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Holi Organic Gulal; Chemical Free Natural Colors DIY Methods

Holi Organic Gulal; Chemical Free Natural Colors DIY Methods

34 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

  • कॉपी लिंक

होली का त्योहार नजदीक है। इस मौके पर लोग रंग-गुलाल खेलते हैं। हालांकि बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंग स्किन और हेल्थ, दोनों के लिए नुकसानदायक होते हैं।

‘इंडियन जर्नल ऑफ क्लिनिकल बायोकेमिस्ट्री’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंगों में हानिकारक केमिकल्स मिलाए जाते हैं। इनसे स्किन रैशेज, आंखों में जलन, एलर्जी और सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों पर इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है।

ऐसे में अगर आप सेहत से समझौता किए बिना होली का आनंद लेना चाहते हैं तो ऑर्गेनिक रंग-गुलाल बेहतर विकल्प हैं। इन्हें घर पर भी आसानी से बनाया जा सकता है।

इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हम घर पर रंग-गुलाल बनाने के टिप्स बताएंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • घर पर रंग-गुलाल बनाते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
  • घर पर ऑर्गेनिक रंग बनाने में कितना समय लगता है?

एक्सपर्ट:

डॉ. संदीप अरोड़ा, सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली

डॉ. पद्मा सिंह, रिटायर्ड लेक्चरर, केमिस्ट्री, प्रयागराज

सवाल- बाजार में मिलने वाले रंगों में कौन-कौन से केमिकल होते हैं? इनका हमारी सेहत पर क्या असर पड़ता है?

जवाब- बाजार में मिलने वाले सस्ते और सिंथेटिक रंगों में कई सारे केमिकल्स हो सकते हैं। जैसेकि-

  • कॉपर सल्फेट (हरा रंग)
  • लेड ऑक्साइड (काला रंग)
  • मरकरी सल्फाइड (लाल रंग)
  • क्रोमियम आयोडाइड (बैंगनी रंग)
  • एल्युमिनियम ब्रोमाइड (चांदी रंग)
  • प्रशिया ब्लू (नीला रंग)

ये रंग कई हेल्थ प्रॉब्लम्स का कारण बन सकते हैं। जैसेकि-

  • स्किन रैशेज
  • स्किन एलर्जी, जलन
  • आंखों में जलन
  • सूजन और इंफेक्शन
  • सांस संबंधी समस्याएं
  • अस्थमा
  • किडनी डैमेज
  • गंभीर मामलों में कैंसर का रिस्क

बच्चों और सेंसिटिव स्किन वाले लोगों में केमिकल युक्त रंगों का प्रभाव ज्यादा गंभीर हो सकता है।

सवाल- घर पर ऑर्गेनिक रंग-गुलाल कैसे बनाएं?

जवाब- घर पर ऑर्गेनिक रंग-गुलाल बनाना आसान है। इसके कुछ आसान तरीके समझिए-

नारंगी: संतरे के छिलकों को सुखाकर बारीक पीस लें। इसमें थोड़ा कॉर्न फ्लोर और थोड़ी हल्दी मिलाएं। मिश्रण को छलनी से छान लें। आपका खुशबूदार नारंगी गुलाल तैयार है।

हरा: पालक, धनिया या पुदीने की पत्तियों को पीसकर उसका रस निकालें। इसमें गुलाब जल मिलाएं। सूखे गुलाल के लिए इस मिश्रण को कॉर्न फ्लोर में मिलाकर धूप में सुखाएं और फिर छान लें।

गुलाबी: चुकंदर का जूस लें। इसमें गुलाब जल और जरूरत के अनुसार कॉर्न फ्लोर मिलाएं। अच्छी तरह मिक्स कर धूप में सुखाएं और बारीक पीसकर छान लें।

लाल: गुड़हल के फूल या गुलाब की पंखुड़ियों को भिगोकर पीस लें। इसमें कॉर्न फ्लोर मिलाकर सुखाएं और बारीक पाउडर तैयार कर लें।

पीला: थोड़ी हल्दी को गर्म पानी में उबालें। ठंडा होने पर इसमें कॉर्न फ्लोर और गुलाब जल मिलाएं। इसे सुखाकर पीस लें। चाहें तो हल्दी और बेसन को मिलाकर भी पीला गुलाल बना सकते हैं।

नीचे दिए ग्राफिक से घर पर ऑर्गेनिक रंग-गुलाल बनाने के आसान तरीके समझिए-

सवाल- घर पर ऑर्गेनिक रंग बनाने में कितना समय लगता है?

जवाब- अगर आप गीला (लिक्विड) रंग बना रहे हैं तो यह 10-15 मिनट में तैयार हो जाता है। गुलाल बनाने के लिए धूप में सुखाने की प्रक्रिया के कारण 2 से 3 दिन का समय लग सकता है।

सवाल- ऑर्गेनिक रंग-गुलाल इस्तेमाल करने के क्या फायदे हैं?

जवाब- ऑर्गेनिक रंग न केवल स्किन के लिए सेफ होते हैं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी होते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से इसके सभी फायदे जानिए-

सवाल- घर पर रंग बनाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

जवाब- घर पर रंग बनाना सुरक्षित विकल्प है। लेकिन कुछ सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। जैसेकि-

  • किसी भी रंग का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें।
  • जलन पैदा करने वाली सामग्री इस्तेमाल न करें।
  • खराब या सड़ी-गली पत्तियां और फूल इस्तेमाल न करें।
  • गुलाल को अच्छी तरह सुखाएं। अगर नमी रह गई तो फफूंद लग सकती है।
  • बनाने के बाद बारीक छलनी से छानें, क्योंकि मोटे कण स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • साफ बर्तन और मिक्सर इस्तेमाल करें। गंदे उपकरणों से संक्रमण का खतरा हो सकता है।
  • तैयार गुलाल को सूखी, साफ जगह पर रखें।
  • बच्चों, बुजुर्गों और एलर्जी वाले लोगों के लिए हल्के रंग ही बनाएं।

इन सावधानियों के साथ आप सुरक्षित और खुशहाल होली मना सकते हैं।

सवाल- घर पर बने ऑर्गेनिक रंग कितने दिनों तक सुरक्षित रहते हैं?

जवाब- इसे एयरटाइट डिब्बे में 1–2 हफ्ते तक सुरक्षित रख सकते हैं। अगर रंग में नमी रह गई तो उसमें फफूंद लग सकती है। लिक्विड रंग 1–2 दिन के भीतर इस्तेमाल कर लेना बेहतर है, क्योंकि ये जल्दी खराब हो सकते हैं।

सवाल- क्या घर पर बने रंग कपड़ों पर दाग छोड़ सकते हैं?

जवाब- ज्यादातर ऑर्गेनिक रंग हल्के होते हैं और सामान्य धुलाई से निकल जाते हैं। फिर भी चुकंदर, हल्दी या फूलों से बने गहरे रंग हल्का दाग छोड़ सकते हैं। इसलिए होली खेलते समय पुराने या हल्के रंग के कपड़े पहनना बेहतर होता है।

सवाल- क्या ऑर्गेनिक रंग छोटे बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं?

जवाब- ऑर्गेनिक रंग केमिकल रंगों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित होते हैं। लेकिन छोटे बच्चों के लिए इन्हें पूरी तरह रिस्क फ्री नहीं कहा जा सकता। कुछ बच्चों की स्किन सेंसिटिव होती है, जिससे प्राकृतिक चीजों से भी एलर्जी हो सकती है। इसलिए-

  • बच्चों को रंग लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें।
  • हल्के ऑर्गेनिक गुलाल का ही इस्तेमाल करें।
  • चेहरे पर न लगाएं तो बेहतर है।

……………………..

होली से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए

जरूरत की खबर- होली की एडवांस तैयारी: आज से ही शुरू करें स्किन केयर रूटीन, ताकि सिंथेटिक रंगों से न हो त्वचा को नुकसान

होली रंग-गुलाल, खुशियों और मौज-मस्ती का त्योहार है। हम कपड़े, पिचकारी और पकवान की तैयारियां तो पहले से कर लेते हैं, लेकिन अक्सर अपनी स्किन को भूल जाते हैं। जबकि केमिकल वाले रंग और धूप स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए होली पर रंग खेलने से पहले ही स्किन को तैयार करना जरूरी है। पूरी खबर पढ़िए…

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34 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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होली का त्योहार नजदीक है। इस मौके पर लोग रंग-गुलाल खेलते हैं। हालांकि बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंग स्किन और हेल्थ, दोनों के लिए नुकसानदायक होते हैं।

‘इंडियन जर्नल ऑफ क्लिनिकल बायोकेमिस्ट्री’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंगों में हानिकारक केमिकल्स मिलाए जाते हैं। इनसे स्किन रैशेज, आंखों में जलन, एलर्जी और सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों पर इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है।

ऐसे में अगर आप सेहत से समझौता किए बिना होली का आनंद लेना चाहते हैं तो ऑर्गेनिक रंग-गुलाल बेहतर विकल्प हैं। इन्हें घर पर भी आसानी से बनाया जा सकता है।

इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हम घर पर रंग-गुलाल बनाने के टिप्स बताएंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • घर पर रंग-गुलाल बनाते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
  • घर पर ऑर्गेनिक रंग बनाने में कितना समय लगता है?

एक्सपर्ट:

डॉ. संदीप अरोड़ा, सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली

डॉ. पद्मा सिंह, रिटायर्ड लेक्चरर, केमिस्ट्री, प्रयागराज

सवाल- बाजार में मिलने वाले रंगों में कौन-कौन से केमिकल होते हैं? इनका हमारी सेहत पर क्या असर पड़ता है?

जवाब- बाजार में मिलने वाले सस्ते और सिंथेटिक रंगों में कई सारे केमिकल्स हो सकते हैं। जैसेकि-

  • कॉपर सल्फेट (हरा रंग)
  • लेड ऑक्साइड (काला रंग)
  • मरकरी सल्फाइड (लाल रंग)
  • क्रोमियम आयोडाइड (बैंगनी रंग)
  • एल्युमिनियम ब्रोमाइड (चांदी रंग)
  • प्रशिया ब्लू (नीला रंग)

ये रंग कई हेल्थ प्रॉब्लम्स का कारण बन सकते हैं। जैसेकि-

  • स्किन रैशेज
  • स्किन एलर्जी, जलन
  • आंखों में जलन
  • सूजन और इंफेक्शन
  • सांस संबंधी समस्याएं
  • अस्थमा
  • किडनी डैमेज
  • गंभीर मामलों में कैंसर का रिस्क

बच्चों और सेंसिटिव स्किन वाले लोगों में केमिकल युक्त रंगों का प्रभाव ज्यादा गंभीर हो सकता है।

सवाल- घर पर ऑर्गेनिक रंग-गुलाल कैसे बनाएं?

जवाब- घर पर ऑर्गेनिक रंग-गुलाल बनाना आसान है। इसके कुछ आसान तरीके समझिए-

नारंगी: संतरे के छिलकों को सुखाकर बारीक पीस लें। इसमें थोड़ा कॉर्न फ्लोर और थोड़ी हल्दी मिलाएं। मिश्रण को छलनी से छान लें। आपका खुशबूदार नारंगी गुलाल तैयार है।

हरा: पालक, धनिया या पुदीने की पत्तियों को पीसकर उसका रस निकालें। इसमें गुलाब जल मिलाएं। सूखे गुलाल के लिए इस मिश्रण को कॉर्न फ्लोर में मिलाकर धूप में सुखाएं और फिर छान लें।

गुलाबी: चुकंदर का जूस लें। इसमें गुलाब जल और जरूरत के अनुसार कॉर्न फ्लोर मिलाएं। अच्छी तरह मिक्स कर धूप में सुखाएं और बारीक पीसकर छान लें।

लाल: गुड़हल के फूल या गुलाब की पंखुड़ियों को भिगोकर पीस लें। इसमें कॉर्न फ्लोर मिलाकर सुखाएं और बारीक पाउडर तैयार कर लें।

पीला: थोड़ी हल्दी को गर्म पानी में उबालें। ठंडा होने पर इसमें कॉर्न फ्लोर और गुलाब जल मिलाएं। इसे सुखाकर पीस लें। चाहें तो हल्दी और बेसन को मिलाकर भी पीला गुलाल बना सकते हैं।

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सवाल- ऑर्गेनिक रंग-गुलाल इस्तेमाल करने के क्या फायदे हैं?

जवाब- ऑर्गेनिक रंग न केवल स्किन के लिए सेफ होते हैं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी होते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से इसके सभी फायदे जानिए-

सवाल- घर पर रंग बनाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

जवाब- घर पर रंग बनाना सुरक्षित विकल्प है। लेकिन कुछ सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। जैसेकि-

  • किसी भी रंग का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें।
  • जलन पैदा करने वाली सामग्री इस्तेमाल न करें।
  • खराब या सड़ी-गली पत्तियां और फूल इस्तेमाल न करें।
  • गुलाल को अच्छी तरह सुखाएं। अगर नमी रह गई तो फफूंद लग सकती है।
  • बनाने के बाद बारीक छलनी से छानें, क्योंकि मोटे कण स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • साफ बर्तन और मिक्सर इस्तेमाल करें। गंदे उपकरणों से संक्रमण का खतरा हो सकता है।
  • तैयार गुलाल को सूखी, साफ जगह पर रखें।
  • बच्चों, बुजुर्गों और एलर्जी वाले लोगों के लिए हल्के रंग ही बनाएं।

इन सावधानियों के साथ आप सुरक्षित और खुशहाल होली मना सकते हैं।

सवाल- घर पर बने ऑर्गेनिक रंग कितने दिनों तक सुरक्षित रहते हैं?

जवाब- इसे एयरटाइट डिब्बे में 1–2 हफ्ते तक सुरक्षित रख सकते हैं। अगर रंग में नमी रह गई तो उसमें फफूंद लग सकती है। लिक्विड रंग 1–2 दिन के भीतर इस्तेमाल कर लेना बेहतर है, क्योंकि ये जल्दी खराब हो सकते हैं।

सवाल- क्या घर पर बने रंग कपड़ों पर दाग छोड़ सकते हैं?

जवाब- ज्यादातर ऑर्गेनिक रंग हल्के होते हैं और सामान्य धुलाई से निकल जाते हैं। फिर भी चुकंदर, हल्दी या फूलों से बने गहरे रंग हल्का दाग छोड़ सकते हैं। इसलिए होली खेलते समय पुराने या हल्के रंग के कपड़े पहनना बेहतर होता है।

सवाल- क्या ऑर्गेनिक रंग छोटे बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं?

जवाब- ऑर्गेनिक रंग केमिकल रंगों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित होते हैं। लेकिन छोटे बच्चों के लिए इन्हें पूरी तरह रिस्क फ्री नहीं कहा जा सकता। कुछ बच्चों की स्किन सेंसिटिव होती है, जिससे प्राकृतिक चीजों से भी एलर्जी हो सकती है। इसलिए-

  • बच्चों को रंग लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें।
  • हल्के ऑर्गेनिक गुलाल का ही इस्तेमाल करें।
  • चेहरे पर न लगाएं तो बेहतर है।

……………………..

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जरूरत की खबर- होली की एडवांस तैयारी: आज से ही शुरू करें स्किन केयर रूटीन, ताकि सिंथेटिक रंगों से न हो त्वचा को नुकसान

होली रंग-गुलाल, खुशियों और मौज-मस्ती का त्योहार है। हम कपड़े, पिचकारी और पकवान की तैयारियां तो पहले से कर लेते हैं, लेकिन अक्सर अपनी स्किन को भूल जाते हैं। जबकि केमिकल वाले रंग और धूप स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए होली पर रंग खेलने से पहले ही स्किन को तैयार करना जरूरी है। पूरी खबर पढ़िए…

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