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भगवान भी खुश, भक्त भी हेल्दी…ये पत्ता इतना चमत्कारी, शरीर के तीनों दोषों का दुश्मन, चबाते ही तुरंत राहत – Uttar Pradesh News

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Last Updated:February 24, 2026, 20:48 IST बेलपत्र भोलेनाथ का प्रिय है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि बेलपत्र हमारे शरीर के लिए भी जादुई है, खासकर पाचन, मधुमेह और इम्युनिटी के लिए. लोकल 18 से बात करते हुए सुल्तानपुर के आयुष चिकित्सक डॉ. हर्ष बताते हैं कि सुबह खाली पेट 2-3 ताजी पत्तियां चबाने से कब्ज, पेट के कीड़े, दस्त और एसिडिटी दूर होती है, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. यह ब्लड शुगर, उच्च रक्तचाप (BP) और हृदय स्वास्थ्य को भी नियंत्रित करता है. डॉ. हर्ष कहते हैं कि बेलपत्र शरीर के तीन दोषों वात, पित्त और कफ तीनों को शांत करता है. सहारनपुर. बेलपत्र भगवान शिव का प्रिया माना जाता है. इसे शिवलिंग के ऊपर जलाभिषेक के दौरान चढ़ाया जाता है. बेलपत्र मानव शरीर के लिए भी चमत्कारी है. बेल के पौधे पर आने वाला फल भी हमारे पेट के लिए रामबाण हैं. ये शरीर को ठंडक पहुंचाते हैं. बेल के पत्ते भी रामबाण से कम नहीं हैं. बेलपत्र से कई आयुर्वेदिक दवाइयां भी बनाई जाती हैं. अगर आपको बेल का फल नहीं मिल रहा तो बेलपत्र से भी शरीर को ठंडक पहुंचा सकते हैं. इससे पेट की समस्या से तुरंत छुटकारा मिलता है. बेलपत्र मधुमेह नियंत्रण और इम्युनिटी बढ़ाने में भी काम आता है. लोकल 18 से बात करते हुए सुल्तानपुर के आयास आयुर्वेदिक चिकित्सालय से बीएएमएस/ एमडी डॉ. हर्ष बताते हैं कि बेलपत्र ब्लड शुगर, उच्च रक्तचाप (BP) और हृदय स्वास्थ्य को भी ठीक रखता है. बेलपत्र से बनी हुई कई आयुर्वेदिक दवाइयां मार्केट में उपलब्ध हैं. घर पर भी इससे दवा बना सकते हैं. सुबह खाली पेट 2-3 ताजी पत्तियां चबाने से कब्ज, पेट के कीड़े, दस्त और एसिडिटी दूर होती है. इसके पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. इसमें भी फायदा डॉ. हर्ष के मुताबिक, बेलपत्र शरीर के तीन दोषों वात, पित्त और कफ तीनों का शमन करता है. गर्मी में डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है, बेलपत्र इससे बचाता है. हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए भी बेलपत्र का सेवन लाभदायक है. जिनका लिपिड प्रोफाइल गड़बड़ हो जाता है, कोलेस्ट्रॉल लेवल मेंटेन नहीं रहता, उनके लिए भी बेलपत्र रामबाण है. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Saharanpur,Uttar Pradesh First Published : February 24, 2026, 20:48 IST

प्राकृतिक दवाओं की खान है गूलर! जड़ से तने तक हर हिस्सा औषधि, रोगों का रामबाण इलाज – Madhya Pradesh News

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Last Updated:February 24, 2026, 11:06 IST Health News: पेट खराब होने पर गूलर के पके फल खाने से राहत मिलती है, वहीं कच्चे फल शुगर मरीजों के लिए लाभकारी बताए गए हैं. इसकी छाल को जलाकर बनाई गई राख को कंजई या सरसों के तेल में मिलाकर पाइल्स के उपचार में इस्तेमाल किया जाता है. सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र की वादियों में कई ऐसी औषधीय वनस्पतियां पाई जाती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं. इन्हीं में से एक है गूलर का पेड़, जिसे आयुर्वेद में अत्यंत उपयोगी माना गया है. ग्रामीण इलाकों में आज भी गूलर का इस्तेमाल दादी-नानी के पारंपरिक नुस्खों में किया जाता है. इस पेड़ के फल, पत्ते, छाल और जड़ सभी औषधीय गुणों से भरपूर बताए जाते हैं. सीधी के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ विपिन सिंह के अनुसार, कोरोना काल के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए गूलर का विशेष रूप से उपयोग किया गया था. गूलर के पत्तों, फलों और तने का सेवन कई प्रकार की बीमारियों में लाभकारी साबित होता है. आयुर्वेद में इसे अंजीर के समान गुणकारी माना गया है. डॉ सिंह बताते हैं कि गूलर की शाखाएं मोटी होती हैं और इसके पत्ते दिल के आकार और खुरदरी सतह वाले होते हैं. इसके फल लगभग 2 से 3 सेंटीमीटर व्यास के होते हैं, जो पकने पर हरे से पीले या लाल रंग में बदल जाते हैं. इस पेड़ पर सालभर फूल और फल लगते हैं, हालांकि जुलाई से दिसंबर के बीच इसकी पैदावार अधिक होती है. इसके पके फलों का सेवन शरीर को ताकत देता है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में सहायक माना जाता है. गूलर के पके फल खाने से मिलेगी राहतपेट खराब होने पर गूलर के पके फल खाने से राहत मिलती है जबकि कच्चे फल मधुमेह रोगियों के लिए लाभकारी बताए गए हैं. इसकी छाल को जलाकर बनाई गई राख को सरसों या कंजई के तेल में मिलाकर पाइल्स के उपचार में उपयोग किया जाता है. पेड़ से निकलने वाला दूध चर्म रोग, दाद और फंगल संक्रमण में भी कारगर माना जाता है. इसके अलावा गूलर की छाल से तैयार काढ़ा फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों, गले की खराश और सूजन में लाभ पहुंचाता है. इसकी पत्तियां पीलिया में उपयोगी बताई गई हैं जबकि जड़ों में रेचक और कृमिनाशक गुण पाए जाते हैं. इस तरह गूलर केवल छाया देने वाला वृक्ष नहीं बल्कि आयुर्वेदिक दृष्टि से एक संपूर्ण औषधि है. गूलर का पौधा लगाना भी आसान घर में गूलर का पौधा लगाना भी आसान है. इसके लिए 8-10 इंच का गमला लेकर उसमें गोबर की खाद, बालू और बगीचे की मिट्टी बराबर मात्रा में मिलाएं. फिर गूलर की ताजी डाली या छोटा पौधा रोपकर हल्का पानी दें. इसे ऐसी जगह रखें, जहां सीधी धूप कम आती हो और नियमित रूप से नमी बनाए रखें. समय-समय पर जैविक खाद डालते रहने से पौधा तेजी से बढ़ता है और कुछ वर्षों में फल देने लगता है. धार्मिक दृष्टि से भी यह पौधा शुभ माना जाता है. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. Location : Sidhi,Madhya Pradesh First Published : February 24, 2026, 11:06 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

andhra pradesh vs bihar police : IPS Sunil Nayak Arrest | कौन है यह IPS अधिकारी, जिसको लेकर आंध्र प्रदेश और बिहार में शुरू हो गया ‘ऐलान-ऐ-जंग’, कौन गलत कौन सही?

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पटना. बिहार कैडर के 2005 बैच के आईपीएस अधिकारी सुनील नायक की गिरफ्तारी को लेकर आंध्र प्रदेश और बिहार आमने-सामने आ गए हैं. बिहार की राजधानी पटना में सोमवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आंध्र प्रदेश पुलिस की एक विशेष टीम ने बिहार फायर सर्विस विभाग के आईजी सुनील नायक के आवास पर छापेमारी की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया. यह गिरफ्तारी साल 2021 के एक पुराने मामले से जुड़ी है, जिसमें आरोप है कि तत्कालीन सीआईडी में तैनाती के दौरान सुनील नायक ने टीडीपी के वरिष्ठ नेता और वर्तमान विधानसभा उपाध्यक्ष के. रघुरमा कृष्ण राजू को हिरासत के दौरान बुरी तरह प्रताड़ित किया था. सोमवार को आंध्र प्रदेश पुलिस ने आईजी सुनील नायक को आईपीसी की धारा 307 हत्या के प्रयास के मामले में गिरफ्तार किया था. लेकिन पटना सिविल कोर्ट ने आंध्र प्रदेश पुलिस की दलील को मानने से इंकार करते हुए नायक को ट्रांजिट रिमांड नामंजूर कर दिया. ऐसे में बड़ा सवाल आंध्र प्रदेश पुलिस इतनी जल्दबाजी में एक आईपीएस अधिकारी पर एक्शन क्यों लिया? क्यों नायक की गिरफ्तारी से पहले उन्हें सूचना नहीं दी गई? क्या यह मामला राजनीति से प्रेरित है? क्या एक आईपीएस अधिकारी की गिरफ्तारी से पहले केंद्र सरकार को सूचना दी गई थी? दरअसल आंध्रप्रदेश पुलिस ने जिस अंदाज में सोमवार को पटना पहुंचकर फायर विभाग के आईजी सुनील कुमार नायक को गिरफ्तार किया था, उस तरीके को कोर्ट ने गलत करार दिया है. कोर्ट ने आईजी सुनील कुमार नायक की गिरफ्तारी को ही अवैध ठहरा दिया है. कोर्ट ने आंध्र प्रदेश पुलिस की ट्रांजिट रिमांड याचिका को खारिज कर दिया है. ट्रांजिट रिमांड के लिए आंध्र प्रदेश पुलिस ने आवेदन किया था, लेकिन आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं किए जाने के कारण पटना सिविल कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया. क्या है रघुरमा कृष्ण राजू मामला? यह मामला मई 2021 का है, जब आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी की सरकार थी. उस समय रघुरमा कृष्ण राजू वाईएसआर कांग्रेस के सांसद थे, लेकिन उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था. सीआईडी ने उन्हें देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया था. नायक उस समय आंध्र प्रदेश में सीआईडी में तैनात थे. राजू का आरोप है कि हिरासत के दौरान पुलिस ने उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया और उनके पैरों के तलवों पर लाठियों से प्रहार किया. नायक के वकील का दावा नायक के वकील का दावा है कि साल 2024 में आंध्र प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद राजू ने प्रतिनियुक्ति पर आए सुनील नायक सहित कई अधिकारियों और पूर्व मुख्यमंत्री जगन रेड्डी के खिलाफ हत्या के प्रयास और हिरासत में प्रताड़ना का केस दर्ज करा दिया. क्योंकि राजू अब टीडीपी में हैं औऱ विधानसभा के उपाध्यक्ष हैं. राज्य में चंद्रबाबू नायडु की सरकार है और एनडीए में होने के कारण उनका नीतीश कुमार से साथ भी रिश्ता अच्छा है. ऐसे में यह मामला राजनीतिक पुर्वाग्रह से ग्रस्त नजर आ रहा है. आईपीएस को लेकर बिहार और आंध्र प्रदेश में टकराव सुनील नायक 2005 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. प्रतिनियुक्ति खत्म होने के बाद वे वापस अपने मूल कैडर बिहार लौट आए थे. आंध्र पुलिस की इस अचानक कार्रवाई से बिहार पुलिस महकमे में नाराजगी देखी गई. छापेमारी के दौरान पटना के स्थानीय पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद थे, लेकिन बिहार पुलिस के कई आला अधिकारियों का मानना है कि एक सीनियर आईपीएस के खिलाफ ऐसी कार्रवाई के लिए प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया. नायक के वकील ने आंध्र प्रदेश पुलिस पर राजनीतिक द्वेष के तहत काम करने का आरोप लगाया है. वकील का तर्क है कि नायक को केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने उस समय अपनी ड्यूटी निभाई थी. गिरफ्तारी से पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही बिहार सरकार से आवश्यक अनुमति ली गई. वकील ने आरोप लगाया कि आंध्र पुलिस ने नायक के साथ अपराधी जैसा व्यवहार किया, जो एक सेवारत आईजी रैंक के अधिकारी की गरिमा के खिलाफ है.

मशरूम है सेहत का सुपरफूड! दिल, डायबिटीज और वजन कंट्रोल में फायदेमंद, जानें एक्सपर्ट की राय – Uttar Pradesh News

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रायबरेली. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग सेहतमंद रहने के लिए अपने खानपान पर विशेष ध्यान दे रहे हैं. ऐसे में मशरूम एक ऐसा सुपरफूड बनकर उभरा है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी ख्याल रखता है. पोषक तत्वों से भरपूर मशरूम का नियमित सेवन शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाने में मददगार साबित हो सकता है. रायबरेली के आयुष चिकित्सा विशेषज्ञ गौरव कुमार ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि मशरूम में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन बी, विटामिन डी, आयरन, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. खास बात यह है कि इसमें कैलोरी और फैट बहुत कम होता है, जिससे यह वजन नियंत्रित रखने वालों के लिए बेहतरीन विकल्प माना जाता है. मशरूम मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है. हृदय रोगों से बचाव में कारगरगौरव कुमार के मुताबिक, मशरूम हृदय संबंधी बीमारियों से बचाव में अहम भूमिका निभाता है. इसमें मौजूद फाइबर और पोटैशियम रक्तचाप को संतुलित रखने में मदद करते हैं, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. इसके अलावा, मशरूम में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होते हैं. डायबिटीज और हड्डियों के लिए फायदेमंदमशरूम डायबिटीज के मरीजों के लिए भी लाभकारी माना जाता है. इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम और फाइबर अधिक होता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रखने में मदद मिलती है. साथ ही, विटामिन डी की मौजूदगी हड्डियों को मजबूत बनाती है और जोड़ों के दर्द में राहत दिलाने में सहायक हो सकती है. त्वचा और बालों के लिए भी लाभकारीमशरूम में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और समय से पहले बूढ़ा होने के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं. इसके पोषक तत्व बालों को मजबूत और चमकदार बनाने में भी सहायक हैं. ऐसे करें सेवनविशेषज्ञों के अनुसार, मशरूम को सब्जी, सूप, सलाद या स्नैक्स के रूप में डाइट में शामिल किया जा सकता है. हालांकि, इसे हमेशा ताजा और साफ-सुथरे तरीके से पकाकर ही सेवन करना चाहिए, ताकि इसके पोषक तत्वों का पूरा लाभ मिल सके.

पेट और ब्रेन के तनाव को दूर करता है त्रिफला चूर्ण! आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बताए फायदे, घर पर बनाने का तरीका – Madhya Pradesh News

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Last Updated:February 22, 2026, 16:48 IST Triphala Powder Making Mehtod: कब्ज दूर करने के अलावा, आयुर्वेद में कई रोगों को दूर करने के लिए सबसे अधिक त्रिफला चूर्ण का प्रयोग होता है. इसे घर पर बनाना भी आसान है. तो आइए मध्य प्रदेश रीवा में स्थित आयुर्वेदिक हॉस्पिटल के डॉक्टर से जानते हैं त्रिफला के फायदे और इसे तैयार करने की विधि… Health Tips: आयुर्वेद में सबसे अधिक जिस हर्बल का प्रयोग होता है, वह है त्रिफला चूर्ण. यह मुख्य रूप से तीन प्रकार की जड़ी-बूटियों से मिल कर तैयार होता है. यह कई प्रकार के रोगों को दूर कर शरीर को स्वस्थ बनाता है, इसलिए आयुर्वेद में सबसे अधिक त्रिफला चूर्ण का ही प्रयोग होता है. रीवा आयुर्वेद हॉस्पिटल के चिकित्सक डाॅ. अरविंद त्रिपाठी ने बताया कि इस चूर्ण पर सबसे अधिक रिसर्च हुए हैं. इसे घर पर भी बनाया जा सकता है. आइए जानते हैं कि त्रिफला चूर्ण के फायदे और घर पर तैयार करने की विधि… त्रिफला चूर्ण के तत्वत्रिफला चूर्ण को पॉली हर्बल भी कहा जाता है. इसमें आंवला, बहेड़ा और हडरा (हरितकी) को शामिल किया जाता है. इसमें कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, मिनरल्स, सोडियम, आहार फाइबर के अलावा शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट गैलिक एसिड, चेबुलजिक एसिड भी पाए जाते हैं. बायोएक्टिव फ्लेवोनोइड्स जैसे कि क्वेरसेटिन और ल्यूटोलिन, सैपोनिन्स, एंथ्राक्विनोन, अमीनो एसिड, फैटी एसिड भी पाए जाते हैं. इसमें एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी, गैस्ट्रिक हाइपरएसिडिटी में कमी, एंटीपायरेटिक, एनाल्जेसिक, एंटी बैक्टीरियल, एंटीमुटाजेनिक गुण पाए जाते हैं. इसमें हाइपोग्लाइसेमिक, एंटीकैंसर, हेपेटोप्रोटेक्टिव, केमोप्रोटेक्टिव, रेडियोप्रोटेक्टिव भी पाए जाते हैं. कितना फायदेमंद त्रिफला चूर्णडॉक्टर के अनुसार, त्रिफला भोजन के उचित पाचन और अवशोषण को भी बढ़ावा दे सकता है. सीरम कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर सकता है. परिसंचरण में सुधार कर सकता है. पित्त नलिकाओं को शिथिल कर सकता है. यह होमियोस्टैसिस को बनाए रख सकता है. त्रिफला गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्वास्थ्य में उपयोग के लिए सबसे प्रसिद्ध है. त्रिफला के जलीय और अल्कोहल-आधारित दोनों अर्क दस्त को रोकते हैं. तनाव कम करता है पशु अध्ययनों से पता चला है कि त्रिफला ठंड से प्रेरित तनाव से बचाता है. तनाव से प्रेरित व्यवहार परिवर्तन और जैव रासायनिक परिवर्तन जैसे कि लिपिड पेरोक्सीडेशन और कॉर्टिकोस्टेरोन के स्तर में वृद्धि करता है. इसके एंटीऑक्सिडेंट गुण तनाव को कम करने में सक्षम हैं. डायबिटीज में भी फायदेमंदएक पशु अध्ययन में त्रिफला को 10 सप्ताह के लिए मोटापे से ग्रस्त चूहों को दिया गया. इससे शरीर में वसा का संचयन, वजन कम हुआ. इससे कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स और कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल को भी कम किया गया. शुगर की दवा के साथ त्रिफला का सेवन फास्टिंग ब्लड शुगर और फास्टिंग सीरम इंसुलिन का लेवल भी कम हो गया. इस विधि से तैयार करें त्रिफला चूर्ण आयुर्वेद विशेषज्ञ के अनुसार, त्रिफला चूर्ण बनाने के लिए तीन तरह की जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है. ये हैं हरड़, बहेड़ा और आंवला. इसे बनाने के लिए 1 भाग हरड़, 2 भाग बहेड़ा और 3 भाग आंवला लें. चूर्ण बनाने के लिए यह जरूरी है कि इन तीनों को खूब सुखाया जाए. सूखने के बाद आप आसानी से इनमें मौजूद गुठली को निकाल कर अलग कर सकती हैं. अब ये तीनों सामग्री चूर्ण बनने के लिए तैयार हैं. अब इन तीनों को खूब बारीक पीसकर उसका चूर्ण बना लें. लीजिए आपका त्रिफला चूर्ण तैयार हो गया है. इस चूर्ण को एयर टाइट कंटेनर में रख लें. रोज रात में सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण लें. सुबह इसका सेवन कर रहे हैं तो शहद के साथ ले सकते हैं. About the Author Rishi mishra एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें Location : Rewa,Madhya Pradesh First Published : February 22, 2026, 16:48 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

uttar pradesh Prayagraj Ashutosh-brahmachari-sexual-abuse-allegations-avimukteshwaranand FIR Jhunsi thana update video

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प्रयागराजकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के मामले FIR दर्ज कर ली गई है। प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज FIR में शंकराचार्य के शिष्य मुकुंदानंद का भी नाम है। झूंसी थाना प्रभारी महेश मिश्रा के मुताबिक, 2-3 अज्ञात के खिलाफ भी पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। दरअसल, प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने शनिवार को FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने कोर्ट में 2 बच्चों को पेश करके गंभीर आरोप लगाए थे। कोर्ट में कैमरे के सामने बच्चों के बयान दर्ज हुए थे। स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया की कोर्ट ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर की जांच रिपोर्ट के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात पर केस दर्ज करने के आदेश जारी किए थे। इससे पहले अदालत ने 13 फरवरी को अपना आदेश रिजर्व रखा था। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने बताया- हम दर-दर भटक रहे थे। पुलिस के पास जा रहे थे। हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। इसलिए न्याय के मंदिर में आए। आज लगा कि न्याय अभी जिंदा है। न्यायालय ने हमें आज न्याय दिया। मैं अब साफ-साफ कहना चाहता हूं कि शिष्यों के साथ यौन शोषण और समलैंगिक अपराध किया गया। इसकी पुष्टि न्यायालय ने कर दी है। अदालत ने माना- शंकराचार्य और उनके शिष्य पर गंभीर आरोप कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया। कहा, हर मामले में FIR दर्ज करना अनिवार्य नहीं होता। मजिस्ट्रेट को अपने विवेक से तय करना होता है कि FIR का निर्देश दिया जाए या शिकायत के रूप में आगे बढ़ाया जाए। यदि मामले में पुलिस जांच जरूरी हो, तो FIR दर्ज कर जांच करना उचित होता है। कोर्ट ने कहा, आरोप गंभीर और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं और पॉक्सो अधिनियम लागू होता है। साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस जांच आवश्यक है। केवल निजी शिकायत के रूप में मामला आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। जज ने आदेश दिया कि संबंधित थाना प्रभारी तत्काल FIR दर्ज करें। कानून के अनुसार स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करें। पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों का पालन किया जाए। पीड़ितों की पहचान और गरिमा की रक्षा की जाए। जांच रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए। शंकराचार्य बोले- रामभद्राचार्य ने अपने चेले से मुकदमा कराया शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। कहा- झूठा केस सच्चा थोड़ी हो जाएगा। कोर्ट के फैसले के बाद शंकराचार्य ने कहा- यौन शोषण का केस फर्जी साबित होगा। ये बनाया हुआ मामला है। वह (आशुतोष महाराज) रामभद्राचार्य का एक चेला है। हिस्ट्रीशीटर है। उसने पहले भी लोगों के ऊपर झूठे केस किए हैं। वह लोगों को धमकाता है, धन उगाही करता है। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- रामभद्राचार्य से हम लोगों का वाकयुद्ध चलता रहता है। यह तो सभी लोग जानते ही हैं। उन्होंने हमारे ऊपर अपने चेले को आगे करके फर्जी मुकदमा करवाया है। वो चाहते हैं कि सरकार के खिलाफ गोमाता की रक्षा की आवाज हम नहीं उठाएं। इसलिए हमारे ऊपर यह सब हो रहा है। शंकराचार्य ने कहा- न्यायालय का एक प्रोसिजर है, उसका हम सहयोग करेंगे। इसके बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। हमको पछतावा तब होता, जब हम कुछ इस तरह के होते। जब हम ऐसे हैं ही नहीं, तब क्या? बनावटी केस तो बनावटी ही रहने वाला है। इसलिए हम चाहते हैं कि जल्दी से जल्दी जांच हो जाए। पुलिस सरकार के अंडर में ही काम करती है। सीएम योगी सदन में खड़े होकर जब हमारे खिलाफ बोलते हैं, तो इसलिए नहीं बोलते कि उनको बोलना है। वह पुलिस को मैसेज देते हैं कि ये करना है। उन्होंने शीश महल के आरोपों पर कहा- यह खुला मठ है। इसमें 100-200 लोग रहते है। हर कोई आता-जाता रहता है। आशुतोष ब्रह्मचारी का डिप्टी सीएम और अखिलेश यादव को चैलेंज आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा- अखिलेश यादव और डिप्टी सीएम से कहना चाहता हूं कि मेरे साथ पैदल यात्रा में चलिए। विद्यामठ, बनारस जा रहा हूं, जहां शंकराचार्य रंगरलियां मनाते हैं। पंचम तल दिखाना चाहता हूं, जहां पर इनका शीश महल है। वहां इनकी सखियां रहती हैं, जिनका नाम भी पता है। आज से मेरी पैदल यात्रा चलेगी। हम न्याय के लिए दर-दर लोगों के बीच में जाएंगे। लोगों को ऐसे पद पर नहीं बैठना चाहिए। ये लोग जेल के अंदर होने चाहिए। इसलिए हम लोग आज से यात्रा शुरू कर रहे हैं। 8 फरवरी को कोर्ट में की थी शिकायत जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगाया है। उन्होंने 8 फरवरी को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में वाद (शिकायत) दायर की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि गुरुकुल की आड़ में वह बाल उत्पीड़न करते हैं। शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज शनिवार को वकीलों के साथ कोर्ट पहुंचे। कोर्ट के नोटिस पर अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने 10 फरवरी को जवाब दाखिल किया था। तब शंकराचार्य ने दैनिक भास्कर से कहा था कि हमने कोर्ट में सारे साक्ष्य दिए हैं। हमें न्यायपालिका पर भरोसा है। जबसे हमने गोमाता की रक्षा के लिए आवाज उठानी शुरू की, तब से सरकार और कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आ रहा था। 13 फरवरी: आशुतोष महाराज कोर्ट से रोते हुए बाहर निकले यह तस्वीर 13 फरवरी की है, जब आशुतोष महाराज कोर्ट रूम से रोते और आंसू पोंछते हुए बाहर निकले थे। 13 फरवरी को जज विनोद कुमार चौरसिया ने मामले की सुनवाई की थी। शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने मामले की वकालत खुद की थी। उन्होंने जज से कहा था कि 2 शिष्यों ने मेरे पास आकर अपने साथ हुए यौन शोषण की कहानी सुनाई। शंकराचार्य के खिलाफ FIR दर्ज करके जांच करनी चाहिए। मुझे न्यायपालिका से ही इंसाफ की उम्मीद है। शंकराचार्य के वकील ने इसका विरोध किया था। कहा था कि ये सिर्फ आरोप हैं। हमें केस की तैयारी के लिए थोड़ा वक्त चाहिए। इस पर आशुतोष महाराज ने जज से कहा था- मेरी कार को बम से उड़ाकर मुझे मारने की धमकी दी जा रही। मेरी हत्या हो सकती है। आपको यौन शोषण का शिकार हुए बच्चों के

नाक से खून, कब्ज और पीसीओएस में मददगार, जानें आयुर्वेद में दूब का महत्व, कई बीमारियों में असरदार – Uttar Pradesh News

नाक से खून आना

Last Updated:February 21, 2026, 21:41 IST सनन्दन उपाध्याय/बलिया: हर जगह दिखने वाली साधारण घास, जो खेत से लेकर आंगन और आयुर्वेद से लेकर आस्था तक अपनी अलग पहचान रखती है. जी हां आमतौर पर पैरों तले बिछी रहने वाली यह घास औषधीय गुणों का खजाना है. इसका सही तरीके से प्रयोग कर कई रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है. आगे विस्तार से जानिए… सेहत की दुनिया में दूब घास को प्राकृतिक उपचार के रूप में बेहद उपयोगी बताया गया है. इसे शीतल, रक्तस्तंभक और पाचन सुधारक भी कहा गया है. इसके अलावा, नकसीर यानी नाक से खून आने पर दूब का ताजा रस माथे पर लगाने और कुछ मात्रा में सेवन करने से राहत मिल सकती है. यहीं नहीं, गर्मियों में शरीर की आंतरिक गर्मी शांत करने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. दुर्वा यानी दूब महिलाओं के लिए भी फायदेमंद है. पीसीओएस जैसी हार्मोनल असंतुलन की स्थिति में भी दूब का रस दही के साथ लेने से अत्यधिक रक्तस्राव और दर्द में आराम मिल सकता है. ध्यान रखें कि, विशेषज्ञ सलाह के बिना किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाना उचित नहीं होता है. हालांकि, ग्रामीण परंपराओं में इसका प्रयोग आज भी किया जाता है. राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की सात साल अनुभवी आयुर्वेदाचार्य डॉ प्रियंका सिंह के अनुसार, दूब कब्ज से राहत दिलाने और पेट को साफ रखने में बेहद लाभकारी और गुणकारी साबित हो सकती है. इसका हल्का काढ़ा बनाकर पीने से गैस और अपच में आराम मिलने की बात कही जाती है. इसके अलावा, इसमें प्राकृतिक तत्व भी पाए जाते हैं, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मददगार हैं. Add News18 as Preferred Source on Google शुगर और खून की कमी जैसी समस्याओं में भी दूब का उल्लेख मिलता है। पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसके अर्क को ब्लड शुगर संतुलित करने में सहायक माना गया है. इसमें आयरन तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो खून की कमी दूर करने में उपयोगी सिद्ध हो सकती है. धार्मिक दृष्टिकोण से दूब का अत्यंत पवित्र स्थान है. हिंदू परंपरा में इसे भगवान गणेश जी को अर्पित किया जाता है और शुभ का प्रतीक माना जाता है. पूजा-पाठ में दूर्वा चढ़ाने की परंपरा केवल आस्था नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश भी देती है. इस छोटी सी घास को भारतीय संस्कृति से गहरा जुड़ाव है. खेती और पशुपालन में भी दूब का महत्त्व कम नहीं है. लमसम 10 से 12% प्रोटीन युक्त यह घास पशुओं के लिए पौष्टिक चारे का काम करती है. सूखे की स्थिति में भी तेजी से उगने की इसकी क्षमता रखने के कारण किसानों का भरोसेमंद साथी भी है. कई जगहों पर तो प्राकृतिक चारे के रूप में भी इसको प्राथमिकता दी जाती है. दूब का पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका होती है. इसकी जड़ें मिट्टी को मजबूती से पकड़ती हैं, जिससे कटाव रुक जाती है. यही कारण है कि इसे लॉन, पार्क और गोल्फ कोर्स में बड़े पैमाने पर लगाया जाता है. कम देखभाल में भी हरी-भरी रहने वाली यह घास सचमुच धरती की हरी और मजबूत ढाल है. First Published : February 21, 2026, 21:41 IST

घर के गमले में उगता है ‘शुगर कंट्रोल प्लांट’! फायदे जानकर अभी से करने लगेंगे इस्तेमाल – Madhya Pradesh News

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Last Updated:February 21, 2026, 10:23 IST Sadabahar ke Fayde: सदाबहार पौधा डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और संक्रमण जैसी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है. इसकी पत्तियों में मौजूद अल्कलॉइड तत्व ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं. सदाबहार से प्राप्त विनक्रिस्टीन और विनब्लास्टीन जैसे रसायन कैंसर उपचार में उपयोग किए जाते हैं. यह पौधा घर के गमले में आसानी से उगाया जा सकता है और सालभर फूल देता है. जानिए सदाबहार के फायदे, उपयोग और सेवन से जुड़ी जरूरी सावधानियां. Diabetes Control Home Remedies: सेहतमंद रहने के लिए हम अक्सर महंगे फल, दवाइयां और सप्लीमेंट्स खरीदते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि आपके घर के गमले में लगा एक छोटा सा पौधा भी कई बीमारियों में काम आ सकता है? जी हां, हम बात कर रहे हैं सदाबहार की, जिसे वैज्ञानिक भाषा में Madagascar Periwinkle कहा जाता है. यह पौधा सालभर फूल देता है और औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है. हर मौसम में उगने वाला आसान औषधीय पौधाआयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह के मुताबिक सदाबहार लगभग हर तरह के मौसम में आसानी से उग जाता है. इसे घर के बगीचे या गमले में लगाया जा सकता है. इसकी पत्तियां, फूल और जड़ तीनों औषधीय उपयोग में लाई जाती हैं. यही वजह है कि इसे घर का ‘नेचुरल हेल्थ प्लांट’ भी कहा जाता है. डायबिटीज में कैसे करता है मदद?डॉ. विपिन सिंह बताते हैं कि सदाबहार की पत्तियों में पाए जाने वाले अल्कलॉइड तत्व ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में सहायक माने जाते हैं. कुछ शोधों में यह भी सामने आया है कि यह इंसुलिन स्राव को प्रभावित कर सकता है. हालांकि डायबिटीज के मरीजों को इसे डॉक्टर की सलाह के बाद ही लेना चाहिए, क्योंकि गलत मात्रा नुकसान भी कर सकती है. ब्लड प्रेशर और संक्रमण में भी फायदेमंदसदाबहार की पत्तियों और जड़ों का सीमित उपयोग हाई ब्लड प्रेशर में लाभकारी माना जाता है. इसके अलावा इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं, जो संक्रमण से लड़ने में मदद कर सकते हैं. गले की खराश में इसके फूलों का रस पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है, जबकि इसकी जड़ पाचन तंत्र के लिए टॉनिक की तरह मानी जाती है. कैंसर रिसर्च में भी उपयोगसदाबहार से मिलने वाले Vincristine और Vinblastine जैसे रसायन आधुनिक चिकित्सा में कैंसर की दवाओं में उपयोग किए जाते हैं. हालांकि यह उपयोग पूरी तरह चिकित्सा निगरानी में होता है. घर पर इसका प्रयोग बिना सलाह के नहीं करना चाहिए. सेवन से पहले बरतें सावधानीपरंपरागत रूप से 3-4 पत्तियों या फूलों को उबालकर काढ़ा बनाया जाता है, लेकिन ज्यादा मात्रा हानिकारक हो सकती है. बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. सदाबहार फायदेमंद जरूर है, लेकिन समझदारी और डॉक्टर की सलाह के साथ ही इसका उपयोग करें. About the Author shweta singh Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें Location : Sidhi,Madhya Pradesh First Published : February 21, 2026, 10:23 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

सूजन से लेकर वेट लॉस तक…कच्ची हल्दी सेहत का सोना, इम्युनिटी बूस्टर के लिए वरदान – Uttar Pradesh News

इम्युनिटी बूस्टर

Last Updated:February 20, 2026, 23:56 IST भारतीय रसोई में आसानी से मिलने वाली कच्ची हल्दी इन दिनों सेहत की दुनिया में फिर सुर्खियां बटोर रही है. आयुर्वेद में इसे संजीवनी समान कहा गया है. इसमें करक्यूमिन और शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर को भीतर से मजबूत बनाते हैं. यह कई रोगों से निजात दिला सकती है. कच्ची हल्दी को इम्यूनिटी बूस्टर कहा गया है. इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीवायरल गुण होते हैं, जो संक्रमण से बचाव में सहायक होते हैं. इसके नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे मौसमी बीमारियों के खतरे की संभावना कम रहती हैं. कच्ची हल्दी जोड़ों के दर्द और सूजन से परेशान लोगों के लिए भी फायदेमंद होती है. इसकी सूजनरोधी क्षमता गठिया जैसी समस्याओं में राहत दे सकती है. कच्ची हल्दी के करक्यूमिन तत्व सूजन को कम करने में मदद करते है, जिससे जोड़ों की जकड़न और दर्द में आराम मिलता हैं. कच्ची हल्दी का पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी योगदान बेहद महत्वपूर्ण है. यह गैस, अपच और ब्लोटिंग जैसी दिक्कतों को कम करने में लाभकारी सिद्ध हो सकती है. इसके नियमित सेवन से आंतों की कार्यप्रणाली बेहतर होती है और पेट हल्का महसूस होता है, जिससे दिनभर शरीर ऊर्जावान रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ वंदना तिवारी के अनुसार, कच्ची हल्दी की भूमिका शरीर को डिटॉक्स करने में खास मानी जाती है. यह लिवर की कार्यक्षमता को समर्थन दे सकती है और शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मददगार साबित हो सकती है. खून को साफ करने में भी इसके गुण उपयोगी होते हैं, जिससे त्वचा पर भी सकारात्मक असर दिखता है. कच्ची हल्दी का गुनगुना दूध या काढ़ा सर्दी-खांसी या गले में खराश को दूर करने में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. इसकी तासीर गर्म होती है, जो गले को आराम देने में सहायक हो सकती है. कई घरों में बदलते मौसम में इसे रोगों से बचाव के उपाय के तौर पर प्रयोग किया जाता है. कच्ची हल्दी एक शानदार औषधि है. वजन को कंट्रोल करने में भी कच्ची हल्दी लाभकारी है. यह मेटाबॉलिज्म को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है, जिससे कैलोरी बर्न की प्रक्रिया शानदार होती है. यही नहीं, कच्ची हल्दी सूजन कम करने और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में भी बहुत उपयोगी हैं, क्योंकि यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती हैं. कच्ची हल्दी को कद्दूकस कर दूध में उबालकर, चाय में मिलाकर या सुबह गुनगुने पानी के साथ सेवन जा सकता है. हालांकि, यदि किसी को पित्त की पथरी, मधुमेह या खून पतला करने वाली दवाएं चल रही हों, तो सेवन से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट से सलाह जरूरी ले. क्योंकि किन्हीं परिस्थितियों में यह हानिकारक भी हो सकती हैं. First Published : February 20, 2026, 23:56 IST

हड्डियों के दर्द का काल है ये पत्ता! सीने में दर्द हो या सूखी खांसी, खाज-खुजली, त्वचा रोग में भी कारगर – Uttar Pradesh News

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Last Updated:February 20, 2026, 23:33 IST सफेद चंपा एक ऐसा पेड़ है, जो धरती पर आसानी से पाया जाने वाला अद्भुत औषधीय गुणों से भरपूर है. इसके न केवल पत्ते, बल्कि सभी अंग संजीवनी के समान माने जाते हैं. यह पेड़ अल्सर, कुष्ठ रोग, सूजन, गठिया, अस्थमा, बुखार, और कब्ज़ जैसी कई बीमारियों में बेहद लाभकारी साबित होता है. इसके फूलों का उपयोग नारियल के तेल को सुगंधित करने के लिए भी किया जाता है, और इसकी पत्तियां पुराने घावों को भरने में सक्षम मानी जाती हैं. सफेद चंपा की छाल को पीसकर लेप बनाने की परंपरा पुरानी है. इससे पुराने घाव, खुजली और कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है. इसके प्राकृतिक तत्व त्वचा को शांत करने और संक्रमण के जोखिम को कम करने में मददगार होते हैं. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग इसे घरेलू उपचार के रूप में अपनाते हैं, लेकिन संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को सावधान से प्रयोग करना चाहिए. राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, चंपा की छाल का लेप प्रभावित हिस्से पर लगाने से सूजन में कमी और आराम मिल सकता है. यह रक्त संचार को बेहतर करने में सहायक होता है. हालांकि, गंभीर गठिया या अन्य रोगों में चिकित्सकीय जांच आवश्यक है. चंपा की जड़ का उपयोग पेट संबंधी समस्याओं में भी किया जाता रहा है. इसे पेट के अल्सर के लिए लाभकारी माना गया है. जड़ से तैयार काढ़ा पाचन तंत्र को संतुलित करने में सहायक बताया जाता है. हालांकि, अल्सर जैसी गंभीर स्थिति में स्वयं उपचार के बजाय डॉक्टर की सलाह जरूरी है, ताकि स्थिति खराब न हो सके. Add News18 as Preferred Source on Google पारंपरिक उपचार पद्धतियों में चंपा की जड़ का काढ़ा बहुत ही उपयोगी माना गया है. यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद कर सकता है. हालांकि, बहुत तेज बुखार या लंबे समय तक रहने वाले बुखार में चिकित्सकीय जांच अनिवार्य है. प्राकृतिक उपाय केवल सहायक रूप में ही अपनाना उचित होता है. सफेद चंपा के फूलों की सुगंध मन को शांति देने के लिए जानी जाती है. इसकी खुशबू सिरदर्द में राहत पहुंचा सकती है और तनाव कम करने में सहायक मानी जाती है. फूलों से बने तेल का उपयोग आरामदायक नींद के लिए किया जाता है. अरोमाथेरेपी में भी इसकी सुगंध को सकारात्मक प्रभाव वाला माना गया है. चंपा के फूलों का लेप छाती के दर्द और पुरानी खांसी में राहत देने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसके लाभकारी तत्व सूजन कम करने और श्वसन मार्ग को आराम देने में सहायक हो सकते हैं. लेकिन हमेशा ध्यान रखें कि, दमा या गंभीर फेफड़ों की बीमारी में यह केवल पूरक उपाय है, मुख्य उपचार का विकल्प नहीं है. चंपा का रस पथरी और मूत्र संबंधी समस्याओं में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. इसे मूत्र मार्ग को साफ रखने और जलन कम करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है. पथरी जैसी स्थिति में आयुर्वेद एक्सपर्ट की राय बेहद जरूरी है. प्राकृतिक उपचारों को अपनाने से पहले आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से परामर्श करना हमेशा सुरक्षित और समझदारी भरा कदम साबित होता रहा है. First Published : February 20, 2026, 23:33 IST