दौसा में सिलिकोसिस का कहर, ऑक्सीजन के सहारे जिंदगी! – News18 हिंदी

X सांसों पर है गहरा संकट: दौसा में सिलिकोसिस का कहर, ऑक्सीजन के सहारे जिंदगी! Silicosis Patient In Dausa District : दौसा जिले से एक ऐसी सच्चाई सामने आ रही है, जो अंदर तक झकझोर देती है. यहां हजारों लोग सिलिकोसिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, लेकिन उनकी पीड़ा अब भी अनसुनी है. यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर को कमजोर कर देती है और जब तक इसका पता चलता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. मानपुर क्षेत्र के एक पीड़ित घनश्याम योगी पिछले चार साल से इस बीमारी से लड़ रहे हैं. हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अब वे पूरी तरह ऑक्सीजन पर निर्भर हैं. परिवार के लिए हर दिन 800 से 1000 रुपये का खर्च उठाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है. उनकी पत्नी बताती हैं कि आर्थिक तंगी के बीच इलाज और ऑक्सीजन की व्यवस्था करना बेहद मुश्किल हो गया है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई मरीजों को अब तक सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाया है. कार्ड न बनने और सहायता न मिलने से हालात और गंभीर हो रहे हैं. यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उन हजारों लोगों की है, जो हर दिन सांस लेने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और राहत की उम्मीद में सिस्टम की ओर देख रहे हैं.
जमीन में नहीं उगती ये जड़ी बूटी, फिर भी शरीर के लिए है रामबाण औषधि, बस जरा संभल कर करें सेवन

X जमीन में नहीं उगती ये जड़ी बूटी, फिर भी शरीर के लिए है रामबाण औषधि Amarbel khane ke fayde: अमरबेल एक अनोखी औषधीय बेल है. जिसे आयुर्वेद में बेहद उपयोगी माना गया है. यह जमीन में नहीं उगती, बल्कि अन्य पौधों पर आश्रित होकर उनसे पोषक तत्व लेकर जीवित रहती है. इसी कारण इसे परजीवी लता भी कहा जाता है. आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार अमरबेल में कई स्वास्थ्य लाभ छिपे है. यह खून को साफ करने, पित्त और कफ को संतुलित करने में मदद करती है. डैंड्रफ और बाल झड़ने की समस्या में तिल के तेल के साथ इसका उपयोग फायदेमंद माना जाता है. वहीं, गैस, एसिडिटी और पाचन से जुड़ी परेशानियों में भी यह राहत देती है. जोड़ों की सूजन में इसकी लताओं को उबालकर लगाने से फायदा मिलता है. इसके अलावा यह हीमोग्लोबिन बढ़ाने में भी सहायक है. जिससे शरीर को मजबूती मिलती है.
आंवला मुरब्बा के फायदे I lakhimpur kheri news

Last Updated:April 13, 2026, 15:43 IST गर्मियों की शुरुआत के साथ आंवला मुरब्बा की मांग बढ़ जाती है, क्योंकि यह शरीर को ठंडक देने के साथ पाचन सुधारने में मदद करता है. विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आंवला मुरब्बा सुबह खाली पेट खाने से कब्ज, एसिडिटी और पेट की गर्मी से राहत मिलती है. यह इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ खांसी-जुकाम में भी फायदेमंद माना जाता है और त्वचा में निखार लाने में सहायक है. लखीमपुर खीरी. गर्मियों का मौसम शुरू होते ही लोग अपने खान-पान को लेकर ज्यादा सजग हो जाते हैं. इस समय ऐसी चीजों की तलाश रहती है जो शरीर को ठंडक पहुंचाए और साथ ही सेहत के लिए भी फायदेमंद हो. यही कारण है कि पारंपरिक देसी खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है, जिनमें मुरब्बा एक खास स्थान रखता है. गर्मियों के मौसम में मुरब्बा की डिमांड अधिक रहती है क्योंकि मुरब्बा हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद पाया जाता है. खीरी जिले के तराई इलाके में आंवला के पौधे अधिक पाए जाते हैं, ऐसे में सर्दियों के मौसम में आंवला आपको बाजारों में मिल जाएगा. वहीं गर्मियों के मौसम में आंवला का मुरब्बा किसी देसी औषधि से कम नहीं है. आंवला में विटामिन सी और एंटी आक्सीडेंट से भरपूर होता है ऐसे में पाचन से लेकर कई बीमारियों के लिए रामबाण माना जाता है. लोकल 18 से बातचीत करते हुए राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की डॉक्टर ऋचा श्रीवास्तव ने बताया कि गर्मियों के मौसम में सुबह खाली पेट मुरब्बा का सेवन करने से कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याओं से आपको राहत मिल जाएगी. पेट साफ ना हो पाने के कारण मुंह में छाले हो जाते हैं, ऐसे में मुरब्बा का सेवन करने से पेट की गर्मी शांत होती है. आंवला का मुरब्बा इम्यूनिटी बूस्टर होता है, जोकि हमारे शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है. बदलते मौसम के कारण खांसी, जुकाम जैसी समस्याओं से भी राहत दिलाता है, सुबह खाली पेट मुरब्बा खाने से त्वचा में निखार आता हैं. मुरब्बा बनाने की रेसिपीआप आसानी से घर पर मुरब्बा बना सकते हैं इसके लिए सबसे पहले आपको आंवला लेना होगा, उसके बाद आंवला को साफ़ पानी से धो लें. फिर आंवला में छेद कर गर्म पानी में उबाल लें. फिर 1 किलो चीनी की चाशनी तैयार कर ले, चाशनी की सफाई के लिए 1 चम्मच दूध डालें और ऊपर आने वाले जांघ को हटा दें. चिपचिपा होने तक उबालें, इसमें आप इलायची पाउडर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. फिर उसके बाद उबले हुए आंवला को चाशनी में डूबा दे. 4 से 5 दिन के लिए आप मुरब्बा को एक सुरक्षित स्थान पर रख दें, इसके बाद आप इसका सेवन कर सकते हैं. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Lakhimpur,Kheri,Uttar Pradesh First Published : April 13, 2026, 15:43 IST
बच्चा रो रहा है बार-बार? हो सकता है वजह डकार न आना, ये टिप्स फॉलो करते ही तुरंत लेगा डकार, नहीं दिखाएगा नखरे

Last Updated:April 13, 2026, 15:35 IST नवजात शिशु की देखभाल में डकार दिलाना एक बेहद अहम हिस्सा है. सही तरीके से डकार दिलाने से बच्चे के पेट में फंसी हवा बाहर निकलती है, जिससे वह ज्यादा आरामदायक महसूस करता है और उसकी सेहत बेहतर रहती है. आइए जानते है कुछ जरूरी टिप्स… अक्सर नई मांओं के लिए यह समझना थोड़ा मुश्किल होता है कि बच्चे को सही तरीके से डकार कैसे दिलाई जाए. इसी वजह से कई बार वे बच्चे के व्यवहार और सेहत में होने वाले बदलावों को ठीक से समझ नहीं पातीं. दरअसल, बच्चे को डकार दिलाना उसकी देखभाल का एक जरूरी हिस्सा है. जब मां को बच्चे की डकार सुनाई देती है, तो उसे एक तरह की तसल्ली मिलती है कि बच्चे ने दूध अच्छे से पिया है और वह आराम में है. लोकल18 से बातचीत में सर्वोदय हॉस्पिटल, सेक्टर-8 के डायरेक्टर और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशील सिंगला बताते हैं कि डकार दिलाना क्यों जरूरी है, यह समझना बेहद अहम है. जब बच्चा दूध पीता है, खासकर बोतल से, तो उसके साथ कुछ मात्रा में हवा भी उसके पेट में चली जाती है. यही हवा बाद में परेशानी की वजह बनती है. जब इस हवा को बाहर निकाला जाता है, तो उसे ही डकार कहा जाता है. अगर बच्चे के पेट में यह हवा फंसी रह जाए, तो उसका पेट फूला-फूला लगने लगता है. इससे बच्चे को पेट दर्द हो सकता है, वह बार-बार रोता है, चिड़चिड़ा हो जाता है और कई बार दूध पीने से भी कतराने लगता है. लेकिन यदि समय पर बच्चे को डकार दिला दी जाए, तो वह न सिर्फ आराम महसूस करता है, बल्कि अच्छे से दूध भी पीता है और उसे नींद भी बेहतर आती है. Add News18 as Preferred Source on Google डॉ. सिंगला के अनुसार, कई बार आपने देखा होगा कि बच्चे को दूध पीने के बाद उल्टी हो जाती है. यह भी उसी हवा के बाहर निकलने का एक तरीका होता है, जिसमें दूध के साथ हवा भी बाहर आ जाती है. खासकर बोतल से दूध पीने वाले बच्चों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है, जबकि मां का दूध पीने वाले बच्चों में यह अपेक्षाकृत कम होती है. बच्चे को डकार दिलाने के कुछ आसान और प्रभावी तरीके भी हैं. आप बच्चे को अपने कंधे से सटा कर उसकी पीठ को हल्के-हल्के थपथपा सकते हैं. इसके अलावा, बच्चे को गोद में सीधा बैठाकर उसकी पीठ पर हल्का दबाव देना भी मददगार होता है. एक और तरीका यह है कि बच्चे को अपनी गोद में पेट के बल लिटाकर उसकी पीठ को धीरे-धीरे सहलाया जाए. इन तरीकों से बच्चे के पेट में फंसी हवा आसानी से बाहर निकल जाती है. डकार का मतलब यही है कि बच्चे के पेट की हवा सहजता से बाहर निकल गई. यह समस्या आमतौर पर 4 से 6 महीने तक के बच्चों में ज्यादा देखने को मिलती है. जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, यह समस्या अपने आप कम हो जाती है और 6 महीने के बाद अक्सर खत्म भी हो जाती है. ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं होती और सामान्य देखभाल से ही यह समस्या संभाली जा सकती है. First Published : April 13, 2026, 15:35 IST
इन चमत्कारी पत्तों का करें सेवन, जड़ से खत्म हो जाएगी पथरी, सेहत के लिए है वरदान, जानिए कैसे करें सेवन? – News18 हिंदी

X इन चमत्कारी पत्तों का करें सेवन, जड़ से खत्म हो जाएगी पथरी, जानिए Patharchatta Ke Fayde: पत्थरचट्टा गुर्दे की पथरी को गलाने में बेहद उपयोगी माना जाता है. वहीं हृदय, त्वचा, मूत्र और पाचन से जुड़ी कई समस्याओं में भी लाभ पहुंचाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये कि इसे घर पर छोटे से गमले में भी आसानी से उगाया जा सकता है, जिससे यह हर घर की घरेलू जड़ी-बूटी बन सकता है. सीधी के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह के अनुसार, पत्थरचट्टा का सबसे प्रमुख उपयोग गुर्दे की पथरी को गलाने में होता है. त्वचा संबंधी समस्याओं में भी यह पौधा काफी असरदार माना गया है. यदि किसी को घाव, सूजन या चोट हो जाए तो इसके पत्तों को कुचलकर रस निकालकर प्रभावित जगह पर लगाने से सूजन कम होती है और घाव जल्दी भरता है. पत्थरचट्टा का उपयोग कई रूपों में किया जा सकता है. इसके रस का 10 से 15 मिलीलीटर सुबह-शाम सेवन किया जा सकता है. चूर्ण के रूप में 1 से 3 ग्राम दिन में दो बार पानी के साथ लिया जा सकता है, जबकि काढ़े के रूप में 20 से 30 मिलीलीटर सुबह और शाम सेवन करना लाभकारी होता है.
बेकार समझे जाने वाला पौधा भी है गुणों से भरपूर, जानें पानी में उगने वाले जलकुंभी के फायदे

X बेकार समझे जाने वाला पौधा भी है गुणों से भरपूर, जानें जलकुंभी के फायदे Watercress Health benefits: जलकुंभी को अक्सर बेकार पौधा समझकर हटा दिया जाता है. लेकिन इसमें कई उपयोगी गुण भी पाए जाते है. आयुष चिकित्सक डॉ. मोहम्मद इकबाल के अनुसार यह पौधा एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है और शरीर से कुछ विषैले तत्व बाहर निकालने में सहायक हो सकता है. यह पानी में मौजूद हानिकारक तत्वों को सोखकर उसे साफ करने में भी मदद करता है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसके पत्तों का लेप फोड़े-फुंसी, सूजन और जोड़ों के दर्द में लगाया जाता है. कुछ लोग इसे उबालकर सब्जी या सूप के रूप में भी उपयोग करते है. हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते है कि प्रदूषित पानी में उगी जलकुंभी नुकसानदायक हो सकती है. इसलिए इसका सेवन सावधानी और सलाह के साथ ही करना चाहिए.
मामूली नहीं है यह फल! आंखों की रोशनी और शुगर के लिए है रामबाण; सिर्फ इतने दिन ही रहेगा उपलब्ध – News18 हिंदी

X मामूली नहीं है यह फल! आंखों की रोशनी और शुगर के लिए है रामबाण Cape Gooseberry Benefits: लौहनगरी के बाजारों में इन दिनों पीले रंग के नन्हे रसभरी (Cape Gooseberry) फल ने धूम मचा रखी है. बिष्टुपुर और साकची जैसे प्रमुख फल बाजारों में इसकी डिमांड इतनी ज्यादा है कि ₹200 प्रति किलो होने के बावजूद यह हाथों-हाथ बिक रहा है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह साल में केवल 40 से 45 दिनों के लिए ही बाजार में नजर आता है. फल विक्रेताओं के अनुसार इस खास फल की खेप विशेष रूप से बिहार से मंगवाई जा रही है. खट्टे-मीठे स्वाद वाली रसभरी में विटामिन A और C की प्रचुर मात्रा होती है. जो आंखों की रोशनी बढ़ाने और इम्यूनिटी को लोहे जैसा मजबूत बनाने में कारगर है. यह फल केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि दवा के रूप में भी पसंद किया जा रहा है. डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए यह रामबाण माना जाता है. साथ ही भीषण गर्मी में यह शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाकर त्वचा पर प्राकृतिक निखार लाता है. अगर आप भी इसका स्वाद चखना चाहते हैं, तो जल्दी करें, क्योंकि इसका सीजन जल्द ही खत्म होने वाला है.
किचन से लौंग-लहसुन आउट, सौंफ-इलायची इन! बुजुर्गों को लू से बचाएंगे आयुर्वेद के ये नुस्खे, जानिए – News18 हिंदी

X किचन से लौंग-लहसुन आउट, सौंफ-इलायची इन! बुजुर्गों को लू से बचाएंगे ये नुस्खे Ayurvedic Summer Health Tips For Elderly: भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच बुजुर्गों की सेहत को लेकर आयुर्वेद विशेषज्ञों ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है. आयुर्वेद के जानकार शिव कुमार पांडे के अनुसार बढ़ती उम्र में पाचन और सहनशक्ति कमजोर होने के कारण बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन, चक्कर और बीपी की समस्या तेजी से बढ़ती है. गर्मी से बचाव के लिए खान-पान में बड़े बदलाव की आवश्यकता है. विशेषज्ञों ने रसोई से गर्म तासीर वाले मसालों (लौंग, लहसुन, जायफल) को हटाकर जीरा, सौंफ और छोटी इलायची के प्रयोग पर जोर दिया है. साथ ही, बिना तेल या कम तेल में बनी सुपाच्य सब्जियों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है. बुजुर्गों को हाइड्रेटेड रखने के लिए तरबूज, खीरा और ककड़ी जैसे फलों के साथ सुबह चने और जौ का सत्तू देना संजीवनी समान है. दोपहर 12 से 3 बजे के बीच बाहर निकलने से परहेज, सूती कपड़ों का चयन और नियमित अंतराल पर नींबू पानी या छाछ का सेवन उन्हें लू के गंभीर दुष्प्रभावों से बचा सकता है.
सुबह खाली पेट खाएं ये 3 चीजें, दिनभर रहेंगे फिट और एनर्जेटिक – News18 हिंदी

X Health Tips: सुबह खाली पेट खाएं ये 3 चीजें, दिनभर रहेंगे फिट और एनर्जेटिक Benefits of Eating Moong, Peanuts, and Raisins: “आरोग्यं परमं भाग्यं” की परंपरा को ध्यान में रखते हुए आज भी कुछ प्राकृतिक चीजें सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती हैं. सुल्तानपुर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एसबी सिंह के अनुसार सुबह खाली पेट मूंग, मूंगफली और किशमिश का सेवन शरीर के लिए बहुत लाभकारी है. अंकुरित मूंग पाचन तंत्र मजबूत करती है, ऊर्जा देती है और ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में मदद करती है. वहीं किशमिश आयरन से भरपूर होती है, जो खून की कमी दूर कर हीमोग्लोबिन बढ़ाती है और कब्ज से राहत देती है. मूंगफली प्रोटीन और हेल्दी फैट का अच्छा स्रोत है. जो मांसपेशियों को मजबूत बनाकर लंबे समय तक ऊर्जा देता है. इन तीनों का नियमित सेवन शरीर को एक्टिव, स्वस्थ और फिट रखने का आसान व सस्ता उपाय है.
मोबाइल-लैपटॉप के कारण बढ़ रहा गर्दन-कमर दर्द; डॉ. हेमंत जैन की सलाह, ऐसे पाएं दर्द से छुटकारा – News18 हिंदी

X मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल दे रहा है उम्र भर का दर्द; जानें बचाव Neck and Back Pain Tips by Dr. Hemant Jain: जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल के डॉ. हेमंत जैन ने मोबाइल और लैपटॉप के बढ़ते उपयोग से होने वाले गर्दन और कमर दर्द के प्रति चेतावनी दी है. उन्होंने बताया कि गलत पॉस्चर और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं. डॉ. जैन ने सलाह दी है कि काम के दौरान नियमित ब्रेक लें, सही पॉस्चर बनाए रखें और सुबह-शाम हल्का व्यायाम जरूर करें. उनके अनुसार, तकनीक के युग में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित एक्सरसाइज और सही तरीके से बैठने की आदत डालना बहुत जरूरी है.








