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summer pregnancy care tips I कन्नौज समाचार

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Last Updated:April 09, 2026, 19:15 IST गर्मियों में गर्भवती महिलाओं के लिए डिहाइड्रेशन गंभीर खतरा बन सकता है. तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण शरीर में पानी की कमी से चक्कर, कमजोरी और प्री-मैच्योर डिलीवरी का जोखिम बढ़ जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि नियमित रूप से पानी, नारियल पानी, छाछ और पानी से भरपूर फलों का सेवन मां और शिशु दोनों की सेहत के लिए जरूरी है. कन्नौज. गर्मियों का मौसम गर्भवती महिलाओं के लिए कई चुनौतियां लेकर आता है, जिनमें सबसे आम समस्या है शरीर में पानी की कमी, यानी डिहाइड्रेशन. तेज धूप, पसीना और बढ़ता तापमान शरीर से पानी तेजी से कम कर देता है, ऐसे में गर्भवती महिलाओं के लिए यह स्थिति और भी संवेदनशील हो जाती है, क्योंकि इसका सीधा असर मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की सेहत पर पड़ सकता है. गर्भावस्था के दौरान शरीर को सामान्य से अधिक पानी की जरूरत होती है. पर्याप्त पानी पीने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है, पोषक तत्वों का सही संचार होता है और शिशु के विकास में भी मदद मिलती है. अगर शरीर में पानी की कमी हो जाए, तो चक्कर आना, थकान, सिरदर्द और यहां तक कि प्री-मैच्योर डिलीवरी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. इन चीजों का करें नियमित सेवनगर्मी के मौसम में सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि कुछ प्राकृतिक पेय और फल भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं. नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ जैसे पेय पदार्थ शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ जरूरी मिनरल्स भी प्रदान करते हैं. इसके अलावा तरबूज, खीरा और मौसमी जैसे फल शरीर में पानी की कमी को दूर करने में बेहद मददगार साबित होते हैं. ये चीजें शरीर को तरोताजा बनाए रखने के साथ ऊर्जा भी देती हैं. दिनभर पानी पीने की बनाएं आदतडॉ. शक्ति बसु बताते हैं गर्भवती महिलाओं को दिनभर में थोड़ा-थोड़ा करके पानी पीते रहना चाहिए. एक साथ ज्यादा पानी पीने के बजाय नियमित अंतराल पर पानी लेना ज्यादा फायदेमंद होता है. हमेशा अपने साथ पानी की बोतल रखें और बाहर जाते समय भी पानी पीना न भूलें. यह आदत शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में काफी मदद करती है. क्या बोले डॉक्टर जिला अस्पताल सीएमएस डॉक्टर शक्ति बसु बताते हैं कि डिहाइड्रेशन के कुछ सामान्य लक्षण होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जैसे मुंह सूखना, पेशाब का गहरा रंग, कमजोरी महसूस होना, चक्कर आना और दिल की धड़कन तेज होना, अगर ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत पानी या तरल पदार्थ का सेवन बढ़ा दें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें. हर गर्भवती महिला की स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी डाइट या हाइड्रेशन प्लान को अपनाने से पहले अपने नज़दीकी डॉक्टर की सलाह जरूर लें. सही मार्गदर्शन और संतुलित खानपान के जरिए गर्मियों में भी खुद को और अपने बच्चे को स्वस्थ रखा जा सकता है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kannauj,Uttar Pradesh First Published : April 09, 2026, 19:15 IST

तोरई की सब्जी का जबरदस्त फायदा! कब्ज, शुगर और वजन पर असरदार, जानिए फायदे और आसान रेसिपी

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X तोरई की सब्जी का कमाल! कब्ज, शुगर और वजन कम पर जबरदस्त असरदार   Benefits Of Ridge Gourd Vegetable : नागौर में इन दिनों तोरई सब्जी को लेकर खास चर्चा हो रही है. भले ही यह सब्जी देखने में साधारण लगती हो, लेकिन इसके अंदर सेहत का खजाना छिपा होता है. आयुर्वेदिक चिकित्सकों के अनुसार तोरई में विटामिन-A, विटामिन-C, आयरन, कैल्शियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं. यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने, कब्ज दूर करने और शरीर को ठंडक देने में बेहद फायदेमंद मानी जाती है. गर्मी के मौसम में इसका सेवन खास लाभ पहुंचाता है. इतना ही नहीं, यह वजन कम करने और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में भी सहायक बताई जाती है. यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे रोजाना आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं. आसान रेसिपी के साथ यह स्वाद और सेहत का बेहतरीन मेल बन जाती है.

काला या लाला… गर्म‍ियों में किस मटके का पानी होता है ज्यादा ठंडा? जानिए आपके सवाल का जवाब

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X काला या लाला… गर्म‍ियों में किस मटके का पानी होता है ज्यादा ठंडा? जानिए   लाल मटका Vs काला मटका: भीषण गर्मी के बीच देसी मटकों की मांग तेजी से बढ़ गई है. ऐसे में लोग बाजार में काले और लाल मटकों को लेकर लोग कंफ्यूज हैं. सीधी के कुम्हार रोमी प्रजापति ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ ही मटकों की डिमांड अचानक बढ़ जाती है. लोग खासतौर पर काले रंग के मटकों को ज्यादा पसंद करते हैं. ये मटके पूरी तरह हाथों से तैयार किए जाते हैं और इन्हें बनाने में सोन नदी की मिट्टी और पीली मिट्टी का उपयोग होता है. पारंपरिक चाक पर इन्हें आकार देने के बाद भट्टी में पकाया जाता है. इस प्रक्रिया के कारण मटके में हल्की झरझराहट रहती है, जिससे पानी धीरे-धीरे बाहर की ओर नमी छोड़ता है और प्राकृतिक रूप से ठंडा बना रहता है. वहीं इसके विपरीत लाल रंग के मटके ज्यादातर मशीनों से बनाए जाते हैं. इनमें काले मटकों जैसी झरझराहट कम होती है, इसलिए ये पानी को उतना ठंडा नहीं रख पाते. हालांकि आजकल कुछ लाल मटकों में भी झरने की क्षमता विकसित की जा रही है लेकिन वे काले मटकों जितने प्रभावी नहीं माने जाते.

गर्मी और लू से बचाएगा कच्चे आम का पन्ना, जानिए इसे बनाने की आसान रेसिपी – News18 हिंदी

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X गर्मी और लू से बचाएगा कच्चे आम का पन्ना, जानिए इसे बनाने की आसान रेसिपी   Aam Panna Recipe: आम पन्ना या आम पना जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी किसी औषधि से कम नहीं है. आम पन्ना कच्चे आम से तैयार किया जाने वाला एक लोकप्रिय देसी पेय है, जिसे खासतौर पर गर्मियों में पीया जाता है. यह शरीर की गर्मी को संतुलित करने में मदद करता है और लू से बचाव के लिए बेहद कारगर माना जाता है. सीधी निवासी प्रियंका सिंह ने बताया कि गर्मियों में राहत देने वाला आम पन्ना बनाने की विधि बेहद आसान है. कच्चे आमों को चूल्हे या गैस पर तब तक भूनें, जब तक छिलका काला और अंदर से नरम न हो जाए. इसके बाद इन्हें ठंडा कर छीलें और गूदा निकाल लें. इसे पानी, चीनी या गुड़, पुदीना, भुना जीरा, काला नमक और साधारण नमक के साथ पीस लें. तैयार गाढ़ा मिश्रण फ्रिज में रखें. सर्व करते समय गिलास में बर्फ, 3-4 चम्मच पन्ना और ठंडा पानी मिलाकर परोसें. तैयार पेय को ठंडा कर पुदीने की पत्तियों के साथ परोसने से इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है.

यह सफेद फूल है औषधि का खजाना! बवासीर से लेकर कान-दांत दर्द तक देता है राहत, जानें सही इस्तेमाल

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Last Updated:April 07, 2026, 13:38 IST धतूरा एक ऐसा पौधा है, जिसे जहां धार्मिक दृष्टि से भगवान शिव को अर्पित किया जाता है, वहीं आयुर्वेद में इसके कई औषधीय उपयोग भी बताए गए हैं. हालांकि यह पौधा विषैला होता है, इसलिए इसके सही और सीमित उपयोग से ही स्वास्थ्य लाभ मिल सकता है. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई इलाके में धतूरा का पौधा आसानी से मिल जाता है. धतूरा एक ऐसा पौधा है, जिसके फल, पत्तियां और तना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. इसमें ट्रोपेन एल्कलॉइड जैसे स्कोपोलामाइन, एट्रोपिन, एनिसोडामाइन, मेटेलोइडिन और एंजेलेट एस्टर जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो कई बीमारियों से बचाव में सहायक माने जाते हैं. धतूरा का फल भगवान शिव को बेहद प्रिय माना जाता है. शिव भक्त सोमवार के दिन पूजा के बाद भगवान शिव को धतूरे का फल और फूल अर्पित करते हैं. धतूरा एक विषैला पौधा है, लेकिन इसका ऐतिहासिक और पारंपरिक उपयोग विभिन्न संस्कृतियों में औषधीय और धार्मिक उद्देश्यों के लिए होता आया है. मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने पिया था और धतूरा उस विष को नियंत्रित करने में सहायक माना गया, इसलिए शिव पूजा में इसका विशेष महत्व है. अगर आप बवासीर की समस्या से परेशान हैं, तो गांव में मिलने वाला यह फल राहत दिला सकता है. हालांकि, धतूरे के पत्ते और फल का सही तरीके से उपयोग करना बेहद जरूरी है. बवासीर में धतूरे के फल और पत्तियों को जलाकर निकलने वाले धुएं से मस्सों की सिकाई करने पर दर्द में राहत मिल सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google कई बार बाइक या अन्य कारणों से चोट लगने पर पैर में सूजन आ जाती है, जिससे दर्द और चलने में दिक्कत होने लगती है. ऐसे में लोग धतूरे के पत्तों को गर्म करके प्रभावित स्थान पर बांधते हैं, जिससे सूजन कम हो सकती है. वहीं, धतूरे के पत्तों को पीसकर लेप बनाकर सूजन वाली जगह पर लगाने से भी धीरे-धीरे राहत मिल सकती है. अगर आप कान के दर्द या सिरदर्द से परेशान रहते हैं, तो धतूरे का पत्ता फायदेमंद माना जाता है. कान दर्द में इसके उपयोग के लिए सरसों के तेल में गंधक के साथ थोड़ा सा धतूरे के पत्तों का रस मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं. इसके बाद हल्का गुनगुना होने पर इस तेल की दो-दो बूंद कान में डालने से दर्द में राहत मिल सकती है. आयुर्वेदिक आचार्य देवेंद्र कुमार के अनुसार दांतों के दर्द में धतूरे के बीज उपयोगी माने जाते हैं. इसके लिए धतूरे के बीज निकालकर धूप में सुखा लें, फिर उन्हें पीसकर दाढ़ की खाली जगह में रखें. कुछ समय बाद दर्द में राहत मिल सकती है, इसके बाद कुल्ला कर लें. उन्होंने यह भी सलाह दी है कि अधिक जानकारी और सही उपयोग के लिए डॉक्टर से जरूर संपर्क करें. First Published : April 07, 2026, 13:38 IST

एसिडिटी से राहत का देसी उपाय I Sultanpur news

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Last Updated:April 07, 2026, 10:47 IST गलत खान-पान और तनाव की वजह से बढ़ रही एसिडिटी अब आम समस्या बन चुकी है. आयुर्वेद के अनुसार मुलेठी का सेवन पाचन तंत्र को मजबूत कर पित्त दोष को शांत करने में मदद करता है और बार-बार होने वाली जलन से राहत दे सकता है. सुल्तानपुर. आज के समय में गलत दिनचर्या और गलत खान-पान की वजह से हमारा स्वास्थ्य कई तरह की बीमारियों का शिकार होता चला जा रहा है. उसी में एक आम समस्या पित्त अम्ल दोष की भी लोगों को ज्यादा हो रही है. पीत अम्ल दोष जिसे आम बोलचाल की भाषा में एसिडिटी भी कहा जाता है. यह समस्या आज के लोगों में ज्यादा हो रही है और एसिडिटी की वजह से कई बार लोगों को ज्यादा तेज पीड़ा भी होने लगती है. ऐसे में आयुर्वेद में एसिडिटी और पित्त को साफ करने के लिए मुलेठी के सेवन को बताया गया है. चिकित्सकों के मुताबिक मुलेठी का सेवन एसिडिटी के लिए रामबाण इलाज है. तीन चीज़ें हैं महत्वपूर्ण सुल्तानपुर मेडिकल कॉलेज में कार्यरत आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव लोकल 18 से बताते हैं कि इसके लिए हरी करी और बरी यह तीन चीज काफी इंपोर्टेंट होती हैं. इन्हीं तीनों की वजह से लोगों को एसिडिटी की समस्या होती है. जिसमें हरी का मतलब होता है जल्दी-जल्दी खाना खाना क्योंकि जब हम जल्दी-जल्दी खाना खाते हैं तो इससे हमारा पाचन तंत्र खाने को पचाने में अधिक समय लेता है और सही से पचा भी नहीं पाता. वहीं करी का मतलब है मिर्च, मसाला और तली-भुनी हुई चीज का अधिक सेवन करना, ये भी एसिडिटी का कारण बनता है और बरी का मतलब अधिक चिंता करना यानी कि आप अधिक चिंता करते हैं तो भी आपको एसिडिटी हो सकती है. करें यह उपायअगर आपको भी बार-बार एसिडिटी की समस्या आती है तो इसके लिए आप आयुर्वेद के देसी उपाय में मुलेठी का सेवन कर सकते हैं. अगर आप मुलेठी के स्वरस का प्रयोग करते हैं तो यह एसिडिटी के लिए और अधिक फायदेमंद होता है अन्यथा आप मुलेठी के टुकड़े को भी मुंह में रखकर एसिडिटी से छुटकारा पा सकते हैं या फिर आप इसका चूर्ण बनाकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं. अन्य में भी है फायदेमंद मुलेठी का सेवन करने से हमारे शरीर का पाचन तंत्र मजबूत होता है इसके साथ ही एसिडिटी की भी समस्या दूर होती है लेकिन इन सबके अलावा मुलेठी का सेवन हमारे लिए उन चीजों में भी फायदेमंद है जिन लोगों को खांसी आदि की समस्या है. वह लोग भी मुलेठी का सेवन कर सकते हैं और खांसी की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Sultanpur,Uttar Pradesh First Published : April 07, 2026, 10:47 IST

बेहद खास है यह मुरब्बा, गुलाब के फूलों से होता है तैयार, स्वाद के साथ सेहत का है खजाना

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X बेहद खास है यह मुरब्बा, गुलाब के फूलों से होता है तैयार, स्वाद के साथ सेहत भी   Gulkand Murabba Recipe: गुलाब की पंखुड़ियों और चीनी से बनने वाला गुलकंद सिर्फ मीठे पान का स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि गर्मियों में सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. गोरखपुर के प्राणनाथ इलाके में गुलकंद से तैयार होने वाला खास मुरब्बा लोगों के बीच लोकप्रिय है और गर्मियों में इसकी मांग बढ़ जाती है. भारत में इसका सबसे अधिक उपयोग मीठे पान में होता है. जिससे स्वाद बढ़ने के साथ मुंह में ठंडक मिलती है. इसके अलावा गुलकंद से मुरब्बा, शरबत, लस्सी, मिल्कशेक और मिठाइयां भी बनाई जाती है. आयुर्वेद के अनुसार इसकी तासीर ठंडी होती है जो शरीर का तापमान संतुलित रखती है. यह पेट की गर्मी कम करता है. पाचन सुधारता है और एसिडिटी में राहत देता है. नियमित सेवन से कब्ज कम होती है. मुंह की बदबू दूर होती है और शरीर को हल्की ऊर्जा भी मिलती है.

गर्मियों के लिए ब्यूटी टिप्स | Summer Beauty Tips for Dry Lips and Hands

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Last Updated:April 06, 2026, 12:50 IST Beauty Tips: गर्मियों के मौसम में तेज धूप और डिहाइड्रेशन के कारण होंठ फटने और हाथों के रूखेपन की समस्या बढ़ जाती है. नागौर की ब्यूटी एक्सपर्ट के अनुसार, UV किरणें होंठों की नाजुक परत को नुकसान पहुँचाती हैं, जबकि बार-बार साबुन और सैनिटाइजर का उपयोग हाथों की नमी छीन लेता है. इसके बचाव के लिए शहद, गुलाबजल, मलाई और हल्दी जैसे घरेलू उपाय बेहद कारगर हैं. इसके साथ ही शरीर को अंदर से हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त पानी, तरबूज और नारियल पानी का सेवन करना चाहिए. रात में सोने से पहले नारियल तेल या देसी घी का इस्तेमाल होंठों को मुलायम रखता है. एक्सपर्ट की सलाह है कि विटामिन की कमी की जांच कराएं और धूप में निकलते समय SPF युक्त उत्पादों का प्रयोग करें ताकि त्वचा स्वस्थ बनी रहे. तेज पराबैंगनी (UV) किरणें होंठों की नाजुक त्वचा को गहराई से नुकसान पहुँचाती हैं, जिससे उनकी ऊपरी सुरक्षात्मक परत कमजोर हो जाती है. इसके परिणामस्वरूप होंठ न केवल फटने लगते हैं, बल्कि उनमें कालेपन (Pigmentation) की समस्या भी तेजी से बढ़ सकती है. अक्सर लोग सूखेपन से राहत पाने के लिए बार-बार होंठों पर जीभ फेरते हैं, लेकिन यह आदत नमी को और भी कम कर देती है. इसके अलावा, पोषण की कमी भी एक बड़ा कारण है; शरीर में विटामिन बी-12, आयरन, जिंक और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक तत्वों का अभाव इस समस्या को और अधिक गंभीर बना देता है. गर्मियों के मौसम में होंठों का फटना और हाथों का रूखा होना एक आम समस्या है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना कभी-कभी भारी पड़ सकता है. ब्यूटी एक्सपर्ट सोनू कुमावत के अनुसार, तेज धूप, लू और बढ़ता तापमान शरीर की प्राकृतिक नमी को तेजी से सोख लेते हैं. अत्यधिक पसीना निकलने के कारण शरीर डिहाइड्रेट (Dehydrate) हो जाता है, जिसका सबसे पहला और सीधा असर हमारी कोमल त्वचा और होंठों पर दिखाई देता है. इसके परिणामस्वरूप वे न केवल सूखे और खुरदरे हो जाते हैं, बल्कि अपनी स्वाभाविक चमक खोकर बेजान नजर आने लगते हैं. घरेलू उपायों में शहद और गुलाबजल का मिश्रण होंठों के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक मॉइस्चराइजर की तरह काम करता है, जो उन्हें गहराई से हाइड्रेट कर फटे होंठों को जल्दी ठीक करने में मदद करता है. वहीं, हाथों के रूखेपन को दूर करने के लिए दूध की मलाई में चुटकी भर हल्दी मिलाकर मसाज करना बेहद फायदेमंद होता है, क्योंकि यह त्वचा को भीतर से पोषण देकर उसे निखारता है. इसके अतिरिक्त, एलोवेरा जेल, ग्लिसरीन और नींबू का संगम त्वचा की नमी को बरकरार रखने (Hydrate) में अत्यंत प्रभावी माना जाता है, जिससे भीषण गर्मी के बावजूद आपकी त्वचा कोमल, मुलायम और स्वस्थ बनी रहती है. Add News18 as Preferred Source on Google गर्मियों में त्वचा और होंठों के रूखेपन से बचने का सबसे प्रभावी तरीका शरीर को अंदरूनी रूप से हाइड्रेट (Hydrate) रखना है. इसके लिए दिनभर में पर्याप्त पानी पीना अनिवार्य है. अपनी डाइट में नारियल पानी, नींबू पानी, और ताजी छाछ जैसे तरल पदार्थों के साथ-साथ तरबूज, खीरा और ककड़ी जैसे पानी से भरपूर फलों को प्राथमिकता देनी चाहिए. ये खाद्य पदार्थ न केवल भीषण गर्मी में शरीर को भीतर से ठंडक प्रदान करते हैं, बल्कि त्वचा की कोशिकाओं में नमी (Moisture) के स्तर को भी बनाए रखते हैं, जिससे रूखापन प्राकृतिक रूप से कम होने लगता है. ब्यूटी एक्सपर्ट सोनू कुमावत के अनुसार, हाथों के रूखेपन के पीछे कई प्रमुख कारण जिम्मेदार होते हैं. बार-बार साबुन, हैंडवॉश और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने से उनमें मौजूद कड़े केमिकल्स त्वचा की प्राकृतिक नमी (Natural Oils) को पूरी तरह छीन लेते हैं. इसके परिणामस्वरूप, हाथों की त्वचा न केवल खुरदरी और बेजान हो जाती है, बल्कि समय के साथ अपनी चमक भी खो देती है. इसके अतिरिक्त, धूल-मिट्टी और तेज धूप का सीधा संपर्क भी त्वचा की निचली परतों को नुकसान पहुँचाता है, जिससे स्किन अत्यधिक ड्राय और संवेदनशील (Sensitive) हो जाती है. होंठों की कोमल त्वचा की सुरक्षा के लिए दिन में कई बार SPF युक्त लिप बाम का उपयोग करना चाहिए, जो सूरज की हानिकारक यूवी किरणों (UV Rays) से एक रक्षा कवच की तरह काम करता है. रात को सोने से पहले देसी घी, शुद्ध नारियल तेल या ताजी मलाई का प्रयोग होंठों को प्राकृतिक रूप से पोषण देकर उन्हें रातभर में ही मुलायम बना देता है. इसी तरह, हाथों के रूखेपन से बचने के लिए नियमित रूप से माइल्ड मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें और घर से बाहर निकलते समय हाथों पर हल्का सनस्क्रीन लगाना भी बेहद फायदेमंद रहता है, जिससे त्वचा धूप के सीधे प्रभाव से सुरक्षित रहती है.’ First Published : April 06, 2026, 12:50 IST

गर्मी में भूख न लगने की समस्या से हैं परेशान? तो आजमाएं यह घरेलू नुस्खे, जमकर खाने लगेंगे खाना – News18 हिंदी

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X गर्मी में भूख न लगने की समस्या से हैं परेशान? तो आजमाएं यह घरेलू नुस्खे   Health Tips: मौसम में अचानक बदलाव का असर दिनचर्या और सेहत पर साफ दिख रहा है. गर्मी बढ़ते ही भूख कम हो रही है और पाचन संबंधी दिक्कतें बढ़ रही हैं. सर्दियों में जहां लोग भरपेट भोजन करते हैं, वहीं गर्मियों में खाने की इच्छा घट जाती है. ऐसे में नींबू शरबत का सेवन शरीर को ठंडक देने, पाचन सुधारने और भूख बढ़ाने में कारगर माना जा रहा है. सीधी के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि यह नुस्खा पुरानी परंपराओं से जुड़ा हुआ है और दादी-नानी के समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है. अगर इस उपाय को रोजाना अपनाया जाए, तो न सिर्फ पाचन बेहतर होता है बल्कि भूख भी खुलकर लगती है. इसके लिए केवल नींबू, काली मिर्च और नमक की जरूरत होती है. यह नुस्खा बेहद सरल है. एक नींबू को बीच से काट लें और उसमें काली मिर्च पाउडर और थोड़ा सा नमक डाल दें. इसके बाद इसे हल्की आंच पर थोड़ा गर्म करें ताकि इसका रस हल्का गुनगुना हो जाए. फिर इसे धीरे-धीरे चूसकर सेवन करें. यह उपाय गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याओं को दूर करने में काफी असरदार है.

सिर्फ सब्जी नहीं… सेहत का भी स्वाद बढाता है ये जीरा, इम्यूनिटी करेगा बूस्ट और खून की कमी को करेगा दूर

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X रोजाना खाएं सफेद जीरा, इम्यूनिटी बढ़ाए और खून की कमी करे दूर   Benefits of White Cumin: सफेद जीरा रसोई में इस्तेमाल होने वाला सामान्य मसाला है. लेकिन इसके कई औषधीय फायदे भी है. आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. राघवेंद्र चौधरी के अनुसार सफेद जीरा पाचन शक्ति को मजबूत करता है और पेट की गर्मी कम करने में मदद करता है. इसके नियमित सेवन से वजन नियंत्रित रहता है और शरीर की इम्यूनिटी भी बढ़ती है. इसमें आयरन और विटामिन भरपूर मात्रा में होते है जो हीमोग्लोबिन बढ़ाने में सहायक होते है और खून की कमी दूर करने में मदद करते है. यह शरीर से विषैले तत्व निकालने और त्वचा को साफ रखने में भी उपयोगी माना जाता है. सफेद जीरे का सेवन रात में पानी में भिगोकर सुबह पीने, सब्जी में मिलाकर या दही-छाछ में डालकर किया जा सकता है. नियमित और संतुलित उपयोग से यह संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी साबित हो सकता है.