भाई दूज पर भी दतिया में होली का उत्साह:एसपी समेत पुलिसकर्मी भी रंग-गुलाल में सराबोर

भाई दूज के पर्व पर भी दतिया में होली का रंग और उत्साह थमने का नाम नहीं लेता दिखा। जिलेभर में रंग, गुलाल और फाग के सुरों के साथ त्योहार का माहौल बना रहा। खास बात यह रही कि पुलिस भी आमजन के साथ रंगों में सराबोर नजर आई, जिससे सौहार्द और उत्सव का संदेश मिला। पुलिस लाइन ग्राउंड में जिले की पुलिस ने सामूहिक रूप से होली मनाई। इस दौरान थाना प्रभारी से लेकर एसपी सूरज वर्मा तक रंग-गुलाल में सराबोर नजर आए। पुलिस अधिकारियों और जवानों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाया और भाईचारे के साथ होली की खुशियां साझा कीं। चौराहों पर भी उत्सव दिखा वहीं शहर के गली, चौक और चौराहों पर भी उत्सव का नजारा देखने को मिला। फाग मंडलियों ने पारंपरिक बुंदेली गीतों की प्रस्तुति दी। जिनकी धुनों पर लोग झूमते और ठुमके लगाते नजर आए। बाजारों में युवाओं की टोलियां रंग-गुलाल उड़ाती हुई निकलती दिखीं। जिससे माहौल पूरी तरह उत्सवमय बना रहा। भाई दूज के मौके पर बहनों ने भी पूरे विधि-विधान से भाइयों का तिलक कर उनकी लंबी उम्र की कामना की। घर-घर में भाई दूज का पर्व धूमधाम से मनाया गया। हालांकि, कुछ इलाकों में रंग-गुलाल लगाने को लेकर हल्के-फुल्के विवाद की स्थिति भी सामने आई, लेकिन पुलिस की सतर्कता से हालात पर तुरंत काबू पा लिया।
Holi Skincare Home Remedies; Synthetic Colour Chemicals Health Risks

14 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक होली के मौके पर रंग खेलने में आनंद तो खूब आता है, लेकिन यह स्किन के लिए किसी ‘केमिकल वॉर’ से कम नहीं है। सिंथेटिक रंगों में मौजूद खतरनाक केमिकल्स हमारी स्किन और हेल्थ पर गंभीर असर डाल सकते हैं। कुछ केमिकल्स आंखों, फेफड़ों और स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव है, उन्हें इसका जोखिम ज्यादा होता है। सिंथेटिक रंगों के कारण स्किन पर लाल चकत्ते, दाने और असहनीय खुजली हो सकती है। कुछ लोग रंग खेलने के बाद स्किन को साबुन से रगड़कर साफ करने लगते हैं, जिससे स्किन डैमेज हो सकती है। इसलिए जरूरत की खबर में आज होली के रंगों से होने वाले नुकसानों की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- किस रंग में कौन-सा केमिकल होता है? किस केमिकल से क्या हेल्थ रिस्क होता है? इससे हुए नुकसान के लिए घरेलू इलाज क्या है? एक्सपर्ट: डॉ. पद्मा सिंह, रिटायर्ड लेक्चरर, केमिस्ट्री, प्रयागराज सवाल- होली के सिंथेटिक रंगों में कौन-से खतरनाक केमिकल्स होते हैं? जवाब- होली के सिंथेटिक रंगों में लेड ऑक्साइड, कॉपर सल्फेट, मरकरी सल्फाइड और एल्युमिनियम ब्रोमाइड जैसे केमिकल्स होते हैं। ग्राफिक में देखिए किस रंग में कौन-सा केमिकल होता है- सवाल- इन केमिकल्स के कारण क्या हेल्थ रिस्क हो सकता है? जवाब- सिंथेटिक रंगों में मौजूद ये केमिकल्स शरीर के लिए ‘स्लो पॉइजन’ की तरह होते हैं। स्किन बर्न और एलर्जी: लेड और मरकरी से स्किन पर गहरे जख्म, लाल चकत्ते और डर्मेटाइटिस (एक्जिमा) हो सकता है। आंखों को खतरा: कॉपर सल्फेट और सिलिका (केमिकल्स) आंखों की पुतली (कॉर्निया) को डैमेज कर सकते हैं, जिससे अंधापन या गंभीर संक्रमण का रिस्क रहता है। लंग्स डैमेज: सांस के जरिए ये बारीक कण फेफड़ों में पहुंचने से अस्थमा का रिस्क बढ़ता है। लिवर डैमेज: अगर ये रंग स्किन के जरिए एब्जॉर्ब होकर अंदर जाते हैं तो किडनी और लिवर की कार्यक्षमता को भी प्रभावित कर सकते हैं। सवाल- होली खेलने के बाद कुछ लोगों की स्किन पर रैशेज, दाने क्यों हो जाते हैं? जवाब- स्किन पर रैशेज और दाने आमतौर पर रंगों में मिले तेज केमिकल्स की वजह से होते हैं। कई सिंथेटिक रंगों में ऐसे तत्व होते हैं, जो स्किन की ऊपरी प्रोटेक्टिव लेयर को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे खुजली, जलन, लाल चकत्ते और छोटे-छोटे दाने निकल सकते हैं। अगर रंग देर तक स्किन पर लगा रहे या रंगों को रगड़कर धुला जाए, तो समस्या बढ़ सकती है। जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव है या जिन्हें पहले से एलर्जी है, उन्हें ज्यादा दिक्कत हो सकती है। सवाल- किन लोगों को रंगों से एलर्जी या स्किन रिएक्शन का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव है, जिन्हें एक्जिमा, एलर्जी या ड्राई स्किन की समस्या है। उन्हें रंगों से रिएक्शन का ज्यादा खतरा होता है। छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी अधिक संवेदनशील होते हैं, क्योंकि उनकी स्किन की सेफ्टी लेयर कमजोर होती है और जल्दी प्रभावित हो सकती है। सिंथेटिक रंगो के रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर होली खेलने के बाद स्किन पर दाने या रैशेज हो जाएं तो तुरंत क्या करना चाहिए? जवाब- रंगों से हुई स्किन एलर्जी को नजरअंदाज न करें, तुरंत जरूरी देखभाल करें। सबसे पहले स्किन को ठंडे या नॉर्मल पानी से धीरे-धीरे धोएं। माइल्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें, स्किन को रगड़ने से बचें। प्रभावित जगह पर कैलामाइन लोशन या एलोवेरा जेल लगाएं। खुजली हो तो डॉक्टर की सलाह से एंटी-एलर्जिक दवा लें। स्किन को मॉइश्चराइज रखें, ताकि बैरियर रिपेयर हो सके। धूप और गर्मी से बचें, इससे जलन बढ़ सकती है। लक्षण बढ़े या पस/सूजन दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। सवाल- क्या दाने या रैशेज होने पर कोई घरेलू इलाज कारगर होता है? जवाब- हल्के रैशेज में घरेलू उपाय राहत दे सकते हैं, लेकिन सावधानी जरूरी है। ठंडे पानी से स्किन को साफ करें, जलन कम होती है। एलोवेरा जेल लगाने से सूजन और खुजली में राहत मिलती है। नारियल तेल स्किन की नमी बनाए रखता है और बैरियर (स्किन को प्रोटेक्ट करने वाली लेयर) सुधारता है। ठंडी दूध की पट्टी (कम्प्रेस) लगाने से जलन शांत होती है। ओटमील (जई) का लेप स्किन को राहत देता है। खुजलाने से बचें, इससे इंफेक्शन बढ़ सकता है। नोट: ये उपाय हल्की-फुल्की समस्याओं के लिए होते हैं। अगर लक्षण गंभीर हो रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें। ग्राफिक में देखिए, किस समस्या में क्या घरेलू उपाय कर सकते हैं- सवाल- स्किन पर दिख रहे कौन-से लक्षण सामान्य हैं और किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए? जवाब- होली के बाद स्किन पर हल्के रिएक्शन आम हैं, लेकिन कुछ लक्षण गंभीर भी हो सकते हैं। इन्हें पहचानना जरूरी है, ताकि समय पर इलाज मिल सके। ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या बार-बार रंग लगने से स्किन की नेचुरल प्रोटेक्टिव लेयर कमजोर हो सकती है? जवाब- हां, बार-बार रंग लगाने से स्किन की प्रोटेक्टिव लेयर कमजोर हो सकती है। सिंथेटिक रंगों के केमिकल्स स्किन की बाहरी परत (लिपिड बैरियर) को नुकसान पहुंचाते हैं। यह बैरियर कमजोर होने पर स्किन ज्यादा संवेदनशील हो जाती है। इसके कारण खुजली, रैशेज और जलन हो सकती है। स्किन में रूखापन हो सकता है और कटे हुए छोटे निशान बन सकते हैं। संक्रमण या एलर्जी का रिस्क बढ़ जाता है। सवाल- सिंथेटिक कलर्स के अलावा हमारी किन गलतियों से स्किन डैमेज का रिस्क बढ़ता है? जवाब- स्किन डैमेज का रिस्क सिर्फ सिंथेटिक रंगों से नहीं, बल्कि कुछ आदतों और गलतियों से भी बढ़ता है- रंग खेलने के तुरंत बाद साबुन से जोर-जोर से रगड़ना। रंगों से पहले स्किन पर तेल या मॉइश्चराइजर न लगाना। आंख, मुंह या नाक में रंग जाने से। बार-बार गर्म पानी या हार्श केमिकल क्लींजर का इस्तेमाल करना। रंग खेलने के बाद पर्याप्त मॉइश्चराइजर न लगाना। धूप में बिना सनस्क्रीन लगाए निकलना। संवेदनशील स्किन या एलर्जी होने पर भी सावधानी न बरतना। सवाल- हेल्दी और चमकदार स्किन के लिए क्या करना चाहिए? जवाब- सही आदतें और सुरक्षा उपाय अपनाकर स्किन को अंदर और बाहर दोनों तरह से हेल्दी रखा जा सकता है। संतुलित आहार लें- फल, सब्जियां, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स स्किन को पोषण देते हैं। पर्याप्त पानी पिएं- हाइड्रेशन से स्किन नरम और चमकदार
Holi 2026 Safety Tips; Synthetic Colors

1 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक आज पूरे देश में बड़े ही उत्साह के साथ होली का त्योहार मनाया जा रहा है। गांव से लेकर शहर तक हर जगह रंग-गुलाल और पिचकारियों की धूम मची हुई है। हालांकि रंग खेलते समय थोड़ी सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है। इसलिए रंगों की मस्ती के बीच सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। दरअसल बाजार में मिलने वाले अधिकांश रंगों में हानिकारक केमिकल्स होते हैं, जो स्किन, आंखों, बालों और रेस्पिरेटरी हेल्थ पर बुरा असर डाल सकते हैं। इसलिए रंग खेलते समय कुछ सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। चलिए, आज जरूरत की खबर में हम होली के सेफ्टी टिप्स जानेंगे। साथ ही समझेंगे कि- बाजार में मिलने वाले रंगों में कौन-कौन से केमिकल्स होते हैं? होली खेलते समय किस तरह की सावधानियां बरतनी जरूरी हैं? एक्सपर्ट: डॉ. संदीप अरोड़ा, सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली डॉ. पद्मा सिंह, रिटायर्ड लेक्चरर, केमिस्ट्री, प्रयागराज सवाल- सिंथेटिक रंगों में कौन से खतरनाक केमिकल्स हो सकते हैं? जवाब- बाजार में मिलने वाले कई सिंथेटिक रंगों में कॉपर सल्फेट, एल्युमिनियम ब्रोमाइड, मरकरी सल्फाइड और लेड ऑक्साइड जैसे हानिकारक केमिकल्स हो सकते हैं। इन केमिकल्स का इस्तेमाल सस्ते रंगों को बनाने के लिए किया जाता है, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- होली पर रंग खेलते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- होली पर रंग खेलने से पहले चेहरे, बालों और शरीर पर तेल लगा लें, ताकि बाद में रंग आसानी से छूट जाए। आंख, नाक और मुंह में रंग जाने से बचाएं। भीड़भाड़ या फिसलन वाली जगह पर न खेलें। अगर एलर्जी, अस्थमा या स्किन की समस्या है तो अतिरिक्त सावधानी बरतें। नीचे दिए ग्राफिक से समझें कि होली पर रंग खेलते समय क्या करें और क्या न करें? सवाल- होली पर बच्चों का खास ख्याल रखना क्यों जरूरी है? जवाब- बच्चों की स्किन और आंखें बड़ों की तुलना में ज्यादा नाजुक होती हैं। केमिकल वाले रंगों से उन्हें स्किन एलर्जी हो सकती है। रंग खेलते समय फिसलने या पानी के गुब्बारे से चोट लगने का खतरा भी रहता है। इसलिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि- छोटे बच्चों को केमिकल युक्त रंगों से दूर रखें। बड़े बच्चों को सिर्फ हल्के और हर्बल गुलाल से होली खेलने दें। रंग खेलने से पहले उनके बालों और स्किन पर नारियल या सरसों का तेल लगा दें। बच्चों को कभी भी अकेला न छोड़ें, आसपास कोई बड़ा जरूर हो। फिसलन वाली जगह या सीढ़ियों के पास खेलने से रोकें। आंख, नाक और मुंह में रंग जाने से बचाएं। भीड़भाड़ वाली जगह पर न भेजें। होली के बाद तुरंत साफ पानी से नहलाएं और मॉइश्चराइजर लगाएं। सवाल- होली के रंग बालों को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं? जवाब- बाजार में मिलने वाले होली के रंगों में केमिकल, मेटलिक पिगमेंट और आर्टिफिशियल डाई मिलाए जाते हैं। ये बालों की बाहरी लेयर को नुकसान पहुंचाकर उन्हें रूखा और बेजान बनाते हैं। इससे बाल कमजोर होकर टूटने लगते हैं और स्कैल्प में खुजली या जलन भी हो सकती है। पहले से केमिकल ट्रीटमेंट ले रहे लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए रंग खेलने से पहले बालों में अच्छे से तेल लगाएं और उन्हें टोपी या रुमाल से कवर करके रखें। सवाल- केमिकल युक्त रंग हमारी स्किन को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं? जवाब- केमिकल वाले रंग स्किन की ऊपरी लेयर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे खुजली, जलन और रैशेज हो सकते हैं। कुछ लोगों में एलर्जी या इंफेक्शन भी हो सकता है। सेंसिटिव स्किन या पहले से स्किन प्रॉब्लम होने पर समस्या बढ़ सकती है। देर तक रंग लगा रहने से स्किन ड्राई और बेजान हो सकती है। सवाल- सिंथेटिक रंग हमारे रेस्पिरेटरी सिस्टम को कैसे प्रभावित करते हैं? जवाब- सिंथेटिक रंगों में मौजूद बारीक कण और केमिकल सांस के जरिए शरीर में जा सकते हैं। इससे कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। जैसेकि- नाक और गले में जलन अस्थमा ब्रोंकाइटिस खांसी सांस फूलने की समस्या ज्यादा एक्सपोजर से फेफड़ों में सूजन और एलर्जिक रिएक्शन का खतरा भी रहता है। सवाल- अगर गलती से आंखों में रंग चला जाए तो क्या करें? जवाब- ऐसी स्थिति में तुरंत साफ और ठंडे पानी से आंखों को अच्छी तरह धोएं। आंखों को बिल्कुल न मलें। इससे जलन और बढ़ सकती है। अगर कॉन्टैक्ट लेंस पहने हैं तो उन्हें निकाल दें। जलन, दर्द या धुंधलापन बना रहे तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें। सवाल- होली के लिए सुरक्षित रंगों का चुनाव कैसे करें? जवाब- केमिकल रंगों की जगह ऑर्गेनिक या घर पर बने रंगों का इस्तेमाल करें। साथ ही कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि- पैकेट पर सामग्री (इंग्रीडिएंट्स) जरूर पढ़ें। खुले में बिकने वाले रंग न खरीदें। बहुत तेज गंध या चमकदार, चिपचिपे रंग न लें। घर पर बने प्राकृतिक रंग, जैसे फूलों या हल्दी से तैयार रंग ज्यादा सुरक्षित होते हैं। बच्चों और सेंसिटिव स्किन वाले लोगों के लिए खास तौर पर हल्के और स्किन-फ्रेंडली रंग ही चुनें। …………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- होली के रंग कैसे छुड़ाएं: पहले से करें ये जरूरी तैयारियां, छुड़ाते हुए बरतें 10 सावधानियां, 6 स्पेशल स्किन फ्रेंडली उबटन होली पर रंग लगाने में तो बहुत मजा आता है, लेकिन जब रंगों को छुड़ाने की बारी आती है तो हालत खराब हो जाती है। यहां हम आपको होली के रंग छुड़ाने के टिप्स बताएंगे। पूरी खबर पढ़िए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
होली सेलिब्रेशन में बच्चों का रखें खास ख्याल, स्किन और हेयर को रंगों से बचाने के लिए अपनाएं ये टिप्स

Last Updated:March 03, 2026, 11:48 IST Holi 2026 Safety Tips: : होली रंगों और उल्लास का त्योहार है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को खुशियों से भर देता है. यह त्योहार न केवल रंगों के साथ मनाया जाता है, बल्कि इसमें मिठाइयां, गाना-बजाना और दोस्तों व परिवारजनों के साथ मेलजोल भी शामिल होता है. इस त्योहार के लिए सबसे ज्यादा एक्साइटेड बच्चे रहते हैं. इसलिए होली के दौरान बच्चों की सेफ्टी का खास ध्यान रखना बेहद जरूरी है. (रिपोर्ट: वंदना रेवांचल तिवारी/रीवा) होली के त्योहार का इंतजार बड़ो से ज्यादा बच्चों को रहती है. रंग खेलने की खुमारी उनके सिर चढ़ बोलती है. बच्चे अक्सर इस दिन इतने उत्साहित होते हैं कि वे अपनी सेफ्टी को लेकर लापरवाह हो जाते हैं या उन्हें पता नहीं होता कि किस चीज से उन्हें नुकसान पहुंच सकता है. कई बार छोटी-मोटी लापरवाही इस खुशियों के त्यौहार में रंग में भंग डालने का काम कर देती है. ऐसे में माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ रखें. आइए जानते हैं कि रीवा सुपर स्पेशलिस्टी हॉस्पिटल के अधीक्षक डाॅक्टर अक्षय श्रीवास्तव क्या सलाह दे रहें है होली के दौरान बच्चों को किन चीजों से दूर रखना चाहिए. होली के दौरान बाजार में मिलने वाले ज्यादातर रंग केमिकल से बने होते हैं, जो त्वचा और आंखों के लिए हानिकारक हो सकते हैं. बच्चों की त्वचा नाजुक होती है, इसलिए उन्हें ऐसे रंगों से दूर रखना चाहिए. केमिकल वाले रंगों से एलर्जी, खुजली, रैशेज और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. Add News18 as Preferred Source on Google अपने शिशु को हल्के रंग के लॉन्ग स्लीव्स, मुलायम और ब्रीदेबल कपड़ों से बने कॉटन पैंट्स पहनाएं. इससे रंगों के सीधे संपर्क में आने से बचाव होगा. होली के दौरान उनकी आंखों को सुरक्षित रखने के लिए बेबी-सेफ गॉगल या धूप के चश्मे लगा सकते हैंय बच्चों के लिए हर्बल या नेचुरल रंगों का इस्तेमाल करें, जो घर पर भी बनाए जा सकते हैं. चुकंदर, हल्दी, पालक और गुलाबजल जैसी प्राकृतिक चीजों से बने रंग ज्यादा सेफ होते हैं. बच्चों को होली खेलने के लिए सुरक्षित जगह चुनें. भीड़भाड़ वाले इलाकों या सड़क किनारे होली खेलने से बचें, क्योंकि इससे दुर्घटना होने का खतरा रहता है. बच्चों को घर के आंगन या पार्क में होली खेलने के लिए प्रोत्साहित करें. छत पर भी होली खेलने के लिए बिना किसी की निगरानी के न भेजें. होली के बाद अपने बच्चों साफ पानी से जरूर नहलाएं.बच्चे की त्वचा को ठंडक पहुंचाने के लिए बेबी लोशन लगाएं. इसके खुजली या रैशेज से बचाव के लिए अपने बच्चे को ध्यान से देखें. किसी भी प्रकार के असामान्य लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत ही डॉक्टर की सलाह लें. First Published : March 03, 2026, 11:48 IST
Holi Color Removal Tips: Skin-Friendly Ubtan

4 दिन पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक इस साल होली 4 मार्च, 2026 को मनाई जाएगी। लोग रंग-गुलाल, मिठाई और संगीत के साथ इस पर्व का आनंद लेते हैं। रंग लगाने में तो बहुत मजा आता है, लेकिन जब रंगों को छुड़ाने की बारी आती है तो हालत खराब हो जाती है। होली पर लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि जिद्दी रंग को छुड़ाएं कैसे। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हम होली के रंग छुड़ाने के टिप्स बताएंगे। साथ ही जानेंगे कि- होली पर रंग खेलने से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए? रंग छुड़ाते समय किस तरह की गलतियां नहीं करनी चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. संदीप अरोड़ा, सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- होली खेलने से पहले क्या तैयारी करें, जिससे स्किन पर रंग ज्यादा गहरा न चढ़े? जवाब- होली पर रंग खेलने से पहले पूरे शरीर और बालों पर नारियल/सरसों का तेल या अच्छा मॉइश्चराइजर लगाएं। इससे स्किन पर एक प्रोटेक्टिव लेयर बन जाती है और रंग नहीं चिपकते हैं। साथ ही कुछ और बातों का ख्याल रखना जरूरी है। नीचे दिए ग्राफिक में देखिए- सवाल- चेहरे पर लगे रंगों को कैसे छुड़ाएं? जवाब- चेहरे की स्किन बहुत नाजुक होती है, इसलिए रंग छुड़ाते समय ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। जैसेकि- सबसे पहले सूखे रंगों को कपड़े या हाथों से झाड़ लें। इसके बाद चेहरे को नॉर्मल पानी से धोएं। आंखों के आसपास खास सावधानी रखें। फिर किसी माइल्ड फेसवॉश या क्लींजर का इस्तेमाल करें। अगर रंग फिर भी न छूटे तो बेसन और दही का पेस्ट बनाकर लगा सकते हैं। इसके अलावा हल्दी और नींबू का रस मिलाकर पेस्ट लगा सकते हैं। मुल्तानी मिट्टी में नींबू की कुछ बूंदें डालकर इसे चेहरे पर लगा सकते हैं। एलोवेरा जेल या कोई अच्छा मॉइश्वराइजर जरूर लगाएं, ताकि ड्राईनेस की समस्या न हो। ध्यान रहे, रंग छुड़ाने और चेहरा साफ करने के लिए गर्म पानी यूज न करें। इससे रंग और पक्का हो सकता है। सवाल- स्किन पर लगे रंग को छुड़ाते समय किस तरह की गलतियां नहीं करनी चाहिए? जवाब- चेहरे का रंग छुड़ाते समय स्किन को जोर से न रगड़ें। इससे जलन और रैशेज हो सकते हैं। हार्श साबुन, डिटर्जेंट या केमिकल वाले प्रोडक्ट बिल्कुल न लगाएं। अगर स्किन पर रेडनेस, खुजली या सूजन दिखे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। साथ ही कुछ बातों का खास ख्याल रखें, नीचे दिए ग्राफिक में देखिए- सवाल- होली के रंगों से बालों को कैसे बचाएं? जवाब- रंग खेलने से पहले बालों में अच्छी तरह नारियल या सरसों का तेल लगा लें। इससे बालों पर एक प्रोटेक्टिव लेयर बनती है। रंग खेलते वक्त बालों को खुला न छोड़ें, उन्हें बांध लें या स्कार्फ/कैप से ढक लें। ड्राई और केमिकल ट्रीटमेंट वाले बालों पर खास ध्यान दें। रंग खेलने के बाद बालों को हल्के शैंपू से साफ करें और कंडीशनर जरूर लगाएं। सवाल- अगर बालों में रंग गहराई तक पहुंच गया हो तो उसे कैसे हटाएं? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि- रंग सूखा हो तो पहले इसे चौड़ी कंघी से धीरे-धीरे निकालें, तुरंत पानी न डालें। अगर रंग गीला है तो सादे पानी से अच्छी तरह धोकर जितना रंग निकल सके, निकालें। फिर माइल्ड शैंपू से हल्के हाथों से साफ करें। बालों को जोर से न रगड़ें। जरूरत पड़े तो एक मग पानी में 1-2 चम्मच एप्पल साइडर विनेगर मिलाकर रिंस करें। कुछ मिनट बाद साफ पानी से धो लें। अंत में हेयर कंडीशनर लगाएं और कुछ देर बाद बालों काे अच्छी तरह धुलें। सवाल- होली के रंग छुड़ाने के लिए कौन से घरेलू उपाय मददगार हो सकते हैं? जवाब- होली के रंग छुड़ाने के लिए कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं। जैसेकि- बेसन और दूध का उबटन लगाकर 10-15 मिनट बाद धो लें। पका पपीता और हल्दी मिलाकर पेस्ट बनाकर लगाएं। फिर साफ पानी से धो लें। मुल्तानी मिट्टी और दही का लेप भी रंग छुड़ाने में मदद करता है। खीरे का पेस्ट स्किन को ठंडक देता है और रंग छुड़ाने में मदद करता है। नींबू की कुछ बूंदें बेसन में मिलाकर लगा सकते हैं। किसी भी उपाय के बाद मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं, ताकि ड्राईनेस न हो। नीचे दिए ग्राफिक में घर पर बनाए जाने वाले उबटनों की लिस्ट देखिए। सवाल- क्या लंबे समय तक रंग लगा रहना नुकसानदायक हो सकता है? जवाब- हां, केमिकल युक्त रंग स्किन पर ज्यादा देर तक लगे रहने से जलन, खुजली, रेडनेस या एलर्जी हो सकती है। कुछ मामलों में दाग-धब्बे भी पड़ सकते हैं। सेंसिटिव स्किन या स्किन डिजीज से पीड़ित लोगों में जोखिम ज्यादा रहता है। इसलिए रंग को ज्यादा देर तक स्किन पर लगा न रहने दें। सवाल- नाखूनों से रंग कैसे निकालें? जवाब- सबसे पहले नाखूनों को गुनगुने पानी में कुछ मिनट भिगोएं। फिर नींबू का रस या थोड़ा विनेगर 4-5 मिनट तक लगा रहने दें। इसके बाद मुलायम ब्रश या सूती कपड़े से हल्के हाथों से साफ करें। जरूरत हो तो नेल पॉलिश रिमूवर का इस्तेमाल कर सकते हैं। अंत में नाखूनों पर क्रीम या तेल लगा लें, ताकि वे ड्राई और कमजोर न हों। इस तरह थोड़ी तैयारी और सही देखभाल से आप होली का आनंद बिना किसी परेशानी के उठा सकते हैं। ……………………. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- होली पर मिलावटी मावे से सावधान: हो सकते हैं ये हेल्थ रिस्क, इन 4 तरीकों से घर पर करें शुद्धता की जांच होली का त्योहार नजदीक है। इसके चलते बाजारों में मिठाइयों की डिमांड बढ़ गई है। इसी मौके का फायदा उठाकर कुछ मिलावटखोर बाजार में मिलावटी खोया (मावा) सप्लाई कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़िए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Holi 2026 Mawa Adulteration Health Risk Alert; Real Vs Fake Khoya Purity Test

Hindi News Lifestyle Holi 2026 Mawa Adulteration Health Risk Alert; Real Vs Fake Khoya Purity Test | Home Recipe 6 दिन पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक होली का त्योहार नजदीक है। इसके चलते बाजारों में मिठाइयों की डिमांड बढ़ गई है। इसी मौके का फायदा उठाकर कुछ मिलावटखोर बाजार में मिलावटी खोया (मावा) सप्लाई कर रहे हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 12,800 किलो खोया की बिक्री पर रोक लगा दी। शुरुआती जांच में इसमें मिलावट के संकेत मिले हैं, जिसके बाद नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। प्रशासन ने एक और कार्रवाई के दौरान 760 क्विंटल से ज्यादा खोया नष्ट कराया। ये कोई एक मामला नहीं है। देश के कई हिस्सों से मिलावटी खोया मिलने और उसकी बिक्री पर कार्रवाई की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। मिलावटी खोया सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है। इसे खाने से अपच, पेट दर्द, एसिडिटी, और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में मिलावटी और शुद्ध खोया का फर्क समझना और उसे पहचानना बेहद जरूरी है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने इसके लिए कुछ आसान तरीके बताए हैं। इसलिए आज जरूरत की खबर में हम मिलावटी खोया की पहचान के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- खोया में किस तरह की मिलावट हो सकती है? मिलावटी खोया खाने के क्या हेल्थ रिस्क हैं? असली और नकली खोया की पहचान कैसे करें? घर पर शुद्ध खोया कैसे बनाएं? एक्सपर्ट: डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली श्याम प्रवेश शाही, शेफ, नई दिल्ली सवाल- मिलावटी खोया में आमतौर पर किन चीजों की मिलावट की जाती है? जवाब- मिलावटी खोया तैयार करने के लिए अक्सर इसमें स्टार्च, मैदा, सिंथेटिक दूध, रिफाइंड तेल या वनस्पति घी जैसी चीजें मिलाई जाती हैं। मिलावटखोर मुनाफा बढ़ाने के लिए साबुन में इस्तेमाल होने वाले केमिकल, यूरिया या डिटर्जेंट जैसे हानिकारक पदार्थ भी मिलाते हैं। मिलावटी खोया दिखने में असली जैसा लग सकता है। लेकिन इसका सेवन सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। सवाल- मिलावटी खोया खाने के क्या हेल्थ रिस्क हैं? जवाब- मिलावटी खोया खाने से कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क बढ़ जाता है। जैसेकि- पेट दर्द, अपच, गैस और दस्त जैसी पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। बासी या खराब खोया फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है। लिवर और किडनी पर बुरा असर पड़ता है। हार्ट हेल्थ पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अगर खोये में डिटर्जेंट या यूरिया मिला हो तो केमिकल टॉक्सिसिटी हो सकती है। इससे किडनी और लिवर डैमेज का खतरा हो सकता है। गंभीर मामलों में यह जहर जैसा असर भी कर सकता है। नीचे दिए ग्राफिक से मिलावटी खोया खाने के हेल्थ रिस्क समझिए- सवाल- मिलावटी खोया खाने से हार्ट हेल्थ पर क्या प्रभाव पड़ता है? जवाब- मिलावटी खोया में मौजूद पाम ऑयल (ट्रांस फैट), यूरिया, स्टार्च, डिटर्जेंट और हानिकारक केमिकल्स शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं। इससे ब्लड प्रेशर और हार्ट पर दबाव बढ़ सकता है। लंबे समय में इससे आर्टरीज (धमनियों) में ब्लॉकेज और हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ता है। सवाल- मिलावटी खोया खाने से पाचन तंत्र पर क्या प्रभाव पड़ता है? जवाब- मिलावटी खोया में मौजूद सिंथेटिक केमिकल और ट्रांस फैट गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल म्यूकोसा (आंतों की अंदरूनी लेयर) को इरिटेट कर सकते हैं। इससे गैस्ट्राइटिस, उल्टी, दस्त और पेट में ऐंठन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ केमिकल आंतों के अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन भी बिगाड़ देते हैं, जिससे पाचन कमजोर पड़ सकता है। लंबे समय में पोषक तत्वों के अवशोषण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। सवाल- घर पर असली और नकली खोया की पहचान कैसे करें? जवाब- फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने इसके लिए कुछ आसान तरीके बताए हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- घर पर शुद्ध खोया बनाने का सही तरीका क्या है? जवाब- घर पर शुद्ध खोया बनाना बहुत आसान है। बस इसके लिए थोड़े धैर्य की जरूरत होती है। नीचे दिए ग्राफिक से इसे बनाने का सही तरीका समझिए- पूरी विधि विस्तार से कड़ाही में दूध डालें और तेज आंच पर एक उबाल आने दें। उबाल आने के बाद आंच को मीडियम कर दें। दूध को लगातार चलाते रहें। किनारों पर जमने वाली मलाई को खुरचकर वापस दूध में मिलाते रहें। इससे खोया लच्छेदार बनेगा। जैसे-जैसे पानी सूखता जाएगा, दूध गाढ़ा होकर रबड़ी जैसा दिखने लगेगा। इस दौरान आंच को थोड़ा कम कर दें, ताकि छींटे न पड़ें और मिश्रण जले नहीं। जब दूध पूरी तरह गाढ़ा होकर कड़ाही छोड़ने लगे और एक जगह इकट्ठा होने लगे, तो समझ लीजिए कि खोया तैयार है। गैस बंद कर दें और खोया को एक बर्तन में निकाल लें। ठंडा होने के बाद यह और भी सख्त और दानेदार हो जाएगा। इसे एयरटाइट डिब्बे में रखकर फ्रिज में 4-5 दिन तक और फ्रीजर में महीने भर तक सुरक्षित रखा जा सकता है। सवाल- अगर कोई मिलावटी खोया बेचता है तो इसकी शिकायत कैसे करें? जवाब- अगर किसी दुकान पर मिलावट का शक हो तो पहले दुकानदार से बात करें। संतोषजनक जवाब न मिले तो FSSAI के टोल-फ्री नंबर 1800112100 पर शिकायत कर सकते हैं। आधिकारिक वेबसाइट पर भी इसकी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा स्थानीय पुलिस और जिले के खाद्य सुरक्षा विभाग को भी सूचना दे सकते हैं। मिलावटी खोया का सैंपल और खरीद रसीद अपने पास जरूर रखें। जरूरत पड़ने पर ये काम आएगा। सवाल- मिलावटी फूड बेचने वाले पर क्या कार्रवाई हो सकती है? जवाब- मिलावटी फूड बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है। भारत में यह अपराध फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट, 2006 के तहत दंडनीय है। अगर कोई व्यक्ति मिलावटी या असुरक्षित फूड बेचता पकड़ा जाता है, तो उस पर- मामले की गंभीरता के अनुसार भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। लाइसेंस रद्द या निलंबित किया जा सकता है। दुकान सील की जा सकती है। अगर मिलावटी फूड से किसी की तबीयत खराब हो जाए या उसकी जान को खतरा हो, तो दोषियों को जेल की सजा भी हो सकती है। फूड सेफ्टी ऑफिसर जांच के बाद सैंपल लैब में भेजते हैं और रिपोर्ट के आधार पर
Holi Organic Gulal; Chemical Free Natural Colors DIY Methods

34 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक होली का त्योहार नजदीक है। इस मौके पर लोग रंग-गुलाल खेलते हैं। हालांकि बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंग स्किन और हेल्थ, दोनों के लिए नुकसानदायक होते हैं। ‘इंडियन जर्नल ऑफ क्लिनिकल बायोकेमिस्ट्री’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंगों में हानिकारक केमिकल्स मिलाए जाते हैं। इनसे स्किन रैशेज, आंखों में जलन, एलर्जी और सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों पर इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है। ऐसे में अगर आप सेहत से समझौता किए बिना होली का आनंद लेना चाहते हैं तो ऑर्गेनिक रंग-गुलाल बेहतर विकल्प हैं। इन्हें घर पर भी आसानी से बनाया जा सकता है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हम घर पर रंग-गुलाल बनाने के टिप्स बताएंगे। साथ ही जानेंगे कि- घर पर रंग-गुलाल बनाते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? घर पर ऑर्गेनिक रंग बनाने में कितना समय लगता है? एक्सपर्ट: डॉ. संदीप अरोड़ा, सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली डॉ. पद्मा सिंह, रिटायर्ड लेक्चरर, केमिस्ट्री, प्रयागराज सवाल- बाजार में मिलने वाले रंगों में कौन-कौन से केमिकल होते हैं? इनका हमारी सेहत पर क्या असर पड़ता है? जवाब- बाजार में मिलने वाले सस्ते और सिंथेटिक रंगों में कई सारे केमिकल्स हो सकते हैं। जैसेकि- कॉपर सल्फेट (हरा रंग) लेड ऑक्साइड (काला रंग) मरकरी सल्फाइड (लाल रंग) क्रोमियम आयोडाइड (बैंगनी रंग) एल्युमिनियम ब्रोमाइड (चांदी रंग) प्रशिया ब्लू (नीला रंग) ये रंग कई हेल्थ प्रॉब्लम्स का कारण बन सकते हैं। जैसेकि- स्किन रैशेज स्किन एलर्जी, जलन आंखों में जलन सूजन और इंफेक्शन सांस संबंधी समस्याएं अस्थमा किडनी डैमेज गंभीर मामलों में कैंसर का रिस्क बच्चों और सेंसिटिव स्किन वाले लोगों में केमिकल युक्त रंगों का प्रभाव ज्यादा गंभीर हो सकता है। सवाल- घर पर ऑर्गेनिक रंग-गुलाल कैसे बनाएं? जवाब- घर पर ऑर्गेनिक रंग-गुलाल बनाना आसान है। इसके कुछ आसान तरीके समझिए- नारंगी: संतरे के छिलकों को सुखाकर बारीक पीस लें। इसमें थोड़ा कॉर्न फ्लोर और थोड़ी हल्दी मिलाएं। मिश्रण को छलनी से छान लें। आपका खुशबूदार नारंगी गुलाल तैयार है। हरा: पालक, धनिया या पुदीने की पत्तियों को पीसकर उसका रस निकालें। इसमें गुलाब जल मिलाएं। सूखे गुलाल के लिए इस मिश्रण को कॉर्न फ्लोर में मिलाकर धूप में सुखाएं और फिर छान लें। गुलाबी: चुकंदर का जूस लें। इसमें गुलाब जल और जरूरत के अनुसार कॉर्न फ्लोर मिलाएं। अच्छी तरह मिक्स कर धूप में सुखाएं और बारीक पीसकर छान लें। लाल: गुड़हल के फूल या गुलाब की पंखुड़ियों को भिगोकर पीस लें। इसमें कॉर्न फ्लोर मिलाकर सुखाएं और बारीक पाउडर तैयार कर लें। पीला: थोड़ी हल्दी को गर्म पानी में उबालें। ठंडा होने पर इसमें कॉर्न फ्लोर और गुलाब जल मिलाएं। इसे सुखाकर पीस लें। चाहें तो हल्दी और बेसन को मिलाकर भी पीला गुलाल बना सकते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से घर पर ऑर्गेनिक रंग-गुलाल बनाने के आसान तरीके समझिए- सवाल- घर पर ऑर्गेनिक रंग बनाने में कितना समय लगता है? जवाब- अगर आप गीला (लिक्विड) रंग बना रहे हैं तो यह 10-15 मिनट में तैयार हो जाता है। गुलाल बनाने के लिए धूप में सुखाने की प्रक्रिया के कारण 2 से 3 दिन का समय लग सकता है। सवाल- ऑर्गेनिक रंग-गुलाल इस्तेमाल करने के क्या फायदे हैं? जवाब- ऑर्गेनिक रंग न केवल स्किन के लिए सेफ होते हैं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी होते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से इसके सभी फायदे जानिए- सवाल- घर पर रंग बनाते समय किन बातों का ध्यान रखें? जवाब- घर पर रंग बनाना सुरक्षित विकल्प है। लेकिन कुछ सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। जैसेकि- किसी भी रंग का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। जलन पैदा करने वाली सामग्री इस्तेमाल न करें। खराब या सड़ी-गली पत्तियां और फूल इस्तेमाल न करें। गुलाल को अच्छी तरह सुखाएं। अगर नमी रह गई तो फफूंद लग सकती है। बनाने के बाद बारीक छलनी से छानें, क्योंकि मोटे कण स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। साफ बर्तन और मिक्सर इस्तेमाल करें। गंदे उपकरणों से संक्रमण का खतरा हो सकता है। तैयार गुलाल को सूखी, साफ जगह पर रखें। बच्चों, बुजुर्गों और एलर्जी वाले लोगों के लिए हल्के रंग ही बनाएं। इन सावधानियों के साथ आप सुरक्षित और खुशहाल होली मना सकते हैं। सवाल- घर पर बने ऑर्गेनिक रंग कितने दिनों तक सुरक्षित रहते हैं? जवाब- इसे एयरटाइट डिब्बे में 1–2 हफ्ते तक सुरक्षित रख सकते हैं। अगर रंग में नमी रह गई तो उसमें फफूंद लग सकती है। लिक्विड रंग 1–2 दिन के भीतर इस्तेमाल कर लेना बेहतर है, क्योंकि ये जल्दी खराब हो सकते हैं। सवाल- क्या घर पर बने रंग कपड़ों पर दाग छोड़ सकते हैं? जवाब- ज्यादातर ऑर्गेनिक रंग हल्के होते हैं और सामान्य धुलाई से निकल जाते हैं। फिर भी चुकंदर, हल्दी या फूलों से बने गहरे रंग हल्का दाग छोड़ सकते हैं। इसलिए होली खेलते समय पुराने या हल्के रंग के कपड़े पहनना बेहतर होता है। सवाल- क्या ऑर्गेनिक रंग छोटे बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं? जवाब- ऑर्गेनिक रंग केमिकल रंगों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित होते हैं। लेकिन छोटे बच्चों के लिए इन्हें पूरी तरह रिस्क फ्री नहीं कहा जा सकता। कुछ बच्चों की स्किन सेंसिटिव होती है, जिससे प्राकृतिक चीजों से भी एलर्जी हो सकती है। इसलिए- बच्चों को रंग लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। हल्के ऑर्गेनिक गुलाल का ही इस्तेमाल करें। चेहरे पर न लगाएं तो बेहतर है। …………………….. होली से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- होली की एडवांस तैयारी: आज से ही शुरू करें स्किन केयर रूटीन, ताकि सिंथेटिक रंगों से न हो त्वचा को नुकसान होली रंग-गुलाल, खुशियों और मौज-मस्ती का त्योहार है। हम कपड़े, पिचकारी और पकवान की तैयारियां तो पहले से कर लेते हैं, लेकिन अक्सर अपनी स्किन को भूल जाते हैं। जबकि केमिकल वाले रंग और धूप स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए होली पर रंग खेलने से पहले ही स्किन को तैयार करना जरूरी है। पूरी खबर पढ़िए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
इंदौर में होली से पहले बड़ी कार्रवाई:मिठाई-डेयरी दुकानों से दूध, मावा और नमकीन के 38 सैंपल लिए

होली पर्व के मद्देनज़र शहर में खाद्य पदार्थों की सघन जांच शुरू कर दी गई है। बुधवार को खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीमों ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण कर कुल 38 खाद्य नमूने एकत्र किए। इन नमूनों को जांच के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीमों ने शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में संचालित डेयरी, नमकीन और मिठाई प्रतिष्ठानों पर औचक निरीक्षण किया और मौके से खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र किए। सभी नमूनों को जांच के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर वर्मा ने निर्देश दिए हैं कि होली तक यह विशेष अभियान लगातार जारी रखा जाए। अधिक से अधिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर नमूने लिए जाएं, ताकि मिलावट पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके। किस संस्थान पर क्या कार्रवाई की गई कलेक्टर ने बैठक लेकर दिए निर्देश कलेक्टर शिवम वर्मा ने बुधवार को खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की बैठक लेकर स्पष्ट किया कि अमानक खाद्य सामग्री बेचने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। विभिन्न विभागों के संयुक्त दल गठित कर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य प्रतिष्ठानों की सघन जांच की जाएगी। आगामी त्योहारों को देखते हुए विशेष अभियान चलाया जाएगा। एफएसएसएआई के रिस्क बेस्ड इंस्पेक्शन सिस्टम (RBIS) के तहत हाई-रिस्क प्रतिष्ठानों का प्राथमिकता से निरीक्षण किया जा रहा है। अब तक दर्ज मामलों के अलावा आगे भी दोषियों के खिलाफ तत्काल प्रकरण दर्ज किए जाएंगे। बैठक में जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनीष स्वामी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर खाद्य सामग्री की गुणवत्ता या मिलावट संबंधी शिकायतों के लिए उपभोक्ता 0731-181 तथा 0755-2840621 पर कॉल कर जानकारी दे सकते हैं। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनियमितता की सूचना तत्काल दें, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके।









