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प्राकृतिक दवाओं की खान है गूलर! जड़ से तने तक हर हिस्सा औषधि, रोगों का रामबाण इलाज – Madhya Pradesh News

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Health News: पेट खराब होने पर गूलर के पके फल खाने से राहत मिलती है, वहीं कच्चे फल शुगर मरीजों के लिए लाभकारी बताए गए हैं. इसकी छाल को जलाकर बनाई गई राख को कंजई या सरसों के तेल में मिलाकर पाइल्स के उपचार में इस्तेमाल किया जाता है.

सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र की वादियों में कई ऐसी औषधीय वनस्पतियां पाई जाती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं. इन्हीं में से एक है गूलर का पेड़, जिसे आयुर्वेद में अत्यंत उपयोगी माना गया है. ग्रामीण इलाकों में आज भी गूलर का इस्तेमाल दादी-नानी के पारंपरिक नुस्खों में किया जाता है. इस पेड़ के फल, पत्ते, छाल और जड़ सभी औषधीय गुणों से भरपूर बताए जाते हैं. सीधी के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ विपिन सिंह के अनुसार, कोरोना काल के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए गूलर का विशेष रूप से उपयोग किया गया था. गूलर के पत्तों, फलों और तने का सेवन कई प्रकार की बीमारियों में लाभकारी साबित होता है. आयुर्वेद में इसे अंजीर के समान गुणकारी माना गया है.

डॉ सिंह बताते हैं कि गूलर की शाखाएं मोटी होती हैं और इसके पत्ते दिल के आकार और खुरदरी सतह वाले होते हैं. इसके फल लगभग 2 से 3 सेंटीमीटर व्यास के होते हैं, जो पकने पर हरे से पीले या लाल रंग में बदल जाते हैं. इस पेड़ पर सालभर फूल और फल लगते हैं, हालांकि जुलाई से दिसंबर के बीच इसकी पैदावार अधिक होती है. इसके पके फलों का सेवन शरीर को ताकत देता है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में सहायक माना जाता है.

गूलर के पके फल खाने से मिलेगी राहत
पेट खराब होने पर गूलर के पके फल खाने से राहत मिलती है जबकि कच्चे फल मधुमेह रोगियों के लिए लाभकारी बताए गए हैं. इसकी छाल को जलाकर बनाई गई राख को सरसों या कंजई के तेल में मिलाकर पाइल्स के उपचार में उपयोग किया जाता है. पेड़ से निकलने वाला दूध चर्म रोग, दाद और फंगल संक्रमण में भी कारगर माना जाता है. इसके अलावा गूलर की छाल से तैयार काढ़ा फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों, गले की खराश और सूजन में लाभ पहुंचाता है. इसकी पत्तियां पीलिया में उपयोगी बताई गई हैं जबकि जड़ों में रेचक और कृमिनाशक गुण पाए जाते हैं. इस तरह गूलर केवल छाया देने वाला वृक्ष नहीं बल्कि आयुर्वेदिक दृष्टि से एक संपूर्ण औषधि है.

गूलर का पौधा लगाना भी आसान
घर में गूलर का पौधा लगाना भी आसान है. इसके लिए 8-10 इंच का गमला लेकर उसमें गोबर की खाद, बालू और बगीचे की मिट्टी बराबर मात्रा में मिलाएं. फिर गूलर की ताजी डाली या छोटा पौधा रोपकर हल्का पानी दें. इसे ऐसी जगह रखें, जहां सीधी धूप कम आती हो और नियमित रूप से नमी बनाए रखें. समय-समय पर जैविक खाद डालते रहने से पौधा तेजी से बढ़ता है और कुछ वर्षों में फल देने लगता है. धार्मिक दृष्टि से भी यह पौधा शुभ माना जाता है.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र की वादियों में कई ऐसी औषधीय वनस्पतियां पाई जाती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं. इन्हीं में से एक है गूलर का पेड़, जिसे आयुर्वेद में अत्यंत उपयोगी माना गया है. ग्रामीण इलाकों में आज भी गूलर का इस्तेमाल दादी-नानी के पारंपरिक नुस्खों में किया जाता है. इस पेड़ के फल, पत्ते, छाल और जड़ सभी औषधीय गुणों से भरपूर बताए जाते हैं. सीधी के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ विपिन सिंह के अनुसार, कोरोना काल के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए गूलर का विशेष रूप से उपयोग किया गया था. गूलर के पत्तों, फलों और तने का सेवन कई प्रकार की बीमारियों में लाभकारी साबित होता है. आयुर्वेद में इसे अंजीर के समान गुणकारी माना गया है.

डॉ सिंह बताते हैं कि गूलर की शाखाएं मोटी होती हैं और इसके पत्ते दिल के आकार और खुरदरी सतह वाले होते हैं. इसके फल लगभग 2 से 3 सेंटीमीटर व्यास के होते हैं, जो पकने पर हरे से पीले या लाल रंग में बदल जाते हैं. इस पेड़ पर सालभर फूल और फल लगते हैं, हालांकि जुलाई से दिसंबर के बीच इसकी पैदावार अधिक होती है. इसके पके फलों का सेवन शरीर को ताकत देता है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में सहायक माना जाता है.

गूलर के पके फल खाने से मिलेगी राहत
पेट खराब होने पर गूलर के पके फल खाने से राहत मिलती है जबकि कच्चे फल मधुमेह रोगियों के लिए लाभकारी बताए गए हैं. इसकी छाल को जलाकर बनाई गई राख को सरसों या कंजई के तेल में मिलाकर पाइल्स के उपचार में उपयोग किया जाता है. पेड़ से निकलने वाला दूध चर्म रोग, दाद और फंगल संक्रमण में भी कारगर माना जाता है. इसके अलावा गूलर की छाल से तैयार काढ़ा फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों, गले की खराश और सूजन में लाभ पहुंचाता है. इसकी पत्तियां पीलिया में उपयोगी बताई गई हैं जबकि जड़ों में रेचक और कृमिनाशक गुण पाए जाते हैं. इस तरह गूलर केवल छाया देने वाला वृक्ष नहीं बल्कि आयुर्वेदिक दृष्टि से एक संपूर्ण औषधि है.

गूलर का पौधा लगाना भी आसान
घर में गूलर का पौधा लगाना भी आसान है. इसके लिए 8-10 इंच का गमला लेकर उसमें गोबर की खाद, बालू और बगीचे की मिट्टी बराबर मात्रा में मिलाएं. फिर गूलर की ताजी डाली या छोटा पौधा रोपकर हल्का पानी दें. इसे ऐसी जगह रखें, जहां सीधी धूप कम आती हो और नियमित रूप से नमी बनाए रखें. समय-समय पर जैविक खाद डालते रहने से पौधा तेजी से बढ़ता है और कुछ वर्षों में फल देने लगता है. धार्मिक दृष्टि से भी यह पौधा शुभ माना जाता है.

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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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