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पंचायतों, वार्डों में अब नहीं लगेंगे सोलर लाइट, सोलर हाईमास्ट:ऊर्जा विभाग की कलेक्टरों को चिट्‌ठी, कहा- सरकार का पैसा बर्बाद होता है

पंचायतों, वार्डों में अब नहीं लगेंगे सोलर लाइट, सोलर हाईमास्ट:ऊर्जा विभाग की कलेक्टरों को चिट्‌ठी, कहा- सरकार का पैसा बर्बाद होता है

एक ओर लोगों को सोलर एनर्जी के अधिकाधिक उपयोग के लिए राज्य सरकार प्रोत्साहित कर रही है, वहीं दूसरी ओर शासन ने यह तय किया है कि प्रदेश में पंचायतों और शहरों के वार्डों में अब सोलर लाइट, सोलर ट्री, हाईमास्ट और सोलर स्टड नहीं लगाए जाएंगे। ऊर्जा विभाग ने विभाग कलेक्टरों से कहा है कि शहरों, वार्डों और पंचायतों में ऐसे उपकरण लगाए जा रहे हैं, लेकिन इनकी सफाई नहीं होने से ये बेकार हो जाते हैं। इसलिए इन उपकरणों को सरकारी पैसा खर्च कर नहीं लगाया जाए ताकि शासन का नुकसान रोका जा सके। ऊर्जा विकास निगम ने मुख्य सचिव की मौजूदगी में हुई बैठक में लिए गए निर्णय का हवाला देते हुए सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं कि राज्य स्तरीय समन्वय समिति की बैठक में हुए फैसले के मुताबिक स्थानीय निकायों में सोलर लाइट, सोलर ट्री, हाईमास्ट और सोलर स्टड जैसे उपकरण नहीं लगाए जाएं। कलेक्टरों से कहा गया है कि वे जिलों में पंचायतों और शहरी वार्डों में इन उपकरणों का शासन के खर्च से नहीं लगने दें ताकि शासन के पैसे की बर्बादी को रोका जा सके। इन हालातों को देखते हुए ही शासन के पैसे से इन सोलर उपकरणों को लगाए जाने पर रोक लगा दी गई है। पौने दो साल पहले लिया था निर्णय प्रदेश सरकार ने करीब पौने दो साल पहले 9 सितम्बर 2024 को यह फैसला किया था कि स्थानीय निकायों द्वारा जो सोलर स्ट्रीट लाइट, सोलर स्टड, हाईमास्ट लाइट और सोलर ट्री जैसे उपकरण शासन द्वारा दी गई राशि से या सीएसआर फंड से कराए जाते हैं उस राशि का दुरुपयोग होता है। इसकी वजह यह है कि सोलर के ऐसे उपकरण लगवाने के बाद इन उपकरणों की सफाई दुष्कर है, जिसके चलते ये कुछ समय के अंतराल के बाद बेकार हो जाते हैं। ऐसे में इसको लगाने में खर्च की गई राशि की उपयोगिता जीरो हो जाती है। इसलिए शासन द्वारा बनाई गई उच्च स्तरीय कमेटी ने फैसला लिया कि सोलर लाइट, सोलर ट्री, सोलर हाईमास्ट या अन्य ऐसे उपकरण शासन की ओर से निकायों में नहीं लगाए जाएंगे। पंचायत और ग्रामीण विकास, नगरीय विकास और आवास तथा नवीन और नवकरणीय ऊर्जा समेत सभी विभागों को इस निर्णय पर काम करने के लिए कहा गया था। बताया जाता है कि इसको लेकर पहले भी एक बार पत्र लिखा गया था लेकिन जिलों से आई रिपोर्ट में कहा गया है कि पंचायतों और शहरी वार्डों में ये सोलर उपकरण शासन के खर्च से लगवाए जा रहे हैं जिसके साइड इफेक्ट भी सामने आने लगे हैं। फैसला लेने वाली कमेटी में शामिल हैं ये अफसर राज्य स्तरीय समन्वय समिति की जिस बैठक में यह फैसला किया गया है, उसमें मुख्य सचिव के अलावा अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास और आवास विभाग, अपर मुख्य सचिव वित्त, अपर मुख्य सचिव पंचायत और ग्रामीण विकास, प्रबंध संचालक ऊर्जा विकास निगम, अध्यक्ष एमपी स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी शामिल हैं।

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