Nifty 50 Up 23,450; Media & IT Stocks Rally

मुंबई7 मिनट पहले कॉपी लिंक आज यानी शुक्रवार, 5 जून को सेंसेक्स 150 अंक (0.23%) की तेजी के साथ 74,500 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 50 अंकों (0.18%) की तेजी है, ये 23,450 के स्तर पर आ गया है। आज के कारोबार में मीडिया और आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी है। एशियाई बाजारों में गिरावट इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज कोस्पी (साउथ कोरिया) 8299 -362 -3.96% निक्केई (जापान) 66384 -809 -1.61% हैंगसेंग (हॉन्गकॉन्ग) 25060 -193 -0.78% अमेरिकी बाजारों में कल तेजी रही इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज डाउ जोन्स 51562 875 1.73% नैस्डैक 26831 -23 -0.09% S&P 500 7584 31 0.41% विदेशी निवेशकों ने कल 4 हजार करोड़ के शेयर बेचे कैटेगरी लेटेस्ट बीते 7 दिन बीते 30 दिन DII 4,360 24,800 93,265 FII/FPI -4,447 -22,338 -71,681 नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल सेंसेक्स 14 अंक चढ़कर 74,360 पर बंद हुआ था दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Nifty 50 Up 23,450; Media & IT Stocks Rally

मुंबई39 मिनट पहले कॉपी लिंक आज यानी शुक्रवार, 5 जून को सेंसेक्स 150 अंक (0.23%) की तेजी के साथ 74,500 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 50 अंकों (0.18%) की तेजी है, ये 23,450 के स्तर पर आ गया है। आज के कारोबार में मीडिया और आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी है। एशियाई बाजारों में गिरावट इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज कोस्पी (साउथ कोरिया) 8299 -362 -3.96% निक्केई (जापान) 66384 -809 -1.61% हैंगसेंग (हॉन्गकॉन्ग) 25060 -193 -0.78% अमेरिकी बाजारों में कल तेजी रही इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज डाउ जोन्स 51562 875 1.73% नैस्डैक 26831 -23 -0.09% S&P 500 7584 31 0.41% विदेशी निवेशकों ने कल 4 हजार करोड़ के शेयर बेचे कैटेगरी लेटेस्ट बीते 7 दिन बीते 30 दिन DII 4,360 24,800 93,265 FII/FPI -4,447 -22,338 -71,681 नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल सेंसेक्स 14 अंक चढ़कर 74,360 पर बंद हुआ था दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Delhi Building Fire: Safety Lapses Highlighted by World Media

5 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली के एक होटल में आज आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई। इनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे। हादसे के बाद 40 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। बेसमेंट से भी 6 से ज्यादा लोगों को निकाला गया है। पीएम मोदी ने हादसे पर शोक जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। अभी तक हादसे की वजह पता नहीं चल पाई है। ब्रिटेन से लेकर जर्मनी तक दुनिया भर का मीडिया इस घटना को प्रमुखता से कवर कर रहा है। पढ़िया वर्ल्ड मीडिया का रिएक्शन… कतर मीडिया- अल जजीरा दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में बुधवार को एक बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हो गए। यह आग उस इमारत में लगी, जिसके निचले हिस्से में एक रेस्तरां था और ऊपर होटल चल रहा था। आग लगते ही इमारत में धुआं भर गया और कई लोग अंदर फंस गए। दमकल की आठ गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। पुलिस के मुताबिक 40 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ लोग जान बचाने के लिए खिड़कियों पर आ गए थे और मदद के लिए चिल्ला रहे थे। आसपास के लोगों ने भी राहत कार्य में मदद की और कई घायलों को एम्बुलेंस आने से पहले सुरक्षित जगह पर पहुंचाया। भारत में आग लगने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। कई इमारतों में सुरक्षा के जरूरी इंतजाम पूरे नहीं होते, इसलिए जब आग लगती है तो बड़ा नुकसान होता है और लोगों की जान भी चली जाती है। ब्रिटिश मीडिया- BBC दक्षिण दिल्ली इमारत में लगी आग से मरने वालों में कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जो इलाज के लिए भारत आए थे। यह इमारत एक गेस्ट हाउस (बेड एंड ब्रेकफास्ट) की तरह इस्तेमाल की जा रही थी, जहां पास के प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा रहे मरीज और उनके परिवार वाले रुकते थे। हालांकि आग लगने के समय इमारत में कुल कितने लोग मौजूद थे, यह अभी साफ नहीं है। एक दमकल अधिकारी ने बताया कि आग को काफी जल्दी कंट्रोल कर लिया गया था और अब इमारत पुलिस को सौंप दी गई है। दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने कहा कि जांच की जा रही है कि इमारत को गेस्ट हाउस के तौर पर इस्तेमाल की इजाजत थी या नहीं। अगर किसी तरह की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग बहुत तेजी से फैली, जिससे ऊपरी मंजिलों पर मौजूद लोग फंस गए। कई लोगों ने जान बचाने के लिए दूसरी और तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी। स्थानीय लोगों ने सड़क पर गद्दे बिछाकर लोगों को कूदने में मदद की और कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। भारत में आग लगने की ऐसी घटनाएं अक्सर सामने आती हैं। जांच रिपोर्टों में कई बार खराब बिजली व्यवस्था, सुरक्षा नियमों की अनदेखी और तय इस्तेमाल से अलग तरीके से चल रही इमारतों को ऐसे हादसों की बड़ी वजह बताया गया है। स्पेनिश मीडिया- एल पाइस दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में बुधवार को भीषण आग लग गई। अधिकारियों के मुताबिक, आग लगने की सूचना दमकल विभाग को देर से मिली। प्रशासन का कहना है कि आग की शुरुआत होटल की निचली मंजिल पर चल रहे रेस्तरां से हुई होगी। हालांकि आग लगने की असली वजह का अभी पता नहीं चल पाया है और जांच जारी है। मरने वालों में सेंट्रल एशिया और अफ्रीका के कई नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। ये लोग भारत में इलाज या अन्य काम से आए हुए थे। घटना की तस्वीरों और वीडियो में होटल से उठता घना धुआं और आग की ऊंची लपटें दिखाई दे रही हैं। कुछ लोग जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से कूदते हुए भी नजर आए। दिल्ली दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहरों में से एक है। घनी आबादी, संकरी गलियां और कई पुरानी इमारतों में सुरक्षा मानकों की कमी के कारण आग जैसी घटनाएं अक्सर गंभीर रूप ले लेती हैं। जर्मन मीडिया- DW न्यूज दक्षिण दिल्ली के होटल में आग लग गई, इसके बेसमेंट में एक रेस्तरां और ऊपर होटल था। आग लगने के बाद पूरे होटल में धुआं भर गया और कई लोग अंदर फंस गए। पुलिस के मुताबिक, दमकल की 8 गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान 40 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया। प्रशासन का कहना है कि आग लगने की वजह अभी साफ नहीं है, लेकिन शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि हो सकता है कि रेस्तरां की वजह से आग लगी होगी। लोकल मीडिया के मुताबिक, मरने वालों में कुछ विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। ये लोग इलाज के लिए भारत आए हुए थे। ब्रिटिश मीडिया- द सन दक्षिण दिल्ली के होटल में आग इतनी तेजी से फैली कि ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोगों को जान बचाने के लिए खिड़कियों और बालकनियों से कूदना पड़ा। आसपास के लोगों ने सड़क पर गद्दे बिछा दिए, जिससे कुछ लोगों की जान बच गई। दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। अधिकारियों के अनुसार, इमारत की निचली मंजिल पर एक रेस्तरां चल रहा था। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि आग वहीं से शुरू हुई होगी, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में इमारत से निकलती आग की ऊंची लपटें और घना धुआं दिखाई दे रहा है। एक वीडियो में एक महिला आग से बचने के लिए पहली मंजिल से छलांग लगाती भी नजर आई। अधिकारियों ने बताया कि मृतकों की पहचान की जा रही है। बांग्लादेशी मीडिया- डेली स्टार दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में बुधवार सुबह एक गेस्ट हाउस में भीषण आग लगने से कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई। पुलिस के
Delhi Building Fire: Safety Lapses Highlighted by World Media

21 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली के मालवीय नगर में बुधवार सुबह फ्लरिश स्टे होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई। इनमें ज्यादातर विदेशी नागरिक भी शामिल थे। हादसे के बाद 40 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। बेसमेंट से भी 6 से ज्यादा लोगों को निकाला गया है। पीएम मोदी ने हादसे पर शोक जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजन को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। अभी तक हादसे की वजह पता नहीं चल पाई है। ब्रिटेन से लेकर जर्मनी तक दुनियाभर का मीडिया इस घटना को प्रमुखता से कवर कर रहा है। पढ़िया वर्ल्ड मीडिया का रिएक्शन… कतर के अल जजीरा ने लिखा- भारत में आग की घटनाएं अक्सर होती हैं दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में आग जिस इमारत में लगी, जिसके निचले हिस्से में एक रेस्तरां था और ऊपर होटल चल रहा था। आग लगते ही इमारत में धुआं भर गया और कई लोग अंदर फंस गए। दमकल की आठ गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। पुलिस के मुताबिक 40 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ लोग जान बचाने के लिए खिड़कियों पर आ गए थे और मदद के लिए चिल्ला रहे थे। आसपास के लोगों ने भी राहत कार्य में मदद की और कई घायलों को एम्बुलेंस आने से पहले सुरक्षित जगह पर पहुंचाया। भारत में आग लगने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। कई इमारतों में सुरक्षा के जरूरी इंतजाम पूरे नहीं होते, इसलिए जब आग लगती है तो बड़ा नुकसान होता है और लोगों की जान भी चली जाती है। ब्रिटिश मीडिया BBC ने लिखा- मरने वाले विदेशी इलाज के लिए भारत आए थे दक्षिण दिल्ली इमारत में लगी आग से मरने वालों में कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जो इलाज के लिए भारत आए थे। यह इमारत एक गेस्ट हाउस (बेड एंड ब्रेकफास्ट) की तरह इस्तेमाल की जा रही थी, जहां पास के प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा रहे मरीज और उनके परिवार वाले रुकते थे। हालांकि आग लगने के समय इमारत में कुल कितने लोग मौजूद थे, यह अभी साफ नहीं है। एक दमकल अधिकारी ने बताया कि आग को काफी जल्दी कंट्रोल कर लिया गया था और अब इमारत पुलिस को सौंप दी गई है। दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने कहा कि जांच की जा रही है कि इमारत को गेस्ट हाउस के तौर पर इस्तेमाल की इजाजत थी या नहीं। अगर किसी तरह की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग बहुत तेजी से फैली, जिससे ऊपरी मंजिलों पर मौजूद लोग फंस गए। कई लोगों ने जान बचाने के लिए दूसरी और तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी। स्थानीय लोगों ने सड़क पर गद्दे बिछाकर लोगों को कूदने में मदद की और कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। भारत में आग लगने की ऐसी घटनाएं अक्सर सामने आती हैं। जांच रिपोर्ट्स में कई बार खराब बिजली व्यवस्था, सुरक्षा नियमों की अनदेखी और तय इस्तेमाल से अलग तरीके से चल रही इमारतों को ऐसे हादसों की बड़ी वजह बताया गया है। स्पेनिश मीडिया एल पाइस ने लिखा- दमकल विभाग को आग की सूचना देर से मिली दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में बुधवार को भीषण आग लग गई। अधिकारियों के मुताबिक, आग लगने की सूचना दमकल विभाग को देर से मिली। प्रशासन का कहना है कि आग की शुरुआत होटल की निचली मंजिल पर चल रहे रेस्तरां से हुई होगी। हालांकि आग लगने की असली वजह का अभी पता नहीं चल पाया है और जांच जारी है। मरने वालों में सेंट्रल एशिया और अफ्रीका के कई नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। ये लोग भारत में इलाज या अन्य काम से आए हुए थे। घटना की तस्वीरों और वीडियो में होटल से उठता घना धुआं और आग की ऊंची लपटें दिखाई दे रही हैं। कुछ लोग जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से कूदते हुए भी नजर आए। दिल्ली दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहरों में से एक है। घनी आबादी, संकरी गलियां और कई पुरानी इमारतों में सुरक्षा मानकों की कमी के कारण आग जैसी घटनाएं अक्सर गंभीर रूप ले लेती हैं। जर्मनी के DW न्यूज ने रेस्तरां की वजह से आग की आशंका जताई दक्षिण दिल्ली के होटल में आग लग गई, इसके बेसमेंट में एक रेस्तरां और ऊपर होटल था। आग लगने के बाद पूरे होटल में धुआं भर गया और कई लोग अंदर फंस गए। पुलिस के मुताबिक, दमकल की 8 गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान 40 से ज्यादा लोगों बचाया गया। प्रशासन का कहना है कि आग लगने की वजह अभी साफ नहीं है, लेकिन शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि हो सकता है कि रेस्तरां की वजह से आग लगी होगी। लोकल मीडिया के मुताबिक, मरने वालों में कुछ विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। ये लोग इलाज के लिए भारत आए हुए थे। ब्रिटिश मीडिया द सन ने लिखा- लोगों को जान बचाने खिड़कियों से कूदना पड़ा दक्षिण दिल्ली के होटल में आग इतनी तेजी से फैली कि ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोगों को जान बचाने के लिए खिड़कियों और बालकनियों से कूदना पड़ा। आसपास के लोगों ने सड़क पर गद्दे बिछा दिए, जिससे कुछ लोगों की जान बच गई। दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। अधिकारियों के अनुसार, इमारत की निचली मंजिल पर एक रेस्तरां चल रहा था। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि आग वहीं से शुरू हुई होगी, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में इमारत से निकलती आग की ऊंची लपटें और घना धुआं दिखाई दे रहा है। एक वीडियो में एक महिला आग से बचने के लिए पहली मंजिल से छलांग लगाती भी नजर आई। अधिकारियों ने बताया कि मृतकों की पहचान की जा रही है। बांग्लादेश के डेली स्टार ने लिखा- कई
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Last Updated:May 21, 2026, 19:31 IST Social Media Mental Health Impact: डिजिटल दुनिया की चकाचौंध भारतीय युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रही है. मशहूर डॉक्टर संजीव बगई ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया की लत के चलते युवाओं में डिप्रेशन, एंग्जायटी और अनिद्रा जैसी गंभीर समस्याएं पैर पसार रही हैं. साथ ही आपसी रिश्तों में भी कड़वाहट आ रही है. इस संकट से निपटने के लिए उन्होंने सरकार से सोशल मीडिया इस्तेमाल की उम्र सीमा तय करने और सख्त गाइडलाइंस बनाने की मांग की है. इसके साथ ही उन्होंने जोर दिया कि बच्चों को इस चक्रव्यूह से निकालने में माता-पिता और स्कूलों को आगे आना होगा. दिल्ली: भारत में युवाओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. डिप्रेशन, एंग्जायटी और क्रॉनिक स्ट्रेस जैसी परेशानियां अब केवल उदासी या मूड स्विंग्स तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि युवाओं की सेहत, पढ़ाई, रिश्तों और भविष्य पर गहरा असर डाल रही हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की वजह क्या है. इसी सवाल का जवाब जानने के लिए हमने बात की डॉ.संजीव बगई से. उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बताया. सोशल मीडिया की लत बन रही बड़ी समस्याडॉ. संजीव बगई के मुताबिक, किशोर, युवा और खासकर युवा महिलाएं सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा समय बिता रही हैं. उन्होंने बताया कि कई अंतरराष्ट्रीय स्टडीज में सामने आया है कि 80% से ज्यादा किशोर सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. भारत में भी स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाली बड़ी आबादी इस लत का शिकार बनती जा रही है. डॉक्टर के अनुसार, सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल दिमाग में डोपामाइन (Dopamine) का तेज उछाल पैदा करता है. जिसे हैप्पी हार्मोन कहा जाता है. यही वजह है कि बार-बार फोन चेक करने और रील्स देखने की आदत बन जाती है. दिमाग और दिल दोनों पर पड़ रहा असरडॉ. बगई ने बताया कि जरूरत से ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से दिमाग और शरीर दोनों प्रभावित होते हैं. खासकर रात में सोने से पहले घंटों तक मोबाइल चलाना सबसे ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है.उनके मुताबिक, इससे एंग्जायटी और पैनिक अटैक बढ़ सकते हैं याददाश्त कमजोर हो सकती है पढ़ाई और ध्यान लगाने की क्षमता कम हो सकती है नींद का पैटर्न बिगड़ सकता है लोगों से बातचीत और रिश्तों में दूरी बढ़ सकती है लगातार खराब नींद से शरीर में कॉर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है, जो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को नुकसान पहुंचाता है. रील्स की दुनिया में बच्चे खो रहे असली दुनियाडॉ. संजीव बगई का मानना है कि कम उम्र में बच्चे सोशल मीडिया के जरिए एक अवास्तविक दुनिया Unreal World में जीने लगते हैं. लाइक्स, फॉलोअर्स और वायरल होने की दौड़ बच्चों पर मानसिक दबाव बनाती है. इससे वे अपने असली लक्ष्य, करियर और सामाजिक जिम्मेदारियों से भटक सकते हैं.उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी के लिए यह समझना जरूरी है कि जिंदगी सिर्फ रील्स, पोस्ट और लाइक्स तक सीमित नहीं है. भारत में उम्र सीमा तय करने की वकालतडॉ. बगई ने कई देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ देशों में किशोरों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल पर उम्र सीमा तय की गई है. उनका मानना है कि भारत में भी 15–16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कुछ प्रतिबंध या सख्त नियम होने चाहिए, ताकि बच्चों के मानसिक विकास पर नकारात्मक असर कम हो. माता-पिता और स्कूल की अहम भूमिकाडॉ. बगई ने कहा कि केवल सरकार ही नहीं, बल्कि माता-पिता और स्कूलों की भी बड़ी जिम्मेदारी है. अभिभावकों को बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए और सही मूल्य सिखाने चाहिए. वहीं स्कूलों में सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों पर अलग अध्याय पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि बच्चे शुरुआत से ही इसके फायदे और नुकसान समझ सकें. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : East Delhi,Delhi
CJI सूर्यकांत ने कॅाकरोच वाले बयान पर सफाई दी:कहा- मेरा बयान गलत तरीके से पेश किया गया, मैंने फर्जी डिग्रीधारियों की आलोचना की

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को अपनी पैरासाइट और कॅाकरोच वाली टिप्पणी पर सफाई दी। उन्होनें कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने मेरी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया। उन्होंने कहा, ‘उनकी टिप्पणी खास तौर पर उन लोगों के लिए थी, जो फर्जी और नकली डिग्रियों के सहारे वकालत जैसे पेशों में आ गए हैं। मीडिया, सोशल मीडिया और दूसरे सम्मानित पेशों में भी ऐसे लोग घुस आए हैं। वे परजीवियों जैसे हैं।’ दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि चीफ जस्टिस ने 15 मई को एक मामले की सुनवाई करते हुए देश के बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवियों से की थी। CJI सूर्यकांत की बेंच ने वकील को फटकार लगाई यह मामला 15 मई का है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच वकील संजय दुबे की दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता सीनियर वकील का दर्जा पाना चाहता था। जस्टिस बागची ने सवाल किया कि क्या सीनियर एडवोकेट का टैग सिर्फ एक स्टेटस सिंबल है या न्याय व्यवस्था में भागीदारी का एक जरिया। CJI सूर्यकांत ने तब कहा कि कॉकरोच की तरह बहुत से युवा ऐसे हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। वे सोशल मीडिया और RTI एक्टिविज्म बन रहे हैं। हजारों लोग ऐसे हैं जो काले चोगे पहनकर घूम रहे हैं, लेकिन उनकी डिग्रियों पर गंभीर संदेह है। बेंच ने यह भी कहा कि दुनिया में हर कोई सीनियर बनने के योग्य हो सकता है, लेकिन आप इसके हकदार नहीं हैं। अगर आपको दिल्ली हाईकोर्ट ने सीनियर एडवोकेट बना भी दिया, तो सुप्रीम कोर्ट आपके व्यवहार को देखते हुए उस फैसले को रद्द कर देगा। ——————————————— ये खबर भी पढ़ें… MP हाईकोर्ट ने धार भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना:अयोध्या केस को फैसले का आधार बनाया; मुस्लिमों को नमाज की इजाजत देने का आदेश खारिज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है। शुक्रवार को दिए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा- हमने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों, एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर विचार किया है। ASI एक्ट के प्रावधानों के साथ-साथ अयोध्या मामले को भी आधार माना। पूरी खबर पढ़ें
CJI सूर्यकांत ने कॅाकरोच वाले बयान पर सफाई दी:कहा- मेरा बयान गलत तरीके से पेश किया गया, मैंने फर्जी डिग्रीधारियों की आलोचना की

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को अपनी पैरासाइट और कॅाकरोच वाली टिप्पणी पर सफाई दी। उन्होनें कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने मेरी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया। उन्होंने कहा, ‘उनकी टिप्पणी खास तौर पर उन लोगों के लिए थी, जो फर्जी और नकली डिग्रियों के सहारे वकालत जैसे पेशों में आ गए हैं। मीडिया, सोशल मीडिया और दूसरे सम्मानित पेशों में भी ऐसे लोग घुस आए हैं। वे परजीवियों जैसे हैं।’ दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि चीफ जस्टिस ने 15 मई को एक मामले की सुनवाई करते हुए देश के बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवियों से की थी। CJI सूर्यकांत की बेंच ने वकील को फटकार लगाई यह मामला 15 मई का है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच वकील संजय दुबे की दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता सीनियर वकील का दर्जा पाना चाहता था। जस्टिस बागची ने सवाल किया कि क्या सीनियर एडवोकेट का टैग सिर्फ एक स्टेटस सिंबल है या न्याय व्यवस्था में भागीदारी का एक जरिया। CJI सूर्यकांत ने तब कहा कि कॉकरोच की तरह बहुत से युवा ऐसे हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। वे सोशल मीडिया और RTI एक्टिविज्म बन रहे हैं। हजारों लोग ऐसे हैं जो काले चोगे पहनकर घूम रहे हैं, लेकिन उनकी डिग्रियों पर गंभीर संदेह है। बेंच ने यह भी कहा कि दुनिया में हर कोई सीनियर बनने के योग्य हो सकता है, लेकिन आप इसके हकदार नहीं हैं। अगर आपको दिल्ली हाईकोर्ट ने सीनियर एडवोकेट बना भी दिया, तो सुप्रीम कोर्ट आपके व्यवहार को देखते हुए उस फैसले को रद्द कर देगा। ——————————————— सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट स्टाफ को 2 दिन का वर्क फ्रॉम होम:जज कार पूलिंग करके कोर्ट जाएंगे; मोदी की ईंधन बचाने की अपील पर फैसला PM मोदी की ईंधन बचत की अपील पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने वर्किंग को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। अब कोर्ट के हर विभाग का स्टाफ दो दिन वर्क फ्रॉम होम पर रहेगा। सभी जज कार पूल करेंगे। रजिस्ट्री से जुड़ा 50 फीसदी स्टाफ भी घर से काम करेगा। सोमवार, शुक्रवार और मिसलेनियस डे ( जो दिन पहले से तय नहीं होते) पर लिस्ट मामलों की सुनवाई केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी। इसके अलावा कोर्ट के अन्य वर्किंग डे में भी सुनवाई ऑनलाइन ही की जाएगी। पूरी खबर पढ़ें
Funny Memes Flood Social Media

6 मिनट पहले कॉपी लिंक NEET UG 2026 रीएग्जाम अब 21 जून को आयोजित किया जाएगा। शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जानकारी दी है कि एग्जाम के एडमिट कार्ड 14 जून तक जारी होंगे। किसी भी कैंडिडेट को इसके लिए वापस से रजिस्टर या एग्जाम फीस नहीं देना होगा। दोबारा से सभी के लिए एडमिट कार्ड जारी होगा। कैंडिडेट्स को पिछले सेंटर ही एलॉट होंगे। शिक्षामंत्री के ऐलान के साथ ही सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई है। NEET के एग्जाम कैंसिलेशन पर ये मीम खूब शेयर हो रहे ————————— ये खबर भी पढ़ें… NEET पेपर लीक- ‘गेस पेपर’ बनाकर 10 राज्यों में बेचा:120+ सवाल हूबहू मिले, परीक्षा से 3 सप्ताह पहले माफियाओं के पास पहुंचा पेपर देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-2026) के रद्द होने के पीछे की असली कहानी सामने आ गई है। भास्कर को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से जुड़ा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Bengal Govt Accuses BJP Social Media Weapon

नई दिल्ली/कोलकाता4 मिनट पहले कॉपी लिंक कोलकाता में 8 जनवरी को I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर ED रेड के दौरान ममता पहुंच गई थीं। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ ED की याचिका पर सुनवाई जारी है। ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें पेश कीं। बंगाल सरकार की ओर से सीनियर एडवोक्ट मेनका गुरुस्वामी पेश हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक राजनीतिक पार्टी कोर्ट की कार्यवाही को सोशल मीडिया पर हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कोर्ट से इस पर रोक लगाने की मांग की। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने ED की रेड के बीच CM ममता बनर्जी के दखल को गलत बताया था। कोर्ट ने कहा- यह राज्य और केंद्र के बीच का विवाद नहीं है। किसी भी राज्य का सीएम ऐसा करता है तो यह लोकतंत्र को खतरे में डालना है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Bengal Govt Accuses BJP Social Media Weapon

नई दिल्ली/कोलकाता14 मिनट पहले कॉपी लिंक कोलकाता में 8 जनवरी को I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर ED रेड के दौरान ममता पहुंच गई थीं। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन I-PAC रेड मामले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ ED की याचिका पर सुनवाई जारी है। ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें पेश कीं। बंगाल सरकार की ओर से सीनियर एडवोक्ट मेनका गुरुस्वामी पेश हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक राजनीतिक पार्टी कोर्ट की कार्यवाही को सोशल मीडिया पर हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कोर्ट से इस पर रोक लगाने की मांग की। जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कल कहा था कि जब कोई मुख्यमंत्री किसी केंद्रीय एजेंसी की चल रही जांच में दखल देता है, तो इसे केंद्र और राज्य सरकार के बीच का विवाद नहीं कहा जा सकता। दरअसल 8 जनवरी को ED ने कोलकाता स्थित पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और दफ्तर पर छापा मारा था। इस दौरान ममता वहां पहुंचीं और कुछ फाइलें लेकर चली गईं। इसके बाद ED जांच में बाधा डालने के आरोप में ममता और बंगाल पुलिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची। ममता की 4 दलीलें ममता की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील रखी। उन्होंने कहा- ED को जांच करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। यह सिर्फ उनका काम है, अधिकार नहीं। ED का अधिकारी जब काम कर रहा है, तो वह सिर्फ ‘सरकारी कर्मचारी’ है। वह अपने विभाग से अलग किसी अधिकार का दावा नहीं कर सकता। ED ने कहा कि उनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ। ऐसा नहीं है, क्योंकि अधिकारी सिर्फ ड्यूटी निभा रहा है, मौलिक अधिकार का सवाल ही नहीं उठता। ईडी खुद एक ताकतवर एजेंसी है वह खुद को ‘जनता का रक्षक’ बताकर कोर्ट में नहीं आ सकती। सुप्रीम कोर्ट के 4 कमेंट यह असल में किसी एक व्यक्ति का काम है। इसे पूरे सिस्टम या लोकतंत्र का विवाद बताना सही नहीं। संविधान बनाते समय किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक मुख्यमंत्री किसी जांच एजेंसी के दफ्तर में पहुंच जाएगा। सिर्फ कानूनी सिद्धांत से काम नहीं चलेगा। हमें जमीन की हकीकत भी देखनी होगी। संविधान की व्याख्या समय के साथ बदलती रहती है। हर नए हालात में कोर्ट को नए सिरे से सोचना पड़ता है। ऐसे समझें… तृणमूल के लिए I-PAC इतनी जरूरी क्यों 2021 के चुनाव में: ममता के लिए I-PAC ने रणनीति बनाई। उन्होंने फर्म को संगठन का काम दिया। प्रत्याशी चयन, बूथ लेवल मैनेजमेंट, भाषण, सोशल पोस्ट, पोस्टर, नारे सब कुछ I-PAC ही कर रही थी। इस चुनाव में: टीएमसी डेटा पर फोकस कर रही है। 2021 विस और 2024 लोकसभा चुनाव के बूथ स्तरीय आंकड़ों का विश्लेषण I-PAC ने ही किया। हर सीट को 3 कैटेगरी में बांटा: मजबूत, कमजोर और लो वोट मार्जिन। 15 हजार तक मार्जिन की सीटें चुनीं। टीम एसआईआर को भी ट्रैक कर रही है: पार्टी का मानना है कि वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम हटने से गणित बिगड़ सकता है, इसलिए शैडो एजेंट्स लाए गए। ये एजेंट्स नाम कटने वाले वोटरों तक पहुंचे: उनसे फार्म भरवाए, री-एंट्री करवाई। बीएलओ को ट्रैक करना, वोटर लिस्ट की गड़बड़ी पकड़ना, फील्ड से रियल टाइम इनपुट देना, ये काम शैडो एजेंट्स ही कर रहे थे। हर सीट पर अलग वॉर रूम है: जहां 20 सदस्यीय टीम काम करती है। छोटी बैठकें अरेंज करती है। I-PAC रेड मामला : 2,742 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग केस I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी है। यह राजनीतिक दलों के लिए बड़े स्तर पर चुनावी अभियानों का काम करती है। कंपनी और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन पर करोड़ों रुपए के कोयला चोरी घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। CBI ने इस मामले में 27 नवंबर 2020 को FIR दर्ज की थी। पूरा मामला ₹2,742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। आरोप है कि ₹20 करोड़ हवाला के जरिए I-PAC तक ट्रांसफर हुए। ED ने 28 नवंबर 2020 को इसकी जांच शुरू की थी। 8 जनवरी 2026 को ED ने कोलकाता में I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापा मारा था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…







