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andhra pradesh vs bihar police : IPS Sunil Nayak Arrest | कौन है यह IPS अधिकारी, जिसको लेकर आंध्र प्रदेश और बिहार में शुरू हो गया ‘ऐलान-ऐ-जंग’, कौन गलत कौन सही?

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पटना. बिहार कैडर के 2005 बैच के आईपीएस अधिकारी सुनील नायक की गिरफ्तारी को लेकर आंध्र प्रदेश और बिहार आमने-सामने आ गए हैं. बिहार की राजधानी पटना में सोमवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आंध्र प्रदेश पुलिस की एक विशेष टीम ने बिहार फायर सर्विस विभाग के आईजी सुनील नायक के आवास पर छापेमारी की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया. यह गिरफ्तारी साल 2021 के एक पुराने मामले से जुड़ी है, जिसमें आरोप है कि तत्कालीन सीआईडी में तैनाती के दौरान सुनील नायक ने टीडीपी के वरिष्ठ नेता और वर्तमान विधानसभा उपाध्यक्ष के. रघुरमा कृष्ण राजू को हिरासत के दौरान बुरी तरह प्रताड़ित किया था. सोमवार को आंध्र प्रदेश पुलिस ने आईजी सुनील नायक को आईपीसी की धारा 307 हत्या के प्रयास के मामले में गिरफ्तार किया था.

लेकिन पटना सिविल कोर्ट ने आंध्र प्रदेश पुलिस की दलील को मानने से इंकार करते हुए नायक को ट्रांजिट रिमांड नामंजूर कर दिया. ऐसे में बड़ा सवाल आंध्र प्रदेश पुलिस इतनी जल्दबाजी में एक आईपीएस अधिकारी पर एक्शन क्यों लिया? क्यों नायक की गिरफ्तारी से पहले उन्हें सूचना नहीं दी गई? क्या यह मामला राजनीति से प्रेरित है? क्या एक आईपीएस अधिकारी की गिरफ्तारी से पहले केंद्र सरकार को सूचना दी गई थी?

दरअसल आंध्रप्रदेश पुलिस ने जिस अंदाज में सोमवार को पटना पहुंचकर फायर विभाग के आईजी सुनील कुमार नायक को गिरफ्तार किया था, उस तरीके को कोर्ट ने गलत करार दिया है. कोर्ट ने आईजी सुनील कुमार नायक की गिरफ्तारी को ही अवैध ठहरा दिया है. कोर्ट ने आंध्र प्रदेश पुलिस की ट्रांजिट रिमांड याचिका को खारिज कर दिया है. ट्रांजिट रिमांड के लिए आंध्र प्रदेश पुलिस ने आवेदन किया था, लेकिन आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं किए जाने के कारण पटना सिविल कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया.

क्या है रघुरमा कृष्ण राजू मामला?

यह मामला मई 2021 का है, जब आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी की सरकार थी. उस समय रघुरमा कृष्ण राजू वाईएसआर कांग्रेस के सांसद थे, लेकिन उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था. सीआईडी ने उन्हें देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया था. नायक उस समय आंध्र प्रदेश में सीआईडी में तैनात थे. राजू का आरोप है कि हिरासत के दौरान पुलिस ने उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया और उनके पैरों के तलवों पर लाठियों से प्रहार किया.

नायक के वकील का दावा

नायक के वकील का दावा है कि साल 2024 में आंध्र प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद राजू ने प्रतिनियुक्ति पर आए सुनील नायक सहित कई अधिकारियों और पूर्व मुख्यमंत्री जगन रेड्डी के खिलाफ हत्या के प्रयास और हिरासत में प्रताड़ना का केस दर्ज करा दिया. क्योंकि राजू अब टीडीपी में हैं औऱ विधानसभा के उपाध्यक्ष हैं. राज्य में चंद्रबाबू नायडु की सरकार है और एनडीए में होने के कारण उनका नीतीश कुमार से साथ भी रिश्ता अच्छा है. ऐसे में यह मामला राजनीतिक पुर्वाग्रह से ग्रस्त नजर आ रहा है.

आईपीएस को लेकर बिहार और आंध्र प्रदेश में टकराव

सुनील नायक 2005 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. प्रतिनियुक्ति खत्म होने के बाद वे वापस अपने मूल कैडर बिहार लौट आए थे. आंध्र पुलिस की इस अचानक कार्रवाई से बिहार पुलिस महकमे में नाराजगी देखी गई. छापेमारी के दौरान पटना के स्थानीय पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद थे, लेकिन बिहार पुलिस के कई आला अधिकारियों का मानना है कि एक सीनियर आईपीएस के खिलाफ ऐसी कार्रवाई के लिए प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया.

नायक के वकील ने आंध्र प्रदेश पुलिस पर राजनीतिक द्वेष के तहत काम करने का आरोप लगाया है. वकील का तर्क है कि नायक को केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने उस समय अपनी ड्यूटी निभाई थी. गिरफ्तारी से पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही बिहार सरकार से आवश्यक अनुमति ली गई. वकील ने आरोप लगाया कि आंध्र पुलिस ने नायक के साथ अपराधी जैसा व्यवहार किया, जो एक सेवारत आईजी रैंक के अधिकारी की गरिमा के खिलाफ है.

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पटना. बिहार कैडर के 2005 बैच के आईपीएस अधिकारी सुनील नायक की गिरफ्तारी को लेकर आंध्र प्रदेश और बिहार आमने-सामने आ गए हैं. बिहार की राजधानी पटना में सोमवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आंध्र प्रदेश पुलिस की एक विशेष टीम ने बिहार फायर सर्विस विभाग के आईजी सुनील नायक के आवास पर छापेमारी की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया. यह गिरफ्तारी साल 2021 के एक पुराने मामले से जुड़ी है, जिसमें आरोप है कि तत्कालीन सीआईडी में तैनाती के दौरान सुनील नायक ने टीडीपी के वरिष्ठ नेता और वर्तमान विधानसभा उपाध्यक्ष के. रघुरमा कृष्ण राजू को हिरासत के दौरान बुरी तरह प्रताड़ित किया था. सोमवार को आंध्र प्रदेश पुलिस ने आईजी सुनील नायक को आईपीसी की धारा 307 हत्या के प्रयास के मामले में गिरफ्तार किया था.

लेकिन पटना सिविल कोर्ट ने आंध्र प्रदेश पुलिस की दलील को मानने से इंकार करते हुए नायक को ट्रांजिट रिमांड नामंजूर कर दिया. ऐसे में बड़ा सवाल आंध्र प्रदेश पुलिस इतनी जल्दबाजी में एक आईपीएस अधिकारी पर एक्शन क्यों लिया? क्यों नायक की गिरफ्तारी से पहले उन्हें सूचना नहीं दी गई? क्या यह मामला राजनीति से प्रेरित है? क्या एक आईपीएस अधिकारी की गिरफ्तारी से पहले केंद्र सरकार को सूचना दी गई थी?

दरअसल आंध्रप्रदेश पुलिस ने जिस अंदाज में सोमवार को पटना पहुंचकर फायर विभाग के आईजी सुनील कुमार नायक को गिरफ्तार किया था, उस तरीके को कोर्ट ने गलत करार दिया है. कोर्ट ने आईजी सुनील कुमार नायक की गिरफ्तारी को ही अवैध ठहरा दिया है. कोर्ट ने आंध्र प्रदेश पुलिस की ट्रांजिट रिमांड याचिका को खारिज कर दिया है. ट्रांजिट रिमांड के लिए आंध्र प्रदेश पुलिस ने आवेदन किया था, लेकिन आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं किए जाने के कारण पटना सिविल कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया.

क्या है रघुरमा कृष्ण राजू मामला?

यह मामला मई 2021 का है, जब आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी की सरकार थी. उस समय रघुरमा कृष्ण राजू वाईएसआर कांग्रेस के सांसद थे, लेकिन उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था. सीआईडी ने उन्हें देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया था. नायक उस समय आंध्र प्रदेश में सीआईडी में तैनात थे. राजू का आरोप है कि हिरासत के दौरान पुलिस ने उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया और उनके पैरों के तलवों पर लाठियों से प्रहार किया.

नायक के वकील का दावा

नायक के वकील का दावा है कि साल 2024 में आंध्र प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद राजू ने प्रतिनियुक्ति पर आए सुनील नायक सहित कई अधिकारियों और पूर्व मुख्यमंत्री जगन रेड्डी के खिलाफ हत्या के प्रयास और हिरासत में प्रताड़ना का केस दर्ज करा दिया. क्योंकि राजू अब टीडीपी में हैं औऱ विधानसभा के उपाध्यक्ष हैं. राज्य में चंद्रबाबू नायडु की सरकार है और एनडीए में होने के कारण उनका नीतीश कुमार से साथ भी रिश्ता अच्छा है. ऐसे में यह मामला राजनीतिक पुर्वाग्रह से ग्रस्त नजर आ रहा है.

आईपीएस को लेकर बिहार और आंध्र प्रदेश में टकराव

सुनील नायक 2005 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. प्रतिनियुक्ति खत्म होने के बाद वे वापस अपने मूल कैडर बिहार लौट आए थे. आंध्र पुलिस की इस अचानक कार्रवाई से बिहार पुलिस महकमे में नाराजगी देखी गई. छापेमारी के दौरान पटना के स्थानीय पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद थे, लेकिन बिहार पुलिस के कई आला अधिकारियों का मानना है कि एक सीनियर आईपीएस के खिलाफ ऐसी कार्रवाई के लिए प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया.

नायक के वकील ने आंध्र प्रदेश पुलिस पर राजनीतिक द्वेष के तहत काम करने का आरोप लगाया है. वकील का तर्क है कि नायक को केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने उस समय अपनी ड्यूटी निभाई थी. गिरफ्तारी से पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही बिहार सरकार से आवश्यक अनुमति ली गई. वकील ने आरोप लगाया कि आंध्र पुलिस ने नायक के साथ अपराधी जैसा व्यवहार किया, जो एक सेवारत आईजी रैंक के अधिकारी की गरिमा के खिलाफ है.

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