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कॉप की भूमिका में सैफ अली:भक्षक' के बाद अब 'कर्तव्य' की बारी; निर्देशक ने बताया क्यों सैफ थे पहली पसंद

कॉप की भूमिका में सैफ अली:भक्षक' के बाद अब 'कर्तव्य' की बारी; निर्देशक ने बताया क्यों सैफ थे पहली पसंद

‘भक्षक’ के बाद निर्देशक पुलकित अब नेटफ्लिक्स फिल्म ‘कर्तव्य’ लेकर आ रहे हैं, जिसमें सैफ अली खान कॉप बने हैं। पुलकित ने फिल्म के बैकड्रॉप, सैफ की कास्टिंग आदि पर बातचीत की… पुलकित कहते हैं, ‘कर्तव्य’ किसी एक सच्ची घटना पर आधारित नहीं है। यह विचार मेरे दिमाग में बहुत सालों से चल रहा था। हम अक्सर अपने अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन अपने कर्तव्यों पर चर्चा कम ही होती है। बतौर इंसान हमारी क्या जिम्मेदारी है? एक पिता का काम सिर्फ बच्चा पैदा करना नहीं है, बल्कि उस बच्चे की जिंदगी में क्या सही है और क्या गलत, यह सिखाना भी उसकी ड्यूटी है। मैं कहानी के जरिए उसी कर्तव्य की परिभाषा को ढूंढ रहा था। मैं एक ऐसी दुनिया बुनना चाहता था जहां कर्तव्य और इंसानियत के बीच का संघर्ष दिखे। बहुत सालों तक यह विचार मेरे अंदर बंद था, जिसे अब मैंने इस फिल्म के रूप में बाहर निकाला है। फिल्म की स्क्रिप्ट लेकर किसी और एक्टर के पास गया ही नहीं पुलकित बताते हैं, ‘भक्षक’ के बाद रेड चिलीज और नेटफ्लिक्स के साथ रिश्ता और मजबूत हुआ। जब ‘कर्तव्य’ लिखी तो सबसे पहले उन्हें सुनाई और वे तुरंत तैयार हो गए। सैफ ही मेरी पहली पसंद थे। मैं यह स्क्रिप्ट लेकर किसी और एक्टर के पास गया ही नहीं।’ फिल्म के लिए ‘झामली’ नाम की एक काल्पनिक जगह बनाई है फिल्म की दुनिया पर पुलकित कहते हैं…‘हमने ‘झामली’ नाम की एक काल्पनिक जगह बनाई है, जिसकी टोन पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा बॉर्डर जैसी रखी गई। ‘ओमकारा’ में सैफ का ‘लंगड़ा त्यागी’ वाला किरदार मेरे दिमाग में हमेशा रहा। मुझे मजा आता है जब आप बांद्रा में रहने वाले, इंग्लिश बोलने वाले एक्टर को छोटे शहर की धूल-मिट्टी में डाल देते हैं।’ ‘ओमकारा’ के बाद कम निर्देशकों ने सैफ के देसी और रॉ अंदाज में लिया पुलकित मानते हैं, ‘ओमकारा के बाद बहुत कम निर्देशकों ने सैफ के उस देसी और रॉ अंदाज को इस्तेमाल किया। ‘आरक्षण’ और ‘तांडव’ में कोशिश जरूर हुई, लेकिन मुझे वो वाला सैफ नहीं मिला जो ‘लंगड़ा त्यागी’ में दिखा था। मेरे जेहन में वही इमेज थी, इसलिए मैं उन्हें फिर से उसी दुनिया में वापस लेकर गया।’ ‘99% हिंदुस्तान छोटे शहरों में बसता है’ अपने सिनेमा की जड़ों पर बात करते हुए पुलकित कहते हैं, ‘मैं खुद छोटे शहर से आता हूं, इसलिए मुझे ऐसी कहानियों में मजा आता है। 99% हिंदुस्तान छोटे शहरों और कस्बों में बसता है। जब आप ग्रासरूट लेवल की कहानी लिखते हैं, तो एक्टर्स को भी उसमें कुछ नया नजर आता है। यही वजह है कि मैंने सैफ, रसिका दुग्गल, संजय मिश्रा और मनीष चौधरी जैसे दमदार एक्टर्स को चुना। हम स्टारडम नहीं, परफॉर्मेंस पर दांव लगा रहे हैं।’

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कॉप की भूमिका में सैफ अली:भक्षक' के बाद अब 'कर्तव्य' की बारी; निर्देशक ने बताया क्यों सैफ थे पहली पसंद

कॉप की भूमिका में सैफ अली:भक्षक' के बाद अब 'कर्तव्य' की बारी; निर्देशक ने बताया क्यों सैफ थे पहली पसंद

‘भक्षक’ के बाद निर्देशक पुलकित अब नेटफ्लिक्स फिल्म ‘कर्तव्य’ लेकर आ रहे हैं, जिसमें सैफ अली खान कॉप बने हैं। पुलकित ने फिल्म के बैकड्रॉप, सैफ की कास्टिंग आदि पर बातचीत की… पुलकित कहते हैं, ‘कर्तव्य’ किसी एक सच्ची घटना पर आधारित नहीं है। यह विचार मेरे दिमाग में बहुत सालों से चल रहा था। हम अक्सर अपने अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन अपने कर्तव्यों पर चर्चा कम ही होती है। बतौर इंसान हमारी क्या जिम्मेदारी है? एक पिता का काम सिर्फ बच्चा पैदा करना नहीं है, बल्कि उस बच्चे की जिंदगी में क्या सही है और क्या गलत, यह सिखाना भी उसकी ड्यूटी है। मैं कहानी के जरिए उसी कर्तव्य की परिभाषा को ढूंढ रहा था। मैं एक ऐसी दुनिया बुनना चाहता था जहां कर्तव्य और इंसानियत के बीच का संघर्ष दिखे। बहुत सालों तक यह विचार मेरे अंदर बंद था, जिसे अब मैंने इस फिल्म के रूप में बाहर निकाला है। फिल्म की स्क्रिप्ट लेकर किसी और एक्टर के पास गया ही नहीं पुलकित बताते हैं, ‘भक्षक’ के बाद रेड चिलीज और नेटफ्लिक्स के साथ रिश्ता और मजबूत हुआ। जब ‘कर्तव्य’ लिखी तो सबसे पहले उन्हें सुनाई और वे तुरंत तैयार हो गए। सैफ ही मेरी पहली पसंद थे। मैं यह स्क्रिप्ट लेकर किसी और एक्टर के पास गया ही नहीं।’ फिल्म के लिए ‘झामली’ नाम की एक काल्पनिक जगह बनाई है फिल्म की दुनिया पर पुलकित कहते हैं…‘हमने ‘झामली’ नाम की एक काल्पनिक जगह बनाई है, जिसकी टोन पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा बॉर्डर जैसी रखी गई। ‘ओमकारा’ में सैफ का ‘लंगड़ा त्यागी’ वाला किरदार मेरे दिमाग में हमेशा रहा। मुझे मजा आता है जब आप बांद्रा में रहने वाले, इंग्लिश बोलने वाले एक्टर को छोटे शहर की धूल-मिट्टी में डाल देते हैं।’ ‘ओमकारा’ के बाद कम निर्देशकों ने सैफ के देसी और रॉ अंदाज में लिया पुलकित मानते हैं, ‘ओमकारा के बाद बहुत कम निर्देशकों ने सैफ के उस देसी और रॉ अंदाज को इस्तेमाल किया। ‘आरक्षण’ और ‘तांडव’ में कोशिश जरूर हुई, लेकिन मुझे वो वाला सैफ नहीं मिला जो ‘लंगड़ा त्यागी’ में दिखा था। मेरे जेहन में वही इमेज थी, इसलिए मैं उन्हें फिर से उसी दुनिया में वापस लेकर गया।’ ‘99% हिंदुस्तान छोटे शहरों में बसता है’ अपने सिनेमा की जड़ों पर बात करते हुए पुलकित कहते हैं, ‘मैं खुद छोटे शहर से आता हूं, इसलिए मुझे ऐसी कहानियों में मजा आता है। 99% हिंदुस्तान छोटे शहरों और कस्बों में बसता है। जब आप ग्रासरूट लेवल की कहानी लिखते हैं, तो एक्टर्स को भी उसमें कुछ नया नजर आता है। यही वजह है कि मैंने सैफ, रसिका दुग्गल, संजय मिश्रा और मनीष चौधरी जैसे दमदार एक्टर्स को चुना। हम स्टारडम नहीं, परफॉर्मेंस पर दांव लगा रहे हैं।’

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