Saturday, 10 Oct 2026 | 10:02 PM

Trending :

EXCLUSIVE

कभी खाया है गेहूं का होला? फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम से भरपूर, वेट लॉस में भी करता जबरदस्त काम

authorimg

Last Updated:

Gehu Hola ke Fayde: छतरपुर में गेहूं का होला खाने की परंपरा हिंदू नववर्ष से जुड़ी हुई है और इसे खास महत्व दिया जाता है. गेहूं की हरी बालियों को भूनकर तैयार किया गया होला स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है. इसमें फाइबर, प्रोटीन और विटामिन भरपूर मात्रा में होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा और पाचन को बेहतर बनाते हैं. गांवों में इसे गुड़, मिर्च और आंवले के साथ खाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और बढ़ जाता है. जानिए इस देसी सुपरफूड के फायदे और क्यों आज भी यह परंपरा लोगों के दिलों में जिंदा है.

Gehu Hola Health Benefits: छतरपुर जिले में गेहूं का होला सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि एक परंपरा और सेहत का अनोखा संगम है. जैसे ही चैत्र मास में हिंदू नववर्ष शुरू होता है, गांवों में खेतों से ताजा गेहूं लाकर उसकी बालियों को भूनकर खाने की परंपरा निभाई जाती है. यह सालों पुरानी परंपरा आज भी उतनी ही उत्साह के साथ निभाई जाती है.

क्या होता है गेहूं का होला?
गेहूं की हरी बालियों को आग में हल्का भूनकर जो दाने निकाले जाते हैं, उन्हें ही “होला” कहा जाता है. खास बात यह है कि बाली पूरी तरह पकी नहीं होती, अंदर का दाना हल्का हरा और नरम रहता है, जो खाने में बेहद स्वादिष्ट लगता है.

स्वाद में देसी ट्विस्ट
गांवों में इसे आंवला, मिर्च या खासतौर पर गुड़ के साथ खाया जाता है. गुड़ के साथ इसका स्वाद लाजवाब हो जाता है मीठा, हल्का कुरकुरा और देसी फ्लेवर से भरपूर. यही वजह है कि लोग हर साल इसका बेसब्री से इंतजार करते हैं.

सेहत के लिए क्यों फायदेमंद?
गेहूं का होला पोषण से भरपूर होता है. इसमें फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. यह पाचन को बेहतर बनाता है, शरीर को ऊर्जा देता है और वजन कंट्रोल करने में भी मददगार माना जाता है. यानी स्वाद के साथ सेहत का भी पूरा ख्याल.

इससे बनते हैं कई देसी व्यंजन
सिर्फ होला ही नहीं, बल्कि गेहूं की बालियों से हलवा, पुआ और लपसी जैसे कई पारंपरिक व्यंजन भी बनाए जाते हैं. गांव के लोगों के लिए यह सिर्फ खाना नहीं, बल्कि बचपन की यादों और खुशी का हिस्सा है.

पुराने दिनों की यादें
पहले जब मशीनें नहीं थीं, तब गेहूं को खेत से घर लाने में महीनों लग जाते थे. कटाई, मड़ाई और सफाई की लंबी प्रक्रिया के कारण लोग पहले ही बालियां तोड़कर ले आते थे और उनसे होला बनाकर खाते थे. यही परंपरा आज भी जारी है.

About the Author

Shweta Singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
अभिषेक के लिए ऐश्वर्या राय ने ठुकराई थी फिल्म:शाहरुख की ‘हैप्पी न्यू ईयर’ से कमबैक करने वाली थीं, पत्नी के तौर पर फैसला लिया था

September 2, 2026/
5:00 am

एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन को 2014 में रिलीज हुई फिल्म ‘हैप्पी न्यू ईयर’ के लिए डायरेक्टर फराह खान की पहली...

तस्वीर का विवरण

May 21, 2026/
8:33 pm

ज्वार चीला बनाने की सामग्री: 1 कप ज्वार का आटा, 1 प्याज, 1 छोटा, 1 हरी मिर्च कटी हुई, 2...

हर्षाली ने 20 बार सलमान के हाथ पर थूका था:फिल्म 'बजरंगी भाईजान' के एक्टर मनोज बख्शी ने शूटिंग का किस्सा शेयर किया

June 28, 2026/
1:49 pm

फिल्म बजरंगी भाईजान के सेट से जुड़ा एक किस्सा एक्टर मनोज बख्शी ने हाल ही में शेयर किया। उन्होंने बताया...

DNPA Conclave 2026: AI Era Trust in News

February 26, 2026/
3:43 pm

नई दिल्ली40 मिनट पहले कॉपी लिंक DNPA Conclave2026 के सेशन के दौरान बातचीत करते दैनिक भास्कर कॉर्प के डिप्टी मैनेजिंग...

स्पोर्ट्स अपडेट्स:बेन स्टोक्स ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया; न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरा टेस्ट उनका आखिरी मैच होगा

June 28, 2026/
8:26 pm

इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान बेन स्टोक्स ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है। न्यूजीलैंड के खिलाफ जारी...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

कभी खाया है गेहूं का होला? फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम से भरपूर, वेट लॉस में भी करता जबरदस्त काम

authorimg

Last Updated:

Gehu Hola ke Fayde: छतरपुर में गेहूं का होला खाने की परंपरा हिंदू नववर्ष से जुड़ी हुई है और इसे खास महत्व दिया जाता है. गेहूं की हरी बालियों को भूनकर तैयार किया गया होला स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है. इसमें फाइबर, प्रोटीन और विटामिन भरपूर मात्रा में होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा और पाचन को बेहतर बनाते हैं. गांवों में इसे गुड़, मिर्च और आंवले के साथ खाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और बढ़ जाता है. जानिए इस देसी सुपरफूड के फायदे और क्यों आज भी यह परंपरा लोगों के दिलों में जिंदा है.

Gehu Hola Health Benefits: छतरपुर जिले में गेहूं का होला सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि एक परंपरा और सेहत का अनोखा संगम है. जैसे ही चैत्र मास में हिंदू नववर्ष शुरू होता है, गांवों में खेतों से ताजा गेहूं लाकर उसकी बालियों को भूनकर खाने की परंपरा निभाई जाती है. यह सालों पुरानी परंपरा आज भी उतनी ही उत्साह के साथ निभाई जाती है.

क्या होता है गेहूं का होला?
गेहूं की हरी बालियों को आग में हल्का भूनकर जो दाने निकाले जाते हैं, उन्हें ही “होला” कहा जाता है. खास बात यह है कि बाली पूरी तरह पकी नहीं होती, अंदर का दाना हल्का हरा और नरम रहता है, जो खाने में बेहद स्वादिष्ट लगता है.

स्वाद में देसी ट्विस्ट
गांवों में इसे आंवला, मिर्च या खासतौर पर गुड़ के साथ खाया जाता है. गुड़ के साथ इसका स्वाद लाजवाब हो जाता है मीठा, हल्का कुरकुरा और देसी फ्लेवर से भरपूर. यही वजह है कि लोग हर साल इसका बेसब्री से इंतजार करते हैं.

सेहत के लिए क्यों फायदेमंद?
गेहूं का होला पोषण से भरपूर होता है. इसमें फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. यह पाचन को बेहतर बनाता है, शरीर को ऊर्जा देता है और वजन कंट्रोल करने में भी मददगार माना जाता है. यानी स्वाद के साथ सेहत का भी पूरा ख्याल.

इससे बनते हैं कई देसी व्यंजन
सिर्फ होला ही नहीं, बल्कि गेहूं की बालियों से हलवा, पुआ और लपसी जैसे कई पारंपरिक व्यंजन भी बनाए जाते हैं. गांव के लोगों के लिए यह सिर्फ खाना नहीं, बल्कि बचपन की यादों और खुशी का हिस्सा है.

पुराने दिनों की यादें
पहले जब मशीनें नहीं थीं, तब गेहूं को खेत से घर लाने में महीनों लग जाते थे. कटाई, मड़ाई और सफाई की लंबी प्रक्रिया के कारण लोग पहले ही बालियां तोड़कर ले आते थे और उनसे होला बनाकर खाते थे. यही परंपरा आज भी जारी है.

About the Author

Shweta Singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.