Friday, 08 May 2026 | 06:33 AM

Trending :

EXCLUSIVE

Yash Success Story Explained; KGF Ramayana Toxic

Yash Success Story Explained; KGF Ramayana Toxic

23 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र

  • कॉपी लिंक

यश ने अपने करियर की शुरुआत न चाहते हुए भी टेलीविजन से की, जहां उन्हें प्रतिदिन 500 रुपए मिलते थे।

यश आज पैन-इंडिया सुपरस्टार हैं, लेकिन उनका सफर संघर्षों से भरा रहा। कर्नाटक के साधारण परिवार में जन्मे यश के पिता BMTC बस ड्राइवर थे, जबकि मां हाउसवाइफ थीं। बचपन से ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें सिर्फ एक्टर बनना है। घरवालों की चिंता और पैसों की तंगी के बावजूद वे महज ₹300 लेकर बेंगलुरु पहुंचे।

शुरुआत में थिएटर में बैकस्टेज काम किया, जहां उन्हें ₹50 मिलते थे। वहीं से उन्होंने एक्टिंग सीखी और छोटे-छोटे रोल करने लगे। बाद में टीवी सीरियल्स में मौका मिला, जहां शुरुआत में उन्हें ₹500 प्रतिदिन मिलते थे। मेहनत और संघर्ष के दम पर यश ने कन्नड़ सिनेमा में पहचान बनाई। फिर केजीएफ: चैप्टर 1 और केजीएफ: चैप्टर 2 से देशभर में सुपरस्टार बन गए।

आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं यश के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें।

यश का जन्म 8 जनवरी 1986 को हुआ था, उनके बचपन का नाम नवीन कुमार गौड़ा है।

यश का जन्म 8 जनवरी 1986 को हुआ था, उनके बचपन का नाम नवीन कुमार गौड़ा है।

बचपन से ही एक्टर बनना चाहता था

इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में यश ने अपने करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें साझा की थीं। यश कहते हैं- मेरा जन्म कर्नाटक के हासन जिले के गांव भुवानाहल्ली में हुआ था। मेरे पिता मैसूर में रहते थे, इसलिए मेरा बचपन भी वहीं बीता। मेरे पिता BMTC बस ड्राइवर थे और मां हाउसवाइफ थीं।

हम एक आम मिडिल क्लास परिवार की तरह खुशहाल जिंदगी जी रहे थे। फिर मैंने एक्टर बनने का सपना देखा। बचपन से ही मुझे एक्टर के तौर पर मिलने वाला एक्स्ट्रा अटेंशन पसंद था। इसी वजह से मुझे एक्टिंग, मोनो एक्टिंग, फैंसी ड्रेस और डांस में हिस्सा लेना अच्छा लगता था। इन सबसे मुझे बहुत खुशी मिलती थी। वहीं से यह सफर शुरू हुआ।

एक्टिंग के अलावा दूसरा विकल्प नहीं था

एक्टिंग के अलावा मेरे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था। मेरे जीवन में कोई प्लान-बी नहीं था। मैं सिर्फ एक्टर बनना चाहता था। सच कहूं तो मैं स्टार बनना चाहता था। उस उम्र में मुझे यह समझ नहीं थी कि एक्टर बनना कितना मुश्किल है या इसके लिए कितनी मेहनत और समर्पण चाहिए। लेकिन बचपन से ही लगता था कि मैं एक दिन एक्टर जरूर बनूंगा।

टीचर्स हीरो कहकर बुलाते थे

मेरे स्कूल के टीचर्स मुझे हीरो कहकर बुलाते थे। बचपन में मैंने एक मोनो एक्टिंग की थी, जिसमें मैं वीरप्पन को पकड़ने की बात करता था। इसी वजह से स्कूल में सब मुझे चिढ़ाते थे। जब भी वीरप्पन की कोई खबर आती, लोग मजाक में कहते, “अरे, अभी तक पकड़ा नहीं क्या?” लेकिन मैं अंदर से मान चुका था कि एक दिन एक्टर बनूंगा।

फिल्मों में आने से पहले मैं किसी एक्टिंग इंस्टीट्यूट या फिल्म स्कूल में पढ़ना चाहता था, लेकिन मेरे माता-पिता डरे हुए थे। उन्हें लगता था कि फिल्म इंडस्ट्री आसान जगह नहीं है और वहां सफल होना मुश्किल है। 10वीं के बाद ही मैं एक्टिंग में जाना चाहता था, क्योंकि मुझे पता था कि क्या करना है। लेकिन घरवालों ने कहा कि पहले डिग्री पूरी करनी होगी।

पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था

मैंने PUC (Pre-University Course) पूरा किया, लेकिन धीरे-धीरे एहसास हुआ कि मेरा मन पढ़ाई में नहीं लग रहा है। पढ़ाई बुरी नहीं लगती थी, लेकिन मैं जल्दी एक्टर बनना चाहता था। मुझे लगता था कि यही सही उम्र है, जब मुझे अपने हुनर को समझना और सीखना चाहिए। किसी भी पेशे में समय लगाना जरूरी होता है, ताकि उसे अच्छे से सीखा जा सके। इसलिए मैंने तय कर लिया कि अब मुझे एक्टिंग की तरफ ही जाना है।

एक्टिंग इंस्टीट्यूट की फीस भरने के पैसे नहीं थे

मेरे माता-पिता बहुत परेशान थे। उन्हें लग रहा था कि मैं उनकी बात नहीं सुन रहा हूं। मैंने उनसे कहा कि मुझे सिर्फ एक मौका चाहिए। मैं किसी एक्टिंग इंस्टीट्यूट या थिएटर ग्रुप में शामिल हो जाऊंगा। लेकिन उस समय हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि मैं एक्टिंग इंस्टीट्यूट की फीस भर सकूं। इसलिए मैंने थिएटर जॉइन करने का फैसला किया।

मैं घर छोड़कर चला गया। यह घरवालों की मर्जी के खिलाफ था। उन्होंने मुझसे कहा, “ठीक है, जाओ। लेकिन अगर वापस लौटकर आए तो फिर सिर्फ पढ़ाई करना और नौकरी करना।” मैंने कहा, “ठीक है, लेकिन मुझे एक मौका दीजिए।” उन्हें लगा कि मैं जल्द ही वापस आ जाऊंगा, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ।

₹300 लेकर बेंगलुरु पहुंचा था

जब मैं बेंगलुरु पहुंचा तो मेरे पास सिर्फ ₹300 थे। शहर मुझे बहुत बड़ा और डराने वाला लगा। छोटे शहर से आने वाले इंसान के लिए बड़ा शहर डराने वाला हो सकता है। मुझे लगा कि यहां लोग बहुत तेज हैं और हर कोई अपनी जिंदगी में व्यस्त है। लेकिन अच्छी बात यह थी कि हर जगह मुझे मदद करने वाला मिल गया।

थिएटर के दौरान यश के. एल. ई. कॉलेज, बेंगलुरु से बैचलर ऑफ आर्ट्स की पढ़ाई पूरी की।

थिएटर के दौरान यश के. एल. ई. कॉलेज, बेंगलुरु से बैचलर ऑफ आर्ट्स की पढ़ाई पूरी की।

थिएटर में इमरजेंसी एक्टर बन गया

मैंने ‘बेनाका’ थिएटर ग्रुप जॉइन किया और बैकस्टेज काम करने लगा। बैकस्टेज काम करते हुए मैं दूसरे कलाकारों के रोल प्रैक्टिस करता था। अगर कोई एक्टर लेट हो जाता तो मैं उसके डायलॉग बोल देता। इस तरह रिहर्सल करता रहता था। धीरे-धीरे मैं इमरजेंसी एक्टर बन गया। अगर कोई बीमार हो जाए या कलाकार न आए, तो मुझे स्टेज पर भेज दिया जाता था। वहीं से मेरा असली सफर शुरू हुआ और बाद में बड़े रोल मिलने लगे।

थिएटर में बैकस्टेज काम के बदले मुझे ₹50 मिलते थे

उस समय मेरे माता-पिता परेशान रहते थे, क्योंकि बेंगलुरु जैसे शहर में रहना आसान नहीं था। रहने की जगह भी नहीं थी। मुझे शहर की सड़कों तक का पता नहीं था। मैं पहले कभी अपनी राजधानी तक नहीं गया था। थिएटर में बैकस्टेज काम के बदले मुझे ₹50 मिलते थे। वही मेरी कमाई थी और उसी से खर्च चलता था। लेकिन आज पीछे मुड़कर देखता हूं तो वह संघर्ष नहीं, बल्कि रोमांच लगता है। हर दिन नया अनुभव था।

एक्टिंग सीखने की चाह ने बनाया रास्ता

मेरा पहला स्टेज परफॉर्मेंस मुंबई में हुआ। माटुंगा में एक मैसूर एसोसिएशन थी, जहां थिएटर ग्रुप गया था। वहां छोटे रोल के लिए कलाकार नहीं आया, तो मैंने कहा कि मैं करूंगा। मैं बैकस्टेज वर्कर था।

डायरेक्टर नागभारण सर ने मुझे स्टेज पर जाने से पहले रोककर कहा, “रुको, पहले देखो और सीखो, बाद में एक्टिंग करना।” लेकिन मैंने उनसे कहा, “सर, आपने पूछा था कि कोई है क्या? इसलिए मैं आया हूं। मैं कर लूंगा।” आखिरकार उन्होंने मुझे मौका दिया। वह मेरी जिंदगी का पहला बड़ा मौका था और लोगों को मेरा काम पसंद आया।

मैं मुंबई इसलिए गया था, क्योंकि थिएटर ग्रुप के साथ रहने और खाने की सुविधा मिल जाती थी। मेरे पास सिर्फ ₹300 थे और उसी में बेंगलुरु में गुजारा करना था। इसलिए सोचता था कि अगर थिएटर टीम के साथ जाऊंगा तो ट्रेन का सफर, खाना-पीना हो जाएगा और साथ ही एक्टिंग भी सीखने को मिलेगी।

टीवी नहीं करना चाहता था

इसके बाद मुझे टीवी में काम मिला। किसी ने मेरा नाटक देखा और टीवी सीरियल का ऑफर दिया। शुरुआत में मैं टीवी नहीं करना चाहता था, क्योंकि मेरे दिमाग में सिर्फ फिल्मों का सपना था। मुझे लगता था कि टीवी में वो स्टारडम नहीं मिलेगा। लेकिन जिंदगी बहुत कुछ सिखाती है।

टीवी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। कैमरे के सामने काम करना, टेक्निकल चीजें समझना, फोकस और शॉट्स समझना- ये सब मैंने वहीं सीखा। नए कलाकारों के लिए टीवी अच्छी जगह है, क्योंकि वहां सीखने और प्रैक्टिस का समय मिलता है। वहां का माहौल परिवार जैसा होता है और लोग सिखाते भी हैं।

यश ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत टेलीविजन सीरियल्स से की थी। साल 2004 में उन्होंने टीवी सीरियल उत्तरायण से डेब्यू किया। इसके बाद वह नंदा गोकुला, माले बिल्लू और प्रीति इल्लादा मेले जैसे सीरियल्स में नजर आए।

टीवी में शुरुआत में ₹500 प्रतिदिन मिलते थे

यश कहते हैं- मुझे अच्छे टीवी शोज और शानदार कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिला। वहीं से मेरी एक्टिंग की असली ट्रेनिंग शुरू हुई। टीवी में शुरुआत में मुझे ₹500 प्रतिदिन मिलते थे। बाद में दूसरे सीरियल के लिए ₹1500 प्रतिदिन ऑफर हुए।

टीवी की कमाई कपड़ों और लुक पर खर्च करता था

उस समय कर्नाटक में टीवी कलाकारों को अपने कपड़े खुद खरीदने पड़ते थे। बाकी लोग पैसे बचाने के लिए एक ही कपड़े कई सीरियल्स में पहनते थे और गाड़ी या प्रॉपर्टी खरीदते थे। लेकिन मैं अपनी कमाई कपड़ों और लुक पर खर्च करता था। लोग मुझ पर हंसते थे और कहते थे कि मैं पैसे बर्बाद कर रहा हूं। लेकिन मैं उनसे कहता था, “मेरा सपना सुपरस्टार बनना है।

अभी मेरे पास उतने पैसे नहीं हैं, लेकिन मैं जितना कर सकता हूं, उतना खुद पर निवेश करूंगा। शायद उसी वजह से किसी ने मुझे देखकर कहा कि यह हीरो बन सकता है और मुझे फिल्म का ऑफर मिला।

फिल्मों में एंट्री और पहला ब्रेक

यश ने साल 2007 में फिल्म जंबाड़ा हुडुगी से फिल्मों में कदम रखा। इसमें उन्होंने सपोर्टिंग रोल किया था। इसके बाद 2008 में आई फिल्म मोग्गिना मनसु से उन्हें बड़ा ब्रेक मिला। इस फिल्म में उनकी एक्टिंग की काफी तारीफ हुई और उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर (कन्नड़) मिला।

यश की पहली लीड फिल्म रॉकी (2008) बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही। इसके बाद कल्लारा संतहे और गोकुला जैसी फिल्में भी खास नहीं चलीं। हालांकि इन फिल्मों में उनकी एक्टिंग को लेकर चर्चा हुई। साल 2010 में आई फिल्म मोडलसाला यश की पहली सोलो हिट बनी। इसके बाद किरातका, लकी, जानू और ड्रामा जैसी फिल्मों ने उन्हें कन्नड़ सिनेमा में मजबूत एक्टर के तौर पर स्थापित किया।

स्टारडम की ओर बढ़ते कदम

साल 2013 से 2017 के बीच यश ने गुगली, राजा हुली, गजकेसरी, मिस्टर एंड मिसेज रामाचारी, मास्टरपीस और संतु स्ट्रेट फॉरवर्ड जैसी हिट फिल्मों में काम किया। इस दौर में उनकी इमेज मास हीरो की बन गई। खास तौर पर मिस्टर एंड मिसेज रामाचारी बड़ी हिट साबित हुई। साल 2014 में रिलीज हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ₹50 करोड़ से अधिक का बिजनेस किया।

हर फिल्म के साथ मेरा कलेक्शन बढ़ रहा था

यश कहते हैं- इन्हीं फिल्मों ने मुझे ताकत और आत्मविश्वास दिया। हर फिल्म के साथ मेरा कलेक्शन बढ़ रहा था और दर्शकों का प्यार भी बढ़ रहा था। तब एहसास हुआ कि लोग मुझसे कुछ बड़ा उम्मीद कर रहे हैं। तभी मैंने सोचना शुरू किया कि सिनेमा सिर्फ फिल्में करने और पैसे कमाने तक सीमित नहीं है। हमारी इंडस्ट्री में बहुत संभावनाएं हैं और हमें इसे अगले स्तर तक ले जाना चाहिए।

इसी दौरान मैंने प्रशांत नील की फिल्म ‘उग्रम’ देखी और उसके विजुअल्स देखकर हैरान रह गया। दूसरी तरफ होम्बले प्रोडक्शंस के साथ मेरी अच्छी समझ बन गई थी। हम पहले भी साथ काम कर चुके थे और आगे भी कुछ बड़ा करना चाहते थे। फिर एक दिन कार्तिक गौड़ा ने प्रशांत नील को अप्रोच किया।

प्रशांत मेरे पास स्क्रिप्ट लेकर आए। मैं पहले से उनके काम का फैन था। उन्होंने मुझे KGF का छोटा-सा हिस्सा सुनाया, जिसमें माइंस की कहानी थी। मैंने उनसे कहा- सिर्फ यह हिस्सा ही अपने आप में बड़ी कहानी है। इसे अलग तरीके से बनाया जा सकता है।

उस समय मेरी फिल्म ‘मिस्टर एंड मिसेज रामाचारी’ ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी। वह उस दौर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक थी। इससे हमें ज्यादा आत्मविश्वास मिला कि अब बड़े बजट की फिल्म बनाई जा सकती है।

फिर KGF की शुरुआत हुई। जब मैंने देखा कि प्रशांत नील किस तरह काम कर रहे हैं और उनका विजन कितना बड़ा है, तब मुझे यकीन हो गया था कि हम कुछ ऐसा बना रहे हैं, जो इंडस्ट्री को बदल सकता है।

केजीएफ और पैन-इंडिया पहचान

साल 2018 में आई फिल्म केजीएफ: चैप्टर 1 ने यश को देशभर में पहचान दिलाई। फिल्म में उनके रॉकी किरदार को दर्शकों ने खूब पसंद किया। प्रशांत नील के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने कन्नड़ सिनेमा के लिए नए रास्ते खोले। फिल्म कई भाषाओं में रिलीज हुई और जबरदस्त कमाई की।

फिल्म ने दुनिया भर में लगभग ₹250 करोड़ की कमाई की। वहीं, पहले दिन दुनिया भर में लगभग ₹25 करोड़ का कलेक्शन किया था, जो उस समय कन्नड़ सिनेमा के लिए रिकॉर्ड था। इसके बाद साल 2022 में आई केजीएफ:: चैप्टर 2 भी सुपरहिट साबित हुई और इसने कई रिकॉर्ड बनाए। यह कन्नड़ सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी। इसने दुनिया भर में ₹1,215-1,250 करोड़ का बिजनेस किया।

यह भारत में ₹1,000 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन करने वाली चुनिंदा फिल्मों में से एक है। हिंदी वर्जन ने अकेले ₹434 करोड़ से अधिक की शुद्ध कमाई (Net) की थी। यह ₹1,000 करोड़ क्लब में शामिल होने वाली पहली कन्नड़ फिल्म बनी। इस सीरीज की सफलता के बाद यश पैन-इंडिया स्टार बन गए।

2026 में यश की दो बड़ी फिल्में

साल 2026 यश के लिए खास रहने वाला है। उनकी दो बड़ी फिल्में रिलीज होंगी। पहली फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ है, जिसे गीतू मोहनदास ने डायरेक्ट किया है। यह पीरियड गैंगस्टर ड्रामा है और 19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

इसके बाद यश ‘रामायण: पार्ट 1’ में रावण के किरदार में नजर आएंगे, जो दिवाली पर रिलीज होगी। इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता, रवि दुबे लक्ष्मण, लारा दत्ता कैकेयी और सनी देओल हनुमान की भूमिका में दिखाई देंगे।

_____________________________________________

पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए…

पिता अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर अमेरिका गए:वहां मजदूरी की, 18 साल की गायकी में नाम नहीं बना पाईं, धुरंधर से मिली पहचान

‘धुरंधर’ से बड़ी पहचान बनाने वाली सिंगर जैस्मीन सैंडलस की जिंदगी सफलता के साथ संघर्ष और दर्द से भरी रही है। एक वक्त वह अंदर से टूट गई थीं और शराब की लत में फंस गई थीं। आज वह उस दौर पर पछताती हैं।पूरी खबर पढ़ें..

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
श्योपुर बाढ़ राहत घोटाला, 18 पटवारियों पर चलेगा मुकदमा:कलेक्टर ने दी अभियोजन स्वीकृति; राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी और धोखाधड़ी की थी

April 3, 2026/
9:35 pm

श्योपुर जिले में हुए बहुचर्चित बाढ़ राहत घोटाले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर अर्पित वर्मा ने इस...

Sunil Pal Kidnapping Trauma | Meerut Court Identification

April 21, 2026/
6:15 pm

30 मिनट पहले कॉपी लिंक कॉमेडियन सुनील पाल सोमवार को मेरठ की एक अदालत पहुंचे। यहां उन्होंने 2024 के किडनैपिंग...

US President Donald Trump said negotiations with Iran are progressing behind closed doors and insisted that only a small circle inside his administration knows the true status of the talks. (Reuters)

May 1, 2026/
11:51 am

आखरी अपडेट:01 मई, 2026, 11:51 IST ममता बनर्जी और टीएमसी ने कोलकाता के स्ट्रांगरूम में ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप...

समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी 15 अप्रैल से शुरू:सिवनी में बारदानों की कमी बनी समस्या; किसानों परेशान

April 3, 2026/
12:21 pm

सिवनी जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी इस साल चुनौतियों के कारण देरी से शुरू होगी। प्रशासन ने पहली...

Indore PWD Officers Bribe Scam

April 30, 2026/
2:23 pm

इंदौर8 मिनट पहले कॉपी लिंक इंदौर में रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े गए लोक निर्माण विभाग (PWD) के तीन अधिकारियों को...

ईरान-इजराइल जंग के बीच अमेरिकी शेयर बाजार 900 अंक गिरा:47,000 अंक पर कारोबार कर रहा; कच्चे तेल की कीमतें और बेरोजगारी दर बढ़ने का असर

March 6, 2026/
8:44 pm

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के बीच अमेरिकी शेयर बाजार डाउ जोंस में आज 6 मार्च को 2% की गिरावट है।...

बीजेपी ने असम में बड़े बदलाव की योजना बनाई, विधानसभा चुनाव से पहले 30 विधायकों को बदला जा सकता है | चुनाव समाचार

April 4, 2026/
1:39 pm

आखरी अपडेट:04 अप्रैल, 2026, 13:39 IST सीएम सरमा ने राहुल गांधी की गिरफ्तारी की धमकी को खारिज करते हुए कहा...

Sanju Samson; CSK vs PBKS IPL 2026 LIVE Score Update

April 3, 2026/
5:10 am

स्पोर्ट्स डेस्क2 घंटे पहले कॉपी लिंक IPL के इस सीजन का 7वां मैच चेन्नई सुपर किंग्स और पंजाब किंग्स के...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

Yash Success Story Explained; KGF Ramayana Toxic

Yash Success Story Explained; KGF Ramayana Toxic

23 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र

  • कॉपी लिंक

यश ने अपने करियर की शुरुआत न चाहते हुए भी टेलीविजन से की, जहां उन्हें प्रतिदिन 500 रुपए मिलते थे।

यश आज पैन-इंडिया सुपरस्टार हैं, लेकिन उनका सफर संघर्षों से भरा रहा। कर्नाटक के साधारण परिवार में जन्मे यश के पिता BMTC बस ड्राइवर थे, जबकि मां हाउसवाइफ थीं। बचपन से ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें सिर्फ एक्टर बनना है। घरवालों की चिंता और पैसों की तंगी के बावजूद वे महज ₹300 लेकर बेंगलुरु पहुंचे।

शुरुआत में थिएटर में बैकस्टेज काम किया, जहां उन्हें ₹50 मिलते थे। वहीं से उन्होंने एक्टिंग सीखी और छोटे-छोटे रोल करने लगे। बाद में टीवी सीरियल्स में मौका मिला, जहां शुरुआत में उन्हें ₹500 प्रतिदिन मिलते थे। मेहनत और संघर्ष के दम पर यश ने कन्नड़ सिनेमा में पहचान बनाई। फिर केजीएफ: चैप्टर 1 और केजीएफ: चैप्टर 2 से देशभर में सुपरस्टार बन गए।

आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं यश के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें।

यश का जन्म 8 जनवरी 1986 को हुआ था, उनके बचपन का नाम नवीन कुमार गौड़ा है।

यश का जन्म 8 जनवरी 1986 को हुआ था, उनके बचपन का नाम नवीन कुमार गौड़ा है।

बचपन से ही एक्टर बनना चाहता था

इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में यश ने अपने करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें साझा की थीं। यश कहते हैं- मेरा जन्म कर्नाटक के हासन जिले के गांव भुवानाहल्ली में हुआ था। मेरे पिता मैसूर में रहते थे, इसलिए मेरा बचपन भी वहीं बीता। मेरे पिता BMTC बस ड्राइवर थे और मां हाउसवाइफ थीं।

हम एक आम मिडिल क्लास परिवार की तरह खुशहाल जिंदगी जी रहे थे। फिर मैंने एक्टर बनने का सपना देखा। बचपन से ही मुझे एक्टर के तौर पर मिलने वाला एक्स्ट्रा अटेंशन पसंद था। इसी वजह से मुझे एक्टिंग, मोनो एक्टिंग, फैंसी ड्रेस और डांस में हिस्सा लेना अच्छा लगता था। इन सबसे मुझे बहुत खुशी मिलती थी। वहीं से यह सफर शुरू हुआ।

एक्टिंग के अलावा दूसरा विकल्प नहीं था

एक्टिंग के अलावा मेरे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था। मेरे जीवन में कोई प्लान-बी नहीं था। मैं सिर्फ एक्टर बनना चाहता था। सच कहूं तो मैं स्टार बनना चाहता था। उस उम्र में मुझे यह समझ नहीं थी कि एक्टर बनना कितना मुश्किल है या इसके लिए कितनी मेहनत और समर्पण चाहिए। लेकिन बचपन से ही लगता था कि मैं एक दिन एक्टर जरूर बनूंगा।

टीचर्स हीरो कहकर बुलाते थे

मेरे स्कूल के टीचर्स मुझे हीरो कहकर बुलाते थे। बचपन में मैंने एक मोनो एक्टिंग की थी, जिसमें मैं वीरप्पन को पकड़ने की बात करता था। इसी वजह से स्कूल में सब मुझे चिढ़ाते थे। जब भी वीरप्पन की कोई खबर आती, लोग मजाक में कहते, “अरे, अभी तक पकड़ा नहीं क्या?” लेकिन मैं अंदर से मान चुका था कि एक दिन एक्टर बनूंगा।

फिल्मों में आने से पहले मैं किसी एक्टिंग इंस्टीट्यूट या फिल्म स्कूल में पढ़ना चाहता था, लेकिन मेरे माता-पिता डरे हुए थे। उन्हें लगता था कि फिल्म इंडस्ट्री आसान जगह नहीं है और वहां सफल होना मुश्किल है। 10वीं के बाद ही मैं एक्टिंग में जाना चाहता था, क्योंकि मुझे पता था कि क्या करना है। लेकिन घरवालों ने कहा कि पहले डिग्री पूरी करनी होगी।

पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था

मैंने PUC (Pre-University Course) पूरा किया, लेकिन धीरे-धीरे एहसास हुआ कि मेरा मन पढ़ाई में नहीं लग रहा है। पढ़ाई बुरी नहीं लगती थी, लेकिन मैं जल्दी एक्टर बनना चाहता था। मुझे लगता था कि यही सही उम्र है, जब मुझे अपने हुनर को समझना और सीखना चाहिए। किसी भी पेशे में समय लगाना जरूरी होता है, ताकि उसे अच्छे से सीखा जा सके। इसलिए मैंने तय कर लिया कि अब मुझे एक्टिंग की तरफ ही जाना है।

एक्टिंग इंस्टीट्यूट की फीस भरने के पैसे नहीं थे

मेरे माता-पिता बहुत परेशान थे। उन्हें लग रहा था कि मैं उनकी बात नहीं सुन रहा हूं। मैंने उनसे कहा कि मुझे सिर्फ एक मौका चाहिए। मैं किसी एक्टिंग इंस्टीट्यूट या थिएटर ग्रुप में शामिल हो जाऊंगा। लेकिन उस समय हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि मैं एक्टिंग इंस्टीट्यूट की फीस भर सकूं। इसलिए मैंने थिएटर जॉइन करने का फैसला किया।

मैं घर छोड़कर चला गया। यह घरवालों की मर्जी के खिलाफ था। उन्होंने मुझसे कहा, “ठीक है, जाओ। लेकिन अगर वापस लौटकर आए तो फिर सिर्फ पढ़ाई करना और नौकरी करना।” मैंने कहा, “ठीक है, लेकिन मुझे एक मौका दीजिए।” उन्हें लगा कि मैं जल्द ही वापस आ जाऊंगा, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ।

₹300 लेकर बेंगलुरु पहुंचा था

जब मैं बेंगलुरु पहुंचा तो मेरे पास सिर्फ ₹300 थे। शहर मुझे बहुत बड़ा और डराने वाला लगा। छोटे शहर से आने वाले इंसान के लिए बड़ा शहर डराने वाला हो सकता है। मुझे लगा कि यहां लोग बहुत तेज हैं और हर कोई अपनी जिंदगी में व्यस्त है। लेकिन अच्छी बात यह थी कि हर जगह मुझे मदद करने वाला मिल गया।

थिएटर के दौरान यश के. एल. ई. कॉलेज, बेंगलुरु से बैचलर ऑफ आर्ट्स की पढ़ाई पूरी की।

थिएटर के दौरान यश के. एल. ई. कॉलेज, बेंगलुरु से बैचलर ऑफ आर्ट्स की पढ़ाई पूरी की।

थिएटर में इमरजेंसी एक्टर बन गया

मैंने ‘बेनाका’ थिएटर ग्रुप जॉइन किया और बैकस्टेज काम करने लगा। बैकस्टेज काम करते हुए मैं दूसरे कलाकारों के रोल प्रैक्टिस करता था। अगर कोई एक्टर लेट हो जाता तो मैं उसके डायलॉग बोल देता। इस तरह रिहर्सल करता रहता था। धीरे-धीरे मैं इमरजेंसी एक्टर बन गया। अगर कोई बीमार हो जाए या कलाकार न आए, तो मुझे स्टेज पर भेज दिया जाता था। वहीं से मेरा असली सफर शुरू हुआ और बाद में बड़े रोल मिलने लगे।

थिएटर में बैकस्टेज काम के बदले मुझे ₹50 मिलते थे

उस समय मेरे माता-पिता परेशान रहते थे, क्योंकि बेंगलुरु जैसे शहर में रहना आसान नहीं था। रहने की जगह भी नहीं थी। मुझे शहर की सड़कों तक का पता नहीं था। मैं पहले कभी अपनी राजधानी तक नहीं गया था। थिएटर में बैकस्टेज काम के बदले मुझे ₹50 मिलते थे। वही मेरी कमाई थी और उसी से खर्च चलता था। लेकिन आज पीछे मुड़कर देखता हूं तो वह संघर्ष नहीं, बल्कि रोमांच लगता है। हर दिन नया अनुभव था।

एक्टिंग सीखने की चाह ने बनाया रास्ता

मेरा पहला स्टेज परफॉर्मेंस मुंबई में हुआ। माटुंगा में एक मैसूर एसोसिएशन थी, जहां थिएटर ग्रुप गया था। वहां छोटे रोल के लिए कलाकार नहीं आया, तो मैंने कहा कि मैं करूंगा। मैं बैकस्टेज वर्कर था।

डायरेक्टर नागभारण सर ने मुझे स्टेज पर जाने से पहले रोककर कहा, “रुको, पहले देखो और सीखो, बाद में एक्टिंग करना।” लेकिन मैंने उनसे कहा, “सर, आपने पूछा था कि कोई है क्या? इसलिए मैं आया हूं। मैं कर लूंगा।” आखिरकार उन्होंने मुझे मौका दिया। वह मेरी जिंदगी का पहला बड़ा मौका था और लोगों को मेरा काम पसंद आया।

मैं मुंबई इसलिए गया था, क्योंकि थिएटर ग्रुप के साथ रहने और खाने की सुविधा मिल जाती थी। मेरे पास सिर्फ ₹300 थे और उसी में बेंगलुरु में गुजारा करना था। इसलिए सोचता था कि अगर थिएटर टीम के साथ जाऊंगा तो ट्रेन का सफर, खाना-पीना हो जाएगा और साथ ही एक्टिंग भी सीखने को मिलेगी।

टीवी नहीं करना चाहता था

इसके बाद मुझे टीवी में काम मिला। किसी ने मेरा नाटक देखा और टीवी सीरियल का ऑफर दिया। शुरुआत में मैं टीवी नहीं करना चाहता था, क्योंकि मेरे दिमाग में सिर्फ फिल्मों का सपना था। मुझे लगता था कि टीवी में वो स्टारडम नहीं मिलेगा। लेकिन जिंदगी बहुत कुछ सिखाती है।

टीवी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। कैमरे के सामने काम करना, टेक्निकल चीजें समझना, फोकस और शॉट्स समझना- ये सब मैंने वहीं सीखा। नए कलाकारों के लिए टीवी अच्छी जगह है, क्योंकि वहां सीखने और प्रैक्टिस का समय मिलता है। वहां का माहौल परिवार जैसा होता है और लोग सिखाते भी हैं।

यश ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत टेलीविजन सीरियल्स से की थी। साल 2004 में उन्होंने टीवी सीरियल उत्तरायण से डेब्यू किया। इसके बाद वह नंदा गोकुला, माले बिल्लू और प्रीति इल्लादा मेले जैसे सीरियल्स में नजर आए।

टीवी में शुरुआत में ₹500 प्रतिदिन मिलते थे

यश कहते हैं- मुझे अच्छे टीवी शोज और शानदार कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिला। वहीं से मेरी एक्टिंग की असली ट्रेनिंग शुरू हुई। टीवी में शुरुआत में मुझे ₹500 प्रतिदिन मिलते थे। बाद में दूसरे सीरियल के लिए ₹1500 प्रतिदिन ऑफर हुए।

टीवी की कमाई कपड़ों और लुक पर खर्च करता था

उस समय कर्नाटक में टीवी कलाकारों को अपने कपड़े खुद खरीदने पड़ते थे। बाकी लोग पैसे बचाने के लिए एक ही कपड़े कई सीरियल्स में पहनते थे और गाड़ी या प्रॉपर्टी खरीदते थे। लेकिन मैं अपनी कमाई कपड़ों और लुक पर खर्च करता था। लोग मुझ पर हंसते थे और कहते थे कि मैं पैसे बर्बाद कर रहा हूं। लेकिन मैं उनसे कहता था, “मेरा सपना सुपरस्टार बनना है।

अभी मेरे पास उतने पैसे नहीं हैं, लेकिन मैं जितना कर सकता हूं, उतना खुद पर निवेश करूंगा। शायद उसी वजह से किसी ने मुझे देखकर कहा कि यह हीरो बन सकता है और मुझे फिल्म का ऑफर मिला।

फिल्मों में एंट्री और पहला ब्रेक

यश ने साल 2007 में फिल्म जंबाड़ा हुडुगी से फिल्मों में कदम रखा। इसमें उन्होंने सपोर्टिंग रोल किया था। इसके बाद 2008 में आई फिल्म मोग्गिना मनसु से उन्हें बड़ा ब्रेक मिला। इस फिल्म में उनकी एक्टिंग की काफी तारीफ हुई और उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर (कन्नड़) मिला।

यश की पहली लीड फिल्म रॉकी (2008) बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही। इसके बाद कल्लारा संतहे और गोकुला जैसी फिल्में भी खास नहीं चलीं। हालांकि इन फिल्मों में उनकी एक्टिंग को लेकर चर्चा हुई। साल 2010 में आई फिल्म मोडलसाला यश की पहली सोलो हिट बनी। इसके बाद किरातका, लकी, जानू और ड्रामा जैसी फिल्मों ने उन्हें कन्नड़ सिनेमा में मजबूत एक्टर के तौर पर स्थापित किया।

स्टारडम की ओर बढ़ते कदम

साल 2013 से 2017 के बीच यश ने गुगली, राजा हुली, गजकेसरी, मिस्टर एंड मिसेज रामाचारी, मास्टरपीस और संतु स्ट्रेट फॉरवर्ड जैसी हिट फिल्मों में काम किया। इस दौर में उनकी इमेज मास हीरो की बन गई। खास तौर पर मिस्टर एंड मिसेज रामाचारी बड़ी हिट साबित हुई। साल 2014 में रिलीज हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ₹50 करोड़ से अधिक का बिजनेस किया।

हर फिल्म के साथ मेरा कलेक्शन बढ़ रहा था

यश कहते हैं- इन्हीं फिल्मों ने मुझे ताकत और आत्मविश्वास दिया। हर फिल्म के साथ मेरा कलेक्शन बढ़ रहा था और दर्शकों का प्यार भी बढ़ रहा था। तब एहसास हुआ कि लोग मुझसे कुछ बड़ा उम्मीद कर रहे हैं। तभी मैंने सोचना शुरू किया कि सिनेमा सिर्फ फिल्में करने और पैसे कमाने तक सीमित नहीं है। हमारी इंडस्ट्री में बहुत संभावनाएं हैं और हमें इसे अगले स्तर तक ले जाना चाहिए।

इसी दौरान मैंने प्रशांत नील की फिल्म ‘उग्रम’ देखी और उसके विजुअल्स देखकर हैरान रह गया। दूसरी तरफ होम्बले प्रोडक्शंस के साथ मेरी अच्छी समझ बन गई थी। हम पहले भी साथ काम कर चुके थे और आगे भी कुछ बड़ा करना चाहते थे। फिर एक दिन कार्तिक गौड़ा ने प्रशांत नील को अप्रोच किया।

प्रशांत मेरे पास स्क्रिप्ट लेकर आए। मैं पहले से उनके काम का फैन था। उन्होंने मुझे KGF का छोटा-सा हिस्सा सुनाया, जिसमें माइंस की कहानी थी। मैंने उनसे कहा- सिर्फ यह हिस्सा ही अपने आप में बड़ी कहानी है। इसे अलग तरीके से बनाया जा सकता है।

उस समय मेरी फिल्म ‘मिस्टर एंड मिसेज रामाचारी’ ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी। वह उस दौर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक थी। इससे हमें ज्यादा आत्मविश्वास मिला कि अब बड़े बजट की फिल्म बनाई जा सकती है।

फिर KGF की शुरुआत हुई। जब मैंने देखा कि प्रशांत नील किस तरह काम कर रहे हैं और उनका विजन कितना बड़ा है, तब मुझे यकीन हो गया था कि हम कुछ ऐसा बना रहे हैं, जो इंडस्ट्री को बदल सकता है।

केजीएफ और पैन-इंडिया पहचान

साल 2018 में आई फिल्म केजीएफ: चैप्टर 1 ने यश को देशभर में पहचान दिलाई। फिल्म में उनके रॉकी किरदार को दर्शकों ने खूब पसंद किया। प्रशांत नील के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने कन्नड़ सिनेमा के लिए नए रास्ते खोले। फिल्म कई भाषाओं में रिलीज हुई और जबरदस्त कमाई की।

फिल्म ने दुनिया भर में लगभग ₹250 करोड़ की कमाई की। वहीं, पहले दिन दुनिया भर में लगभग ₹25 करोड़ का कलेक्शन किया था, जो उस समय कन्नड़ सिनेमा के लिए रिकॉर्ड था। इसके बाद साल 2022 में आई केजीएफ:: चैप्टर 2 भी सुपरहिट साबित हुई और इसने कई रिकॉर्ड बनाए। यह कन्नड़ सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी। इसने दुनिया भर में ₹1,215-1,250 करोड़ का बिजनेस किया।

यह भारत में ₹1,000 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन करने वाली चुनिंदा फिल्मों में से एक है। हिंदी वर्जन ने अकेले ₹434 करोड़ से अधिक की शुद्ध कमाई (Net) की थी। यह ₹1,000 करोड़ क्लब में शामिल होने वाली पहली कन्नड़ फिल्म बनी। इस सीरीज की सफलता के बाद यश पैन-इंडिया स्टार बन गए।

2026 में यश की दो बड़ी फिल्में

साल 2026 यश के लिए खास रहने वाला है। उनकी दो बड़ी फिल्में रिलीज होंगी। पहली फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ है, जिसे गीतू मोहनदास ने डायरेक्ट किया है। यह पीरियड गैंगस्टर ड्रामा है और 19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

इसके बाद यश ‘रामायण: पार्ट 1’ में रावण के किरदार में नजर आएंगे, जो दिवाली पर रिलीज होगी। इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता, रवि दुबे लक्ष्मण, लारा दत्ता कैकेयी और सनी देओल हनुमान की भूमिका में दिखाई देंगे।

_____________________________________________

पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए…

पिता अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर अमेरिका गए:वहां मजदूरी की, 18 साल की गायकी में नाम नहीं बना पाईं, धुरंधर से मिली पहचान

‘धुरंधर’ से बड़ी पहचान बनाने वाली सिंगर जैस्मीन सैंडलस की जिंदगी सफलता के साथ संघर्ष और दर्द से भरी रही है। एक वक्त वह अंदर से टूट गई थीं और शराब की लत में फंस गई थीं। आज वह उस दौर पर पछताती हैं।पूरी खबर पढ़ें..

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.