ग्वालियर हाईकोर्ट से बलात्कार पीड़िता को मिली राहत:10 हफ्ते के गर्भ को मेडिकल बोर्ड की निगरानी में समाप्त करने का आदेश,आज जेएएच में होगी प्रक्रिया

ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने दुष्कर्म पीड़िता के पक्ष में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए उसके गर्भपात (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी) की अनुमति दे दी है। कोर्ट के आदेश के अनुसार शुक्रवार (17 अप्रैल को) सुबह 10 बजे जीआर मेडिकल कॉलेज में यह प्रक्रिया कराई जाएगी। पीड़िता की ओर से दायर याचिका में बताया गया कि 11 जनवरी को आरोपियों द्वारा उसे घर से ले जाकर दुष्कर्म किया गया, जिसके परिणामस्वरूप वह गर्भवती हो गई। वर्तमान में युवती की उम्र 18 वर्ष 5 माह बताई गई है। परिवार ने अदालत को जानकारी दी कि वे आर्थिक रूप से बच्चे का पालन-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं। साथ ही गर्भ के कारण युवती को लगातार शारीरिक पीड़ा, मानसिक आघात और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड से मांगी थी रिपोर्ट मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने कमलाराजा अस्पताल एवं जीआर मेडिकल कॉलेज के मेडिकल बोर्ड से रिपोर्ट मांगी थी। मेडिकल जांच के बाद बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पीड़िता का गर्भ 10 सप्ताह 3 दिन का है और सभी आवश्यक मेडिकल पैरामीटर सामान्य हैं। सुरक्षित गर्भपात का भरोसा दिलाया मेडिकल बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि विशेषज्ञों की निगरानी और आवश्यक सुविधाओं के साथ गर्भपात सुरक्षित रूप से किया जा सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने पीड़िता को राहत देते हुए गर्भपात की अनुमति दी, जिससे उसे शारीरिक और मानसिक कष्ट से राहत मिल सके।
भोपाल में बिजनेसमैन की संदिग्ध हालात में मौत:पूल में नहाते समय साइलेंट अटैक का अंदेशा, स्विमिंग करते हुए बेसुध हो गए

भोपाल के टीटी नगर थाना क्षेत्र स्थित तरुण पुष्कर में बुधवार शाम एक कारोबारी की स्वीमिंग पूल में संदिग्ध हालत में मौत हो गई। स्वीमिंग पूल में महज चार फिट पानी होने के कारण अनुमान लगाया जा रहा है कि उन्हें साइलेंट अटैक आया है। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। शार्ट पीएम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारण सामने आ सकेंगे। रोज स्विमिंग के लिए जाते थे पुलिस के मुताबिक अमतलाश कॉलोनी शाहपुरा निवासी 63 साल के संजय त्यागी बिजनेसमैन थे और रोज शाम को तरुण पुष्कर स्वीमिंग के लिए जाते थे। बुधवार शाम भी वह स्वीमिंग के लिए तरुण पुष्कर गए थे। शाम करीब छह बजे वह स्वीमिंग करने के दौरान वह बेसुध हो गए। सीपीआर दिया, लेकिन सांसे नहीं लौटी उन्हें स्वीमिंग पुल से बाहर निकालकर ट्रेनर ने सीपीआर दी लेकिन उनकी सांसे नहीं लौटी। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, वहां डॉक्टर ने चेक करने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया।
याचिका-प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा में अपात्रों को दिए बोनस अंक:जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा- मेरिट लिस्ट होगी फैसले के अधीन; दो सप्ताह में जवाब पेश करो

मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 के परीक्षा परिणामों में कथित गड़बड़ी और अपात्र उम्मीदवारों को गलत तरीके से 5 प्रतिशत बोनस अंक दिए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। बुधवार को जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने कहा कि मेरिट लिस्ट इस याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन होगी। कोर्ट ने मामले में राज्य शासन सहित कर्मचारी चयन मंडल को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। 14964 उम्मीदवारों ने प्राप्त किए बोनस अंक नरसिंहपुर निवासी सोनम अगरैया एवं अन्य उम्मीदवारों की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा, विशाल बघेल एवं आयुष बघेल ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 भर्ती विज्ञापन की कंडिका 7.7 के तहत केवल उन उम्मीदवारों को 5 फीसदी बोनस अंक मिलने थे, जिनके पास ‘भारतीय पुनर्वास परिषद’ (आरसीआई) से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा में डिप्लोमा है। चयन सूची में लगभग 14 हजार 964 उम्मीदवारों ने खुद को इस श्रेणी में दिखाकर बोनस अंक प्राप्त कर लिए हैं। उम्मीदवारों से नहीं मांगा गया आरसीआई सर्टिफिकेट याचिका में ‘भारतीय पुनर्वास परिषद’ के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया है कि पूरे मध्य प्रदेश में आरसीआई पोर्टल पर केवल 2,194 कार्मिक और 3,077 पेशेवर ही पंजीकृत हैं। ऐसे में लगभग 15 हजार उम्मीदवारों का विशेष शिक्षा प्रमाणपत्र धारक होना प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत होता है। लोक शिक्षण संचालनालय ने भी जनवरी 2026 में विभाग को आगाह किया था कि लगभग 18 हजार उम्मीदवारों ने ‘हां’ का विकल्प चुना है, जो अत्यधिक प्रतीत होता है। इसके बावजूद, सुधार के लिए पोर्टल खोलने के बाद भी मंडल द्वारा उम्मीदवारों से आरसीआई पंजीकरण संख्या या प्रमाणपत्र नहीं मांगा गया। डिक्लेरेशन के आधार पर सीधे बोनस अंक दे दिए गए याचिका में बताया गया कि बिना किसी भौतिक सत्यापन के सॉफ्टवेयर के माध्यम से उम्मीदवारों के डिक्लेरेशन के आधार पर सीधे बोनस अंक दे दिए गए। इससे वास्तविक और योग्य उम्मीदवारों की मेरिट गिर गई और वे चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए। दलील दी गई कि झूठी जानकारी देकर चयन होने के बाद सैकड़ों अभ्यर्थी, जिन्हें मेरिट में 5 प्रतिशत बोनस अंक मिले हैं, वे भी हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे हैं। उन्होंने कहा है कि जल्दबाजी में हुई त्रुटि के कारण उनके द्वारा बोनस अंक का लाभ प्राप्त कर लिया गया, जबकि उनके पास उससे संबंधित कोई भी प्रमाणपत्र नहीं है। बोनस अंक देकर नई मेरिट सूची करने की मांग याचिका में 27 फरवरी 2026 को जारी मेरिट लिस्ट को रद्द करने की मांग की गई है। केवल वैध आरसीआई प्रमाणपत्र धारकों को ही बोनस अंक देकर नई मेरिट सूची जारी करने की मांग की गई है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा 9 अक्टूबर 2025 से 13 अक्टूबर 2025 तक मध्य प्रदेश के 11 शहर भोपाल, इंदौर, जबलपुर, खंडवा, नीमच, रतलाम, रीवा, सागर, सतना, सीधी एवं उज्जैन में स्कूल शिक्षा विभाग तथा जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत प्राथमिक शिक्षक के कुल 13,089 पदों के लिए चयन परीक्षा-2025 का आयोजन किया था। इस परीक्षा में कुल 1,03,494 अभ्यर्थी सम्मिलित हुए। परीक्षा का परिणाम 11,978 पदों (87 प्रतिशत) के लिए 27 फरवरी 2026 को जारी किया था।
सीएम हाउस में हुई बीजेपी कोर ग्रुप की पहली बैठक:देर से पहुंचे विजयवर्गीय, शिवराज को छोड़कर डेढ़ दर्जन दिग्गज रहे मौजूद

सीएम हाउस में बीजेपी के नए कोर ग्रुप की पहली बैठक हुई। करीब डेढ़ घंटे चली इस बैठक में केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को छोड़कर बाकी सभी नेतागण शामिल हुए। शिवराज पटना में पर्यवेक्षक होने के चलते बैठक में नहीं आ सके। बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने कोर ग्रुप के सदस्यों के साथ चर्चा की। विजयवर्गीय देर से पहुंचे बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय काफी देर से पहुंचे। विजयवर्गीय दिल्ली में थे। वे पौने नौ बजे के करीब सीएम हाउस पहुंचे और बैठक में शामिल हुए। केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने तय समय के मुताबिक बैठक खत्म होने पहले ही दिल्ली रवाना हो गए। बैठक के बाद सीएम हाउस में कोर ग्रुप में शामिल नेताओं के लिए डिनर भी रखा गया। बैठक में ये हुए शामिल राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, सीएम डॉ. मोहन यादव, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह, केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, राजेन्द्र शुक्ल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, एससी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य, पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, मंत्री संपतिया उईके, सांसद व प्रदेश महामंत्री लता वानखेड़े, पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया बैठक में शामिल हुए। संगठन के काम और आगे की योजना पर हुई चर्चा कोर ग्रुप की बैठक में बीजेपी के संगठन और सरकार के अब तक के कामों पर चर्चा हुई। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पार्टी के जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी संवाद करेंगे। सूत्र बताते हैं कि बैठक में बताया गया कि निगम-मंडलों को लेकर मामला केन्द्रीय नेतृत्व के स्तर पर स्वीकृति के लिए लंबित है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक नियुक्तियां शुरु हो सकती हैं।
बीजेपी ऑफिस से मिलेगी डॉक्टरों की सलाह:आज सीएम–प्रदेशाध्यक्ष शुरू करेंगे हेल्पलाइन नंबर; आर्थिक मदद के लिए मार्गदर्शन भी ले सकेंगे

भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए आज का दिन बड़ी राहत लेकर आया है। संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर आज शाम 5 बजे बीजेपी प्रदेश कार्यालय में ‘सेवा प्रकल्प’ का विधिवत शुभारंभ होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल और उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल इस विशेष सहायता केंद्र की शुरुआत करेंगे। इसके बाद कार्यकर्ताओं को गंभीर बीमारियों के इलाज और डॉक्टरी परामर्श के लिए अब और कहीं भटकने की जरूरत नहीं होगी। हेल्पलाइन चालू: 9203597200 और 9203697200 पर ले सकेंगे मदद आज से ही कार्यकर्ताओं के लिए दो विशेष मोबाइल नंबर सक्रिय कर दिए जाएंगे। इन नंबरों पर कॉल करके पार्टी के सक्रिय सदस्य और उनके परिजन घर बैठे ही अनुभवी डॉक्टरों से सलाह ले सकेंगे। इस प्रकल्प का सीधा उद्देश्य ‘स्वस्थ कार्यकर्ता सशक्त संगठन’ की अवधारणा को जमीन पर उतारना है। बीजेपी चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक डॉ. विशाल सिंह बघेल के अनुसार, यह केंद्र प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प को कार्यकर्ताओं के स्वास्थ्य सुरक्षा कवच के रूप में साकार करेगा। दफ्तर में एक्सपर्ट्स का पैनल: कैंसर और हार्ट जैसी बीमारियों पर फोकस पार्टी कार्यालय में बनाए गए विशेष कक्ष में आज से चिकित्सा विशेषज्ञ अपनी सेवाएं देना शुरू करेंगे। यहां न केवल प्राथमिक स्वास्थ्य परामर्श मिलेगा, बल्कि आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज में आ रही दिक्कतों को भी मौके पर ही दूर किया जाएगा। इस प्रकल्प में कैंसर, हृदय रोग और किडनी जैसी जानलेवा बीमारियों को प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है। अगर किसी कार्यकर्ता को तत्काल खून की जरूरत पड़ती है, तो सेवा केंद्र की ‘रक्तदान टीम’ को भी आज से ही अलर्ट मोड पर रखा गया है। आर्थिक मदद के लिए खुद फॉलो-अप करेगी टीम आर्थिक रूप से कमजोर कार्यकर्ताओं के लिए यह केंद्र एक वरदान साबित होगा। आज से लागू हुई व्यवस्था के तहत, अस्पताल के एस्टीमेट और आय प्रमाण पत्र जैसे जरूरी कागजात जमा करते ही प्रकल्प की टीम सक्रिय हो जाएगी। यह टीम न केवल मुख्यमंत्री सहायता कोष और स्वेच्छा अनुदान के लिए त्वरित अनुशंसा करेगी, बल्कि संबंधित अस्पताल से संपर्क कर राशि स्वीकृत होने तक पूरा फॉलो-अप भी खुद करेगी। आवेदन की इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल और पारदर्शी रखा गया है, ताकि दूर-दराज के गांवों से आने वाले कार्यकर्ता को भी समय पर इलाज मिल सके। डिजिटल होगा पूरा सिस्टम, जल्द मोबाइल ऐप भी सेवा प्रकल्प को आधुनिक बनाने के लिए आज से ही सभी आवेदनों की डिजिटल ट्रैकिंग शुरू कर दी गई है। आने वाले समय में कार्यकर्ताओं के लिए एक मोबाइल ऐप भी पेश किया जाएगा, जिससे वे सीधे अपने फोन से मदद की गुहार लगा सकेंगे। फिलहाल व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के जरिए इस सुविधा की जानकारी प्रदेश के हर बूथ तक पहुंचाने का अभियान भी आज से तेज कर दिया गया है।
बड़ा तालाब किनारे कब्जे पर चली JCB:भोपाल के सेवनिया, गौरागांव में कार्रवाई; बाउंड्रीवॉल समेत पक्के निर्माण तोड़े

भोपाल के बड़ा तालाब को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए जिला प्रशासन ने सोमवार को फिर से कार्रवाई की। टीटी नगर एसडीएम वृत्त की टीम सेवनिया और गौरा गांव पहुंची। यहां पर बड़ा तालाब के दायरे में ही बाउंड्रीवॉल समेत कई पक्के निर्माण थे। जिन्हें जेसीबी की मदद से हटा दिया गया। एसडीएम अर्चना शर्मा, तहसीलदार कुणाल रावत के निर्देशन में टीमों ने यह कार्रवाई की। इस दौरान पुलिस बल भी मौजूद रहा। ताकि, हंगामा होने पर निपटा जा सके। दोपहर तक कार्रवाई चली। इस दौरान आधा दर्जन से ज्यादा अतिक्रमण हटा दिए गए। बता दें कि प्रशासन ने तालाब के चारों ओर कुल 347 अतिक्रमण चिन्हित किए हैं, जिन्हें अगले 15 दिन में हटाया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भोज वेटलैंड रूल्स लागू होने (16 मार्च 2022) के बाद बने सभी निर्माण हटाए जाएंगे। बड़ा तालाब के FTL (फुल टैंक लेवल) से 50 मीटर तक के अतिक्रमण पर कार्रवाई की जा रही है। इसके चलते सोमवार को यह कार्रवाई की गई। कार्रवाई की देखिए तस्वीरें… दो महीने में लिस्टेड किए कब्जे पिछले दो महीने से जिला प्रशासन अतिक्रमण को चिह्निंत कर रहा था। टीटी नगर एसडीएम वृत्त के गौरा गांव, बिसनखेड़ी में सबसे ज्यादा कब्जे सामने आए थे। वहीं, बैरागढ़, बहेटा में भी लोगों ने तालाब की सीमा पर निर्माण कर लिए हैं। किस दिन, कहां होगी कार्रवाई? गांवों में सबसे ज्यादा कब्जे टीटी नगर एसडीएम सर्कल के गौरा गांव और बिसनखेड़ी में सबसे ज्यादा अतिक्रमण सामने आए हैं। इसके अलावा बैरागढ़ और बहेटा क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर निर्माण किए गए हैं। वन विहार नेशनल पार्क क्षेत्र में भी सीमांकन के दौरान करीब 2.5 किमी में 100 से ज्यादा पिलर लगाए जाने की बात सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्माण वेटलैंड नियमों के खिलाफ हो सकता है। बैरागढ़ सर्कल में भी बड़ी संख्या में अतिक्रमण सामने आया है। मामला NGT तक पहुंचने की तैयारी पर्यावरणविद् राशिद नूर के मुताबिक, मामला गंभीर है और इसे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में उठाया जाएगा।
मुख्य सचिव को कोर्ट की अवमानना से बचाने के निर्देश:GAD ने जारी की गाइडलाइन, स्थायी अधिवक्ताओं की नियुक्ति के लिए कहा

मध्य प्रदेश में विभागीय अफसरों की लापरवाही से होने वाली सरकार की फजीहत और मुख्य सचिव को कोर्ट की अवमानना से बचाने के लिए राज्य सरकार ने नई व्यवस्था तय की है। इसमें सरकार की सम्पत्ति की सुरक्षा के साथ मुख्य सचिव को कोर्ट में घसीटने से बचाने पर फोकस किया है। सभी विभाग प्रमुखों और विभागाध्यक्षों से सामान्य प्रशासन विभाग ने कहा है कि कोर्ट के मामले में पक्षकार के रूप में मुख्य सचिव का नाम हटाए जाने की कार्यवाही कराना है क्योंकि मुख्य सचिव किसी विभाग के भारसाधक सचिव नहीं होते हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके लिए जारी ताजा निर्देशों में कहा है कि विभाग के सचिव और कलेक्टर की यह जिम्मेदारी होगी कि वह यह देखें कि जिन मामलों में मुख्य सचिव के माध्यम से पक्षकार बनाकर राज्य शासन के विरुद्ध कोर्ट में केस या याचिका लगाई जाती है उसमें समय पर मुख्य सचिव का नाम हटाने का काम कराया जाए। जीएडी ने इसको लेकर जारी निर्देश में कहा है कि सभी विभागों द्वारा मध्यप्रदेश राज्य मुकदमा प्रबंधन नीति 2018 के अनुरूप कर्मचारियों की सेवा संबंधी शिकायतों के निराकरण के लिए संस्थागत व्यवस्था बनाई जाएगी और सेवा विवादों से संबंधित अभ्यावेदनों का समय पर निराकरण करने का प्रयास किया जाएगा। कोर्ट में पक्ष रखने विधि अधिकारियों, स्थायी अधिवक्ताओं की नियुक्ति करें निर्देशों में यह भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में सरकार का पक्ष तेजी से रखने के लिए राज्य के विधि अधिकारियों को तथा सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखने स्थायी अधिवक्ताओं की नियुक्ति की जानी चाहिए। अगर किसी मामले में कानूनी जटिलता हो और किसी और को अधिवक्ता नियुक्त किया जाना हो तो ऐसा प्रस्ताव विभागीय मंत्री के प्रशासकीय अनुमोदन के साथ विधि विभाग को भेजा जाएगा। इसमें प्रशासनिक विभाग द्वारा उनके नाम और सेवा शर्तों का साफ तौर पर उल्लेख किया जाएगा। इसके लिए विधि विभाग द्वारा अन्तरविभागीय समिति गठित की गई है जिसमें भारसाधक सचिव वित्त विभाग के होंगे और कमेटी के अध्यक्ष होंगे। सदस्य के रूप में भारसाधक सचिव विधि विभाग तथा संबंधित प्रशासकीय विभाग के भारसाधक सचिव शामिल किए जाएंगे। सरकार को नुकसान तो वसूली अफसर से हो जारी निर्देशों में कहा है कि अगर किसी प्रकरण में विलंब, गलती, चूक और विषय वस्तु से भिन्नता के कारण सरकार के खिलाफ आदेश जारी होता है तो विभाग की यह जिम्मेदारी होगी कि ऐसे मामले में संबंधित अफसर की जिम्मेदारी तय करते हुए कार्यवाही करें और अगर सरकार को क्षति हुई है तो संबंधित अधिकारी से वसूली की जाए। इसके लिए प्रभारी अधिकारी के दायित्व तय किए गए हैं। जीएडी ने सरकारी जमीन से संबंधित मामलों को लेकर भी गाइडलाइन जारी की है। इसमें कहा है कि कलेक्टर और जिला प्राधिकारी अपने क्षेत्र में कोर्ट द्वारा सरकार के खिलाफ दिए गए आदेश के मामले में शासकीय अधिवक्ता से सलाह लेकर अपील पेश करेंगे। जहां कलेक्टर के सक्षम होने की स्थिति न हो, वहां विभाग प्रमुख को निर्णय के लिए प्रस्ताव भेजे जाएंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने अवमानना के मामलों में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के लिए कहा है। प्रशासनिक प्रकरणों के निराकरण के लिए नई कार्यप्रणाली लागू सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के अनुसार प्रशासनिक प्रकरणों के निस्तारण में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही समयसीमा में पूरी करें। साथ ही, हर स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी निर्धारित की गई है। निर्देशों में कहा गया है कि प्रकरणों के परीक्षण के दौरान सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच अनिवार्य होगी। यदि किसी प्रकरण में जानकारी अधूरी पाई जाती है, तो संबंधित पक्ष से तत्काल जानकारी प्राप्त कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा, प्रकरणों के निराकरण में अनावश्यक विलंब होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। सभी विभाग लंबित कोर्ट मामलों की नियमित समीक्षा करेंगे सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अपील, पुनरीक्षण और समीक्षा से जुड़े मामलों के लिए अलग-अलग प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इन मामलों में निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन करना होगा। विशेष रूप से विलंब से प्राप्त प्रकरणों में ‘कंडोनेशन ऑफ डिले’ (विलंब क्षमा) के प्रावधानों का उचित उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि सभी विभाग नियमित रूप से अपने लंबित प्रकरणों की समीक्षा करेंगे और उनकी प्रगति की जानकारी उच्च अधिकारियों को उपलब्ध कराएंगे। साथ ही, रिकॉर्ड संधारण और दस्तावेजों के सुरक्षित रख-रखाव पर भी बल दिया गया है।
हज यात्रियों की परेशानी पर भोपाल में प्रदर्शन:चूड़ियां लेकर औकाफ-ए-शाही पहुंचीं महिलाएं; रुबात बंद होने पर हाजियों का विरोध

भोपाल में हज यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोग औकाफ-ए-शाही कार्यालय पहुंचे, जहां महिलाओं ने चूड़ियां लेकर विरोध जताया। आरोप है कि मक्का-मदीना की रुबात (धर्मशाला) बंद होने से हाजियों पर लाखों का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। कमेटी ने चेतावनी दी है कि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा। बता दें कि हज यात्रा के लिए इस साल करीब 8 हजार लोग मध्य प्रदेश से जा रहे हैं। 18 अप्रैल को भारत से पहली फ्लाइट सऊदी अरब जाएगी। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पोस्टर और बैनर लेकर नारेबाजी की। पोस्टर्स पर लिखा था “शाही औकाफ होश में आओ, लापरवाही नहीं चलेगी, जवाब दो”, “सोते हुए शहर को जगाने आए हैं, बंद रुबातों को खुलवाने आए हैं”, “रुबातें हमारा हक है, बहाल करो”। महिलाओं ने चूड़ियां देकर जताया विरोध प्रदर्शन में शामिल सरवर जहां ने कहा कि पिछले कई वर्षों से भोपाल के हाजी रुबात सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने कहा, “यह हमारी बेगमात की धरोहर है। अगर जिम्मेदार लोग काम नहीं कर पा रहे हैं, तो उन्हें चूड़ियां पहनकर घर बैठ जाना चाहिए। आज एक महिला बैठी है, कल सैकड़ों महिलाएं भी आ सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज की महिलाएं धूप में बैठकर विरोध कर रही हैं, जबकि अधिकारी मिलने तक नहीं आए। 6 साल से मदीना की रुबात बंद, इस साल मक्का भी प्रभावित जिम्मेदार गायब, जवाब देने को कोई तैयार नहीं प्रदर्शन में शामिल आबिद मोहम्मद खान ने आरोप लगाया कि एक हफ्ते पहले लिखित आवेदन देने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा, “कार्यालय में कोई जिम्मेदार मौजूद नहीं है, मोबाइल बंद हैं। जब हमारी खुद की रुबातें मौजूद हैं, तो हमें किराए पर क्यों रुकना पड़ रहा है?” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समन्वय की कमी और आंतरिक विवादों के कारण रुबात व्यवस्था प्रभावित हुई है। प्रशासन बोला- उच्च स्तर पर चल रहे प्रयास औकाफ-ए-शाही के प्रशासनिक प्रबंधक फारूक किबरिया ने कहा कि मामले में उच्च स्तर पर प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि सऊदी सरकार की प्रक्रियाओं में देरी के कारण इजाजतनामा मिलने में समय लगा है, जिससे भवन लेने में दिक्कत आई। उन्होंने कहा कि बोर्ड, चेयरमैन और सरकार के स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द समाधान की उम्मीद है। कमेटी की मांगें रुबात क्या है रुबात दरअसल मक्का और मदीना में बनी ऐसी धर्मशालाएं या सराय होती हैं, जिन्हें पुराने समय में रियासतों और नवाबी दौर में हज यात्रियों की सुविधा के लिए बनवाया गया था। इनका मकसद यह था कि संबंधित रियासतों जैसे भोपाल के हाजी वहां मुफ्त या बेहद कम खर्च में ठहर सकें। भोपाल की बेगमों ने भी अपने दौर में हाजियों के लिए मक्का-मदीना में रुबात बनवाई थीं, ताकि शहर के लोग हज के दौरान आर्थिक बोझ से बच सकें और अपनी “रियासती धरोहर” का लाभ ले सकें। रुबात सिर्फ ठहरने की जगह नहीं, बल्कि नवाबी दौर की एक ऐतिहासिक विरासत मानी जाती है। शहर की बेगमों द्वारा मक्का और मदीना में बनवाई गई इन रुबातों का उद्देश्य भोपाल, सीहोर और रायसेन के हाजियों को हज के दौरान मुफ्त या रियायती ठहरने की सुविधा देना था। यही वजह है कि आज जब ये रुबातें बंद हैं या हाजियों को उपलब्ध नहीं हो पा रहीं, तो इसे सिर्फ सुविधा का नहीं बल्कि “हक और विरासत” का मुद्दा मानकर विरोध हो रहा है।
108 देशों में एक साथ गूंजा नवकार महामंत्र:जवाहर चौक जैन मंदिर में सामूहिक पाठ; विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना

विश्व शांति, मानव कल्याण और सभी के मंगलमय जीवन की कामना के साथ राजधानी में नवकार महामंत्र की स्वर लहरियां गूंज उठीं। इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन जीतो के तत्वावधान में भारत सहित दुनिया के 108 देशों में एक साथ नवकार महामंत्र का पाठ किया गया। भोपाल में यह आयोजन जवाहर चौक स्थित जैन मंदिर परिसर में श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में आचार्य विद्यासागर महाराज एवं आचार्य समय सागर महाराज के शिष्य निर्यापक मुनि संभव सागर महाराज के सानिध्य में सामूहिक पाठ हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर मंत्र जाप किया, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। दिल्ली में अमित शाह रहे मुख्य अतिथि राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि जैन धर्म के सिद्धांतों में क्षमा और नवकार मंत्र विश्व शांति के लिए एक सशक्त आधार हैं। यह अनुष्ठान सार्वभौमिक संदेश देता है। भोपाल में घर-घर हुआ पाठ जीतो के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत जैन और सचिव वैभव चौधरी ने बताया कि इस आयोजन के तहत भोपाल में भी घर-घर नवकार महामंत्र का पाठ किया गया। इससे समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संदेश गया। मुनि संभव सागर महाराज ने कहा कि नवकार महामंत्र शाश्वत और अनंत गुणों का धारक है। इसमें पंच परमेष्ठियों का स्मरण कर आत्मशुद्धि और आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। जनप्रतिनिधि और समाजजन रहे मौजूद कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग, संस्कृति आयुक्त जैन सहित समाज के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इसमें डॉ. प्रशांत जैन, वैभव चौधरी, सुनील जैन, मनोज पारेख, प्रतिभा टोंग्या, पूजा जैन, प्रखर चौधरी, आयुष मोदी और अन्य सदस्य शामिल हुए। प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि जीतो संस्था देश-विदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही है। यह आयोजन भी उसी कड़ी का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विश्व शांति और मानवता का कल्याण है।
HC Allows MP Board, CBSE Students Form Fill

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने हजारों छात्र-छात्राओं के हित में विद्यालयों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए एमपी संस्कृत बोर्ड की नई नीति पर रोक लगा दी है। साथ ही निर्देश दिया है कि MP बोर्ड और CBSE के छात्रों को 10वीं और 12वीं के फॉर्म भरने की अनुमति . सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि वे छात्र, जिन्होंने 9वीं और 11वीं कक्षा क्रमशः MP बोर्ड या CBSE से उत्तीर्ण की है, उन्हें 10वीं और 12वीं कक्षा के फॉर्म भरने की अनुमति दी जाए। उच्च न्यायालय ने 27.06.2024 की नई नीति के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी, जिसमें अन्य बोर्डों से उत्तीर्ण छात्रों को संस्कृत बोर्ड के विद्यालयों में प्रवेश नहीं दिया जा रहा था। मंगलवार को सुनवाई के दौरान सभी 11 याचिकाकर्ता उपस्थित रहे। उनकी ओर से सीनियर एडवोकेट नरिंदरपाल सिंह रूपराह, एडवोकेट नवतेज सिंह रूपराह और मुस्कान आनंद ने पक्ष रखा। नीति में बदलाव से प्रभावित हुए हजारों छात्र, कोर्ट से मिली राहत याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट नवतेज सिंह ने अदालत को बताया कि पूर्व में एमपीएसएस (संस्कृत बोर्ड) अपने संबद्ध विद्यालयों को यह अनुमति देता था कि वे ऐसे छात्रों को प्रवेश दें, जिन्होंने अपनी पिछली कक्षा एमपी बोर्ड (माध्यमिक शिक्षा मंडल, भोपाल) या सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) से उत्तीर्ण की हो। लेकिन अचानक बिना किसी औचित्य के नीति में बदलाव कर दिया गया। इस निर्णय से हजारों छात्र प्रभावित हुए और 11 विद्यालयों को राहत के लिए उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। उच्च न्यायालय का यह अंतरिम आदेश उन हजारों छात्रों के लिए राहत लेकर आया है, जो अपनी पिछली कक्षा एमपी बोर्ड या सीबीएसई से उत्तीर्ण करने के बाद संस्कृत बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों में 10वीं और 12वीं की पढ़ाई कर रहे हैं। विवादित आदेश पर रोक, छात्रों को 4 दिन में फॉर्म भरने की राहत याचिकाकर्ता के तर्कों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने माना कि विवादित आदेश दिनांक 27.06.2024 पर स्थगन आवश्यक है। साथ ही निर्देश दिया कि विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों को अगले चार दिनों के भीतर फॉर्म भरने की अनुमति दी जाए। आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन प्रतिवादी संस्था द्वारा अगले चार दिनों में किया जाएगा। इसके बाद छात्र निर्धारित अवधि में परीक्षा शुल्क जमा करेंगे। सभी औपचारिकताएं पूर्ण होने पर उन्हें नियमानुसार प्रवेश पत्र जारी कर परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी।







