Monday, 13 Apr 2026 | 08:42 AM

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जेएएच:नई डीआर मशीन आई, अब घंटों नहीं, मिनटों में मिलेगी एक्सरे रिपोर्ट

जेएएच:नई डीआर मशीन आई, अब घंटों नहीं, मिनटों में मिलेगी एक्सरे रिपोर्ट

अंचल के सबसे बड़े अस्पताल जयारोग्य चिकित्सालय में इलाज कराने आने वाले हजारों मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में अत्याधुनिक डीआर (डिजिटल रेडियोग्राफी) एक्सरे मशीन आ गई है।इस मशीन के लिए रूम तैयार होने लगा है। रूम तैयार होते ही ये नहीं डीआर एक्सरे मशीन इंस्टॉल कर दी जाएगी। इस मशीन को मिलाकर अब जेएएच में दो डीआर एक्सरे मशीन हो गई हैं। इस नई मशीन के चालू हो जाने के बाद मरीजों को एक्सरे कराने के लिए घंटों लंबी लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा। पुरानी तकनीक की तुलना में यह मशीन न केवल तेज है, बल्कि इसकी इमेज क्वालिटी भी बेहद सटीक है। रोजाना 500 मरीजों का लोड जेएएच से होगा कम वर्तमान में जयारोग्य अस्पताल में रोजाना औसतन 400 से 500 मरीज एक्सरे के लिए पहुंचते हैं। अब तक पुरानी एक्सरे मशीन के साथ एक ही डीआर मशीन होने के कारण मरीजों को घंटों लाइन में लगना पड़ता था। कई बार तकनीकी खराबी के चलते रिपोर्ट मिलने में दो दिन तक का इंतजार करना पड़ता था। इस नई मशीन के बाद जेएएच का लोड आधा हो जाएगा। अब मरीजों को एक्सरे की रिपोर्ट के लाइन में नहीं लगना पड़ेगा। इन मशीन से एक्सरे होने के अगले दो मिनट बाद ही रिपोर्ट मिल जाएगी। सूक्ष्म फ्रैक्चर भी पकड़ सकेगी मशीन: रेडियोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार, इस मशीन की सबसे बड़ी खूबी इसकी सटीक इमेजिंग है। यह इतनी एडवांस है कि हड्डियों में मौजूद बेहद सूक्ष्म फ्रैक्चर भी आसानी से देखे जा सकेंगे। इससे डॉक्टरों को सटीक डायग्नोसिस (निदान) करने में बड़ी मदद मिलेगी। कम रेडिएशन का खतरा, माइनर फ्रैक्चर भी दिखेगा विशेषज्ञों के अनुसार, नई मशीन कम रेडिएशन उत्सर्जित करती है। यह मरीजों के लिए अधिक सुरक्षित है। इसकी इमेज इतनी साफ होती है कि हड्डियों के सूक्ष्म फ्रैक्चर भी पकड़े जा सकेंगे, जिससे डॉक्टरों को सटीक डायग्नोसिस (निदान) करने में मदद मिलेगी। दो मशीनें आई, एक्सरे के लिए वेटिंग भी घट जाएगी जेएएच के लिए अत्याधुनिक डीआर मशीन आ गई है। इस मशीन को लगाने के लिए रूम तैयार हो रहा है। रूम तैयार होते ही मशीन इंस्टॉल कर दी जाएगी। दो मशीन आने से मरीजों को अब एक्सरे के लिए वेट नहीं करना होगा। -डॉ. आरकेएस धाकड़, डीन, जीआरएमसी

बाढ़ राहत घोटाला:तहसीलदार ने एक खाते में 22 बार भेज दी राहत राशि

बाढ़ राहत घोटाला:तहसीलदार ने एक खाते में 22 बार भेज दी राहत राशि

बाढ़ राहत घोटाले में न्यायिक हिरासत में बंद तत्कालीन तहसीलदार बड़ौदा अमिता सिंह तोमर को फिलहाल जमानत नहीं मिली है। उनकी ओर से जिला न्यायालय श्योपुर में जमानत अर्जी प्रस्तुत की गई है, जिस पर अब 31 मार्च को सुनवाई प्रस्तावित है। न्यायालय ने सुनवाई से पूर्व केस डायरी तलब की है। खास बात यह है कि पुलिस ने तहसीलदार को केवल सहआरोपी पटवारियों द्वारा कथित तौर पर रकम देने के कथनों के आधार पर ही नहीं, बल्कि राहत राशि वितरण में अनियमितताओं के आरोपों के आधार पर भी आरोपी बनाया है। पता चला है कि पुलिस को विवेचना में 87 लोगों के 127 खातों में राहत राशि ट्रांसफर किया जाना मिला है। जिनमें से कई खाते पात्र हितग्राहियों की सूची में शामिल नहीं थे। कुछ खाते संबंधित तहसील क्षेत्र से बाहर के भी थे। कुछ मामलों में एक ही खाते में बार-बार राशि डाली गई है। पुलिस ने बताया कि, एक खाते में 22 बार ट्रांजेक्शन दर्ज होना पाया गया है। एक परिवार के चार सदस्यों के खाते में राशि भेजी गई। बता दें कि मामले में तहसीलदार को डीडीओ के रूप में भुगतान की अंतिम स्वीकृति का अधिकार था। 80 लाख नकद लेनदेन की जानकारी वर्ष 2021 की बाढ़ के दौरान राहत वितरण में अनियमितताओं को लेकर करीब 2.57 करोड़ रुपए के गबन के आरोपों की जांच पुलिस कर रही है। प्रकरण में तहसीलदार बड़ौदा अमिता सिंह तोमर के साथ 22 पटवारियों सहित 110 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें चार पटवारी ऐसे थे, जिन्होंने पत्नी, बहू और बच्चों के साथ ही माता-पिता के खातों में रुपए डलवा लिए। तहसीलदार ने कई गैर खातों में रुपए भेजे हैं, इसके बदले कुछ आर्थिक लाभ प्राप्त किया है, जो 80 लाख करीब है, ज्यादा नहीं बता सकते हैं, मामला विवेचना में है।’ – अवनीत शर्मा, एसडीओपी कराहल

एलपीजी संकट…:हर दिन 5 हजार ज्यादा बुकिंग, नतीजा-50 हजार डिलीवरी पेंडिंग

एलपीजी संकट...:हर दिन 5 हजार ज्यादा बुकिंग, नतीजा-50 हजार डिलीवरी पेंडिंग

प्रदेश में रसोई गैस की कमी नहीं होने के सरकारी दावों के बीच राजधानी में ‘डर’ ने ही संकट जैसी स्थिति बना दी है। भोपाल में इन दिनों रोजाना 13 से 14 हजार गैस बुकिंग हो रही हैं, जबकि सामान्य दिनों में यह आंकड़ा 8 से 9 हजार रहता था। यानी, हर दिन करीब 5 हजार अतिरिक्त बुकिंग हो रही है। इसके मुकाबले डिलीवरी 11 से 12 हजार ही हो पा रही है, जिससे करीब 50 हजार सिलेंडर की सप्लाई पेंडिंग हो गई है। हालात यह हैं कि जिले की 46 गैस एजेंसियों पर दबाव बना हुआ है। प्रशासन और तेल कंपनियां लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं, लेकिन डिमांड और सप्लाई के बीच अंतर कम नहीं हो पा रहा है। वेटिंग बढ़ी: नए शहर में 5 से 7 दिन, पुराने में 10 दिन तक इंतजार-पैनिक बुकिंग का सीधा असर डिलीवरी टाइम पर पड़ा है। नए भोपाल में सिलेंडर के लिए 5 से 7 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि पुराने शहर में यह अवधि 8 से 10 दिन तक पहुंच गई है। कंपनियों का दावा है कि अगले 10 दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी। चूल्हे की चिंता… गैस के लिए एजेंसियों पर लाइन तीन दिन से दोगुनी बुकिंग शहर में 6 दिन का स्टॉक खाद्य नियंत्रक चंद्रभान सिंह जादौन के अनुसार, पिछले 2 से 3 दिनों में बुकिंग लगभग दोगुनी हुई है। सप्लाई 11 से 12 हजार सिलेंडर रोज की है, जबकि बुकिंग ज्यादा होने से रोज करीब 3 हजार बुकिंग पेंडिंग रह रही हैं। भोपाल में एजेंसियों के पास 5 से 6 दिन का स्टॉक मौजूद है। भौंरी डिपो से सप्लाई लगातार जारी है। अफवाह का असर पेट्रोल पर भी: खपत 25% बढ़ी मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह के मुताबिक, अफवाहों के कारण लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन भरवा रहे हैं। सामान्य 9 लाख लीटर रोज की खपत बढ़कर 15 से 20 लाख लीटर तक पहुंच गई है। हालांकि शहर के 192 पेट्रोल पंपों पर फिलहाल पर्याप्त ईंधन उपलब्ध है। नए कनेक्शन भी बंद किए अचानक बढ़ी मांग के चलते कंपनियों ने नए गैस कनेक्शन देना बंद कर दिया है। एजेंसियों पर उपभोक्ताओं को मना किया जा रहा है। जिन उपभोक्ताओं के पास दो सिलेंडर हैं, उनकी बुकिंग 25 से 35 दिन के बीच में ली जा रही है। हालांकि, सिंगल सिलेंडर के लिए यह 25 दिन ही है। उज्ज्वला योजना में 45 दिन बाद सिलेंडर मिल रहा है। आरजीपीवी : गैस खत्म होने का हवाला देकर छुट्‌टी का फर्जी नोटिस आरजीपीवी के यूआईटी हॉस्टल में एलपीजी को लेकर अव्यवस्था के बीच छुट्टी का फर्जी नोटिस वायरल हो गया। इसमें लिखा गया कि गैस खत्म होने के कारण 6 अप्रैल से संस्थान बंद किया जा रहा है। अफवाह फैलते ही छात्र घर जाने की तैयारी में जुट गए, लेकिन प्रशासन ने तुरंत खंडन जारी कर स्थिति स्पष्ट की। बता दें कि गैस किल्लत के बीच हॉस्टल के मेस में रोटियां गैस पर बन रही हैं, जबकि दाल-सब्जी लकड़ी की भट्टी पर पक रही है। इसी स्थिति के बीच किसी छात्र ने संस्थान बंद होने का मनगढ़ंत नोटिस तैयार किया और इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। मैसे वायरल होते ही प्रबंधन तक जानकारी पहुंची। इसके बाद डीन अकादमिक ने साफ किया कि न गैस की कमी है और न छुट्टी का कोई निर्णय लिया गया है। प्रशासन ने नोटिस बनाने और फैलाने वालों पर अनुशासनात्मक व कानूनी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। छात्रों को आधिकारिक सूचना पर भरोसा करने को कहा गया है।

पानसेमल, अंजड़, सेंधवा सहित खेतिया क्षेत्र का सर्वे कार्य देखा

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भास्कर संवाददाता | बड़वानी जनगणना 2027 के प्रथम चरण (मकान सूचीकरण व मकानों की गणना) की तैयारियों का जायजा लेने जनगणना निदेशालय भोपाल से नियुक्त जिला प्रभारी अधिकारी निखिल तिवारी ने जिले का फील्ड भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान उन्होंने पानसेमल, अंजड, सेंधवा व खेतिया क्षेत्रों का दौरा कर नगरीय व ग्रामीण इलाकों में चल रही जनगणना संबंधी तैयारियों की समीक्षा की। निरीक्षण में विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों की स्लम बस्तियों पर ध्यान केंद्रित किया। तिवारी ने वहां मकान सूचीकरण कार्य में आने वाली संभावित चुनौतियों, भौगोलिक स्थिति व मैदानी वास्तविकताओं का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हाउस लिस्टिंग ब्लॉक का निर्माण पूर्णतः सटीक, त्रुटिरहित एवं समावेशी हो, ताकि कोई भी क्षेत्र छूटने न पाए। स्लम क्षेत्रों में सूक्ष्म स्तर पर कार्य करते हुए प्रत्येक मकान व परिवार का सही अभिलेखन तैयार करे। जनगणना कार्य सभी अधिकारी और कर्मचारी गंभीरता, पारदर्शिता व समयबद्धता के साथ संपादित करें। उन्होंने सीएमएमएस पोर्टल के माध्यम से प्रगति की नियमित निगरानी व प्रशिक्षण कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। डाटा इंट्री ऑपरेटर के साथ लिपिकों को दिया प्रशिक्षण जिला जनगणना कार्यालय में रविवार अवकाश के दिन विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें जिले के सभी डाटा एंट्री ऑपरेटर व जनगणना लिपिकों को आमंत्रित कर उनकी तकनीकी व व्यवहारिक समस्याओं का समाधान किया गया। अधिकारियों ने लाइव डेमो के माध्यम से एचएलबी निर्माण, आईडी निर्माण और सीएमएमएस पोर्टल संचालन की प्रक्रिया समझाई। जिला प्रशासन से जनगणना 2027 के सफल, समयबद्ध व गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए तैयारियां अब गति पकड़ रही है।

2 लैब में क्रायोनिक्स तकनीक से शवों का संरक्षण:मौत के बाद जीवन की चाह; 2 करोड़ खर्च कर जमा रहे शरीर, उम्मीद- विज्ञान जिंदा कर देगा

2 लैब में क्रायोनिक्स तकनीक से शवों का संरक्षण:मौत के बाद जीवन की चाह; 2 करोड़ खर्च कर जमा रहे शरीर, उम्मीद- विज्ञान जिंदा कर देगा

मौत को भौतिक रूप से शरीर का अंत मानते हैं। लेकिन दुनिया के कुछ लोग इसे ‘रुकावट’ मानकर भविष्य में फिर से जीने की तैयारी कर रहे हैं। एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, क्रायोनिक्स तकनीक के जरिए लोग अपने शरीर या सिर्फ दिमाग को 196 डिग्री सेल्सियस के तरल नाइट्रोजन में संरक्षित करवा रहे हैं, इस उम्मीद में कि भविष्य में विज्ञान इतना आगे बढ़ जाएगा कि उन्हें फिर जीवित कर दिया जाएगा। क्रायोनिक्स कोई नई तकनीक नहीं है। 1967 में जेम्स बेडफोर्ड पहले व्यक्ति बने, जिन्हें इस तरीके से संरक्षित किया गया। यानी यह तकनीक करीब 60 साल पुरानी है। आज भी उनका शरीर संरक्षित है, हालांकि उस समय की तकनीक सीमित थी और कोशिकाओं को नुकसान ज्यादा होता था। इस प्रक्रिया की शरुआत मौत के तुरंत बाद होती है। शरीर को तेजी से ठंडा किया जाता है, फिर खून की जगह खास केमिकल क्रायो-प्रोटेक्टेंट डाले जाते हैं, ताकि कोशिकाओं में बर्फ न जमे। इसके बाद शरीर को धीरे-धीरे 196° डिग्री सेल्सियस तक ठंडा कर कांच जैसी अवस्था (विट्रिफिकेशन) में रखा जाता है। कुछ लोग पूरा शरीर संरक्षित कराते हैं, जबकि कुछ सिर्फ दिमाग, क्योंकि ये यादों और पहचान से जुड़ा है। भविष्य की तकनीक विकसित हो गई तो दिमाग को नए शरीर या अन्य नेटवर्क में ‘लिंक’ करना संभव होगा। रिसर्चर राल्फ मर्कल का मानना है कि भविष्य में नैनोटेक्नोलॉजी के विकास के साथ यह संभव हो सकता है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि फ्रीजिंग के दौरान कोशिकाएं और टिश्यू डैमेज हो जाते हैं, खासकर दिमाग जैसे जटिल अंग में। हालांकि आज की तकनीक पहले से बेहतर हो चुकी है, फिर भी रिवाइवल अभी विज्ञान की पहुंच से दूर है। हालांकि कई लोगों का मानना है कि भविष्य में मेडिकल साइंस इसे संभव करेगी। पूरा शरीर संरक्षित कराने में 2 करोड़ रुपए का खर्च दुनिया में अल्कोर लाइफ एक्सटेंशन फाउंडेशन (एरिजोना) और क्रायोनिक्स इंस्टिट्यूट (मिशिगन) जैसी संस्थाएं यह सेवा दे रही हैं। 500 से ज्यादा लोग क्रायोनिक्स के तहत संरक्षित किए जा चुके हैं। हजारों लोग भविष्य के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। पूरे शरीर को संरक्षित कराने में 1.5 से 2 करोड़ रु. तक लगते हैं। सिर्फ दिमाग (न्यूरो-) के लिए 60-70 लाख रु. खर्च आता है। कई लोग बीमा का सहारा लेते हैं।

Mental strength helped her win the Players Championship, American golfer Cameron Young, Cameron Young

Mental strength helped her win the Players Championship, American golfer Cameron Young, Cameron Young

Hindi News Sports Mental Strength Helped Her Win The Players Championship, American Golfer Cameron Young, Cameron Young द न्यू यॉर्क टाइम्स. न्यूयॉर्क4 घंटे पहले कॉपी लिंक ‘द प्लेयर्स चैम्पियनशिप’ जीतकर कैमरन यंग वर्ल्ड गोल्फ रैंकिंग में चौथे स्थान पर पहुंच गए हैं। गोल्फ की दुनिया में अक्सर प्रतिभा से ज्यादा मानसिक मजबूती मायने रखती है। इस बात को गोल्फर कैमरन यंग ने हाल ही में ‘द प्लेयर्स चैम्पियनशिप’ जीतकर सच साबित किया है। इस जीत से यंग वर्ल्ड गोल्फ रैंकिंग में चौथे स्थान पर पहुंच गए हैं। हालांकि यह सफलता उन्हें रातों-रात नहीं मिली। पीजीए टूर में अक्सर खिताब के करीब पहुंचकर पिछड़ने वाले यंग के लिए यह एक बड़े मानसिक बदलाव का नतीजा है। टूर्नामेंट शुरू होने से पहले यंग के मन में विचार आया कि क्या होगा अगर मैं यह खिताब जीत लूं, लेकिन उन्होंने अगले ही पल यह विचार दिमाग से निकाल दिया। उन्हें एहसास हुआ कि यदि पूरा ध्यान सिर्फ ट्रॉफी जीतने पर रहेगा, तो वे मंजिल तक नहीं पहुंच पाएंगे। पिछले एक साल से यंग स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट डॉ. ब्रेट मैककेबे के साथ मानसिक मजबूती पर काम कर रहे हैं। यंग बताते हैं कि पहले बड़े टूर्नामेंट के दौरान वे नकारात्मक सोचने लगते थे। उनका ध्यान नतीजों पर टिका होता था और वे हमेशा घबराए रहते थे कि उन्हें टॉप-5 में जगह बनानी है। करियर के शुरुआती दौर में वे लीडरबोर्ड के टॉप पर जगह बना लेते थे, लेकिन ऐन मौके पर चूक जाते थे। इसकी वजह प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि भटकता हुआ दिमाग था। जब परिस्थितियां योजना के मुताबिक नहीं होती थीं, तो वे खुद पर नियंत्रण खो बैठते थे। डॉ. मैककेबे के साथ काम करके यंग ने नतीजों के बजाय प्रक्रिया और छोटे कदमों पर ध्यान लगाना सीख लिया है। इसका सबसे बड़ा असर पिछले साल क्वेल हॉलो क्लब की पीजीए चैम्पियनशिप में दिखा। उस समय यंग बीमार थे और 30वें नंबर पर संघर्ष कर रहे थे। थकान से गलतियां हो रही थीं। उन्हें वापसी करना नामुमकिन लग रहा था। तभी उन्हें मनोवैज्ञानिक की बात याद आई कि परिस्थितियां कैसी भी हों, अपना शॉट खेलना ही है। उन्होंने खुद को समझाया कि खराब स्कोर या मूड उनके शॉट को प्रभावित नहीं कर सकते। हर शॉट एक मौका है। इसी सकारात्मक सोच ने उन्हें राइडर कप में भी शानदार प्रदर्शन करने में मदद की। द प्लेयर्स चैम्पियनशिप आते-आते यंग का मूल मंत्र बन गया था- ‘वर्तमान में जियो’। अगर दिमाग में कोई पुरानी गलती आती, तो वे खुद को याद दिलाते कि वह गलती तीन होल पीछे छूट चुकी है। यंग का मानना है कि सफलता का असली रहस्य परिणामों के पीछे भागना नहीं है, बल्कि अपनी प्रक्रिया को सही रखना है। उनका यह मानसिक हथियार आगे भी उन्हें कई और बड़ी जीत दिलाने के लिए पूरी तरह तैयार है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

छिंदवाड़ा में खेत से मिला शव:बैल के शिकार से नाराज किसान ने बाघ को यूरिया खिला मार डाला

छिंदवाड़ा में खेत से मिला शव:बैल के शिकार से नाराज किसान ने बाघ को यूरिया खिला मार डाला

नर्मदापुरम के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) के एक बाघ का छिंदवाड़ा जिले में जहरीला चारा खिलाकर शिकार किए जाने का मामला सामने आया है। बाघ का शव खेत के गड्ढे में मिला, जिसकी लोकेशन कॉलर आईडी के आधार पर वन विभाग ने ट्रेस की। मौके पर एक मृत बैल भी पाया गया। जांच में सामने आया कि बाघ ने किसान उदय सिंह के बैल का शिकार किया था और लगातार खेत में लौट रहा था, जिससे नाराज किसान ने बैल के बचे अंगों पर यूरिया डाल दिया। बाघ ने वही मांस खाने पर दम तोड़ दिया। छिंदवाड़ा डीएफओ साहिल गर्ग के अनुसार, गांव छाती आम के खेत में पहले बैल और थोड़ी दूरी पर गड्ढे में बाघ मृत मिला। पूछताछ में किसान ने अपराध स्वीकार कर पूरी घटना बताई। आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया है। अधिकारियों ने बाघ का पोस्टमार्टम कराया, जिसमें जहर से मौत की पुष्टि हुई। एसटीआर क्षेत्र संचालक राखी नंदा ने बताया कि करीब चार वर्षीय इस बाघ को डेढ़ साल पहले बांधवगढ़ से लाकर जंगल में छोड़ा गया था। कुछ दिनों से उसकी लोकेशन नहीं मिल रही थी। प्रदेश में वर्ष 2026 में अब तक 10 बाघों की मौत दर्ज हो चुकी है। डेढ़ साल पहले बांधवगढ़ से लाया गया बाघ मृत मिला एसटीआर क्षेत्र संचालक राखी नंदा ने बताया कि मृत बाघ को करीब डेढ़ साल पहले बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से सतपुड़ा क्षेत्र में लाकर जंगल में छोड़ा गया था। उस समय उसकी उम्र लगभग चार साल थी। पिछले कुछ दिनों से बाघ की लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम पर नहीं मिल रही थी, जिसके बाद आसपास के क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया गया था। शुक्रवार को सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और खेत के गड्ढे में बाघ का शव बरामद किया। जांच के दौरान शिकार की पुष्टि हुई। मामले में आरोपी किसान को गिरफ्तार कर लिया गया है।

‘वाराणसी’ के लिए राजामौली ने रची विशाल सिनेमाई दुनिया:रत्नेश्वर मंदिर से घाटों तक 6 एकड़ में बना 'काशी', बारीक डिटेलिंग के साथ बनवाए सेट

‘वाराणसी’ के लिए राजामौली ने रची विशाल सिनेमाई दुनिया:रत्नेश्वर मंदिर से घाटों तक 6 एकड़ में बना 'काशी', बारीक डिटेलिंग के साथ बनवाए सेट

डायरेक्टर एसएस राजामौली एक बार फिर अपने भव्य विजन के साथ बड़े परदे पर नया इतिहास रचने की तैयारी में हैं। ‘बाहुबली’ के दोनों पार्ट और ‘आरआरआर’ की वैश्विक सफलता के बाद अब वह अपनी अगली मेगा फिल्म ‘वाराणसी’ के लिए एक विशाल सिनेमाई दुनिया खड़ी कर चुके हैं। इस फिल्म की कहानी त्रेता युग से लेकर आधुनिक युग तक के समय को कवर करती है। ऐसे में वाराणसी को भी अलग-अलग समय के हिसाब से दिखाया जाएगा। फिल्म की टीम ने इसके लिए दो अलग-अलग वर्जन के सेट तैयार किए हैं। एक प्राचीन समय का और दूसरा आधुनिक दौर का। जरूरत के अनुसार सेट के हिस्सों को बदलकर अलग-अलग युगों की झलक दिखाई जाएगी। फिल्म “वाराणसी’ में महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा और पृथ्वीराज सुकुमारन लीड रोल में नजर आएंगे। हॉलीवुड जैसा है आर्ट डायरेक्शन फिल्म का प्रोडक्शन इन दिनों हैदराबाद में चल रहा है, जहां मेकर्स ने ‘वाराणसी’ शहर का भव्य और डिटेल्ड सेट तैयार किया है। घाटों, मंदिरों और प्राचीन वास्तुकला को इतनी बारीकी से री-क्रिएट किया गया है कि यह सेट असली शहर का एहसास कराते हैं। बताया जा रहा है कि इस सेट डिजाइन में इंटरनेशनल लेवल की आर्ट डायरेक्शन टीम और VFX प्लानिंग को जोड़ा गया है, ताकि स्क्रीन पर एक रियल और इमर्सिव अनुभव दिया जा सके। झुका हुआ शिव मंदिर हूबहू बनाया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेट की सबसे खास बात है रत्नेश्वर महादेव मंदिर की प्रतिकृति, जो अपने झुके हुए ढांचे के लिए प्रसिद्ध है। फिल्म के सेट में इस मंदिर को उसी झुकाव और गहराई के साथ तैयार किया गया है, जो असली मंदिर में देखने को मिलती है। पूरा सेट लगभग 6 एकड़ में फैला हुआ है और इसे असली वाराणसी की तरह ही डिजाइन किया गया है। इसे करीब 30% स्केल डाउन किया गया है। हर छोटी-बड़ी डिटेल का खास ध्यान रखा गया है। इमारतों को असली वाराणसी की तस्वीरों और माप के आधार पर तैयार किया गया है, जिससे इसकी रियलिटी बरकरार रहे। इंटरनेशनल लेवल पर है खूब चर्चा फिल्म की शूटिंग तय समय पर चल रही है। फिलहाल राजामौली और उनकी टीम हैदराबाद की रामोजी फिल्म सिटी में एक एक्शन सीन शूट कर रही है। जिसमें महेश बाबू और खूंखार विलेन पृथ्वीराज सुकुमारन नजर आएंगे। यह भी पता लगा कि, अगला शेड्यूल इसी साल के आखिर में आइसलैंड में होगा। राजामौली जल्द से जल्द शूटिंग पूरी करने की कोशिश में लगे हुए हैं। वहीं फिल्म ने रिलीज से पहले ही ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है। इसकी पहली झलक ले ग्रांड रेक्स में आयोजित ट्रेलर फेस्टिवल में दिखाई गई, जहां दर्शकों ने जबरदस्त रिस्पॉन्स दिया। यह रिएक्शन इस बात का संकेत है कि फिल्म सिर्फ भारतीय ही नहीं, बल्कि इंटरनेशनल मार्केट में भी बड़ा असर छोड़ सकती है।

महाराष्ट्र का 10वीं फेल ढोंगी बाबा:पूजा के नाम पर मर्सिडीज और 6 करोड़ ऐंठे, लड़कियां सप्लाई करने का भी आरोप

महाराष्ट्र का 10वीं फेल ढोंगी बाबा:पूजा के नाम पर मर्सिडीज और 6 करोड़ ऐंठे, लड़कियां सप्लाई करने का भी आरोप

महाराष्ट्र के नासिक में गिरफ्तार स्वयंभू ‘बाबा’ अशोक खरात को लेकर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। गुरुवार को पुणे के एक बड़े लॉजिस्टिक्स कारोबारी राजेंद्र जसूद ने खरात के खिलाफ नौवीं एफआईआर दर्ज कराई। खरात पर राजेंद्र से विदेश में बिजनेस सफल कराने और ‘अवतार पूजा’ के नाम पर करीब 6 करोड़ रुपए ठगने का आरोप है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह मामला केवल ठगी तक सीमित नहीं, बल्कि रसूखदार लोगों से जुड़े अन्य एंगल की भी जांच की जा रही है, जिसमें लड़कियां सप्लाई करने से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल हो रही है। खरात ने पीड़ित व्यापारी को डराया था कि अगर पूजा नहीं की तो नाग देवता काट लेंगे और उसकी मौत हो जाएगी। इसी खौफ में उसने व्यापारी से 90 लाख रु. की मर्सिडीज कार और फार्महाउस के इंटीरियर के लिए करोड़ों रुपए वसूल लिए। खरात ने कारोबारी को झांसा दिया था कि उसे अवतार पूजा के लिए 21 अलग-अलग कोनों से ऊर्जा बटोरनी होगी। इसके लिए उसने म्यांमार, ग्रीनलैंड और अमेरिका तक यात्राएं कराईं। विधायक की पत्नी भी खरात की ‘खास भक्त’ खरात के ‘ब्रह्मसदन’ और ईशान्येश्वर मंदिर में आम लोगों के साथ-साथ सत्ता से जुड़े लोग भी पहुंचते थे। एक विधायक की पत्नी भी उसकी प्रमुख भक्तों में शामिल बताई जा रही हैं। वह न केवल नियमित रूप से पूजा के लिए आती थीं, बल्कि ट्रस्ट की गतिविधियों में भी सक्रिय थीं। कई पूर्व मंत्रियों और अधिकारियों के साथ खरात की तस्वीरें अब जांच के दायरे में हैं। गणित में 28 नंबर वाला सिखा रहा था ‘अंकशास्त्र’ जांच में खरात की 1983 की असली मार्कशीट मिली है, जिसने उसके दावों की पोल खोल दी। खरात खुद को ‘डॉक्टर ऑफ कॉस्मोलॉजी’ और अंकशास्त्र का विशेषज्ञ बताता था, लेकिन वह 10वीं की परीक्षा में फेल हो चुका था। उसे गणित में महज 28 अंक मिले थे पर वह ‘न्यूमेरोलॉजी’ और ‘ग्रह दोष’ के नाम पर अमीर लोगों को प्रभावित करता था। झूमर की लाइट बंद होते ही ‘शुद्धिकरण’ का खेल शुरू स्टाफ समझता था कोड लैंग्वेज… अंदर कब नहीं जाना है एसआईटी प्रमुख तेजस्वी सातपुते की जांच में एक ‘कोड लैंग्वेज’ का पता चला है। केबिन के बाहर एक झूमर लगा था। जब खरात किसी महिला को ‘शुद्धिकरण’ के लिए बुलाता, तो झूमर की लाइट बंद कर देता था। स्टाफ समझ जाता था कि अंदर यौन शोषण चल रहा है और किसी को प्रवेश नहीं करना है। वीडियो वायरल करने वालों पर एक्शन इस मामले में पीड़ित महिलाओं की पहचान उजागर करने वाले अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर फैलाने के आरोप में राहुल शिंदे और योगेश अधव को गिरफ्तार किया गया है।

न्यूयॉर्क के रेस्टोरेंट्स में अब ‘रिजर्वेशन वॉर’:पसंदीदा टेबल चाहिए तो मेंबरशिप के तौर पर चुकानी पड़ रही 23 लाख रुपए तक की फीस

न्यूयॉर्क के रेस्टोरेंट्स में अब ‘रिजर्वेशन वॉर’:पसंदीदा टेबल चाहिए तो मेंबरशिप के तौर पर चुकानी पड़ रही 23 लाख रुपए तक की फीस

अमेरिका में रेस्टोरेंट इंडस्ट्री बदलाव से गुजर रही है। यहां के पॉश रेस्टोरेंट में टेबल मिलना अब “किस्मत’ नहीं, बल्कि ‘सब्सक्रिप्शन’ का खेल बन चुका है। यानी अब जंग स्वाद के लिए नहीं, बल्कि उस मेज को हासिल करने के लिए हो रही है। इसे ‘रेस्टोरेंट रिजर्वेशन वॉर’ कहा जा रहा है। करीब ₹11,293 करोड़ के बड़े सौदों और लाखों की मेंबरशिप फीस के बीच मोना पंजवानी जैसे रेस्टोरेंट मालिकों के लिए यह केवल बुकिंग का सवाल नहीं है, यह उस ‘कस्टमर डेटा’ पर कब्जे की जंग है, जो तय करता है कि आपकी अगली डिनर डेट कहां और कैसी होगी। पिछले साल जब मोना ने लोअर मैनहट्टन में अपना आलीशान रेस्टोरेंट ‘वन40 रूफटॉप’ खोला, तो उनके पास बेहतरीन शेफ और शानदार मेन्यू था, लेकिन एक बड़ी उलझन थी। बुकिंग किस प्लेटफॉर्म से ली जाए? पंजवानी ने सीएनएन को बताया, ‘यह शहर में मेरा पहला रेस्टोरेंट है, मैं अपनी पहचान बना रही हूं, इसलिए मुझे उन प्लेटफॉर्म्स की जरूरत है जो मुझे लोगों की नजरों में ला सकें।’ आज के दौर में यह फैसला मामूली नहीं है। एक तरफ येगव का सर्वे कहता है कि करीब 40% लोग पैसे बचाने के लिए बाहर खाना कम कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बुकिंग एप्स के बीच होड़ मची है कि कौन सबसे ‘एक्सक्लूसिव’ मेज अपने कब्जे में रखेगा। करीब एक दशक से इस बाजार पर ओपन-टेबल (1998) का राज था, जिसके पास आज 60,000 रेस्टोरेंट्स का नेटवर्क है। फिर 2014 में रेजी आया, जिसने प्रीमियम अनुभव पर फोकस किया। पंजवानी ने ‘रेजी’ को चुना क्योंकि यह अमेरिकन एक्सप्रेस से जुड़ा है, जो हाई-एंड क्लाइंट्स को सीधे उन तक पहुंचाता है। लेकिन अब कहानी में डोर्सिया की एंट्री से ट्विस्ट आया है। इस एप का नाम साल 2000 की मशहूर फिल्म ‘अमेरिकन साइको’ के उस काल्पनिक रेस्टोरेंट पर रखा गया है जहां बुकिंग मिलना नामुमकिन था। यहां मेज पाने के लिए लोग सालभर की मेंबरशिप फीस देते हैं, जो 18,822 रुपए से 23,52,750 रुपए तक जाती है। इसके फाउंडर मार्क लोटेनबर्ग कहते हैं, “रिजर्वेशन की जंग सच में हो रही है।’ डोर्सिया आज रोजाना लगभग 94.11 लाख से 1.88 करोड़ का रेवेन्यू बना रहा है। रेस्टोरेंट सुकून की जगह न रहकर ‘टिकटिंग सिस्टम’ बनकर रह जाएंगे इस बहती गंगा में हाथ धोने के लिए उबर ईट्स और डोरडैश जैसे दिग्गज भी कूद पड़े हैं। डोरडैश ने तो बुकिंग प्लेटफॉर्म ‘सेवनरूम्स’ को करीब 11,293 करोड़ रुपए में खरीद लिया। विशेषज्ञ मार्को शाल्मा कहते हैं, ‘रिजर्वेशन पर कब्जा करने का मतलब है ग्राहक के पूरे अनुभव और डेटा पर कब्जा करना।’ लेकिन लोटेनबर्ग इस पर तंज कसते हैं, ‘लोग उसी एप पर लग्जरी डिनर टेबल बुक नहीं करना चाहते, जिससे वे मैकडॉनल्ड्स का बर्गर मंगाते हैं।’ शाल्मा कहते हैं, ‘जब हर सीट ‘डिजिटल इन्वेंट्री’ बन जाती है, तो रेस्टोरेंट कोई सुकून वाली जगह नहीं, बल्कि एक ‘टिकटिंग सिस्टम’ बन कर रह जाता है।’