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गोल्डमैन सैक्स ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान घटाया:2026 के लिए 7% से 5.9% किया; युद्ध-कच्चे तेल की कीमतों के चलते रेपो रेट 0.50% बढ़ने के आसार

गोल्डमैन सैक्स ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान घटाया:2026 के लिए 7% से 5.9% किया; युद्ध-कच्चे तेल की कीमतों के चलते रेपो रेट 0.50% बढ़ने के आसार

ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स ने साल 2026 के लिए भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ का अनुमान घटा दिया है। बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की GDP ग्रोथ अब 5.9% रहने की उम्मीद है, जो कि ईरान युद्ध से पहले लगाए गए 7% के अनुमान से काफी कम है। गोल्डमैन ने चेतावनी दी है कि रुपए की कमजोरी और महंगाई को काबू करने के लिए RBI को ब्याज दरों में 0.50% (50 बेसिस पॉइंट्स) की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। कच्चे तेल की कीमतों ने कैलकुलेशन बिगाड़ा गोल्डमैन सैक्स ने ग्रोथ अनुमान में कटौती की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई में आ रही दिक्कतों को बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सप्लाई अप्रैल के मध्य तक बंद रह सकती है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से देश का विदेशी मुद्रा भंडार, राजकोषीय घाटा और महंगाई तीनों पर बुरा असर पड़ता है। ब्रेंट क्रूड $115 तक जा सकता है बैंक के एनालिस्ट्स का मानना है कि मार्च में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत $105 और अप्रैल में $115 प्रति बैरल रह सकती है। हालांकि, साल की चौथी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) तक इसके गिरकर $80 प्रति बैरल पर आने की उम्मीद है। इसी अस्थिरता को देखते हुए गोल्डमैन ने 13 मार्च को भी भारत की ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.5% किया था, जिसे अब और कम कर दिया गया है। महंगाई 4.6% तक पहुंचने का अनुमान गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, भारत में महंगाई दर 2026 में 4.6% तक जा सकती है। इससे पहले बैंक ने इसके 3.9% रहने का अनुमान जताया था। हालांकि, यह अभी भी रिजर्व बैंक के 2% से 6% के कंफर्ट जोन में है, लेकिन रुपए की गिरती वैल्यू RBI की चिंता बढ़ा सकती है। 0.50% तक बढ़ सकती है ब्याज दर रिपोर्ट में कहा गया है कि गिरते रुपये को सहारा देने और महंगाई के ‘सेकंड राउंड इफेक्ट’ को रोकने के लिए RBI रेपो रेट में 0.50% की बढ़ोतरी कर सकता है। बाजार के जानकारों का तो यहां तक मानना है कि आने वाले एक साल में 0.25-0.25% की 3 से 4 बढ़ोतरी (कुल 0.75% से 1%) देखने को मिल सकती है। डॉलर के मुकाबले 4% टूटा रुपया भारतीय रुपया इस साल (2026) अब तक डॉलर के मुकाबले 4% कमजोर हो चुका है। पिछले साल भी इसमें 4.7% की गिरावट देखी गई थी। जब रुपया कमजोर होता है, तो आयात महंगा हो जाता है, जिससे रिटेल मार्केट में चीजों के दाम बढ़ जाते हैं। करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ेगा गोल्डमैन ने अनुमान लगाया है कि 2026 में भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट जीडीपी का 2% तक पहुंच सकता है। अक्टूबर-दिसंबर 2025 की तिमाही में यह 1.3% था। तेल की ऊंची कीमतें सीधे तौर पर इस घाटे को बढ़ाने का काम करती हैं। क्या है ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ और यह क्यों जरूरी है? यह ओमान और ईरान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान युद्ध या किसी भी तनाव की स्थिति में अगर यह रास्ता बंद होता है, तो ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई रुक जाती है और कीमतें तेजी से बढ़ती हैं। GDP क्या है? इकोनॉमी की हेल्थ को ट्रैक करने के लिए GDP का इस्तेमाल होता है। ये देश के भीतर एक तय समय में बनाए गए सभी गुड्स और सर्विस की वैल्यू को दिखाती है। इसमें देश की सीमा के अंदर रहकर जो विदेशी कंपनियां प्रोडक्शन करती हैं उन्हें भी शामिल किया जाता है। दो तरह की होती है GDP GDP दो तरह की होती है। रियल GDP और नॉमिनल GDP। रियल GDP में गुड्स और सर्विस की वैल्यू का कैलकुलेशन बेस ईयर की वैल्यू या स्टेबल प्राइस पर किया जाता है। फिलहाल GDP को कैलकुलेट करने के लिए बेस ईयर 2011-12 है। वहीं नॉमिनल GDP का कैलकुलेशन करंट प्राइस पर किया जाता है। कैसे कैलकुलेट की जाती है GDP? GDP को कैलकुलेट करने के लिए एक फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जाता है। GDP=C+G+I+NX, यहां C का मतलब है प्राइवेट कंजम्प्शन, G का मतलब गवर्नमेंट स्पेंडिंग, I का मतलब इन्वेस्टमेंट और NX का मतलब नेट एक्सपोर्ट है। GDP की घट-बढ़ के लिए जिम्मेदार कौन है? GDP को घटाने या बढ़ाने के लिए चार इम्पॉर्टेंट इंजन होते हैं। पहला है, आप और हम। आप जितना खर्च करते हैं, वो हमारी इकोनॉमी में योगदान देता है। दूसरा है, प्राइवेट सेक्टर की बिजनेस ग्रोथ। ये GDP में 32% योगदान देती है। तीसरा है, सरकारी खर्च। इसका मतलब है गुड्स और सर्विसेस प्रोड्यूस करने में सरकार कितना खर्च कर रही है। इसका GDP में 11% योगदान है। और चौथा है, नेट डिमांड। इसके लिए भारत के कुल एक्सपोर्ट को कुल इम्पोर्ट से घटाया जाता है, क्योंकि भारत में एक्सपोर्ट के मुकाबले इम्पोर्ट ज्यादा है, इसलिए इसका इम्पैक्ट GPD पर नेगेटिव ही पड़ता है। ये खबर भी पढ़ें… सोने ₹56 रुपए घटा, 10 ग्राम की कीमत ₹1.39 लाख: चांदी में ₹1 हजार रुपए की तेजी, दाम 2.20 लाख रुपए प्रति किलो पर पहुंचे सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 24 मार्च को मामूली उतार-चढ़ाव है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 56 रुपए गिरकर 1.39 लाख रुपए के करीब है। चांदी में 1093 रुपए की तेजी है। ये 2.20 लाख रुपए प्रति किलो पर है। पूरी खबर पढ़ें…

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गोल्डमैन सैक्स ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान घटाया:2026 के लिए 7% से 5.9% किया; युद्ध-कच्चे तेल की कीमतों के चलते रेपो रेट 0.50% बढ़ने के आसार

ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स ने साल 2026 के लिए भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ का अनुमान घटा दिया है। बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की GDP ग्रोथ अब 5.9% रहने की उम्मीद है, जो कि ईरान युद्ध से पहले लगाए गए 7% के अनुमान से काफी कम है। गोल्डमैन ने चेतावनी दी है कि रुपए की कमजोरी और महंगाई को काबू करने के लिए RBI को ब्याज दरों में 0.50% (50 बेसिस पॉइंट्स) की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। कच्चे तेल की कीमतों ने कैलकुलेशन बिगाड़ा गोल्डमैन सैक्स ने ग्रोथ अनुमान में कटौती की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई में आ रही दिक्कतों को बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सप्लाई अप्रैल के मध्य तक बंद रह सकती है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से देश का विदेशी मुद्रा भंडार, राजकोषीय घाटा और महंगाई तीनों पर बुरा असर पड़ता है। ब्रेंट क्रूड $115 तक जा सकता है बैंक के एनालिस्ट्स का मानना है कि मार्च में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत $105 और अप्रैल में $115 प्रति बैरल रह सकती है। हालांकि, साल की चौथी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) तक इसके गिरकर $80 प्रति बैरल पर आने की उम्मीद है। इसी अस्थिरता को देखते हुए गोल्डमैन ने 13 मार्च को भी भारत की ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.5% किया था, जिसे अब और कम कर दिया गया है। महंगाई 4.6% तक पहुंचने का अनुमान गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, भारत में महंगाई दर 2026 में 4.6% तक जा सकती है। इससे पहले बैंक ने इसके 3.9% रहने का अनुमान जताया था। हालांकि, यह अभी भी रिजर्व बैंक के 2% से 6% के कंफर्ट जोन में है, लेकिन रुपए की गिरती वैल्यू RBI की चिंता बढ़ा सकती है। 0.50% तक बढ़ सकती है ब्याज दर रिपोर्ट में कहा गया है कि गिरते रुपये को सहारा देने और महंगाई के ‘सेकंड राउंड इफेक्ट’ को रोकने के लिए RBI रेपो रेट में 0.50% की बढ़ोतरी कर सकता है। बाजार के जानकारों का तो यहां तक मानना है कि आने वाले एक साल में 0.25-0.25% की 3 से 4 बढ़ोतरी (कुल 0.75% से 1%) देखने को मिल सकती है। डॉलर के मुकाबले 4% टूटा रुपया भारतीय रुपया इस साल (2026) अब तक डॉलर के मुकाबले 4% कमजोर हो चुका है। पिछले साल भी इसमें 4.7% की गिरावट देखी गई थी। जब रुपया कमजोर होता है, तो आयात महंगा हो जाता है, जिससे रिटेल मार्केट में चीजों के दाम बढ़ जाते हैं। करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ेगा गोल्डमैन ने अनुमान लगाया है कि 2026 में भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट जीडीपी का 2% तक पहुंच सकता है। अक्टूबर-दिसंबर 2025 की तिमाही में यह 1.3% था। तेल की ऊंची कीमतें सीधे तौर पर इस घाटे को बढ़ाने का काम करती हैं। क्या है ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ और यह क्यों जरूरी है? यह ओमान और ईरान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान युद्ध या किसी भी तनाव की स्थिति में अगर यह रास्ता बंद होता है, तो ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई रुक जाती है और कीमतें तेजी से बढ़ती हैं। GDP क्या है? इकोनॉमी की हेल्थ को ट्रैक करने के लिए GDP का इस्तेमाल होता है। ये देश के भीतर एक तय समय में बनाए गए सभी गुड्स और सर्विस की वैल्यू को दिखाती है। इसमें देश की सीमा के अंदर रहकर जो विदेशी कंपनियां प्रोडक्शन करती हैं उन्हें भी शामिल किया जाता है। दो तरह की होती है GDP GDP दो तरह की होती है। रियल GDP और नॉमिनल GDP। रियल GDP में गुड्स और सर्विस की वैल्यू का कैलकुलेशन बेस ईयर की वैल्यू या स्टेबल प्राइस पर किया जाता है। फिलहाल GDP को कैलकुलेट करने के लिए बेस ईयर 2011-12 है। वहीं नॉमिनल GDP का कैलकुलेशन करंट प्राइस पर किया जाता है। कैसे कैलकुलेट की जाती है GDP? GDP को कैलकुलेट करने के लिए एक फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जाता है। GDP=C+G+I+NX, यहां C का मतलब है प्राइवेट कंजम्प्शन, G का मतलब गवर्नमेंट स्पेंडिंग, I का मतलब इन्वेस्टमेंट और NX का मतलब नेट एक्सपोर्ट है। GDP की घट-बढ़ के लिए जिम्मेदार कौन है? GDP को घटाने या बढ़ाने के लिए चार इम्पॉर्टेंट इंजन होते हैं। पहला है, आप और हम। आप जितना खर्च करते हैं, वो हमारी इकोनॉमी में योगदान देता है। दूसरा है, प्राइवेट सेक्टर की बिजनेस ग्रोथ। ये GDP में 32% योगदान देती है। तीसरा है, सरकारी खर्च। इसका मतलब है गुड्स और सर्विसेस प्रोड्यूस करने में सरकार कितना खर्च कर रही है। इसका GDP में 11% योगदान है। और चौथा है, नेट डिमांड। इसके लिए भारत के कुल एक्सपोर्ट को कुल इम्पोर्ट से घटाया जाता है, क्योंकि भारत में एक्सपोर्ट के मुकाबले इम्पोर्ट ज्यादा है, इसलिए इसका इम्पैक्ट GPD पर नेगेटिव ही पड़ता है। ये खबर भी पढ़ें… सोने ₹56 रुपए घटा, 10 ग्राम की कीमत ₹1.39 लाख: चांदी में ₹1 हजार रुपए की तेजी, दाम 2.20 लाख रुपए प्रति किलो पर पहुंचे सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 24 मार्च को मामूली उतार-चढ़ाव है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 56 रुपए गिरकर 1.39 लाख रुपए के करीब है। चांदी में 1093 रुपए की तेजी है। ये 2.20 लाख रुपए प्रति किलो पर है। पूरी खबर पढ़ें…

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