल स्वाद देता है, बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है. इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर को हाइड्रेट रखता है. यह वजन घटाने वालों के लिए तो एक शानदार विकल्प है. खीरा हल्का और ताजा शरीर को ठंडक देता है और पाचन में भी मदद करता है. यह शरीर को कई फायदे देता है. श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया के मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विभाग के HOD प्रो. अशोक कुमार सिंह के मुताबिक, बाजार में अगर आप खीरा खरीदने जा रहे हैं, तो खीरे को हल्के से दबाकर जरूर देखें. अगर खीरा नरम या दबा हुआ लगे, तो समझ लें कि वह बासी या खराब हो सकता है. ताजा खीरा हमेशा सख्त और टाइट होता है, जो अंदर से भी अच्छा और मीठा रहता हैं. Add News18 as Preferred Source on Google हां अच्छे खीरे की पहचान उसके रंग और बनावट से भी की जाती है. अगर खीरे के ऊपरी हिस्से में हल्का सफेद या पीला रंग दिखे और छोटे-छोटे कांटे हों, तो यह ताजगी का संकेत होता है. अच्छे खीरे की निशानी गहरा हरा रंग और चिकनी सतह भी मानी जाती है. खरीददारी के समय अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए, तो सही और बेकार का मिनटों में पहचान किया जा सकता है. जो खीरा मध्यम आकार और सीधा होता है, वह आमतौर पर ज्यादा स्वादिष्ट होता है. अगर बहुत लंबा, मुड़ा हुआ या असामान्य आकार हो , तो वह खीरा कड़वा निकल सकता है. देसी खीरा, जिसमें हल्का पीलापन और गहरा रंग होता है, अक्सर ज्यादा मीठा और रसदार होता है. हर समय बाजार में सावधान रहे, वरना धोखा खाना आम है. अगर गलती से कड़वा खीरा आ जाए, तो परेशान नहीं होना चाहिए, बल्कि उसके ऊपरी हिस्से को काटकर नमक लगाकर रगड़ें और निकलने वाले झाग को हटा दें. यह तरीका कड़वाहट को काफी हद तक कम कर देता है, जिससे खीरा खाने लायक बन सकता हैं. हालांकि, यह विधि हर खीरा में करना चाहिए. यह एक पारंपरिक उपाय भी है. उक्त उपाय अपनाकर आप भी कड़वे और स्वादिष्ट खीरा की पहचान वो भी आसानी से कर सकते हैं. हालांकि, खीरा सुबह या दोपहर में खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है. इससे शरीर को ठंडक मिलती है और पाचन भी बेहतर होता है. सही खीरे का चयन और सही समय पर खाकर आप इसके स्वाद और सेहत दोनों का पूरा लाभ ले सकते हैं. First Published : April 04, 2026, 09:14 IST
कभी खाया है गेहूं का होला? फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम से भरपूर, वेट लॉस में भी करता जबरदस्त काम

Last Updated:April 04, 2026, 08:25 IST Gehu Hola ke Fayde: छतरपुर में गेहूं का होला खाने की परंपरा हिंदू नववर्ष से जुड़ी हुई है और इसे खास महत्व दिया जाता है. गेहूं की हरी बालियों को भूनकर तैयार किया गया होला स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है. इसमें फाइबर, प्रोटीन और विटामिन भरपूर मात्रा में होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा और पाचन को बेहतर बनाते हैं. गांवों में इसे गुड़, मिर्च और आंवले के साथ खाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और बढ़ जाता है. जानिए इस देसी सुपरफूड के फायदे और क्यों आज भी यह परंपरा लोगों के दिलों में जिंदा है. Gehu Hola Health Benefits: छतरपुर जिले में गेहूं का होला सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि एक परंपरा और सेहत का अनोखा संगम है. जैसे ही चैत्र मास में हिंदू नववर्ष शुरू होता है, गांवों में खेतों से ताजा गेहूं लाकर उसकी बालियों को भूनकर खाने की परंपरा निभाई जाती है. यह सालों पुरानी परंपरा आज भी उतनी ही उत्साह के साथ निभाई जाती है. क्या होता है गेहूं का होला?गेहूं की हरी बालियों को आग में हल्का भूनकर जो दाने निकाले जाते हैं, उन्हें ही “होला” कहा जाता है. खास बात यह है कि बाली पूरी तरह पकी नहीं होती, अंदर का दाना हल्का हरा और नरम रहता है, जो खाने में बेहद स्वादिष्ट लगता है. स्वाद में देसी ट्विस्टगांवों में इसे आंवला, मिर्च या खासतौर पर गुड़ के साथ खाया जाता है. गुड़ के साथ इसका स्वाद लाजवाब हो जाता है मीठा, हल्का कुरकुरा और देसी फ्लेवर से भरपूर. यही वजह है कि लोग हर साल इसका बेसब्री से इंतजार करते हैं. सेहत के लिए क्यों फायदेमंद?गेहूं का होला पोषण से भरपूर होता है. इसमें फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. यह पाचन को बेहतर बनाता है, शरीर को ऊर्जा देता है और वजन कंट्रोल करने में भी मददगार माना जाता है. यानी स्वाद के साथ सेहत का भी पूरा ख्याल. इससे बनते हैं कई देसी व्यंजनसिर्फ होला ही नहीं, बल्कि गेहूं की बालियों से हलवा, पुआ और लपसी जैसे कई पारंपरिक व्यंजन भी बनाए जाते हैं. गांव के लोगों के लिए यह सिर्फ खाना नहीं, बल्कि बचपन की यादों और खुशी का हिस्सा है. पुराने दिनों की यादेंपहले जब मशीनें नहीं थीं, तब गेहूं को खेत से घर लाने में महीनों लग जाते थे. कटाई, मड़ाई और सफाई की लंबी प्रक्रिया के कारण लोग पहले ही बालियां तोड़कर ले आते थे और उनसे होला बनाकर खाते थे. यही परंपरा आज भी जारी है. About the Author Shweta Singh Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें Location : Chhatarpur,Madhya Pradesh First Published : April 04, 2026, 08:25 IST
टीटीई ने अकेले एक करोड़ वसूले:खंडवा स्टेशन पर टिकट चेकिंग का रिकॉर्ड; यात्रियों पर 10 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना लगा

पश्चिम मध्य रेलवे के खंडवा जंक्शन पर वित्तीय वर्ष 2025-26 में टिकट जांच अभियान के दौरान उप मुख्य टिकट निरीक्षक (TTE) धर्मेंद्र मीणा ने अकेले 16,500 बिना टिकट यात्रियों से 1 करोड़ 2 लाख 75 हजार रुपए का जुर्माना वसूला है। इस वसूली के साथ वे खंडवा रेलवे के इतिहास में एक साल में एक करोड़ से अधिक का राजस्व वसूलने वाले पहले टीटीई बन गए हैं। इस वित्तीय वर्ष में खंडवा स्टेशन के सभी जांच कर्मचारियों ने मिलकर कुल 10 करोड़ 35 लाख रुपए और भुसावल मंडल ने 81 करोड़ रुपए की रिकॉर्ड वसूली की है। रेलवे प्रशासन बिना टिकट यात्रा पर अंकुश लगाने के लिए यह चेकिंग अभियान लगातार जारी रखे हुए है। खंडवा के इतिहास में पहली बार 1 करोड़ के पार वसूली उप मुख्य टिकट निरीक्षक धर्मेंद्र मीणा ने पूरे साल में करीब 16,500 बिना टिकट यात्रियों पर कार्रवाई करते हुए यह बड़ी उपलब्धि हासिल की। वे एक वित्तीय साल में 1 करोड़ 2 लाख 75 हजार रुपए की वसूली करने वाले पहले टीटीई बन गए हैं। रेलवे प्रशासन ने उनकी इस सफलता को अनुशासन और सख्ती का प्रभावी उदाहरण माना है। कर्मचारियों के लगातार अभियान से रेलवे राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। खंडवा स्टेशन की कुल वसूली 10.35 करोड़ खंडवा स्टेशन पर तैनात सभी टिकट जांच कर्मचारियों ने मिलकर वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 10 करोड़ 35 लाख रुपए की वसूली की। पिछले सालों की तुलना में यह आंकड़ा काफी अधिक है। अन्य टीटीई द्वारा की गई वसूली इस प्रकार है: 81 करोड़ वसूलकर भुसावल मंडल मध्य रेल में प्रथम खंडवा स्टेशन जिस भुसावल मंडल के अंतर्गत आता है, उसने भी वित्तीय साल 2025-26 में बिना टिकट यात्रियों से कुल 81 करोड़ रुपए का राजस्व एकत्र किया है। यह वसूली मध्य रेल के सभी मंडलों में सर्वाधिक है। इसी के साथ भुसावल मंडल बिना टिकट यात्रियों से जुर्माना वसूलने के मामले में प्रथम स्थान पर रहा है। डीआरएम बोले- आगे भी तेज किए जाएंगे अभियान भुसावल रेल मंडल के डीआरएम पुनीत अग्रवाल ने कहा कि, “नियमित चेकिंग अभियान, स्टाफ की सक्रियता और यात्रियों में जागरूकता के कारण यह संभव हो पाया है। आने वाले समय में भी इस तरह के अभियान और तेज किए जाएंगे, ताकि बिना टिकट यात्रा पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।”
सत्तू पराठा रेसिपी: विशेष रूप से हाई प्रोटीन वाला सत्तू का पराठा, पति से लेकर बच्चों के टिफिन तक सभी के लिए परफेक्ट रेसिपी

हाई प्रोटीन रेसिपी: यदि आप खोज में कुछ ऐसा बनाना चाहते हैं जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ क्लासिक भी हो, तो सत्तू का पराठा एक बेहतरीन स्थान है। यह न सिर्फ पेट भरने वाला होता है बल्कि प्रोटीन से भरपूर भी होता है, जिससे कि मिनरल एनर्जी बनी रहती है। बता दें कि इसे आप बच्चों के टिफिन से लेकर पति के आदर्श बॉक्स तक आसानी से दे सकते हैं। तो जानें सत्तू पराठा बनाने की आसान विधि- सत्तू भुने हुए चने का आटा होता है, जो बिहार और उत्तर भारत में बहुत लोकप्रिय है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और आयरन की मात्रा प्रचुर मात्रा में होती है, इसलिए यह स्वास्थ्य के लिए बहुत बढ़िया माना जाता है। सत्तू पराठा बनाने के लिए आवश्यक सामग्री आटा गूंधने के लिए: स्टफिंग के लिए: सत्तू का पराठा खाने के फायदे क्या हैं? सत्तू का पराठा एक ऐसा नाश्ता है जो स्वाद, सेहत और सुविधा तीनों का प्रभावशाली संयोजन है। इसमें मौजूद प्रोटीन आपकी सेहत के लिए भी अच्छा होता है। (टैग्सटूट्रांसलेट)सत्तू पराठा रेसिपी(टी)सत्तू का पराठा(टी)सत्तू पराठा कैसे बनाएं(टी)घर का बना सत्तू पराठा(टी)पराठा(टी)हाई प्रोटीन रेसिपी(टी)सत्तू का पराठा कैसे बनाएं
परवीन बाबी को सिगरेट पीते देख डायरेक्टर ने फिल्म दी:शाही परिवार से थीं; 3 लिव-इन रिलेशनशिप रहे, अमिताभ बच्चन को मानती थीं हत्यारा

करीब साढ़े 400 साल पहले पश्तून बाबी वंश मुगल शासक हुमायूं के साथ गुजरात पहुंचा। यह अफगानिस्तान का शाही परिवार था, जो मुगल साम्राज्य का अहम हिस्सा बना और कई रियासतों पर शासन किया। मुगल सत्ता कमजोर होने पर बाबी और मराठा (गायकवाड़ वंश) में जंग हुई, जिसमें मराठाओं ने अधिकांश गुजरात पर कब्जा किया, लेकिन बाबी ने जुनागढ़, राधनपुर और बालासिनोर पर शासन जारी रखा। मोहम्मद महाबत खान-3, जूनागढ़ की रियासत के आखिरी नवाब रहे। महाबत खान के एक करीबी रिश्तेदार थे वली मोहम्मद खान बाबी। उन्होंने 1940 में जमाल बख्ते बाबी से शादी की। सालों तक उन्हें संतान नहीं हुई। 1947 में ब्रिटिश हुकूमत खत्म होने पर रियासतें खत्म कर सरकारें बनाई जाने लगीं और भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ। 15 अगस्त 1947 को आखिरी नवाब महाबत खान ने जूनागढ़ को पाकिस्तान में शामिल करने की घोषणा की, जिस पर लोगों ने आपत्ति जताई। 20 फरवरी 1948 के जनमत में 99% से ज्यादा लोगों ने भारत में शामिल होने का फैसला किया। जब सरकार बनी तो जूनागढ़ के नवाब माहबत के करीबी रिश्तेदार वली मोहम्मद खान की भी रियासत ले ली गई और बदले में उन्हें 100 बीघा जमीन यानी 40 एकड़ (17 लाख 42 हजार वर्ग फुट) दी गई। राजशाही खत्म होने के बावजूद वो शाही जिंदगी जीते थे। शादी के 14 साल बाद उनके घर खुशखबरी आई। पत्नी जमाल बख्ते ने जूनागढ़ की शाही हवेली में 4 अप्रैल 1954 को बेटी को जन्म दिया। नाम दिया गया, परवीन सुल्ताना वली मोहम्मद खानजी बाबी। वही परवीन बाबी जो हिंदी सिनेमा की मशहूर और टॉप एक्ट्रेसेस में शामिल रहीं। वही परवीन बाबी जो अपने ग्लैमर, वेस्टर्नाइजेशन और समय से आगे चलने वाली सोच के लिए जानी गईं। जब महिलाएं पर्दे पर भी सिगरेट थामने से कतराती थीं, तब परवीन बाबी मिनी स्कर्ट पहनकर सड़कों पर सिगरेट पीते हुए टहला करती थीं। जब डायरेक्टर बी.आर.इशारा ने उन्हें पहली बार देखा, तब उनकी इसी बोल्डनेस के मुरीद हो गए और उन्हें तुरंत फिल्म ऑफर कर दी। आज परवीन बाबी की 72वीं बर्थ एनिवर्सरी है। अगर आज वो होतीं, तो अपना 72वां जन्मदिन मनातीं। उनकी जिंदगी के आखिरी दिन बेहद दर्दनाक थे। अकेलेपन की हद ये थी कि जब उनकी मौत हुई तो 4 दिनों तक बॉडी बंद घर में सड़ती रही। आज परवीन बाबी की बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर जानिए उनके समय से आगे चलने और जिंदगी से जुड़े कुछ रोचक किस्से- 54 कमरों की हवेली में हुई परवरिश, पढ़ाई के लिए शर्त पर घर छोड़ा शाही परिवार में जन्मीं परवीन बाबी का बचपन जूनागढ़ की 54 कमरों की हवेली में बीता। इकलौती संतान को ऐशोआराम मिला और घर में 6 नौकर थे। 6 साल की उम्र में पिता का कैंसर से निधन हुआ, जिसके बाद वह दीवान चौक की दो मंजिला हवेली में रहने लगीं। शुरुआती पढ़ाई गुजराती मीडियम स्कूल से हुई। 14 साल की उम्र में मां ने उन्हें पढ़ाई के लिए अहमदाबाद भेजा, हालांकि परिवार इसके खिलाफ था। शर्त रखी गई कि जल्दी शादी कराई जाएगी, जिस पर मां मान गईं और उनका दाखिला सेंट जेवियर कॉलेज में हुआ। कॉलेज में कोर्स न होने के बावजूद परवीन बाबी ने खुद फर्राटे दार अंग्रेजी बोलना सीखा। आगे उन्होंने इंग्लिश और साइकोलॉजी में बेचलर डिग्री ली और अंग्रेजी में मास्टर डिग्री। शर्त के अनुसार 15 साल की उम्र में परवीन की सगाई कजिन जमील खान से हुई, जो पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन्स में पायलट थे। 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद मां ने सगाई तोड़ दी और परवीन को इसकी जानकारी पोस्टकार्ड से मिली। 17 की उम्र में सिगरेट पीती थीं, मिनी स्कर्ट पहनती थीं; यही देख ऑफर हुई फिल्म 1971 में डायरेक्टर बी.आर. इशारा अहमदाबाद में एक नांव दो किनारे की शूटिंग कर रहे थे। भीड़ के बीच उनकी नजर एक लड़की पर पड़ी, जो मिनी स्कर्ट में सिगरेट पी रही थी। लंबी कद-काठी और छरहरे बदन वाली वह लड़की चारमिना सिगरेट थामे हुए थी। वह लड़की परवीन बाबी थीं, जिनकी उम्र 17 साल थी। बी.आर. इशारा समझ गए कि वह खास हैं और उन्होंने फोटोग्राफर से उनकी तस्वीरें लेने को कहा। फोटोग्राफर ने तस्वीरें लीं और बी.आर. इशारा ने परवीन को बुलाकर पूछा- फिल्मों में काम करोगी। आमतौर पर कोई भी लड़की तुरंत हामी भर देती, लेकिन परवीन ने कहा, अगर स्क्रिप्ट पसंद आई तो। बी.आर.इशारा इस एक जवाब में समझ गए कि लड़की में कॉन्फिडेंट की भरमार है। वैसे तो वो कभी अपनी फिल्मों की हीरोइन से किसी तरह का कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं करवाते थे, लेकिन परवीन बाबी का मॉडर्न लुक देख वो भी सोच में पड़ गए। उन्हें लगा कि कहीं ये मॉडर्न ख्यालों वाली लड़की मन न बदल ले। उन्होंने तुरंत कॉन्ट्रैक्ट बनवाया, जिसमें एक ही बात थी कि जब तक उनकी फिल्म नहीं बनती, परवीन किसी दूसरी फिल्म का हिस्सा नहीं बन सकतीं। शाही परिवार से आने के बावजूद परवीन ने फिल्मों में आने का फैसला कर लिया। बेबाक अंदाज में फिल्म मांगी, लॉन्च के लिए डायरेक्टर ने उधार लिया बी.आर. इशारा कॉन्ट्रैक्ट के बाद दूसरी फिल्मों में व्यस्त हो गए और यह बात लगभग भूल गए। इस दौरान परवीन बाबी सितंबर 1971 में कालिको डोम के फैशन शो में शामिल हुईं, जहां साथ काम करने वालीं मॉडल ममता साहू ने उन्हें अपने डायरेक्टर पिता किशोर साहू को सुझाया। किशोर साहू ने परवीन से एक मुलाकात कर उन्हें फिल्म धुंएं की लकीर के लिए फाइनल कर लिया। तभी उन्हें बी.आर.इशारा के कॉन्ट्रैक्ट का पता चला। किशोर साहू ने तुरंत उन्हें कॉल किया और कहा कि जिस हीरोइन से आपका कॉन्ट्रैक्ट है, मैं उसके साथ फिल्म बनाना चाहता हूं। परवीन बाबी का नाम सुनकर उन्हें फिर वो लड़की याद आई। लेकिन उनकी फिल्म बनने में देरी थी, तो उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल कर परवीन को वो फिल्म करने की इजाजत दे दी। कुछ महीने बीते। बी.आर.इशारा, मुंबई के राजकमल स्टूडियो में एक फिल्म की मिक्सिंग के सिलसिले में पहुंचे थे। वो सीढ़ियों पर बैठे सिगरेट पी ही रहे थे कि अचानक परवीन उनके ठीक बाजू में आकर बैठ गईं। उन्होंने न हाल पूछा न कोई और बात की, सीधे कहा- आप मेरे साथ फिल्म क्यों नहीं बनाते। बी.आर.इशारा इस सवाल से घिर गए। उनके जहन









