Saturday, 06 Jun 2026 | 08:05 AM

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Gurinderveer Singh Indias Fastest Runner

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Hindi News Sports Gurinderveer Singh Indias Fastest Runner | 100m Record Shatters Myths नई दिल्ली14 मिनट पहले कॉपी लिंक 25 साल के गुरिंदरवीर सिंह ने शनिवार को एथलेटिक्स फेडरेशन कप की 100 मीटर दौड़ 10.09 सेकेंड में पूरी कर भारत के सबसे तेज धावक बनने का रिकॉर्ड बनाया। जीत के बाद उन्होंने कहा- ‘लोग कहते थे कि भारतीयों में 100 मीटर दौड़ वाला जिंस नहीं है। मैं इसे गलत साबित करना चाहता था।’ साल 2008 में मशहूर धावक उसैन बोल्ट ने ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीता था। तब 7 साल के गुरिंदरवीर सिंह TV पर यह देख रहे थे। बोल्ट को रिकॉर्ड बनाते देख वे प्रेरित हुए और तभी ठान लिया कि एक दिन भारत के सबसे तेज धावक बनकर देश का नाम रोशन करेंगे। कांस्टेबल पिता कमलजीत उन्हें अक्सर बोल्ट के किस्से सुनाते थे। जीत के बाद गुरिंदरवीर सिंह की मां रुपिंदर कौर और पिता कमलजीत सिंह। गुरिंदरवीर की 2 बातें… अनिमेष के साथ कॉम्पिटिशन पर गुरिंदरवीर ने कहा, ‘बहुत अच्छा है। ये होना चाहिए। जब तक कॉम्पिटिशन नहीं होगा, तब तक लोगों को मजा नहीं आएगा। अनिमेष का शुक्रिया कि वो फुटबॉल छोड़कर एथलेटिक्स में आया। अगर वह तेज दौड़ता है, तो मैं उससे तेज दौड़ना चाहता हूं।’ एथलेटिक्स को करियर बनाने पर गुरिंदरवीर ने कहा, ‘जब मैं छठी-सातवीं में पढ़ता था, तब से लोग कहते थे कि 100 मीटर में कोई भविष्य नहीं है। भारतीय 100 मीटर नहीं भाग सकते। स्प्रिंट के लिए इंडियन जींस नहीं हैं। उन्हें गलत साबित करना है कि इंडियन जींस में बहुत दम है।’ लॉकडाउन में किराए पर होटल लेकर ट्रेनिंग की कोविड में ट्रैक और जिम बंद होने पर जालंधर में गुरिंदरवीर, कोच सरबजीत सिंह हैप्पी के साथ चोरी-छिपे स्थानीय पार्कों के ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर दौड़ते थे। वे सुबह सुरक्षाकर्मियों की नजरों से बचकर ट्रैक पर पहुंचते, रनिंग ड्रिल पूरी कर लौट आते। कई बार ट्रेनिंग जारी रखने के लिए पटियाला में कुछ दिनों के लिए होटल किराए पर लेना पड़ता था। गुरिंदरवीर सिंह की यह तस्वीर रांची में फेडरेशन कप के दौरान ली गई है। जब रूममेट ने कहा था- ‘फाइनल भी पूरा नहीं कर पाओगे’, गोल्ड जीतकर दिया जवाब 2017 की एशियन यूथ चैम्पियनशिप से पहले गुरिंदरवीर ने छह महीने तक स्मार्टफोन से दूरी बना ली थी। उनकी दुनिया सिर्फ अभ्यास और ट्रैक तक सीमित थी। लेकिन बैंकॉक में 100 मीटर हीट में वे आखिरी रहे तो ताने मिलने लगे। रूममेट तक कहने लगे कि फाइनल भी पूरा नहीं कर पाओगे। गुरिंदरवीर ने पिता कमलजीत सिंह को फोन कर कहा कि दूसरा-तीसरा रैंक शायद मिल जाए। यह सुन पिता बोले ‘अगर सोच ही वही है, तो पहला कभी नहीं आएगा।’ पिता की यही डांट प्रेरणा बनी और अगले दिन गुरिंदरवीर ने पहला रैंक हासिल कर गोल्ड जीत लिया। गुरिंदरवीर सिंह 10.09 सेकेंड की टाइमिंग के साथ भारत के सबसे तेज धावक बने। ————————————- गुरिंदरवीर की यह खबर भी पढ़िए… गुरिंदरवीर 100 मीटर में भारत के सबसे तेज धावक, 10.09 सेकेंड में जीते रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में शनिवार भारतीय एथलेटिक्स के लिए ऐतिहासिक दिन रहा। पंजाब के 25 साल के स्प्रिंटर गुरिंदरवीर सिंह ने एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता की पुरुषों की 100 मीटर रेस 10.09 सेकेंड में पूरी की और नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया। यह पहली बार है, जब किसी भारतीय ने 100 मीटर रेस 10.10 सेकेंड से कम समय में पूरी की है। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Hindi News Sports Gurinderveer Singh Indias Fastest Runner | 100m Record Shatters Myths नई दिल्ली37 मिनट पहले कॉपी लिंक 25 साल के गुरिंदरवीर सिंह ने शनिवार को एथलेटिक्स फेडरेशन कप की 100 मीटर दौड़ 10.09 सेकेंड में पूरी कर भारत के सबसे तेज धावक बनने का रिकॉर्ड बनाया। जीत के बाद उन्होंने कहा- ‘लोग कहते थे कि भारतीयों में 100 मीटर दौड़ वाला जिंस नहीं है। मैं इसे गलत साबित करना चाहता था।’ साल 2008 में मशहूर धावक उसैन बोल्ट ने ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीता था। तब 7 साल के गुरिंदरवीर सिंह TV पर यह देख रहे थे। बोल्ट को रिकॉर्ड बनाते देख वे प्रेरित हुए और तभी ठान लिया कि एक दिन भारत के सबसे तेज धावक बनकर देश का नाम रोशन करेंगे। कांस्टेबल पिता कमलजीत उन्हें अक्सर बोल्ट के किस्से सुनाते थे। जीत के बाद गुरिंदरवीर सिंह की मां रुपिंदर कौर और पिता कमलजीत सिंह। गुरिंदरवीर की 2 बातें… अनिमेष के साथ कॉम्पिटिशन पर गुरिंदरवीर ने कहा, ‘बहुत अच्छा है। ये होना चाहिए। जब तक कॉम्पिटिशन नहीं होगा, तब तक लोगों को मजा नहीं आएगा। अनिमेष का शुक्रिया कि वो फुटबॉल छोड़कर एथलेटिक्स में आया। अगर वह तेज दौड़ता है, तो मैं उससे तेज दौड़ना चाहता हूं।’ एथलेटिक्स को करियर बनाने पर गुरिंदरवीर ने कहा, ‘जब मैं छठी-सातवीं में पढ़ता था, तब से लोग कहते थे कि 100 मीटर में कोई भविष्य नहीं है। भारतीय 100 मीटर नहीं भाग सकते। स्प्रिंट के लिए इंडियन जींस नहीं हैं। उन्हें गलत साबित करना है कि इंडियन जींस में बहुत दम है।’ लॉकडाउन में किराए पर होटल लेकर ट्रेनिंग की कोविड में ट्रैक और जिम बंद होने पर जालंधर में गुरिंदरवीर, कोच सरबजीत सिंह हैप्पी के साथ चोरी-छिपे स्थानीय पार्कों के ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर दौड़ते थे। वे सुबह सुरक्षाकर्मियों की नजरों से बचकर ट्रैक पर पहुंचते, रनिंग ड्रिल पूरी कर लौट आते। कई बार ट्रेनिंग जारी रखने के लिए पटियाला में कुछ दिनों के लिए होटल किराए पर लेना पड़ता था। गुरिंदरवीर सिंह की यह तस्वीर रांची में फेडरेशन कप के दौरान ली गई है। जब रूममेट ने कहा था- ‘फाइनल भी पूरा नहीं कर पाओगे’, गोल्ड जीतकर दिया जवाब 2017 की एशियन यूथ चैम्पियनशिप से पहले गुरिंदरवीर ने छह महीने तक स्मार्टफोन से दूरी बना ली थी। उनकी दुनिया सिर्फ अभ्यास और ट्रैक तक सीमित थी। लेकिन बैंकॉक में 100 मीटर हीट में वे आखिरी रहे तो ताने मिलने लगे। रूममेट तक कहने लगे कि फाइनल भी पूरा नहीं कर पाओगे। गुरिंदरवीर ने पिता कमलजीत सिंह को फोन कर कहा कि दूसरा-तीसरा रैंक शायद मिल जाए। यह सुन पिता बोले ‘अगर सोच ही वही है, तो पहला कभी नहीं आएगा।’ पिता की यही डांट प्रेरणा बनी और अगले दिन गुरिंदरवीर ने पहला रैंक हासिल कर गोल्ड जीत लिया। गुरिंदरवीर सिंह 10.09 सेकेंड की टाइमिंग के साथ भारत के सबसे तेज धावक बने। ————————————- गुरिंदरवीर की यह खबर भी पढ़िए… गुरिंदरवीर 100 मीटर में भारत के सबसे तेज धावक, 10.09 सेकेंड में जीते रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में शनिवार भारतीय एथलेटिक्स के लिए ऐतिहासिक दिन रहा। पंजाब के 25 साल के स्प्रिंटर गुरिंदरवीर सिंह ने एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता की पुरुषों की 100 मीटर रेस 10.09 सेकेंड में पूरी की और नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया। यह पहली बार है, जब किसी भारतीय ने 100 मीटर रेस 10.10 सेकेंड से कम समय में पूरी की है। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

रेगिस्तान में बकरियां चराती थीं, आज फुटबॉल खिलाड़ी:लड़कियों के शॉर्ट्स पहनने का विरोध हुआ, कोच ने बेच दी थी अपनी 15 बीघा जमीन

रेगिस्तान में बकरियां चराती थीं, आज फुटबॉल खिलाड़ी:लड़कियों के शॉर्ट्स पहनने का विरोध हुआ, कोच ने बेच दी थी अपनी 15 बीघा जमीन

तपती रेत, दूर-दूर तक फैला सन्नाटा, और रूढ़िवादिता की मजबूत बेड़ियां। ढाई हजार की आबादी का यह छोटा सा गांव ढींगसरी, राजस्थान के नक्शे पर किसी भी आम रेतीले गांव जैसा ही नजर आता है। इन दिनों इस गांव की हवा बदली हुई है। सुबह की पहली किरण फूटने से पहले, जब पूरा रेगिस्तान सो रहा होता है, तब यहां की रेतीली जमीन पर जूतों की थाप और फुटबॉल की ‘टप-टप’ की आवाजें गूंजने लगती हैं। यह कहानी सिर्फ एक खेल की नहीं है। यह कहानी है उस संघर्ष की, जिसने बकरियां चराने वाली और घर-खेत के कामों में सिमटी बच्चियों को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बना दिया। आज वर्ल्ड फुटबॉल डे के मौके पर बीकानेर शहर से दक्षिण में 58 किलोमीटर दूर ढींगसरी गांव हम आपके ले चलते हैं, जहां की बेटियां फुटबॉल में नाम कमा रही हैं। जो कल तक बकरियां चराती थीं, वो आज देश के लिए गोल दाग रही हैं ढींगसरी गांव की एक बेटी है- मुन्नी भांभू। मुन्नी आज इस गांव की हर उस बच्ची की उम्मीद का चेहरा बन चुकी है, जो कभी पिंजरे में कैद थी। एक बेहद सामान्य परिवार से आने वाली मुन्नी के पास कभी खेलने के लिए ढंग के जूते तक नहीं थे। वो संसाधनों की कमी के बावजूद सबसे पहले मैदान पहुंचती और देर शाम तक अकेले पसीना बहाती। आज मुन्नी भांभू भारतीय अंडर-17 महिला फुटबॉल टीम की मुख्य गोलकीपर हैं और चीन में हुए ‘एशियन कप क्वालिफायर मैच’ में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। 27 साल बाद राजस्थान से भारतीय महिला फुटबॉल टीम में जगह बनाने वाली वे पहली खिलाड़ी हैं। इतना ही नहीं, ‘SAFF U-19 महिला चैंपियनशिप 2026’ में मुन्नी को ‘सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर’ का अवॉर्ड भी मिल चुका है। मुन्नी भावुक हो जाती हैं और कहती हैं- मैं तो गांव में बस सामान्य पढ़ाई कर रही थी। विक्रम सर ने उंगली थामी और मुझे फुटबॉल से जोड़ा। आज मैं जो कुछ भी हूं, उन्हीं की बदौलत हूं। गांव की बेटियां गोलकीपर के दस्ताने पहनकर तूफानी शॉट रोक रहीं ढींगसरी गांव की मुन्नी अकेली नहीं है। इस रेतीले धोरों से फुटबॉल की ऐसी पौध निकली है कि आज गांव की करीब 60 बेटियां मैदान पर पसीना बहा रही हैं। ये वो बच्चियां हैं, जिनके हाथों में कुछ समय पहले तक या तो बकरियां चराने की लाठी थी, या फिर चूल्हा-चौका संभालते हुए घरेलू काम का बोझ। जिन उंगलियों को सिर्फ गोबर के उपले थापना सिखाया जा रहा था, आज वे गोलकीपर के दस्ताने पहनकर तूफानी शॉट रोक रही हैं। लड़कों ने नहीं दिखाया इंटरेस्ट, तो कोच ने थामी लड़कियों की उंगली इस सुनहरे सफर की शुरुआत साल 2020 में हुई थी। भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान और अर्जुन अवॉर्डी मगन सिंह राजवी के बेटे विक्रम सिंह राजवी (जो खुद रेलवे में हैं और फुटबॉल कोच हैं) ने नई पीढ़ी को तराशने का बीड़ा उठाया। उन्होंने शुरुआत गांव के लड़कों से की थी, लेकिन लड़कों ने खेल में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। वे कभी प्रैक्टिस में आते, तो कभी गायब हो जाते। गांव की बेटियों को मैदान में उतारा यह राह इतनी आसान नहीं थी। विक्रम सिंह उन घरों तक पहुंचे जहां बच्चियां सिर्फ स्कूल, चूल्हे-चौके या खेत के कामों तक सीमित थीं। शुरुआत में हर दरवाजे से ‘ना’ सुनने को मिली। लोग बेटियों को बाहर भेजने को तैयार नहीं थे। लेकिन कोच की जिद के आगे कुछ परिवार राजी हुए और साल 2021 में 20 लड़कियों के साथ ढींगसरी की रेतीली जमीन पर ट्रेनिंग शुरू हुई। जब ‘शॉर्ट्स’ पहनने पर हुआ विरोध, तो घर की महिलाओं को मैदान में उतारा गांव में लड़कियों का फुटबॉल खेलना ही बड़ी बात थी, लेकिन असली परीक्षा तब हुई जब बच्चियों को लोअर (शॉर्ट्स) पहनकर खेलने को कहा गया। रूढ़िवादी माहौल में बच्चियों के छोटे कपड़े पहनकर खेलने को लेकर खूब विरोध हुआ। परिवार वाले अड़ गए। तब कोच विक्रम सिंह ने एक तरकीब निकाली। उन्होंने कोटा फुटबॉल एकेडमी की टीम को ढींगसरी में मैच के लिए बुलाया। उस मैच में कोटा की लड़कियां शॉर्ट्स पहनकर उतरीं और ढींगसरी की टीम हार गई। विक्रम सिंह ने बच्चियों और उनके माता-पिता को समझाया कि इस खेल में फुर्ती के लिए शॉर्ट्स पहनना मजबूरी है, शौक नहीं। ग्रामीणों का झिझक और डर दूर करने के लिए कोच की पत्नी और उनके घर की महिलाएं भी हर रोज प्रैक्टिस के दौरान मैदान पर बैठने लगीं। तब जाकर माता-पिता का भरोसा जागा। कोच विक्रम सिंह राजवी कहते हैं- शुरुआत में जो बच्चियां 4-5 किलोमीटर दूर से आती थीं, उन्हें खुद अपनी गाड़ी से मैदान लाता था। उनके पैर न रुकें, बस यही एक जिद थी। एक खिलाड़ी की सगाई हुई, तो पूरी टीम को लेकर कोटा चले गए कोच साल 2022 में इस सफर में एक और बड़ा मोड़ आया। टीम की एक होनहार खिलाड़ी की उसके घर वालों ने कोटा में सगाई तय कर दी। विक्रम सिंह को डर था कि कहीं एक लड़की के जाने से पूरी टीम का हौसला न टूट जाए। उन्होंने एक ऐतिहासिक फैसला लिया। वे सभी 20 बच्चियों को लेकर खुद कोटा शिफ्ट हो गए। वहां उनका स्कूल में एडमिशन कराया और एकेडमी जॉइन कराई। दो साल की इस तपस्या का फल तब मिला, जब कर्नाटक के बेलगाम में नेशनल टूर्नामेंट हुआ। राजस्थान की टीम में चुने गए 22 खिलाड़ियों में से 12 लड़कियां अकेले ढींगसरी गांव की थीं। जब इन बेटियों ने कर्नाटक में नेशनल फुटबॉल टूर्नामेंट जीता, तो पूरे ढींगसरी गांव की आंखों में आंसू आ गए। जो गांव कभी विरोध कर रहा था, वो अब अपनी बेटियों के स्वागत में पलकें बिछाए खड़ा था। बेटियों के सपनों के लिए बेच डाली 15 बीघा जमीन साल 2024 में विक्रम सिंह बच्चियों को लेकर वापस गांव लौट आए। अब गांव वालों का विश्वास मजबूत हो चुका था, लेकिन ट्रेनिंग के लिए एक बड़े मैदान की जरूरत थी। विक्रम सिंह ने पहले अपनी जमा पूंजी से गांव में 10 बीघा जमीन खरीदी, लेकिन मैदान छोटा पड़ रहा था। उन्हें 8.50 बीघा जमीन और चाहिए थी। विक्रम सिंह बताते हैं- गांव से दूर मेरी 15 बीघा पुश्तैनी जमीन और थी। लेकिन एकेडमी मुझे इसी गांव में बनानी थी। मैंने

जालंधर के गुरिंदर ने जीतकर मां को कहा-देखी मेरी रेस:पिता से बोला-डेडी दस्स फेर किदां, 12 साल से दौड़ना शुरू किया; नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया

जालंधर के गुरिंदर ने जीतकर मां को कहा-देखी मेरी रेस:पिता से बोला-डेडी दस्स फेर किदां, 12 साल से दौड़ना शुरू किया; नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया

जालंधर के गुरिंदर वीर सिंह ने रांची में भारतीय एथलेटिक्स का नया इतिहास लिख दिया है। 29वें नेशनल सीनियर फेडरेशन कप में पंजाब के इस धावक ने 100 मीटर दौड़ मात्र 10.09 सेकंड में पूरी की। गुरिंदर वीर की उलब्धि पर परिवार में खुशी का माहौल है। करीब 90 साल की दादी ने भी लड्डू खाकर पोते को आशीर्वाद दिया। गुरिंदर वीर के पिता कमलजीत सिंह ने कहा कि जैसे ही बेटे ने रेस जीती तो उसके मोबाइल पर बधाइयों के फोन आना शुरू हो गए। फोन बिजी होने से बेटे से पहली बात उसकी मां की हुई। जब उसने मुझे फोन किया तो एक ही बात कही कि डेडी दस्स फेर किदां (अब बताओ कैसा लगा) गुरिंदर की मां गुरविंदर कौर ने बताया कि रेस जीतने के बाद उसने पहला फोन मुझे किया और कहा कि मम्मी मेरी रेस देखी। मैंने कहा कि हां तूने कमाल कर दिया। रेस जीतने और रिकॉर्ड तोड़ने का पता लगने के बाद से गुरिंदर वीर के घर के बाहर लोगों की भीड़ लग गई। आस-पड़ोस के लोग घर के बाहर पहुंचे और परिवार को बधाई दी। पिता बोले-पहले ही रिकॉर्ड लिखा था, मुझे पता नहीं था नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने वाले गुरिंदर वीर ने कॉमनवेल्थ गेम्ज में अपनी जगह पक्की कर ली। बिरसा मुंडा स्टेडियम में फाइनल दौड़ पूरी करते ही गुरिंदर ने अपनी छाती पर लगे नंबर (चेस्ट नंबर) की ओर इशारा किया। उन्होंने फाइनल से पहले ही उस नंबर के पीछे अपना लक्ष्य 10.10 लिख दिया था। इस बारे में पूछने पर उनके पिता ने कहा कि गुरिंदर ने पहले ही रिकॉर्ड का समय लिख रखा था, इसकी जानकारी उनको भी न्यूज के माध्यम से चली। इसके साथ ही उसने लिखा था- रुको, मैं अब भी खड़ा हूं। बता दें कि 100 मी. दौड़ का वर्ल्ड रिकॉर्ड (9.58 सेकंड) जमैका के महान धावक उसेन बोल्ट के नाम है। मां बोलीं- मुझे गोल्ड की पक्की उम्मीद है मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। परमात्मा ने उस बच्चे को गुण बख्शा है। उसने पहले ही तय कर लिया था कि 10.10 सेंकेंड में रेस पूरी करनी है। उसने इस मुकाम के लिए बहुत मेहनत की है। वो रोज 8 घंटे प्रेक्टिस करता था। घर पर बात करने के लिए उसके पास वक्त नहीं मिलता था। उसने अपने शरीर को बहुत तोड़ा है। रेस जीतने के बाद पहले मुझसे बात कि और बोला कि मम्मा देखी है रेस। मैंने कहा कि हां देखी तूने आज खुश कर दिया है। परमात्मा इसी तरह मेहर रखेंगे तो कॉमनवेल्थ में भी गोल्ड आएगी। मुझे उस पर पूरा विश्वास है। वो एक बार जो ठान लेता है उसे पूरा करता है। 12 साल की उम्र में पिता के साथ रेस लगानी शुरू की गुरिंदर वीर के पिता कमलजीत सिंह ने बताया कि वह खुद भी वॉलीबाल के प्लेयर रहे हैं। वो तो इतना ऊंचा मुकाम हासिल नहीं कर पाए लेकिन मन में एक सपना था कि बेटा स्पोर्ट्स में कुछ कर दिखाए। गुरिंदर वीर बचपन से उनके साथ दौड़ लगाने जाता था। 12 साल की उम्र में उसने ठीक से प्रेक्टिस शुरू की। छोटी उम्र में ही वो मुझे भी पीछे छोड़ देता था। दौड़ने में उसकी मेहनत और लगन देख उसे इसी स्पोर्ट्स में डाला।

Ram Charan Apologizes to Jasprit Bumrah for Football Gaffe

Ram Charan Apologizes to Jasprit Bumrah for Football Gaffe

38 मिनट पहले कॉपी लिंक साउथ फिल्म स्टार रामचरण अपनी आने वाली फिल्म ‘पेड्डी’ के म्यूजिक लॉन्च के लिए भोपाल पहुंचे थे। इस इवेंट में उनके साथ एआर रहमान और जान्हवी कपूर भी मौजूद थे। बातचीत के दौरान रामचरण ने भारतीय क्रिकेटरों की तारीफ की, लेकिन तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह का जिक्र करते हुए उनसे एक भूल हो गई। उन्होंने क्रिकेट की जगह गलती से फुटबॉल से जोड़ दिया। इसका वीडियो सामने आने के बाद रामचरण ने तुरंत बुमराह से माफी मांगी और इसे भीड़ के बीच हुई उत्साह में हुई गलती बताया है। एक्टर राम चरण। क्रिकेटरों को बताया लीजेंड और फायर भोपाल में हुए इस कार्यक्रम के दौरान रामचरण से भारतीय क्रिकेटरों को कुछ शब्दों में बताने के लिए कहा गया था। उन्होंने सचिन तेंदुलकर के करियर को ‘लंबा और महान सफर’ बताया। महेंद्र सिंह धोनी को ‘शांत और कूल’ कहा, जबकि रोहित शर्मा को ‘हर किसी का पसंदीदा इंसान’ बताया। विराट कोहली का नाम सामने आने पर उन्होंने सिर्फ एक शब्द ‘फायर’ कहा। वहीं कार्यक्रम के दौरान एक बार उन्होंने मध्यप्रदेश को बिहार कहकर पुकारा। जब वे स्टेज से जनता को संबोधित कर रहे थे, तब उन्होंने कहा हमारे, बिहार के लोगों को, बिहार के लोग, मेरे आप साथ हो आप? मांगी माफी, खुद को बताया भुलक्कड़ वीडियो सामने आने के बाद रामचरण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर कर बुमराह से माफी मांगी। उन्होंने लिखा, “उफ्फ… मैं कभी-कभी नामों को लेकर चीजें भूल जाता हूं। इस गड़बड़ी के लिए जसप्रीत बुमराह जी से माफी मांगता हूं। इतने उत्साह और भारी भीड़ के बीच यह सिर्फ एक इंसानी भूल थी।” रामचरण ने आगे लिखा कि वे बुमराह का बहुत सम्मान करते हैं और उनके खेल की सराहना करते हैं। हालांकि रामचरण की इस गलती के बाद उनके की फैंस उनका सपोर्ट करते दिखाई दिए। एक यूजर ने लिखा कि “रामचरण ने बुमराह को फुटबॉल का लेजेंड बना दिया। लेकिन मुझे पसंद आया जिस आत्मविश्वास के साथ उन्होंने ये बात कही।” फिल्म ‘पेड्डी’ के बारे में जानिए फिल्म ‘पेड्डी’ एक बड़ी पैन-इंडिया फिल्म है, जिसकी स्टारकास्ट भोपाल में इसके संगीत को प्रमोट करने आई थी। इस फिल्म में रामचरण के साथ जान्हवी कपूर मुख्य भूमिका में हैं, जबकि संगीत ऑस्कर विजेता एआर रहमान ने तैयार किया है। रामचरण की पिछली फिल्म ‘आरआरआर’ की सफलता के बाद से ही उत्तर भारत में भी उनकी फिल्मों को लेकर दर्शकों में काफी दिलचस्पी रहती है। यह फिल्म 4 जून को रिलीज होगी। ये खबर भी पढ़ें रैपिड फायर विद राम चरण:सलमान खान को कहा मोस्ट स्टाइलिश, जानिए विलेन बनने के हाईपोथेटिकल सवाल का क्या था मजेदार जवाब साउथ सुपरस्टार राम चरण, RRR, मगधीरा, रंगस्थल जैसी बेहतरीन फिल्मों के बाद अब जल्द ही फिल्म पेद्दी ला रहे हैं। ये फिल्म 4 जून को रिलीज होने वाली है, जिसका ट्रेलर भी जारी किया जा चुका है। फिल्म रिलीज से पहले दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में राम चरण ने रैपिड फायर के कई बेहतरीन सवालों का मजेदार जवाब दिया है। पूरी खबर पढ़ें… भोपाल में गूंजी AR रहमान की आवाज, झूम उठे फैंस:फिल्म ‘पेद्दी’ का प्रमोशन करने पहुंचे राम चरण और जाह्नवी कपूर, भेल दशहरा मैदान पर उमड़े फैंस भोपाल के भेल दशहरा मैदान में मशहूर संगीतकार और ऑस्कर विजेता गायक एआर रहमान लाइव कॉन्सर्ट करने पहुंचे। कॉन्सर्ट शुरू होने से पहले ही मैदान में फैंस की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दूर से पहुंचे लोग एआर रहमान की आवाज सुनने के लिए घंटों से इंतजार करते नजर आए। रहमान ने तेलुगू फिल्म पेद्दी के गाने ‘होलु लू’ गाया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

'आईपीएल में बिहार की भी अपनी टीम होनी चाहिए':वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने उठाई मांग, CM सम्राट बोले- निश्चित ही सकारात्मक निर्णय लेंगे

'आईपीएल में बिहार की भी अपनी टीम होनी चाहिए':वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने उठाई मांग, CM सम्राट बोले- निश्चित ही सकारात्मक निर्णय लेंगे

आईपीएल 2026 में बिहार के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। चाहे वह पटना की ईशान किशन हो, समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी या फिर गोपालगंज के साकिब हुसैन। सभी अपने शानदार परफॉर्मेंस से चर्चा का विषय बने हुए हैं। अब वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने बिहार के अपनी खुद की टीम बनाने की मांग की है। बिहार के अनिल अग्रवाल ने कहा कि, ‘अब वक्त आ गया है कि हमारी मिट्टी का टैलेंट मैदान पर दिखे।’ बेमिसाल बिहार की भी एक टीम होनी चाहिए- अनिल अग्रवाल अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि, ‘क्या आपको नहीं लगता चेन्नई सुपर किंग्स, मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स की तरह बेमिसाल बिहार की भी एक टीम होनी चाहिए? बिहार की मिट्टी ने देश को बहुत से बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी दिए हैं। पटना में जन्मे ईशान किशन ने सबसे कम गेंदों में ODI डबल सेंचुरी लगाई। समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी सबसे कम उम्र में IPL डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बने। गोपालगंज के साधारण परिवार में जन्मे साकिब हुसैन की शानदार गेंदबाजी पर आज पूरी दुनिया की नज़रें हैं।’ बिहार से बनने वाली टीम दुनिया की बेस्ट टीम होगी- अनिल अग्रवाल बिहार की अपनी आईपीएल क्रिकेट टीम नहीं होने को लेकर अफसोस जाहिर करते हुए अनिल अग्रवाल ने लिखा, ‘एक बात मुझे हमेशा खलती है कि हमारे बिहार को क्रिकेट में अब भी वह नाम और पहचान क्यों नहीं मिल पा रही, जिसके हम हकदार हैं।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘मेरा हमेशा से यह सपना और प्रयास रहा है कि बिहार के युवाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का पूरा मौका मिले, हमारे खिलाड़ियों को भी वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर और सपोर्ट बिहार में ही मिलना चाहिए।’ अनिल अग्रवाल ने विश्वास जताते हुए कहा कि, ‘मुझे पूरा भरोसा है कि अगर हमारे बच्चों को सही प्रेरणा और सुविधाएं मिलें, तो हमारे बिहार से बनने वाली टीम दुनिया की बेस्ट टीम होगी।’ हमारी मिट्टी का टैलेंट मैदान पर दिखे – अनिल अग्रवाल अनिल अग्रवाल ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘मैं इस काम में बिहार के युवाओं के साथ पूरी मज़बूती से खड़ा हूं। बिहार की क्रिकेट टीम और यहां के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए मैं अपनी तरफ से कंडीशनल सपोर्ट दूंगा। बिहार मेरे लिए सिर्फ एक राज्य नहीं, एक इमोशन है। और अब वक्त आ गया है कि हमारी मिट्टी का टैलेंट मैदान पर दिखे।’ सीएम सम्राट ने क्रिकेट टीम को लेकर दिया भरोसा वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडियो एक्स पर पोस्ट कर सीएम सम्राट ने लिखा, ‘आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूं। बिहार के क्रिकेट “इमोशन” के लिए सरकार स्पष्ट “विजन” के साथ “मिशन” मोड में कार्यरत है। आपके सहयोग से निश्चित ही बिहार की क्रिकेट टीम को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।’

इंडिया के लिए टेस्ट मैच खेलेगा स्कूल टीचर का बेटा:श्रीगंगानगर के मानव सुथार का सिलेक्शन, बोले-बेस्ट दूंगा; मां रोते हुए बोलीं-मैसेज का इंतजार कर रही थी

इंडिया के लिए टेस्ट मैच खेलेगा स्कूल टीचर का बेटा:श्रीगंगानगर के मानव सुथार का सिलेक्शन, बोले-बेस्ट दूंगा; मां रोते हुए बोलीं-मैसेज का इंतजार कर रही थी

अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट के लिए श्रीगंगानगर के बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार (23) को पहली बार इंडिया टीम में जगह मिली है। यह टेस्ट मैच 6 जून से शुरू होगा। इंडिया टीम में सिलेक्शन पर मानव सुथार ने कहा- हर किसी का सपना होता है इंडिया खेलना। मेरा भी था। जब भी मौका मिलेगा, बेस्ट दूंगा और टीम की जीत में कॉन्ट्रिब्यूट करने की कोशिश करूंगा। मानव की मां सुशीला सुथार रोते हुए बोलीं- पूजाघर में बैठी मैसेज का इंतजार कर रही थी। बेटे के चयन के बाद बहुत खुशी हो रही है। उधर, श्रीगंगानगर के विधायक जयदीप बिहाणी ने फोन पर कहा- मानव के मैच खेलकर लौटते ही शहर में शानदार डिनर आयोजित किया जाएगा। देखिए, टीम इंडिया में सिलेक्शन के बाद मानव के घर की PHOTOS… बचपन से ही था क्रिकेट के प्रति जुनून मानव के पिता जगदीश सुथार स्कूल टीचर हैं। मां सुशीला देवी गृहिणी हैं। मानव ने 10-11 साल की उम्र से ही क्रिकेट के प्रति अपना जुनून दिखाना शुरू कर दिया था। श्रीगंगानगर टीम के कप्तान रहते हुए उन्होंने अंडर-14 और अंडर-16 खिताब दिलाए। इसके बाद राजस्थान अंडर-16, अंडर-19 और अंडर-23 से होते हुए उन्होंने रणजी ट्रॉफी तक का सफर तय किया। साल 2022 में राजस्थान के लिए प्रथम श्रेणी पदार्पण करने वाले मानव ने घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रभावित किया। मां बोलीं- 10-12 साल की मेहनत आज रंग लाई मानव की मां सुशीला सुथार बेटे की इस उपलब्धि पर भावुक हो गईं। वे मीडिया से बात करते हुए रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि 10 से 12 वर्षों की मेहनत आज सफल हुई है। मैं सुबह से ही टीम चयन का इंतजार कर रही थी। सुशीला सुथार ने बताया- शाम करीब 5 बजे मानव का मैसेज आया कि मेरा चयन भारतीय टीम में हो गया है, जिसके बाद परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पिता बोले- बचपन से ही क्रिकेट के लिए कर रहा मेहनत पिता जगदीश सुथार ने कहा- बेटा पिछले 12-13 साल से लगातार मेहनत कर रहा है। शुरुआत में वह बल्लेबाज बनना चाहता था, लेकिन कोच धीरज शर्मा ने उसकी गेंदबाजी प्रतिभा को पहचानकर स्पिनर बनाया, जो बाद में सही साबित हुआ। आईपीएल में GT का हिस्सा मानव आईपीएल में गुजरात टाइटंस (GT) की टीम में हैं। उन्हें गुजरात टाइटंस से अभी सीमित मौके मिले हैं, लेकिन घरेलू क्रिकेट और इंडिया ए में लगातार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई है। कोच धीरज शर्मा हमेशा कहते रहे हैं कि अगर भारत के लिए खेलना है तो रेड बॉल क्रिकेट में खुद को साबित करना होगा। ऑलराउंड क्षमता से बने सिलेक्टर की पसंद मानव सुथार सिर्फ गेंदबाज ही नहीं बल्कि निचले क्रम के उपयोगी बल्लेबाज भी हैं। इस कारण उन्हें एक बॉलिंग ऑलराउंडर के रूप में भी देखा जाता है। उनका प्रदर्शन 2023 वर्ल्ड कप कैंप में भी चर्चा में रहा था, जहां उन्होंने रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गजों को अपनी गेंदबाजी से प्रभावित किया था। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ इंडिया ए मैच में 5 विकेट लेकर उन्होंने चयन की मजबूत दावेदारी पेश की थी। सिलेक्शन के बाद मानव सुथार बोले… 1. पैरेंट्स से किस तरह का सपोर्ट रहा पूरा सपोर्ट था। पापा ने 11-12 साल की उम्र में एकेडमी जॉइन करा दी। कहा, तुझे जितना खेलना है खेल, हम हमेशा तेरे साथ हैं। कभी मना नहीं किया। 2. आईपीएल में खेलने से क्या फर्क पड़ता है अलग-अलग देशों और अलग-अलग संस्कृति से जुड़े लोगों के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करना ही अपने आप में बड़ी बात है। क्रिकेट ही नहीं, उससे इतर भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है। 3. आपको जडेजा का रिप्लेसमेंट माना जा रहा है मैं इस तरह नहीं सोचता कि किसकी जगह मौका मिला है। मैं सिर्फ यही सोचता हूं कि जो भी अपॉर्च्युनिटी मुझे मिली है मैं उसमें अपना बेस्ट परफॉर्मेंस करूं। 4. रेड बॉल और व्हाइट बॉल क्रिकेट में क्या फर्क है मुझे कोई फर्क नहीं दिखता है। आपको हमेशा मैच सिचुएशन के हिसाब से अपना बेस्ट देना होता है, फिर चाहे वह रेड बॉल क्रिकेट हो या व्हाइट बॉल। मेरा यही फोकस रहता है। घर पहुंचकर दी लोगों ने बधाई मानव सुथार के टीम इंडिया में चयन की खबर मिलते ही उनके घर जश्न का माहौल हो गया। मंगलवार को श्रीगंगानगर विधायक जयदीप बिहाणी समेत क्रिकेट प्रेमी, कोच और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उनके घर पहुंचे। परिजनों को बधाई दी। इस दौरान शहरवासियों ने मानव के घर पर होली खेली। पटाखे फोड़कर खुशी का इजहार किया। विधायक ने कॉल पर दी बधाई विधायक जयदीप बिहाणी ने मानव सुथार से फोन पर बात करते हुए कहा कि उनका दिल और दिमाग खुशी से भर गया है। उन्होंने कहा कि मानव राजस्थान के चौथे और श्रीगंगानगर के पहले क्रिकेटर हैं जो भारतीय टीम में शामिल हुए हैं। उन्होंने मानव की मेहनत को सलाम करते हुए कहा कि जब वह श्रीगंगानगर आएंगे तो उनके सम्मान में भव्य डिनर का आयोजन किया जाएगा। … ये खबर भी पढ़ें … राजस्थान के मुकुल चौधरी बोले-प्लान क्लीयर था डिफेंसिव नहीं खेलना:बेस्ट बॉलर बनने का सपना था; IPL में KKR के खिलाफ खेली मैच विनिंग पारी झुंझुनूं के मुकुल चौधरी ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के अपने तीसरे ही मैच में 27 गेंद पर नाबाद 54 रन बनाकर लखनऊ सुपर जायंट्स को शानदार जीत दिलाई। पूरी खबर पढ़िए

भास्कर अपडेट्स:CBI ने आर्मी के कर्नल को 50 लाख रिश्वत केस में गिरफ्तार किया

भास्कर अपडेट्स:CBI ने आर्मी के कर्नल को 50 लाख रिश्वत केस में गिरफ्तार किया

CBI ने 50 लाख रुपए के रिश्वत मामले में सेना के एक कर्नल को गिरफ्तार किया है। अधिकारी कोलकाता में ईस्टर्न कमांड के तहत आर्मी ऑर्डनेंस कॉर्प्स में तैनात था। CBI के मुताबिक, कर्नल पर कानपुर की एक कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी करने का आरोप है। एजेंसी का दावा है कि अधिकारी ने टेंडर दिलाने, घटिया सैंपल मंजूर करने और लंबित व बढ़े हुए बिल पास कराने में मदद की। जांच एजेंसी के FIR के मुताबिक, कर्नल ने कारोबारी से लंबित रिश्वत रकम मांगी थी। कारोबारी ने नकदी की कमी की बात कही। इसके बाद अधिकारी ने कारोबारी के ड्राइवर को फोन कर रकम अपने एक परिचित तक पहुंचाने को कहा। 50 लाख रुपए की रिश्वत हवाला के जरिए पहुंचाई जानी थी।

Lovlina Borgohain Qualifies for Asian & Commonwealth Games 2026

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Hindi News Sports Lovlina Borgohain Qualifies For Asian & Commonwealth Games 2026 | Patiala Trials स्पोर्ट्स डेस्क11 मिनट पहले कॉपी लिंक ओलिंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने शुक्रवार को पटियाला में हुए नेशनल ट्रायल्स में जीत हासिल की। इस जीत के साथ ही उन्होंने एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का टिकट हासिल किया। टोक्यो 2020 ओलिंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट और पूर्व वर्ल्ड चैंपियन लवलीना ने महिला 75 किग्रा मुक्केबाजी के फाइनल में सनमाचा चानू को 5-0 से मात दी। कॉमनवेल्थ गेम्स 23 जुलाई से 2 अगस्त और एशियन गेम्स 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक खेला जाएगा। लवलीना पिछले महीने मौका चूक गई थीं विमेंस के 75 किलोग्राम वेट कैटेगरी के फाइनल मुकाबले में लवलीना ने एकतरफा प्रदर्शन किया। उन्होंने सनामाचा चानू को 5-0 से शिकस्त देकर टीम में अपनी जगह सुरक्षित की। लवलीना पिछले महीने उलानबटोर में हुए एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 के फाइनल में जगह नहीं बना पाई थीं, जिसके कारण वे सीधे क्वालिफाई करने का पहला मौका चूक गई थीं। इसके बाद उन्हें इस नेशनल ट्रायल्स के जरिए टीम में वापसी करनी पड़ी। लवलीना बोरगोहेन टोक्यो 2020 ओलिंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट हैं। तीन वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में जीत चुकी हैं मेडल लवलिना 2018, 2019 और 2023 में हुए वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में एक गोल्ड और दो ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी। इसके अलावा वे 2022 में एशियन गेम्स में भी सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं। एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय मुक्केबाजी टीम विमेंस: साक्षी चौधरी (51 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा), प्रिया घंघास (60 किग्रा), परवीन हुडा (65 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) मेंस: जदुमणि सिंह (55 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा), सुमित कुंडू (70 किग्रा), अंकुश (80 किग्रा), कपिल पोखरिया (90 किग्रा), नरेंद्र बेरवाल (+90 किग्रा) कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए भारतीय मुक्केबाजी टीम विमेंस: साक्षी चौधरी (51 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा), जैस्मीन लैम्बोरिया (57 किग्रा), प्रिया घंघास (60 किग्रा), परवीन हुड्डा (65 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) मेंस: जदुमणि सिंह (55 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा), आदित्य प्रताप सिंह (65 किग्रा), सुमित कुंडू (70 किग्रा), अंकुश (80 किग्रा), कपिल पोखरिया (90 किग्रा), नरेंद्र बेरवाल (+90 किग्रा) दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Hindi News Sports Lovlina Borgohain Qualifies For Asian & Commonwealth Games 2026 | Patiala Trials स्पोर्ट्स डेस्क27 मिनट पहले कॉपी लिंक ओलिंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने शुक्रवार को पटियाला में हुए नेशनल ट्रायल्स में जीत हासिल की। इस जीत के साथ ही उन्होंने एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का टिकट हासिल किया। टोक्यो 2020 ओलिंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट और पूर्व वर्ल्ड चैंपियन लवलीना ने महिला 75 किग्रा मुक्केबाजी के फाइनल में सनमाचा चानू को 5-0 से मात दी। कॉमनवेल्थ गेम्स 23 जुलाई से 2 अगस्त और एशियन गेम्स 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक खेला जाएगा। लवलीना पिछले महीने मौका चूक गई थीं विमेंस के 75 किलोग्राम वेट कैटेगरी के फाइनल मुकाबले में लवलीना ने एकतरफा प्रदर्शन किया। उन्होंने सनामाचा चानू को 5-0 से शिकस्त देकर टीम में अपनी जगह सुरक्षित की। लवलीना पिछले महीने उलानबटोर में हुए एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 के फाइनल में जगह नहीं बना पाई थीं, जिसके कारण वे सीधे क्वालिफाई करने का पहला मौका चूक गई थीं। इसके बाद उन्हें इस नेशनल ट्रायल्स के जरिए टीम में वापसी करनी पड़ी। लवलीना बोरगोहेन टोक्यो 2020 ओलिंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट हैं। तीन वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में जीत चुकी हैं मेडल लवलिना 2018, 2019 और 2023 में हुए वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में एक गोल्ड और दो ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी। इसके अलावा वे 2022 में एशियन गेम्स में भी सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं। एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय मुक्केबाजी टीम विमेंस: साक्षी चौधरी (51 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा), प्रिया घंघास (60 किग्रा), परवीन हुडा (65 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) मेंस: जदुमणि सिंह (55 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा), सुमित कुंडू (70 किग्रा), अंकुश (80 किग्रा), कपिल पोखरिया (90 किग्रा), नरेंद्र बेरवाल (+90 किग्रा) कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए भारतीय मुक्केबाजी टीम विमेंस: साक्षी चौधरी (51 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा), जैस्मीन लैम्बोरिया (57 किग्रा), प्रिया घंघास (60 किग्रा), परवीन हुड्डा (65 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) मेंस: जदुमणि सिंह (55 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा), आदित्य प्रताप सिंह (65 किग्रा), सुमित कुंडू (70 किग्रा), अंकुश (80 किग्रा), कपिल पोखरिया (90 किग्रा), नरेंद्र बेरवाल (+90 किग्रा) दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…