Blunt Speaking Child Psychology; Social Skills Guidance

Hindi News Lifestyle Blunt Speaking Child Psychology; Social Skills Guidance | Comm Skill Parenting Tips 4 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सवाल- मैं पटना से हूं। मेरी 10 साल की बेटी बहुत होशियार, समझदार है। लेकिन उसकी एक आदत बहुत परेशान करने वाली है। वो जो सोचती है, फट से बोल देती है। अगर उसे किसी की ड्रेस अच्छी नहीं लगी तो सीधे कह देती है, “ये अच्छी नहीं है।” अगर कोई दोस्त गलत खेले तो कह देगी, “तुम्हें खेलना नहीं आता।” वह बोलने से पहले सोचती नहीं है। दोस्त उसकी बातों का बुरा मान जाते हैं। उसकी कुछ दोस्तियां भी टूट चुकी हैं। ये साफगोई है या मुंहफटपन। मैं कन्फ्यूज हूं। समझ नहीं पा रही, उसे कैसे गाइड करूं। मुझे क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर जवाब- सवाल पूछने के लिए आपका शुक्रिया। सबसे पहले तो मैं आपको आश्वस्त करना चाहूंगी कि ये कोई ‘अवगुण’ नहीं है। ये आपकी बेटी की पर्सनैलिटी का एक ‘रॉ’ यानी कच्चा रूप है। 10 साल की उम्र में बच्चे अपने विचारों को साफ तरीके से रखना सीख रहे होते हैं। उनमें लॉजिकल ब्रेन विकसित हो रहा होता है। लेकिन ‘सोशल इंटेलिजेंस’ (सामाजिक समझ) अभी पूरी तरह मेच्यौर नहीं हुई होती है। उनमें अभी यह समझ पूरी तरह विकसित नहीं हुई होती कि सच बोलने का तरीका भी मायने रखता है। साइकोलॉजी में इसे ‘सोशल फिल्टर डेवलपमेंट’ कहा जाता है। यह समझ जन्म से नहीं होती है, बल्कि धीरे-धीरे सीखने वाली चीज है। इसलिए बेटी को कम्युनिकेशन स्किल सिखाना जरूरी है। बच्चे के बिना फिल्टर बोलने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। आइए पहले इसे समझते हैं। बच्चे बिना फिल्टर के क्यों बोलते हैं? डेवलपमेंटल साइकोलॉजी के मुताबिक, टीनएज से पहले बच्चे दुनिया को ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ नजरिए से देखते हैं। उनके दिमाग में ‘सही’ और ‘गलत’ दो ही चीजें होती हैं। वह डिप्लोमेसी के महत्व को नहीं समझते हैं। उन्हें लगता है कि अगर कोई चीज बुरी दिख रही है, तो उसे बुरा कहना ही ईमानदारी है। वह ये नहीं समझ पाते कि उनके शब्द किसी के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचा सकते हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। क्या यह चिंता की बात है? यहां समझने वाली बात ये है कि अगर आपकी बच्ची जानबूझकर किसी को नीचा दिखाने या मजाक उड़ाने के लिए ऐसा करती है, तो यह बिहेवियरल प्रॉब्लम है। लेकिन अगर वह अनजाने में सिर्फ ‘सच’ कह रही है, तो यह केवल सोशल स्किल की कमी है। अच्छी बात यह है कि 10-12 साल की उम्र में इसे बहुत आसानी से सुधारा जा सकता है। ‘मुंहफट’ बच्चे को कैसे गाइड करें? सबसे पहले यह समझ लें कि आपकी बच्ची की ‘साफगोई‘ ही उसकी असली ताकत है। उसे बदलने की कोशिश करना उसके आत्मविश्वास को चोट पहुंचा सकता है। ऐसे में जरूरत उसे चुप कराने की नहीं, बल्कि उसे बातचीत का तरीका सिखाने की है। उसे समझाएं कि सच बोलना अच्छी बात है, लेकिन हर सच उसी रूप में और उसी समय बोलना जरूरी नहीं होता है। बोलने से पहले रुकना, सोचना और सामने वाले की भावना को समझना भी उतना ही जरूरी है। बच्ची को यह सिखाएं कि वह अपनी बात रखते समय लहजा नरम रखे। शब्दों का चुनाव सोच-समझकर करे और सामने वाले के नजरिए को भी समझे। आप रोल-प्ले, कहानियों और रोजमर्रा की छोटी घटनाओं के जरिए उसे यह कला सिखा सकती हैं। याद रखें, आपका उद्देश्य उसे बदलना नहीं, बल्कि उसकी बेबाकी को थोड़ा संवेदनशील बनाना है। नीचे दिए गए ग्राफिक में कुछ आसान और व्यवहारिक तरीके दिए गए हैं, जिनका ध्यान रखना जरूरी है। ‘सत्यं ब्रूयात, प्रियं ब्रूयात’ आपकी बेटी में ईमानदारी है, ये अच्छी बात है। लेकिन उसे ये नहीं पता कि ‘सच’ और ‘कड़वे सच’ के बीच एक बहुत बारीक लकीर होती है। संस्कृत का एक श्लोक है- “सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।” इसका अर्थ है, ‘’सच बोलो, मीठा बोलो। लेकिन ऐसा सच न बोलो, जो दिल को आहत करे।’’ बेटी को समझाएं कि सच बोले, लेकिन इसे ऐसे बोले कि सामने वाले का दिल न दुखे। उसे ये बातें उदाहरण के साथ समझाएं। जैसेकि– मान लो आपके पास एक खिलौना है। आपका कोई दोस्त कहे कि खिलौना खराब है तो आपको कैसा लगेगा? बुरा लगेगा न। वैसे ही हमें किसी को ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए, जिससे उसका दिल दुखे। जब क्लास में कोई स्पीच देता है तो टीचर अंत में हमेशा क्या कहती हैं– “वेरी गुड।” वो कभी ऐसे तो नहीं बोलतीं कि ये स्पीच गंदी थी, तुम्हें बोलना नहीं आता। वैसे ही हमें हमेशा दूसरों को इनकरेज करना चाहिए। अगर उन्होंने बहुत अच्छा नहीं बोला, अच्छा नहीं किया, तो भी हमें “वेरी गुड” ही बोलना चाहिए। तभी तो वो आगे और कोशिश करेंगे। मान लो, आपकी दोस्त ने एक ड्रॉइंग बनाई और आपको दिखाकर पूछा- “कैसी है?” तो आप क्या कहोगी? क्या ये कहना चाहिए कि ये पेंटिंग अच्छी नहीं लगी। नहीं न। हम यही कहेंगे, “ये तो बहुत सुंदर है। लेकिन अगर इसमें एक और पेड़ बना लो तो ये और सुंदर हो जाएगी।“ इस तरह हमने सच भी बोला, फीडबैक भी दिया और उसका दिल भी नहीं दुखाया। ‘रुको, सोचो, फिर बोलो’ का फॉर्मूला बताएं बच्ची को यह बताना जरूरी है कि बोलना एक जिम्मेदारी का काम है। उसे बताएं कि जो शब्द हम एक बार बोल देते हैं, वे कभी वापस नहीं आते। इसलिए प्रतिक्रिया देने से पहले थोड़ा रुकना और सोचना बहुत जरूरी है। उसे कम्युनिकेशन का ‘थिंक’ फॉर्मूला समझाएं। बताएं कि कुछ भी बोलने से पहले खुद से ये 5 सवाल जरूर पूछे- ‘मुंहफट’ बच्चों के साथ पेरेंट्स न करें ये गलतियां कई बार पेरेंट्स बच्चे को सुधारने के इरादे से ऐसी प्रतिक्रियाएं देते हैं, जो अनजाने में समस्या को और बढ़ा देती है। तुरंत डांटना, सबके सामने टोकना या बार-बार उसकी कमी गिनाना बच्चे को सुधारता नहीं, बल्कि उसे डिफेंसिव बना देता है। ऐसे में बच्चा या तो चुप हो जाता है या और ज्यादा जिद्दी। इसलिए सुधार का तरीका संतुलित होना चाहिए। इसलिए पेरेंट्स को कभी भी ये गलतियां नहीं करनी चाहिए- बच्ची को ‘मुंहफट’ या ‘बदतमीज’ न कहें। सबके
Ayesha Khan Sexual Comments & Rape Threats On Social Media

12 घंटे पहले कॉपी लिंक एक्ट्रेस आयशा खान ने हाल ही में बताया कि सोशल मीडिया पर अक्सर उन्हें बॉडी को लेकर सेक्शुअल कमेंट्स मिलते हैं और लगभग हर दिन उन्हें रेप की धमकियां भी दी जाती हैं। मोजो स्टोरी की समिट में आयशा ने कहा कि हाल ही में उन्होंने फिल्म धुरंधर के गाने शरारत की शूटिंग से जुड़ा एक अनुभव शेयर किया था। उन्होंने बताया था कि उस गाने की शूटिंग उन्होंने पीरियड्स के दौरान की थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें काफी ट्रोल किया गया। आयशा ने कहा कि उन्हें लगा कि उनके पीरियड्स पर होना अचानक एक नेशनल जोक बन गया है। एक्ट्रेस ने कहा कि सोशल मीडिया पर लोग उनके कपड़ों को लेकर भी कमेंट करते हैं। उन्होंने कहा, “मैं इंस्टाग्राम पर लगभग हर दिन अपनी बॉडी को लेकर सेक्शुअल कमेंट्स का सामना करती हूं। अगर मैं नॉर्मल टॉप पहनती हूं तो लोगों को समस्या होती है। अगर मैं स्कर्ट पहनती हूं तो भी लोगों को दिक्कत होती है। मुझे कुछ पोस्ट करने से पहले भी सोचना पड़ता है।” उन्होंने कहा कि कई बार इस तरह की बातें उन्हें इमोशनली परेशान करती हैं। उनके मुताबिक अगर किसी को कपड़े पहनने या फोटो पोस्ट करने से पहले सोचना पड़े, सिर्फ इसलिए कि लोग उसे सेक्शुअल तरीके से देखेंगे, तो यह एक दुखद स्थिति है। आयशा खान फिल्म ‘धुरंधर’ के गाने ‘शरारत’ में नजर आईं, जिसके लिए उन्हें काफी सराहना मिली। गलत कमेंट्स से डर लगता है: आयशा आयशा ने कहा कि कुछ दिनों में वह इन बातों को नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन कई बार ऐसे कमेंट्स ज्यादा परेशान करते हैं, खासकर जब लोग हिंसा की बात करते हैं। उन्होंने कहा, “जब लोग लिखते हैं कि अगर उनके पास ताकत होती तो वह कुछ भी कर सकते थे, तो यह डराने वाला होता है। क्योंकि यह असली लोग हैं जो हमारे आसपास ही रहते हैं।” लगभग हर दिन रेप की धमकियां भी मिलती हैं: आयशा समिट के दौरान आयशा से पूछा गया कि क्या उन्हें ऑनलाइन रेप की धमकियां मिलती हैं? इस पर उन्होंने कहा, “हां, लगभग हर दिन। मैं अभी अपना फोन खोलकर दिखा सकती हूं। यह अब बहुत नॉर्मल हो गया है।” उन्होंने कहा कि इंटरव्यू और सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग के सवाल अक्सर उठते हैं, लेकिन इस पर ज्यादा कार्रवाई नहीं होती। उनके मुताबिक यह कोई नई समस्या नहीं है। यह काफी समय से चली आ रही है। आयशा ने यह भी कहा कि यह समस्या सिर्फ उनके साथ नहीं है। पब्लिक लाइफ में रहने वाली लगभग हर महिला को इस तरह की ट्रोलिंग और धमकियों का सामना करना पड़ता है। एक्ट्रेस ने बताया- उनके साथ रेप की कोशिश हुई आयशा ने अपने जीवन की एक निजी घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनके साथ एक बार रेप की कोशिश भी हो चुकी है। उन्होंने कहा, “मैंने पहले भी एक इंटरव्यू में इसके बारे में बात की है। मैं इस विषय पर ज्यादा नहीं जाना चाहती। कुछ दिन ऐसे होते हैं जब यह घटना फिर याद आ जाती है और मन को परेशान करती है।” आयशा खान एक्ट्रेस, मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं, जिन्हें रियलिटी शो ‘बिग बॉस 17’ से पहचान मिली। आयशा ने कहा कि ऑनलाइन धमकियों के असल जिंदगी में सच हो जाने का डर भी उन्हें रहता है। उन्होंने कहा कि जब कोई महिला सफर कर रही होती है या किसी फिल्म के सेट पर काम कर रही होती है, तब भी उसे याद रहता है कि ऐसे कमेंट करने वाले लोग असल में आसपास ही मौजूद हो सकते हैं। आयशा ने एक घटना का भी जिक्र किया जो शूटिंग के दौरान हुई थी। उन्होंने बताया कि वह एक फिल्म की शूटिंग कर रही थीं और उस दिन उनके पिता भी सेट पर मौजूद थे। उसी समय उन्होंने इंस्टाग्राम खोला। वहां एक ऐसा मैसेज दिखा जो उन्हें लंबे समय से मिल रहा था। उसमें वॉइस नोट भी थे। बाद में उन्हें पता चला कि वह मैसेज सेट पर काम करने वाले एक स्पॉट बॉय का था। उन्होंने तुरंत अपने पिता और प्रोडक्शन टीम को इसकी जानकारी दी। इसके बाद उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की गई। आयशा ने कहा कि इस घटना से उन्हें यह एहसास हुआ कि ऑनलाइन ट्रोलिंग और धमकियां कभी-कभी असल जिंदगी के बहुत करीब भी हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति पब्लिक लाइफ में है और सोशल मीडिया अकाउंट पब्लिक है, तो वह हमेशा लोगों की नजर में रहता है। ऐसे में ट्रोलिंग और गलत कमेंट्स का खतरा भी बढ़ जाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Child Performance Anxiety; Social Shyness Vs Confidence

Hindi News Lifestyle Child Performance Anxiety; Social Shyness Vs Confidence | Healthy Parenting Tips 14 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सवाल- मैं दिल्ली से हूं। मेरा 6 साल का बेटा बहुत तेज और समझदार है। उसे कविताएं, कहानियां और स्कूल का काम बहुत अच्छे से याद रहता है। घर में वह पूरे आत्मविश्वास के साथ हमें सुनाता भी है, एक्टिंग भी करता है। लेकिन जैसे ही घर में मेहमान आते हैं या हम किसी रिश्तेदार के यहां जाते हैं और कोई उससे कुछ सुनाने या बोलने के लिए कहता है, तो उसका व्यवहार अचानक बदल जाता है। वह चुप हो जाता है, मेरे पीछे छिप जाता है या वहां से हटने की कोशिश करता है। कई बार लोग उसे ‘शर्मीला’ कहते हैं। मैं समझ नहीं पा रही हूं कि यह सिर्फ सामान्य शर्मीलापन है या कुछ और। एक मां के रूप में मुझे इस स्थिति को कैसे समझना और संभालना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर जवाब- सबसे पहले तो मैं आपसे यह कहना चाहूंगी कि इसमें घबराने की बात नहीं है। 6 साल की उम्र में बच्चों का ऐसा व्यवहार सामान्य है। बेटा घर में आपके सामने खुलकर बोलता है। इसका मतलब है कि उसके अंदर क्षमता और कॉन्फिडेंस दोनों हैं। मेहमानों के सामने जो बदलाव आप उसमें देख रही हैं, वह अक्सर ‘सोशल शाइनेस‘ या ‘परफॉर्मेंस एंग्जाइटी‘ से जुड़ा होता है। बच्चों को जब लगता है कि लोग उन्हें देख रहे हैं, जज कर रहे हैं या उनसे उम्मीद कर रहे हैं तो वे असहज महसूस करते हैं। यह कोई कमजोरी नहीं, बल्कि बच्चों में विकास की स्वाभाविक प्रक्रिया है। हम इस बारे में विस्तार से बात करेंगे, लेकिन इसके पहले कुछ जरूरी बातें समझिए- अक्सर हम अनजाने में अपने बच्चे को एक ‘परफॉर्मिंग आर्टिस्ट’ की तरह देखने लगते हैं, जिससे हमें हर महफिल में उससे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने की उम्मीद होने लगती है। कई बार बच्चा हमारी ‘सोशल इमेज’ को बेहतर बनाने का एक जरिया मात्र बनकर रह जाता है, जहां हम चाहते हैं कि वह मेहमानों के सामने अच्छा परफॉर्म करे ताकि हमारी पेरेंटिंग की तारीफ हो। हमें यह समझना होगा कि बच्चा कोई ‘रोबोट’ नहीं है, जो रिमोट का बटन दबते ही हंसने लगे या कविता सुनाने लगे। हर बच्चे का अपना एक स्वभाव और इच्छा होती है। उसे यह हक है कि जब उसका मन न हो, तो वह चुप रहे या अपने लिए थोड़ा एकांत चुन सके। एक 6 साल के मासूम के लिए अजनबियों की भीड़ और उनकी उम्मीद भरी नजरें काफी डरावनी हो सकती हैं। कभी-कभी बच्चे के मन में यह डर भी आ सकता है कि अगर उसने कोई गलती की या लाइन भूल गया, तो बाद में उसे डांट या नाराजगी का सामना करना पड़ेगा। कुल मिलाकर, हमें बच्चे के मानसिक दायरे और उसकी सहजता का सम्मान करना चाहिए, ताकि वह दबाव में नहीं बल्कि खुशी से अपनी बात रख सके। दबाव बनाना, पेरेंटिंग का हेल्दी तरीका नहीं अक्सर पेरेंट्स मेहमानों के सामने बच्चे की प्रतिभा का प्रदर्शन करके ‘गुड पेरेंटिंग’ का सर्टिफिकेट चाहते हैं। वे चाहते हैं कि लोग कहें, “वाह! आपका बच्चा कितना टैलेंटेड है।” लेकिन इस दिखावे की दौड़ में हम यह भूल जाते हैं कि बच्चा कोई ‘परफॉर्मिंग आर्टिस्ट’ नहीं है। जब हम बच्चे को सबके सामने परफॉर्म करने के लिए मजबूर करते हैं, तो अनजाने में उसे यह मैसेज दे रहे होते हैं कि उसकी वैल्यू तभी है, जब वह दूसरों को खुश करे या ‘परफॉर्म’ करे। इसलिए सबसे पहले तो आप मेहमानों के सामने जबरदस्ती कुछ सुनाने का प्रेशर देना बंद करें। ये पेरेंटिंग का हेल्दी तरीका नहीं है। आइए, अब बच्चे की चुप्पी का कारण समझते हैं। बच्चे की चुप्पी का कारण समझें बच्चा जब मेहमानों के सामने छिपता है तो वह खुद को ‘इनसिक्योर’ महसूस करता है। 6 साल की उम्र में बच्चे अपनी पहचान को लेकर जागरूक होने लगते हैं। उन्हें डर होता है कि अगर उन्होंने कुछ गलत सुनाया, तो लोग क्या सोचेंगे या उस पर हंसेंगे? बच्चे अपने घर में पेरेंट्स के सामने तो सहज होते हैं, लेकिन बाहरी माहौल में उन्हें थोड़ी इनसिक्योरिटी महसूस हो सकती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। क्या यह चिंता की बात है? अगर आपका बच्चा स्कूल में सामान्य रूप से बात करता है, दोस्तों के साथ खेलता है और घर में खुलकर बात करता है तो यह केवल ‘सिचुएशनल शाइनेस’ हो सकती है। यह स्थिति तब चिंताजनक हो सकती है, जब बच्चा हर वक्त, हर जगह चुप रहे, दोस्तों से भी न मिले या लगातार डरा हुआ दिखे। आपके बताए अनुसार, अभी यह एक सामान्य सामाजिक झिझक लगती है। आइए, अब समझते हैं कि इस स्थिति को कैसे हैंडल करना चाहिए। बच्चे में साेशल कॉन्फिडेंस कैसे बढ़ाएं? बच्चे को किसी ‘परफॉर्मिंग आर्टिस्ट’ की तरह पेश करने की बजाय उसे मेहमानों के सामने सहज महसूस कराना जरूरी है। जब वह मेहमानों के सामने चुप हो तो ये काम न करें- उसे डांटें नहीं। ‘शर्मीला’ न कहें। इसके बजाय उसका सपोर्ट करें। साथ ही कुछ बातों का खास ख्याल रखें। आइए, अब कुछ जरूरी पॉइंट्स को विस्तार से समझते हैं। उसे ‘शर्मीला’ न कहें जब आप मेहमानों के सामने कहती हैं, “पता नहीं इसे क्या हो गया, ये बहुत शर्मीला है,” तो बच्चा मान लेता है कि वह वाकई ऐसा ही है। वह इस ‘शर्मीलेपन’ को अपनी पहचान बना लेता है। इसके बजाय कहें, “इसे अभी थोड़ा समय चाहिए, यह थोड़ी देर में बात करेगा।” मेहमानों को ‘ऑडियंस’ न बनाएं अक्सर हम बच्चे से कहते हैं, “चलो अंकल को पोएम सुनाओ।” इससे बच्चे को लगता है कि उसे जज किया जा रहा है। इसके बजाय बातचीत को सामान्य रखें। उसे सीधे कुछ सुनाने को कहने के बजाय मेहमानों के साथ बैठने को कहें। इससे उसकी झिझक कम होगी। प्रैक्टिस को मजेदार बनाएं घर पर ‘फेक पार्टी’ का खेल खेलें। आप मेहमान बनें और उसे होस्ट बनाएं। बच्चे को सिखाएं कि नमस्ते कैसे करते हैं या नाम कैसे बताते हैं। जब वह खेल-खेल में यह सीखेगा, तो मेहमानों के सामने उसे डर नहीं लगेगा। जबरदस्ती न करें अगर बच्चा रो रहा है या
NCERT Class 8 Social Science Chapter Removed Over Judicial Corruption Controversy

Hindi News National NCERT Class 8 Social Science Chapter Removed Over Judicial Corruption Controversy 5 मिनट पहले कॉपी लिंक यह पहली बार है जब 8वीं के बच्चे ज्यूडीशियरी में करप्शन क्या होता है इसके बारे में पढ़ेंगे। क्लास 8 की सोशल साइंस की टेक्स्टबुक में ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ विवाद पर NCERT ने बुधवार को पहली प्रतिक्रिया दी। NCERT ने कहा कि वे ज्यूडिशियरी का बहुत सम्मान करते हैं। किताब में गलती अनजाने में हुई है और NCERT को उस चैप्टर में गलत मटीरियल शामिल करने का अफसोस है। NCERT ने 24 फरवरी को क्लास 8 के स्टूडेंट्स के लिए सोशल साइंस की नई टेक्स्टबुक जारी की थी। ये किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्कूलों में पढ़ाई जानी थी। इसका पहला पार्ट जुलाई 2025 में रिलीज किया गया था। किताब का नाम ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ है। इसमें ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ चैप्टर के अंदर ‘करप्शन इन द ज्यूडिशियरी’ का टॉपिक जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि भ्रष्टाचार, बड़ी संख्या में पेंडिंग मामले और जजों की भारी कमी ज्यूडिशियल सिस्टम के सामने प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं। विवाद बढ़ने के बाद NCERT ने किताब की बिक्री पर रोक लगा दी है। साथ ही कहा कि, विवादित चैप्टर को फिर से लिखा जाएगा। किताब का वो हिस्सा जिसमें करप्शन और पेंडिंग केस का जिक्र है। अब पढ़िए NCERT का पूरा बयान ‘तय प्रोसेस के अनुसार, NCERT ने 24 फरवरी को क्लास 8 के लिए सोशल साइंस की टेक्स्टबुक, एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड, वॉल्यूम II निकाली। टेक्स्टबुक मिलने पर यह देखा गया कि कुछ गलत टेक्स्ट मटीरियल अनजाने में चैप्टर नंबर 4 में आ गया। मिनिस्ट्री ऑफ़ एजुकेशन ने भी ऐसा ही ऑब्ज़र्वेशन किया और निर्देश दिया कि अगले ऑर्डर तक इस किताब का डिस्ट्रीब्यूशन पूरी तरह से रोक दिया जाए। NCERT दोहराता है कि नई टेक्स्टबुक्स का मकसद संवैधानिक अधिकारों को मजबूत करना है। स्टूडेंट्स के बीच लिटरेसी, इंस्टीट्यूशनल रिस्पेक्ट, और डेमोक्रेटिक पार्टिसिपेशन की जानकारी देना था। हमारा किसी भी कॉन्स्टिट्यूशनल बॉडी के अधिकार पर सवाल उठाने या उसे कम करने का कोई इरादा नहीं है। NCERT कंस्ट्रक्टिव फीडबैक के लिए तैयार है। इसलिए विवादित चैप्टर को सही अथॉरिटी से सलाह लेकर फिर से लिखा जाएगा और एकेडमिक सेशन 2026-27 के शुरू होने पर क्लास 8 के स्टूडेंट्स को अवेलेबल कराया जाएगा। NCERT एक बार फिर इस फैसले की गलती पर अफसोस जताता है।’ नई किताब में ज्यूडीशियरी से जुड़े अहम पॉइंट्स… इसमें कोर्ट की हायरार्की और न्याय तक पहुंच को समझाने से ज्यादा ज्यूडिशियल सिस्टम के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे करप्शन और केस बैकलॉग को बताया गया है। करप्शन वाले सेक्शन में बताया गया है कि जज एक कोड ऑफ कंडक्ट से बंधे होते हैं जो न केवल कोर्ट में बल्कि कोर्ट के बाहर भी उनके व्यवहार को कंट्रोल करता है। ज्यूडिशियरी के अंदरूनी अकाउंटेबिलिटी सिस्टम को भी समझाया गया है। सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CPGRAMS) के जरिए शिकायतें लेने के तय तरीके भी बताए गए हैं। किताब के मुताबिक CPGRAMS सिस्टम के जरिए 2017 और 2021 के बीच 1,600 ज्यादा शिकायतें मिली थीं। किताब में गंभीर मामलों में जजों को हटाने के संवैधानिक नियम के बारे में भी बताया गया है कि पार्लियामेंट इंपीचमेंट मोशन पास करके जज को हटा सकती है। बच्चे पढ़ेंगे कि ऐसे मोशन पर सही जांच के बाद ही विचार किया जाता है। इस दौरान जज को मामले में अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है। चैप्टर में लिखा है- लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का सामना करते हैं। गरीबों और जरूरतमंदों की न्याय तक पहुंच की समस्या और बिगड़ सकती है। यह भी बताया है कि राज्य और केंद्र ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक ट्रस्ट को मजबूत करने की कोशिशें कर रहे हैं। इसमें टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल और करप्शन के मामलों के खिलाफ फास्ट एक्शन लेना शामिल है। किताब में पूर्व CJI बीआर गवई का भी जिक्र किताब में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई का भी जिक्र है, जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि ज्यूडिशियरी के अंदर करप्शन और गलत कामों के मामलों का पब्लिक ट्रस्ट पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा था, “हालांकि, इस ट्रस्ट को फिर से बनाने का रास्ता इन मुद्दों को सुलझाने के लिए उठाए गए तेज, निर्णायक और ट्रांसपेरेंट एक्शन में है… ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी डेमोक्रेटिक गुण हैं।” CJI बोले- न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं देंगे सिब्बल ने CJI सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच को बताया कि क्लास 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है। यह निंदनीय है। सिंघवी ने कहा कि NCERT ने मान लिया है कि राजनीति, ब्यूरोक्रेसी और अन्य संस्थानों में भ्रष्टाचार है ही नहीं। इसपर CJI सूर्यकांत ने कहा- दुनिया में किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यह एक सोची-समझी और गहरी साजिश लगती है। मुझे पता है इससे कैसे निपटना है।मैं यह केस खुद हैंडल करूंगा। हम इस बारे में और कुछ नहीं कहना चाहते। NCERT की किताब वेबसाइट पर मौजूद नहीं NCERT की 8वीं क्लास की सोशल साइंस का पार्ट 2 इसी हफ्ते जारी हुआ था। CJI की टिप्पणी के बाद ये किताब NCERT की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है। एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक किताबों की ऑफलाइन बिक्री भी मंगलवार 24 फरवरी से बंद कर दी गई है। हालांकि अब तक NCERT की तरफ इसको लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। NCERT की वेबसाइट पर किताब का दूसरा पार्ट लिस्ट में मौजूद नहीं है। NCERT ने नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क यानी NCF और NEP-2020 के तहत सभी क्लासेज की नई किताबें तैयार की हैं। कोरोना महामारी के बाद पुरानी किताबों के टॉपिक्स को बदलकर नए टॉपिक्स किताबों में जोड़े जा रहे हैं। पहली से 8वीं क्लास तक की नई किताबें 2025 में ही पब्लिश की जा चुकी हैं। ——————— दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
NCERT 8th Class Social Science Book 2026 Topic; Judicial Corruption

Hindi News National NCERT 8th Class Social Science Book 2026 Topic; Judicial Corruption | BR Gavai नई दिल्ली54 मिनट पहले कॉपी लिंक नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 8वीं क्लास की नई सोशल साइंस टेक्स्टबुक में ज्यूडिशियरी में करप्शन पर एक सेक्शन शुरू किया है। यह पहली बार है जब 8वीं के बच्चे ज्यूडीशियरी में करप्शन क्या होता है इसके बारे में पढ़ेंगे। इस चैप्टर में सुप्रीम कोर्ट के 81 हजार, हाईकोर्ट्स के 62 लाख 40 हजार, डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट के 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या भी बताई गई है। यह पिछले एडिशन के मुकाबले एक बड़ा बदलाव है। पिछले चैप्टर में ज्यादा दातर कोर्ट के स्ट्रक्चर और रोल पर फोकस किया गया था। बदले हुए चैप्टर का नाम ‘हमारे समाज में ज्यूडिशियरी की भूमिका’ है। इसमें कोर्ट की हायरार्की और न्याय तक पहुंच को समझाने से ज्यादा ज्यूडिशियल सिस्टम के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे करप्शन और केस बैकलॉग को बताया गया है। जानिए नए सेक्शन में ज्यूडीशियरी से जुड़े पॉइंट करप्शन वाले सेक्शन में बताया गया है कि जज एक कोड ऑफ कंडक्ट से बंधे होते हैं जो न केवल कोर्ट में बल्कि कोर्ट के बाहर भी उनके व्यवहार को कंट्रोल करता है। ज्यूडिशियरी के अंदरूनी अकाउंटेबिलिटी सिस्टम को भी समझाया गया है। सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CPGRAMS) के जरिए शिकायतें लेने के तय तरीके भी बताए गए हैं। किताब के मुताबिक CPGRAMS सिस्टम के जरिए 2017 और 2021 के बीच 1,600 ज्यादा शिकायतें मिली थीं। किताब में गंभीर मामलों में जजों को हटाने के संवैधानिक नियम के बारे में भी बताया गया है कि पार्लियामेंट इंपीचमेंट मोशन पास करके जज को हटा सकती है। बच्चे पढ़ेंगे कि ऐसे मोशन पर सही जांच के बाद ही विचार किया जाता है। इस दौरान जज को मामले में अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है। चैप्टर में लिखा है- लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का सामना करते हैं। गरीबों और जरूरतमंदों की न्याय तक पहुंच की समस्या और बिगड़ सकती है। यह भी बताया है कि राज्य और केंद्र ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक ट्रस्ट को मजबूत करने की कोशिशें कर रहे हैं। इसमें टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल और करप्शन के मामलों के खिलाफ फास्ट एक्शन लेना शामिल है। किताब में पूर्व CJI बीआर गवई का जिक्र क्यों किताब में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बी आर गवई का भी ज़िक्र है, जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि ज्यूडिशियरी के अंदर करप्शन और गलत कामों के मामलों का पब्लिक ट्रस्ट पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा था, “हालांकि, इस ट्रस्ट को फिर से बनाने का रास्ता इन मुद्दों को सुलझाने के लिए उठाए गए तेज, निर्णायक और ट्रांसपेरेंट एक्शन में है… ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी डेमोक्रेटिक गुण हैं।” दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
AI Content Rules 2026; Social Media Deepfake Labelling Regulations

नई दिल्ली14 घंटे पहले कॉपी लिंक अगर कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो एआई की मदद से बनाया गया है, तो उस पर ‘लेबल’ लगाना जरूरी कर दिया गया है। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट को शिकायत मिलने के महज 3 घंटे के भीतर हटाना होगा। ये नए नियम 20 फरवरी 2026 से लागू हो गए हैं। 10 फरवरी को इसका नोटिफिकेशन जारी हुआ था। पीएम बोले- कंटेंट पर ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ की जरूरत इन नियमों के लागू होने से एक दिन पहले यानी, 19 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने AI समिट में भी लेबल को लेकर सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि जैसे खाने के सामान पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी लेबल होना चाहिए। इससे लोगों को पता चल सकेगा कि क्या असली है और क्या फैब्रिकेटेड, यानी एआई से बनाया गया है। मेटाडेटा से छेड़छाड़ की तो डिलीट होगा पोस्ट 1. एआई लेबल: वीडियो पर ‘डिजिटल स्टैम्प’ जैसे खाने के पैकेट पर लिखा होता है कि वह ‘शाकाहारी’ है या ‘मांसाहारी’, ठीक वैसे ही अब हर एआई वीडियो, फोटो या ऑडियो पर एक लेबल लगा होगा। मान लीजिए आपने एआई से एक वीडियो बनाया जिसमें कोई नेता भाषण दे रहा है, तो उस वीडियो के कोने में साफ लिखा होना चाहिए- “AI जनरेटेड”। 2. टेक्निकल मार्कर: डिजिटल डीएनए मेटाडेटा को आप उस फाइल का ‘डिजिटल डीएनए’ मान सकते हैं। यह स्क्रीन पर तो नहीं दिखता, लेकिन फाइल की कोडिंग के अंदर छिपा होता है। इसमें यह जानकारी दर्ज होगी कि यह फोटो या वीडियो किस तारीख को बना, किस AI टूल से बना और किस प्लेटफॉर्म पर पहली बार अपलोड हुआ। अगर कोई एआई का इस्तेमाल करके अपराध करता है, तो पुलिस इस ‘टेक्निकल मार्कर’ के जरिए उसके असली सोर्स तक पहुंच सकेगी। 3. छेड़छाड़ पर रोक: मिटाया नहीं जा सकेगा लेबल पहले लोग एआई से बनी फोटो का कोना काटकर या एडिटिंग करके उसका ‘वॉटरमार्क’ हटा देते थे ताकि वह असली लगे। अब सरकार ने इसे गैर-कानूनी बना दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसी तकनीक अपनानी होगी कि अगर कोई उस लेबल या मेटाडेटा को हटाने की कोशिश करे, तो या तो वह कंटेंट ही डिलीट हो जाए। चाइल्ड पोर्नोग्राफी और डीपफेक पर सख्त एक्शन अगर AI का इस्तेमाल चाइल्ड पोर्नोग्राफी, अश्लीलता, धोखाधड़ी, हथियारों से जुड़ी जानकारी या किसी की नकल उतारने के लिए किया जाता है, तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा। नवंबर में रश्मिका मंदाना का डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था। सचिन तेंदुलकर का डीपफेक वीडियो, जिसमें वे गेमिंग ऐप को प्रमोट करते दिखे थे। 3 घंटे की डेडलाइन, पहले 36 घंटे का समय मिलता था आईटी नियमों में हुए नए बदलाव के बाद अब सोशल मीडिया कंपनियों के पास कार्रवाई के लिए बहुत कम समय होगा। पहले किसी गैर-कानूनी कंटेंट को हटाने के लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था, जिसे अब घटाकर सिर्फ 3 घंटे कर दिया गया है। यूजर ने गलत जानकारी दी तो प्लेटफॉर्म जिम्मेदार अब जब भी कोई यूजर सोशल मीडिया पर कुछ अपलोड करेगा, तो प्लेटफॉर्म को उससे यह डिक्लेरेशन लेनी होगी कि क्या यह कंटेंट एआई से बनाया गया है। कंपनियों को ऐसे टूल्स तैनात करने होंगे जो यूजर के इस दावे की जांच कर सकें। अगर कोई प्लेटफॉर्म एआई कंटेंट को बिना डिस्क्लोजर के पब्लिश होने देता है, तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार माना जाएगा। केंद्र ने कहा- इससे इंटरनेट ज्यादा भरोसेमंद बनेगा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने साफ कहा कि ये स्टेप ‘ओपन, सेफ, ट्रस्टेड और अकाउंटेबल इंटरनेट’ बनाने के लिए है। यह जनरेटिव AI से आने वाली मिस-इनफॉर्मेशन, इम्पर्सनेशन और इलेक्शन मैनिपुलेशन जैसी रिस्क्स को हैंडल करेगा। इससे इंटरनेट ज्यादा भरोसेमंद बनेगा। सरकार के नोटिफिकेशन में दिए जरूरी सवालों के जवाब… सेक्शन 1: नए नियम और उनके उद्देश्य 1. आईटी संशोधन नियम, 2026 क्या हैं? यह नियम 2021 के आईटी नियमों को मजबूत करते हैं, ताकि एआई द्वारा बनाई गई जानकारी (SGI) और ऑनलाइन होने वाले नुकसानों को रोका जा सके । 2. इन संशोधनों की जरूरत क्यों पड़ी? एआई के जरिए अब असली दिखने वाले डीपफेक बनाना आसान हो गया है । इनसे गलत सूचनाएं फैलने, पहचान चोरी होने और अश्लीलता (NCII) जैसे खतरों को रोकने के लिए ये नियम लाए गए हैं। ये नियम 20 फरवरी, 2026 से पूरे देश में लागू हो चुके हैं । सेक्शन 2: मुख्य परिभाषाएं और दायरा 3. ‘ऑडियो, विजुअल या ऑडियो-विजुअल जानकारी’ का क्या मतलब है? कंप्यूटर के जरिए बनाई या बदली गई कोई भी आवाज, फोटो, ग्राफिक या वीडियो कंटेंट। 4. ‘सिंथेटिकली जनरेटेड इंफॉर्मेशन’ (SGI) क्या है? ऐसी जानकारी जिसे एआई या एल्गोरिदम से बनाया गया हो और वह बिल्कुल असली व्यक्ति या घटना की तरह लगे। जिसे देखकर कोई भी धोखा खा जाए। 5. किन चीजों को SGI नहीं माना जाएगा? फोटो की ब्राइटनेस बढ़ाना, वीडियो कंप्रेस करना या बैकग्राउंड शोर कम करना । या फिर पीपीटी बनाना, डायग्राम बनाना या रिसर्च के लिए काल्पनिक केस स्टडी बनाना । वीडियो में सबटाइटल जोड़ना, अनुवाद करना या ऑडियो को टेक्स्ट में बदलना। वहीं अगर एआई से फर्जी मार्कशीट या सरकारी लेटर बनाया, तो उसे छूट नहीं मिलेगी। 6. क्या ये नियम सिर्फ वीडियो पर लागू हैं? SGI मुख्य रूप से फोटो, वीडियो और ऑडियो पर केंद्रित है। सिर्फ टेक्स्ट SGI नहीं है, लेकिन अगर टेक्स्ट का इस्तेमाल गैर-कानूनी काम में होता है, तो IT नियमों के दायरे में आएगा । सेक्शन 3: यूजर्स और कंपनियों की जिम्मेदारी 7. क्या प्लेटफॉर्म्स पर ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा बनी रहेगी? हां, अगर कंपनियां इन नियमों का पालन करते हुए एआई कंटेंट को हटाती हैं, तो उनकी कानूनी सुरक्षा (धारा 79) बनी रहेगी । यानी, कंपनी पर कार्रवाई नहीं होगी। सेफ हार्बर’ को आसान भाषा में ऐसे समझें: कानूनी ढाल: यह सोशल मीडिया कंपनियों को मिला एक सुरक्षा कवच है, जो कहता है कि अगर किसी यूजर ने प्लेटफॉर्म पर कोई गलत पोस्ट या वीडियो डाला है, तो उसके लिए कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा। शर्तिया सुरक्षा: यह सुरक्षा तभी तक मिलती है जब तक कंपनियां सरकार के नियमों को मानती हैं। अगर वे शिकायत मिलने पर 3 घंटे के भीतर SGI नहीं हटातीं, तो
Tarn Taran Wedding Viral | Groom Showers Bride with Lakhs; Social Media Buzz

दुल्हन पर दूल्हे और उसके परिजन ने गडि्डयां खोल-खोलकर नोट उड़ाए। इस दौरान जमीन पर नोट ही नोट बिखरे दिखे। तरनतारन जिले के पट्टी क्षेत्र में एक NRI की शादी पंजाब में चर्चा का विषय बन गई। शादी समारोह के कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिनमें दिख रहा है कि दूल्हा अपनी दुल्हन पर नोटों की बारिश कर रहा है। इस दौरान रिश्तेदार खड़े होकर इस सीन को देख रहे हैं। . जबकि, कुछ लोग इस सीन को एन्जॉय कर डांस कर रहे हैं और वे भी नोट उड़ा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि दूल्हा बैग में भरकर नोट लाया था, जिसने गडि्डयां खोल-खोलकर नोट लुटाए। इस दौरान उसने 8 से 9 करोड़ रुपए उड़ा दिए। हालांकि, शादी में डीजे बजाने पहुंचे युवक ने इन दावों को गलत बताया। उसने कहा- नोटों में 10-10 के नोट ज्यादा थे, इसलिए रुपयों की संख्या ज्यादा लग रही है। हमारी इतनी कमाई नहीं हुई। डॉलर समेत करीब 3 लाख रुपये हमारे हाथ लगे हैं। सोशल मीडिया पर यूजर्स शादी की इस घटना को जश्न का अनोखा अंदाज और कुछ इसे फिजूलखर्ची बता रहे हैं। रुपयों की बारिश के PHOTOS… दूल्हे ने बैग से नोटों की गड्डियां निकाल-निकालकर नोट उड़ाए। दुल्हन पर दूल्हे ने नोटों की बारिश की। दूल्हे के अलावा रिश्तेदारों ने भी दोनों पर पैसे उड़ाए। नोटों की बारिश के दौरान डीजे वाले लोग मुटि्ठयां भर-भरकर नोट उठाते दिखे। इस दौरान जमीन पर नोटों का ढेर लगा हुआ दिखाई दिया। सामने आए वीडियो में क्या दिख रहा… शादी समारोह से बाहर आए वीडियो में दिख रहा है कि दुल्हन बीच में खड़ी है। उसके पास ही दूल्हा खड़ा है और उसके पास एक बैग है। उसमें से वह नोटों की गड्डी निकालता है। उसे खोलता है और दुल्हन के ऊपर उछाल देता है। पास ही घेरा लगाकर रिश्तेदार और परिजन खड़े हुए हैं। डीजे बज रहा है, जिसकी धुन पर कुछ लोग नाच भी रहे हैं। पास खड़े ज्यादातर लोग नोटों की इस बारिश को अपने मोबाइल फोन के कैमरे में कैद करने में लगे हुए हैं। जमीन पर नोटों का ढेर लगा है और कुछ लोग उन नोटों को बटोरकर ले जा रहे हैं। लोग बोले- यह फिजूलखर्ची 14 फरवरी को हुई इस शादी का जब वीडियो सोशल मीडिया पर आया तो लोगों ने इसे मिलाजुला रिएक्शन दिया। कई लोगों ने इसे शाही अंदाज बताया, तो कुछ ने इसे फिजूलखर्ची करार दिया। सोशल मीडिया पर यहां तक चर्चा हो गई कि शादी में करोड़ों रुपये उड़ा दिए गए। जानकारी के मुताबिक, परिजन दूल्हा और दुल्हन का नाम गुप्त रखना चाहते हैं। हालांकि, इतना जरूर बताया कि तरनतारन के गांव मानोचाल में यह शादी हुई। दुल्हन इसी गांव की रहने वाली है, जबकि शादी के लिए लड़के का परिवार ऑस्ट्रेलिया से आया था। दूल्हे के दोस्त भी ऑस्ट्रेलिया और कनाडा से आए थे, जिन्होंने दूल्हा और दुल्हन पर डॉलर उड़ाए। DJ संचालक ने करोड़ों के दावे नकारे, यह जानकारी दी… मैंने शादी में डीजे बजाया: शादी में DJ लेकर पहुंचे युवक ने पूरी बात बताई। उसने बताया- मेरा नाम निशान सिंह है। मैं गांव चाम कजला, जिला तरनतारन का रहने वाला हूं। मेरा अपना डीजे सेटअप है और मेरा बैनर माझा ब्लॉक डीजे तरनतारन के नाम से चलता है। 8-9 करोड़ रुपए की जानकारी गलत: उसने कहा- मैं 14 फरवरी की वायरल हो रही उन वीडियो के बारे में कहना चाहता हूं, जिनमें शादी के दौरान दूल्हा-दुल्हन की जोड़ी पर नोट उड़ाते हुए दिखाया जा रहा है। बहुत से लोग इन वीडियो को अपने-अपने सोशल मीडिया पेजों पर डाल रहे हैं और कोई 8 करोड़ तो कोई 9 करोड़ रुपये उड़ाने की बात लिख रहा है। यह बिल्कुल गलत है। लोग सिर्फ व्यूज लेने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर ऐसी बातें लिख रहे हैं। कुल मिलाकर 3 लाख रुपए थे: निशान ने कहा- मैं साफ करना चाहता हूं कि यह प्रोग्राम मैंने लगाया था, क्योंकि वह परिवार और दूल्हा मेरे दोस्त थे। यह पूरा फंक्शन उन्हीं के घर का था और डीजे की जिम्मेदारी मेरे पास थी। जो पैसे उड़ाए गए थे, वे करोड़ों में नहीं थे। कुल मिलाकर लगभग 3 लाख रुपये ही थे। ज्यादातर 10-10 रुपये के नोट थे।
Social Media Side Effects; Teenager Safety Tips

10 दिन पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सवाल- मैं यूपी की रहने वाली हूं। मेरी 15 साल की बेटी क्लास 9 में पढ़ती है। वह अपने दोस्तों की तरह सोशल मीडिया यूज करना चाहती है। उसका कहना है कि “मेरे सभी दोस्तों के सोशल मीडिया अकाउंट्स हैं, मुझे भी अपना अकाउंट बनाना है।” वह मोबाइल फोन चलाती है, लेकिन मैंने अभी तक उसे सोशल मीडिया से दूर रखा है, क्योंकि मैं साइबर बुलिंग और प्राइवेसी के रिस्क से डरती हूं। बेटी को लगता है कि मैं पुराने ख्यालों की हूं। क्या टीनएज बच्चे को सोशल मीडिया यूज करने देना चाहिए। क्या गाइडलाइंस होनी चाहिए ताकि वह रिस्पॉन्सिबल रहे? एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर जवाब- मैं आपकी चिंता समझ सकती हूं। आज के समय में बहुत सारे पेरेंट्स इस स्थिति का सामना करते हैं। लेकिन टीनएज वह दहलीज है, जहां बच्चे ‘फोमो’ यानी पीछे छूट जाने का डर महसूस करते हैं। आमतौर पर ऐसा होता है कि जब दोस्त किसी रील या ट्रेंड पर चर्चा करते हैं तो सभी बच्चे उसमें शामिल होना चाहते हैं। ऐसे में जिस बच्चे को इस बारे में कुछ पता नहीं होता, वह अलग-थलग महसूस करता है। आपका डर जायज है, लेकिन सोशल मीडिया पर पूरी तरह पाबंदी लगाना ठीक नहीं है। इससे बच्चों की जिज्ञासा बढ़ जाती है और वे इसे चोरी-छिपे इस्तेमाल करने लगते हैं। इसलिए ‘पाबंदी’ लगाने की बजाय आपको उसे सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में बताना चाहिए। साथ ही इसके खतरों के बारे में भी। लेकिन इससे पहले ये समझिए कि टीनएज में बच्चे सोशल मीडिया के प्रति क्यों आकर्षित होते हैं। टीनएज में सोशल मीडिया के प्रति झुकाव टीनएज में ‘सोशल वैलिडेशन’ बहुत मायने रखता है। वहीं सोशल मीडिया टीनएजर्स को एक ऐसा मंच देता है, जहां वे अपनी पहचान बना सकते हैं और अपनी पसंद की चीजों को दुनिया के साथ साझा कर सकते हैं। यह उनके लिए केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक वर्चुअल दुनिया है, जहां वे अपने अस्तित्व को तलाशते हैं। साथ ही यहां मिलने वाला इंस्टेंट रिएक्शन (लाइक्स, कमेंट्स और व्यूज) उन्हें यह एहसास कराता है कि लोग उन्हें देख रहे हैं और ये मायने रखता है। टीनएजर्स के सोशल मीडिया के प्रति अट्रैक्शन के कई कारण हो सकते हैं। टीनएज में सोशल मीडिया यूज के रिस्क यहां ये समझना भी जरूरी है कि सोशल मीडिया सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि मेंटल और इमोशनल हेल्थ से भी जुड़ा हुआ है। 13-15 साल की उम्र में बच्चों का ब्रेन पूरी तरह विकसित नहीं होता है। उनमें ‘इम्पल्स कंट्रोल’ (खुद पर नियंत्रण) की कमी होती है। वे अक्सर बिना सोचे-समझे फोटो या जानकारी साझा कर देते हैं, जो उनके लिए मुसीबत की वजह बन सकती है। इसके अलावा लाइक्स और कमेंट्स उनके आत्मविश्वास को प्रभावित करते हैं। ऐसे में टीनएज में सोशल मीडिया यूज करने के कई खतरे भी हो सकते हैं। बेटी को सोशल मीडिया के खतरों के बारे में बताएं आप अपनी बच्ची को छोटे-छोटे उदाहरणों के जरिए सोशल मीडिया के रिस्क समझाएं। उसे बता सकती हैं कि सोशल मीडिया से जुड़े रिस्क के कारण ही हाल में ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इसके इस्तेमाल पर बैन लगाया गया। स्टडीज के हवाले से यह भी समझाएं कि सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों में कई हेल्थ रिस्क पैदा करता है। इसके कारण एंग्जाइटी, आत्मविश्वास में कमी, नींद न पूरी होना, फोकस में कमी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके साथ ही आए दिन वायरल होने वाले फोटो, वीडियो, ऑनलाइन चैलेंज और साइबर क्राइम के उदाहरणों पर भी बात करें। उसे समझाएं कि फोटो या चैट का स्क्रीनशॉट लेकर कोई भी उसका दुरुपयोग कर सकता है। उसे बताएं कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर बात सच नहीं होती है। उसे भरोसा दिलाएं कि अगर ऑनलाइन कुछ गलत होता है तो वह बिना डरे आपको बता सकती है। बेटी को समझाएं कि आप उसके खिलाफ नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा के लिए चिंतित हैं। इससे बच्ची बेहतर समझ और जागरूकता के साथ डिजिटल दुनिया को देखेगी। सोशल मीडिया के लिए जरूरी सेफ्टी टिप्स अब आते हैं कि बेटी को सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में कैसे बताएं। यहां पेरेंट्स का रोल पुलिसिंग का नहीं, बल्कि गाइड का होना चाहिए। बच्ची को डराने के बजाय उसे संभावित खतरों के प्रति सचेत करना जरूरी है। उसे बताएं कि इंटरनेट पर जो एक बार चला गया, वह हमेशा के लिए वहां रह जाता है। इसके लिए बच्ची को सोशल मीडिया यूज के कुछ बेसिक सेफ्टी टिप्स जरूर बताएं। पेरेंट्स न करें ये गलतियां बच्चों को सोशल मीडिया से बचाने की कोशिश में कई बार पेरेंट्स अनजाने में कुछ गलतियां कर बैठते हैं। डराने और पाबंदी लगाने की बजाय बच्चों पर बातचीत का असर ज्यादा होता है। इससे उनमें बेहतर समझ पैदा होती है और पेरेंट्स के प्रति भरोसा बढ़ता है। बातचीत के अलावा कुछ और बाताें का भी खास ख्याल रखें। जैसेकि– हर वक्त बच्चे की जासूसी न करें। सोशल मीडिया को लेकर डर का माहौल न बनाएं। बच्चे की बात सुने बिना फैसला न थोपें। खुद भी बहुत ज्यादा सोशल मीडिया यूज न करें। गलती पर डांटें या शर्मिंदा न करें। बच्चे की ऑनलाइन दुनिया को पूरी तरह नजरअंदाज न करें। टेक्नोलॉजी से पूरी तरह कट ऑफ न करें। अंत में मैं यही कहूंगी कि टीनएज में सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह सही या पूरी तरह गलत नहीं होता। फर्क इस बात से पड़ता है कि उसे कितनी समझ, कितने समय और कितनी निगरानी के साथ इस्तेमाल किया जा रहा है। पेरेंट्स का काम रोकना नहीं, बल्कि बच्चों को सुरक्षित और जिम्मेदार यूजर बनाना है। इसके अलावा जब पेरेंट्स खुद संतुलित और समझदार रोल मॉडल बनते हैं, तभी बच्चे भी सोशल मीडिया को जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना सीखते हैं। ……………….. पेरेंटिंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए पेरेंटिंग- मम्मी-पापा एथलीट, लेकिन बेटे को स्पोर्ट्स में इंटरेस्ट नहीं:क्या करूं कि वो खेलों में रुचि ले, क्या फोर्स करना सही है अक्सर माता-पिता अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए उन पर अपनी उम्मीदें थोप देते हैं। इसे साइकोलॉजी में ‘प्रोजेक्शन’ कहते हैं, इसका







