इंदौर में छेड़छाड़ का आरोपी 5 माह बाद गिरफ्तार:एमबीए का छात्र है आरोपी, डी-मार्ट से घर जा रही युवती को छेड़ा था; पुलिस कर रही पूछताछ

इंदौर के राऊ थाना क्षेत्र में युवती से छेड़छाड़ करने वाले आरोपी को पुलिस ने करीब पांच माह बाद मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने सुनसान इलाका देखकर डी-मार्ट से घर लौट रही युवती को छेड़ा था। पीड़िता ने पहले राजेंद्र नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन सीमा क्षेत्र के विवाद के चलते मामले की जांच बाद में राऊ पुलिस को सौंप दी गई। एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि एक नवंबर 2025 को युवती ने शिकायत दर्ज कराई थी कि खंडवा रोड (केट रोड) के सुनसान क्षेत्र में एक अज्ञात स्कूटी चालक ने उसके साथ छेड़छाड़ की और अभद्र टिप्पणी करते हुए मौके से फरार हो गया। शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। पीड़िता ट्रेजर फेटेसी के पास रहती है और घटना के समय डी मार्ट से घर लौट रही थी। सीसीटीवी फुटेज से हुई पहचान पुलिस ने डी-मार्ट से केट रोड तक करीब तीन किलोमीटर के दायरे में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले और संदिग्ध की पहचान के लिए मुखबिरों को भी जानकारी दी। 10 मार्च 2026 को पुलिस को सूचना मिली कि संदिग्ध एक्टिवा चालक केट रोड क्षेत्र में देखा गया है। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी कन्हैया पाटिल निवासी राऊ को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी प्रेस्टीज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च में एमबीए की पढ़ाई कर रहा है। पुलिस के अनुसार वह पहले भी कई महिलाओं के साथ इस तरह की हरकत कर चुका है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा रही है। आगजनी की जानकारी पूछने के बहाने किया था परेशान पुलिस के मुताबिक घटना वाली रात राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में भीषण आगजनी हुई थी। उसी दौरान आरोपी अपनी एक्टिवा से युवती के पास पहुंचा और आग लगने की जानकारी पूछने लगा। बातचीत के दौरान उसने अंधेरे का फायदा उठाकर युवती के साथ छेड़छाड़ की और मौके से फरार हो गया।
सेहत के लिए चमत्कारी औषधि है ये पत्ता, BP-डायबिटीज को करता है कंट्रोल, कोलेस्ट्रॉल को कर देता है छूमंतर

Last Updated:March 11, 2026, 11:46 IST Mango Leaves Health Benefits: आयुर्वेद में आम के पत्तों को सेहत के लिए बेहद लाभकारी माना गया है. इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और औषधीय गुण शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. आम के पत्ते ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने, पाचन तंत्र को बेहतर बनाने और पेट से जुड़ी समस्याओं को कम करने में सहायक माने जाते हैं. कुछ लोग इन्हें उबालकर पानी के रूप में भी सेवन करते हैं. हालांकि किसी भी बीमारी में इसका उपयोग करने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है. आम के पत्ते स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. क्योंकि ये एंटीऑक्सीडेंट, टैनिन और मैंगिफेरिन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. ये पत्ते मुख्य रूप से शुगर लेवल को नियंत्रित करने, पाचन स्वास्थ्य में सुधार, ब्लड प्रेशर को कम करने और त्वचा व बालों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं. एक्सपर्ट डॉ गीतिका शर्मा ने बताया कि आम के पत्ते उच्च रक्तचाप हाई बीपी को कम करने और हृदय स्वास्थ्य सुधारने में सहायक हो सकते हैं. इनमें मैंगिफेरिन नामक एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो रक्त वाहिकाओं को आराम देता है. सूजन कम करता है और खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाता है. इनका काढ़ा या चाय पीना बीपी को नियंत्रित करने का एक पारंपरिक उपाय माना जाता है. आम के पत्ते पाचन के लिए एक प्राकृतिक टॉनिक का काम करते हैं. जो पेट के अल्सर, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करते हैं. ये पत्ते पेट को शांत रखते हैं. पाचन शक्ति बढ़ाते हैं और शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक होते हैं. इन्हें आमतौर पर चाय या काढ़े के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google आम के पत्ते श्वसन संबंधी समस्याओं जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सर्दी-खांसी के लिए एक प्रभावी पारंपरिक आयुर्वेदिक उपाय हैं. इन पत्तों में मौजूद रोगाणुरोधी और सूजनरोधी गुण श्वसन मार्ग को साफ करने और बलगम को कम करने में मदद कर सकते हैं. इन्हें उबालकर चाय या काढ़ा बनाकर पीना सबसे अच्छा तरीका है. आम के पत्ते में मौजूद हाइपोटेंशन गुणों के कारण ये उच्च रक्तचाप को कम करने और नियंत्रित करने में बहुत फायदेमंद होते हैं. ये रक्त वाहिकाओं को मजबूत करते हैं. रक्त संचार सुधारते हैं. और कोलेस्ट्रॉल घटाकर हृदय स्वास्थ्य में सुधार करते हैं. इनका उपयोग चाय या पाउडर के रूप में किया जा सकता है. आम के पत्ते विटामिन A, C, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होते हैं. जो त्वचा में कसाव, मुंहासे कम करने, दाग-धब्बे हटाने और समय से पहले एजिंग (झुर्रियां) को रोकने में मददगार हैं. यह स्कैल्प संक्रमण को कम कर, बालों को चमकदार और मजबूत बनाने में भी बहुत फायदेमंद हैं. आम के पत्ते हिचकी रोकने के लिए एक असरदार और प्राकृतिक घरेलू उपाय हैं.आप कुछ ताजे आम के पत्तों को जलाकर उनके धुएं को सांस के माध्यम से अंदर ले सकते हैं. जो लगातार आने वाली हिचकी को कम करने में मदद करता है. यह विधि गले और पेट की समस्याओं में भी राहत दिलाती है. First Published : March 11, 2026, 11:44 IST
Supreme Court Right to Die Case; Harish Rana Coma Update

Hindi News National Supreme Court Right To Die Case; Harish Rana Coma Update | Euthanasia Permission India नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा 13 साल से कोमा में हैं। वे पंजाब यू्निवर्सिटी के हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इच्छामृत्यु मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने 13 साल से कोमा में रह रहे 31 साल के युवक हरीश राणा को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की मंजूरी दे दी। गाजियाबाद के रहने वाले हरीश लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं। देश में इस तरह का यह पहला मामला है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने एम्स (AIIMS) को निर्देश दिया कि हरीश के लाइफ सपोर्ट सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाए। यह प्रोसेस इस तरह से की जानी चाहिए कि मरीज की गरिमा बनी रहे। पैसिव यूथेनेशिया का मतलब होता है कि किसी गंभीर रूप से बीमार मरीज को जिंदा रखने के लिए जो बाहरी लाइफ सपोर्ट या इलाज दिया जा रहा है, उसे रोक दिया जाए या हटा लिया जाए, ताकि मरीज की प्राकृतिक रूप से मौत हो सके। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला हरीश की मां निर्मला राणा और पिता अशोक राणा की इच्छामृत्यु देने की अपील पर सुनाया। हरीश अपनी मां निर्मला राणा के साथ। परिवार ने बताया कि बेटे के इलाज के लिए अपनी संपत्ति तक बेच दी, लेकिन अब आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। बेटे की तकलीफ भी नहीं देखी जाती। फैसले पर पिता अशोक ने कहा- हम इसके लिए लंबे समय से लड़ रहे थे। कौन से माता-पिता अपने बेटे के लिए ऐसा चाहेंगे। पिछले 3 साल से हम यह मामला लड़ रहे थे। अब उसे एम्स ले जाया जाएगा। वह पंजाब यूनिवर्सिटी में टॉपर हुआ करता था। हरीश हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरे थे, तब से बिस्तर पर दिल्ली में जन्मे हरीश राणा चंडीगढ़ की पंजाब यू्निवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। 2013 में वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए। इसकी वजह से उनके पूरे शरीर में लकवा मार गया और वह कोमा में चले गए। वह न कुछ बोल सकते हैं और न ही महसूस कर सकते हैं। डॉक्टर्स ने हरीश को क्वाड्रिप्लेजिया बीमारी से पीड़ित करार दिया। इसमें मरीज पूरी तरह से फीडिंग ट्यूब यानी खाने-पीने की नली और वेंटिलेटर सपोर्ट पर निर्भर रहता है। इसमें रिकवरी की कोई गुंजाइश नहीं होती। 13 साल से बिस्तर पर पड़े होने की वजह से हरीश के शरीर पर बेडसोर्स यानी गहरे घाव बन गए हैं। उनकी हालत लगातार खराब होती जा रही है। यह स्थिति हरीश के लिए बहुत दर्दनाक है। परिवार के लिए उन्हें ऐसे देखना मानसिक रूप से बेहद कठिन हो गया है। वेंटिलेटर, दवाइयों, नर्सिंग और देखभाल पर कई साल से इतना खर्च हो चुका है कि परिवार आर्थिक रूप से टूट चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में शेक्सपीयर का जिक्र किया जस्टिस पारदीवाला ने फैसला सुनाते वक्त अमेरिकी धर्मगुरु हेनरी वार्ड बीचर के शब्दों का हवाला देते हुए कहा, ‘ईश्वर मनुष्य से यह नहीं पूछते कि वह जीवन स्वीकार करता है या नहीं, उसे जीवन लेना ही पड़ता है।’ उन्होंने विलियम शेक्सपीयर के प्रसिद्ध नाटक हेलमेट की पंक्ति “To be or not to be” का भी जिक्र करते हुए कहा कि अदालतों को कई बार इसी तरह के प्रश्नों के संदर्भ में “मरने के अधिकार” पर विचार करना पड़ता है। लाइफ सपोर्ट हटाने का निर्णय दो आधारों पर होना चाहिए: यह हस्तक्षेप चिकित्सा उपचार की श्रेणी में आता हो। यह मरीज के सर्वोत्तम हित में हो। अदालत ने यह भी कहा कि डॉक्टर का कर्तव्य मरीज का इलाज करना है, लेकिन जब मरीज के ठीक होने की कोई संभावना न हो, तो यह कर्तव्य उसी रूप में कायम नहीं रहता। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कानून बनाने को कहा सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पैसिव यूथेनेशिया पर कानून बनाने पर विचार करने का भी कहा। फिलहाल भारत में यह केवल सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के आधार पर ही संभव है, जिसमें मरीज की स्थिति पर दो मेडिकल बोर्ड की राय जरूरी होती है। इच्छामृत्यु के 2 तरीके होते हैं… पैसिव यूथेनेशिया: इसमें मरीज का इलाज या लाइफ सपोर्ट जैसे वेंटिलेटर, फीडिंग ट्यूब या दवाइयां रोक दी जाती हैं, ताकि उसकी मौत प्राकृतिक रूप से हो सके। इसमें डॉक्टर कोई नया काम नहीं करते, सिर्फ इलाज बंद कर देते हैं। मौत का कारण बीमारी ही रहती है। एक्टिव यूथेनेशिया: इसमें मरीज को मौत देने के लिए डॉक्टर दवाई या इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं। भारत में यह गैर-कानूनी है। अगर कोई जान-बूझकर किसी मरीज को दवाई देकर मारता है, तो इसे BNS की धारा के तहत हत्या या के तहत आत्महत्या में मदद माना जाता है। भारत के संविधान में इच्छामृत्यु का क्या कानून है 2005 में कॉमन कॉज नाम की एक NGO ने पैसिव यूथेनेशिया यानी निष्क्रिय इच्छामृत्यु के अधिकार की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर 9 मार्च 2018 को CJI दीपक मिश्रा की अगुआई वाली 5 जजों की बेंच ने इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता दी। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, अगर किसी मरीज को लाइलाज बीमारी हो या वेजिटेटिव स्टेट में यानी लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर ही जिंदा हो, तो प्राकृतिक तरीके से मृत्यु के लिए उसका इलाज बंद किया जा सकता है। इसे इच्छामृत्यु नहीं, बल्कि सम्मान के साथ मृत्यु का अधिकार माना जाएगा। यह अधिकार संविधान के आर्टिकल 21 का हिस्सा है, जिसमें सम्मान से जीने के साथ सम्मान से मरने का अधिकार है। AI जनरेटेड इमेज। इच्छामृत्यु को लेकर क्या नियम है 2018 में पैसिव यूथेनेशिया को वैधता देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए 2 तरह के नियम बनाए… 1. जब मरीज ने पहले ही ‘लिविंग विल’ लिख रखी हो: जब मरीज ने मेंटली फिट रहते हुए अपनी इच्छा से लिविंग विल लिखी हो। इस लिविंग विल में साफ तौर पर लिखा जाता है कि मरीज की बीमारी अगर लाइलाज हो जाए यानी अगर वह अब कभी ठीक होने लायक न बचे तो उसे लाइफ सपोर्ट सिस्टम से हटा दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए भी कुछ नियम बनाए
UAE Pet Abandonment Amidst Israel-Iran Tension

तेल अवीव/तेहरान57 मिनट पहले कॉपी लिंक मिडिल ईस्ट में बढ़ते इजराइल-ईरान तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में लोग देश छोड़ने की तैयारी में अपने पालतू कुत्तों, बिल्लियों और दूसरे जानवरों को सड़कों या शेल्टर में छोड़ रहे हैं। रेस्क्यू संगठनों के अनुसार, लोग जानवरों को बिना खाना-पानी के भीषण गर्मी में रास्ते में पोल से बांध कर छोड़ रहे हैं। एनिमल वेलफेयर वर्कर्स का कहना है कि उन्हें घरों या आश्रयों के बाहर पिंजरों में बंद बिल्लियां और पिल्ले भी मिले हैं। अबू धाबी के एनिमल वेलफेयर वर्कर ऐन्सो स्टैंडर ने इसे स्वार्थी और निर्दयी कदम बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके शेल्टर के पास इलाके में दो छोड़े गए कुत्तों को गोली मारने की खबर मिली है। 23 तस्वीरें देखें… जंग के बीच तड़पते बेजुबान दुबई छोड़ते समय एक ब्रिटिश परिवार ने दो कुत्तों को पशु कल्याण समिति को सौंप दिया। ईरान में धमाकों से सहमी बिल्लियां। यह फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल है। दुबई में रेस्क्यू की गई 2 बिल्लियां। दुबई म्युनिसिपैलिटी ने आवारा जानवरों की मदद के लिए “एहसान स्टेशन” नाम की पहल शुरू की है। दुबई के रेस्क्यू वॉलंटियरों का कहना है कि सामान्य दिनों की तुलना में सैकड़ों नए केस सामने आए हैं, जिनमें कुत्तों को खंभे से बांधकर छोड़ दिया गया है। कई लोग अपने पालतू जानवरों को सड़कों पर, पार्क या शेल्टर के बाहर छोड़कर जा रहे हैं। दुबई में एक कुत्ते को बिना खाना-पानी के खंभे से बांधकर छोड़ दिया गया। दुबई में एक परिवार ने अपने पालतू डॉग को सड़क पर बांध कर छोड़ दिया। अबू धाबी के अल ऐन शहर में एक महिला को अपने घर के बाहर एक बॉक्स में एक मां बिल्ली और उसके चार बच्चे मिले। बॉक्स में एक नोट भी था, जिसमें लिखा था- सॉरी, हालात के कारण अपने देश लौट रहा है और जानवरों को साथ नहीं ले जा सकता। दुबई में करीब 20 लाख से ज्यादा पालतू जानवर हैं, जिनमें ज्यादातर (करीब 65%) बिल्लियां हैं। रेस्क्यू ग्रुप K9 दुबई ने सड़क पर भटक रही एक कैट को रेस्क्यू किया। ईरान जंग में कई बच्चे घायल ईरान पर अमेरिकी-इजराइली हवाई हमलों में घायल हुई बच्ची का तेहरान के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। उसके चेहरे और गर्दन पर जख्म के निशान हैं। ईरानी स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक मारे गए लोगों में से करीब 30% बच्चे हैं। इजराइली हमलों से उजड़े लेबनानी परिवार दक्षिणी लेबनान में इजराइल के हवाई हमलों के बाद कई परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। विस्थापित होने के बाद सड़क के किनारे सोती बच्ची। लेबनान में ज्यादातर लोग समुद्र के किनारे जिंदगी बिता रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के अनुसार लेबनान में मंगलवार को 24 घंटे के भीतर ही करीब 1 लाख लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए। जंग से तबाही और पलायन लेबनान की राजधानी बेरूत के कॉर्निश तट पर विस्थापन के बाद 10 मार्च को दो महिलाएं एक बैंच पर बैठी हुई। लेबनान में मंगलवार को अपने जरूरी सामान के साथ देश छोड़ता परिवार। ईरान में 10 मार्च को इजराइली हमले के बाद कई गाड़ियां और इमारतें तबाह हो गए। इजराइल के हमले के बादेो लेबनान की राजधानी बेरूत में लोगों के घर तबाह हो गए हैं, इमारतें टूटी हुई नजर आ रही हैं, हर तरफ मलबा ही मलबा दिख रहा है। अब जंग की शुरुआत की तस्वीरें देखें इजराइल का ईरान पर हमला तेहरान में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के आवास के तबाह होने की सैटेलाइट तस्वीर। ईरान के तेहरान में 28 फरवरी को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद एक महिला उनकी तस्वीर पकड़कर रोती हुई। इजराइल और अमेरिका के हमलों में मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार में शामिल एक महिला रोती हुई। इजराइल के ईरान की राजधानी तेहरान में तेल भंडार पर हमले के बाद भीषण आग लगी, जिसके बाद धुएं का गुबार कई फीट ऊंचाई तक फैल गया। ————————— ये खबर भी पढ़ें… जंग मे अमेरिका के 140 सैनिक घायल, 7 की मौत: इजराइल में कई जगह बमबारी; ईरान में अब तक 8000 घरों पर हमला अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 12वां दिन है। इस युद्ध में अब तक 140 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं, जबकि 7 सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
लहसुनी पालक पनीर: घर पर पकाया हुआ ‘लहसुनी पालक पनीर’, स्वाद ऐसा कि लोग रेसिपी मांगते रहेंगे; जानिए बनाने का तरीका

लहसुनी पालक पनीर: घर पर कोई खास मेहमान आने वाले हों तो ‘पालक पनीर’ हमेशा से ही उत्तर भारतीय घरों की पहली पसंद रहती है। लेकिन अगर आप पारंपरिक पालकी पनीर के सामान बोर हो गए हैं, तो इस बार आप लहसुनी पालक पनीर के सामान ले जाएं। लहसुन का सोंधापन और पालक की मखमली पूड़ी जब पनीर के नंगा स्वाद के साथ आती है, तो स्वाद दोगुना हो जाता है। इसका खाश ‘डबल तड़का’ यह बिल्कुल ढेबा जैसा स्वाद देता है। आइये आपको लहसुनिया पालकी बनाने की रेसिपी के बारे में बताते हैं। लहसुनी पालक पनीर बनाने की सामग्री लहसुनिया पालक किस तरह का? (टैग्सटूट्रांसलेट)लहसुनी पालक पनीर रेसिपी(टी)लहसुनी पालक पनीर सामग्री(टी)पालक पनीर रेसिपी(टी)लहसुनी पालक पनीर स्वादिष्ट(टी)लसूनी पालक ढाबा स्टाइल(टी)पालक पनीर पंजाबी स्टाइल(टी)पालक पनीर रेसिपी ढाबा स्टाइल(टी)लहसूनी पालक रेसिपी हिंदी में
गंभीर बोले-भारत सिर्फ घरेलू पिचों पर 200+ रन नहीं बनाता:लग गया था कि संजू बेहतर करेगा; आंकड़े नहीं, अंतरात्मा की आवाज पर चलता हूं

टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की जीत के बाद हेड कोच गौतम गंभीर ने कई मुद्दों पर बात की। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में उन्होंने भारतीय पिचों पर उठे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि टी-20 बैटर्स का खेल है और भारत ने विदेशों में भी 200 से ज्यादा स्कोर बनाया है। भारत ने ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका में भी ऐसा स्कोर बनाया है। गंभीर ने अपनी कार्यशैली पर बात करते हुए कहा कि वह फैसले लेते समय डेटा से ज्यादा अपनी समझ और अंतरात्मा की आवाज पर भरोसा करते हैं। उन्होंने संजू सैमसन को लगातार मौका देने की वजह, अपनी नियुक्ति और टीम के भविष्य पर भी चर्चा की। साथ ही पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद के ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर दिए बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। ‘भारत में विकेट तैयार करने का आरोप गलत’ टी-20 वर्ल्ड कप के दौरान भारतीय पिचों को लेकर उठे सवालों पर टीम इंडिया के हेड कोच ने कहा कि भारत अपने फायदे के लिए पिच तैयार करता है, यह आरोप गलत है और अक्सर ऐसे बयान विवाद और टीआरपी के लिए दिए जाते हैं। गंभीर के मुताबिक टी-20 क्रिकेट अब बैटर्स का खेल बन चुका है और दुनियाभर में बड़े स्कोर बन रहे हैं। भारत ने ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका जैसे देशों में भी 200 से ज्यादा रन बनाए हैं, इसलिए इसे सिर्फ घरेलू पिचों से जोड़ना सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ICC टूर्नामेंट में पिचों की जिम्मेदारी इंटरनेशन क्रिकेट काउंसिल की होती है, BCCI की नहीं। इसलिए भारत के लिए विकेट तैयार करने का सवाल ही नहीं उठता। गंभीर ने कोलंबो में पाकिस्तान के खिलाफ मैच का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने वहां करीब 180 रन बनाए थे, जबकि बाकी टीमें उसी पिच पर करीब 140 रन तक ही पहुंच सकीं, लेकिन तब किसी ने पिच पर सवाल नहीं उठाए। टी-20 मैच में दर्शक बड़े स्कोर देखना चाहते हैं। यही वजह है कि ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका में भी हाई स्कोरिंग मैच आम हो गए हैं। ‘डेटा नहीं, अपनी समझ पर भरोसा करता हूं’ गंभीर का कहना है, ‘कोच के तौर पर फैसले लेते समय मैं डेटा से ज्यादा अपनी समझ पर भरोसा करता हूं। हर कोच की टीम को लेकर अपनी अलग सोच और नजरिया होता है।’ गंभीर ने कहा कि अगर मुझे लगता है कि कोई फैसला टीम के लिए सही है तो उस पर कायम रहता हूं और गलत साबित होने पर जिम्मेदारी भी स्वीकारता हूं। टीम का खेल, व्यवहार और माहौल मेरी अपनी सोच और विजन का हिस्सा है, जबकि भविष्य में आने वाला कोच अपनी सोच के साथ टीम को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर मैं वीवीएस लक्ष्मण और अजीत अगरकर जैसे अनुभवी लोगों से क्रिकेट पर चर्चा करता हूं। संजू सैमसन पर बोले- फॉर्म अस्थायी है न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज में खराब प्रदर्शन के बावजूद संजू सैमसन को वर्ल्ड कप टीम में बनाए रखने पर गंभीर ने कहा, ‘मैंने उन्हें इसलिए रखा, क्योंकि मुझे पता था कि संजू टीम के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। न्यूजीलैंड सीरीज में उनका दौर खराब था, लेकिन फॉर्म हमेशा एक जैसी नहीं रहता। उन्हें एक ब्रेक की जरूरत थी, जो हमने दिया। जिस खिलाड़ी ने टी-20 में 3 शतक लगाए हों, उसके टैलेंट पर शक नहीं किया जा सकता।’ संजू ने टूर्नामेंट में 321 रन बनाकर विराट कोहली (2014) का रिकॉर्ड तोड़ दिया। वह प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ करो या मरो मैच में नाबाद 97 रन और उसके बाद सेमीफाइनल में 89 और फाइनल में 89 की पारी खेली थी। गंभीर ने कीर्ति आजाद के बयान की आलोचना की गंभीर ने कहा कि टी-20 वर्ल्ड कप जीत खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत का नतीजा है। खिलाड़ियों ने काफी दबाव झेला और फिर यह सफलता हासिल की। ऐसे में इस तरह के बयान देना अपने ही खिलाड़ियों और टीम का अपमान करने जैसा है। दरअसल, भारत ने नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर तीसरी बार टी-20 वर्ल्ड कप का खिताब जीता। इसके बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव, कोच गौतम गंभीर और ICC प्रमुख जय शाह अहमदाबाद के हनुमान मंदिर में आशीर्वाद लेने पहुंचे और ट्रॉफी भी साथ ले गए। इस पर 1983 वर्ल्ड कप विजेता टीम के सदस्य और टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि खेल किसी धर्म या जाति से जुड़ा नहीं होता और यह जीत पूरे देश की है, इसलिए ट्रॉफी को मंदिर ले जाना सही नहीं है। आजाद के इस बयान की पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह ने भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के मंदिर जाने को राजनीति से जोड़ना गलत है और एक पूर्व क्रिकेटर से ऐसी टिप्पणी की उम्मीद नहीं थी। आजाद ने गौतम गंभीर बयान पर बुधवार को प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि खिलाड़ियों का अपमान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को भी अपने स्तर और स्थिति का ध्यान रखना चाहिए। भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां सभी धर्मों के लोग रहते हैं और सभी का सम्मान किया जाना चाहिए। अगला लक्ष्य: वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) का खिताब जीतना टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने अब अपना अगला लक्ष्य तय कर लिया है। उन्होंने कहा कि अगला टारगेट भारत को ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 के फाइनल तक पहुंचाना और खिताब जीतना है। भारत ने पिछले दो साल में 4 ICC व्हाइट बॉल ट्रॉफी जीती हैं। 2024 टी-20 वर्ल्ड कप, 2025 एशिया कप, 2025 चैंपियंस ट्रॉफी और 2026 टी20 वर्ल्ड कप। लेकिन टीम अभी तक वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का खिताब नहीं जीत पाई है। गंभीर ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट मेरे दिल के बहुत करीब है और अब पूरा ध्यान वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनाने पर होगा। अभी भारत को करीब 9 टेस्ट मैच खेलने हैं और टीम रेड-बॉल क्रिकेट में युवा खिलाड़ियों को मौका देती रहेगी। उन्होंने माना कि टेस्ट क्रिकेट आसान नहीं होता, खासकर तब जब टीम बदलाव के दौर से गुजर रही हो, लेकिन खिलाड़ियों को लगातार समर्थन दिया जाएगा, ताकि टीम बेहतर प्रदर्शन कर सके। गंभीर ने यह भी कहा कि
धुरंधर 2 से क्लैश का इंडस्ट्री में डर:टॉक्सिक के बाद अदिवी शेष की डकैत की भी रिलीज टली, 19 मार्च की जगह 10 अप्रैल को आएगी

रणवीर सिंह स्टारर मोस्ट अवेटेड फिल्म धुरंधरः द रिवेंज 19 मार्च को रिलीज होने के लिए शेड्यूल है। पहले केजीएफ स्टार यश की फिल्म टॉक्सिक भी 19 मार्च को ही रिलीज होनी थी, लेकिन रिलीज से 2 हफ्ते पहले ही मेकर्स ने इसे पोस्टपोन कर दिया है। इसके बाद अब अदिवी शेष की फिल्म डकैल भी पोस्टपोन हो चुकी है। एक्टर अदिवी शेष ने रिलीज डेट बदले जाने की घोषणा सोशल मीडिया के जरिए की है। उन्होंने फिल्म का नया पोस्टर जारी किया है, जिसमें रिलीज डेट 19 मार्च नहीं 10 अप्रैल लिखी है। इसके साथ एक्टर ने कैप्शन में लिखा, गोल्डफिश 10 अप्रैल को, वर्ल्डवाइड सिनेमाघरों में। डकैत। अब भूत बंगला से होगा डकैत का क्लैश रिलीज डेट टाले जाने के बावजूद फिल्म को क्लैश से राहत नहीं मिली है। अब इस फिल्म का क्लैश धुरंधर 2 से नहीं बल्कि अक्षय कुमार स्टारर हॉरर कॉमेडी फिल्म भूत बंगला से होगा। श्रुति हासन को किया था मृणाल ठाकुर ने रिप्लेस फिल्म डकैत में पहले श्रुति हासन लीड रोल निभाने वाली थीं, हालांकि क्रिएटिव डिफरेंस के चलते उन्होंने फिल्म छोड़ दी। उनके प्रोजेक्ट से हटने के बाद मृणाल ठाकुर ने उन्हें रिप्लेस किया था। यश की टॉक्सिक की भी रिलीज टली केजीएफ स्टार यश और कियारा आडवाणी की मोस्ट अवेडेट फिल्म टॉक्सिक पहले 19 मार्च को रिलीज की जाने वाली थी, हालांकि रिलीज से ठीक पहले मेकर्स ने इसे पोस्टपोन कर दिया है। हालांकि इसका कारण क्लैश नहीं बताया गया। मेकर्स की मानें तो इजरायल, अमेरिका और ईरान में चल रही जंग के चलते इसकी रिलीज टाली जा रही है। मेकर्स चाहते हैं कि फिल्म को वर्ल्डवाइड बड़े स्कैल में रिलीज किया जाए, लेकिन अगर इसे 19 मार्च को रिलीज किया जाता तो कई देशों में फिल्म रिलीज नहीं हो पाती। अब ये फिल्म 4 जून को वर्ल्डवाइड रिलीज होगी।
आसाराम ने रामलला का VIP दर्शन किया:अति विशिष्ट शंकराचार्य द्वार से 3 वाहनों के काफिले के साथ पहुंचा, हनुमानगढ़ी की सीढ़ियां नहीं चढ़ सका

अयोध्या पहुंचे नाबालिग से रेप केस में सजायफ्ता आसाराम ने बुधवार को रामलला का दर्शन किया। 3 वाहनों का काफिला आदि शंकराचार्य द्वार से राम मंदिर के अंदर पहुंचा। उसे विशिष्ट मेहमान की तरह रामलला का दर्शन कराया गया। हनुमानगढ़ी की सीढ़ियां अधिक होने के कारण वे वहां दर्शन करने नहीं जा सका। राममंदिर निर्माण के प्रभारी गोपाल जी ने आसराम को राम मंदिर के बारे में बताया। मंदिर निर्माण की जानकारी दी। आसाराम ने करीब 10 मिनट तक रामलला का दर्शन किया। इस दौरान रामलला की मोहिनी सूरत को अपलक निहारता रहा। मंदिर के सोने के दरवाजों और दीवारों पर उकेरी गई कलाकृतियों सहित मंदिर की भव्यता को निहारा। करीब 30 मिनट तक राममंदिर में बिताने के लक्ष्मण किला वापस आ गया। अयोध्या के बाद उसका अगला पड़ाव क्या होगा, इसकी जानकारी देने से सेवादार बच रहे हैं। जिस गेट से पीएम-सीएम को एंट्री, उसे से प्रवेश आसाराम को जिस आदि शंकराचार्य गेट से अंदर जाने की अनुमति मिली है, उससे केवल वीआईपी ही जाते हैं। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री इसी गेट से जाते हैं। बाकी श्रद्धालुओं को दूसरे गेट से एंट्री मिलती है। बिना राम मंदिर ट्रस्ट पुलिस और प्रशासन की अनुमति के कोई भी वहां वहां प्रवेश नहीं करता है। आसाराम के साथ 6 लोग दर्शन करने पहुंचे। जमानत पर 6 महीने के लिए जेल से बाहर दरअसल आसाराम मंगलवार शाम को ही अयोध्या पहुंचा है। वह सरयू तट पर घूमा। इस दौरान तमाम लोग उसके सामने हाथ जोड़ते नजर आए। इसी कड़ी में बुधवार की सुबह रामलला का दर्शन किया। आसाराम लक्ष्मण किला में रुका है। सरयू तट स्थित इस आचार्य पीठ में आसाराम का आवास भी सरयू के बेहद करीब है। आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर को 6 महीने की जमानत दी थी। इसके आधार पर 6 नवंबर को आसाराम को गुजरात हाई कोर्ट से भी 6 महीने की अंतरिम जमानत मिल गई थी। गुजरात हाईकोर्ट में आसाराम की ओर से जमानत की याचिका पर सुनवाई के दौरान दलील दी गई कि जोधपुर कोर्ट ने आसाराम को 6 महीने के लिए जमानत दी है। वे हृदय से संबंधित बीमारी से पीड़ित हैं। सरयू तट पर 300 मीटर तक पैदल घूमा आसाराम मंगलवार दोपहर 3 बजे झुनकी घाट से सद्गुरु कुटी तक पैदल घूमा। फिर कार से लक्ष्मण किला गया। यहां पर आराम किया। शाम करीब 6 बजे लक्ष्मण किला से बाहर निकला। यहां से सरयू तट पहुंचा। करीब 300 मीटर तक पैदल घूमा। इस दौरान उसके अनुयायियों ने उनके पैर छुए। अयोध्या में आसाराम ने कहा- भारत में कई ऐसे तीर्थ स्थान हैं, जहां प्राण त्यागने या जाने मात्र से मनुष्य का कल्याण होता है। शास्त्रों में सात मोक्षदायी स्थान बताए गए हैं। इनमें अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, कांची, अवंतिका और पुरी हैं। मानव शरीर में वात, कफ और पित्त तीन दोष होते हैं और तीर्थ स्थलों पर जाने से इन दोषों का प्रभाव कम होता है। शास्त्रों में अयोध्या को पहला स्थान है। मथुरा में रहने वाला व्यक्ति चाहे साधु के वेश में रहा हो, लेकिन साधु का दायित्व न निभाया हो, फिर भी वहां मृत्यु होने पर उसे नरक नहीं जाना पड़ता है। अब पढ़िए आसाराम को उम्रकैद क्यों हुई… भूत-प्रेत का साया बताकर लड़की से आश्रम में रेप किया यूपी में शाहजहांपुर में रहने वाला एक परिवार आसाराम का अनुयायी था। परिवार की नाबालिग लड़की आसाराम के छिंदवाड़ा (मध्यप्रदेश) स्थित आश्रम में 12वीं की पढ़ाई कर रही थी। साल-2013 की बात है। एक दिन लड़की क्लास में बेहोश हो गई। बाबा के साधक ने उस पर भूत-प्रेत का साया बताया और कहा कि इसका इलाज आसाराम बापू ही करेंगे। इसके बाद 14 अगस्त, 2013 को लड़की को छिंदवाड़ा से करीब 1 हजार किलोमीटर दूर जोधपुर के मनई आश्रम में ले जाया गया। 15 अगस्त, 2013 की रात कुटिया में रसोइया एक गिलास दूध लेकर आया। इसके बाद आसाराम ने लड़की से रेप किया। इस वारदात के 5 दिन बाद यानी 20 अगस्त, 2013 को पीड़ित लड़की ने दिल्ली पुलिस में FIR दर्ज कराई। इसमें पीड़ित लड़की ने बताया कि आसाराम ने उससे ओरल सेक्स करने को कहा और गलत तरीके से भी छुआ। दिल्ली के निर्भया रेप केस की वजह से उस वक्त तक रेप-छेड़खानी के नए कानून लागू हो चुके थे। इसलिए आसाराम पर नए कानून के तहत कठोर धाराएं लगीं। 31 मार्च, 2013 को इस मामले में आसाराम गिरफ्तार हो गया। 25 अप्रैल, 2018 को जोधपुर की अदालत ने इस मामले में दोषी आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। तभी से आसाराम सेंट्रल जेल जोधपुर में बंद है। इतने साल में आसाराम पहली बार पैरोल पर बाहर आया है। 7 जनवरी, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल बेस पर उसको 31 मार्च, 2025 तक जमानत दी थी। फिर राजस्थान और गुजरात हाईकोर्ट से मिली थी राहत जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर को आसाराम को बढ़ती उम्र और लगातार गिरते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए इलाज के लिए 6 महीने की अंतरिम जमानत दी थी। इसी आदेश के आधार पर 6 नवंबर को गुजरात हाईकोर्ट ने भी रेप के एक अन्य मामले में उसे जमानत दे दी थी। लेकिन, उसमें आसाराम के साथ तीन पुलिसकर्मी रखने और समूह में साधकों से नहीं मिलने की शर्त भी थी। इन दोनों शर्तों को हटाने के लिए आसाराम की ओर से दोबारा गुजरात हाईकोर्ट में अर्जी लगाई गई थी। …………………. ये खबर भी पढ़िए- ‘आसाराम को कोई बीमारी नहीं’:यूपी की रेप विक्टिम के पिता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, बोले- बाहर रहने से जान का खतरा यूपी की रहने वाली रेप पीड़िता के पिता आसाराम की जमानत रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। पिता ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें आसाराम को इलाज के लिए 6 महीने की जमानत मिली है। पीड़िता के पिता ने कहा, आसाराम पूरी तरह स्वस्थ है। उसे कोई बीमारी नहीं है। वह ऋषिकेश से लेकर महाराष्ट्र तक घूम रहा है। पिता ने कहा, उसे आम कैदियों की तरह जेल में ही इलाज मिलना चाहिए। पढ़ें पूरी खबर
नवजात को छह दिन बाद मिली मां की गोद:परिजन नहीं पहुंचे तो डॉक्टरों ने संभाली जिम्मेदारी, कम वजन के कारण हुई थी भर्ती

दतिया जिला अस्पताल में छह दिनों से भर्ती 15 दिन की एक नवजात बच्ची आखिरकार मंगलवार को अपनी मां की गोद में पहुंच गई। बच्ची को 4 मार्च को कम वजन और सांस लेने में परेशानी के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ समय बाद परिजन घर चले गए और कई दिनों तक अस्पताल नहीं पहुंचे। इस दौरान डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने ही बच्ची की देखभाल की। डॉक्टरों की निगरानी में रखा जानकारी के अनुसार संध्या पत्नी आशीष की नवजात बेटी को जन्म के बाद स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के कारण जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बच्ची का वजन सामान्य से कम था और उसे सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। इसी वजह से डॉक्टरों ने उसे विशेष निगरानी में रखा। कई दिनों तक अस्पताल नहीं पहुंचे परिजन भर्ती के बाद कुछ समय तक परिजन अस्पताल में मौजूद रहे, लेकिन बाद में वे घर चले गए और कई दिनों तक वापस नहीं आए। इस दौरान अस्पताल के डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ लगातार बच्ची की जांच करते रहे और उसे जरूरी इलाज देते रहे। अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों से संपर्क करने की भी कोशिश की, ताकि वे बच्ची के पास आ सकें। पिता के आने के बाद मां को बुलाया गया सोमवार शाम बच्ची के पिता आशीष अस्पताल पहुंचे थे। उस समय अस्पताल स्टाफ ने उन्हें बताया कि नवजात को मां की देखभाल की जरूरत है। इसके बाद उन्हें मां को भी अस्पताल लाने के लिए कहा गया। मंगलवार शाम बच्ची की मां संध्या जिला अस्पताल पहुंची। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने नवजात को उसकी मां को सौंप दिया। डॉक्टरों ने मां को बच्ची की देखभाल और नियमित रूप से दूध पिलाने की सलाह दी। डॉक्टरों का कहना है कि जन्म के बाद कम वजन वाले नवजातों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। ऐसे बच्चों के लिए मां की मौजूदगी बहुत जरूरी होती है, क्योंकि मां के दूध और देखभाल से बच्चे की सेहत में जल्दी सुधार होता है। फिलहाल बच्ची की हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टर उसकी निगरानी कर रहे हैं।
Raipur Air Force Wing Commander Suicide

रायपुर9 मिनट पहले कॉपी लिंक विधायक कॉलोनी स्थित इसी मकान में विंग कमांडर की लाश मिली है। रायपुर में एयरफोर्स के विंग कमांडर ने सुसाइड कर लिया है। पुरैना स्थित विधायक कॉलोनी में विंग कमांडर की घर के अंदर फांसी पर लटकती लाश मिली है। पुलिस के मुताबिक, एयरफोर्स विपुल यादव (39) ने पुरैना विधायक कॉलोनी स्थित बंगला नंबर-79 में घर के कमरे में फांसी लगा ली। वो मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले थे और फिलहाल रायपुर में तैनात थे। विंग कमांडर छत्तीसगढ़ में एंटी नक्सल ऑपरेशन के लिए पदस्थ थे। सुबह उनके घर में बेडरूम में उनका शव पंखे से लटका मिला। सबसे पहले घर की मेड ने देखा और पुलिस को सूचना दी। कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। उस समय दूसरे कमरे में उनके दोनों बच्चे सो रहे थे, जबकि उनकी पत्नी काम के सिलसिले में दिल्ली गई हुई थीं। दोनों की 2014 में लव मैरिज हुई थी। पत्नी पहले एयरफोर्स में काम करती थीं और फिलहाल आईटी सेक्टर में कार्यरत हैं। शुरुआती तौर पर पत्नी से विवाद में आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है। वजह अभी तक स्पष्ट नहीं पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। घटना के कारणों का अभी तक स्पष्ट खुलासा नहीं हो पाया है। पुलिस परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। पीएम रिपोर्ट का इंतजार पुलिस अधिकारियों का कहना है कि, सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। फिलहाल, आत्महत्या के पीछे की वजह सामने नहीं आई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ……………………….. इससे संबंधित यह खबर भी पढ़िए… कांग्रेस प्रवक्ता की भतीजी ने लगाई फांसी..लिखा-SORRY मम्मी-पापा:दुर्ग में 11वीं की पढ़ाई कर रही थी छात्रा, इंस्टाग्राम ID डिलीट की, सरकारी कर्मचारी हैं माता-पिता दुर्ग में 11वीं की छात्रा ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक 16 साल की लड़की ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में लिखा- सॉरी मम्मी-पापा। मैं जो कर रही हूं, वह सही नहीं है, लेकिन फिर भी मैं आत्महत्या कर रही हूं। प्लीज मुझे माफ कर देना। मैं एक अच्छी बेटी नहीं बन पाई। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…









