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Bearded Ram in Odisha, Sri Raghunath Jew Temple, Ram Temple in Odisha, Rama Navami, Nayagarh district.

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प्रियंका साहू. नयागढ़ (ओडिशा)1 घंटे पहले

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प्रसिद्ध रघुनाथ जीऊ मंदिर में भगवान राम और लक्ष्मण के मुख पर दाढ़ी और मूंछ हैं।

ओडिशा के नयागढ़ जिले में प्रसिद्ध रघुनाथ जीऊ मंदिर है। यहां भगवान राम और लक्ष्मण के मुख पर दाढ़ी और मूंछ हैं। दोनों के सिर पर जटा भी है। माता सीता का चेहरा सीधा न होकर थोड़ा सा टेढ़ा है क्योंकि वे किसी और को न देखकर अपने स्वामी श्रीराम के चरणों को देख रही हैं।

करीब 263 साल पहले मंदिर निर्माण के समय भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता तीनों की मूर्तियां नीम की लकड़ी से बनाकर स्थापित की गई थीं। तब से आज तक ये मूर्तियां वैसी की वैसी ही हैं। ये अनूठी मूर्तियां न पानी से खराब होती है, न ही किसी शृंगार से। देश में ऐसा अदभुत और अनोखा मंदिर संभवत: और कहीं नहीं है।

वरिष्ठ पुजारी रंजन महापात्र करीब 40 साल से यहां पूजा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नवरात्र के 9 दिन तक भगवान अलग-अलग भेष धारण करते हैं। इनमें वनवासी, चित्रकूट, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और धनुर्धारी भेष आदि प्रमुख हैं। नौंवे दिन रामनवमी पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन प्रभु सोने के आभूषणों से सज्जित होते हैं। भगवान को रामनवमी समेत साल में 5 बार स्वर्ण शृंगार कराया जाता है।

पूजक परिषद के अध्यक्ष प्रफुल्ल महापात्र ने बताया कि यहां पहले अत्रि मुनि का आश्रम था। जब राम, लक्ष्मण और माता सीता वनवास के दौरान यहां रुके थे, तब उनकी वेशभूषा से अत्रि मुनि प्रभावित हुए थे। वे भगवान राम से बोले, “आपका ये वनवासी रूप चकित कर दे रहा है। कृपा कर यहां से न जाएं।’ तब भगवान राम बोले, “ऋषिवर आप 3 शालिग्राम रखिए। जब भी मेरा ये रूप आपको याद आए, तब आप ये शालिग्राम को देख लेना।

नयागढ़ जिले में स्थित रघुनाथ जीऊ मंदिर।

नयागढ़ जिले में स्थित रघुनाथ जीऊ मंदिर।

शिखर पर 15-15 किलो के तीन सुनहरे कलश

यह मंदिर कलिंग वास्तुकला शैली में बना है और तीन हिस्सों में बंटा है: भद्र मंडप, नाट मंडप और दर्शन मंडप। तीनों मंडप के शिखर पर 15-15 किलो के सोने के कलश स्थापित हैं। इसीलिए ये स्वर्ण कलश क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है।

इस मंदिर के ऊपर पहले सोने के कलश रखे गए हैं। इनके ऊपर चक्र स्थापित है। ऐसा अन्य किसी मंदिर में नहीं है। यह भुवनेश्वर से 112 किमी दूर स्थित है। मंदिर में सुबह से शाम तक विभिन्न तरह की पूजा होती है। सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक कई तरह के प्रसाद का भी भगवान को भोग लगाया जाता है।

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प्रसिद्ध रघुनाथ जीऊ मंदिर में भगवान राम और लक्ष्मण के मुख पर दाढ़ी और मूंछ हैं।

ओडिशा के नयागढ़ जिले में प्रसिद्ध रघुनाथ जीऊ मंदिर है। यहां भगवान राम और लक्ष्मण के मुख पर दाढ़ी और मूंछ हैं। दोनों के सिर पर जटा भी है। माता सीता का चेहरा सीधा न होकर थोड़ा सा टेढ़ा है क्योंकि वे किसी और को न देखकर अपने स्वामी श्रीराम के चरणों को देख रही हैं।

करीब 263 साल पहले मंदिर निर्माण के समय भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता तीनों की मूर्तियां नीम की लकड़ी से बनाकर स्थापित की गई थीं। तब से आज तक ये मूर्तियां वैसी की वैसी ही हैं। ये अनूठी मूर्तियां न पानी से खराब होती है, न ही किसी शृंगार से। देश में ऐसा अदभुत और अनोखा मंदिर संभवत: और कहीं नहीं है।

वरिष्ठ पुजारी रंजन महापात्र करीब 40 साल से यहां पूजा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नवरात्र के 9 दिन तक भगवान अलग-अलग भेष धारण करते हैं। इनमें वनवासी, चित्रकूट, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और धनुर्धारी भेष आदि प्रमुख हैं। नौंवे दिन रामनवमी पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन प्रभु सोने के आभूषणों से सज्जित होते हैं। भगवान को रामनवमी समेत साल में 5 बार स्वर्ण शृंगार कराया जाता है।

पूजक परिषद के अध्यक्ष प्रफुल्ल महापात्र ने बताया कि यहां पहले अत्रि मुनि का आश्रम था। जब राम, लक्ष्मण और माता सीता वनवास के दौरान यहां रुके थे, तब उनकी वेशभूषा से अत्रि मुनि प्रभावित हुए थे। वे भगवान राम से बोले, “आपका ये वनवासी रूप चकित कर दे रहा है। कृपा कर यहां से न जाएं।’ तब भगवान राम बोले, “ऋषिवर आप 3 शालिग्राम रखिए। जब भी मेरा ये रूप आपको याद आए, तब आप ये शालिग्राम को देख लेना।

नयागढ़ जिले में स्थित रघुनाथ जीऊ मंदिर।

नयागढ़ जिले में स्थित रघुनाथ जीऊ मंदिर।

शिखर पर 15-15 किलो के तीन सुनहरे कलश

यह मंदिर कलिंग वास्तुकला शैली में बना है और तीन हिस्सों में बंटा है: भद्र मंडप, नाट मंडप और दर्शन मंडप। तीनों मंडप के शिखर पर 15-15 किलो के सोने के कलश स्थापित हैं। इसीलिए ये स्वर्ण कलश क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है।

इस मंदिर के ऊपर पहले सोने के कलश रखे गए हैं। इनके ऊपर चक्र स्थापित है। ऐसा अन्य किसी मंदिर में नहीं है। यह भुवनेश्वर से 112 किमी दूर स्थित है। मंदिर में सुबह से शाम तक विभिन्न तरह की पूजा होती है। सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक कई तरह के प्रसाद का भी भगवान को भोग लगाया जाता है।

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