Holi Skincare Home Remedies; Synthetic Colour Chemicals Health Risks

14 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक होली के मौके पर रंग खेलने में आनंद तो खूब आता है, लेकिन यह स्किन के लिए किसी ‘केमिकल वॉर’ से कम नहीं है। सिंथेटिक रंगों में मौजूद खतरनाक केमिकल्स हमारी स्किन और हेल्थ पर गंभीर असर डाल सकते हैं। कुछ केमिकल्स आंखों, फेफड़ों और स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव है, उन्हें इसका जोखिम ज्यादा होता है। सिंथेटिक रंगों के कारण स्किन पर लाल चकत्ते, दाने और असहनीय खुजली हो सकती है। कुछ लोग रंग खेलने के बाद स्किन को साबुन से रगड़कर साफ करने लगते हैं, जिससे स्किन डैमेज हो सकती है। इसलिए जरूरत की खबर में आज होली के रंगों से होने वाले नुकसानों की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- किस रंग में कौन-सा केमिकल होता है? किस केमिकल से क्या हेल्थ रिस्क होता है? इससे हुए नुकसान के लिए घरेलू इलाज क्या है? एक्सपर्ट: डॉ. पद्मा सिंह, रिटायर्ड लेक्चरर, केमिस्ट्री, प्रयागराज सवाल- होली के सिंथेटिक रंगों में कौन-से खतरनाक केमिकल्स होते हैं? जवाब- होली के सिंथेटिक रंगों में लेड ऑक्साइड, कॉपर सल्फेट, मरकरी सल्फाइड और एल्युमिनियम ब्रोमाइड जैसे केमिकल्स होते हैं। ग्राफिक में देखिए किस रंग में कौन-सा केमिकल होता है- सवाल- इन केमिकल्स के कारण क्या हेल्थ रिस्क हो सकता है? जवाब- सिंथेटिक रंगों में मौजूद ये केमिकल्स शरीर के लिए ‘स्लो पॉइजन’ की तरह होते हैं। स्किन बर्न और एलर्जी: लेड और मरकरी से स्किन पर गहरे जख्म, लाल चकत्ते और डर्मेटाइटिस (एक्जिमा) हो सकता है। आंखों को खतरा: कॉपर सल्फेट और सिलिका (केमिकल्स) आंखों की पुतली (कॉर्निया) को डैमेज कर सकते हैं, जिससे अंधापन या गंभीर संक्रमण का रिस्क रहता है। लंग्स डैमेज: सांस के जरिए ये बारीक कण फेफड़ों में पहुंचने से अस्थमा का रिस्क बढ़ता है। लिवर डैमेज: अगर ये रंग स्किन के जरिए एब्जॉर्ब होकर अंदर जाते हैं तो किडनी और लिवर की कार्यक्षमता को भी प्रभावित कर सकते हैं। सवाल- होली खेलने के बाद कुछ लोगों की स्किन पर रैशेज, दाने क्यों हो जाते हैं? जवाब- स्किन पर रैशेज और दाने आमतौर पर रंगों में मिले तेज केमिकल्स की वजह से होते हैं। कई सिंथेटिक रंगों में ऐसे तत्व होते हैं, जो स्किन की ऊपरी प्रोटेक्टिव लेयर को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे खुजली, जलन, लाल चकत्ते और छोटे-छोटे दाने निकल सकते हैं। अगर रंग देर तक स्किन पर लगा रहे या रंगों को रगड़कर धुला जाए, तो समस्या बढ़ सकती है। जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव है या जिन्हें पहले से एलर्जी है, उन्हें ज्यादा दिक्कत हो सकती है। सवाल- किन लोगों को रंगों से एलर्जी या स्किन रिएक्शन का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव है, जिन्हें एक्जिमा, एलर्जी या ड्राई स्किन की समस्या है। उन्हें रंगों से रिएक्शन का ज्यादा खतरा होता है। छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी अधिक संवेदनशील होते हैं, क्योंकि उनकी स्किन की सेफ्टी लेयर कमजोर होती है और जल्दी प्रभावित हो सकती है। सिंथेटिक रंगो के रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर होली खेलने के बाद स्किन पर दाने या रैशेज हो जाएं तो तुरंत क्या करना चाहिए? जवाब- रंगों से हुई स्किन एलर्जी को नजरअंदाज न करें, तुरंत जरूरी देखभाल करें। सबसे पहले स्किन को ठंडे या नॉर्मल पानी से धीरे-धीरे धोएं। माइल्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें, स्किन को रगड़ने से बचें। प्रभावित जगह पर कैलामाइन लोशन या एलोवेरा जेल लगाएं। खुजली हो तो डॉक्टर की सलाह से एंटी-एलर्जिक दवा लें। स्किन को मॉइश्चराइज रखें, ताकि बैरियर रिपेयर हो सके। धूप और गर्मी से बचें, इससे जलन बढ़ सकती है। लक्षण बढ़े या पस/सूजन दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। सवाल- क्या दाने या रैशेज होने पर कोई घरेलू इलाज कारगर होता है? जवाब- हल्के रैशेज में घरेलू उपाय राहत दे सकते हैं, लेकिन सावधानी जरूरी है। ठंडे पानी से स्किन को साफ करें, जलन कम होती है। एलोवेरा जेल लगाने से सूजन और खुजली में राहत मिलती है। नारियल तेल स्किन की नमी बनाए रखता है और बैरियर (स्किन को प्रोटेक्ट करने वाली लेयर) सुधारता है। ठंडी दूध की पट्टी (कम्प्रेस) लगाने से जलन शांत होती है। ओटमील (जई) का लेप स्किन को राहत देता है। खुजलाने से बचें, इससे इंफेक्शन बढ़ सकता है। नोट: ये उपाय हल्की-फुल्की समस्याओं के लिए होते हैं। अगर लक्षण गंभीर हो रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें। ग्राफिक में देखिए, किस समस्या में क्या घरेलू उपाय कर सकते हैं- सवाल- स्किन पर दिख रहे कौन-से लक्षण सामान्य हैं और किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए? जवाब- होली के बाद स्किन पर हल्के रिएक्शन आम हैं, लेकिन कुछ लक्षण गंभीर भी हो सकते हैं। इन्हें पहचानना जरूरी है, ताकि समय पर इलाज मिल सके। ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या बार-बार रंग लगने से स्किन की नेचुरल प्रोटेक्टिव लेयर कमजोर हो सकती है? जवाब- हां, बार-बार रंग लगाने से स्किन की प्रोटेक्टिव लेयर कमजोर हो सकती है। सिंथेटिक रंगों के केमिकल्स स्किन की बाहरी परत (लिपिड बैरियर) को नुकसान पहुंचाते हैं। यह बैरियर कमजोर होने पर स्किन ज्यादा संवेदनशील हो जाती है। इसके कारण खुजली, रैशेज और जलन हो सकती है। स्किन में रूखापन हो सकता है और कटे हुए छोटे निशान बन सकते हैं। संक्रमण या एलर्जी का रिस्क बढ़ जाता है। सवाल- सिंथेटिक कलर्स के अलावा हमारी किन गलतियों से स्किन डैमेज का रिस्क बढ़ता है? जवाब- स्किन डैमेज का रिस्क सिर्फ सिंथेटिक रंगों से नहीं, बल्कि कुछ आदतों और गलतियों से भी बढ़ता है- रंग खेलने के तुरंत बाद साबुन से जोर-जोर से रगड़ना। रंगों से पहले स्किन पर तेल या मॉइश्चराइजर न लगाना। आंख, मुंह या नाक में रंग जाने से। बार-बार गर्म पानी या हार्श केमिकल क्लींजर का इस्तेमाल करना। रंग खेलने के बाद पर्याप्त मॉइश्चराइजर न लगाना। धूप में बिना सनस्क्रीन लगाए निकलना। संवेदनशील स्किन या एलर्जी होने पर भी सावधानी न बरतना। सवाल- हेल्दी और चमकदार स्किन के लिए क्या करना चाहिए? जवाब- सही आदतें और सुरक्षा उपाय अपनाकर स्किन को अंदर और बाहर दोनों तरह से हेल्दी रखा जा सकता है। संतुलित आहार लें- फल, सब्जियां, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स स्किन को पोषण देते हैं। पर्याप्त पानी पिएं- हाइड्रेशन से स्किन नरम और चमकदार
जबलपुर में दो गुट आपस में भिड़े, पथराव:छोटी ओमती की घटना; सूचना के बाद पुलिस बल मौके पर तैनात

जबलपुर में होली के मौके पर बुधवार रात छोटी ओमती इलाके में दो गुट आपस में भिड़ गए। दोनों तरफ से पथराव भी हुआ। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और उपद्रवियों को खदेड़ दिया। घटना में एक व्यक्ति घायल हुआ है। बताया जा रहा है कि भीड़ में से किसी ने गोली भी चलाई है। मौके पर बेलबाग, हनुमानताल और कोतवाली की पुलिस फोर्स मौजूद है। छोटी ओमती में रहने वाले गब्बू सोनकर ने कहा- हम लोग कदम तलैया के रहने वाले हैं। होली खेलने के बाद रात को बाहर बैठे हुए थे। इसी दौरान अप्पा सोनकर, अंशुल सोनकर और राकेश खटीक मौके पर पहुंचे। गाली-गलौज करते हुए हमारे साथ बैठे आयुष से विवाद करने लगे। हमने आपत्ति जताई तो मारपीट शुरू कर दी। हमने भी बचाव किया। उनमें से किसी एक ने फायर भी किया। झगड़े में आयुष को चोट आई है, जिसे जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। बेलबाग पुलिस ने बताया कि भानतलैया से छोटी ओमती मार्ग पर सोनकर समाज के दो गुटों में मामूली विवाद हो गया था। अपशब्द कहने के साथ झड़प शुरू हो गई। शरारती तत्व एक-दूसरे पर पथराव करने लगे। फिलहाल, हालात काबू में हैं। अभी तक दोनों गुटों की ओर से कोई भी FIR नहीं कराई गई है।
Sholay: Holis Bollywood Twist Revealed

12 घंटे पहले कॉपी लिंक होली का त्योहार बॉलीवुड फिल्मों के गानों के बिना अधूरा है, क्योंकि त्योहार का जश्न इन्हीं गानों पर झूमकर मनाया जाता है। हालांकि, ये गाने और फिल्में सिर्फ जश्न तक सीमित नहीं रहे हैं। बॉलीवुड की कई फिल्मों में होली के मौके पर कहानी में मोड़ और ट्विस्ट सामने आया है। ‘सिलसिला’ में ‘रंग बरसे’ के दौरान रिश्तों का सच सामने आता है। ‘शोले’ में होली के जश्न के बाद तुरंत हमला होता है। चलिए, ऐसी कुछ फिल्मों के बारे में जानते हैं… सिलसिला साल 1981 में आई फिल्म सिलसिला का गाना रंग बरसे आज भी होली पर सबसे ज्यादा बजने वाले गानों में से एक है। वहीं, फिल्म में गाना रंग बरसे कहानी में बड़ा मोड़ लाता है। इस गाने में अमित, यानी अमिताभ बच्चन, और चांदनी, यानी रेखा, होली के जश्न में भांग के नशे में होते हैं। नशे में वे अपनी पुरानी यादों और दबे जज्बातों में खो जाते हैं। दोनों सबके सामने खुलकर गाते और नाचते हैं। उनके बीच की नजदीकी साफ दिखने लगती है। अमित की पत्नी शोभा (जया बच्चन) और चांदनी के पति डॉ. आनंद (संजीव कुमार) यह सब देख रहे होते हैं। उनके चेहरे पर असहजता साफ नजर आती है। उन्हें दोनों के पुराने रिश्ते का एहसास हो जाता है। शोले 1975 की फिल्म शोले में होली का सीन कहानी में ट्विस्ट लाता है। गाने ‘होली के दिन दिल खिल जाते हैं’ के बाद पूरा रामगढ़ जश्न मना रहा होता है। तभी गब्बर सिंह के डकैत अचानक गांव पर हमला कर देते हैं। फिल्म ‘शोले’ में होली के जश्न के बाद वाले सीन में गब्बर के गुंडों से मुकाबला करते हुए वीरू (धर्मेंद्र)। जय और वीरू बहादुरी से डकैतों से लड़ते हैं। एक समय वे घिर जाते हैं और ठाकुर से बंदूक फेंकने को कहते हैं। ठाकुर के पास बंदूक होती है, फिर भी वह कुछ नहीं करता। डकैत वहां से भाग निकलते हैं। इस बात से नाराज होकर जय और वीरू गांव छोड़ने का फैसला करते हैं। तभी ठाकुर अपनी शॉल हटाकर दिखाता है कि उसके हाथ नहीं हैं। वह बताता है कि गब्बर ने उसका परिवार मार दिया और उसके हाथ काट दिए। यह सच सुनकर जय और वीरू बदला लेने का फैसला पक्का कर लेते हैं। दामिनी फिल्म ‘दामिनी’ (1993) में होली का सीन कहानी का सबसे बड़ा मोड़ साबित होता है, जहां से फिल्म की कहानी एक पारिवारिक ड्रामे से बदलकर एक गंभीर लीगल थ्रिलर बन जाती है। होली के जश्न और गाने (‘गवाह है चाँद तारे’) के बीच दामिनी (मीनाक्षी शेषाद्री) अपने देवर राकेश और उसके दोस्तों को घर की नौकरानी उर्मी का बलात्कार करते हुए देख लेती है। फिल्म ‘दामिनी’ के एक सीन में वकील के रूप में सनी देओल और दामिनी के किरदार में मीनाक्षी शेषाद्री। दामिनी का पति शेखर (ऋषि कपूर) और उसके ससुराल वाले परिवार की ‘इज्जत’ बचाने के लिए उसे चुप रहने और पुलिस से झूठ बोलने के लिए मजबूर करते हैं। जब दामिनी सच बोलने का फैसला करती है, तो उसे मानसिक रूप से बीमार घोषित कर पागलखाने भेज दिया जाता है, ताकि उसकी गवाही को अमान्य किया जा सके। पागलखाने से भागने के बाद दामिनी की मुलाकात गोविंद (सनी देओल) से होती है, जो एक शराबी और असफल वकील है। यहीं से फिल्म का सबसे मशहूर हिस्सा शुरू होता है, जहाँ गोविंद दामिनी को इंसाफ दिलाने के लिए दिग्गज वकील इंद्रजीत चड्ढा (अमरीश पुरी) के खिलाफ कोर्ट में खड़ा होता है। जॉली एलएलबी 2 फिल्म ‘जॉली एलएलबी 2’ में होली का सीन कहानी का अहम मोड़ बनता है। गाने ‘गो पागल’ के बाद हिना (सयानी गुप्ता) को पता चलता है कि जॉली (अक्षय कुमार) ने उसके पति के फर्जी एनकाउंटर केस में मदद का वादा किया था, लेकिन सच में उससे दो लाख रुपये लेकर अपना चैंबर खरीदने की योजना बनाई। इस धोखे का अहसास हिना को तोड़ देता है। 2017 की फिल्म ‘जॉली एलएलबी 2’ में हुमा कुरैशी ने अक्षय कुमार के किरदार की पत्नी का रोल प्ले किया था। जश्न और रंगों के माहौल के तुरंत बाद हिना का आत्महत्या वाला सीन फिल्म की दिशा बदल देता है। यही घटना जॉली के भीतर गहरा अपराध बोध पैदा करती है। वह अपने लालच और स्वार्थ को छोड़कर सच में केस लड़ने का फैसला करता है। इसके बाद कहानी एक गंभीर कोर्टरूम ड्रामा बन जाती है, जहां जॉली सिस्टम के खिलाफ खड़ा होकर न्याय के लिए लड़ता है। पद्मावत फिल्म ‘पद्मावत’ में होली का सीन सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि एक चाल है। अलाउद्दीन खिलजी छह महीने की घेराबंदी के बाद नई रणनीति बनाता है। वह सफेद झंडा भेजकर शांति का संदेश देता है। राजपूतों को लगता है कि अब सुलह होगी। फिल्म ‘पद्मावत’ (2018) में सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की भूमिका रणवीर सिंह ने निभाई थी। किले के बाहर बैठा खिलजी अपने चेहरे पर केसरिया रंग लगाता है। राजपूतों के लिए यह वीरता का रंग है, लेकिन उसके लिए यह जुनून का प्रतीक है। होली के बहाने वह ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा का फायदा उठाकर किले में प्रवेश कर जाता है। वह भरोसा जीतता है ताकि रानी पद्मावती को देख सके। बाद में इसी शांति वार्ता के दौरान वह रतन सिंह को छल से बंदी बना लेता है। …………………………… होली से जुड़ी ये खबर पढ़ें… हरिवंशराय बच्चन ने होली का गाना ‘रंग बरसे’ लिखा था: अमिताभ बच्चन ने गाया था, फिल्म ‘सिलसिला’ में रेखा के साथ फिल्माया गया फिल्मों और होली का रिश्ता 94 सालों पुराना है। 1932 में पहली बार फिल्म गुलरू जरीना में होली थीम का ब्लैक एंड व्हाइट गाना ‘होरी मुझे खेलने को टेसू मंगा दे..’ दिखाया गया। हालांकि, इसे पॉपुलैरिटी नहीं मिली। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Holi 2026 Safety Tips; Synthetic Colors

1 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक आज पूरे देश में बड़े ही उत्साह के साथ होली का त्योहार मनाया जा रहा है। गांव से लेकर शहर तक हर जगह रंग-गुलाल और पिचकारियों की धूम मची हुई है। हालांकि रंग खेलते समय थोड़ी सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है। इसलिए रंगों की मस्ती के बीच सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। दरअसल बाजार में मिलने वाले अधिकांश रंगों में हानिकारक केमिकल्स होते हैं, जो स्किन, आंखों, बालों और रेस्पिरेटरी हेल्थ पर बुरा असर डाल सकते हैं। इसलिए रंग खेलते समय कुछ सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। चलिए, आज जरूरत की खबर में हम होली के सेफ्टी टिप्स जानेंगे। साथ ही समझेंगे कि- बाजार में मिलने वाले रंगों में कौन-कौन से केमिकल्स होते हैं? होली खेलते समय किस तरह की सावधानियां बरतनी जरूरी हैं? एक्सपर्ट: डॉ. संदीप अरोड़ा, सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली डॉ. पद्मा सिंह, रिटायर्ड लेक्चरर, केमिस्ट्री, प्रयागराज सवाल- सिंथेटिक रंगों में कौन से खतरनाक केमिकल्स हो सकते हैं? जवाब- बाजार में मिलने वाले कई सिंथेटिक रंगों में कॉपर सल्फेट, एल्युमिनियम ब्रोमाइड, मरकरी सल्फाइड और लेड ऑक्साइड जैसे हानिकारक केमिकल्स हो सकते हैं। इन केमिकल्स का इस्तेमाल सस्ते रंगों को बनाने के लिए किया जाता है, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- होली पर रंग खेलते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- होली पर रंग खेलने से पहले चेहरे, बालों और शरीर पर तेल लगा लें, ताकि बाद में रंग आसानी से छूट जाए। आंख, नाक और मुंह में रंग जाने से बचाएं। भीड़भाड़ या फिसलन वाली जगह पर न खेलें। अगर एलर्जी, अस्थमा या स्किन की समस्या है तो अतिरिक्त सावधानी बरतें। नीचे दिए ग्राफिक से समझें कि होली पर रंग खेलते समय क्या करें और क्या न करें? सवाल- होली पर बच्चों का खास ख्याल रखना क्यों जरूरी है? जवाब- बच्चों की स्किन और आंखें बड़ों की तुलना में ज्यादा नाजुक होती हैं। केमिकल वाले रंगों से उन्हें स्किन एलर्जी हो सकती है। रंग खेलते समय फिसलने या पानी के गुब्बारे से चोट लगने का खतरा भी रहता है। इसलिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि- छोटे बच्चों को केमिकल युक्त रंगों से दूर रखें। बड़े बच्चों को सिर्फ हल्के और हर्बल गुलाल से होली खेलने दें। रंग खेलने से पहले उनके बालों और स्किन पर नारियल या सरसों का तेल लगा दें। बच्चों को कभी भी अकेला न छोड़ें, आसपास कोई बड़ा जरूर हो। फिसलन वाली जगह या सीढ़ियों के पास खेलने से रोकें। आंख, नाक और मुंह में रंग जाने से बचाएं। भीड़भाड़ वाली जगह पर न भेजें। होली के बाद तुरंत साफ पानी से नहलाएं और मॉइश्चराइजर लगाएं। सवाल- होली के रंग बालों को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं? जवाब- बाजार में मिलने वाले होली के रंगों में केमिकल, मेटलिक पिगमेंट और आर्टिफिशियल डाई मिलाए जाते हैं। ये बालों की बाहरी लेयर को नुकसान पहुंचाकर उन्हें रूखा और बेजान बनाते हैं। इससे बाल कमजोर होकर टूटने लगते हैं और स्कैल्प में खुजली या जलन भी हो सकती है। पहले से केमिकल ट्रीटमेंट ले रहे लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए रंग खेलने से पहले बालों में अच्छे से तेल लगाएं और उन्हें टोपी या रुमाल से कवर करके रखें। सवाल- केमिकल युक्त रंग हमारी स्किन को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं? जवाब- केमिकल वाले रंग स्किन की ऊपरी लेयर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे खुजली, जलन और रैशेज हो सकते हैं। कुछ लोगों में एलर्जी या इंफेक्शन भी हो सकता है। सेंसिटिव स्किन या पहले से स्किन प्रॉब्लम होने पर समस्या बढ़ सकती है। देर तक रंग लगा रहने से स्किन ड्राई और बेजान हो सकती है। सवाल- सिंथेटिक रंग हमारे रेस्पिरेटरी सिस्टम को कैसे प्रभावित करते हैं? जवाब- सिंथेटिक रंगों में मौजूद बारीक कण और केमिकल सांस के जरिए शरीर में जा सकते हैं। इससे कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। जैसेकि- नाक और गले में जलन अस्थमा ब्रोंकाइटिस खांसी सांस फूलने की समस्या ज्यादा एक्सपोजर से फेफड़ों में सूजन और एलर्जिक रिएक्शन का खतरा भी रहता है। सवाल- अगर गलती से आंखों में रंग चला जाए तो क्या करें? जवाब- ऐसी स्थिति में तुरंत साफ और ठंडे पानी से आंखों को अच्छी तरह धोएं। आंखों को बिल्कुल न मलें। इससे जलन और बढ़ सकती है। अगर कॉन्टैक्ट लेंस पहने हैं तो उन्हें निकाल दें। जलन, दर्द या धुंधलापन बना रहे तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें। सवाल- होली के लिए सुरक्षित रंगों का चुनाव कैसे करें? जवाब- केमिकल रंगों की जगह ऑर्गेनिक या घर पर बने रंगों का इस्तेमाल करें। साथ ही कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि- पैकेट पर सामग्री (इंग्रीडिएंट्स) जरूर पढ़ें। खुले में बिकने वाले रंग न खरीदें। बहुत तेज गंध या चमकदार, चिपचिपे रंग न लें। घर पर बने प्राकृतिक रंग, जैसे फूलों या हल्दी से तैयार रंग ज्यादा सुरक्षित होते हैं। बच्चों और सेंसिटिव स्किन वाले लोगों के लिए खास तौर पर हल्के और स्किन-फ्रेंडली रंग ही चुनें। …………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- होली के रंग कैसे छुड़ाएं: पहले से करें ये जरूरी तैयारियां, छुड़ाते हुए बरतें 10 सावधानियां, 6 स्पेशल स्किन फ्रेंडली उबटन होली पर रंग लगाने में तो बहुत मजा आता है, लेकिन जब रंगों को छुड़ाने की बारी आती है तो हालत खराब हो जाती है। यहां हम आपको होली के रंग छुड़ाने के टिप्स बताएंगे। पूरी खबर पढ़िए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Wife Holi Celebration Vs Husband; Suppress Desires – Silent Stress

Hindi News Lifestyle Wife Holi Celebration Vs Husband; Suppress Desires Silent Stress | Relationship 12 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक सवाल- होली मेरा सबसे फेवरेट त्योहार है। बचपन में हम सबसे ज्यादा खुशी और उत्साह से होली का इंतजार करते थे। पूरा परिवार और मोहल्ला इकट्ठा होकर होली खेलता था। मेरे दिल में होली की बहुत सुंदर यादें हैं। लेकिन जब से मेरी शादी हुई है, होली खेलना बिल्कुल बंद हो गया है। मेरे पति बहुत कंजरवेटिव इंसान हैं। उन्हें मेरा होली खेलना बिल्कुल पसंद नहीं है। मेरे ससुराल में कोई भी होली को लेकर एक्साइटेड नहीं रहता। होली खेलने का बहुत मन करता है, लेकिन हसबैंड के कारण मन मारकर रह जाती हूं। क्या करूं? पति से झगड़ा करूं या मन मारकर बैठी रहूं? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- सबसे पहले तो आपका शुक्रिया, क्योंकि आपका सवाल पढ़कर मेरी अपने बचपन की होली की सुंदर यादें ताजा हो गईं। अब आपकी बात। आपकी परेशानी सिर्फ एक त्योहार तक सीमित नहीं है, यह आपकी ‘खुशी के अधिकार’ का भी मामला है। होली कई लोगों के लिए यादों, रिश्तों और खुलकर जीने का एहसास है। आपके सवाल में जो सबसे खूबसूरत बात है, वह है आपका उस खुशी से जुड़ाव, बचपन की वो हंसी, रंगों में भीगा अपनापन और बिना किसी झिझक के जीने का मौका। यही वजह है कि आज जब वो सब नहीं मिल पा रहा, तो भीतर एक खालीपन महसूस हो रहा है। सबसे पहले मैं आपको यह बताना चाहूंगी कि आपकी भावना पूरी तरह जायज है। आप सिर्फ होली खेलना मिस नहीं कर रही हैं, बल्कि उस माहौल को मिस कर रही हैं जिसमें आप खुलकर जी पाती थीं। चलिए समझते हैं कि इस स्थिति को बिना झगड़े के कैसे संभाला जाए। इच्छाओं को दबाने से बनता है ‘साइलेंट स्ट्रेस’ शादी के बाद अक्सर महिलाएं अपने मन की इच्छाओं को ‘एडजस्टमेंट’ के नाम पर दबा देती हैं। शुरू में यह छोटा सा समझौता लगता है, लेकिन लंबे समय में यही दबाव अंदर-ही-अंदर फ्रस्ट्रेशन, उदासी और कभी-कभी गुस्से का रूप ले लेता है। जब आप बार-बार अपने मन को दबाती, रोकती हैं कि “चलो, इस बार नहीं खेलते, पति को पसंद नहीं है,” तो धीरे-धीरे आप खुद से दूर होने लगती हैं। साइकोलॉजी की भाषा में इसे ‘सेल्फ-सप्रेशन’ कहते हैं, जो मेंटल स्ट्रेस की मुख्य वजह बन सकता है। इसके क्या असर होते हैं, ग्राफिक में देखिए- आप मिस कर रही हैं ‘खुलकर जीने का एहसास’ आपको लग रहा होगा कि ये फ्रस्ट्रेशन होली में ‘रंग’ न खेल पाने की वजह से है, लेकिन असल में आप रंग नहीं, वो ‘आजादी का एहसास’ मिस कर रही हैं। जब आप अपनों के साथ मिलकर होली खेलती थीं, तो वो एक ऐसा माहौल होता था, जिसमें कोई जजमेंट नहीं था। सब हंसते थे, गले मिलते थे और बेफिक्र रहते थे। इस असली बात को समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि समाधान भी यहीं से निकलेगा। जब आप जान जाएंगी कि आपकी असली जरूरत क्या है, तो उसे पूरा करने के रास्ते भी साफ दिखने लगेंगे। ससुराल का माहौल अलग होना गलत नहीं आपके ससुराल में अगर कोई होली नहीं खेलता है, तो हो सकता है कि उनके घर में कभी ऐसा माहौल ही नहीं रहा हो। हर परिवार का ‘सेलिब्रेशन’ का तरीका अलग होता है। कुछ परिवारों के लिए त्योहार का मतलब सिर्फ अच्छा खाना और आराम करना होता है। हमें यह समझना होगा कि आपके पति या ससुराल वाले ‘बुरे’ नहीं हैं। बस उनका नजरिया अलग है। हो सकता है कि उनके पीछे कुछ वाजिब कारण हों। मायके जाने से हल हो सकती है समस्या आपने अपने सवाल में ही समाधान का संकेत दिया है कि आपके मायके में होली आज भी वैसी ही धूमधाम से खेली जाती है। यही सबसे सरल संतुलित रास्ता है। प्लानिंग करें: आप हर साल या हर दूसरे साल होली पर अपने मायके जाने का प्लान बना सकती हैं। वही पुराना माहौल: वहां आपको वही यादें और वही बेफिक्री दोबारा मिलेगी। बिना डर के खुशी: वहां आपको पति की नाराजगी या ससुराल के नियमों का डर नहीं रहेगा। रिश्ते में बैलेंस: इससे न तो आपको अपनी इच्छा दबानी पड़ेगी और न ही पति से सीधा टकराव होगा। पति से बात कैसे करें? झगड़ा करना या मन मारकर बैठना, दोनों ही एक्सट्रीम फैसले हैं। आपको बीच का रास्ता निकालना होगा। पति को यह न कहें कि “आप गलत हैं”, बल्कि यह कहें कि “होली मेरे लिए कितनी जरूरी है।” ऐसे बोलें, “मुझे पता है, आपको रंगों से परेशानी है और मैं उसका सम्मान करती हूं। लेकिन होली मेरे बचपन का सबसे प्यारा हिस्सा है। जब मैं नहीं खेलती, तो मुझे बहुत उदासी महसूस होती है। क्या इस बार मैं दो दिन के लिए मम्मी के घर जाकर होली खेल आऊं? इससे आपकी शांति भी बनी रहेगी और मेरी खुशी भी।” खुद को खोने मत दीजिए शादी के बाद अक्सर महिलाएं अपनी पहचान धीरे-धीरे खोने लगती हैं। वे भूल जाती हैं कि उनकी भी कुछ पसंद थी। याद रखिए, एक खुशहाल रिश्ता वही होता है, जहां दोनों पार्टनर अपनी व्यक्तिगत खुशियों को भी जगह दें। आपकी खुशियां, आपकी पसंद, आपकी छोटी-छोटी इच्छाएं उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, जितना आपका रिश्ता। अगर आप अंदर से खुश नहीं रहेंगी, तो आप एक अच्छी पत्नी या बहू की भूमिका भी लंबे समय तक नहीं निभा पाएंगी। झगड़ा नहीं, समझदारी से मिलता है समाधान आपकी समस्या का समाधान झगड़े में नहीं, बल्कि समझदारी में है। अपनी इच्छाओं को दबाइए मत, बल्कि उन्हें जीने का नया तरीका ढूंढिए। होली रंगों का त्योहार है, लेकिन उससे भी ज्यादा यह ‘दिल के रंगों’ का त्योहार है। इन रंगों को अपने जीवन से गायब मत होने दीजिए। इस बार होली पर अपने मायके जाने का प्लान बनाइए या पति को प्यार से अपनी भावनाओं का हिस्सा बनाइए। यकीन मानिए, जब आप अपनी खुशी की जिम्मेदारी खुद लेंगी, तो आपके चेहरे की मुस्कान ही आपके हर सवाल का सबसे सुंदर जवाब होगी। हेल्दी रिश्ते की 3 सीख एक-दूसरे की आदतों को स्वीकार करें। पार्टनर को अपनी पसंद की चीजें करने की आजादी दें। अपनी खुशी के लिए पार्टनर पर 100% निर्भर न
Holi 2026; Festive Emergency Safety Kit Essentials List

Hindi News Lifestyle Holi 2026; Festive Emergency Safety Kit Essentials List | First Aid Treatment 2 दिन पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक होली में लोग जमकर रंग-गुलाल खेलते हैं और अपनों के साथ मिलकर इस त्योहार का जश्न मनाते हैं। ये पर्व मस्ती-मजाक और हंसी-खुशी का है। ऐसे में सबकुछ करिए, लेकिन इस दौरान सावधानियां जरूर बरतिए। दरअसल त्योहार के दौरान भीड़भाड़ में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी का सबब हो सकती है। जैसेकि– रंगों से एलर्जी हो सकती है। फिसलकर चोट लग सकती है। बदलते मौसम में भीगने से अचानक तबीयत बिगड़ सकती है। ऐसी स्थितियां त्योहार का मजा खराब कर सकती हैं। हालांकि, अगर पहले से तैयारी कर ली जाए तो इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ऐसे में काम आती है फेस्टिव सेफ्टी किट। यह एक छोटी, लेकिन बेहद काम की तैयारी है, जिसमें जरूरी मेडिकल और सेफ्टी आइटम्स रखे जाते हैं, ताकि किसी भी इमरजेंसी में तुरंत मदद मिल सके। आज ‘जरूरत की खबर’ में ‘फेस्टिव सेफ्टी किट’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- इस किट में क्या-क्या होना चाहिए? इसका इस्तेमाल कैसे करना है? ये क्यों जरूरी है और अगर ये न हो तो क्या हो सकता है? एक्सपर्ट: डॉ. संचयन रॉय, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- ‘फेस्टिव सेफ्टी यूटिलिटी किट’ क्या है और यह क्यों जरूरी है? जवाब- फेस्टिव इमरजेंसी यूटिलिटी किट एक छोटा-सा बॉक्स या बैग है, जिसमें होली के दौरान जरूरी सेफ्टी और मेडिकल एसेंशियल्स रखे जाते हैं। ये किट घर में ऐसी जगह रखी जानी चाहिए, जहां से जरूरत पड़ने पर तुरंत मिल सके। होली में सिंथेटिक रंगों से और रंग लगाने के दौरान भागदौड़ से चोट का खतरा बढ़ जाता है। अगर ये किट पहले से तैयार हो तो छोटी-मोटी चोट, जलन जैसी समस्याओं से तुरंत निपटा जा सकता है। सवाल- सेफ्टी किट में क्या-क्या सामान होना चाहिए? जवाब- इस किट में 10 जरूरी चीजें होनी चाहिए, जो अलग-अलग तरह की इमरजेंसी में काम आती हैं। डिटेल ग्राफिक में देखिए- इन सभी चीजों के बारे में विस्तार से समझें- फर्स्ट एड और हेल्थ किट बैंड-एड, एंटीसेप्टिक लिक्विड, पेन रिलीवर स्प्रे/जेल और डिजिटल थर्मामीटर (मूल्य: 200–500 रुपए) कब यूज करें: चोट लगने पर एंटीसेप्टिक लगाकर बैंड-एड लगाएं। दर्द होने पर स्प्रे/जेल इस्तेमाल करें। बुखार होने पर बॉडी टेम्परेचर मापें। क्यों जरूरी: हल्की चोट और दर्द में तुरंत राहत मिलती है। इंफेक्शन से बचाव होता है। आई केयर ल्युब्रिकेटिंग आई ड्रॉप (मूल्य: 100-300 रुपए) कब यूज करें: आंखों में जलन या ड्राईनेस होने पर 1-2 बूंद डालें। क्यों जरूरी: रंग, धूल या धुएं से होने वाली जलन से राहत मिलती है। एलर्जी से बचाव एंटी-एलर्जिक दवाएं (मूल्य: 50–200 रुपए) कब यूज करें: खुजली, छींक या रिएक्शन होने पर डॉक्टर की सलाह से लें। क्यों जरूरी: रंगों या धूल से होने वाली एलर्जी को कंट्रोल करती हैं। स्किन केयर कोकोनट ऑयल, एंटी-फंगल पाउडर/क्रीम (मूल्य: 50-150 रुपए) कब यूज करें: स्किन ड्राई हो या स्किन में इरिटेशन हो तो नारियल तेल लगाएं। फंगल इंफेक्शन में डॉक्टर से पूछकर क्रीम/पाउडर लगाएं। क्यों जरूरी: स्किन को सुरक्षित रखता है। रैशेज और इंफेक्शन से बचाव करता है। हाइड्रेशन किट ORS पैकेट (मूल्य: 50-100 रुपए) कब यूज करें: कमजोरी या डिहाइड्रेशन महसूस हो तो पानी में घोलकर पिएं। क्यों जरूरी: शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बना रहता है। क्लीनअप एसेंशियल माइक्रोफाइबर टॉवल (मूल्य: 50-150 रुपए) कैसे यूज करें: रंग साफ करने या चेहरा/हाथ सुखाने के लिए इस्तेमाल करें। क्यों जरूरी: स्किन पर कम रगड़ पड़ती है, आसानी से सफाई हो जाती है। इमरजेंसी कॉन्टैक्ट जरूरी नंबरों की लिस्ट: किसी भी तरह की इमरजेंसी में लिस्ट में लिखे नंबरों पर तुरंत कॉल कर सकते हैं। क्यों जरूरी: इमरजेंसी में समय बचता है और जल्दी मदद मिलती है। सवाल- इमरजेंसी मेडिकल किट कैसे तैयार करें? जवाब- लिस्ट बनाकर मेडिकल स्टोर से पूरी खरीदारी करें। एक चेकलिस्ट बनाएं और हर आइटम क्रॉस-चेक करें। बच्चों और बुजुर्गों की दवाइयां पहले नोट करें। किट को ऐसी जगह रखें, जहां सबकी पहुंच हो, जैसे लिविंग रूम के शेल्फ में। हर त्योहार से पहले किट चेक करें। एक्सपायरी डेट वाली दवाइयां हटाएं। सवाल- मेडिकल इमरजेंसी किट के इस्तेमाल में किन गलतियों से बचना चाहिए? जवाब- किट को सही तरीके से यूज करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है गलतियां न करना। आइए, ग्राफिक से समझें। सवाल- क्या ये किट हर उम्र के लोगों के लिए सुरक्षित है? जवाब- हां, ये किट बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी के लिए सुरक्षित है। बस, बच्चों को सेफ्टी ग्लास (चश्मा) और ईयर मफ्स जरूर पहनाएं। बुजुर्गों की दवाइयां पहले से चेक करें। अगर किसी को चोट या जलन ज्यादा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। सामान्य थकान या छोटी चोटों के लिए ये किट बिल्कुल सही है। सवाल- किन परिस्थितियों में तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए? जवाब- कुछ स्थितियों में तुरंत नजदीकी हॉस्पिटल जाना चाहिए। जैसेकि- अगर रंग से इंफेक्शन होने पर जलन ज्यादा हो रही हो। सांस लेने में तकलीफ हो। चक्कर आए। चोट से खून ज्यादा निकले। ऐसे में इमरजेंसी कॉन्टैक्ट लिस्ट भी काम आएगी। छोटी-मोटी चोट को फर्स्ट एड से हैंडल करें। लेकिन अगर 24 घंटे बाद भी दर्द या सूजन कम न हो तो डॉक्टर को दिखाएं। सवाल- क्या घरेलू तरीकों से भी इमरजेंसी में राहत मिल सकती है? जवाब- हां, कुछ आसान घरेलू उपाय भी काम आ सकते हैं। आइए, ग्राफिक से समझें। सवाल- ये किट सिर्फ होली के लिए है या बाद में भी यूज हो सकती है? जवाब- ये किट हर मौके पर काम आती है, चाहे होली हो, न्यू ईयर हो या कोई फैमिली गेट-टुगेदर हो। फर्स्ट एड, फायर सेफ्टी और टूल किट रोजमर्रा की जरूरतों में भी यूजफुल हैं। बस हर 6 महीने में दवाइयों की एक्सपायरी चेक करें। सवाल- परिवार को सेफ्टी के लिए कैसे तैयार करें? जवाब- होली से पहले परिवार के साथ एक ‘सेफ्टी मीटिंग’ कर सकते हैं। इसमें सबको किट के बारे में बताएं। इसे यूज करने की पूरी गाइडलाइंस दें। सवाल- अगर किट तैयार नहीं की तो क्या रिस्क हो सकते हैं? जवाब- बिना किट के छोटी-सी चोट रंग और धूल के संपर्क में आकर बड़े इंफेक्शन की वजह
Holi Color Removal Tips: Skin-Friendly Ubtan

4 दिन पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक इस साल होली 4 मार्च, 2026 को मनाई जाएगी। लोग रंग-गुलाल, मिठाई और संगीत के साथ इस पर्व का आनंद लेते हैं। रंग लगाने में तो बहुत मजा आता है, लेकिन जब रंगों को छुड़ाने की बारी आती है तो हालत खराब हो जाती है। होली पर लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि जिद्दी रंग को छुड़ाएं कैसे। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हम होली के रंग छुड़ाने के टिप्स बताएंगे। साथ ही जानेंगे कि- होली पर रंग खेलने से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए? रंग छुड़ाते समय किस तरह की गलतियां नहीं करनी चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. संदीप अरोड़ा, सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- होली खेलने से पहले क्या तैयारी करें, जिससे स्किन पर रंग ज्यादा गहरा न चढ़े? जवाब- होली पर रंग खेलने से पहले पूरे शरीर और बालों पर नारियल/सरसों का तेल या अच्छा मॉइश्चराइजर लगाएं। इससे स्किन पर एक प्रोटेक्टिव लेयर बन जाती है और रंग नहीं चिपकते हैं। साथ ही कुछ और बातों का ख्याल रखना जरूरी है। नीचे दिए ग्राफिक में देखिए- सवाल- चेहरे पर लगे रंगों को कैसे छुड़ाएं? जवाब- चेहरे की स्किन बहुत नाजुक होती है, इसलिए रंग छुड़ाते समय ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। जैसेकि- सबसे पहले सूखे रंगों को कपड़े या हाथों से झाड़ लें। इसके बाद चेहरे को नॉर्मल पानी से धोएं। आंखों के आसपास खास सावधानी रखें। फिर किसी माइल्ड फेसवॉश या क्लींजर का इस्तेमाल करें। अगर रंग फिर भी न छूटे तो बेसन और दही का पेस्ट बनाकर लगा सकते हैं। इसके अलावा हल्दी और नींबू का रस मिलाकर पेस्ट लगा सकते हैं। मुल्तानी मिट्टी में नींबू की कुछ बूंदें डालकर इसे चेहरे पर लगा सकते हैं। एलोवेरा जेल या कोई अच्छा मॉइश्वराइजर जरूर लगाएं, ताकि ड्राईनेस की समस्या न हो। ध्यान रहे, रंग छुड़ाने और चेहरा साफ करने के लिए गर्म पानी यूज न करें। इससे रंग और पक्का हो सकता है। सवाल- स्किन पर लगे रंग को छुड़ाते समय किस तरह की गलतियां नहीं करनी चाहिए? जवाब- चेहरे का रंग छुड़ाते समय स्किन को जोर से न रगड़ें। इससे जलन और रैशेज हो सकते हैं। हार्श साबुन, डिटर्जेंट या केमिकल वाले प्रोडक्ट बिल्कुल न लगाएं। अगर स्किन पर रेडनेस, खुजली या सूजन दिखे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। साथ ही कुछ बातों का खास ख्याल रखें, नीचे दिए ग्राफिक में देखिए- सवाल- होली के रंगों से बालों को कैसे बचाएं? जवाब- रंग खेलने से पहले बालों में अच्छी तरह नारियल या सरसों का तेल लगा लें। इससे बालों पर एक प्रोटेक्टिव लेयर बनती है। रंग खेलते वक्त बालों को खुला न छोड़ें, उन्हें बांध लें या स्कार्फ/कैप से ढक लें। ड्राई और केमिकल ट्रीटमेंट वाले बालों पर खास ध्यान दें। रंग खेलने के बाद बालों को हल्के शैंपू से साफ करें और कंडीशनर जरूर लगाएं। सवाल- अगर बालों में रंग गहराई तक पहुंच गया हो तो उसे कैसे हटाएं? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि- रंग सूखा हो तो पहले इसे चौड़ी कंघी से धीरे-धीरे निकालें, तुरंत पानी न डालें। अगर रंग गीला है तो सादे पानी से अच्छी तरह धोकर जितना रंग निकल सके, निकालें। फिर माइल्ड शैंपू से हल्के हाथों से साफ करें। बालों को जोर से न रगड़ें। जरूरत पड़े तो एक मग पानी में 1-2 चम्मच एप्पल साइडर विनेगर मिलाकर रिंस करें। कुछ मिनट बाद साफ पानी से धो लें। अंत में हेयर कंडीशनर लगाएं और कुछ देर बाद बालों काे अच्छी तरह धुलें। सवाल- होली के रंग छुड़ाने के लिए कौन से घरेलू उपाय मददगार हो सकते हैं? जवाब- होली के रंग छुड़ाने के लिए कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं। जैसेकि- बेसन और दूध का उबटन लगाकर 10-15 मिनट बाद धो लें। पका पपीता और हल्दी मिलाकर पेस्ट बनाकर लगाएं। फिर साफ पानी से धो लें। मुल्तानी मिट्टी और दही का लेप भी रंग छुड़ाने में मदद करता है। खीरे का पेस्ट स्किन को ठंडक देता है और रंग छुड़ाने में मदद करता है। नींबू की कुछ बूंदें बेसन में मिलाकर लगा सकते हैं। किसी भी उपाय के बाद मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं, ताकि ड्राईनेस न हो। नीचे दिए ग्राफिक में घर पर बनाए जाने वाले उबटनों की लिस्ट देखिए। सवाल- क्या लंबे समय तक रंग लगा रहना नुकसानदायक हो सकता है? जवाब- हां, केमिकल युक्त रंग स्किन पर ज्यादा देर तक लगे रहने से जलन, खुजली, रेडनेस या एलर्जी हो सकती है। कुछ मामलों में दाग-धब्बे भी पड़ सकते हैं। सेंसिटिव स्किन या स्किन डिजीज से पीड़ित लोगों में जोखिम ज्यादा रहता है। इसलिए रंग को ज्यादा देर तक स्किन पर लगा न रहने दें। सवाल- नाखूनों से रंग कैसे निकालें? जवाब- सबसे पहले नाखूनों को गुनगुने पानी में कुछ मिनट भिगोएं। फिर नींबू का रस या थोड़ा विनेगर 4-5 मिनट तक लगा रहने दें। इसके बाद मुलायम ब्रश या सूती कपड़े से हल्के हाथों से साफ करें। जरूरत हो तो नेल पॉलिश रिमूवर का इस्तेमाल कर सकते हैं। अंत में नाखूनों पर क्रीम या तेल लगा लें, ताकि वे ड्राई और कमजोर न हों। इस तरह थोड़ी तैयारी और सही देखभाल से आप होली का आनंद बिना किसी परेशानी के उठा सकते हैं। ……………………. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- होली पर मिलावटी मावे से सावधान: हो सकते हैं ये हेल्थ रिस्क, इन 4 तरीकों से घर पर करें शुद्धता की जांच होली का त्योहार नजदीक है। इसके चलते बाजारों में मिठाइयों की डिमांड बढ़ गई है। इसी मौके का फायदा उठाकर कुछ मिलावटखोर बाजार में मिलावटी खोया (मावा) सप्लाई कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़िए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Holi 2026 Mawa Adulteration Health Risk Alert; Real Vs Fake Khoya Purity Test

Hindi News Lifestyle Holi 2026 Mawa Adulteration Health Risk Alert; Real Vs Fake Khoya Purity Test | Home Recipe 6 दिन पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक होली का त्योहार नजदीक है। इसके चलते बाजारों में मिठाइयों की डिमांड बढ़ गई है। इसी मौके का फायदा उठाकर कुछ मिलावटखोर बाजार में मिलावटी खोया (मावा) सप्लाई कर रहे हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 12,800 किलो खोया की बिक्री पर रोक लगा दी। शुरुआती जांच में इसमें मिलावट के संकेत मिले हैं, जिसके बाद नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। प्रशासन ने एक और कार्रवाई के दौरान 760 क्विंटल से ज्यादा खोया नष्ट कराया। ये कोई एक मामला नहीं है। देश के कई हिस्सों से मिलावटी खोया मिलने और उसकी बिक्री पर कार्रवाई की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। मिलावटी खोया सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है। इसे खाने से अपच, पेट दर्द, एसिडिटी, और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में मिलावटी और शुद्ध खोया का फर्क समझना और उसे पहचानना बेहद जरूरी है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने इसके लिए कुछ आसान तरीके बताए हैं। इसलिए आज जरूरत की खबर में हम मिलावटी खोया की पहचान के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- खोया में किस तरह की मिलावट हो सकती है? मिलावटी खोया खाने के क्या हेल्थ रिस्क हैं? असली और नकली खोया की पहचान कैसे करें? घर पर शुद्ध खोया कैसे बनाएं? एक्सपर्ट: डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली श्याम प्रवेश शाही, शेफ, नई दिल्ली सवाल- मिलावटी खोया में आमतौर पर किन चीजों की मिलावट की जाती है? जवाब- मिलावटी खोया तैयार करने के लिए अक्सर इसमें स्टार्च, मैदा, सिंथेटिक दूध, रिफाइंड तेल या वनस्पति घी जैसी चीजें मिलाई जाती हैं। मिलावटखोर मुनाफा बढ़ाने के लिए साबुन में इस्तेमाल होने वाले केमिकल, यूरिया या डिटर्जेंट जैसे हानिकारक पदार्थ भी मिलाते हैं। मिलावटी खोया दिखने में असली जैसा लग सकता है। लेकिन इसका सेवन सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। सवाल- मिलावटी खोया खाने के क्या हेल्थ रिस्क हैं? जवाब- मिलावटी खोया खाने से कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क बढ़ जाता है। जैसेकि- पेट दर्द, अपच, गैस और दस्त जैसी पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। बासी या खराब खोया फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है। लिवर और किडनी पर बुरा असर पड़ता है। हार्ट हेल्थ पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अगर खोये में डिटर्जेंट या यूरिया मिला हो तो केमिकल टॉक्सिसिटी हो सकती है। इससे किडनी और लिवर डैमेज का खतरा हो सकता है। गंभीर मामलों में यह जहर जैसा असर भी कर सकता है। नीचे दिए ग्राफिक से मिलावटी खोया खाने के हेल्थ रिस्क समझिए- सवाल- मिलावटी खोया खाने से हार्ट हेल्थ पर क्या प्रभाव पड़ता है? जवाब- मिलावटी खोया में मौजूद पाम ऑयल (ट्रांस फैट), यूरिया, स्टार्च, डिटर्जेंट और हानिकारक केमिकल्स शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं। इससे ब्लड प्रेशर और हार्ट पर दबाव बढ़ सकता है। लंबे समय में इससे आर्टरीज (धमनियों) में ब्लॉकेज और हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ता है। सवाल- मिलावटी खोया खाने से पाचन तंत्र पर क्या प्रभाव पड़ता है? जवाब- मिलावटी खोया में मौजूद सिंथेटिक केमिकल और ट्रांस फैट गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल म्यूकोसा (आंतों की अंदरूनी लेयर) को इरिटेट कर सकते हैं। इससे गैस्ट्राइटिस, उल्टी, दस्त और पेट में ऐंठन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ केमिकल आंतों के अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन भी बिगाड़ देते हैं, जिससे पाचन कमजोर पड़ सकता है। लंबे समय में पोषक तत्वों के अवशोषण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। सवाल- घर पर असली और नकली खोया की पहचान कैसे करें? जवाब- फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने इसके लिए कुछ आसान तरीके बताए हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- घर पर शुद्ध खोया बनाने का सही तरीका क्या है? जवाब- घर पर शुद्ध खोया बनाना बहुत आसान है। बस इसके लिए थोड़े धैर्य की जरूरत होती है। नीचे दिए ग्राफिक से इसे बनाने का सही तरीका समझिए- पूरी विधि विस्तार से कड़ाही में दूध डालें और तेज आंच पर एक उबाल आने दें। उबाल आने के बाद आंच को मीडियम कर दें। दूध को लगातार चलाते रहें। किनारों पर जमने वाली मलाई को खुरचकर वापस दूध में मिलाते रहें। इससे खोया लच्छेदार बनेगा। जैसे-जैसे पानी सूखता जाएगा, दूध गाढ़ा होकर रबड़ी जैसा दिखने लगेगा। इस दौरान आंच को थोड़ा कम कर दें, ताकि छींटे न पड़ें और मिश्रण जले नहीं। जब दूध पूरी तरह गाढ़ा होकर कड़ाही छोड़ने लगे और एक जगह इकट्ठा होने लगे, तो समझ लीजिए कि खोया तैयार है। गैस बंद कर दें और खोया को एक बर्तन में निकाल लें। ठंडा होने के बाद यह और भी सख्त और दानेदार हो जाएगा। इसे एयरटाइट डिब्बे में रखकर फ्रिज में 4-5 दिन तक और फ्रीजर में महीने भर तक सुरक्षित रखा जा सकता है। सवाल- अगर कोई मिलावटी खोया बेचता है तो इसकी शिकायत कैसे करें? जवाब- अगर किसी दुकान पर मिलावट का शक हो तो पहले दुकानदार से बात करें। संतोषजनक जवाब न मिले तो FSSAI के टोल-फ्री नंबर 1800112100 पर शिकायत कर सकते हैं। आधिकारिक वेबसाइट पर भी इसकी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा स्थानीय पुलिस और जिले के खाद्य सुरक्षा विभाग को भी सूचना दे सकते हैं। मिलावटी खोया का सैंपल और खरीद रसीद अपने पास जरूर रखें। जरूरत पड़ने पर ये काम आएगा। सवाल- मिलावटी फूड बेचने वाले पर क्या कार्रवाई हो सकती है? जवाब- मिलावटी फूड बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है। भारत में यह अपराध फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट, 2006 के तहत दंडनीय है। अगर कोई व्यक्ति मिलावटी या असुरक्षित फूड बेचता पकड़ा जाता है, तो उस पर- मामले की गंभीरता के अनुसार भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। लाइसेंस रद्द या निलंबित किया जा सकता है। दुकान सील की जा सकती है। अगर मिलावटी फूड से किसी की तबीयत खराब हो जाए या उसकी जान को खतरा हो, तो दोषियों को जेल की सजा भी हो सकती है। फूड सेफ्टी ऑफिसर जांच के बाद सैंपल लैब में भेजते हैं और रिपोर्ट के आधार पर
Holi Organic Gulal; Chemical Free Natural Colors DIY Methods

34 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक होली का त्योहार नजदीक है। इस मौके पर लोग रंग-गुलाल खेलते हैं। हालांकि बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंग स्किन और हेल्थ, दोनों के लिए नुकसानदायक होते हैं। ‘इंडियन जर्नल ऑफ क्लिनिकल बायोकेमिस्ट्री’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंगों में हानिकारक केमिकल्स मिलाए जाते हैं। इनसे स्किन रैशेज, आंखों में जलन, एलर्जी और सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों पर इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है। ऐसे में अगर आप सेहत से समझौता किए बिना होली का आनंद लेना चाहते हैं तो ऑर्गेनिक रंग-गुलाल बेहतर विकल्प हैं। इन्हें घर पर भी आसानी से बनाया जा सकता है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हम घर पर रंग-गुलाल बनाने के टिप्स बताएंगे। साथ ही जानेंगे कि- घर पर रंग-गुलाल बनाते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? घर पर ऑर्गेनिक रंग बनाने में कितना समय लगता है? एक्सपर्ट: डॉ. संदीप अरोड़ा, सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली डॉ. पद्मा सिंह, रिटायर्ड लेक्चरर, केमिस्ट्री, प्रयागराज सवाल- बाजार में मिलने वाले रंगों में कौन-कौन से केमिकल होते हैं? इनका हमारी सेहत पर क्या असर पड़ता है? जवाब- बाजार में मिलने वाले सस्ते और सिंथेटिक रंगों में कई सारे केमिकल्स हो सकते हैं। जैसेकि- कॉपर सल्फेट (हरा रंग) लेड ऑक्साइड (काला रंग) मरकरी सल्फाइड (लाल रंग) क्रोमियम आयोडाइड (बैंगनी रंग) एल्युमिनियम ब्रोमाइड (चांदी रंग) प्रशिया ब्लू (नीला रंग) ये रंग कई हेल्थ प्रॉब्लम्स का कारण बन सकते हैं। जैसेकि- स्किन रैशेज स्किन एलर्जी, जलन आंखों में जलन सूजन और इंफेक्शन सांस संबंधी समस्याएं अस्थमा किडनी डैमेज गंभीर मामलों में कैंसर का रिस्क बच्चों और सेंसिटिव स्किन वाले लोगों में केमिकल युक्त रंगों का प्रभाव ज्यादा गंभीर हो सकता है। सवाल- घर पर ऑर्गेनिक रंग-गुलाल कैसे बनाएं? जवाब- घर पर ऑर्गेनिक रंग-गुलाल बनाना आसान है। इसके कुछ आसान तरीके समझिए- नारंगी: संतरे के छिलकों को सुखाकर बारीक पीस लें। इसमें थोड़ा कॉर्न फ्लोर और थोड़ी हल्दी मिलाएं। मिश्रण को छलनी से छान लें। आपका खुशबूदार नारंगी गुलाल तैयार है। हरा: पालक, धनिया या पुदीने की पत्तियों को पीसकर उसका रस निकालें। इसमें गुलाब जल मिलाएं। सूखे गुलाल के लिए इस मिश्रण को कॉर्न फ्लोर में मिलाकर धूप में सुखाएं और फिर छान लें। गुलाबी: चुकंदर का जूस लें। इसमें गुलाब जल और जरूरत के अनुसार कॉर्न फ्लोर मिलाएं। अच्छी तरह मिक्स कर धूप में सुखाएं और बारीक पीसकर छान लें। लाल: गुड़हल के फूल या गुलाब की पंखुड़ियों को भिगोकर पीस लें। इसमें कॉर्न फ्लोर मिलाकर सुखाएं और बारीक पाउडर तैयार कर लें। पीला: थोड़ी हल्दी को गर्म पानी में उबालें। ठंडा होने पर इसमें कॉर्न फ्लोर और गुलाब जल मिलाएं। इसे सुखाकर पीस लें। चाहें तो हल्दी और बेसन को मिलाकर भी पीला गुलाल बना सकते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से घर पर ऑर्गेनिक रंग-गुलाल बनाने के आसान तरीके समझिए- सवाल- घर पर ऑर्गेनिक रंग बनाने में कितना समय लगता है? जवाब- अगर आप गीला (लिक्विड) रंग बना रहे हैं तो यह 10-15 मिनट में तैयार हो जाता है। गुलाल बनाने के लिए धूप में सुखाने की प्रक्रिया के कारण 2 से 3 दिन का समय लग सकता है। सवाल- ऑर्गेनिक रंग-गुलाल इस्तेमाल करने के क्या फायदे हैं? जवाब- ऑर्गेनिक रंग न केवल स्किन के लिए सेफ होते हैं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी होते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से इसके सभी फायदे जानिए- सवाल- घर पर रंग बनाते समय किन बातों का ध्यान रखें? जवाब- घर पर रंग बनाना सुरक्षित विकल्प है। लेकिन कुछ सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। जैसेकि- किसी भी रंग का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। जलन पैदा करने वाली सामग्री इस्तेमाल न करें। खराब या सड़ी-गली पत्तियां और फूल इस्तेमाल न करें। गुलाल को अच्छी तरह सुखाएं। अगर नमी रह गई तो फफूंद लग सकती है। बनाने के बाद बारीक छलनी से छानें, क्योंकि मोटे कण स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। साफ बर्तन और मिक्सर इस्तेमाल करें। गंदे उपकरणों से संक्रमण का खतरा हो सकता है। तैयार गुलाल को सूखी, साफ जगह पर रखें। बच्चों, बुजुर्गों और एलर्जी वाले लोगों के लिए हल्के रंग ही बनाएं। इन सावधानियों के साथ आप सुरक्षित और खुशहाल होली मना सकते हैं। सवाल- घर पर बने ऑर्गेनिक रंग कितने दिनों तक सुरक्षित रहते हैं? जवाब- इसे एयरटाइट डिब्बे में 1–2 हफ्ते तक सुरक्षित रख सकते हैं। अगर रंग में नमी रह गई तो उसमें फफूंद लग सकती है। लिक्विड रंग 1–2 दिन के भीतर इस्तेमाल कर लेना बेहतर है, क्योंकि ये जल्दी खराब हो सकते हैं। सवाल- क्या घर पर बने रंग कपड़ों पर दाग छोड़ सकते हैं? जवाब- ज्यादातर ऑर्गेनिक रंग हल्के होते हैं और सामान्य धुलाई से निकल जाते हैं। फिर भी चुकंदर, हल्दी या फूलों से बने गहरे रंग हल्का दाग छोड़ सकते हैं। इसलिए होली खेलते समय पुराने या हल्के रंग के कपड़े पहनना बेहतर होता है। सवाल- क्या ऑर्गेनिक रंग छोटे बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं? जवाब- ऑर्गेनिक रंग केमिकल रंगों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित होते हैं। लेकिन छोटे बच्चों के लिए इन्हें पूरी तरह रिस्क फ्री नहीं कहा जा सकता। कुछ बच्चों की स्किन सेंसिटिव होती है, जिससे प्राकृतिक चीजों से भी एलर्जी हो सकती है। इसलिए- बच्चों को रंग लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। हल्के ऑर्गेनिक गुलाल का ही इस्तेमाल करें। चेहरे पर न लगाएं तो बेहतर है। …………………….. होली से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- होली की एडवांस तैयारी: आज से ही शुरू करें स्किन केयर रूटीन, ताकि सिंथेटिक रंगों से न हो त्वचा को नुकसान होली रंग-गुलाल, खुशियों और मौज-मस्ती का त्योहार है। हम कपड़े, पिचकारी और पकवान की तैयारियां तो पहले से कर लेते हैं, लेकिन अक्सर अपनी स्किन को भूल जाते हैं। जबकि केमिकल वाले रंग और धूप स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए होली पर रंग खेलने से पहले ही स्किन को तैयार करना जरूरी है। पूरी खबर पढ़िए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Holi Sexual Abuse Victim Story; PTSD Stress Disorder

48 मिनट पहले कॉपी लिंक सवाल– मेरी उम्र 32 साल है। मैं बचपन में अपने ही रिश्तेदार के हाथों सेक्शुअल अब्यूज का शिकार हो चुकी हूं। मेरे अब्यूज की कहानी का होली से गहरा कनेक्शन है। होली में रंग खेलने के बहाने वो हमेशा मुझे गलत तरीके से छूता था। मेरी उम्र कम थी। मैं डर और संकोच के कारण कुछ कह नहीं पाती थी। उससे बड़ी बात कि मैं समझ भी नहीं पाती थी कि ये क्या हो रहा है। बस अनकंफर्टेबल फील होता था। घर में कभी किसी ने मेरे इस डिसकंफर्ट को नोटिस नहीं किया। ये सिलसिला कुछ 4 साल तक चला होगा। अब मैं एडल्ट और इंडिपेंडेंट हूं, लेकिन होली नजदीक आते ही मेरा पास्ट ट्रॉमा ट्रिगर हो जाता है। मैं अपने दोस्तों और पार्टनर के साथ भी होली खेलने में सहज नहीं महसूस करती। होली के दिन मूड ऑफ रहता है। मैं इस ट्रॉमा से कैसे बाहर निकलूं? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए आपका बहुत शुक्रिया। मैं आपकी मन:स्थिति समझ सकता हूं। यूं तो होली रंगों और खुशियों का त्योहार है, लेकिन जो भी लोग बचपन में इस त्योहार के बहाने सेक्शुअल अब्यूज या किसी भी तरह के गलत व्यवहार का शिकार हुए होते हैं, उनके भीतर यह दिन ट्रॉमा ट्रिगर कर सकता है। यह PTSD (पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) का संकेत है। जिस घटना, जगह, व्यक्ति से हमारा ट्रॉमा जुड़ा हो, उसके आसपास होने पर वही पुराना ट्रॉमा फिर से सतह पर आ जाता है और मानसिक रूप से दुखी, परेशान कर सकता है। PTSD कोई कमजोरी नहीं है लेकिन यहां मैं आपसे एक बात पूरा जोर देकर कहना चाहता हूं कि PTSD कोई कमजोरी नहीं है। नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सेलेंस (NICE) और रॉयल कॉलेज ऑफ साइकिएट्रिस्ट्स का ये मानना है कि PTSD हमारे शरीर और ब्रेन का डिफेंस मैकेनिज्म है। यह इसलिए विकसित होता है क्योंकि हमारी बॉडी हमें प्रोटेक्ट करना चाहती है। किसी गहरे सदमे या डरावने अनुभव के बाद यह विकसित होता है। इस बात को गहराई से समझने के लिए हमें थोड़ा अपने शरीर की बायोलॉजी को भी समझना पड़ेगा। तो आइए शुरू करते हैं। दर्दनाक घटनाएं और कॉर्टिसोल स्टैंपिंग जब कोई बच्चा सेक्शुअल अब्यूज का शिकार होता है तो उसके शरीर में फाइट-फ्लाइट-फ्रीज मोड एक्टिव हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप: एड्रेनेलाइन हॉर्मोन रिलीज होता है। कॉर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) रिलीज होता है। दिल की धड़कन तेज हो जाती है शरीर के सारे सेंसेज (इंद्रियां) ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं। कॉर्टिसोल स्टैंपिंग क्या है? बहुत ज्यादा स्ट्रेस होने पर: कॉर्टिसोल ब्रेन के मेमोरी सेंटर को ज्यादा मजबूत कर देता है। ब्रेन उस घटना को एक “डेंजरस” घटना के रूप में “टैग” कर देता है। उस बुरी घटना से जुड़ी सारी डिटेल्स (स्पर्श, गंध, रंग, ध्वनि) सब गहराई से ब्रेन में रजिस्टर हो जाते हैं। इसके बरक्स जेनेरिक बातें, सामान्य विवरण धुंधले पड़ जाते हैं। लेकिन खतरे से जुड़ी सारी डिटेल्स ब्रेन में बहुत गहरे और साफ बनी रहती हैं। हमारी बायोलॉजी इस बात को सुनिश्चित करती है कि हम उस बुरी घटना से जुड़ी हर डिटेल को अच्छे से याद रखें। इसलिए : हो सकता है कि सरवाइवर को रोजमर्रा की सामान्य बातें, घटनाएं याद न रहें। लेकिन उसे अब्यूज से जुड़ी हरेक बात, हर डिटेल बहुत अच्छे से याद रहती है। जरूरी बात: कॉर्टिसोल हॉर्मोन डेंजर को याद रखने में हमारी मदद करता है, ताकि ठीक वैसा ही खतरा सूंघते ही हम तुरंत एलर्ट हो जाएं। लेकिन इसका नुकसान ये होता है कि हम दुर्घटना से जुड़ी हर सेंसरी डिटेल को जरनलाइज करने लगते हैं। जैसेकि चूंकि आपके अब्यूज की याद होली से जुड़ी है तो आपका ब्रेन हर होली को डेंजर के रूप में याद रखता है। ब्रेन का अलार्म सिस्टम: एमिग्डला की भूमिका एमिग्डला: हमारे ब्रेन में बादाम के आकार की एक संरचना है। ट्रॉमा की स्थिति में एमिग्डला खतरे का पता लगाता है। ब्रेन को स्ट्रेस हॉर्मोन रिलीज करने का ऑर्डर देता है। हमारे डर के रिएक्शन को एक्टिव करता है। लॉजिकल थिंकिंग को किनारे कर देता है। क्योंकि उसका मकसद उस वक्त सिर्फ हमें खतरे से बचाना है। चाइल्डहुड ट्रॉमा की स्थिति में: एमिग्डला बहुत ज्यादा सेंसिटिव हो जाता है। ट्रॉमा से जुड़ी किसी भी बात पर तुंरत एक्टिव हो जाता है। एमिग्डला अतीत और वर्तमान के बीच फर्क नहीं कर सकता। इसलिए होली के दौरान जब भी ये चीजें होती हैं- अचानक किसी का छूना तेज आवाज रंगों की महक भीड़ में शारीरिक नजदीकी तो एमिग्डला कहता है- “खतरा।” एक व्यक्ति को ये पता है कि अभी खतरा नहीं है। अभी तो मैं सुरक्षित हूं, फिर भी एमिग्डला सुपर एक्टिव होकर ये बताता है कि नहीं, ये बिल्कुल पुरानी वाली सिचुएशन है। आसपास खतरा है। रिएलिटी और ब्रेन मैसेज के बीच में ये जो गैप है, इसी कारण पुराने ट्रॉमा को लेकर अकसर हमारा रिएक्शन हमारे कंट्रोल में नहीं होता। होली ट्रॉमा और PTSD स्क्रीनिंग: सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक्स में कुल 4 सेक्शंस हैं और 13 सवाल हैं। आप इन सवालों को ध्यान से पढ़ें और 0 से 4 के स्केल पर इसे रेट करें। 0 का मतलब है ‘बिलकुल नहीं’ और 4 का मतलब है, ‘हमेशा।’ अंत में अपना टोटल स्कोर काउंट करें और स्कोर की एनालिसिस करें। स्कोर इंटरप्रिटेशन भी ग्राफिक में दिया हुआ है। जैसेेकि अगर आपका टोटल स्कोर 15 से कम है तो इसका मतलब है कि बहुत माइल्ड PTSD है, लेकिन अगर स्कोर 45 से ज्यादा है तो PTSD बहुत हाई है। ऐसे में प्रोफेशनल हेल्प बहुत जरूरी है। CBT (कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी) आधारित मैनेजमेंट प्रोग्राम (होली से एक सप्ताह पहले → होली के दौरान → अगली होली तक) फेज 1: होली से एक सप्ताह पहले तैयारी 1. ट्रिगर को साफ-साफ समझना डायरी में लिखें: मुझे खासतौर पर क्या चीजें परेशान करती हैं? इसमें से क्या मेरे पास्ट ट्रॉमा से जुड़ा हुआ है? अब क्या बदला है या क्या अलग है? CBT सवाल: “आसपास ऐसा कौन सा एविडेंस है, जो ये बताए कि मैं अभी भी असुरक्षित हूं।” 2. बाउंड्री









