Monday, 31 Aug 2026 | 07:19 PM

Trending :

परीक्षा परिणाम का तनाव और बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य | Child Depression Symptoms & Expert Advice

authorimg

Last Updated:

Child Depression Symptoms & Expert Advice: राजस्थान में बोर्ड परीक्षा परिणामों के बाद बच्चों में बढ़ते आत्महत्या के मामलों ने समाज को झकझोर दिया है. पाली की हालिया घटना के संदर्भ में मनोचिकित्सक डॉ. संजय गहलोत ने माता-पिता को विशेष सलाह दी है. उनका कहना है कि बच्चों के साथ दोस्त जैसा व्यवहार करना और उनके साथ समय बिताना बहुत जरूरी है. आज के दौर में माता-पिता की व्यस्तता और बच्चों से संवाद की कमी उन्हें डिप्रेशन की ओर धकेल रही है. बच्चों की तुलना दूसरों से करना और उन पर ऊंचे अंकों का दबाव बनाना उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए घातक है. डॉ. गहलोत के अनुसार, माता-पिता को बच्चों को यह विश्वास दिलाना चाहिए कि कोई भी परीक्षा जीवन से बड़ी नहीं है.

ख़बरें फटाफट

Child Depression Symptoms & Expert Advice: एक माता-पिता के लिए दुनिया का सबसे खौफनाक मंजर क्या हो सकता है? शायद वह, जब उन्हें अपने जिगर के टुकड़े की ‘खून से सनी देह’ देखनी पड़े या मासूम को ‘फंदे’ से झूलता देखना पड़े. यह सोचने मात्र से दिल दहल जाता है, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि ‘परीक्षा का परिणाम’ अब बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ने लगा है. हाल ही में पाली में 10वीं के रिजल्ट के बाद एक छात्र द्वारा डिप्रेशन में आकर उठाया गया खौफनाक कदम इसी ओर इशारा करता है. सवाल यह है कि क्या इस मासूम को बचाया जा सकता था? जवाब है-हाँ. अगर माता-पिता समय रहते अपने बच्चे के बदलते हाव-भाव और उसकी ‘खामोश चीख’ को सुन लेते, तो शायद आज वह हमारे बीच होता.

लोकल-18 से खास बातचीत में राजस्थान के जाने-माने मनोचिकित्सक डॉ. संजय गहलोत ने कहा कि यह ऐसी स्थितियां हैं जिन्हें समय रहते भांप लिया जाए तो अनहोनी को रोका जा सकता है. अक्सर माता-पिता चाहते हैं कि जो वे स्वयं जीवन में नहीं कर पाए, वह उनका बच्चा करे. इसके कारण बच्चे भारी दबाव महसूस करते हैं. डॉ. गहलोत के अनुसार, बच्चों के व्यवहार में बदलाव अचानक नहीं होता. इसके पीछे कई कारण होते हैं. यदि माता-पिता जागरूक हैं और बच्चों के साथ पर्याप्त समय व्यतीत करते हैं, तो बच्चा अपनी हर छोटी-बड़ी परेशानी पहले अपने परिवार को बताता है. आज के व्यस्त दौर में माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद कम हो गया है, जिससे बच्चे घर में खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं.

इम्तिहान जिंदगी का आखिरी मकसद नहीं
डॉ. संजय गहलोत सलाह देते हैं कि बच्चों को यह समझाना बेहद जरूरी है कि इम्तिहान जिंदगी का आखिरी मकसद नहीं है. परीक्षाएं और पढ़ाई जीवन का एक हिस्सा मात्र हैं. केवल 10वीं और 12वीं की परीक्षा ही भविष्य तय नहीं करती, यह तो बस शुरुआत है. कई बार परिवार का आपसी कलह और माता-पिता के बीच अनबन भी बच्चे को मानसिक रूप से तोड़ देती है. ऐसी स्थिति में बच्चा अपनी बात कहने से डरता है. उसे लगता है कि यदि नंबर अच्छे नहीं आए या वह फेल हो गया, तो वह माता-पिता को क्या मुंह दिखाएगा. माता-पिता द्वारा बच्चों के सामने बहुत ऊंचे आदर्श रख देना और दूसरे बच्चों से उनकी निरंतर तुलना करना डिप्रेशन का सबसे बड़ा कारण बनता है.

स्कूल और शिक्षकों की भी अहम जिम्मेदारी
सिर्फ घर ही नहीं, स्कूल का वातावरण भी बच्चों पर गहरा प्रभाव डालता है. अच्छे रिजल्ट और स्कूल की रैंकिंग के लिए बच्चों पर अतिरिक्त दबाव डाला जाता है. डॉ. गहलोत का मानना है कि स्कूलों को भी बच्चों की मनोस्थिति समझते हुए काम करना चाहिए. शिक्षकों को चाहिए कि वे बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों को नोटिस करें. यदि कोई बच्चा अचानक शांत रहने लगे, अकेला महसूस करे या पढ़ाई से कतराने लगे, तो उसे तुरंत सहायता और परामर्श दिया जाना चाहिए. समय रहते पहचान और सहयोग ही बच्चों को मौत के मुंह से बाहर निकाल सकता है.

About the Author

vicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
विदिशा प्रशासन ने रुकवाए दो बाल विवाह:14 और 17 साल की बच्चियों की शादी टली, दबाव के बीच टीम की सख्ती से बचा भविष्य

April 17, 2026/
4:33 pm

विदिशा जिले के ग्यारसपुर क्षेत्र के ग्राम मोहनपुर में दो नाबालिग बालिकाओं का बाल विवाह रुकवाया गया। प्रशासन और एक...

Salman Khan Extortion Threat Case

August 25, 2026/
7:49 pm

4 मिनट पहले कॉपी लिंक मुंबई पुलिस ने एक्टर सलमान खान को दी गई रंगदारी की धमकी मामले में फर्जी...

Trump claimed the earlier trade measures had brought in “hundreds of billions of dollars” in revenue. (Image: Reuters/File)

February 12, 2026/
12:36 am

आखरी अपडेट:फ़रवरी 12, 2026, 00:36 IST कांग्रेस नेता राहुल गांधी केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और अश्विनी वैष्णव के पास गए,...

अजित पवार की मौत के बाद पार्टी हथियाने की कोशिश:भतीजे रोहित का दावा- प्रफुल्ल पटेल समेत तीन नेताओं ने EC को लेटर लिखा था

March 26, 2026/
3:23 am

एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने दावा किया कि अजित पवार की मौत के बाद प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे...

वरुण धवन ने पैर छूकर गोविंदा का लिया आशीर्वाद:गले भी लगे, डेविड धवन को भी संभालते दिखे; देखें वीडियो

June 5, 2026/
10:00 am

फिल्म प्रोड्यूसर और पूर्व CBFC सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) अध्यक्ष पहलाज निहलानी के अंतिम संस्कार के दौरान वरुण धवन...

IPL 2026 Playoff Scenarios Update; DC Vs KKR

May 9, 2026/
5:15 am

स्पोर्ट्स डेस्क12 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली कैपिटल्स को IPL 2026 में 7वीं हार मिली। शुक्रवार को कोलकाता नाइट राइडर्स...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

परीक्षा परिणाम का तनाव और बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य | Child Depression Symptoms & Expert Advice

authorimg

Last Updated:

Child Depression Symptoms & Expert Advice: राजस्थान में बोर्ड परीक्षा परिणामों के बाद बच्चों में बढ़ते आत्महत्या के मामलों ने समाज को झकझोर दिया है. पाली की हालिया घटना के संदर्भ में मनोचिकित्सक डॉ. संजय गहलोत ने माता-पिता को विशेष सलाह दी है. उनका कहना है कि बच्चों के साथ दोस्त जैसा व्यवहार करना और उनके साथ समय बिताना बहुत जरूरी है. आज के दौर में माता-पिता की व्यस्तता और बच्चों से संवाद की कमी उन्हें डिप्रेशन की ओर धकेल रही है. बच्चों की तुलना दूसरों से करना और उन पर ऊंचे अंकों का दबाव बनाना उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए घातक है. डॉ. गहलोत के अनुसार, माता-पिता को बच्चों को यह विश्वास दिलाना चाहिए कि कोई भी परीक्षा जीवन से बड़ी नहीं है.

ख़बरें फटाफट

Child Depression Symptoms & Expert Advice: एक माता-पिता के लिए दुनिया का सबसे खौफनाक मंजर क्या हो सकता है? शायद वह, जब उन्हें अपने जिगर के टुकड़े की ‘खून से सनी देह’ देखनी पड़े या मासूम को ‘फंदे’ से झूलता देखना पड़े. यह सोचने मात्र से दिल दहल जाता है, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि ‘परीक्षा का परिणाम’ अब बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ने लगा है. हाल ही में पाली में 10वीं के रिजल्ट के बाद एक छात्र द्वारा डिप्रेशन में आकर उठाया गया खौफनाक कदम इसी ओर इशारा करता है. सवाल यह है कि क्या इस मासूम को बचाया जा सकता था? जवाब है-हाँ. अगर माता-पिता समय रहते अपने बच्चे के बदलते हाव-भाव और उसकी ‘खामोश चीख’ को सुन लेते, तो शायद आज वह हमारे बीच होता.

लोकल-18 से खास बातचीत में राजस्थान के जाने-माने मनोचिकित्सक डॉ. संजय गहलोत ने कहा कि यह ऐसी स्थितियां हैं जिन्हें समय रहते भांप लिया जाए तो अनहोनी को रोका जा सकता है. अक्सर माता-पिता चाहते हैं कि जो वे स्वयं जीवन में नहीं कर पाए, वह उनका बच्चा करे. इसके कारण बच्चे भारी दबाव महसूस करते हैं. डॉ. गहलोत के अनुसार, बच्चों के व्यवहार में बदलाव अचानक नहीं होता. इसके पीछे कई कारण होते हैं. यदि माता-पिता जागरूक हैं और बच्चों के साथ पर्याप्त समय व्यतीत करते हैं, तो बच्चा अपनी हर छोटी-बड़ी परेशानी पहले अपने परिवार को बताता है. आज के व्यस्त दौर में माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद कम हो गया है, जिससे बच्चे घर में खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं.

इम्तिहान जिंदगी का आखिरी मकसद नहीं
डॉ. संजय गहलोत सलाह देते हैं कि बच्चों को यह समझाना बेहद जरूरी है कि इम्तिहान जिंदगी का आखिरी मकसद नहीं है. परीक्षाएं और पढ़ाई जीवन का एक हिस्सा मात्र हैं. केवल 10वीं और 12वीं की परीक्षा ही भविष्य तय नहीं करती, यह तो बस शुरुआत है. कई बार परिवार का आपसी कलह और माता-पिता के बीच अनबन भी बच्चे को मानसिक रूप से तोड़ देती है. ऐसी स्थिति में बच्चा अपनी बात कहने से डरता है. उसे लगता है कि यदि नंबर अच्छे नहीं आए या वह फेल हो गया, तो वह माता-पिता को क्या मुंह दिखाएगा. माता-पिता द्वारा बच्चों के सामने बहुत ऊंचे आदर्श रख देना और दूसरे बच्चों से उनकी निरंतर तुलना करना डिप्रेशन का सबसे बड़ा कारण बनता है.

स्कूल और शिक्षकों की भी अहम जिम्मेदारी
सिर्फ घर ही नहीं, स्कूल का वातावरण भी बच्चों पर गहरा प्रभाव डालता है. अच्छे रिजल्ट और स्कूल की रैंकिंग के लिए बच्चों पर अतिरिक्त दबाव डाला जाता है. डॉ. गहलोत का मानना है कि स्कूलों को भी बच्चों की मनोस्थिति समझते हुए काम करना चाहिए. शिक्षकों को चाहिए कि वे बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों को नोटिस करें. यदि कोई बच्चा अचानक शांत रहने लगे, अकेला महसूस करे या पढ़ाई से कतराने लगे, तो उसे तुरंत सहायता और परामर्श दिया जाना चाहिए. समय रहते पहचान और सहयोग ही बच्चों को मौत के मुंह से बाहर निकाल सकता है.

About the Author

vicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.