Monday, 25 May 2026 | 07:25 PM

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जुबिन नौटियाल ने बचपन की दोस्त से की शादी:उत्तराखंड में ट्रेडिशनल तरीके से लिए सात फेरे, रिसेप्शन की तैयारी

जुबिन नौटियाल ने बचपन की दोस्त से की शादी:उत्तराखंड में ट्रेडिशनल तरीके से लिए सात फेरे, रिसेप्शन की तैयारी

उत्तराखंड के देहरादून के रहने वाले बॉलीवुड सिंगर जुबिन नौटियाल ने शादी कर ली है। उन्होंने उत्तराखंड में बेहद ही ट्रेडिशनल तरीके से अपनी बचपन की दोस्त के साथ सात फेरे लिए। शादी में केवल परिवार के सदस्य और नजदीकी लोग ही शामिल हुए थे। अब जुबिन नौटियाल अपने रिसेप्शन की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने देहरादून में अपने पैतृक गांव क्यारी में शादी की है। कौन हैं जुबिन नौटियाल? जुबिन नौटियाल ने सॉफ्ट आवाज के दम पर बॉलीवुड में खास पहचान बनाई है। उन्हें प्लेबैक सिंगिंग के लिए जाना जाता है। उनका जन्म 14 जून 1989 को उत्तराखंड के देहरादून में हुआ। अपनी सॉफ्ट और रोमांटिक आवाज के कारण उन्होंने इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाई है। जुबिन ने अपने करियर की शुरुआत म्यूजिक रियलिटी शो X Factor India से की थी। इसके बाद उन्होंने फिल्मों में गाने गाने शुरू किए और धीरे-धीरे हिट सिंगर्स की लिस्ट में शामिल हो गए। उनके गाए कई गाने सुपरहिट रहे हैं। ‘रातां लंबियां’, ‘तुम ही आना’, ‘लुट गए’, ‘काबिल हूं’ और ‘अंख लड़ जावे’ जैसे गानों ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। उनकी आवाज खासतौर पर रोमांटिक और इमोशनल गानों के लिए पसंद की जाती है। जुबिन नौटियाल की देशभर में मजबूत फैन फॉलोइंग है। वह लाइव कॉन्सर्ट और स्टेज परफॉर्मेंस के लिए भी जाने जाते हैं। पर्सनल लाइफ की बात करें तो जुबिन अपनी निजी जिंदगी को लाइमलाइट से दूर रखते हैं। हाल ही में उनकी शादी को लेकर खबरें चर्चा में हैं, हालांकि इस पर उनकी ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। हम इस खबर को लगातार अपडेट कर रहे हैं…

Asha Bhosle Profile: Singers Biography, Love Story

Asha Bhosle Profile: Singers Biography, Love Story

15 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलिवुड की दिग्गज गायिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। 1960-70 के दशक की इंडियन पॉप और कैबरे आर्टिस्ट कही जाने वाली आशा ने 8 दशक के करियर में 12,000 से भी ज्यादा गाने गाए हैं। भारतीय संगीत जगत में अगर किसी आवाज ने हर दौर, हर जॉनर और हर इमोशन को जिया है, तो वो हैं आशा भोसले। उन्होंने म्यूजिक इंटस्ट्री में अपनी अलग छाप छोड़ी है। कैबरे से गजल तक, डिस्को से क्लासिकल तक, ऐसा कुछ नहीं जो उनसे अनछुआ रह गया हो। उनके सबसे पॉपुलर गानों में ‘उड़े जब-जब जुल्फें तेरी’, ‘दम मारो दम’, ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘चुरा लिया है तुमने’, ‘दिल चीज क्या है’ और ‘इन आंखों की मस्ती’ शामिल है। बॉलिवुड प्लेबैक सिंगर आशा भोसले का जन्म म्यूजिक और थिएटर में अपनी पैठ जमा चुके परिवार में हुआ। पिता दीनानाथ मंगेशकर मराठी स्टेज एक्टर और हिंदुस्तानी क्लासिकल सिंगर थे। मां गृहिणी और परिवार में और 4 भाई-बहन थे। सबसे बड़ी बहन लता मंगेशकर थीं। सिंगर्स को मिमिक कर गाना सीखा आशा 9 साल की थी जब तंग हाल में पिता का देहांत हो गया। गुजर-बसर करने के लिए परिवार पहले पुणे से कोल्हापुर फिर मुंबई आ गया। तब घर की जिम्मेदारियां उठाने के लिए सिर्फ 13 साल की उम्र में बड़ी बहन लता मंगेशकर ने फिल्मों में गाना शुरू कर दिया। जल्द आशा भी उनके साथ हो लीं। गाने की कोई फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं हुई थी, पर पिता से मिली विरासत ने उन्हें हमेशा क्लासिकल म्यूजिक के करीब रखा था। बचपन में अक्सर गानें सुनकर खुद की आवाज में उसे गाने की कोशिश करतीं। सिंगर्स को मिमिक कर उन्हें कॉपी करतीं। इसकी वजह से उनकी आवाज में वो लचीलापन आया जिसकी बदौलत उन्होंने गजल, पॉप, कैबरे, भजन से लेकर फोक तक, लगभग हर जॉनर में गाया है। वेस्टर्न म्यूजिक और इंग्लिश फिल्मों की दीवानी थीं इंडिन क्लासिकल म्यूजिक के अलावा उन पर वेस्टर्न जैज और लैटिन अमेरिन म्यूजिक का भी खासा प्रभाव रहा। आशा 9 साल की उम्र से ‘गॉन विद द विंड’ और ‘फॉर हुम द बेल टोल्स’ जैसी इंग्लिश फिल्मों की दीवानी थीं। उन्हें फ्रेड एस्टेयर की सारी फिल्में पसंद थी। उन्हें खासकर पुर्तगाली-ब्राजीलियन एक्ट्रेस और सांबा सिंगर कारमेन मिरांडा की सल्ट्री वॉइय बहुत पसंद थी। वो अक्सर घर में दुपट्टा ओढ़कर ‘Mama yo quiero’ गाते हुए कारमेन मिरांडा की तरह डांस किया करतीं। ये सब देख उनकी मां को लगता कि ये लड़की पागल है। 1986 में आई डॉक्यूमेंट्री ‘आशा’ में उन्होंने ये सब बताया था। 10 साल में सिंगिंग डेब्यू किया आशा भोसले ने महज 10 साल की उम्र में मराठी फिल्मों में गाकर अपने सिंगिंग करियर की शुरुआत की। 1943 में आई फिल्म ‘माझा बल’ में गीत गाकर सिंगिंग डेब्यू किया। फिर 1949 में आई जगदीश सेठी की फिल्म ‘रात की रानी’ में उन्हें पहला सोलो हिंदी सॉन्ग मिला। इसी साल ‘महल’ फिल्म के गीत के सक्सेस ने लता को रातों-रात स्टार बना दिया। ऐसे में आशा के लिए मुश्किलें बढ़ीं जब हर गीत के लिए प्रोड्यूसर्स की पहली पसंद लता मंगेशकर हो गईं। लता नहीं तो गीता दत्त या शमशाद बेगम उनकी दूसरी पसंद होती। ऐसे में आशा का नाम उस लिस्ट में दूर तक नहीं आता। आशा को बी-ग्रेड या कम बजट फिल्मों में ही गाने मिलते। वे भी जो मिला वो करती गईं। फिर 1957 में फिल्म आई ‘नया दौर’। उसमें उन्हें बड़ा ब्रेक मिला। फिल्म के गीत ‘उड़े जब-जब जुल्फें तेरी’ से वो हर घर में जानी जाने लगीं। अपनी उम्र से दोगुने उम्र के गणपतराव से भागकर शादी की 1949 में 16 साल की उम्र में आशा ने 31 साल के गणपतराव भोसले के साथ घर से भागकर, परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी कर ली। गणपतराव भोसले लता मंगशकर के सेक्रेटरी थे। इससे नाराज आशा के परिवार ने उनसे बातचीत बंद कर दी। इससे दोनों बहनों के बीच भी दरार आ गई। एक-दूसरे के साथ साए की तरह रहने वाली बहनों के बीच ऐसी दरार आई कि भरने में सालों लगे। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि एक दौर ऐसा भी था जब उनके रिश्ते बहुत कड़वे हो गए थे और सालों तक बातचीत तक बंद रही। लता को लगता था कि वो इंसान आशा के लिए सही नहीं है। ससुराल वालों को गायक बहू पसंद नहीं थी लता की ये सोच सही साबित हुई। गणपतराव से आशा की शादी किसी भयावह सपने से कम नहीं थी। उन्होंने कई बार इंटरव्यूज में बताया कि उनका ससुराल बहुत ऑर्थोडॉक्स था जिन्हें एक गायक बहू पसंद नहीं थी। पति अक्सर पीटा करता था और शक करता था। इस शादी में आशा का दम घुटने लगा। एक ओर निजी जिंदगी तबाह हो रही थी तो दूसरी ओर पेशेवर जिंदगी भी बेहद उतार-चढ़ाव और मुश्किलों से गुजर रही थी। आखिरकार, 1960 में आशा ने पति गणपतराव को तलाक दिया और अपने बच्चों को अपने साथ ले गईं। हालांकि, उन्होंने गणपतराव भोसले को अपनी जिंदगी से तो निकाल दिया लेकिन अपना सरनेम नहीं बदला। ऐसा इसलिए कि वो तब तक हर भारतीय घर में इसी नाम से पहचान बना चुकी थीं। लता हिरोइन तो आशा वैम्प की आवाज बनीं लिजेंड्री म्युजिकल डुओ कल्याणजी-आनंदजी ने 2013 के एक इंटरव्यू में बताया था कि लता को शुरुआती करियर में ऐसे गाने मिलते जो सच्ची और अच्छी भारतीय औरत पर फिल्माए गए हों। वहीं आशा को बचे-खुचे या फिर वैम्प (फिमेल विलेन) के और कैबरे सिंगर के ही गाने मिलते। ऐसे गाने जो सेंसुअस और सल्ट्री हो। इसके साथ ही एक ओर एक गाना गाने के लिए लता को उस समय में करीब 500 रुपए मिलते वहीं आशा को 100 रुपए मिलते। लता के पास इतना काम आता कि उसमें से उन्हें चुनना पड़ता लेकिन आशा को बमुश्किल जो मिलता वही गाना पड़ता। बहन से आगे निकलना चाहती थीं ऐसे में आशा के मन में लता से प्रतिस्पर्धा की भावना जागी। आशा ने ठान लिया कि वे खुद को साबित करके रहेंगी। वो आगे बढ़ने के लिए बेताब थीं कि तभी O.P. नैयर से आशा की मुलाकात हुई। O.P. नैयर ने उन्हें सिंगिंग करियर का बड़ा ब्रेक दिया। आशा

आशा भोसले ने राजस्थानी फिल्मों में भी गाए थे गाने:शब्दों की ट्रेनिंग हुई, डायरेक्टर ने 25 हजार बोलकर 7 हजार दिए फिर भी कुछ नहीं बोलीं

आशा भोसले ने राजस्थानी फिल्मों में भी गाए थे गाने:शब्दों की ट्रेनिंग हुई, डायरेक्टर ने 25 हजार बोलकर 7 हजार दिए फिर भी कुछ नहीं बोलीं

सिंगर आशा भोसले का शुक्रवार को 92 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने कई भाषाओं में गाने गए। इनमें से राजस्थानी भी एक है। उन्होंने अपने करियर में 14 राजस्थानी फिल्मों के 45 गाने गाए। 8 से ज्यादा राजस्थानी भजनों को भी अपनी आवाज दी। वहीं, 2019 में वे जयपुर में हुए एक कार्यक्रम में भी आई थीं। जहां उन्होंने गीतकार प्रसून जोशी के साथ अपने दिल की बात की थी। आशा भोसले को याद करते हुए राजस्थानी एक्टर-डायरेक्टर क्षितिज कुमार ने बताया- मेरी राजस्थानी फिल्म के लिए उन्होंने गाना गाया था। गाने से पहले मुंबई में राजस्थानी शब्दों को लेकर उनकी ट्रेनिंग हुई। इसके लिए मैंने उन्हें सिर्फ 7 हजार रुपए दिए थे, लेकिन उन्होंने बिना रोक टोक के वो ले लिए। जानिए कैसे राजस्थानी फिल्मों में शुरू हुआ आशा भोसले का सफर… राजस्थानी फिल्मों में आशा भोसले की गायकी का श्रेय संगीतकार पंडित शिवराम को जाता है। उन्होंने 1961 में फिल्म ‘बाबासा री लाडली’ में आशाजी से पहली बार राजस्थानी भाषा में पांच गीत गवाए। इनमें ‘ओ रंग रंगीलो आलीजो…’, ‘बोल पंछीड़ा रे…’, ‘सूती थी रंग म्हैल में…’ और महेंद्र कपूर के साथ सुपरहिट डुएट ‘हिवड़ै सूं दूर मत जा….’ गीत गाए। इसके बाद ‘नानीबाई को मायरो’ में भी आशाजी ने अपनी आवाज दी। इसमें “म्हारो छैलभंवर केसरियो बनड़ो…” और “म्हाने चूनड़ी ओढ़ाजा…” जैसे गीत लोकप्रिय हुए। कभी रीजनल के रूप मे नहीं देखा राजस्थानी फिल्म विशेषज्ञ एमडी सोनी ने बताया- उस दौर में आशाजी ने ‘धणी लुगाई’, ‘गणगौर’, ‘गोपीचंद भरथरी’ और ‘ढोला मरवण’ जैसी फिल्मों में भी अपनी गायकी से चार चांद लगाए। राजस्थानी सिनेमा के दूसरे दौर में संगीतकार नारायण दत्त ने फिल्म ‘म्हारी प्यारी चनणा’ (1983) के सभी आठ गीत आशाजी से गवाकर इतिहास रच दिया। इनमें ‘सावण आयो रे…’, ‘चांदड़लो चढ़ आयो गिगनार…’ और ‘झिरमिर झिरमिर रे…’ जैसे गीत श्रोताओं की जुबां पर कई साल तक रहे। आशा भोसले ने कभी राजस्थानी सिनेमा को रीजनल के रूप में नहीं देखा, वे हमेशा अच्छी कंपोजिशन के साथ जुड़ना चाहती थीं। 14 राजस्थानी फिल्मों में 45 गाने गाए इसके बाद ‘थारी म्हारी’, ‘घर में राज लुगायां को’, ‘चूनड़ी’, ‘बेटी हुई पराई रे’, ‘बीनणी होवै तो इसी’ और ‘राधू की लिछमी’ (1996) जैसी फिल्मों में भी उनकी आवाज ने राजस्थानी सिनेमा को समृद्ध किया। कुल मिलाकर 14 फिल्मों में करीब 45 गीतों को आशाजी ने अपनी आवाज दी। फिल्मों के अलावा आशाजी ने राजस्थानी भजनों में भी अपनी विशेष पहचान बनाई। वर्ष 1981 में जारी एलपी रिकॉर्ड ‘म्हारा थे ही धणी हो गोपाल’ को मास्टरपीस माना जाता है, जिसमें गीतकार भरत व्यास के लिखे भजनों को उन्होंने अपनी आवाज दी। गाने के लिए दिए थे सात हजार रुपए राजस्थानी एक्टर-डायरेक्टर क्षितिज कुमार ने बताया- 1996 में आई मेरी राजस्थानी फिल्म राधू की लक्ष्मी का गाना ‘रात ढलती जाए’ आशा जी ने गाया था। आरडी बर्मन साहब की डेथ हो गई थी, उसी समय में आशाजी से मिलने के लिए डेट ले रहा था। एक महीने बाद उनकी तरफ से समय दिया, जब वहां गया तो मैंने इस गाने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने पूछा- क्या यह बच्चों का गाना है। मैंने मना कर दिया। हारमोनियम पर गाकर बताया तो वे गाने की कंपोजिशन से बेहद प्रभावित हुईं। इस गाने पर दो घंटे तक हमारी बातचीत चली। मुम्बई में ही इसे रिकॉर्ड किया गया। उन्होंने एक-एक शब्द की जानकारी ली। घर पर कई दिनों तक राजस्थानी शब्दों की ट्रेनिंग भी हुई। कंपोजिंग पसंद आ जाती तो वह किसी भी इंडस्ट्री को छोटा बड़ा नहीं समझती। रिेकॉडिंग के बाद मुझे कहा- तुम मुम्बई में नए हो, किसी प्रकार की कोई परेशानी हो तो सीधे बताना। अब मैं आपको एक रोचक बात बताता हूं। इस गाने के लिए हमारी 25 हजार पर बात हुई थी, लेकिन मैंने सात हजार रुपए ही दिए। उन्होंने बिना किसी रोक-टोक के वह ले लिए। गाने की दी सहमति, रिकॉर्ड नहीं करने का मलाल वीणा म्यूजिक के डायरेक्टर केसी मालू ने बताया- मैं गाना उनके साथ करना चाहता था। इसी सिलसिले में आशाजी से मिलने भी गया था। उन्होंने राजस्थानी गाने के लिए हामी भी भरी थी, लेकिन मैं ही गाना तैयार नहीं कर पाया। उन्होंने मुझे बताया कि जयपुर से महिपाल और भरत व्यास उनके मित्र थे। आशाजी ने ही मुझे बताया था कि राजस्थानी में आठ भजन उन्होंने गाए थे। मैं यह सुनकर हैरान था। ये भजन भरत व्यास ने लिखे थे। उन्होंने कहा कि आशाजी के हामी भरने के बाद भी मैं काम नहीं कर पाया। मैं उनके लिए गाना बनवा नहीं पाया। इसका आज तक अफसोस रहेगा। उन्होंने कई राजस्थानी फिल्मों में गाने गाए है। जब भी किसी ने गाने के लिए कहा, किसी को उन्होंने कभी मना नहीं किया। हमारी मैग्जीन स्वर सरिता लगातार पढ़ती थीं, उसी आधार पर मेरी मुलाकात हुई थी। ये भी पढ़ें… दोस्तों ने रुपए दिए, घर से भागकर मुंबई गए असरानी:जयपुर में काम किया, अजमेर में कहा था- सिंधी ने कभी भी भीख नहीं मांगी बॉलीवुड के हास्य अभिनेता असरानी का मुंबई में निधन हो गया। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और कला के प्रति गहरी लगन की मिसाल रहा है। उनका असली नाम गोवर्धन असरानी था। वे एक मध्यमवर्गीय सिंधी परिवार से थे। उनके पिता भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान से जयपुर आ बसे और यहां कालीन की दुकान खोली। (पूरी खबर पढ़ें)

हरियाणा में बादशाह की गिरफ्तारी के आदेश:महिला आयोग अध्यक्ष बोलीं- पंचकूला-पानीपत SP पासपोर्ट जब्त करें; टटीरी सॉन्ग विवाद में पेश नहीं हुए सिंगर

हरियाणा में बादशाह की गिरफ्तारी के आदेश:महिला आयोग अध्यक्ष बोलीं- पंचकूला-पानीपत SP पासपोर्ट जब्त करें; टटीरी सॉन्ग विवाद में पेश नहीं हुए सिंगर

टटीरी सॉन्ग विवाद को लेकर हरियाणा महिला आयोग ने बॉलीवुड सिंगर-रैपर बादशाह को गिरफ्तार करने का आदेश दिए। बादशाह शुक्रवार को समन पर पानीपत में पेश नहीं हुए। उनके वकीलों ने दलील दी कि किसी प्रोफेशनल कमिटमेंट में व्यस्त होने की वजह से बादशाह नहीं आ सके। आयोग से आगे का टाइम मांगा गया। इस पर महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया नाराज हो गईं। अध्यक्ष ने पंचकूला और पानीपत SP को बादशाह की गिरफ्तारी और पासपोर्ट जब्ती के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बादशाह देश छोड़कर न जाए। महिलाओं और बेटियों को बचाने के लिए अब आयोग लठ मारने आगे आया है। इसके बाद हरियाणा महिला आयोग की तरफ से पानीपत के SP को लिखित शिकायत दी गई। जिसमें कहा गया कि बादशाह के खिलाफ महिला आयोग के आदेश की अवहेलना करने पर मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया जाए। टटीरी सॉन्ग के आपत्तिजनक लिरिक्स और लड़कियों के शॉट्स को लेकर महिला आयोग ने उन्हें 6 मार्च को नोटिस भेजकर पानीपत SP ऑफिस में पेश होने के लिए कहा था। हालांकि बादशाह के वकील ने सिक्योरिटी रीजन का हवाला देते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखने की परमिशन मांगी थी। पूरे मामले की टाइम लाइन इसी दौरान बादशाह ने एक वीडियो जारी कर कहा था कि, ‘मेरे गाने ‘टटीरी’ के कुछ बोल और सीन से हरियाणा के कुछ लोगों को ठेस पहुंची है। मैं खुद हरियाणा से हूं। हरियाणा का बेटा समझकर माफ कर दीजिए। अब जानिए सॉन्ग को लेकर विवाद क्यों… अब पढ़िए…आयोग के सामने क्या हुआ प्रोफेशनल व्यस्तता के चलते नहीं आए शुक्रवार को बादशाह की तरफ से 3 वकीलों का पैनल राज्य महिला आयोग के सामने पक्ष रखने पहुंचा। एडवोकेट अक्षय दहिया ने कहा- हमें और आप सबको पता है कि जो बादशाह से गलती हुई है या नहीं हुई, जिस पर विवाद छिड़ा हुआ है, हम इस मामले में आज यहां पेश हुए हैं। अपनी प्रोफेशनल कमिटमेंट की वजह से बादशाह यहां नहीं आ पाए। हमने आज चेयरपर्सन से टाइम लेने की कोशिश की है, लेकिन हमें दोपहर 3 बजे तक का समय दिया गया। वकील बोले-बादशाह क्रिमिनल नहीं सिंगर की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि बादशाह से जो भी प्रकरण हुआ, उसके लिए वह ऑलरेडी एक वीडियो अपलोड कर चुके हैं। वे हरियाणा का नाम ऊपर कर रहे हैं, लेकिन गलतियां हम सब से हो जाती हैं। लेकिन बादशाह क्रिमिनल तो नहीं है। 3 बजे से पहले वकील दोबारा पेश हुआ महिला आयोग ने बादशाह को पेश होने के लिए दोपहर 3 बजे तक का समय दिया था। बादशाह नहीं आए। ढाई बजे के बाद बादशाह की ओर से वकील दोबारा आयोग के सामने पहुंचे और समय देने की मांग की। आयोग अध्यक्ष ने हर दलील को खारिज कर दिया। हरियाणा में कोई कार्यक्रम नहीं होगा, यूपी-उत्तराखंड भी साथ आए चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने कहा कि हमारे साथ उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश महिला आयोग भी साथ आ गया है। हमने राष्ट्रीय महिला आयोग को भी अपील की है कि पूरे देश में बादशाह का कहीं भी कार्यक्रम न होने दिया जाए। अब हरियाणा में कही भी बादशाह का कार्यक्रम नहीं होने दिया जाएगा। DSP बोले- शिकायत मिली, अभी मुकदमे पर विचार कर रहे DSP हेडक्वार्टर सतीश वत्स ने बताया कि महिला आयोग की शिकायत मिली है। अभी विचार किया जा रहा है कि एक ही तरह के आरोपों में क्या और भी मुकदमा दर्ज किया जा सकता है या नहीं। उन्होंने कहा कि महिला आयोग ने आदेशों की अवहेलना से संबंधित शिकायत दी है। उस पर भी विचार किया जा रहा है। देरी से शिकायत मिलने के कारण आज नहीं देख पाए। शनिवार को चेक कर के आगामी कार्रवाई की जाएगी। सिमरन ने तीन साल पहले गाया था सॉन्ग टटीरी सॉन्ग में फीमेल वोकल देने वाली 20 वर्षीय सिमरन जागलान कैथल जिले के पट्‌टी अफगान गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता कर्मबीर फौजी भी हरियाणवी सिंगर हैं। सिमरन ने करीब तीन साल पहले टटीरी सॉन्ग गाया था। बादशाह को उनकी ट्रेडिशनल स्टाइल में गाई हुई आवाज पसंद आई तो दोबारा रिकॉर्डिंग कर मंगाया। इसी के बाद बादशाह ने टटारी को नए ढंग से पेश किया, जिसमें फीमेल वोकल रिमरन ने दी। जींद में हुई थी गाने की शूटिंग इस गाने की शूटिंग जींद के सच्चा खेड़ा, नरवाना और दुबई में हुई थी। 26 फरवरी को बादशाह इस गाने के प्रमोशन के लिए हरियाणा के कैथल और सोनीपत पहुंचे थे। वहीं, प्रोडक्शन टीम ने 14 मार्च को सिमरन और बादशाह का मुंबई में एक शो भी शेड्यूल किया था। सॉन्ग के यूट्यूब से हटाए जाने के बाद मुंबई शो भी कैंसिल कर दिया गया। 6 मार्च को समन जारी किया था विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सॉन्ग का विरोध किया तो हरियाणा महिला आयोग ने 6 मार्च को बादशाह को समन जारी किया। जिसमें उन्हें आज (13 मार्च) को पानीपत में पेश होने के लिए कहा गया था। इसके अलावा, पंचकूला और जींद में सिंगर के खिलाफ अलग-अलग 3 केस भी दर्ज हुए थे। खाप पंचायतों और सामाजिक संस्थाओं ने भी इस गाने को हरियाणवी संस्कृति के खिलाफ बताते हुए इसे प्रतिबंधित करने की मांग की थी। —————— टटीरी सॉन्ग विवाद से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… हरियाणवी सिंगर ने गाया- ऐसी ना थी,जैसी तनै बनाई ‘टटीरी’: बादशाह का नाम लेकर ‘तेरे घर में बहन-बेटी ना’ लिरिक्स गाए; सिमरन का न्यू सॉन्ग रिलीज रैपर बादशाह पर FIR, गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित:हरियाणा पुलिस बोली- लुक आउट सर्कुलर जारी होगा; सिंगर बोले- बेटा समझकर माफ कर दो बादशाह के टटीरी सॉन्ग पर पंचकूला-जींद में FIR:लड़कियों को स्कूल बैग फेंकते दिखाया, गंदे शब्द का इस्तेमाल; महिला आयोग ने रैपर को तलब किया बादशाह संग ‘टटीरी’ सॉन्ग गाने वाली सिमरन की कहानी: पिता हरियाणवी सॉन्ग ‘पानी आली पानी प्यादे’ गाकर फेमस हुए, बेटी बॉक्सिंग में स्टेट चैंपियन रही हरियाणवी सॉन्ग ‘टटीरी’ का रैप वर्जन लाए सिंगर बादशाह: सोनीपत में सरपंचों के वेलकम पर बोले- मासूम शर्मा वाली वीडियो देखी है; साग-मक्के की रोटी खाई

Shreya Ghoshal Mocks Punjabi Songs, Style

Shreya Ghoshal Mocks Punjabi Songs, Style

मशहूर सिंगर श्रेया घोषाल पंजाबी गीतों का मजाक उड़ाती हुई। मशहूर बॉलीवुड सिंगर श्रेया घोषाल ने एक पॉडकास्ट में पंजाबी गानों का मजाक उड़ाया है। श्रेया ने कहा कि पंजाबी गानों में कार, बंगला और लड़कियों की बात ही होती है। इसके अलावा श्रेया घोषाल ने हाथ से इशारे कर सिंगरों के स्टाइल का भी मजाक बनाया। . श्रेया ने कहा कि ज्यादातर पॉपुलर गानों का सब्जेक्ट भी एक जैसा ही होता है। श्रेया का यह वीडियो सामने आते ही वह पंजाबियों के टारगेट पर आ गईं। सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल करते हुए पंजाबियों ने कहा कि उनके सॉन्ग नहीं चल रहे तो इसकी वजह से वह ऐसा कह रही हैं। पंजाबियों ने मेहनत कर कार-बंगले बनाए हैं। जब बराबरी नहीं होती तो बदनामी शुरू कर दो। सबसे पहले जानिए, श्रेया घोषाल ने क्या कहा… पॉडकास्ट में श्रेया घोषाल ने कहा- यह कहने के लिए माफ करना, लेकिन कई पंजाबी गाने हैं, जो बहुत अच्छे चल रहे हैं। उनमें वह क्या बोलते हैं, खासकर जो सॉन्ग पॉपुलर हैं। उनमें गाड़ी, बंगला, लड़की और हाथ से इशारे होते हैं। पंजाबी गानों में अक्सर धन-दौलत और अपनी ताकत का प्रदर्शन या दिखावा किया जाता है, जो आज के युवाओं के बीच बहुत प्रचलित है। उन्होंने कहा- ये गाने इसलिए ज्यादा सुने और पसंद किए जाते हैं, क्योंकि इनकी धुन बहुत अच्छी होती है और साथ ही इसमें दिखावे का एक आकर्षण होता है। यह ‘फ्लेक्स कल्चर’ और ‘अच्छी बीट्स’ का मिश्रण कुछ खास मार्केट्स और दर्शकों के बीच बहुत प्रभावशाली तरीके से काम करता है। अब देखिए, लोग कैसे श्रेया को निशाने पर ले रहे… X यूजर आकाशदीप थिंद ने कहा कि पंजाबी दिखावा नहीं करते बल्कि पंजाबी बहुत हार्ड वर्क करते हैं। जब बराबरी न हो तो बदनामी शुरू कर दो। ज्योति नाम की एक यूजर ने लिखा- इन्होंने शायद पंजाबी रोमांटिक गाने नहीं सुने हैं। पंजाबी इंडस्ट्री में बहुत टैलेंट है और गानों में काफी विविधता भी है। इन्हें कुछ भी बोलने से पहले अपना होमवर्क (तैयारी) ठीक से करना चाहिए। भारत आर्मी नाम के X यूजर ने लिखा, “श्रेया घोषाल ने एक बार कहा था – गहरे पानी की मछली हूं राजा, घाट घाट दरिया में घूमी हूं मैं।, जानलेवा जलवा है, देखने में हलवा है, प्यार से परोस दूंगी, लूट ले जरा।” श्रेया के ये विवाद भी चर्चा में रहे… “चिकनी चमेली” गाने को लेकर विवाद फिल्म अग्निनपथ (2012) का आइटम सॉन्ग “चिकनी चमेली” हिट रहा। लेकिन बाद में इस गाने को लेकर चर्चा हुई। श्रेया घोषाल ने एक इंटरव्यू में कहा कि आज के समय में वह ऐसे गाने रिकॉर्ड नहीं करना चाहेंगी, जिनके बोल महिलाओं को ऑब्जेक्टिफाई करते हों। इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उन्हें ट्रोल किया, क्योंकि वह बाद में कॉन्सर्ट में यह गाना गाती भी दिखीं। लाइव कॉन्सर्ट को लेकर सिंगर्स घेरे हाल ही में उन्होंने कुछ सिंगर्स द्वारा कॉन्सर्ट में लिप सिंक (रिकॉर्डेड गाने बजने पर सिर्फ होंठ हिलाना) करने की आलोचना की। उन्होंने इसे “लेजी एक्ट” यानी आलसी काम बताया। श्रेया का मानना था कि अगर दर्शक टिकट खरीदकर आ रहे हैं, तो उन्हें असली लाइव परफॉर्मेंस मिलनी चाहिए। इस बयान से कई बड़े सिंगर्स को लेकर सवाल उठे। करण जौहर के साथ क्रेडिट विवाद हुआ ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ के गाने ‘तुम क्या मिले’ के प्रमोशन के दौरान करण जौहर ने शुरुआती पोस्ट में अरिजीत सिंह का जिक्र किया था, लेकिन श्रेया का नाम नहीं था। इस पर श्रेया के फैंस ने इसे फीमेल सिंगर की अनदेखी बताते हुए सवाल उठाए। इस दौरान श्रेया ने भी इस पर एक फैन के ट्वीट को रीट्वीट कर अपनी मौन सहमति जताई थी, जिसके बाद करण जौहर ने सुधार करते हुए उन्हें क्रेडिट दिया।

Honey Singh’s Faith Connection: Neeleshwar Mahadev Temple Haridwar

Honey Singh’s Faith Connection: Neeleshwar Mahadev Temple Haridwar

नीलेश्वर महादेव के मंदिर में शिवलिंग पर दूध और दही अर्पित करते हनी सिंह। उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित प्राचीन नीलेश्वर महादेव मंदिर पंजाबी और बॉलीवुड सिंगर हनी सिंह का फेवरेट है। मंदिर के महंत हरिदास का दावा है कि सिंगर के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव और उनके म्यूजिक कमबैक में इस मंदिर की अहम भूमिका रही है। उनके अनुसार, . महंत बताते हैं कि कठिन दौर के बाद जब हनी सिंह ने यहां साधना और अभिषेक किया, तो उनके भीतर गहरा आध्यात्मिक परिवर्तन देखने को मिला। उनका कहना है कि महादेव की कृपा से सिंगर को मानसिक संतुलन, नई ऊर्जा और जीवन की नई दिशा मिली। महंत हरिदास के अनुसार, नीलेश्वर महादेव मंदिर में उन्हें जो आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा मिली, वैसा अनुभव उन्हें कहीं और नहीं हुआ और यही जुड़ाव उनके जीवन में स्थिरता और सकारात्मकता लेकर आया। हरिद्वार के नीलेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित शिवलिंग। पहले 3 पॉइंट्स में नीलेश्वर मंदिर के बारे में जानिए नील पर्वत पर स्थित प्राचीन शिव धाम: हरिद्वार-नजीबाबाद रोड पर चंडी घाट के पास नील पर्वत क्षेत्र में स्थित नीलेश्वर महादेव मंदिर प्राचीन शिव धामों में गिना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यहां स्थित स्वयंभू शिवलिंग की विधि-विधान से पूजा की जाती है। सुबह-शाम आरती होती है और देश-विदेश से श्रद्धालु यहां जलाभिषेक और दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पौराणिक कथाओं और शिव परंपरा से जुड़ा स्थल: मंदिर के पुजारी राघव भारती के अनुसार, यह स्थान सतयुग काल से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि यहीं से भगवान शिव ने अपनी जटा से वीरभद्र को उत्पन्न कर दक्ष यज्ञ का विध्वंस कराया था। यह भी कहा जाता है कि समुद्र मंथन से निकला विष पीने के बाद भगवान शिव इसी क्षेत्र से नीलकंठ की ओर विश्राम के लिए गए, जिसके कारण पर्वत और गंगा का जल नीला पड़ गया और यह क्षेत्र नील पर्वत व नील गंगा के नाम से प्रसिद्ध हुआ। विशेष पूजा परंपराएं और मनोकामना पूर्ति की मान्यता: नीलेश्वर महादेव मंदिर में गंगाजल और दूध से अभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि एक लोटा गंगाजल चढ़ाने से तीर्थफल की प्राप्ति होती है, सोमवार को पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, जबकि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और पूर्णिमा पर अभिषेक करने से विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। श्रद्धालु यहां तन-मन के कष्टों से मुक्ति और आध्यात्मिक शांति की कामना लेकर आते हैं। हनी सिंह कोरोना काल के बाद से लगातार इस मंदिर में आकर अभिषेक करते हैं। अब महंत के अनुसार समझिए हनी सिंह के लिए क्यों खास है मंदिर पहली बार अभिषेक में भावुक हुए हनी सिंह मंदिर के महंत हरिदास के अनुसार, जब हनी सिंह पहली बार नीलेश्वर महादेव मंदिर में अभिषेक करने पहुंचे तो वे बेहद भावुक हो गए थे। महंत बताते हैं कि उन्होंने पंजाबी रैपर से कहा था कि जो श्रद्धालु इस शिवलिंग को अपने हाथों में भर लेते हैं, उनके अवगुण दूर हो जाते हैं। महंत के अनुसार, जैसे ही सिंगर ने शिवलिंग को अपनी भुजाओं में भरा, उनकी आंखों से आंसू बहने लगे और वे गहरे आध्यात्मिक भाव में डूब गए। चार घंटे तक तल्लीन होकर किया अभिषेक महंत बताते हैं कि पहली पूजा के दौरान हनी सिंह लगभग चार से साढ़े चार घंटे तक एक ही आसन पर बैठकर अभिषेक करते रहे। उनके अनुसार, वह दृश्य ऐसा था मानो कोई भक्त लंबे समय बाद अपने आराध्य से मिला हो। महंत का कहना है कि उस साधना के बाद उनके भीतर आध्यात्मिक परिवर्तन स्पष्ट रूप से महसूस किया गया। महंत कहते हैं कि अभिषेक के दौरान हनी सिंह के अंदर दिव्य भक्ति भाव दिखता है। हर 90 दिन में अभिषेक, ऊर्जा का स्रोत मानते हैं महंत हरिदास के अनुसार, हनी सिंह अब हर तीन महीने में मंदिर आकर अभिषेक कराते हैं। उनका कहना है कि सिंगर स्वयं बताते हैं कि यदि यह अभिषेक समय पर न हो तो उनकी ऊर्जा कम होने लगती है, जबकि पूजा के बाद वे स्वयं को अत्यंत ऊर्जावान और सकारात्मक महसूस करते हैं। महादेव भक्ति से आया जीवन में परिवर्तन महंत का दावा है कि कठिन दौर के बाद जब हनी सिंह महादेव की शरण में आए, तो उनके जीवन में स्थिरता और सकारात्मकता आई। उनके अनुसार, आज सिंगर के चेहरे की मुस्कान, उनकी ओजस्वी वाणी और व्यक्तित्व में दिखाई देने वाला संतुलन महादेव की कृपा और जागृत भक्ति का परिणाम है। दुनिया देखी, पर ऐसी शांति कहीं नहीं मिली महंत हरिदास के मुताबिक, हनी सिंह ने उनसे कहा कि उन्होंने दुनिया देखी है, लेकिन नीलेश्वर महादेव मंदिर में बैठकर जो शांति, प्रेम और आध्यात्मिक अनुभव मिलता है, वैसा अनुभव उन्हें कहीं और नहीं हुआ। महंत का कहना है कि यही जुड़ाव उन्हें बार-बार इस धाम की ओर खींच लाता है। 2014 में गायब हुए, इंटरव्यू में बताई बाइपोलर डिसऑर्डर की जंग यो यो हनी सिंह 2014 के आसपास अचानक म्यूजिक इंडस्ट्री और सार्वजनिक जीवन से दूर हो गए थे। उस समय वे करियर के शिखर पर थे, लेकिन इसके बाद न नए गाने आए, न लाइव शो और न ही मीडिया में उनकी मौजूदगी दिखाई दी। उनकी अनुपस्थिति को लेकर लंबे समय तक तरह-तरह की अटकलें लगती रहीं। बाद में एक इंटरव्यू में हनी सिंह ने खुलासा किया कि वे बाइपोलर डिसऑर्डर से जूझ रहे थे। उन्होंने बताया कि यह दौर उनके लिए मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद कठिन था, जिसके कारण उन्हें लंबे समय तक इलाज और एकांत में रहना पड़ा। इसी चुनौतीपूर्ण दौर के बाद उन्होंने धीरे-धीरे खुद को संभाला और वर्षों बाद नए दृष्टिकोण के साथ संगीत जगत में वापसी की। 2021 में किया कमबैक, छवि पूरी तरह बदली 2021 के आसपास हनी सिंह ने फिर से म्यूजिक इंडस्ट्री में सक्रिय होना शुरू किया। नए गानों, लाइव परफॉर्मेंस और सार्वजनिक उपस्थितियों के जरिए उन्होंने वापसी की। यह वापसी केवल पेशेवर नहीं बल्कि एक बदले हुए व्यक्तित्व के साथ देखी गई। पहले जहां वे विवादों और पार्टी कल्चर से जुड़े नजर आते थे, वहीं अब वे अधिक शांत, संतुलित और आध्यात्मिक झुकाव वाले व्यक्तित्व के रूप में दिखाई देते हैं। महंत भी इस बदलाव को महादेव की भक्ति से जोड़ते हैं। नीलेश्वर